रेशम उत्पादन, शुद्धता की पहचान और विपणन को मिलेगा एकीकृत मंच

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है। स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से कैसे भेद किया जा सकता है। यह केन्द्र न केवल प्रशिक्षण और जागरूकता का माध्यम होगा, बल्कि एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध होगा। हजारों परिवारों की आजीविका होगी सुदृढ़ योगी सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे रेशम उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा। प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे। recent visitors 42

इंतज़ार खत्म! CM योगी ने खोला राज – कब उड़ान भरेगा जेवर एयरपोर्ट, उद्घाटन पर PM मोदी की मुहर संभव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एयरपोर्ट तैयार है और एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस महीने एयरपोर्ट का उद्घाटन कर किया जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। लगभग 1,300 हेक्टेयर में फैले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का संचालन शुरू में सितंबर 2024 में शुरू होने वाला था और यह कई डेडलाइन चूक चुका है। निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे बता दें कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही सबसे अधिक 21 हवाई अड्डों वाला प्रदेश बनने की राह पर है। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बाद अब जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शीघ्र चालू होने वाला है। जेवर एयरपोर्ट के शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में उभरेगा और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जेवर एयरपोर्ट से पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार जेवर एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने के लिए तैयार है। यह एयरपोर्ट नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य पर काम करने वाला अत्याधुनिक एयरपोर्ट होगा, जिसमें स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। प्रारंभिक चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाला यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक आर्थिक हब का काम करेगा। यह एयरपोर्ट न केवल बुनियादी सुविधाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पश्चिमी यूपी के युवाओं के लिए रोजगार और संभावनाओं के अनगिनत द्वार खोलेगा।   recent visitors 34

साध्वी प्रेम बाईसा केस में बड़ा कदम: SIT ने पिता से की गहन पूछताछ

जोधपुर जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज कर दी गई है। सोमवार को डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसीपी कार्यालय पहुंचे, जहां साध्वी के पिता को बुलाकर पूछताछ की गई। मीडिया से बातचीत करते हुए डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल ने बताया कि घटना के बाद से पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पूरी टीम गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि मृतका के बैकग्राउंड, उनके पिता के बैकग्राउंड, किसी से रंजिश या दुश्मनी, मेडिकल लापरवाही सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। डीसीपी ने बताया कि रविवार को एफएसएल टीम द्वारा दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण कराया गया है और वहां से मिले अहम तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही साध्वी के पिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है, ताकि मामले से जुड़े हर संभावित सुराग की पड़ताल की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में फिलहाल कोई भी व्यक्ति शक के दायरे से बाहर नहीं है और किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है। पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को दोबारा बुलाया जाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। डीसीपी विनीत बंसल ने भरोसा दिलाया कि गठित एसआईटी द्वारा किसी के साथ अनावश्यक दबाव या दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट के स्पष्ट निशान सामने नहीं आए हैं, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं पूछताछ के बाद साध्वी के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें केवल बातचीत के लिए बुलाया गया था और उन पर किसी तरह का पुलिस दबाव नहीं बनाया गया। मोबाइल फोन का पासवर्ड मांगे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनसे अब तक कोई पासवर्ड नहीं मांगा गया है। उन्होंने बताया कि वे साध्वी के समाधि स्थल जा रहे थे, इसी दौरान पुलिस ने उनसे एक बार कार्यालय आने को कहा था। बातचीत के बाद वे समाधि स्थल के लिए रवाना हो गए। recent visitors 35

जब से पीएम मोदी ने पद संभाला, खेलों में कभी भी बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा: बृज भूषण शरण

नोएडा बीजेपी नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 को सराहा है। उन्होंने इस लीग को एक बड़ी सफलता बताते हुए खेल के लगातार विकास का श्रेय पिछले एक दशक में विकसित बेहतर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया। हरियाणा थंडर ने रविवार रात नोएडा इंडोर स्टेडियम में एक रोमांचक फाइनल में दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 5-4 से हराकर प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 का खिताब जीता। इस मुकाबले पर प्रतिक्रिया देते हुए बृज भूषण ने कहा कि फाइनल आखिरी तक प्रतिस्पर्धी बना रहा, जिससे यह हाल के कुश्ती इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक बन गया। उन्होंने कहा, “यह एक बहुत ही प्रभावशाली मैच था, जिसमें आखिरी पलों तक रोमांच बना रहा, क्योंकि स्कोर 4-4 से बराबरी पर था। दिल्ली के 4 प्वाइंट्स थे और हरियाणा के भी 4 ही प्वाइंट्स थे। नतीजतन, आखिरी पलों तक विजेता तय नहीं हो पाया। ज्यादातर मुकाबलों में, नतीजा जल्दी स्पष्ट हो जाता है, और कोई भी विजेता का अनुमान लगा सकता है, लेकिन इस फाइनल में, सस्पेंस आखिर तक बना रहा, जिससे यह एक बेहतरीन मुकाबला बन गया।” कुश्ती में भारत की बढ़ती ताकत पर प्रकाश डालते हुए, बृज भूषण शरण सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के भविष्य की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए कहा, “भारत कुश्ती में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है। सभी खेलों में, कुश्ती में भारत के लिए सर्वाधिक मेडल लाने की सबसे ज्यादा क्षमता है।” डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार के तहत खेल की लगातार प्रगति के लिए पिछले एक दशक में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभाला है, खेल सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार सुधार हुआ है। इस दौरान कभी भी बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा।” हरियाणा थंडरर्स ने चैंपियनशिप ट्रॉफी के साथ 1.5 करोड़ रुपये की प्राइज मनी जीती है, जबकि रनर-अप दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 75 लाख रुपये मिले।   recent visitors 31

हमला पुलवामा में, पर रिश्ता पूरी तरह नहीं टूटा — भारत ने पाकिस्तान पर ‘टोटल बैन’ से क्यों किया परहेज?

नई दिल्ली पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेलने से इनकार कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में यह मुकाबला खेला जाना था। पिछले साल दोनों टीमों के बीच यह तय हुआ था कि भारत और पाकिस्तान के सभी मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू पर होंगे, इसके बाजवजूद अब बांग्लादेश को अपना सपोर्ट दिखाने के लिए पाकिस्तान ऐसी नौटंकी कर रहा है। बता दें, बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने से इनकार कर दिया था। आईसीसी के लाख समझाने के बाजवूद बांग्लादेश नहीं माना जिस वजह से आईसीसी ने उन्हें बाहर कर स्कॉटलैंड के टूर्नामेंट में शामिल किया। आईसीसी के इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान यह बगावत कर रहा है।   भारत के पास भी पाकिस्तान के खिलाफ मैच को बॉयकॉट करने का मौका था। पिछले साल जब पुलवामा अटैक हुआ था तो पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ था। भारत कई तरीको से पाकिस्तान के खिलाफ बड़े फैसले ले रहा था। ऐसे में इसकी आंच क्रिकेट पर भी गिरने वाली थी। पूरे देशभर में कहा जा रहा था कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत को क्रिकेट मैच नहीं खेलना चाहिए। मगर सरकार ने समझदारी दिखाते हुए एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का फैसला किया। भारतीय सरकार ने बीसीसीआई को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की मंजूरी दी। इसके कई कारण थे।     अगर भारत पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से इनकार कर देता तो आईसीसी कई तरह की पाबंदियां लगा सकता था।     भारत का पाकिस्तान के खिलाफ ना खेलने का असर आईपीएल पर भी पड़ सकता था।     भारत को वित्तीय नुकसान भी हो सकता था।     दूसरी टीमों को भी आईसीसी भारत में द्विपक्षीय सीरीज खेलने से रोक सकता था।     आगामी आईसीसी और मल्टीनेशन इवेंट में भी भारत को इस फैसले का खामियाजा उठाना पड़ सकता था। इन्हीं सभी नुकसानों को टालने के लिए भारतीय सरकार ने बीसीसीआई को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की मंजूरी दी। हालांकि भारतीय टीम ने पाकिस्तान का क्रिकेट फील्ड पर कई तरह से बॉयकॉट किया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सबसे पहले पाकिस्तानी कप्तान से टॉस के दौरान हाथ नहीं मिलाए। वहीं मैच खत्म होने के बाद भारतीय खिलाड़ी सीधा अपने ड्रेसिंग रूम में चले गए। इस घटना के बाद ही हैंडशेक विवाद खड़ा हुआ था। एशिया कप में भारत की फाइनल समेत तीन बार पाकिस्तान से भिड़ंत हुई थी और हर बार भारत का रुख ऐसा ही था। टीम इंडिया के खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से बात तक नहीं कर रहे थे। मगर जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने उन्हें उकसाया तो अभिषेक शर्मा और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों ने मैदान पर ही उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। पाकिस्तान का बॉयकॉट करने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। भारत ने एशिया कप का खिताब जीतने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया मोहसिन नकवी, जो एसीसी के भी अध्यक्ष हैं, उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। मोहसिन नकवी ने काफी देर भारतीय खिलाड़ियों का इंतजार किया, मगर सूर्यकुमार यादव की टीम मैदान पर होते हुए स्टेज तक नहीं पहुंची। अंत में नकवी ट्रॉफी लेकर ही मैदान के बाहर चले गए और आज तक उन्होंने भारत को एशिया कप की ट्रॉफी नहीं सौंपी। भारत ने तो बड़ी ही समझदारी से काम लिया और पाकिस्तान का अलग तरीके से बॉयकॉट करते हुए उनके खिलाफ मैच खेला। मगर बांग्लादेश को अपना सपोर्ट दिखान के चक्कर में पाकिस्तान कुल्हाड़ी पर अपना पैर मार बैठा है। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में आईसीसी इस मुद्दे पर मीटिंग कर सकता है। आईसीसी पाकिस्तान को समझाने की कोशिश कर सकता है और उनसे भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए कह सकता है, क्योंकि इसी मैच से आईसीसी की सबसे ज्यादा कमाई होती है। अगर पाकिस्तान फिर भी नहीं मानता तो पाकिस्तान उन पर कई तरह की पाबंदियां लगा सकता है, इसकी वजह से पाकिस्तान क्रिकेट पूरी तरह से बर्बाद भी हो सकता है।   recent visitors 25

गांव से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाएगा ये बजट, आत्मनिर्भर भारत को नई दिशा: पुष्कर सिंह धामी

देहरादून केंद्रीय बजट के संबंध में उत्तराखंड प्रदेश भाजपा कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबोधित किया और इसे विकसित भारत का बजट बताया। सीएम ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वीं बार बजट पेश किया है, उन्हें बधाई देता हूं। यह बजट पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है और 2026-27 का यह बजट भारत की आत्मा, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला है। यह भारत के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं वाला बजट है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह बजट हर वर्ग के लोगों को किसी न किसी रूप में आगे लाने और विकसित भारत बनाने का बजट है। भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, आने वाले समय में भारत तीन प्रमुख आर्थिक महाशक्तियों के रूप में स्थापित हो, हर वर्ग का विकास हो और वैश्विक समस्याओं को ध्यान में रखकर इस बजट को तैयार किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भी इस बजट में प्रावधान किए गए हैं। यह विकसित भारत के विजन वाला बजट है। कृषि, ग्रामीण विकास और कौशल निर्माण का भी इसमें ध्यान रखा गया है। ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकल से ग्लोबल बनाने वाला बजट है। सीएम ने कहा कि यह भारतवर्ष के सभी नागरिकों के उत्थान एवं उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति का बजट है। साथ ही यह बजट विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। यह बजट भारत के भविष्य को तीन मजबूत स्तंभों पर स्थापित करता है, भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, सामाजिक रूप से संतुलन स्थापित हो और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं पर फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को 24 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1,800 करोड़ रुपए अधिक धनराशि है। यह अतिरिक्त संसाधन आधारभूत संरचना एवं रोजगार सृजन को नई गति देंगे। इस बजट में युवाओं के लिए और महिलाओं के लिए वह सब कुछ है, जिससे वे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बन सकें। यह जनकल्याण को लाभ देने वाला बजट है। recent visitors 34

प्रदेश की जनजातीय संस्कृति से नई पीढ़ी को परिचित करा रहा है संस्थान

लखनऊ. उत्तर प्रदेश जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संस्थान, प्रदेश की जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संजोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस दिशा में संस्थान जनजातियों के पारंपरिक आभूषणों व दुर्लभ बर्तनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार का उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। संस्थान का यह प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समावेशी विकास की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस क्रम में प्रदेश की विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक तरीके से बनाए गए 500 से अधिक आभूषणों व बर्तनों का न केवल संरक्षण किया जा रहा है, बल्कि इनकी प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जानने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जनजातीय परंपराओं और उनके कला-कौशल की पहचान हैं ये आभूषण उत्तर प्रदेश की थारू, बुक्सा, गोंड और बैगा जनजातियों के आभूषण न केवल सौंदर्य के प्रतीक हैं, बल्कि जनजातीय समाज की गहरी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को भी जीवंत बनाते हैं। इस उद्देश्य से जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संस्थान इन जनजातियों के पारंपरिक तरीके से बने आभूषणों का संरक्षण कर रहा है। संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि ये आभूषण पूरी तरह से हस्तनिर्मित होते हैं, जिन्हें जनजातियों के शिल्पकार अपने सदियों पुराने ज्ञान और हस्तकौशल से तैयार करते हैं। जो इन जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराओं के साथ उनके कला कौशल की भी पहचान हैं। ये आभूषण गिलेट या गोटा चांदी, पुराने भारतीय सिक्कों, मनकों, तांबा, पीतल, लकड़ी, हड्डी व सीप जैसी सामग्रियों से बनाए जाते हैं। इनका निर्माण पारंपरिक तरीके से होता है, जिसमें धातु को भट्टी में गर्म कर तार और चादरों में बदला जाता है, फिर हाथों से अंतिम आकार दिया जाता है। इनमें हंसली, पायल, करधनी, कड़े, झुमकी, हार, अंगूठियां, बाजूबंद और मंगलसूत्र जैसे आभूषण जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान के प्रयास से जहां एक ओर लुप्त होते इन आभूषणों और उनकी निर्माण कला का संरक्षण किया जा रहा है, साथ ही उन्हें आधुनिकता से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन आभूषणों के आधुनिक रूप युवा पीढ़ी पारंपरिक परिधानों के साथ-साथ एथनिक व वेस्टर्न पहनावे में भी प्रयोग कर रही है।  यूपी की थारू,बुक्सा,अगरिया,खरवार जनजातियों के बर्तनों का हो रहा है संरक्षण संस्थान का प्रयास केवल आभूषणों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है। यह जनजातियों के विलुप्त होते पीतल, तांबे और मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों के संरक्षण में भी सक्रिय है। संस्थान के निदेशक ने बताया कि थारू, बुक्सा, अगरिया, खरवार और सोनभद्र क्षेत्र की जनजातियों के धातु के बर्तन, मृदभांड, धातु पात्र और जंगली लौकी से बनी ‘तुंबी’ आज भी जनजातीय समाज की जीवनशैली का सजीव उदाहरण है। हमारा संस्थान इनका संरक्षण करने के साथ समय-समय पर इनकी प्रदर्शनी भी लगाता है। प्रदेश की अगरिया जनजाति धातु शिल्प के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो कि प्राचीन काल से धातुकर्म की कला से परिचित है। जबकि थारू जनजाति चावल से पेय बनाने के लिए प्रयोग होने वाले ‘जाड़’ के लिए मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करती है। संस्थान समय-समय पर प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश की जनजातियों की कलाकृतियों, आभूषणों और बर्तनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है। इसी क्रम में संस्थान की ओर से उत्तर प्रदेश दिवस- 2026 और जनजातीय भागीदारी महोत्सव में जनजातीय शिल्पकारों को मंच और सम्मान देकर जनजातीय गौरव को नई ऊंचाई प्रदान की गई। recent visitors 33