Saturday, July 4, 2026 7:18 am

5000 शिक्षक पदों की भर्ती को मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। recent visitors 23

यूपी में स्वास्थ्य पहल: 9.8 करोड़ बच्चों को दी जाएगी कृमि मुक्ति दवा

लखनऊ  राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पेट के कीड़ों से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल दवा खिलाई जाएगी। जो बच्चे इस दिन दवा का सेवन नहीं कर पाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के तहत दवा दी जाएगी। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ. सतीश कुमार गौतम ने बताया कि प्रदेश में लगभग 9.8 करोड़ बच्चों को कृमि मुक्ति दवा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान वर्ष में दो बार फरवरी और अगस्त में संचालित किया जाता है, जिसे स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस और शिक्षा विभाग के संयुक्त सहयोग से लागू किया जाएगा।  अभियान चलाया जाएगा उन्होंने बताया कि प्रदेश के 21 जनपदों के 64 चयनित ब्लॉकों, शहरी क्षेत्रों और प्लानिंग यूनिट्स में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन नहीं होगा, क्योंकि आईडीए अभियान के तहत एल्बेंडाजोल दवा पहले से ही दी जा रही है। किसी भी बच्चे को खाली पेट दवा न दी जाए एल्बेंडाजोल दवा सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को दी जाएगी। स्कूल न जाने वाले बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए दवा खिलाई जाएगी। शिक्षक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों को अपने सामने दवा का सेवन कराना सुनिश्चित करेंगे तथा यह विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी बच्चे को खाली पेट दवा न दी जाए। रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जाएगी कार्यक्रम की रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जाएगी तथा कृमि मुक्ति दिवस से जुड़ी सभी गतिविधियों को विद्यालयों द्वारा ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। दवा सेवन के बाद कुछ बच्चों में मतली, चक्कर या उल्टी जैसे हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। किसी भी गंभीर या असामान्य स्थिति में आशा या एएनएम से संपर्क करें अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। आवश्यकता पड़ने पर हेल्पलाइन नंबर 104 या एम्बुलेंस सेवा 108 पर कॉल की जा सकती है।    recent visitors 31

कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल

दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल भोपाल प्रदेश के अमलाहा, जिला सीहोर में 7 फरवरी को दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारीगण, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि एवं अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे। यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों तथा बाज़ार से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है, जिससे दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।   recent visitors 21

10 लाख भक्तों के लिए महाशिवरात्रि दर्शन प्लान, जानिए कहां से होगा प्रवेश और क्या रहेगी व्यवस्था

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के मंदिर में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। रविवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मंदिर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। भक्तों को सुलभ और सुरक्षित दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भस्म आरती दर्शन, लड्डू प्रसाद, पूछताछ केंद्र, पार्किंग, जूता स्टैंड, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर मंदिर परिसर में अहम बैठक आयोजित की गईं। जिसमें कई निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर एवं मंदिर प्रशासक रौशन सिंह, प्रथम कौशिक, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, सहायक प्रशासक आशीष फलवाडीया सहित मंदिर समिति के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सामान्य श्रद्धालुओं की प्रवेश-निर्गम व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला के समीप बने द्वार से प्रवेश करेंगे। वे भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप, नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए अपने गंतव्य की ओर जाएंगे। शीघ्र दर्शन व पासधारी श्रद्धालुओं की व्यवस्था शीघ्र दर्शन 250 रुपए टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए अलग से बैरिकेटिंग की गई है। ये श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, अशोक सेतु, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे। इसके अलावा शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालु हरसिद्धि पाल पार्किंग, बड़ा गणेश गली, प्रीपेड बूथ तिराहा, शहनाई जिगजेग, द्वार क्रमांक-01 से मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती दर्शन व्यवस्था महाशिवरात्रि पर्व पर भस्म आरती के लिए पंजीयनधारी श्रद्धालुओं का प्रवेश मानसरोवर भवन और द्वार क्रमांक-01 से निर्धारित किया गया है। पार्किंग सुविधा के लिए     पार्किंग : सामान्य श्रद्धालु के लिए कर्कराज पार्किंग, मेघदूत पार्किंग में व्यवस्था की गई है।     शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए कार्तिक मेला ग्राउंड, राणौजी की छत्रि, शगुन गार्डन, महाकाल मंडपम् पर व्यवस्था की गई है।     जूता स्टैंड : सुविधा के लिए भील समाज धर्मशाला, झालरिया मठ एवं हरसिद्धि पाल पर व्यवस्था की गई।     शीघ्र दर्शन काउंटर : कर्कराज पार्किंग, हरसिद्धि पाल पार्किंग पर की जाएगी।     लड्डू प्रसाद : काउंटरों की व्यवस्था नृसिंहघाट रोड पर एवं हरसिद्धि रोड पर की जाएगी। प्रशासन की अपील मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और धैर्य बनाए रखें, जिससे सभी भक्त सुचारू रूप से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   recent visitors 21

भारतीय शोधकर्ताओं की खोज: बैक्टीरिया की मदद से मंगल की मिट्टी से बनेगी मजबूत ईंट, अंतरिक्ष मिशनों में मदद

बैंगलोर अंतरिक्ष यानी स्पेस सेक्टर में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस लिस्ट में अब एक और गर्व की बात जुड़ गई है. पिछले साल इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन जाकर लौटने वाले भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने अपने करियर में एक नई और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IISc के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक ऐसी रिसर्च की है, जो भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बना सकती है. यह स्टडी इस बात पर फोकस है कि क्या मंगल ग्रह की मिट्टी से ही वहां कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स यानी इमारतें बनाने का सामान जैसे- ईंट, सीमेंट आदि तैयार की जा सकती है. इस रिसर्च का मकसद सीमेंट जैसी कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधानों पर निर्भरता को मंगल ग्रह के साथ-साथ पृथ्वी पर भी कम करना है. इस रिसर्च जर्नल को PLOS One में पब्लिश किया गया है. शुभांशु शुक्ला फिलहाल IISc में मास्टर डिग्री कर रहे हैं. उनका कहना है कि भविष्य की मंगल यात्राओं में अगर हमें सड़कें, लैंडिंग पैड या रोवर के लिए मजबूत ज़मीन चाहिए, तो वहां की मिट्टी का ही इस्तेमाल करना सबसे बेहतर तरीका होगा. इससे पृथ्वी से भारी कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेही और मिशन ज्यादा टिकाऊं हो पाएंगे. रिसर्च में इस्तेमाल हुआ खास बैक्टीरिया इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है, जो मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर ईंट जैसा स्ट्रक्चर बना सकते हैं. पहले के एक्सपेरीमेंट्स में Sporosarcina pasteurii नाम का बैक्टीरिया यूज़ किया गया था. इस बार टीम ने बेंगलुरु की मिट्टी से मिला एक ज्यादा मजबूत बैक्टीरिया चुना, जिससे बायोसीमेंटेशन का प्रोसेस बेहतर हो सके. हालांकि, मंगल ग्रह की मिट्टी में पाए जाने वाले परक्लोरेट नाम के जहरीले केमिकल ने वैज्ञानिकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी. जब बैक्टीरिया को सिर्फ परक्लोरेट के संपर्क में लाया गया, तो वो तनाव में आ गए और धीरे-धीरे बढ़ने लगे, आपस में चिपकने लगे. लेकिन जब वही बैक्टीरिया ईंट बनाने वाले जरूरी तत्वों के साथ मौजूद थे, तो उसके रिजल्ट्स काफी चौंकाने वाले निकले. रिसर्च की पहली ऑथर यानी लेखिका स्वाति दूबे के अनुसार, इस स्थिति में बैक्टीरिया एक खास तरह का मैट्रिक्स छोड़ते हैं, जो कमजोर बैक्टीरिया तक पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. इससे ईंट बनने का प्रोसेस और मजबूत हो जाता है. अब वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को मंगल जैसे वातावरण में, खासकर ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वाली परिस्थितियों में टेस्ट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये प्लानिंग सफल रही, तो यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ मंगल पर कंस्ट्रक्शन वर्क करने में मदद करेगी, बल्कि पृथ्वी पर भी पर्यावरण के अनुकूल एक अच्छा विकल्प बन सकती है. recent visitors 23

सदियों पुराने वृक्षों की पहचान: पन्ना में बरगद, पीपल, नीम समेत कई पेड़ों का दस्तावेजीकरण

पन्ना   दक्षिण पन्ना वनमण्डल में 100 वर्ष से अधिक आयु के प्राचीन वृक्षों की पहचान एवं संरक्षण के उद्देश्य से "हेरिटेज ट्री आइडेंटिफिकेशन" अभियान संचालित किया जा रहा है. इस पहल के अंतर्गत वनकर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं. उनके फोटो और विवरण संकलित किए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों से संवाद कर वृक्षों से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारियां भी संजोई जा रही है. अभियान का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को पहचान देना है. बरगद, पीपल, नीम सहित कई 100 वर्ष पेड़ों का दस्तावेजीकरण अभियान के तहत विभिन्न रेंजों में वन अमले द्वारा निरंतर सर्वे कार्य किया जा रहा है. रैपुरा रेंज में डिप्टी रेंजर रंजना नागर, मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार, पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया, शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा तथा सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल द्वारा अब तक सराहनीय प्रयास किए गए हैं. अनेक ग्रामों में बरगद, पीपल, नीम, आम, इमली और अन्य प्रजातियों के 100 से 200 वर्ष तक एवं अधिक पुराने वृक्षों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं की जानकारी रैपुरा क्षेत्र में डिप्टी रेंजर रंजना नागर द्वारा ग्रामीण बुजुर्गों से विस्तृत चर्चा कर लगभग 20 ऐसे वृक्षों की जानकारी संकलित की गई, जिनकी आयु 100 से 200 वर्ष तक आंकी जा रही है. वरिष्ठ ग्रामीणों ने बताया कि कई वृक्ष धार्मिक आस्था से जुड़े होने के कारण आज भी सुरक्षित हैं, जिनके नीचे विभिन्न देवस्थलों की स्थापना की गई है. इस संवाद से वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं तथा संरक्षण की परंपराओं को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई. शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा द्वारा गुरझाई क्षेत्र एवं पतने-बघने नदी के पास लगभग 100 से 105 वर्ष पुराने सेमर और आम के वृक्ष चिन्हित किए गए. मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार ने हथकुरी, कुंवरपुर और मोहन्द्रा ग्रामों में कई हेरिटेज ट्री की पहचान कर उनके फोटोग्राफ्स संकलित किए. जिनमें अनेक वृक्ष 150 वर्ष से अधिक पुराने पाए गए. पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया द्वारा बरगद, इमली और नीम सहित विभिन्न ग्रामों में 100 से 200 वर्ष तक आयु वाले वृक्षों का दस्तावेजीकरण किया गया. वहीं, सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल ने बुजुर्ग ग्रामीणों से चर्चा कर धार्मिक आस्था से जुड़े लगभग 110 से 120 वर्ष पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित की. वन मण्डल द्वारा इस अभियान को जनसहभागिता से जोड़ते हुए सभी वन क्षेत्रों में ऐसे प्राचीन वृक्षों की पहचान और संरक्षण के प्रयास तेज किए जा रहे हैं. विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सहभागिता और जागरूकता से न केवल जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति और परंपरा दोनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा. recent visitors 23

कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में इस महा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया है। बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र के आयोजन के साथ ‘‘कृषि रथ’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर बुरहानपुर विधायक मती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे। कृषि रथ द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधिकरण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, विभागीय योजना, ई-टोकन उवर्रक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। प्रगतिशील किसानों को उत्पादन लागत को कम करने के लिये सही मिट्टी, सही खेती एवं सही फसल का कॉम्बीनेशन की जानकारी भी दी जा रही है। ग्राम पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल आयोजित बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया। कृषक चौपाल में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के आधार जैसेः-जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी अर्क को बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों, मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा करने की सलाह दी गयी। दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल उड़द और मूंगफली के बारे में बताया गया एवं बुवाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बुरहानपुर जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन सहित योजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी जानकारी दी जा रही है। ग्राम बाकड़ी में लगी कृषि चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी कृषक कल्याण वर्ष-2026 अंतर्गत बुरहानपुर जिले के ग्राम बाकड़ी में कृषि रथ पहुंचा। इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि एवं तकनीकियों की बारीकी से जानकारी दी गयी। ग्रामीणों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट व रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताये गये। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में जिले में समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक गुरूवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ आयोजित बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने एवं उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन किया जा रहा है। हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर  हर्ष सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित एवं पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते है, अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करें।   recent visitors 24