Saturday, July 4, 2026 10:35 am

भ्रष्ट ठेकेदार का कारनामा उजागर, विधायक ने गुणवत्ताहीन निर्माण को तुड़वाया

सीतापुर. भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो कुछ दिनों से एक अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपने क्षेत्र में जारी विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले और भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। विधायक टोप्पो मंगलवार को मैनपाट ब्लॉक के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य पाए जाने पर विधायक ने तत्काल उसे तुड़वाया और दोबारा निर्माण करने का आदेश जारी किया। इस दौरान विधायक टोप्पो ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि, निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्र के विकास से जुड़ा मामला है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए विधायक रामकुमार टोप्पो ग्राम ग्राम करमहा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सड़क किनारे चल रहे रिटर्निंग वॉल के निर्माण का निरीक्षण किया और रिटर्निंग वॉल की बारीकी से जांच की। दीवार के निर्माण में गुणवत्ता की कमी और घटिया सामग्री का उपयोग देखकर विधायक आक्रोशित हो गए। विधायक रामकुमार टोप्पो ने निरीक्षण के दौरान ही अधिकारियों को इस निर्माण कार्य को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से मानक स्तर पर बनाने का निर्देश दे दिया। रिटर्निंग वॉल के निरीक्षण के बाद विधायक टोप्पो ग्राम करमहा में ही सड़क पर बने एक नवनिर्मित पुल का निरीक्षण पहुंचे। इस दौरान उन्हें वहाँ भी खामियां नजर आई। विधायक रामकुमार टोप्पो ने पुल को भी तत्काल प्रभाव से तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। विधायक टोप्पो के इस अवतार को देखे क्षेत्र के ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।   recent visitors 24

एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

भोपाल  मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार सुबह घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। ग्वालियर में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है।  बुधवार सुबह ग्वालियर के अलावा दतिया, रीवा, रतलाम, उज्जैन, दमोह, नौगांव, सीधी, भोपाल, इंदौर, राजगढ़, खजुराहो, गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सागर, टीकमगढ़, मलाजखंड, शाजापुर, छतरपुर, विदिशा, आगर-मालवा, सीहोर, भिंड और मुरैना समेत कई जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखने को मिला। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ। राजगढ़ सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस कोहरे के कारण शाजापुर जिले के अकोदिया-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर कार और बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं विदिशा में सुबह हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरे के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, हालांकि रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री, ग्वालियर में 13.1, उज्जैन में 14 और जबलपुर में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में पारा 10 से 16 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम, दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर, जबकि भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में एक किलोमीटर से ज्यादा रही। रेल यातायात पर पड़े असर के चलते पंजाब मेल 3 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस करीब 3 घंटे, कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे से अधिक और मालवा एक्सप्रेस 8 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है। recent visitors 28

बलूचिस्तान संकट: बवाल के बावजूद US और चीन क्यों बने हुए हैं गवाह?

बलूचिस्तान बलोचों के मुस्लिम भर होने से कलात (बलूचिस्तान) को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बन जाना चाहिए… 27 मार्च 1948 को जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने बलूचिस्तान को जबरन कब्जाया तो इसका काफी विरोध हुआ. जिन्ना अपनी ही बातों से मुकर गए. जिस जिन्ना ने बलूचिस्तान को स्वायत्त रहने देने की सलाह दी थी, उन्होंने ही जबरन आजाद बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया.  पाकिस्तानी इतिहासकार याकूब खान बंगाश अपनी किताब, 'अ प्रिंसली अफेयर' में लिखते हैं, 'आजाद रहने के प्रतिरोध को पाकिस्तान की सरकार ने कुचल दिया और बलपूर्वक कलात को अपने में मिला लिया.' पाकिस्तान जब आजाद हुआ तब कलात को अलग स्वायत्त प्रदेश की मान्यता मिली थी. 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में बलूचिस्तान एक अलग देश बना लेकिन उसकी सुरक्षा पाकिस्तान के जिम्मे दी गई. 12 अगस्त को बलूचिस्तान के शासक मीर अहमद खान ने अपनी रियासत को एक आजाद देश घोषित किया. लेकिन बलूचिस्तान की आजादी महज 227 दिनों की मेहमान थी.  27 मार्च 1948 को मीर अहमद खान से पाकिस्तान में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए. उसी दिन से बलूचिस्तान में हिंसा और टकराव का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज भी थमा नहीं है. बीएलए के हमलों से दहल उठा पाकिस्तान बीते शुक्रवार रात को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे हथियारबंद समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने प्रांत के करीब एक दर्जन ठिकानों को सिलसिलेवार तरीके से निशाना बनाया. हमले अगले दिन भी जारी रहे और एक के बाद एक हुए इन धमाकों से पाकिस्तान दहल उठा. करीब 200 बीएलए लड़ाके, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने छोटे-छोटे समूहों में बंटकर एक साथ आत्मघाती धमाके और गोलीबारी की. पुलिस थानों, लोगों के घरों और सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. बीएलए का दावा है कि उसके हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कहा जा रहा है कि हमले में 17 सैनिक और 31 नागरिक मरे हैं.  पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में विद्रोही लड़ाकों को भारी नुकसान पहुंचा है. सेना की कार्रवाई में 177 बीएलए लड़ाके मारे गए हैं.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले पर बोलते हुए सोमवार को कहा कि बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती जरूरी है. पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर आसिफ ने कहा, 'भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान के 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे कंट्रोल करना किसी घनी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है. ऐसी जगह को कंट्रोल करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की जरूरत होती है. हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की निगरानी और वहां पेट्रोलिंग करना बेहद चुनौती भरा है.' ये वही बलूचिस्तान है जिसके कीमती पत्थर देख ट्रंप की आंखों में आ गई चमक पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अमेरिका पहुंचे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों से मुलाकात की. इस दौरान मुनीर ने शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप के सामने एक ब्रीफकेस खोला… ब्रीफकेस खुलते ही बिजनेसमैन राष्ट्रपति ट्रंप की आंखें चमक उठीं. अंदर चमकते कीमती पत्थरों और खनिजों का एक सेट था. मुनीर का यह गिफ्ट ट्रंप को पाकिस्तान की ताजा पेशकश का हिस्सा था. मतलब साफ था कि पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों को अमेरिकी निवेश के लिए खोलने को तैयार है. पाकिस्तान के खनिज संसाधन यानी बलूचिस्तान के खनिज संसाधन. गैस, सोने, तांबे की खान है बलूचिस्तान बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांत है. पाकिस्तान की कुल जमीन का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान है जहां पाकिस्तान के गैस, कोयला, सोना, तांबा का अधिकांश रिजर्व है. बलूचिस्तान में कीमती पत्थरों की भी भरमार है और पाकिस्तान के कुल कीमती पत्थरों का 90% हिस्सा यही से निकाला जाता है. यहां के संगमरमर काफी मशहूर है जो हाई क्वालिटी के होते हैं. जियारत व्हाइट, ब्लैक एंड गोल्ड मार्बल यहां की पहचान हैं. बलूचिस्तान में रेयर अर्थ मिनरल्स के भी बड़े भंडार हैं. पाकिस्तान के कुल खनिज संसाधनों का 75% हिस्सा बलूचिस्तान से निकाला जाता है. लेकिन इन संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सरकार के पास जाता है. बलूचिस्तान का ईरान और अफगानिस्तान एंगल बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बावजूद इसके, यहां की आबादी काफी कम है. पाकिस्तान की 25 करोड़ आबादी का केवल छह फीसद हिस्सा यहां रहता है. बलूचिस्तान में बलूच जनजाति की बहुलता है जो यहां के स्थानीय निवासी हैं. कुछ संख्या में पश्तून भी बलूचिस्तान में रहते हैं.  बलूचिस्तान क्षेत्र तीन देशों के बीच बंटा है जिसमें पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत, ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार शामिल हैं. दोनों देशों से लगती बलूचिस्तान की सीमाएं हमेशा से अस्थिर रही हैं. ईरान और पाकिस्तान के बीच यूं तो भाईचारे वाला संबंध रहा है लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर बलूच विद्रोहियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित विद्रोही समूहों को लेकर पाकिस्तान और बलूचिस्तान स्थित समूहों को लेकर ईरान एक-दूसरे पर दोष मढ़ते रहते हैं. इसी लड़ाई को लेकर 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. ईरान का दावा था कि उसने बलोच सुन्नी मिलिटेंट समूह जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया क्योंकि वो ईरान पर हमले कर रहा है.  जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में रॉकेट और मिसाइलों से हमले किए. पाकिस्तान ने दावा किया कि ये हमले उसने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के ईरान स्थित ठिकानों पर किए हैं. इन हमलों से दोनों देशों में भारी तनाव देखा गया था. अफगानिस्तान से लगती बलूचिस्तान की सीमा भी लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है.  पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर आरोप लगाता रहा है कि वो इन सीमाओं से आतंकियों की आवाजाही रोकने में नाकाम रहा है. बलूचिस्तान में अशांति को लेकर पाकिस्तान कभी अफगानिस्तान तो कभी भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाता है लेकिन वो … Read more

सिनेमा की दुनिया को कहा अलविदा, उर्मिला मातोंडकर की अपनी पसंद से बनी दूरी

मुंबई बॉलीवुड में सफलता अक्सर कलाकारों को लंबे समय तक बांध कर रखती है। जब कोई कलाकार लोकप्रियता, कमाई और दर्शकों के प्यार तीनों के शिखर पर होता है तो आमतौर पर वह उस दौर को जितना हो सके, उतना लंबा खींचना चाहता है, लेकिन हिंदी सिनेमा में कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्होंने ठीक उसी वक्त फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला लिया, और इन्हीं नामों में एक नाम है उर्मिला मातोंडकर का। जब उनका करियर अपने सबसे सुनहरे दौर में था, तभी उन्होंने पर्दे से ब्रेक ले लिया। उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ। उन्हें बचपन से ही अभिनय में दिलचस्पी थी। बहुत कम उम्र में उन्होंने कैमरे का सामना कर लिया था। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'कर्म' से बतौर बाल कलाकार काम शुरू किया। इसके बाद वह 'मासूम' में नजर आईं। पढ़ाई के साथ-साथ वह अभिनय करती रहीं और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। बतौर लीड एक्ट्रेस उर्मिला को असली पहचान साल 1995 में आई फिल्म 'रंगीला' से मिली। इस फिल्म ने उनकी पूरी किस्मत बदल दी। आमिर खान और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारों के बीच भी उर्मिला सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। उनके डांस, आत्मविश्वास और नए अंदाज ने दर्शकों को दीवाना बना दिया। इसी फिल्म के बाद वह 'रंगीला गर्ल' कहलाने लगीं। 'रंगीला' को कई बड़े पुरस्कार मिले और उर्मिला को भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला। 'रंगीला' के बाद उर्मिला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'सत्या', 'कौन', 'मस्त', 'दौड़' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने गंभीर और सशक्त भूमिकाओं में भी खुद को साबित किया। एक समय ऐसा आया जब उनकी फिल्मों की सफलता के कारण वह कई फिल्मों में अपने हीरो से ज्यादा फीस लेने लगी थीं। सबसे चौंकाने वाला फैसला तब आया, जब उर्मिला ने अपने करियर के पीक पर ही फिल्मों से दूरी बना ली। जिस उम्र में अभिनेत्रियां अपने करियर को और मजबूत करती हैं, उसी उम्र में उर्मिला ने कैमरे से पीछे हटना चुना। यह फैसला न तो किसी मजबूरी का नतीजा था और न ही असफलता का, बल्कि उनकी अपनी सोच और मानसिक शांति से जुड़ा हुआ था। फिल्मों से दूर होने के बाद उर्मिला ने साल 2016 में मोहसिन अख्तर मीर से शादी की। बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। हालांकि, राजनीति में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी फिल्मों में मिली थी, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद तय की। recent visitors 25

कर्नाटक शराब घोटाला: विधायकों की रातभर की विधानसभा पैदल मार्च और प्रदर्शन की नाटकीय कहानी

बेंगलुरु भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) के विधायकों ने कथित शराब घोटाले को लेकर आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कर्नाटक विधानसभा में रात गुजारी। बुधवार सुबह भी भाजपा-जेडीएस विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष व विधायक बीवाई विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक समेत कई विधायक विधानसभा परिसर में मॉर्निंग वॉक करते हुए नजर आए। बाद में सभी विधायक एक जगह इकट्ठा हुए, चाय पी और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की। कुछ देर बाद विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हुआ, जिसमें भाजपा और जेडीएस के विधायक विधानसभा के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर बैठ गए और एक्साइज मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। उन्होंने गाने भी गाए और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। भाजपा विधायक चन्नाबसप्पा ने एक भक्ति गीत भी गाया। विजयेंद्र, अशोक और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेल्लाड समेत अन्य विधायक भी उनके साथ शामिल हुए। कथित शराब घोटाले के केस में भाजपा-जेडीएस के विधायक राज्य के आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर का इस्तीफा मांग रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक के इतिहास में पहली बार शराब एसोसिएशन ने खुद एक्साइज डिपार्टमेंट में 6,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री हर महीने 250 करोड़ से 300 करोड़ रुपए वसूल रहे थे। उनके मुताबिक, हर डिप्टी कमिश्नर की पोस्ट के लिए कथित तौर पर 2 करोड़ रुपए और कांस्टेबल लेवल की पोस्टिंग के लिए भी 10 लाख रुपए लिए जा रहे थे। आर. अशोक ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर एक डिप्टी कमिश्नर ने कहा था कि मंत्रियों को 'कट' देना पड़ता है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की गई है। अशोका ने आरोप लगाया, "इन सबके बावजूद मंत्री सबूत मांग रहे हैं और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जिनके पास वित्त मंत्रालय भी है, सहित पूरी सरकार उनका साथ दे रही है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस हाईकमान के पास बहुत सारा पैसा पहुंच रहा है। चुनावों के लिए यह भारी भरकम 6,000 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है। हम धरना दे रहे हैं और जब तक एक्साइज मंत्री थिम्मापुर इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।" recent visitors 41

नर्मदा की सुरक्षा पर हाई अलर्ट, NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस

भोपाल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने पर्यावरण के प्रधान सचिव को नर्मदा नदी को साफ रखने के लिए दिए गए निर्देशों पर एक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट विभिन्न एजेंसियों, विभागों, जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों से संकलित की जाएगी। NGT ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। नर्मदा को जीवन रेखा बनाए रखने के लिए निर्देश NGT ने नर्मदा नदी के बाढ़ क्षेत्र को चिह्नित करने, उस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, नदी में बिना उपचारित सीवेज और ठोस कचरा बहाने पर रोक लगाने, अवैध रेत खनन बंद करने और पूरे साल नदी के प्रवाह को स्थिर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवन रेखा बनाए रखने के लिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई यह अनुपालन रिपोर्ट 1 सितंबर, 2025 को NGT द्वारा जारी आदेश के अनुसार तैयार की जानी है। यह रिपोर्ट याचिकाकर्ता कीर्ति कुमार सदाशिव भट्ट की याचिका पर आधारित है। रिपोर्ट को NGT के रजिस्ट्रार को सौंपा जाएगा, जो इसे ट्रिब्यूनल के सामने पेश करेंगे। इसके बाद, रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निष्पादन याचिका पर सुनवाई NGT ने यह टिप्पणी जबलपुर की सामाजिक कार्यकर्ता पी.जी. नज्पांडे द्वारा दायर एक निष्पादन याचिका पर सुनवाई करते हुए की। NGT यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके द्वारा जारी किए गए निर्देशों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं। इसी के लिए NGT ने अब मुख्य सचिव (पर्यावरण) को इस मामले में निर्देशित किया है।   recent visitors 29

मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना की निजी जिंदगी में तूफ़ान, पति ने किया तीन तलाक

सआदतगंज दिवंगत मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना को उनके पति ने तीन तलाक दे दिया. सआदतगंज पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई है. हिबा राना ने अपने पति मोहम्मद साकिब और ससुर हसीब अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. 2013 में सुन्नी रीति रिवाज से हुई हिबा राना की शादी मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना की शादी साल 2013 में सुन्नी रीति रिवाज के अनुसार हुई थी. एफआईआर की कॉपी के मुताबिक शादी में दहेज के रूप में पिता और घरवालों ने साकिब को सोने और हीरे के गहनों के अलावा 10 लाख रुपये भी दिए थे. दहेज लोभियों ने की 20 लाख रुपये और देने की मांग थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक जब हिबा राना शादी के बाद विदा होकर ससुराल गई तो साकिब और उसके पिता की ओर से बीस लाख रुपये और देने की मांग की जाने लगी. कई बार दहेज लोभियों की मांग पूरी भी की गई ताकि वैवाहिक जीवन पर खराब असर न पड़े. हिबा राना और साकिब के दो बच्चे हैं. एक बेटा और बेटी है. साकिब आए दिन अपनी पत्नी हिबा राना के साथ मारपीट भी करता था. तीन बार तलाक देते हुए हिबा राना को घर से निकाला एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि 9 अप्रैल 2025 को हिबा राना के साथ उसके पति ने काफी मारपीट और गाली गलौज की थी. जब पीड़िता की बहन आर्शिया राना उनसे मिलने के लिए गई तो साकिब काफी उग्र हो गया और गाली गलौज करते हुए हमले का प्रयास किया. इस बीच साकिब ने हिबा राना को तीन बार तलाक देते हुए उसे अपने घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया. साथ ही दोनों बच्चों को घर के कमरे में बंद कर दिया.  एफआईआर के मुताबिक पीड़िता मानसिक रूप से परेशान हो गई है और काफी डरी हुई है. पति साकिब और उसके ससुर की ओर से हिबा राना के परिवार को लगातार धमकी भी दी जा रही है.  recent visitors 37