इंदौर: दूषित पानी से 32वीं मौत, भागीरथपुरा की महिला पहले से थी दूसरी बीमारियों से पीड़ित

इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे। recent visitors 22

सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाएं बैंक: मुख्यमंत्री

यूपी का कुल सीडी रेशियो 60.39% के पार, मार्च तक 62% का लक्ष्य ओडीओपी की तरह अब ओडीओसी को ब्रांड बनाने आगे बढ़ें बैंक, छोटे व्यापारियों और गिग वर्कर्स को होगा बड़ा लाभ: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का आह्वान, किसान, एमएसएमई, युवा-उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल की जाएं आवेदन और पात्रता की जांच में अनावश्यक देरी न करें बैंक, लाभार्थीपरक योजनाओं की सफ़लता बैंकों के सहयोग से ही संभव: मुख्यमंत्री प्रदेश का बैंकिंग व्यवसाय 08 वर्ष में ₹12.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹32.79 लाख करोड़ वित्तीय समावेशन में यूपी देश में नंबर-1, जनधन, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा और अटल पेंशन योजना में शीर्ष प्रदर्शन ऊर्जा, कृषि, उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत 20 फरवरी और 16 मार्च को दो मेगा ऋण वितरण कार्यक्रम; 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक  वितरण का लक्ष्य पीएम स्वनिधि, पीएम सूर्य घर और किसान क्रेडिट कार्ड में यूपी की तेज प्रगति, 50.81 लाख किसानों को मिली 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाएं बैंक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक, कहा जिलों में हर माह हो डीएलबीसी कि बैठक लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक प्रदेश में कुल क्रेडिट डिपॉजिट (सीडी रेशियो) 62 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। रविवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी बैंक प्रतिनिधियों से उनके सीडी रेशियो के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सीडी रेशियो बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश का कुल सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले लगभग दस वर्षों का सर्वाधिक स्तर है। जनपद-वार समीक्षा के अनुसार 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जनपद घटकर केवल पाँच रह गए हैं, जबकि 40-50, 50-60 और 60-80 प्रतिशत की श्रेणी वाले जनपदों की संख्या में भी निरंतर सुधार हुआ है। मार्च 2018 में 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले 20 जनपद थे, जो अब घटकर 5 हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मार्च 2026 तक सभी जनपदों के सीडी रेशियो में लक्षित सुधार सुनिश्चित किया जाए। महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) की सफलता के बाद अब राज्य सरकार एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से छोटे व्यापारियों, पारंपरिक पाक कला से जुड़े कारीगरों और गिग वर्कर्स को नई पहचान देने जा रही है। उन्होंने बैंकों से आह्वान किया कि जैसे ओडीओपी को वित्तीय सहयोग मिला, वैसे ही ओडीओसी को भी प्राथमिकता देते हुए अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में पूरा सहयोग दे रही है, और इस मिशन को गति देने में बैंकों की भूमिका निर्णायक होगी।  राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उदाहरण दिया और कहा कि इन योजनाओं की सफलता के केंद्र में बैंकों की सहयोगी भावना है। उन्होंने साफ कहा कि अनावश्यक दस्तावेज़ों की मांग, बार-बार वेरिफिकेशन और प्रक्रिया में देरी जैसी स्थितियाँ लाभार्थियों को हतोत्साहित करती हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बैंकिंग प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को वास्तविक सहूलियत मिले और पात्र लाभार्थी बिना किसी दिक्कत के योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश, उद्यमिता, कृषि और महिला-युवा स्वावलंबन के क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस प्रगति में बैंकिंग तंत्र की सक्रिय साझेदारी अनिवार्य है। उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि किसान, सूक्ष्म,लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूहों और नवउद्यमी युवाओं को ऋण उपलब्धता सरल, सम्मानजनक और समयबद्ध हो। मुख्यमंत्री ने उन जनपदों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए जहाँ सीडी रेशियो 40 प्रतिशत से कम है, और कहा कि बैंकों को गाँवों को लक्षित कर मेगा ऋण मेले आयोजित करने चाहिए। मुख्यमंत्री ने हर माह जिला स्तरीय बैकर्स कमेटी की बैठक सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देशित किया। उन्होंने बैंकों से सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का भी आह्वान किया। बैठक में बताया गया कि पिछले 08 वर्षों में प्रदेश का बैंकिंग तंत्र अत्यंत मजबूत हुआ है। मार्च 2017 में प्रदेश की कुल जमा राशि 8.92 लाख करोड़ रुपये थी, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 20.44 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में कुल ऋण वितरण 4.05 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया। मार्च 2017 में प्रदेश का कुल बैंकिंग व्यवसाय 12.80 लाख करोड़ रुपये था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 32.79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 के दौरान अकेले जमा में 6.47 लाख करोड़ रुपये, ऋण में 5.03 लाख करोड़ रुपये और कुल बैंकिंग व्यवसाय में 11.50 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि, एमएसएमई और प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण प्रवाह लगातार बेहतर हुआ है। दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय समावेशन अभियान (जुलाई-अक्टूबर 2025) की उपलब्धियों की जानकारी भी बैठक में प्रस्तुत की गई। इस अवधि में प्रदेश ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और आठ प्रमुख सूचकों में से सात पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में 57,699 वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित हुए, 22.24 लाख जनधन खाते खोले गए, 17.14 लाख लोगों का जीवन सुरक्षा बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) में और 43.35 लाख नागरिकों का दुर्घटना बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) में नामांकन हुआ। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में 6.90 लाख नए सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए। नामांकन, दावा निपटान, पुनः-केवाईसी और नामांकन अद्यतन जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष रहा। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढाँचा, उद्योग, एमएसएमई और एनबीएफसी सह-ऋण मॉडल सहित विभिन्न क्षेत्रों में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए गए हैं। यूपीपीसीएफ, यूपीसीयू, पावर ट्रांसमिशन और … Read more

बांग्लादेश को मिले बजट में कमी, चाबहार को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, ईरान को नहीं मिलेगा एक भी रुपया

नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस बार के केंद्रीय बजट में उसके विकास के लिए दी जाने वालीराशि चालू वित्त वर्ष में पिछले वर्ष के मुकाबले आधी कर दी गई है। बजट के मुताबिक बांग्लादेश के लिए इस बार केवल 60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वहीं भूटान को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि दी जाएगी। उसे कास सहायता के रूप में सबसे अधिक 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये और मालदीव और मॉरीशस के लिए 550-550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं इस बार के आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई राशि नहीं आवंटित की गई है। बता दें कि भारत चाबहार परियोजना में हिस्सेदार रहा है औऱ वह 100 करोड़ की मदद हर साल करता आ रहा था। अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे के क्षेत्र में व्यापार के लिए यह बेहद जरूरी पड़ाव माना जाता है। चाबहार ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित बंदरगाह है जो कि वैश्विक समुद्री मार्गों तक सीधी पहुंच बनाता है। यह पाकिस्तान की सीमा के पूर्व में ग्वादर पोर्ट के पास है। चीन बी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के जरिए ग्वादर को विकसित कर रहा है। ऐसे में यह चाबहार परियोजना भारत के लिए संतुलन बनाने के लिए अहम है। जानकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका में तनाव की वजह से भारत इस बार चाबहार को कुछ नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान 20,516 करोड़ रुपये और संशोधित अनुमान 21,742 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए कुल 22,118 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि 2025-26 के बजट में बांग्लादेश के लिये 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि, बाद में संशोधित अनुमान में यह राशि 34.48 करोड़ रुपये कर दी गई थी। अप्रैल में खत्म हो रही है अमेरिका से मिली छूट भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी वृहद संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है। पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं, ताकि संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के आवंटन के तहत 2025-26 के लिए कुल विदेश साझेदारी विकास मद में 6,997 करोड़ रुपये है, जो विदेश मंत्रालय को किए गए आवंटन का 31 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि विदेश साझेदारी विकास मद के तहत कुल आवंटन में से 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्रों, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़कों, पुल जैसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर जमीनी स्तर की सामुदायिक विकास परियोजनाओं तक विभिन्न प्रकार की पहलों के कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता राशि 120 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। recent visitors 35

ऑस्ट्रेलियन ओपन में अल्काराज की जीत पर सचिन तेंदुलकर ने किया उन्हें सलाम, धैर्य को बताया बड़ा गुण

मेलबर्न  स्पेन के कार्लोस अल्काराज ने नोवाक जोकोविच को 2-6, 6-2, 6-3, 7-5 से मात देकर ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में मेंस सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस जीत पर मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अल्काराज के 'धैर्य और शांत स्वभाव' की तारीफ की है।  अल्काराज ने टेनिस इतिहास रचते हुए अपना पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन मेंस सिंगल्स खिताब जीता और करियर ग्रैंड स्लैम हासिल करने वाले सबसे युवा पेशेवर टेनिस खिलाड़ी बन गए। जोकोविच को 11 ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में पहली शिकस्त देकर, 22 वर्षीय अल्काराज ओपन एरा में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले युवा खिलाड़ी बने, जो चारों बड़े टूर्नामेंट में ट्रॉफी जीतकर हासिल किया जाता है। इसके साथ ही अल्काराज करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले 8वें खिलाड़ी बन गए। इस लिस्ट में फ्रेड पेरी (1935), डॉन बज (1938), रॉड लेवर (1962), रॉय एमर्सन (1964), आंद्रे अगासी (1999), रोजर फेडरर (2009), राफेल नडाल (2010) और नोवाक जोकोविच (2015) शामिल हैं। इनमें डॉन बज और रॉड लेवर ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने एक ही कैलेंडर वर्ष में ग्रैंड स्लैम जीतने का कारनामा किया। सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "ऑस्ट्रेलियन ओपन में जो बात सबसे अलग थी, वह थी कार्लोस अल्काराज का धैर्य। लंबी रैलियों में, वह शांत रहे, अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा, और समझदारी से अपने मौके चुने। जिस तरह से उन्होंने कोर्ट को कवर किया, इतनी तेजी और सटीकता से, उन्हें देखकर मजा आया। बधाई कार्लोस अल्काराज। नोवाक जोकोविच की ओर से भी शानदार प्रयास रहा।" अल्काराज अब 7 बार के ग्रैंड स्लैम सिंगल्स चैंपियन हैं। इसके साथ वह अपने साथी जॉन मैकएनरो और मैट्स विलेंडर के साथ ऑल-टाइम सूची में बराबरी पर आ गए हैं। मेलबर्न में उनकी जीत ने यह भी दिखाया कि हाल के वर्षों में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स पर अल्काराज और उनके बड़े प्रतिद्वंद्वी यानिक सिनर का दबदबा रहा है। दोनों ने मिलकर पिछले नौ ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं, जिसकी शुरुआत जोकोविच की 2023 यूएस ओपन जीत से हुई थी। हालांकि, 2026 ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में सिनर को जोकोविच से हार का सामना करना पड़ा। कार्लोस अल्काराज ने पूरा किया करियर ग्रैंड स्लैम कार्लोस अल्काराज ने इससे पहले विम्बलडन (2023, 2024), फ्रेंच ओपन (2024, 2025), यूएस ओपन (2022) और ऑस्ट्रेलियन ओपन (2026) का खिताब जीता था। इस जीत के साथ ही अल्कारेज ने करियर ग्रैंड स्लैम पूरा कर लिया है। कार्लोस अल्कारेज करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले सबसे कम उम्र के मेंस खिलाड़ी हैं। अल्कारेज ने डॉन बज का 88 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है, जिन्होंने 22 साल और 363 दिन की उम्र में करियर स्लैम पूरा किया था। वहीं अल्कारेज ने 22 साल और 272 दिन की उम्र में ये कारनामा किया है। कार्लोस अल्कारेज से पहले इन प्लेयर्स ने पूरा किया है करियर स्लैम कार्लोस अल्कारेज से पहले डॉन बज, रॉड लेवर, रॉय एमर्सन, आंद्रे अगासी, रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच ने करियर स्लैम पूरा किया था। जब कोई खिलाड़ी अपने करियर में चारों मेजर टूर्नामेंट जीतता है, तो ये करियर स्लैम कहलता है। ये चार मेजर टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन, विंबलडन और यूएस ओपन है।   recent visitors 32

महाकुंभ के अनुभव से प्रेरित नीतियों के चलते टियर-2–3 शहरों और मंदिर नगरों पर बढ़ा फोकस

महाकुंभ से मिली दिशा, बजट में सनातन अर्थशास्त्र को मिली नीतिगत पहचान उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत महाकुंभ के अनुभव से प्रेरित नीतियों के चलते टियर-2–3 शहरों और मंदिर नगरों पर बढ़ा फोकस महाकुंभ, काशी और अयोध्या सर्किट से मिली सीख, बजट में दिखा नया विकास दृष्टिकोण आस्था आधारित अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा में लाने की केंद्र सरकार ने की पहल लखनऊ  महाकुंभ से सामने आए बड़े आर्थिक परिणामों और इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान ने केंद्र सरकार को भारत की पारंपरिक आर्थिक संरचना की ओर नए सिरे से देखने को प्रेरित किया है। केंद्रीय बजट 2026–27 में पहली बार भारत के सनातन आर्थिक स्वरूप- उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था को नीति स्तर पर पहचान मिलती दिख रही है। यह संकेत है कि भारत की विकास यात्रा अब केवल उद्योग और महानगरों तक सीमित न रहकर अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत जड़ों से जुड़ते हुए आगे बढ़ेगी। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का बड़ा मॉडल है महाकुंभ यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित महाकुंभ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आस्था आधारित आयोजन केवल धार्मिक नहीं होते, बल्कि बड़े आर्थिक उत्प्रेरक भी होते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, काशी और अयोध्या के सर्किट में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, अस्थायी और स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और लॉजिस्टिक्स सब मिलकर एक मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में सामने आए। इसी अनुभव ने नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद की कि आस्था आधारित आयोजन अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर तक गति दे सकते हैं। सिटी इकोनॉमिक रीजन से कस्बों को नई ताकत बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों को सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के रूप में विकसित करने की घोषणा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘विकसित टाउन’ की सोच का विस्तार माना जा रहा है। यह योजना उन कस्बों को फिर से मजबूत करेगी, जो सदियों तक भारतीय अर्थव्यवस्था की सप्लाई चेन की रीढ़ रहे हैं। कस्बों के मजबूत होने से उनके आसपास के गांवों के किसान, कारीगर और व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और ये कस्बे बड़े शहरों के लिए फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में उभरेंगे। इससे अर्थव्यवस्था की मध्य कड़ी मजबूत होगी और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां सबसे ज्यादा कस्बे और शहरी क्षेत्र हैं। ऐसे में सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना का सबसे बड़ा लाभ भी यूपी को मिलने की संभावना है। ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का बजट में आना ऐतिहासिक संकेत महाकुंभ से मिले आर्थिक अनुभव के बाद सरकार ने पहली बार बजट भाषण में ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ऐतिहासिक रूप से मंदिरों वाले नगर भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं। भारत में सदियों से पर्यटन का मूल आधार धार्मिक रहा है, जहां यात्रा के साथ व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक जुड़ाव स्वाभाविक रूप से होता रहा है। प्रयागराज-काशी-अयोध्या सर्किट ने सरकार को यह स्पष्ट संकेत दिया कि यदि देशभर के मंदिर वाले नगरों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जाएं, तो हजारों कस्बों और छोटे शहरों का समग्र विकास संभव है। सनातन अर्थशास्त्र से यूपी को सबसे ज्यादा फायदा बजट में सनातन अर्थशास्त्र की दिशा में उठाए गए कदमों से उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखनाथ, हस्तिनापुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे सनातन और बौद्ध परंपरा के प्रमुख केंद्र यूपी में ही स्थित हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, सेवा क्षेत्र, स्थानीय उत्पाद और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इनलैंड वाटरवे से नदी आधारित अर्थव्यवस्था को नई जान बजट में वाराणसी से पटना के बीच इनलैंड वाटरवे को और विकसित करने की घोषणा से यूपी में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सस्ती और प्रभावी होगी। यह पहल नदी आधारित अर्थव्यवस्था को फिर से जीवंत करेगी। गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती समेत कई नदियों का सबसे बड़ा नेटवर्क यूपी में होने के कारण राज्य सड़क, रेल और वायु मार्ग के साथ-साथ इनलैंड वाटर कनेक्टिविटी में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है। यह बजट इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश सनातन अर्थशास्त्र, कस्बा आधारित विकास और टेम्पल टूरिज्म के जरिए भारत के नए विकास मॉडल का केंद्र बन सकता है। recent visitors 35

भारत को बोनस अंक, पाकिस्तान के लिए नेट रनरेट बना खतरा, मैच न खेलने से हो सकता है नॉकआउट

नई दिल्ली आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ ग्रुप मैच के बहिष्कार का फैसला पाकिस्तान क्रिकेट के लिए घातक साबित हो सकता है. अगर पाकिस्तानी टीम 15 फरवरी को भारत के खिलाफ मैदान पर नहीं उतरती है, तो आईसीसी के नियमों के तहत भारत को वॉकओवर के जरिए पूरे दो अंक मिल जाएंगे, जबकि पाकिस्तान को सीधे 0 अंक मिलेंगे. इतना ही नहीं, इस फैसले का असर सिर्फ पॉइंट्स टेबल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान के नेट रनरेट (NRR) पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. आईसीसी की प्लेइंग कंडीशन्स के मुताबिक, डिफॉल्ट करने वाली टीम का NRR प्रभावित किया जा सकता है, जो आगे चलकर क्वालिफिकेशन में बड़ा फैक्टर बन सकता है.  इसका सीधा मतलब है कि भारत को 2 अंक आसानी से मिलेंगे, जबकि पाकिस्तान के लिए गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी. ग्रुप-ए में भारत, पाकिस्तान, नीदरलैंड्स, नामीबिया और अमेरिका शामिल हैं. टॉप-2 टीमें सुपर-8 में पहुंचेंगीय. भारत को पहले ही 2 अंक मिलने से उसकी स्थिति मजबूत हो जाएगी, जबकि पाकिस्तान के लिए हर मैच 'करो या मरो' जैसा हो जाएगा. भारत अब अपने बाकी मुकाबले बिना ज्यादा दबाव के खेल सकता है और साफ जीत के साथ नेटरनरेट और मजबूत करने पर फोकस कर सकेगा. वहीं पाकिस्तान के पास भारत के खिलाफ मिलने वाले संभावित अंक गंवाने के बाद सिर्फ तीन मैच ही बचेंगे. पाकिस्तान का वर्ल्ड कप सफर तरह नीदरलैंड्स, अमेरिका और नामीबिया के खिलाफ मैच पर निर्भर करेगा. अगर पाकिस्तान इन तीनों मैचों में जीत दर्ज करता है, तो क्वालिफिकेशन की उम्मीद बनी रहेगी. लेकिन अगर टीम सिर्फ दो मैच जीत पाती है, तो मामला नेट रनरेट और अन्य टीमों के नतीजों पर अटक जाएगा. चू्ंकि भारत से मैच नहीं खेलने पर पाकिस्तान का नेट रनरेट पहले ही खराब होगा, ऐसे में उसकी हालत काफी पतली हो जाएगी. वहीं अगर पाकिस्तान एक या उससे कम मैच जीतता है, तो उसका सुपर-8 में पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. पिछले  टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को संयुक्त राज्य अमेरिका ने पराजित कर दिया था. ऐसे में पाकिस्तान के इन तीनों मैच जीतना आसान नहीं होगा. पाकिस्तान पर ग्रुप स्टेज में ही टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा इस बार भी अभी से मंडरा रहा है. भारत के ग्रुप मैच बनाम यूएसए- 7 फरवरी, मुंबई बनाम नामीबिया- 12 फरवरी, दिल्ली बनाम पाकिस्तान- 15 फरवरी, कोलंबो* बनाम नीदरलैंड्स- 18 फरवरी, अहमदाबाद पाकिस्तान के ग्रुप मुकाबले बनाम नीदरलैंड्स- 7 फरवरी, कोलंबो बनाम यूएसए- 10 फरवरी, कोलंबो बनाम भारत- 15 फरवरी, कोलंबो* बनाम नामीबिया- 18 फरवरी, कोलंबो भारत के खाते में बिना खेले आए दो अंक उसे ग्रुप में बढ़त दिला देंगे. इससे टीम इंडिया को शुरुआती दौर में ही टूर्नामेंट फेवरेट की तरह खेलने का मौका मिलेगा, जबकि पाकिस्तान हर मुकाबले में अतिरिक्त दबाव के साथ उतरेगा. भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से टूर्नामेंट का सबसे बड़ा आकर्षण रहा है, लेकिन इस बार बहिष्कार का फैसला पाकिस्तान के लिए खुद की राह मुश्किल करने वाला साबित हो सकता है. अगर पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच नहीं खेला, तो वह वर्ल्ड कप से नॉकआउट होने की कगार पर पहुंच सकता है. recent visitors 31

बजट में बड़ी सौगात, मोबाइल, टीवी और AC सस्ते होंगे, जानें कैसे होगा फायदा

नई दिल्ली  केंद्रीय बजट 2026 का ऐलान हो चुका है और भारत सरकार ने इलेक्ट्रोनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत खर्च को लगभग दोगुना करने का ऐलान कर दिया है. इस रकम को करीब 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया है.  इस भारी-भरकम बजट से भारतीय इलेक्ट्रोनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री मजबूत होगी. इससे भारतीय घरेलू सप्लाई चेन को स्ट्रांग किया जाएगा. साथ ही भारत में विदेशी कंपनियां भारत में अपनी यूनिट लगाएंगी और भारत में निवेश करेंगी.  फोन टीवी, AC आदि को होगा फायदा  इस स्कीम से स्मार्टफोन, लैपटॉप और माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू प्रोडक्ट के मैन्युफैक्चरिंग पर विदेशों पर निर्भरता कम होगी. इससे प्रोडक्ट सस्ते होंगे या नहीं, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. हालांकि अगर टीवी, स्मार्टफोन और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक्स प्रोडक्ट तैयार करने वाले मैन्युफैक्चरर को सस्ते कंपोनेंट मिलते हैं तो आने वाले दिनों में सस्ते प्रोडक्ट भी भारत में दस्तक देंगे. साथ ही यहां नौकरियों के भी नए अवसर प्राप्त होंगे.  वित्त मंत्री ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपये की रकम के साथ शुरू की गई थी. इस स्कीम के तहत मिले इनवेस्टमेंट प्रपोजल और टारगेट को देखते हुए सरकार ने रकम बढ़ाने का फैसला किया है.  उन्होंने कहा कि इस स्कीम की रकम को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.  केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च में इस स्कीम के लिए 22,919 करोड़ रुपये की रकम के साथ मंजूरी दी थी. इस स्कीम के तहत बड़े आउटकम की उम्मीद है. इससे 4.56 लाख करोड़ रुपये का प्रोडक्शन होगा और करीब 59,350 करोड़ रुपये का एडिशनल इनवेस्टमेंट मिलेगा.  46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है अब तक स्कीम के तहत 46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें कुल प्रोपजल इनवेस्टमेंट 54,567 करोड़ रुपये का है. इससे लगभग 51,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है.  आईटी मंत्रालय ने बीते महीने ही Foxconn, Tata Electronics, Samsung, Dixon Technologies और Hikalco Industries जैसी कंपनियों के 22 आवेदन को अप्रूवल दिए हैं.  इन इलेक्ट्रोनिक्स पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा  सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत इलेक्ट्रोनिक्स पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहते हैं. इसमें कई पार्ट्स शामिल हैं, जिनकी लिस्ट ये है.      डिस्प्ले मॉड्यूल     सब-असेंबली कैमरा मॉड्यूल     प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA)     लिथियम सेल एनक्लोजर      रेजिस्टर      कैपेसिटर      फेराइट्स आदि  इन कंपोनेंट का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप और माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू उपकरणों में होता है.  PLI से कितनी अलग है कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, सरकार की पहले की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम से अलग है. PLI में सब्सिडी प्रोडक्शन से कनेक्टेड होती है, जबकि  इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम में इंसेंटिव तीन अहम पैमानों पर तय किए गए हैं     सालाना रोजगार सृजन     पूंजीगत खर्च (कैपेक्स)     सालाना उत्पादन Apple और Samsung जैसी कंपनियों के भारत में एक्स्ट्रा असेंबली यूनिट्स लगाने केबाद भी देश में वैल्यू एडिशन 15-20% के आसपास है. सरकार इसको बढ़ाकर 30-40% तक करना चाहती है.  recent visitors 42