बागेश्वरधाम में युवतियों के लिए भव्य आयोजन, नेपाल की बेटी समेत 300 शामिल, शर्तों की घोषणा

छतरपुर  हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बागेश्वर धाम में कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इस बार का महोत्सव इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है। नेपाल की भी एक बेटी का विवाह धाम से हो रहा है। रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री भेंट की। वहीं उन्हें समझ्या कि अंतरराष्ट्रीय विवाह सम्मेलन में उन्हें कैसे आना है, क्या पहनकर आना है। क्या सुविधाएं मिलेंगी और क्या घर से करना होगा? सामूहिक विवाह का खर्च बागेश्वर धाम की दानपेटी से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया "यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव होगा. आयोजन में पूरा खर्च धाम की दानपेटी से करते हैं. बागेश्वर धाम पर आयोजित होने वाला सामूहिक विवाह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए जीवन बदल देने वाला अवसर होता है, जिनके परिवार आर्थिक कारणों से विवाह नहीं कर पाते. इस बार बागेश्वर धाम की ओर से 300 बेटियों के हाथ पीले कर विदाई कराने का लक्ष्य रखा गया है. आयोजन में देशभर के वर-वधु शामिल होते हैं." बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी की इस बार होने वाले सामूहिक आयोजन में बेटियों की बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी कर नामों की घोषणा की. बाबा बागेश्वर खुद आयोजन की देखरेख करते है. लिस्ट बनाने में समिति को करीब 2 माह का समय लगा है. फार्म जमा होना, टीम का घर-घर जाना, परीक्षण होना, 30 हजार किलामीटर 40 से ज्यादा लोगों ने यात्रा कर सूची बनाई है. इस आयोजन में देशभर की बेटियों के हाथ पीली किये जा रहे हैं. मध्य प्रदेश, यूपी, बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देशभर की गरीब निर्धन बेटियों के विवाह होंगे.  समधियों को दी समझाइश उन्होंने सभी समधियों को समझाइश दी कि वे बहू को बेटी की तरह रखें, किसी भी प्रकार की कोई शिकायत न आए। शास्त्री ने कुछ समधियों को बुलाकर उनसे हंसी मजाक करते उन्हें गुलाल भी लगाया। धीरेंद्र शास्त्री ने ट्वीट कर दी विवाह महोत्सव की पूरी जानकारी। यहां सुन लें आप भी… वर-वधू के नाम से होगी संयुक्त एफडी पं. शास्त्री ने बताया, इस बार वर-वधू के नाम से संयुक्त रूप से 30 हजार की एफडी कराई जाएगी। यह एफडी 5 वर्ष से पहले नहीं तोड़ी जा सकेगी। बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि को सप्तम कन्या विवाह महोत्सव आयोजित हो रहा है।  300 बेटियों का गठबंधन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में होने वाले इस सामूहिक विवाह महोत्सव में 300 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाएगा। पं. शास्त्री ने कहा जो बेटियां दूर से आने वाली हैं, वे 14 फरवरी को आ जाएं। रविवार को वर और वधू पक्ष को बुलाकर शुरुआती सामग्री भेंट की गई। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने विवाह महोत्सव में शामिल होने वाले वर वधू पक्ष को बताया क्या होंगी व्यवस्थाएं, क्या हैं नियम… वर-वधु पक्ष के लिए यह रहेगी व्यवस्था वर एवं वधू पक्ष को जो महत्वपूर्ण पास दिए गए हैं, उनमें वधू पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं वधू के लिए एक कार्ड दिया गया है। इसी तरह वर पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं उपहार ले जाने के लिए एक उपहार वाहन पास दिया गया है। साथ ही वर के लिए कार्ड दिया गया है। वर तथा वधु पक्ष के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन के कूपन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे आसानी से भोजन प्राप्त कर सकें। महाराज ने वरवधु मंडप भोजन हेतु अलग से भोजन की व्यवस्था की है। पिछले साल 251 विवाह हुए थे साल 2025 में हुए कन्या विवाह में 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया था. राष्ट्रपति महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने बागेश्वर धाम आकर न केवल बेटियों को आशीर्वाद दिया था बल्कि अपनी ओर से उपहार भी भेंट किये थे. इसके अलावा देशभर से साधु-संतों ने भी वर-वधू को शीर्वाद दिया था. शास्त्री बोले- बहू को अपनी बेटी की तरह रखें सामग्री वितरण के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर पक्ष के अभिभावकों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा, "घर आने वाली बहू को अपनी बेटी की तरह रखें। समाज में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए जिससे धाम की मर्यादा पर आंच आए।" उन्होंने बताया कि 500 से अधिक आवेदनों में से सर्वे टीम ने उन बेटियों को चुना है जो अत्यंत गरीब हैं या जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। मेहमानों और व्यवस्थाओं की खास तैयारी आयोजन को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन और धाम के सेवादारों ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वाहनों के लिए पास: वर और वधू पक्ष को अलग-अलग वाहन पास जारी किए गए हैं ताकि यातायात में परेशानी न हो। भोजन व्यवस्था: दोनों पक्षों के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन कूपन दिए गए हैं। साथ ही वर-वधू और मंडप में मौजूद लोगों के लिए अलग से विशेष भोजन की व्यवस्था की गई है। विशिष्ट अतिथि: इस भव्य महोत्सव में देशभर के बड़े संत, महात्मा और राजनैतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। 14 फरवरी तक पहुंचेंगी बेटियां दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली बेटियों को 14 फरवरी तक धाम पहुंचने का निर्देश दिया गया है। महाराज ने इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी सर्वे टीम और सेवादारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि धाम की वर्तमान क्षमता के अनुसार श्रेष्ठ व्यवस्थाएं की जा रही हैं।   recent visitors 24

भोपाल मेट्रो को मिलेगी नई दिशा, 32 किमी विस्तार और 27 रैक मिलने का फैसला

 भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है। देरी से बढ़ेगी कीमत मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है। देरी का असर यहां पर भी -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा शहर को मिलेगी बड़ी सौगात केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है। recent visitors 21

MP में स्मार्ट पंचायतें: ग्रामीणों को मोबाइल पर 2100 सेवाओं का फायदा, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

भोपाल  पंचायतों में ई-सेवा ऐप व पोर्टल लागू होगा। इसके तहत पंचायत स्तर की सेवाओं की कम से कम समय में डिलीवरी होगी। अभी लोगों को इन सुविधाओं के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस ऐप पर 2100 तरह की सेवाएं उपलपध कराई जानी हैं, इनमें से करीब 600 सेवाओं को उपलब्ध कराया जाने लगा है। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इन सभी सेवाओं की नियमित डिलीवरी हो, पंचायतों के स्तर पर किए जाने वाले कामों में गति आए और पंचायत स्तर पर पर गड़बडिय़ां का स्तर जीरो हो जाए, इसके लिए सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कवायद असल में केंद्र व राज्य सरकार का बड़ा फोकस शहरों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है। इसका रास्ता पंचायतों से ही होकर गुजरता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इन सभी बातों को देखते हुए पंचायतों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके साथ ही ऐप के जरिए पंचायत से मिलने वाली सेवाओं को और अधिक पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा। खाली जमीनों से हटाया जाएगा अतिक्रमण मध्यप्रदेश में ज्यादातर पंचायतों के पास खाली जमीनों का एक बड़ा लैंडबैंक है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई पंचायतों में तो अतिक्रमण करने वालों बेशकीमती जमीनों पर कव्जा कर रखा है। अब सरकार उक्त खाली जमीन का उपयोग पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत पंचायतों की जमीनों के एक हिस्से का भविष्य में व्यावसायिक उपयोग हो सकता है। खाली जमीन पर सभी तरह की प्लानिंग से पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है, जो यह बताएगा कि किस पंचायत में कुल कितनी जमीन हैं, उसमें से कितनी का उपयोग हो रहा है, कितनी खाली है और कितने क्षेत्र में अतिक्रमण है और उसको हटाने की कार्रवाई किस स्तर पर है। एक बगिया मां के नाम… बनेगी आय का जरिया पंचायतों में बड़े स्तर पर एक बगिया मां के नाम विकसित की जा रही हैं। इनका मकसद पंचायतों में फलदार व छायादार पेड़ों वाला ह्रश्वलांटेशन विकसित करना है, ताकि पंचायतों के लिए आय का जरिया बन सके और पंचायतें आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण को भी लाभ हो। इन पर भी फोकस आपदाओं से बचाने की पहल: अभी पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदा से बचने और उससे होने वाले नुकसानों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने के कोई विकल्प नहीं है। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाने की पहल की है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों पर 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान किया है। इससे स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की जानकारी समय पूर्व मिलेगी। इससे  किसानों व ग्रामीणों को बचाव करने में लाभ होंगे। वर्षामापी यंत्र: बारिश को रेकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है लेकिन कई मौके ऐसे आ चुके हैं जब एक या कुछ पंचायतों में ही अतिवृष्टि हो जाती है, पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। इसके कारण संबंधित अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानती। इस तरह संबंधित पंचायतों के लोगों को नुकसान की भरपाई नहीं होती। recent visitors 21

दुश्मन की सोच से परे प्लान! चिकन नेक क्षेत्र में जमीन के नीचे बनेगा 40 KM का कनेक्शन

नई दिल्ली बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है. सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने सोमवार को टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’ अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए कहां से कहां तक ? प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है. बजट पर बात करते हुए जानकारी दी रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’ डिफेंस के लहजे से अहम अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है. सुरक्षा के लिए जरूरी नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके. recent visitors 33