दातासिंह वाला बॉर्डर सील: चार लेयर सुरक्षा में रोका गया किसानों का जत्था, 29 अगस्त तक पड़ाव का ऐलान

Datasinghwala border sealed: Farmers’ convoy halted by four-layer security; encampment announced until August 29. नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने दातासिंह वाला (खनौरी) बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रविवार को बॉर्डर को चार लेयर सुरक्षा घेरे में सील कर दिया गया। पंजाब की ओर से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे 51 किसानों के जत्थे को हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया गया। किसानों और प्रशासन के बीच करीब डेढ़ घंटे में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कराने और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक वे 29 अगस्त तक बॉर्डर पर ही पड़ाव जारी रखेंगे। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत दोपहर बाद पंजाब की ओर से किसानों का जत्था हरियाणा की तरफ बढ़ा तो प्रशासन ने किसान नेताओं के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में काका सिंह कोटड़ा, बलदेव सिंह सरसा, इंद्रजीत पन्नीवाल, सुखदेव भोजराज और अमनजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा और एसपी कुलदीप सिंह ने किसानों की संख्या कम करने और मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा। किसान नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर बातचीत होनी चाहिए। पैदल दिल्ली जाने पर अड़े किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पैदल दिल्ली पहुंचना है। प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद किसान नेता पंजाब की ओर लौट गए और खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोबारा पड़ाव डाल दिया। किसानों ने ऐलान किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और 29 अगस्त तक बॉर्डर पर डटे रहेंगे। हरियाणा के किसानों को भी हिरासत में लिया गया दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हरियाणा के 33 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, कैथल की ओर से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के नेतृत्व में बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे 18 किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। शुभकरण सिंह की मौत स्थल से मिट्टी लेकर जाएंगे दिल्ली किसानों ने आंदोलन को भावनात्मक रूप देने के लिए खनौरी में उस स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 21 फरवरी 2024 को किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी। किसान नेताओं के अनुसार, इस मिट्टी को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। गैर-एसकेएम किसान संगठनों की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस मिट्टी को दिल्ली ले जाने की बात कही गई है। आंदोलन फिर गरमाने के संकेत दातासिंह वाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा और किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास के बीच एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन किसानों को हरियाणा में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं है, वहीं किसान अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बॉर्डर पर सुरक्षा और आंदोलन दोनों को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। recent visitors 14

MP NEWS खाद बिक्री बंद: पोर्टल के मिलान के नाम पर किसानों पर फिर संकट, सरकार के किसान हितैषी दावों पर उठे सवाल

MP NEWS: Fertilizer sales halted: Farmers face another crisis due to portal matching, raising questions about the government’s farmer-friendly claims. भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों को खेती के लिए खाद की जरूरत के बीच सरकार के एक आदेश ने नई चिंता खड़ी कर दी है। सामने आए आदेश के मुताबिक 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से प्रदेश में उर्वरक की बिक्री आगामी आदेश तक बंद कर दी गई है। आदेश में भारत सरकार के FMS पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का Reconciliation यानी मिलान किए जाने का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार बिक्री बंद रहने की अवधि में विपणन संघ के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संबंधित केंद्रों से किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक का विक्रय नहीं किया जाएगा। पोर्टल का मिलान जरूरी, लेकिन किसानों की परेशानी का क्या? सरकार की ओर से स्टॉक और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान पारदर्शिता तथा वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया का सीधा असर किसान पर क्यों पड़े? खेती के मौसम में किसान को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री अचानक रोकने के फैसले से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों की चिंता रहती है। किसान पूछ रहे—खाद चाहिए या पोर्टल की प्रक्रिया? सरकार लगातार किसान हित और कृषि को प्राथमिकता देने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद बिक्री रोकने के आदेश ने सरकार की किसान-हितैषी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का सवाल है कि FMS पोर्टल का स्टॉक मिलान विभागीय स्तर पर करते हुए खाद की बिक्री जारी क्यों नहीं रखी जा सकती? यदि व्यवस्था में तकनीकी या स्टॉक संबंधी समस्या है तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते? क्या यह फैसला किसान विरोधी साबित होगा? विपक्ष और किसान संगठनों को सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। किसानों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी सिस्टम की तकनीकी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का बोझ आखिरकार अन्नदाता पर ही डाला जा रहा है। सरकार से किसानों के सवाल खाद बिक्री बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? बिक्री दोबारा शुरू करने की निश्चित तारीख क्यों नहीं बताई गई? स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी? इस दौरान जरूरतमंद किसानों को खाद कैसे मिलेगी? यदि किसी किसान की फसल खाद के अभाव में प्रभावित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब निगाह इस बात पर है कि सरकार खाद बिक्री दोबारा कब शुरू करती है और किसानों को इस दौरान खाद उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है। recent visitors 13

मध्य प्रदेश: आज किसानों का भोपाल कूच व CM हाउस के घेराव की तैयारी, मूंग की 100% खरीदी पर अड़े; अब आगे क्या?

Madhya Pradesh: Farmers set to march to Bhopal and lay siege to the CM’s residence today, adamant on 100% procurement of moong; what next? मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है। किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, फसल बीमा में सुधार, बिजली कटौती बंद करने और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गयाकिसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतानपहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबावकिसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोपकिसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी। इन मांगों पर अड़े किसानकिसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है। recent visitors 19

सागर : नरवाई जलाने पर 35 किसानों पर FIR: 27 नामजद और 8 अज्ञात किसानों के खिलाफ हुआ केस,  अर्थदंड की भी हो सकती है कार्रवाई

Sagar: FIR against 35 farmers for burning stubble: Case filed against 27 named and 8 unknown farmers, fine action can also be taken सागर । जिले में फसल कटाई के बाद खेत में खड़ी नरवाई जलाने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर के नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाने और नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश के बाद जिले में दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। नरवाई की आग फैलने से आसपास के किसानों की फसलें जलने की घटनाएं जिले में सामने आई हैं। जिसके बाद प्रशासन एक्शन मोड़ में आया। प्रशासन ने नरवाई जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अब तक जिले में 35 एफआईआर दर्ज कराई हैं। जिसमें 27 नामजद और 8 अज्ञात किसानों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए गए हैं। किसान अन्य विकल्प पर करें काम- कलेक्टर कलेक्टर संदीप जीआर ने बताया कि नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषण होता है और फॉरेस्ट फायर या अग्नि दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। किसानों को नरवाई नहीं जलाकर उसके विकल्प पर काम करने की जरूरत है। नरवाई जलाने पर जिले में प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि वे लगातार ऐसी घटनाओं पर नजर रखें। यदि कोई नरवाई जलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए। किसानों पर हो सकती है आर्थिक जुर्माने की कार्रवाई  शासन के निर्देश के अनुसार, जिला दंडाधिकारी किसानों को नरवाई नहीं जलाने के लिए नियमित समझाइश दें। समझाइश के बाद भी कोई नियमों का उल्लंघन करे तो उस पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान है। यदि किसान का रकबा 2 एकड़ से कम है तो पर्यावरण क्षति पूर्ति राशि 2500, 2 एकड़ से 5 एकड़ होने पर 5000 और 5 एकड़ से अधिक होने पर 15000 रुपए पर्यावरण क्षति पूर्ति राशि वसूली जाएगी। कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से कहा है कि वे खेतों में नरवाई फसल की कटाई के बाद बचा अवशेष नहीं जलाएं। किसान नरवाई के निस्तारण के लिए वैकल्पिक उपाय जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर का उपयोग, जैविक खाद बनाने, मल्चर मशीन का उपयोग करने या कंपोस्टिंग विधि से अवशेषों को नष्ट करने का काम करें। नरवाई जलाने पर इनके खिलाफ हुई कार्रवाई  नरवाई जलाने के मामलों में सागर नगर के ग्राम पटकुई में अज्ञात के विरुद्ध, सागर ग्रामीण में ग्राम पथरिया हाट में बहादुर चौहान, रहली के ग्राम जूना और मडला में रामअवतार कुर्मी, ग्राम भैंसा में अज्ञात के विरुद्ध, खुरई के ग्राम बसाहरी में अरविंद पटेल, केसली के ग्राम पुतर्रा में यदुवीर लोधी, लक्ष्मी लोधी, ग्राम घाना में हेमराज यादव, धमेंद्र यादव, ग्राम जरूआ में चंदन राजपूत, ग्राम जैतपुर डोमा में शिखरचंद जैन, शुभम स्वामी, बांदरी के ग्राम मोठी में अज्ञात के विरुद्ध, देवरी के ग्राम नादपुर में भूपेन्द्र लोधी, ग्राम नादपुर में प्रभाबाई अहिरवार, ग्राम घोषी पट्टी में जनकरानी, राजेन्द्र और पुरुषोत्तम, बीना के ग्राम बेलई में अज्ञात के विरुद्ध, जैसीनगर के ग्राम रमपुरा में राजाभाई दांगी, गोविंद सिंह दांगी, गढ़ाकोटा के ग्राम खदरी में अमोल कुर्मी, ग्राम फुलर के प्रीतम कुर्मी, बंडा के दलपतपुर के ग्राम में अज्ञात, सुरखी के ग्राम सुल्तानपुर में अज्ञात, तरौली में अज्ञात, बांदरी के ग्राम विदवास में राजकुमार यादव, ग्राम उजनेट में मोहन, अमन, हरिराम, शैलेंद्र , राहतगढ़ के ग्राम हिरणखेड़ा के नाथूराम, बीना के ग्राम गोदना में अज्ञात, ग्राम बमोरी खुर्द में अज्ञात, बंडा के ग्राम क्वायला में अज्ञात और राहतगढ़ के ग्राम सिनेमा में माखन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। recent visitors 126

नरवाई जलाने पर 7 किसानों पर FIR: किसानों लगभग ने 50 एकड़ की फसल में लगाईं थी आग; जांच के बाद कार्रवाई

FIR against 7 farmers for burning stubble: Farmers had set fire to crops of about 50 acres; action after investigation छिंदवाड़ा । अमरवाड़ा थाने में नरवाई जलाने के मामले में 7 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 3 अप्रैल को किसानों द्वारा लगाई गई आग से लगभग 50 एकड़ में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल जल गई थी। थाना प्रभारी राजेंद्र धुर्वे ने बताया कि जिले में नरवाई जलाने पर 21 मार्च से प्रतिबंध लगा हुआ है। किसानों ने शुरू में शॉर्ट सर्किट से आग लगने का बहाना बनाया, लेकिन राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम की जांच में पाया गया कि आग जानबूझकर लगाई गई थी। इन 7 किसानों पर FIR जिन किसानों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें नारायण लोधी, मोतीलाल साहू, ओमप्रकाश साहू, अजय साहू, दीनदयाल साहू, श्याम सिंह राजपूत और शक्ति नारायण राजपूत शामिल हैं। सभी अमरवाड़ा के निवासी हैं। घटना के बाद राजस्व विभाग और हल्का पटवारी ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का पंचनामा बनाया। आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाने के लिए फायर फाइटर की मदद लेनी पड़ी। प्रशासन ने मामले की शिकायत पर पुलिस में प्रकरण दर्ज कराया है। recent visitors 106

समृद्धि कृषि यंत्र एमएस इंटरप्राइजेज के प्रयास से कृषि करना हुआ और आसान

Samriddhi Krishi Yantra Agriculture made easier with the efforts of MS Enterprises भोपाल (ब्यूरो चीफ)। राजधानी भोपाल के बायपास रोड मीणा चौराहा साहू मार्केट के सामने एमएस एंटरप्राइजेज किसानों के लिए बड़ा तोहफा लाया है। एमएस इंटरप्राइजेज के समृद्धि किसान यंत्र से अब कृषि करना और आसान हो गया है। एमएस एंटरप्राइजेज किसान भाइयों के लिए ऐसे कृषि यंत्र बना रही है, जो क्वालिटी में दमदार और मजबूत हैं। जो कृषि के लिए बड़े फायदेमंद साबित हो रहे हैं। एमएस एंटरप्राइजेज का खुद का कारखाना हेै, जिसको आईएसओ ने मान्यता दी है। जहां प्रशिक्षित कारीगर आधुनिक तकनीकि आधारित अंतराष्ट्रीय स्तर के ब्रांड अपोलो और सेल आयरन से कृषि तैयार करते हैं। कंपनी के संचालक शिवम विश्वकर्मा ने बताया कि जब से कंपनी ने कृषि यंत्र बनाने की दिशा में कदम रखा, तब से अभी तक कोई शिकायत नहीं आई। सभी किसान कृषि यंत्र से अपनी कृषि को समृद्ध कर अपने आपको आत्मनिर्भर और सशक्त बना रहे हैं। सभी इंप्लीमेंट किसानों की जरूरत के मुताबिक बनाए जाते हैं। शिवम विश्वकर्मा ने बताया कि एमएस एंटरप्राइजेज किसानों के लिए मुख्य रूप से कल्टीवेटर, बलराम कल्टीवेटर, रोटो कल्टीवेटर, ट्रिजर, ट्रॉली्र डोजर, बंड फारमर आदि यह सभी इंप्लीमेंट एमपी और पंजाप पैटर्न पर बनाए जाते हैं। अभी एमएस एंटरप्राइजेज कृषि के लिए जमीन तैयार करने यानि मिट्टी की खोक वैज्ञानिक रूप से तैयार करते हैं। जब कृषि समृद्ध होगी तो किसान भी आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा। कंपनी ने किसानों से वादा किया है कि हम ऐसे कृषि यंत्र बनाएंगे कि खेती को लाभ का धंधा बनाने से कोई रोक नहीं सकता है। आगे भी एमएस एंटरप्राइजेज अपने स्वयं के बनाए सीड्रिल की टेस्टिंग कर रहा है, जो जल्द ही किसानों को उपलब्ध हो जाएगा। कंपनी ने अभी तक जितने भी यंत्र बनाए हैं, उन सभी की कम से कम 3 सीजन टेस्टिंग हैं, उसके बाद भी किसानों को विक्रय के लिए देते हैं। किसानों का जबरदस्त हमारे कृषि यंत्रों की ओर दिखाई दे रहा है। शिवम विश्वकर्मा ने किसान भाइयों से आग्रह है कि आप थोड़े से पैसे बचाकर कच्चे लोहे के यंत्र मत घर ले जाइए। आप एमएस एंटरप्राइजेज से समृद्धि किसान यंत्र खरीदिए, आपको 90 दिनों की फुल गारंटी मिलेगी। हमारा उद्देश्य धंधा करना नहीं, बल्कि किसान को समृद्धि कृषि यंत्र से समृद्ध बनाना है। जब किसान समृद्ध होगा, तो हम खुशहाल होंगे और हमारा देश भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा। recent visitors 136

किसान आज चंडीगढ़ कूच करेंगे: पुलिस ने पंजाब बॉर्डर सील किया; किसान नेता बोले- हमारा उद्देश्य टकराना नहीं, हमें बदनाम करने की साजिश

Farmers will march to Chandigarh today: Police sealed Punjab border; Farmer leader said- our aim is not to clash, it is a conspiracy to defame us चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) आज (5 मार्च) से चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा लगाएगा। इसके लिए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में चंडीगढ़ की तरफ कूच करेंगे। हालांकि, इससे पहले मंगलवार को ही कई बडे़ नेताओं को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया है और नजरबंद किया है। किसान चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में मोर्चा लगाने की तैयारी में हैं, लेकिन उन्हें अब तक चंडीगढ़ प्रशासन से अनुमति नहीं मिली है। किसान नेता जोगिदर सिंह उगराहां ने वीडियो जारी कर किसानों से कहा है कि कूच के दौरान जहां पुलिस रोके, वहीं सड़क किनारे खाली जगह पर बैठ जाएं। हमारा उद्देश्य टकराना नहीं है। पंजाब पुलिस ने हमें बदनाम करने की साजिश कर रखी है। वहीं, चंडीगढ़ पुलिस ने अपनी सीमाएं सील करना शुरू कर दी हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने करीब 1500 कर्मी तैनात किए हैं। साथ ही रिजर्व फोर्स तैनात करने की भी तैयारी है। इससे पहले, चंडीगढ़ पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें लोगों को 12 सड़कों से न गुजरने की सलाह दी है। 1. SKM ने सभी राज्यों में धरना लगाने की घोषणा की SKM ने सभी राज्यों की राजधानियों में 5 मार्च को पक्का मोर्चा लगाने का ऐलान किया था। इसी के तहत पंजाब के किसानों ने चंडीगढ़ में मोर्चा लगाने की घोषणा की। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान नेताओं को 3 मार्च को बैठक के लिए आमंत्रित किया था। यह बैठक पंजाब भवन में शाम 4 बजे तय की गई थी। 2. CM मान ने किसानों के साथ बैठक की, बेनतीजा रही 3 मार्च को SKM के सभी प्रमुख नेता सुबह चंडीगढ़ के किसान भवन पहुंचे। इसके बाद वे शाम 4 बजे पंजाब भवन पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री मान के साथ उनकी बैठक लगभग 2 घंटे चली। इस बैठक में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां भी मौजूद थे। हालांकि, यह बैठक बेनतीजा रही। बैठक के बाद किसानों ने घोषणा की कि वे चंडीगढ़ में मोर्चा लगाएंगे। 3. CM मान गुस्से में बोले- आप मोर्चा लगा लो, मीटिंग छोड़ निकले किसान नेताओं बलबीर सिंह राजेवाल और जोगिंदर सिंह उगराहां ने आरोप लगाया कि वे 18 मांगों का एजेंडा लेकर गए थे, लेकिन बैठक में केवल 8 मांगों पर ही सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई। बैठक के दौरान CM मान ने पूछा था कि 5 मार्च के मोर्चे को लेकर क्या योजना है? किसानों ने जवाब दिया कि अभी बैठक चल रही है। इस पर CM ने नाराज होकर कहा, ‘आप पहले मोर्चा लगा लो’। फिर गुस्से में बैठक छोड़कर चले गए। 4. CM ने लिखा- बंद से नुकसान होता है बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “बंद या चक्का जाम से आम जनता को ही परेशानी होती है, और इससे पंजाब को नुकसान होता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी लिखा कि वह किसानों का सम्मान करते हैं। 5. चंडीगढ़ में कई किसान नेता हिरासत में लिए किसानों की ओर से चंडीगढ़ में मोर्चा लगाने की घोषणा के बाद 4 मार्च की सुबह पंजाब पुलिस ने कई बड़े किसान नेताओं के घर छापे मारे। इस दौरान कई को हिरासत में लिया और कुछ को नजरबंद कर दिया। SKM ने ऐलान किया कि वह हर हाल में पक्का मोर्चा लगाएंगे। पंजाब के सभी किसान संगठनों ने किसानों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। 6. CM मान बोले- बैठक और मोर्चा साथ नहीं चल सकते 4 मार्च को CM मान ने कहा, “मैंने किसानों से पूछा कि 5 मार्च के मोर्चे का क्या होगा? उन्होंने कहा कि यह जारी रहेगा। फिर मैंने पूछा कि मुझे ढाई घंटे तक क्यों बैठाया गया, जब उनकी मांगें मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं, बल्कि केंद्र सरकार से जुड़ी थीं। किसानों का कहना था कि डर के कारण मैंने बैठक बुलाई है, लेकिन मैंने साफ कहा कि अगर आपको लगता है कि मैं डरकर बैठक कर रहा हूं, तो यह गलत है। मैं किसानों का मित्र हूं, लेकिन बैठक और मोर्चा एक साथ नहीं चल सकते।” recent visitors 136