Saturday, July 4, 2026 7:19 am

यूपी में चुनावी रणनीति शुरू, बीजेपी अगले 15 दिनों में कर सकती है बड़े फेरबदल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अलग-अलग मोर्चों की टीम बदलने की तैयारी में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक अगले 15 दिन के भीतर पार्टी में बदलाव होने की संभावना है. एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संगठन में बड़ा बदलाव किया जा सकता है.  यूपी बीजेपी जल्द ही अनुसूचित जाति मोर्चे, किसान मोर्चा, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और अन्य मोर्चो के अध्यक्ष समेत टीम में बदलाव की संभावना है. माना जा रहा है कि 28 फरवरी से पहले ये पूरी प्रक्रिया हो जाएगी. एक बार इन तमाम मोर्चों में बदलाव होने के बाद पार्टी चुनावी मोड में जुट जाएगी.  बीजेपी के मोर्चों में बदलाव की तैयारी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के अलग-अलग मोर्चों के बदलाव में जातीय समीकरण का साधने पर ज़ोर दिया जा सकता है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वयं ओबीसी (कुर्मी) समाज से आते हैं. वहीं पश्चिमी यूपी में जाट, ब्रज में यादव और ब्राह्मणों को समीकरण देखने को मिल सकता हैं. जानकारों का मानना है कि सपा के पीडीए की काट की भी झलक भी इस नए बदलाव में दिखाई दे सकती है.   यूपी बीजेपी की ये कवायद आगामी पंचायत चुनाव, विधान परिषद की शिक्षक व स्नातक कोटे की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखी जा रही है. ताकि पार्टी का प्रदर्शन और मज़बूत हो सके और यूपी में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई जा सके. सूत्रों के मुताबिक़ इन मोर्चों में 30-40 फ़ीसद तक फेरबदल हो सकता है.  विधानसभा चुनाव को लेकर कवायद तेज बीते दिनों बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में लखनऊ में एक बैठक भी हो चुकी हैं. जिसमें पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ट, विभागों के अध्यक्ष, महामंत्री, संयोजक व अन्य पदाधिकारी शामिल हुए थे. इस बैठक में महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे थे. इस बैठक में विभिन्न मोर्चों में किए जाने वाले बदलाव को लेकर चर्चा की गई.  पंकज चौधरी ने इस बैठक के बाद कहा था कि पार्टी के विभिन्न विभाग और प्रकोष्ठों में काम करने वाले पदाधिकारियों को भूमिका काफी अहम होती है. संगठन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है. समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों तक पार्टी की कार्यशैली और नीतियों की जानकारी पहुंचाने में इन मोर्चों को अहम भूमिका होता है. जिससे विभिन्न संगठन के लोग पार्टी के साथ जुड़ते हैं और पार्टी मजबूत होती है.   recent visitors 29

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व वाटर पार्क विवाद: हाईकोर्ट ने पूछा केंद्र-राज्य का रुख, प्रदूषित पानी का मामला गरम

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में वाटर पार्क के संचालन को लेकर जवाब-तलब किया है। इस सिलसिले में केंद्र व राज्य सरकार, एनटीसीए, मुख्य वन संरक्षक बांधवगढ़ सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी। जनहित याचिकाकर्ता शास्त्री नगर, जबलपुर निवासी पर्यावरण प्रेमी अभिषेक पाठक की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील एवं प्रचुर संख्या में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। विगत दो-तीन सालों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत की घटनाएं खतरनाक ढंग से बढ़ी हैं। इस दौरान 12 हाथी, कई बाघ, तेंदुए, हिरण, सांभर, नीलगाय व बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हुई है। इसके बावजूद टाइगर रिजर्व के पर्यावरण संवेदी कोर एरिया से लगे प्रतिबंधित जोन में कैलाशजी वाटर पार्क नाम से जल आधारित मनोरंजन सुविधा का संचालन आरंभ किया गया है। जहां स्विमिंग पूल हैं तथा कई वाटर स्पोर्ट्स होते हैं। वाटर पार्क से हजारों लीटर केमिकल युक्त खराब पानी समीपी वन भूमि में छोड़ा जाता है। यह पानी वन्य भूमि व भूजल को प्रदूषित कर रहा है। वन्य जीवों, पेड़ों व वनस्पतियों को भी इससे नुकसान पहुंच रहा है। आसपास के परंपरागत जल स्रोत भी प्रदूषित हो गए हैं। दुर्गंध आने के कारण वन्यजीव दूर भाग रहे हैं। ग्राम पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण मंडल व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से वाटर पार्क के निर्माण के पूर्व एनओसी नहीं ली गई। उक्त वाटर पार्क के संचालक पर रोक लगाने की मांग की गई। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद महानिदेशक फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रमुख सचिव, बांधवगढ़ मुख्य वन संरक्षक, बायोडायवर्सिटी बोर्ड मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर फील्ड बायोलॉजिस्ट, रेंजर एवं कैलाशजी बालाजी वाटर पार्क के संचालक कैलाश छतवानी से जवाब मांगा गया है। recent visitors 26

महिला भर्ती रैली का ऐलान: बेटियों के लिए सुनहरा मौका, तारीख और प्रक्रिया पूरी तरह से जानें

रायपुर छत्तीसगढ़ की युवतियों के लिए देश सेवा में कदम रखने का बड़ा अवसर सामने आया है। भारतीय सेना भर्ती कार्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) द्वारा महिला सेना पुलिस पद के लिए 23 फरवरी 2026 को पुलिस ग्राउंड, झिंझरी, कटनी में भव्य भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली में छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों की चयनित महिला अभ्यर्थी भाग लेंगी। कॉमन एंट्रेंस एग्जाम में सफल अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका महिला सेना पुलिस भर्ती के लिए 30 जून 2025 से 10 जुलाई 2025 के बीच आयोजित ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) में सफल महिला उम्मीदवार ही रैली में शारीरिक दक्षता परीक्षण, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य चयन प्रक्रियाओं में भाग लेंगी। 24 फरवरी को होगी चिकित्सकीय जांच शारीरिक दक्षता और दस्तावेज़ सत्यापन में सफल उम्मीदवारों की चिकित्सकीय जांच 24 फरवरी 2026 को सेना अस्पताल, जबलपुर में कराई जाएगी। स्वस्थ पाए जाने पर ही अंतिम चयन सुनिश्चित होगा। साथ लाने होंगे ये दस्तावेज अभ्यर्थियों को रैली में एडमिट कार्ड, सभी मूल शैक्षणिक और पहचान दस्तावेज, आधार कार्ड से लिंक मोबाइल फोन साथ लाना अनिवार्य है। प्रवेश पत्र उम्मीदवारों के पंजीकृत ई-मेल आईडी पर भेजे जा चुके हैं और यह भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in  पर भी उपलब्ध हैं।  देश सेवा, अनुशासन और सम्मान के क्षेत्र में करियर का मौका महिला सेना पुलिस भर्ती रैली छत्तीसगढ़ की युवतियों के लिए देश सेवा और सम्मान का सुनहरा अवसर है। बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की भागीदारी से यह आयोजन राज्य स्तर पर विशेष महत्व रखता है। recent visitors 31

चंबल में 1000 साल पुराना शिव मंदिर, खंभों की गिनती नहीं हुई पूरी, भूतों की मान्यता से जुड़ा

मुरैना देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में ऐसे कई स्मारक, महल और किले हैं, जो अपनी अद्भुद वास्तुकला के लिए विश्वविख्यात हैं। इनके अलावा भी अभी बहुत कुछ है, जो देखने के लिए बचा हुआ है। ऐसा ही एक मंदिर, जिसे भूतों का मंदिर भी कहते हैं, मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया में स्थित है। इस मंदिर का प्रचलित नाम ककनमठ है और यह अपनी रहस्यमयी किवदंतियों और अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। क्यों खास है यह मंदिर? ककनमठ मंदिर की स्थापत्य कला 10वीं शताब्दी के समकक्ष मानी जाती है। इसलिए माना जा सकता है कि यह लगभग एक हजार साल पुराना है। यह गुर्जर-प्रतिहार शैली का उत्कृष्ट नमूना है। मंदिर विशालकाय पत्थरों से बना है और इसका शिखर हवा में तैरता हुआ प्रतीत होता है। भले ही मंदिर आज भग्नावस्था में है, लेकिन यहां की मूर्तियां आज भी मंत्रमुग्ध कर देती हैं। दीवारों और छतों पर देवी-देवताओं और पौराणिक जीवों की नक्काशी की गई है। मंदिर में गर्भगृह, स्तंभयुक्त मंडप और आकर्षक मुखमंडप है, जिसमें चूना, मिट्टी या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है। किसने बनवाया यह मंदिर? इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघात राजवंश की रानी ककनवती के आदेश पर हुआ था और उन्हीं के नाम पर इसका नाम ककनमठ पड़ा। स्थानीय लोगों और आस पास के इलाकों में एक किवदंती यह भी प्रचलित है कि इसे भूतों ने एक रात में बनाया। एक और कहानी के अनुसार, भूत मंदिर बना रहे थे तभी एक महिला ने चक्की चलाना शुरू कर दिया, जिससे डरकर भूत अधूरा काम छोड़कर भाग गए। तभी से यह मंदिर आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी इन कहानियों को कल्पना और लोककथाएं बताते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंदिर से जुड़ी हैं दिलचस्प किवदंतियां स्थानीय लोगों का मानना है कि सूरज ढलने के बाद इस मंदिर पर भूतों का कब्जा हो जाता है और यहां अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देती हैं। एक और किवदंती के अनुसार, जिस दिन इस मंदिर के सामने से नाई जाति के नौ काने दूल्हे बारात लेकर निकलेंगे, उस दिन यह मंदिर गिर जाएगा। हालांकि, ये किंवदंतियां स्थानीय मान्यताओं और अंधविश्वासों पर आधारित हैं। इस मंदिर को लेकर एक अजीबोगरीब किवदंती है कि सूर्यास्त के बाद यहां रुकने वाले को भयानक दृश्य दिखाई देते हैं, जिससे रूह कांप जाती है। इसी डर से लोग रात में यहां नहीं रुकते। मंदिर के खंभों को गिनना रहस्य मंदिर की बनावट में पत्थरों को बिना किसी मसाले के जोड़ा गया है और इसके खंभों की गिनती करना भी एक रहस्य है। स्थानीय लोग कहते हैं कि इस मंदिर में मौजूद खंभों की आज तक कोई गिनती नहीं कर पाया। हर बार गिनती करने पर या तो संख्या बढ़ जाती है या घट जाती है। मंदिर में कई शिवलिंग और मूर्तियां भी मौजूद हैं, जो खंडित अवस्था में हैं। कैसे पहुंचते हैं ककनमठ मंदिर? यहां पहुंचने के लिए हवाई यात्रा करने वाले ग्वालियर आ सकते हैं, जो मंदिर से करीब 65-70 किलोमीटर दूर है। रेल और सड़क मार्ग से भी मुरैना पहुंचना आसान है। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए 325 किलोमीटर दूर मुरैना पहुंचा जा सकता है। मुरैना से बस या टैक्सी द्वारा करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। recent visitors 19

सनातन धर्म पर बड़ा बयान, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा—संतों की आपसी लड़ाई से नुकसान

छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि संतों के विवाद पर बोलने की हैसियत हमारी नहीं है, लेकिन साधु आपस में लड़कर जो निंदा कर रहे हैं, वह सनातन के लिए घातक है। सोमवार को इंदौर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हम अब तक संत नहीं बन पाए हैं क्योंकि हम आचरण से संत बनना चाहते हैं। ऐसी बात से हमारी ही हंसी होती है। दूसरों की निंदा करने की बजाय सनातनियों को स्वयं में सुधार करने की आवश्यकता है। सनातन परंपरा अमिट रहेगी और इसे कोई मिटा नहीं सकता है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक दिवसीय प्रवचन में शामिल होने के लिए मोहनखेड़ा जैन तीर्थ पहुंचे थे। इंदौर में मीडिया के सवालों का जवाब देते कहा कि आज नए मंदिर तो खूब बनाए जा रहे, लेकिन पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार नहीं किया जा रहा। पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार कर इनका वैभव लौटाए जाने की जरूरत है। उन्होंने बलि प्रथा को दूर करने की आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि हमारे तीर्थ, देवालय आस्था का केंद्र बनने के बजाये पिकनिक स्पॉट बन रहे हैं। यह उचित नहीं है। recent visitors 23

उपभोक्ताओं को मिल रही गुणवत्तापूर्ण एवं स्थिर वोल्टेज की बिजली

पुराने फाउंडेशन पर स्थापित किया गया अधिक क्षमता का कैपेसिटर बैंक एमपी ट्रांसको के आगर 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार उपभोक्ताओं को मिल रही गुणवत्तापूर्ण एवं स्थिर वोल्टेज की बिजली भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने आगर स्थित 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार करते हुए पुराने कैपेसिटर बैंक के फाउंडेशन पर ही अधिक क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। क्षेत्र में इंडक्टिव लोड बढ़ने के कारण पूर्व में स्थापित 5 एमवीएआर क्षमता का कैपेसिटर बैंक लोड वहन नहीं कर पा रहा था। इससे वोल्टेज प्रोफाइल प्रभावित हो रही था। सीमित स्थान के कारण नए फाउंडेशन का निर्माण संभव नहीं था। तकनीकी नवाचार से निकला समाधान वोल्टेज प्रबंधन की चुनौती का समाधान करते हुए एमपी ट्रांसको के सहायक अभियंता श्री योगेश राठौर ने तत्कालीन कार्यपालन अभियंता श्री शेखर फटाले के मार्गदर्शन में पुराने फाउंडेशन का ही उपयोग कर आवश्यक तकनीकी संशोधन किए और उसी फांउडेशन पर 12 एमवीएआर क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक स्थापित किया। इससे समय और लागत कम होने के साथ ही क्षमता संवर्धन के लिये अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं पड़ी। इन क्षेत्रों को मिल रहा है लाभ कैपेसिटर बैंक की क्षमता बढ़ने से आगर 132 के.वी. सब स्टेशन से जुड़े 33 के.वी. के 9 फीडरों के हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर, स्थिर और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल रही है। लाभान्वित क्षेत्रों में मोया खेड़ा, कानड़, नलखेड़ा, निपानिया बैजनाथ, मडकोटा, थानोदला, आगर, झरड़ा एवं आगर टाउन शामिल हैं।   recent visitors 23

18 फरवरी को MP का बजट 2026-27, फोकस में समावेशी विकास और नई योजनाएं

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में अपना तीसरा बजट पेश करेगी, जिसे वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। यह बजट रिकॉर्ड रकम और समावेशी विकास के एजेंडा के साथ तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य का अनुमानित बजट 4.63 लाख करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। जो पिछले बजट से करीब 10 फीसदी अधिक होगा। बताते चलें कि एमपी विधानसभा बजट सत्र 16 फरवरी को शुरू होने जा रहा है और 18 फरवरी को एमपी बजट पेश किया जाएगा। बता दें कि कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मोहन यादव ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तो 18 फरवरी को MP Budget 2026-27 में पता चल जाएगा। MP Budget 2026-27 का फोकस क्या या क्या हो सकता है खास?     कृषि और ग्रामीण विकास- किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने वालीे योजनाओं पर     रोजगार सृजन- अनुमान जताया जा रहा है कि लगभग 50 हजार सरकारी नौकरियां निकाली जाएंगी।     युवा और कौशल- तकनीकी कौशल, उद्यमिता और नौकरियों के अन्य अवसरों पर जोर     महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं- महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं में वृद्धि की जा सकती है। केंद्रीय बजट 2026-27 – एमपी को क्या मिला? बता दें कि हाल ही पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 का असर एमपी के बजट की तैयारियों को प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि वित्त आयोग के करों को लेकर नये फॉर्मूले के कारण एमपी को केंद्रीय कर हिस्से से करीब 7,500 करोड़ का नुकसान होने की उम्मीद है। रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एमपी को करीब 15,188 करोड़ का आवंटन किया गया है। नगर निगमों के लिए हरित बॉन्ड प्रोत्साहन में कमी कुछ शहरी वित्तीय प्रोत्साहन में एमपी नगर निकाय लाभ से वंचित रह सकते हैं।  उम्मीदें! विश्लेषकों का कहना है कि MP Budget 2026-27 राज्य की विकास यात्रा को तेज करने वाला बजट हो सकता है। यदि इसमें रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर पर्याप्त निवेश होता है, खासकर उस स्थिति में जब राज्य की कर हिस्सेदारी घट चुकी है। तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी रहेगा खास बताया जा रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी सदन में रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ये अनुपूरक बजट करीब 10 हजार करोड़ का हो सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अनुपूरक बटज में न तो किसी नई योजना के लिए प्रावधान होगा और न ही किसी विभाग को नये वाहन खरीदने के लिए राशि दी जाएगी। ऐसा कोई भी वित्तीय प्रावधान नहीं किया जाएगा। इससे राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़े। recent visitors 23