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पणजी,

निर्देशक ब्लेसी का कहना है कि उनकी फिल्म ‘आदुजीविथम’ जीवन और उम्मीद की प्रेरक गाथा है। मलयालम फ़िल्में, आदुजीविथम और थानुप, ने गोवा में 55वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव (इफ्फी) में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। आज यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में, दोनों फिल्मों के कलाकारों और फिल्म-निर्माण कर्मियों ने मीडिया को संबोधित किया और रचनात्मक प्रक्रिया एवं फिल्मों के गहन विषयों के बारे में जानकारी साझा की।

प्रशंसित फिल्म निर्माता ब्लेसी द्वारा निर्देशित, आदुजीविथम सबसे से ज्यादा बिकने वाले बेन्यामिन के उपन्यास पर आधारित है, जो जीवन को बनाये रखने की एक दर्दनाक कहानी है। यह फिल्म नजीब की कहानी है, जो केरल में अपने परिवार को छोड़कर मध्य-पूर्व में बेहतर जीवन की तलाश में जाता है, लेकिन खुद को एक बकरी के खेत में गुलाम पाता है। अपनी पहचान से वंचित, नजीब अपनी भावनाओं को बचाने के लिये सभी बाधाओं से लड़ता है, उसे खेत में बकरियों और ऊंटों के साथ बने बंधन में सांत्वना मिलती है।

ब्लेसी ने अपने संबोधन में इस कहानी के उन पर पड़े गहरे प्रभाव को साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे नजीब की कहानी, जो अकल्पनीय कठिनाइयों को झेलता है, कई लोगों द्वारा सामना किये जाने वाले संघर्षों का प्रतिबिंब है। उन्होंने इफ्फी में फिल्म को मिली शानदार प्रतिक्रिया के लिये आभार व्यक्त किया, इसे न केवल जीवित रहने की कहानी, बल्कि उम्मीद की कहानी बताया।

रागेश नारायणन द्वारा निर्देशित थानुप्प, बांझपन के ज्वलंत मुद्दे को चित्रित करती है, जो बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के कारण आधुनिक दम्पतियों के बीच एक आम चिंता का विषय है। यह फिल्म एक खूबसूरत गांव में रहने वाले युवा दम्पति प्रधीश और ट्रीसा के संघर्षों पर आधारित है। अपनी बांझपन के कारणों की उनकी खोज गपशप, निर्णय सुनाने और जिस समुदाय में वे रहते हैं, उसी के द्वारा उनकी निजता पर आक्रमण के कारण जटिल हो जाती है।

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