MP में MBBS की पढ़ाई हुई महंगी: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस में 10% तक बढ़ोतरी, सरकारी कॉलेजों में कोई बदलाव नहीं

MBBS education becomes costlier in MP: Fees in private medical colleges hiked by up to 10%; no change in government colleges. भोपाल। मध्य प्रदेश में NEET-UG 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मेडिकल और डेंटल शिक्षा का नया फीस स्ट्रक्चर लागू कर दिया गया है। नए फीस ढांचे के मुताबिक प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई पिछले सत्र की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। वहीं, निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस स्थिर प्रदेश के 20 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस 1.14 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें शिक्षण और सुरक्षा शुल्क शामिल हैं। वहीं, ESIC मेडिकल कॉलेज इंदौर में सुरक्षा शुल्क कम होने के कारण सालाना फीस करीब 1.05 लाख रुपये रहेगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले तीन वर्षों से यही फीस लागू है और इस सत्र में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ा फीस का बोझ निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कॉलेज के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। भोपाल के LN Medical College में सालाना फीस में 1.58 लाख रुपये की वृद्धि हुई है। अब यहां MBBS की सालाना फीस करीब 18.08 लाख रुपये हो गई है। वहीं, भोपाल के RK Medical College में फीस में करीब 81 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यहां MBBS की सालाना फीस 11.31 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस बढ़ोतरी से निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। NRI कोटे की फीस में बड़ा उछाल निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नए फीस स्ट्रक्चर में NRI कोटे की कुल फीस कई कॉलेजों में 60 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है। श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज, इंदौर: 60,92,700 रुपयेLN मेडिकल College, भोपाल: 53.99 लाख रुपयेPeople’s Medical College, भोपाल: 53.33 लाख रुपये श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में NRI फीस में करीब 5.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। BDS की पढ़ाई भी हुई महंगी MBBS के साथ निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी वृद्धि की गई है। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज, शासकीय डेंटल यूनिवर्सिटी इंदौर, में BDS की फीस पिछले वर्ष की तरह 1.14 लाख रुपये रखी गई है। वहीं, निजी BDS कॉलेजों में फीस में करीब 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की वृद्धि हुई है। नए फीस स्ट्रक्चर के अनुसार निजी BDS की सालाना फीस कॉलेज के अनुसार करीब 1.98 लाख से 2.85 लाख रुपये तक हो गई है। MP में MBBS की 5,200 सीटें NEET-UG 2026-27 सत्र में मध्य प्रदेश में MBBS की कुल 5,200 सीटें उपलब्ध होंगी। पिछले सत्र में यह संख्या करीब 5,050 सीटें थी। यानी इस बार 150 सीटों का इजाफा हुआ है। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 3,000 सीटें और निजी मेडिकल कॉलेजों की 2,200 सीटें शामिल हैं। सीटों में बढ़ोतरी नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और मौजूदा कॉलेजों में सीटें बढ़ाए जाने के कारण हुई है। खरगोन, मंदसौर और रतलाम में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 सीटें तथा सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 50 अतिरिक्त सीटें शामिल होने से राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ी है। छात्रों के लिए बढ़ी चुनौती एक तरफ प्रदेश में MBBS की सीटों की संख्या बढ़ी है, वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी ने मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। सरकारी कॉलेजों में फीस स्थिर रहने से कम खर्च में MBBS करने का विकल्प विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, लेकिन सीमित सरकारी सीटों के कारण निजी कॉलेजों की ओर जाने वाले छात्रों को अब पहले से अधिक आर्थिक खर्च उठाना पड़ सकता है। NEET-UG 2026-27 के लिए छात्रों को प्रवेश लेने से पहले संबंधित कॉलेज की नवीनतम फीस, हॉस्टल, अन्य शुल्क और प्रवेश नियमों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। recent visitors 13

दातासिंह वाला बॉर्डर सील: चार लेयर सुरक्षा में रोका गया किसानों का जत्था, 29 अगस्त तक पड़ाव का ऐलान

Datasinghwala border sealed: Farmers’ convoy halted by four-layer security; encampment announced until August 29. नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने दातासिंह वाला (खनौरी) बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रविवार को बॉर्डर को चार लेयर सुरक्षा घेरे में सील कर दिया गया। पंजाब की ओर से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे 51 किसानों के जत्थे को हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया गया। किसानों और प्रशासन के बीच करीब डेढ़ घंटे में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कराने और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक वे 29 अगस्त तक बॉर्डर पर ही पड़ाव जारी रखेंगे। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत दोपहर बाद पंजाब की ओर से किसानों का जत्था हरियाणा की तरफ बढ़ा तो प्रशासन ने किसान नेताओं के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में काका सिंह कोटड़ा, बलदेव सिंह सरसा, इंद्रजीत पन्नीवाल, सुखदेव भोजराज और अमनजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा और एसपी कुलदीप सिंह ने किसानों की संख्या कम करने और मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा। किसान नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर बातचीत होनी चाहिए। पैदल दिल्ली जाने पर अड़े किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पैदल दिल्ली पहुंचना है। प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद किसान नेता पंजाब की ओर लौट गए और खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोबारा पड़ाव डाल दिया। किसानों ने ऐलान किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और 29 अगस्त तक बॉर्डर पर डटे रहेंगे। हरियाणा के किसानों को भी हिरासत में लिया गया दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हरियाणा के 33 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, कैथल की ओर से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के नेतृत्व में बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे 18 किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। शुभकरण सिंह की मौत स्थल से मिट्टी लेकर जाएंगे दिल्ली किसानों ने आंदोलन को भावनात्मक रूप देने के लिए खनौरी में उस स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 21 फरवरी 2024 को किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी। किसान नेताओं के अनुसार, इस मिट्टी को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। गैर-एसकेएम किसान संगठनों की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस मिट्टी को दिल्ली ले जाने की बात कही गई है। आंदोलन फिर गरमाने के संकेत दातासिंह वाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा और किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास के बीच एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन किसानों को हरियाणा में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं है, वहीं किसान अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बॉर्डर पर सुरक्षा और आंदोलन दोनों को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। recent visitors 18