ईद मिलादुन्नबी पर युवा कांग्रेस ने किया जुलूस-ए-मोहम्मदी का भव्य स्वागत

Youth Congress accorded a grand welcome to the Juloos-e-Muhammadi on Eid-e-Milad-un-Nabi. हरिप्रसाद गोहेआमला। ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बोड़खी में निकाले गए जुलूस-ए-मोहम्मदी का युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। विधानसभा उपाध्यक्ष राकेश सोने और नगर महासचिव दीपक बेले के नेतृत्व में जुलूस में शामिल लोगों को स्वल्पाहार वितरित किया गया और ईद की मुबारकबाद दी गई। इस अवसर पर युवा नेता अक्षय बामने ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी प्रेम, शांति, अमन और भाईचारे का संदेश देती है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आपसी सद्भाव और एकता को मजबूत करने का काम करते हैं। कार्यक्रम के दौरान पूर्व पार्षद विजय अतुलकर, शहर अध्यक्ष अजय सोलंकी, विजय सोनू बछले, वीरू तोमर, बंटू बेले सहित युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने जुलूस का स्वागत कर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। recent visitors 18

MP NEWS खाद बिक्री बंद: पोर्टल के मिलान के नाम पर किसानों पर फिर संकट, सरकार के किसान हितैषी दावों पर उठे सवाल

MP NEWS: Fertilizer sales halted: Farmers face another crisis due to portal matching, raising questions about the government’s farmer-friendly claims. भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों को खेती के लिए खाद की जरूरत के बीच सरकार के एक आदेश ने नई चिंता खड़ी कर दी है। सामने आए आदेश के मुताबिक 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से प्रदेश में उर्वरक की बिक्री आगामी आदेश तक बंद कर दी गई है। आदेश में भारत सरकार के FMS पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का Reconciliation यानी मिलान किए जाने का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार बिक्री बंद रहने की अवधि में विपणन संघ के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संबंधित केंद्रों से किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक का विक्रय नहीं किया जाएगा। पोर्टल का मिलान जरूरी, लेकिन किसानों की परेशानी का क्या? सरकार की ओर से स्टॉक और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान पारदर्शिता तथा वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया का सीधा असर किसान पर क्यों पड़े? खेती के मौसम में किसान को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री अचानक रोकने के फैसले से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों की चिंता रहती है। किसान पूछ रहे—खाद चाहिए या पोर्टल की प्रक्रिया? सरकार लगातार किसान हित और कृषि को प्राथमिकता देने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद बिक्री रोकने के आदेश ने सरकार की किसान-हितैषी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का सवाल है कि FMS पोर्टल का स्टॉक मिलान विभागीय स्तर पर करते हुए खाद की बिक्री जारी क्यों नहीं रखी जा सकती? यदि व्यवस्था में तकनीकी या स्टॉक संबंधी समस्या है तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते? क्या यह फैसला किसान विरोधी साबित होगा? विपक्ष और किसान संगठनों को सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। किसानों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी सिस्टम की तकनीकी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का बोझ आखिरकार अन्नदाता पर ही डाला जा रहा है। सरकार से किसानों के सवाल खाद बिक्री बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? बिक्री दोबारा शुरू करने की निश्चित तारीख क्यों नहीं बताई गई? स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी? इस दौरान जरूरतमंद किसानों को खाद कैसे मिलेगी? यदि किसी किसान की फसल खाद के अभाव में प्रभावित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब निगाह इस बात पर है कि सरकार खाद बिक्री दोबारा कब शुरू करती है और किसानों को इस दौरान खाद उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है। recent visitors 15

मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल में अयोग्य अधिकारियों को सौंपे मलाईदार पद

Lucrative posts in the Madhya Pradesh Electricity Board handed over to incompetent officials. भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर अपात्रों को करंट चार्ज सौंपे जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में मण्डल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे गए कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं (AE) को करंट चार्ज दिया गया है, जो हाल ही में संपन्न पदोन्नति प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए गए। मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने इस व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में जिस अधिकारी को विभाग ने कार्यपालन यंत्री पद पर नियमित पदोन्नति के योग्य नहीं माना, उसी अधिकारी को करंट चार्ज के माध्यम से उसी पद का दायित्व सौंप दिया गया है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ले रहे वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सेवा नियमों एवं पात्रता की कसौटी पर कार्यपालन यंत्री बनने के योग्य नहीं है, तो उसे उसी पद का करंट चार्ज किस नियम, किस प्रशासनिक आवश्यकता और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से दिया गया। ऐसे अधिकारी उसी पद के प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय निर्णय ले रहे हैं, जबकि नियमित पदोन्नति के लिए उन्हें पात्र नहीं माना गया। समकक्ष अधिकारियों में पनप रही कुंठा संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से मण्डल संवर्ग के वरिष्ठ एवं पात्र अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अनेक अधिकारी 35 से 38 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद भी अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उनके लिए सुरक्षित पदों पर अन्य संवर्ग के अधिकारियों से करंट चार्ज के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से समकक्ष अधिकारियों में कुंठा का भाव पनप रहा है। कार्यपालन यंत्री के करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा की मांग मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि बोर्ड संवर्ग के लिए सुरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए। पात्र अधिकारियों को ही उक्त पदों का दायित्व सौंपा जाए। recent visitors 23

MP में 24×7 खुलेंगे Hotel-Mall-Shops! राज्यपाल की मंजूरी के बाद नए नियम लागू, जानिए पूरी खबर

Hotels, malls, and shops in MP to remain open 24×7! New rules implemented following the Governor’s approval—read the full story. भोपाल । मध्यप्रदेश में होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक संस्थान अब दिन ही नहीं, बल्कि पूरी रात भी खुले रह सकेंगे. मध्यप्रदेश विधानसभा के बाद अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह अधिनियम अब प्रदेश भर में लागू हो गया है. प्रदेश में होटल, मॉल आदि प्रतिष्ठिान 24 घंटे और सभी 7 दिन खुल सकेंगे. इससे लोग रात में भी जाकर खरीदारी कर सकेंगे. इसके साथ ही लोगों को भी रात में काम के अवसर मिलेंगे. संस्थानों को अलग-अलग शिफ्ट में कर्मचारियों को रखना होगा. हालांकि, शराब की दुकानों की समय सीमा का निर्णय स्थानीय प्रशासन लेगा. कराना होगा सिर्फ एक बार रजिस्ट्रेशनराज्य सरकार ने नए अधिनियम में संस्थानों के लिए अपने प्रतिष्ठिान के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आसान कर दी है. अब संस्थान को इसकी नियमानुसार विभाग को सूचना देनी होगी. इसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन कर उन्हें इसका सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा. रजिस्ट्रेशन बार-बार रिन्यु नहीं कराना होगा. संस्थान बंद होने पर लिखित में इसकी सूचना देनी होगी, इसके बाद रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा. काम के घंटे लेबर लॉ के हिसाब से हीभले ही मॉल, दुकान और अन्य संस्थानों को 24 घंटे खोलने का नियम बना दिया गया हो, लेकिन संचालकों को कर्मचारियों को रखने और उसने कार्य कराने के लिए श्रम विभाग के न्यूनतम कार्य के घंटों के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. किसी भी कर्मचारी से हर दिन के निर्धारित और साप्ताहिक 48 घंटों से अधिक काम कराने की अनुमति नहीं होगी. रात्रि के समय महिलाओं को भी काम की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी. अतिरिक्त काम कराने के लिए संस्थान को ओवरटाइम वेतन कर्मचारी को देना होगा. दवाब बनाने नहीं रख सकेंगे कर्मचारी के डॉक्युमेंटनए नियमों में कर्मचारियों के मूल डॉक्युमेंट और कोई अन्य सामान संस्थान द्वारा रखे जाने पर रोक लगा दी है. दरअसल, कई बार शिकायतें सामने आती हैं कि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के मूल दस्तावेज या कोई दूसरा सामान रख लिया जाता है, ताकि कर्मचारी काम छोड़कर न जा सके. नई संहिता में कर्मचारियों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में भी प्रावधान किया गया है. प्रतिष्ठान को कार्यस्थल पर साफ-सफाई, सुरक्षा उपकरण और आपात स्थिति से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी. शिकायतों के लिए बनाई जाएंगी समितियांकर्मचारियों की समस्याओं को निपटाने के लिए समितियां बनाई जाएंगी. कर्मचारी संबंधित समितियों और इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी को अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. श्रम विभाग को अधिकार होंगे कि वे जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रतिष्ठिान की जांच कर सकेंगे और दस्तावेज मांगकर उसकी जांच कर सकेंगे. यदि जांच के दौरान किसी तरह के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. recent visitors 20

स्थाई शिक्षक भर्ती 2018 को पूर्ण करने पात्र अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम से लगाई गुहार

Eligible candidates appealed to the Deputy CM to complete the Permanent Teacher Recruitment 2018. निराशा के नहीं छट रहे बादल, तीसरी काउंसलिंग की मांग  भोपाल। मध्य प्रदेश में स्थाई शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद शिक्षा विभाग पद भरने को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। वर्ष 2018 की स्थाई शिक्षक भर्ती आज तक अधूरी है। जिसको तीसरी काउंसलिंग के साथ पूर्ण कराने की मांग को लेकर चयनित अभ्यर्थियों ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को ज्ञापन पत्र सौंपा है। पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री के अलावा, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन देकर भर्ती प्रकिया पूरी करने की मांग की है। 2018 से चल रही प्रक्रिया फिर भी अधूरी, हो रहे ओवरयेज  शिक्षक भर्ती 2018 के चयनित उम्मीदवार नियुक्ति पत्र का इंतजार पिछले 6 से 7 वर्षों से कर रहे हैं। चयनित अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक के 5,935 और माध्यमिक शिक्षक के 2,237 पहली काउंसिलिंग से रिक्त रहे पदों पर तीसरी काउंसलिंग आयोजित की जाए, ताकि शेष पदों पर चयन सूची जारी हो और नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि विभाग की उदासीनता के कारण कई उम्मीदवार ओवरएज हो चुके हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। अधिकार मिलने तक लड़ाई जारी पात्रता परीक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल रविदास सहित दिनेश बामनिया, लीलेश कुमार आदि ने बताया कि हमने वर्षों तक मेहनत की और परीक्षा पास की, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हमें नियुक्ति नहीं मिल रही। हमारी मांग है कि तत्काल शेष पदों पर तीसरी काउंसलिंग कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। recent visitors 26

मध्य प्रदेश: आज किसानों का भोपाल कूच व CM हाउस के घेराव की तैयारी, मूंग की 100% खरीदी पर अड़े; अब आगे क्या?

Madhya Pradesh: Farmers set to march to Bhopal and lay siege to the CM’s residence today, adamant on 100% procurement of moong; what next? मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है। किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, फसल बीमा में सुधार, बिजली कटौती बंद करने और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गयाकिसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतानपहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबावकिसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोपकिसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी। इन मांगों पर अड़े किसानकिसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है। recent visitors 20

एपी गज़ब फर्जी डॉक्टर ने सरकार को लगाया लाखों का चूना, एक साथ तीन जिलों में करता रहा नौकरी

Bizarre case from AP: Fake doctor swindles the government out of lakhs; held jobs in three districts simultaneously. मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक-एक कर चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित फर्जी डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी कर रहा था और वेतन ले रहा था। जानकारी के मुताबिक वो अब तक तीनों जिलों में मिलाकर 64 लाख रुपये के करीब वेतन ले चुका है। तीन जिलों में एक साथ नौकरीमध्यप्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर तीनों जिलों में डॉक्टर महेश चंद शर्मा की अलग-अलग कर्मचारी आईडी, अलग-अलग पैन नंबर और अलग-अलग आधार संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली इस फर्जीवाड़े को वर्षों तक पकड़ नहीं सकी। शुरुआती आंकलन के अनुसार आरोपी ने वेतन के रूप में सरकार को करीब 64 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। तीन पहचान, नहीं पकड़ पाया सिस्टमजांच में सामने आया कि आरोपी ने प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में आधार का अधूरा नंबर जमा होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। घर बैठे लगती रही ऑनलाइन हाजिरीविभागीय सूत्रों के अनुसार आरोपी उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी दिखाई देता था। वह सार्थक ऐप के माध्यम से जिले और कई बार प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में भी वह कई बार अनुपस्थित मिला, जिसके कारण नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लाखों रुपये वेतन लिया पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपए मानदेय मिलता था। अनुमानित भुगतान इस प्रकार है- इस प्रकार आरोपी ने तीनों जिलों से मिलाकर करीब 64 लाख रुपए का सरकारी भुगतान प्राप्त किया। स्वास्थ्य मंत्री बोले- एफआइआर भी होगी, वसूली भीमामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल प्रवास के दौरान सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की सेवा समाप्त करने के साथ उसके द्वारा लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी नहीं रखी और समय रहते अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। recent visitors 28