लोकसेवकों की तिरंगा यात्रा ने दिया राष्ट्रभक्ति, संविधान सम्मान का संदेश, पुरानी पेंशन बहाली करने सरकार को चेताया

Public servants’ ‘Tiranga Yatra’ conveys a message of patriotism and respect for the Constitution; warns the government to restore the old pension scheme. भोपाल। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) भोपाल जिलाध्यक्ष सुरसरि प्रसाद पटेल के नेतृत्व में व्यापम चौराहा से भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा और हृदय में राष्ट्रभक्ति का भाव लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यात्रा के दौरान सुरसरि प्रसाद पटेल ने कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। कर्मचारी एकता एवं पुरानी पेंशन की मांग को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाना हमारा संकल्प है। NMOPS के जिला संरक्षक श्याम सुंदर शर्मा ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक भविष्य को महत्वपूर्ण बताते हुए पुरानी पेंशन बहाली की आवश्यकता पर बल दिया। हाउसिंग बोर्ड इकाई के प्रांतीय अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा कि तिरंगा हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है और कर्मचारी हितों के लिए संगठित एवं रचनात्मक प्रयास निरंतर जारी रहने चाहिए। अपाक्स प्रांताध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह यादव ने कहा कि तिरंगा स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है। कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग पर संवेदनशीलतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए। अपाक्स के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष विनोद कुमार विश्वकर्मा ने कर्मचारी हितों और भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। निगम-मंडल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गजेन्द्र कोठारी ने कर्मचारी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता को आवश्यक बताया। संविदा कर्मचारी संगठन प्रांताध्यक्ष के प्रांताध्यक्ष रमेश राठौर ने संविदा कर्मचारियों के हितों एवं भविष्य की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। कर्मचारी मंच के प्रांतीय अध्यक्ष अशोक पाण्डेय ने कहा कि संगठित एवं लोकतांत्रिक आवाज सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। NMOPS की संभागीय अध्यक्ष शैलजा बैरागी ने महिला कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी को कर्मचारी आंदोलन की महत्वपूर्ण शक्ति बताया। जबकि महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सरोज सिंह ने महिला कर्मचारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा एवं सुरक्षित भविष्य को कर्मचारी हितों का अभिन्न हिस्सा बताया। NMOPS के प्रांतीय सचिव उदय सिंह मालवीय ने संगठन की शक्ति को एकता और अनुशासन में बताते हुए पुरानी पेंशन बहाली की मांग को शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। संभागीय अध्यक्ष सवाई लाल सिंह परिहार ने कर्मचारी संगठनों के आपसी समन्वय पर जोर दिया।अपाक्स के प्रांतीय कोषाध्यक्ष कैलाश बैरागी ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए एकजुटता को आवश्यक बताया। कार्यवाहक अध्यक्ष माखन सिंह परमार ने तिरंगा यात्रा को एकता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का प्रेरक संदेश बताया। महासचिव जय सिंह ने कर्मचारी हितों के लिए जागरूकता एवं संगठनात्मक एकता को समय की आवश्यकता बताया। हीरा लाल सैनी, आरबी जायसवाल, माजिद मोहम्मद खान, थान सिंह यादव एवं अकबर ने भी राष्ट्रहित, संविधान सम्मान, कर्मचारी एकता, सामाजिक सुरक्षा और पुरानी पेंशन बहाली के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता व्यक्त की। हीरानंद नरवरिया ने कहा कि तिरंगा यात्रा ने राष्ट्रप्रेम, संविधान के प्रति सम्मान और कर्मचारी एकता की भावना को मजबूत किया है। पुरानी पेंशन की बहाली कर्मचारियों के सम्मानजनक एवं सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए सभी कर्मचारी संगठनों को एकजुट होकर शांतिपूर्ण, संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते रहना चाहिए। तिरंगा यात्रा व्यापम चौराहा से प्रारंभ होकर डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा तक पहुंची, जहां सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। यात्रा ने राष्ट्रभक्ति, संविधान सम्मान, पुरानी पेंशन बहाली, कर्मचारी एकता और सामाजिक सुरक्षा का सशक्त संदेश दिया। सभी लोकसेवकों ने एक स्वर में कहा कि “तिरंगा हमारी शान है, संविधान हमारा सम्मान है और कर्मचारी एकता हमारी शक्ति है। पुरानी पेंशन बहाल हो, कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो और राष्ट्रहित के साथ कर्मचारी हितों की आवाज लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मार्ग से निरंतर बुलंद होती रहे। recent visitors 3

MP में MBBS की पढ़ाई हुई महंगी: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस में 10% तक बढ़ोतरी, सरकारी कॉलेजों में कोई बदलाव नहीं

MBBS education becomes costlier in MP: Fees in private medical colleges hiked by up to 10%; no change in government colleges. भोपाल। मध्य प्रदेश में NEET-UG 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मेडिकल और डेंटल शिक्षा का नया फीस स्ट्रक्चर लागू कर दिया गया है। नए फीस ढांचे के मुताबिक प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई पिछले सत्र की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। वहीं, निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस स्थिर प्रदेश के 20 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस 1.14 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें शिक्षण और सुरक्षा शुल्क शामिल हैं। वहीं, ESIC मेडिकल कॉलेज इंदौर में सुरक्षा शुल्क कम होने के कारण सालाना फीस करीब 1.05 लाख रुपये रहेगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले तीन वर्षों से यही फीस लागू है और इस सत्र में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ा फीस का बोझ निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कॉलेज के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। भोपाल के LN Medical College में सालाना फीस में 1.58 लाख रुपये की वृद्धि हुई है। अब यहां MBBS की सालाना फीस करीब 18.08 लाख रुपये हो गई है। वहीं, भोपाल के RK Medical College में फीस में करीब 81 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यहां MBBS की सालाना फीस 11.31 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस बढ़ोतरी से निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। NRI कोटे की फीस में बड़ा उछाल निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नए फीस स्ट्रक्चर में NRI कोटे की कुल फीस कई कॉलेजों में 60 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है। श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज, इंदौर: 60,92,700 रुपयेLN मेडिकल College, भोपाल: 53.99 लाख रुपयेPeople’s Medical College, भोपाल: 53.33 लाख रुपये श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में NRI फीस में करीब 5.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। BDS की पढ़ाई भी हुई महंगी MBBS के साथ निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी वृद्धि की गई है। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज, शासकीय डेंटल यूनिवर्सिटी इंदौर, में BDS की फीस पिछले वर्ष की तरह 1.14 लाख रुपये रखी गई है। वहीं, निजी BDS कॉलेजों में फीस में करीब 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की वृद्धि हुई है। नए फीस स्ट्रक्चर के अनुसार निजी BDS की सालाना फीस कॉलेज के अनुसार करीब 1.98 लाख से 2.85 लाख रुपये तक हो गई है। MP में MBBS की 5,200 सीटें NEET-UG 2026-27 सत्र में मध्य प्रदेश में MBBS की कुल 5,200 सीटें उपलब्ध होंगी। पिछले सत्र में यह संख्या करीब 5,050 सीटें थी। यानी इस बार 150 सीटों का इजाफा हुआ है। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 3,000 सीटें और निजी मेडिकल कॉलेजों की 2,200 सीटें शामिल हैं। सीटों में बढ़ोतरी नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और मौजूदा कॉलेजों में सीटें बढ़ाए जाने के कारण हुई है। खरगोन, मंदसौर और रतलाम में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 सीटें तथा सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 50 अतिरिक्त सीटें शामिल होने से राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ी है। छात्रों के लिए बढ़ी चुनौती एक तरफ प्रदेश में MBBS की सीटों की संख्या बढ़ी है, वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी ने मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। सरकारी कॉलेजों में फीस स्थिर रहने से कम खर्च में MBBS करने का विकल्प विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, लेकिन सीमित सरकारी सीटों के कारण निजी कॉलेजों की ओर जाने वाले छात्रों को अब पहले से अधिक आर्थिक खर्च उठाना पड़ सकता है। NEET-UG 2026-27 के लिए छात्रों को प्रवेश लेने से पहले संबंधित कॉलेज की नवीनतम फीस, हॉस्टल, अन्य शुल्क और प्रवेश नियमों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। recent visitors 5

दातासिंह वाला बॉर्डर सील: चार लेयर सुरक्षा में रोका गया किसानों का जत्था, 29 अगस्त तक पड़ाव का ऐलान

Datasinghwala border sealed: Farmers’ convoy halted by four-layer security; encampment announced until August 29. नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने दातासिंह वाला (खनौरी) बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रविवार को बॉर्डर को चार लेयर सुरक्षा घेरे में सील कर दिया गया। पंजाब की ओर से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे 51 किसानों के जत्थे को हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया गया। किसानों और प्रशासन के बीच करीब डेढ़ घंटे में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कराने और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक वे 29 अगस्त तक बॉर्डर पर ही पड़ाव जारी रखेंगे। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत दोपहर बाद पंजाब की ओर से किसानों का जत्था हरियाणा की तरफ बढ़ा तो प्रशासन ने किसान नेताओं के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में काका सिंह कोटड़ा, बलदेव सिंह सरसा, इंद्रजीत पन्नीवाल, सुखदेव भोजराज और अमनजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा और एसपी कुलदीप सिंह ने किसानों की संख्या कम करने और मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा। किसान नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर बातचीत होनी चाहिए। पैदल दिल्ली जाने पर अड़े किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पैदल दिल्ली पहुंचना है। प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद किसान नेता पंजाब की ओर लौट गए और खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोबारा पड़ाव डाल दिया। किसानों ने ऐलान किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और 29 अगस्त तक बॉर्डर पर डटे रहेंगे। हरियाणा के किसानों को भी हिरासत में लिया गया दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हरियाणा के 33 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, कैथल की ओर से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के नेतृत्व में बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे 18 किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। शुभकरण सिंह की मौत स्थल से मिट्टी लेकर जाएंगे दिल्ली किसानों ने आंदोलन को भावनात्मक रूप देने के लिए खनौरी में उस स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 21 फरवरी 2024 को किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी। किसान नेताओं के अनुसार, इस मिट्टी को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। गैर-एसकेएम किसान संगठनों की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस मिट्टी को दिल्ली ले जाने की बात कही गई है। आंदोलन फिर गरमाने के संकेत दातासिंह वाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा और किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास के बीच एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन किसानों को हरियाणा में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं है, वहीं किसान अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बॉर्डर पर सुरक्षा और आंदोलन दोनों को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। recent visitors 7