अजित दादा के जाने के बाद NCP में भूचाल, बीजेपी की रणनीति से सुनेत्रा पवार बने उपमुख्यमंत्री, उद्धव सेना ने कहा ‘मास्टरमाइंड’

मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्‍ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने स्‍पष्‍ट किया कि उनकी पार्टी का एनडीए के साथ रहने का फैसला पूरी तरह मजबूत और कायम है. उन्होंने कहा कि जो नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रहना चाहते हैं, वे उसी के अनुरूप अपने फैसले लें. उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी की ओर इशारा माना जा रहा है. तटकरे के इस बयान को एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय के खिलाफ भी माना जा रहा है. अजित पवार ने एनसीपी के दो धड़ों के मर्जर को लेकर महत्‍वपूर्ण बयान देते हुए कहा था कि दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं की भावना है कि एकजुट हो जाया जाए. प्‍लेन क्रैश में निधन के बाद अजित पवार के गुट का मूड लगता है अब बदल चुका है. बता दें कि विलय पर शरद पवार ने कहा था कि अजित पवार की इच्‍छा को पूरा करना चाहिए. दूसरी तरफ, मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यदि एनसीपी के मर्जर की बात फाइनल स्‍टेज तक पहुंच चुकी थी तो अजित दादा उन्‍हें जरूर बताते. एनसीपी नेता सुनील तटकरे का यह बयान उस सवाल के जवाब में आया जिसमें दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चा की जा रही थी. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों दलों के एकीकरण का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए शरद पवार गुट को अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की राजनीतिक लाइन स्वीकार करनी होगी. हालांकि, तटकरे ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जिन्होंने अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही विलय की बातें शुरू कर दी थीं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को बताना चाहिए कि यह चर्चा इतनी जल्द क्यों शुरू की गई. हाल ही में सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि दोनों गुटों के बीच संभावित बातचीत को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. उधर, एनसीपी-एसपी के विधायक रोहित पवार ने कहा कि पवार परिवार में 13 दिनों तक कोई राजनीतिक बातचीत नहीं होगी और इसके बाद ही आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परिवार की ओर से कोई भी कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा.   सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाने के पीछे बीजेपी की बड़ी चाल.. शिवसेना (UBT) ने कहा है कि अजित पवार की मौत के चौथे ही दिन सुनेत्रा पवार को उपमुख्मयमंत्री बनाने के पीछे मुख्य रूप से बीजेपी का ही दिमाग था। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' में दावा किया गया कि इसके पीछे बीजेपी 'मास्टरमाइंड' थी। वहीं बीजेपी नेतृत्व के साथ ही एनसीपी नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल नहीं चाहते थे कि एक बार फिर एनसीपी की एकीकरण हो। बता दें कि 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे एनसीपी नेता अजित पवार की मौत हो गई थी। इसके बाद शनिवार को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। एनसीपी (SP) चीफ शरद पवार ने कहा कि उन्हें तो पता भी नहीं था कि सुनेत्रा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं। सामना में दावा किया गया कि शरद पवार और सुप्रिया सुले समेत परिवार के किसी सदस्य को उनके शपथ ग्रहण के बारे में जानकारी नहीं थी। वह चुपचाप बारामती से मुंबई के लिए रवाना हो गईं और किसी से कुछ नहीं बताया। 12 फरवरी को होने वाला था विलय? अजित पवार के रहते चर्चा होने लगी थी कि अलग होकर बनीं दो पार्टियां एक बार फिर एक हो जाएंगी। वहीं अजित पवार के निधन के बाद पवार परिवार में एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। बताया जा रहा था कि 12 फरवरी को दोनों पार्टियों के विलय की तारीख भी निश्चित हो गई थी। हालांकि अब इस तारीख पर कोई कुछ भी दावा करने को तैयार नहीं है। शिवसेना ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में कुछ लोगों की महत्वाकांक्षाएं और ज्यादा बढ़ गई हैं। उनकी पार्टी में भी उपमुख्यमंत्री बनने की होड़ शुरू हो गई थी। वहीं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में आनन-फानन में सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री बना दिया गया ताकि पाटिल और पवार परिवार की एकता को भी दिखाया जाए। शिवसेना ने कहा कि सुनेत्रा पवार को भले ही सरकार की अगली सीट पर जगह दे दी गई है लेकिन स्टीयरिंग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ही हाथ में है। फडणवीस की दया पर ही सुनेतेरा पवार और एकनाथ शिंदे अपना अस्तित्व बचा पा रहे हैं। शिवसेना (UBT) ने यह भी कहा कि हो सकता कि सुनेत्रा पवार गूंगी गुड़िया ना साबित हों और कुछ दिनों में वह खुलकर सामने आएं। एक तरफ सुनेत्रा पवार 'सनातनी मिजाज' वाली बीजेपी के साथ है तो दूसरी तरफ अपने पति की अंतिम क्रियाएं संपन्न किए बिना ही वह राजनीति में सक्रिय होकर हिंदू रीति-रिवाजों को नजरअंदाज कर रही हैं। अपनी शर्तों पर विलय तटकरे के बयान से साफ है कि अजित पवार गुट फिलहाल एनडीए के साथ अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और किसी भी संभावित विलय की स्थिति में वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ना चाहता है. वहीं, शरद पवार गुट की ओर से अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों के बीच संवाद की संभावना बनी रह सकती है, लेकिन मौजूदा बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि फिलहाल दूरी कम होने के बजाय रणनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं. सीएम फडणवीस के बयान से नई बहस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अगर इस पर कोई गंभीर बातचीत चल रही होती तो उपमुख्यमंत्री अजित पवार उन्हें जरूर बताते. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को न तो किसी चर्चा की जानकारी है और न ही विलय की किसी तारीख की. फडणवीस का बयान एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय की घोषणा … Read more

बरगी बांध में लीक से 6 गांवों और खेतों में पानी फैलने से स्थिति बिगड़ी, जबलपुर में मचा हड़कंप

 जबलपुर/बरगी नगर  बरगी बांध से रीवा की ओर जाने वाली दाईं तट मुख्य नहर रविवार दोपहर करीब 12 बजे सगड़ा-झपनी ग्राम पंचायत के पास अचानक फूट गई। नहर फूटते ही हजारों क्यूसेक पानी तेज रफ्तार से बाहर निकलते हुए खेतों से लेकर आसपास की बस्तियों और निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। देखते ही देखते क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। नहर में लंबे समय से पानी का दबाव अधिक बना हुआ था। नहर की दीवार कमजोर होने से ध्वस्त हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही देर में खेत जलमग्न हो गए और छह गांवों में जगह-जगह पानी भर गया। गनीमत रही कि नहर का पानी घरों में प्रवेश नहीं कर पाया। जिन गांवों तक नहर का पानी पहुंचा, वहां के लोगों का आरोप है कि नहर की दीवारें लंबे समय से जर्जर थीं। जहां नहर फूटी है वहां एक साल से पानी का रिसाव हो रहा था। सिंचाई विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। अधिकारियों की अनदेखी व लापरवाही का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। किसान नीरज उपाध्याय ने बताया कि नहर से पानी के रिसाव की शिकायत ग्रामीणों ने की थी, अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, परंतु सुनवाई नहीं हुई। किसान अजय पटेल ने बताया कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि विभागीय लापरवाही का नतीजा है। गनीमत रही कि, केनाल के पास ही नरई नाला है, नाला नहीं होता, तो खेत ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के घरों में पानी घुस जाता। विभाग द्वारा नहर की मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की गई, जिसका नतीजा सामने है। तत्काल कराई मुनादी प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मुनादी कराई, ताकि ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर रहें। क्षतिग्रस्त नहर से सगड़ाझपनी, बम्हनोदा, रोसरा, चारघाट, पिपरियाकला और घाना गांव प्रभावित हुए। नहर का अधिकतम बहाव नरई नाला की ओर गया और इसके आगे का पानी नर्मदा नदी में प्रवाहित हुआ। चारघाट क्षेत्र का रिपटा जलमग्न हो गया है। निरीक्षण के दौरान पता चला है कि प्रभावित गांवों में गेहूं, चना और सब्जियों की फसल जलमग्न हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है। फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशन पर एसडीएम जबलपुर अभिषेक सिंह और बरगी बांध दाईं तट नहर के कार्यपालन यंत्री, सिंचाई विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद नहर का पानी की निकासी पूरी तरह रोकते हुए टूटे हिस्से के आगे के सभी गेट खोल दिए गए, जिसके बाद हालात सामान्य हो पाए। वहीं खेतों में पानी भरने से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे प्रारंभ कर दिया गया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को शासन की ओर से राहत राशि दी जाएगी। बाईं तट नहर से भी हो रहा रिसाव बरगी बांध से निकली बाईं तट नहर में भी रिसाव हो रहा है। विभाग का कहना है कि इस एक्वाडक्ट में रिसाव को सुधारने के लिए जल्द शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। बरगी बांध में भी सीपेज बरगी बांध के ब्लाक नंबर 3/10 में सीपेज हो रहा है। भोपाल और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम जांच कर चुकी है। पानी का रिसाव सामान्य स्तर से अधिक पाया गया, लेकिन टेंडर और काम देने की प्रक्रिया में ही मामला उलझा है। 2021 में भी हुई थी घटना इधर, 2021 में पाटन और मझौली ब्लाक में बरगी बांध की नहरें फूटी थी। पाटन के पास जिनवाणी कलां में नहर फूटने से लगभग ढाई सौ एकड़ में धान की फसल को नुकसान हुआ था। वहीं चरगंवा में नहर फूटने से कोहा नाले में पानी भर गया था। recent visitors 39

सेमीकंडक्टर पार्क, डेटा सेंटर और फार्मा हब से बदलेगा यूपी का औद्योगिक परिदृश्य

आम बजट 2026-27 से उत्तर प्रदेश के विकास को मिलेगी नई रफ्तार: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने आम बजट के उत्तर प्रदेश पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर की प्रेस वार्ता सेमीकंडक्टर से लेकर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग तक यूपी बन रहा निवेशकों की पहली पसंद एमएसएमई, ओडीओपी और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित बजट से यूपी को मिलेगा सीधा लाभ हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, फ्रेट कॉरिडोर और जलमार्गों से यूपी बनेगा लॉजिस्टिक्स हब खेल, स्टार्टअप और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में नई ऊंचाई की ओर उत्तर प्रदेश पर्यटन, मेडिकल टूरिज्म और आयुर्वेद से रोजगार के नए द्वार खोलेगा आम बजट युवाओं, महिलाओं और किसानों पर फोकस, विकसित भारत के लक्ष्य में होगी यूपी की बड़ी भूमिका सेमीकंडक्टर पार्क, डेटा सेंटर और फार्मा हब से बदलेगा यूपी का औद्योगिक परिदृश्य लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आम बजट 2026-27 को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में देश ने जो विकास यात्रा तय की है, उसका प्रत्यक्ष लाभ अब जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। यह बजट रिफॉर्म, ग्रोथ और फिस्कल डिसिप्लिन का संतुलित दस्तावेज है, जो नए भारत के निर्माण के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा। सीएम योगी ने विश्वास जताया कि आम बजट 2026-27 उत्तर प्रदेश को ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा। रिफॉर्म, ग्रोथ और फिस्कल डिसिप्लिन के संतुलन से सशक्त भारत की नींव मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट में रिफॉर्म, ग्रोथ और फिस्कल डिसिप्लिन तीनों का संतुलित समावेश स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इन तीनों तत्वों को एक सूत्र में पिरोकर यह बजट आने वाली पीढ़ियों को जोड़ते हुए एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करता है। यह बजट किसान, युवा, महिला और गरीब, सभी वर्गों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। स्वाभाविक रूप से, इसके माध्यम से देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की अपेक्षाओं और विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। एमएसएमई सेक्टर में घोषणा का उत्तर प्रदेश को मिलेगा सर्वाधिक लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव डालने वाला पहलू एसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा है। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश का नेतृत्व करता है और प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा एमएसएमई आधार है। वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से करीब तीन करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका और आर्थिक प्रगति से जुड़े हुए हैं। सीएम ने कहा कि यह फंड विशेष रूप से ओडीओपी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, जिसे उत्तर प्रदेश ने ब्रांडिंग, डिजाइनिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट से जोड़कर सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। बजट के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर को नई तकनीक, स्किल ट्रेनिंग, आधुनिक पैकेजिंग और वैश्विक निर्यात बाजारों से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।  यूपी बनेगा कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का राष्ट्रीय हब मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में 12 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड तैयार किए जाने की घोषणा की गई है, जो उत्तर प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने और विभिन्न प्रमुख सेक्टरों को नई गति देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी उत्तर प्रदेश से होकर गुजर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश के भीतर देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो रहा है। इसका सीधा लाभ उद्योग, व्यापार और रोजगार सृजन के रूप में उत्तर प्रदेश को प्राप्त होगा।  इनलैंड वाटरवे में यूपी की होगी महत्वपूर्ण भूमिका सीएम योगी ने कहा कि देश में घोषित 20 अंतर्देशीय जलमार्गों में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में देश का पहला इनलैंड वाटरवे वाराणसी से हल्दिया के बीच पहले ही प्रारंभ किया जा चुका है, जबकि इनके विस्तार के लिए वाराणसी, प्रयागराज और यमुना नदी तक जलमार्ग विकसित करने के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। कार्गो मूवमेंट को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शिप रिपेयर एवं मेंटिनेंस इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में वाराणसी को मिलने वाला लाभ, उत्तर प्रदेश के इनलैंड वाटरवे नेटवर्क को और मजबूत करेगा, जिससे माल ढुलाई की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से मिलेगी विकास को नई गति मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में घोषित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से 2 महत्वपूर्ण कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को प्राप्त हुए हैं। इन हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के अंतर्गत ट्रेनों की गति 300 से 500 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी, जिससे प्रदेश को तेज, आधुनिक और विश्वस्तरीय रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। इससे न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि औद्योगिक, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी। उत्तर प्रदेश में बायो-फार्मा सेक्टर की संभावनाएं हुईं सुदृढ़ मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के माध्यम से बायो-फार्मा सेक्टर में उत्तर प्रदेश की संभावनाएं और अधिक सुदृढ़ हुई हैं। ललितपुर में लगभग 1,200 एकड़ क्षेत्रफल में बल्क ड्रग पार्क विकसित किए जाने की प्रक्रिया को तेज किया गया है, जबकि गौतम बुद्ध नगर के यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क का कार्य भी अत्यंत उन्नत चरण में पहुंच चुका है। बायो-फार्मा सेक्टर के लिए बजट में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो भारत को वैश्विक फार्मा हब के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। लखनऊ में होने वाले फार्मा कॉन्क्लेव में देशभर से प्रमुख स्टेक-होल्डर्स की भागीदारी स्पष्ट संकेत है कि उत्तर प्रदेश इस सेक्टर में निवेश, नवाचार और नई सुविधाओं के लिए पूरी तरह तैयार है। डेटा सेंटर हब और ग्राम स्वराज से यूपी को डिजिटल व ग्रामीण विकास की दोहरी ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम उत्तर प्रदेश को एक नई दिशा देंगे। प्रदेश में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ डेटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक उत्तर प्रदेश में लगभग 700 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर स्थापित हो चुके हैं और इस सेक्टर में निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। … Read more

यूपी बन रहा विदेशी निवेशकों की पहली पसंद -मुख्यमंत्री

सिंगापुर की कम्पनी 'एपी मोलर माएर्स्क के प्रमुख ने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात यूपी में निवेश विस्तार को लेकर उत्साहित सिंगापुर की कम्पनी 'एपी मोलर माएर्स्क यूपी बन रहा विदेशी निवेशकों की पहली पसंद -मुख्यमंत्री पिछले 20 वर्षों से राज्य में निवेश कर रही है कम्पनी, मुख्यमंत्री के समक्ष नए निवेश अवसरों पर हुई चर्चा लखनऊ उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को विदेशी निवेशकों से निरंतर समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में सिंगापुर की अग्रणी एकीकृत कंटेनर लॉजिस्टिक्स कंपनी एपी मोलर माएर्स्क के प्रबंध निदेशक रीन पील पेडरसन ने सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश विस्तार को लेकर गहन चर्चा हुई। पेडरसन के साथ विवेक शर्मा, हेड बिजनेस डेवलपमेंट एवं रेगुलेटरी अफेयर्स (भारत, बांग्लादेश एवं श्रीलंका क्षेत्र) भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाओं, उद्योगों के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल तथा राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल है और यहां निवेशकों के लिए सुरक्षित, स्थिर और पारदर्शी वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम, त्वरित स्वीकृतियां, नीति आधारित प्रोत्साहन और मजबूत कानून व्यवस्था के माध्यम से सरकार निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स हब, औद्योगिक कॉरिडोर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते उत्तर प्रदेश निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है। उन्होंने एपी मोलर माएर्स्क को राज्य में अपने निवेश का विस्तार करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि सरकार आवश्यक भूमि, कनेक्टिविटी और नीतिगत सहयोग सुनिश्चित करेगी।  इस अवसर पर विवेक शर्मा ने बताया कि हमने उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों और यहां के निवेश अनुकूल माहौल को लेकर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चा की। हमारी कंपनी पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से इस राज्य में निवेश कर रही है। इस विशेष चर्चा के दौरान हमने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण और अपने व्यवसाय के विस्तार में राज्य सरकार से मिले पूर्ण सहयोग को लेकर अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए। हम भविष्य में भी उत्तर प्रदेश में अपने कारोबार के विस्तार के लिए नए निवेश अवसरों की तलाश करने के लिए उत्सुक हैं। उल्लेखनीय है कि एपी मोलर माएर्स्क शिपिंग, बंदरगाह, जल परिवहन और अंतर्देशीय लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में वैश्विक स्तर की कंपनी है। इसके संभावित निवेश से उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूती, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। recent visitors 35

राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कबीरधाम जिला के खिलाड़ियों का रहा दबदबा

रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों ने की सौजन्य मुलाकात उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा से आज 16वीं छत्तीसगढ़ राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कबीरधाम जिले के खिलाड़ियों ने सौजन्य मुलाकात की। खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन की जानकारी साझा की तथा प्रतियोगिता के अनुभव भी बताए। गौरतलब है कि राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में कबीरधाम जिले के 13 पैरा खिलाड़ियों ने कुल 32 पदक जीतकर जिले को ओवरऑल चौंपियन बनाया। खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे जिले में गर्व और उत्साह का वातावरण है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सभी खिलाड़ियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता केवल पदकों की संख्या नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के संघर्ष, आत्मविश्वास और अटूट हौसले की जीत है। उन्होंने कहा कि कबीरधाम के दिव्यांग खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियाँ सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि मन में दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। उन्होंने खिलाड़ियों से चर्चा के दौरान कहा कि प्रतियोगिता में कबीरधाम जिले के 13 खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल स्पर्धाओं में कुल 32 पदक जीतकर पूरे प्रदेश में जिले का नाम गौरवान्वित किया है। पूरे आयोजन के दौरान कबीरधाम के खिलाड़ियों का दबदबा बना रहा। खिलाड़ियों ने अपने अनुशासन, कठिन परिश्रम, समर्पण और खेल भावना से सभी का ध्यान आकर्षित किया।  उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने और उन्हंन बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं एवं अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। खिलाड़ियों के लिए उनके क्षेत्र में ही मिनी स्टेडियम बनाएं जा रहे है। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे,  संतोष पटेल, जनपद उपाध्यक्ष कवर्धा  गणेश तिवारी, बोडला  नंद श्रीवास,  नरेंद्र मानिकपुरी,  मनीराम साहू,  अमर कुर्रे,  प्रवीण शर्मा,   जसबीर सालुजा,  शैलेन्द्र उपाध्याय सहित जन प्रतिनिधि, क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे। कबीरधाम के खिलाड़ियों ने जीते 32 पदक 16वीं छत्तीसगढ़ राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कबीरधाम जिले के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अनेक पदक अर्जित किए। छोटी मेहरा ने तवा फेंक और गोला फेंक दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। अनिल कुमार ने गोला फेंक और भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का गौरव बढ़ाया। खिलेश्वर पटेल ने 400 मीटर दौड़, 100 मीटर दौड़ तथा लंबी कूद में स्वर्ण पदक हासिल किए, जबकि सुखनंदन निषाद ने 200 मीटर दौड़, 100 मीटर दौड़ और लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। देव सिंह अहीरे ने भाला फेंक और गोला फेंक में रजत पदक प्राप्त किया। अरुण वर्मा ने भाला फेंक, लंबी कूद और गोला फेंक में स्वर्ण पदक जीते, साथ ही 100 मीटर दौड़ एवं 200 मीटर दौड़ में रजत पदक भी हासिल किए। गांधी कुर्रे ने भाला फेंक और लंबी कूद में स्वर्ण पदक, जबकि 100 मीटर दौड़ और गोला फेंक में रजत पदक प्राप्त किए। आमीन खान ने लंबी कूद और गोला फेंक में स्वर्ण पदक तथा तवा फेंक में रजत पदक जीता। शिवकिंकर नेताम ने तवा फेंक में स्वर्ण पदक, गोला फेंक में रजत पदक और भाला फेंक में कांस्य पदक प्राप्त किया। थानू ने तवा फेंक में रजत पदक जीता, वहीं रामलोचन वर्मा ने भाला फेंक में रजत पदक हासिल किया। केशव ने तवा फेंक और गोला फेंक दोनों में स्वर्ण पदक जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सरजू कोसले ने गोला फेंक में स्वर्ण पदक तथा तवा फेंक और भाला फेंक में रजत पदक प्राप्त किए। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों से कबीरधाम जिले का नाम राज्य स्तर पर गौरवान्वित हुआ है और यह प्रदर्शन आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना है। recent visitors 42

‘द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव’ पुस्तक का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के करकमलों से विमोचन

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज विधायक कार्यालय कवर्धा में द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव 'राजा भोरमदेव की कहानी' पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक के रचनाकार  रामप्रसाद बघेल को उप मुख्यमंत्री ने बधाई तथा आगे के सफल साहित्यिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।  शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक जिलेवासियों के लिए गर्व का विषय है तथा इससे हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। यह कहानी अंर्तराष्ट्रीय स्तर का है इस पुस्तक के प्रकाशन से भोरमदेव की ख्याति को अंर्तराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।  उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि पुस्तक न केवल राजा भोरमदेव के जीवन और काल की महिमा को उजागर करता है, बल्कि मनुष्य, प्रकृति और चेतना के बीच संतुलन की गूढ़ दार्शनिकता को भी बखूबी प्रस्तुत करता है। उन्होंने आग्रह किया कि वे इस पुस्तक को पढ़ें और इसके संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें। लेखक  रामप्रसाद बघेल ने बताया कि 'राजा भोरमदेव की कहानी' की शुरुआत एक प्राचीन और रहस्यमयी युग से होती है, जब पृथ्वी पर आकाश से गिरा एक विशाल धूमकेतु ने न केवल प्राकृतिक संतुलन को बाधित किया, बल्कि अंधकार से ऊर्जा प्राप्त करने वाले ड्रैगन जैसे घातक प्राणियों का आगमन भी किया। ये प्राणी अंधकार में और अधिक शक्तिशाली होते गए तथा धीरे-धीरे संपूर्ण पृथ्वी को एक भयावह अनंत संध्या की ओर ले जाने लगे, जहाँ मानव, पशु और प्रकृति कोई भी सुरक्षित नहीं रहा। कथा का प्रमुख नायक कुरुगुरु भद्रदेव बैगा है, जो विज्ञान, अध्यात्म एवं प्रकृति के संतुलन को समझता है। विद्वानों के नेतृत्व में यह खोज की जाती है कि ड्रैगनों के माथे पर चमकता नीला चिह्न कोई सजावट नहीं, बल्कि अंधकार से ऊर्जा खींचने वाला यंत्र है, और जैसे-जैसे अंधकार बढ़ता है, वे और अधिक अजेय बनते जाते हैं। कहानी में एक प्राचीन राजवंश के शासक राजा परसमनिधर देव तथा रानी नागमती की गहन तपस्या और दिव्य-वैज्ञानिक शक्तियों का विवरण भी मिलता है। राजा के पास पारस रत्न है, जो सूर्य की ऊर्जा से पदार्थ और जीवन को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है, जबकि रानी नागमती के पास नागमणि यंत्र है, जो किसी भी पदार्थ को नष्ट करने अथवा विष को निष्प्रभावी बनाने की शक्ति रखता है। कहानी केवल युद्ध और संघर्ष की नहीं है, बल्कि प्रेम, नियति एवं चेतना की भी है। झील के तट पर बिना शब्दों के केवल दृष्टियों और अनुभूतियों से राजा और रानी का प्रेम जन्म लेता है। उनका विवाह दो शक्तिशाली वंशों का नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रकृति और चेतना के मिलन का प्रतीक बनता है। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे,संतोष पटेल,जनपद उपाध्यक्ष कवर्धा  गणेश तिवारी, बोडला  नंद श्रीवास,नरेंद्र मानिकपुरी,मनीराम साहू,अमर कुर्रे,प्रवीण शर्मा,जसबीर सालुजा,शैलेन्द्र उपाध्याय सहित जन प्रतिनिधि, क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे। recent visitors 40

नर्मदा नदी में भव्य नाव रैली, मेधा पाटकर ने बीच पानी में मछुआरों के अधिकारों का मुद्दा उठाया

बड़वानी  नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले नर्मदा घाटी के विस्थापित मछुआरों ने सोमवार को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में मछुआरों ने कसरावद से राजघाट तक नर्मदा नदी में 30 से अधिक नावों के साथ भव्य नाव रैली निकाली. यह नाव रैली सरकार और प्रशासन का ध्यान वर्षों से लंबित मछुआरा समुदाय की समस्याओं की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई. मेधा पाटकर ने मछुआरों के साथ निकाली नाव रैली नाव रैली के समापन के बाद मछुआरा संगठनों द्वारा बड़वानी कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा. ज्ञापन में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुरूप अधिकार देने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई है. इसमें प्रस्तावित नर्मदा मत्स्य सहकारी उत्पादन व विपणन संघ के पंजीकरण, विस्थापित मछुआरों को पुनर्वास लाभ, आवास और आजीविका उपलब्ध कराने मत्स्य व्यवसाय को ठेकेदारी से मुक्त कर सहकारी समितियों को सौंपने की मांग शामिल है. आंदोलनकारियों ने रखी 10 मांग इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने जलाशय में बढ़ते प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन, जलस्तर में लगातार गिरावट से मत्स्याखेट पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव, मछुआरों को किसान का दर्जा, केसीसी कार्ड, बंद अवधि में आर्थिक सहायता राशि बढ़ाने और पुलिस-प्रशासन द्वारा कथित उत्पीड़न के मामलों पर त्वरित कार्रवाई की भी मांग की. कुल मिलाकर ज्ञापन में 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं. इस मौके पर मेधा पाटकर ने कहा कि "नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, लेकिन दशकों बाद भी उन्हें उनके कानूनी अधिकार नहीं मिल पाए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र किया जाएगा." कई जिलों के मछुआरा परिवार हुए शामिल इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगौन और अलीराजपुर जिलों के बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए. आंदोलनकारियों ने बताया कि सरदार सरोवर परियोजना एक अंतरराज्यीय परियोजना है. इससे जुड़े लाभ, हानि और पुनर्वास से संबंधित सभी विषयों पर नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार ही कार्रवाई की जानी चाहिए. यह फैसला 18 अक्टूबर 2000 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत कानूनन मान्य है, जिसका पालन करना शासन की जिम्मेदारी है. सरदार सरोवर में मतस्य पालन का अधिकार सरकार के पास नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले की धारा XI, उपधारा V(8) के अनुसार सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य पालन का अधिकार राज्य शासन के पास है. इसी संदर्भ में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मत्स्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पूर्व में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र भी लिखा जा चुका है, बावजूद इसके मछुआरों को उनके अधिकार अब तक नहीं मिल पाए हैं. recent visitors 34