बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामला: हाई कोर्ट सख्त, आरोपी की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज; एसआईटी गठन के दिए आदेश

Bageshwar Dham rape case: High Court stern, rejects second bail plea of accused; orders formation of SIT विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम में मार्च महीने में एक नाबालिग से हुए दुष्कर्म के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए जांच का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने आरोपित राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया और छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को एक विशेष जांच टीम गठित करने का स्पष्ट आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने इस नई गठित होने वाली टीम को यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी है कि पीड़ित नाबालिग का यौन उत्पीड़न वास्तव में किस व्यक्ति ने किया था और उसके गर्भ से प्राप्त हुए भ्रूण का जैविक पिता कौन है। अदालत ने इस मामले की विस्तृत जांच दो महीने की समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अकेले ही बागेश्वर धाम पहुंची थी नाबालिग मामले से जुड़ी अभियोजन पक्ष की जानकारी के अनुसार, पीड़ित नाबालिग बालिका 15 मार्च को अकेले ही बागेश्वर धाम पहुंची थी। धाम में रहने के दौरान 17 मार्च को उसकी मुलाकात आरोपित राजू जाटव से हुई थी। आरोप के अनुसार, राजू जाटव उस नाबालिग को सुरक्षित उसके घर पहुंचाने की बात कहकर अपने साथ ले गया था। इसके बाद वह पीड़िता को लगभग 15 दिनों तक अपने पास रखता रहा और बाद में उसे ट्रेन के माध्यम से पचोर ले गया। जब नाबालिग के गायब होने पर पड़ताल शुरू हुई, तब पुलिस ने राजू जाटव की पत्नी से मिली सटीक जानकारी और निशानदेही के आधार पर नाबालिग को सकुशल बरामद किया था। जांच के दौरान पीड़िता के गर्भवती होने की बात सामने आई थी। इसके बाद अदालत के निर्देश पर पीड़िता का गर्भपात कराया गया और गर्भ में पल रहे भ्रूण की वैज्ञानिक डीएनए जांच कराने के कड़े आदेश दिए गए थे। डीएनए रिपोर्ट और बयानों का विरोधाभास इस मामले में नया और बड़ा मोड़ उस समय आया जब 29 अगस्त को फोरेंसिक प्रयोगशाला से भ्रूण की डीएनए जांच रिपोर्ट सामने आई। इस आधिकारिक डीएनए रिपोर्ट में राजू जाटव को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया। इसके बाद जब नाबालिग पीड़िता के बयान अदालत के समक्ष दर्ज कराए गए, तब उसने भी अपने पूर्व बयानों के विपरीत जाते हुए राजू जाटव द्वारा दुष्कर्म किए जाने से साफ इन्कार कर दिया। हालांकि, इससे पहले पुलिस प्रशासन के समक्ष दर्ज कराए गए अपने बयानों में नाबालिग ने राजू पर जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पीड़िता के अलग-अलग बयानों में आए इस विरोधाभास और डीएनए रिपोर्ट के वैज्ञानिक नतीजों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत महसूस की। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने विशेष जांच टीम को नए सिरे से निष्पक्ष पड़ताल करने के निर्देश दिए। धाम पीठाधीश्वर की श्रद्धालुओं से विशेष अपील दूसरी तरफ, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी महिलाओं और माताओं से विशेष अपील की। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे धाम में कभी भी अकेले न आएं। पीठाधीश्वर ने यह सलाह भी दी कि यात्रा के दौरान किसी भी अनजान व्यक्ति या वहां मौजूद सेवादारों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। हालांकि, उन्होंने अपनी इस अपील में नाबालिग पीड़िता से जुड़े इस प्रकरण का कोई सीधा उल्लेख नहीं किया था। अब उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित विशेष जांच टीम यह पता लगाएगी कि वास्तव में उस नाबालिग के साथ यौन अपराध किसने किया था। दो महीने की अवधि के भीतर यह टीम अपनी पूरी विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी। recent visitors 3

निजी अस्पतालों के पंजीयन पर जबलपुर हाई कोर्ट सख्त, चार दिन में ताजा स्थिति रिपोर्ट देने को कहा, 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Jabalpur High Court takes strict action on registration of private hospitals, asks for latest status report within four days, next hearing on October 12 विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि फायर सेफ्टी और नगर निगम की आवश्यक अनुमति के बिना भी नए निजी अस्पतालों को पंजीयन दिए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार के अनुरोध पर ताजा रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। जबलपुर में करीब 160 अस्पताल-नर्सिंग होम लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि जबलपुर शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। इनमें 63 का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए जाने की जानकारी सामने आई है। भौतिक सत्यापन के बिना पंजीयन का आरोप याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा नए निजी अस्पतालों के पंजीयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि अस्पतालों का भौतिक सत्यापन किए बिना ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए जा रहे हैं। याचिकाओं में इस प्रक्रिया को नियमों के विपरीत बताते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। फायर सेफ्टी और नगर निगम की अनुमति पर सवाल याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से सवाल उठाया है कि यदि किसी अस्पताल के पास आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र अथवा नगर निगम की अनुमति नहीं है, तो उसका पंजीयन किस आधार पर किया जा रहा है। सोमवार को राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने बताया कि पूर्व में स्थिति रिपोर्ट पेश की जा चुकी है और वर्तमान स्थिति से संबंधित ताजा रिपोर्ट के लिए चार दिन का समय चाहिए। कोर्ट ने समय देते हुए निर्देश दिया कि नई रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकें। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पैरवी की। अब 12 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार की ताजा रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की दिशा तय होगी। recent visitors 5

इनमोसा उप-महासचिव गोकुल गोहे के नेतृत्व में ऐतिहासिक इनमोसा दिवस।

Historic INMOSA Day under the leadership of INMOSA Deputy General Secretary Gokul Gohe. हरिप्रसाद गोहे  आमला/पाथाखेड़ा/सारणी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) पाथाखेड़ा क्षेत्र में इनमोसा संगठन द्वारा 8 अक्टूबर गुरुवार को स्थापना दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इनमोसा उप-महासचिव वेकोलि गोकुल प्रसाद गोहे ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन वेकोलि क्षेत्रीय कार्यालय पाथाखेड़ा में किया जाएगा। संगठन की स्थापना वर्ष 1956 में माइनिंग क्षेत्र के कार्यों के लिए हुई थी। इसके रचयिता स्व. जे.के. बनर्जी थे। संगठन भूमिगत कोयला खदानों में सुरक्षित कार्य व्यवस्था और कर्मचारियों के हितों के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अच्युत घटक, निदेशक (तकनीकी) कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का वर्चुअल संबोधन होगा। अध्यक्षता हेमंत शरद पांडे, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, वेकोलि नागपुर करेंगे। विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय महाप्रबंधक जितेंद्र कुमार गुप्ता एवं जीएम (संचालन) एम. सत्यनारायण होंगे। केंद्रीय महासचिव पी.एन. मिश्रा बराकर का भी वर्चुअल संबोधन होगा। कार्यक्रम में माइनिंग कार्य एवं खदानों में सुरक्षा के साथ कार्य करने को लेकर विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। recent visitors 7