UGC के नए नियमों पर सवर्ण समाज का विरोध, न्यायधानी में बंद का नहीं दिखा असर

बिलासपुर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज देशभर में सवर्ण समाज ने बंद का आह्वान किया है. हालांकि, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बंद बेअसर नजर आया और मुख्य बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे. लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. सामान्य वर्ग के समाज प्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों ने UGC के नए नियमों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ये शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों के खिलाफ है. सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है. यूजीसी कानून विरोध आंदोलन के संयोजक डॉ प्रदीप शुक्ला ने कहा कि जब तक इन नियमों को रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. आज शहर में बड़ी रैली निकालने और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी है. फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे. जानिए क्यों हो रहा UGC के नियमों का विरोध बता दें, UGC ने यह नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी की कथित जातिगत भेदभाव के कारण हुए हत्या मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए थे, ताकि कैंपस में जातिगत और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म किया जा सके. लेकिन नियम लागू होते ही देशभर में सवर्ण समाज ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. विवाद की मुख्य वजहें और विरोधियों के तर्क सामान्य वर्ग (S-4 जैसे संगठन) और कई शिक्षक समूहों द्वारा विरोध के पीछे निम्नलिखित तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:     OBC को शामिल करना: विरोधियों का तर्क है कि SC-ST के साथ अब OBC को भी इन कड़े सुरक्षा प्रावधानों में शामिल करना नियमों के दुरुपयोग की संभावना को बढ़ाता है.     झूठे आरोपों का डर: सवर्ण संगठनों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वाड’ और ‘समता दूत’ जैसी व्यवस्थाओं से निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है.     असमान सुरक्षा: तर्क दिया जा रहा है कि नियम केवल आरक्षित वर्गों की सुरक्षा की बात करते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभाव से सुरक्षा का कोई स्पष्ट ढांचा इसमें नहीं दिखता. सुप्रीम कोर्ट ने नए नियम पर लगाई रोक चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा वर्तमान रेगुलेशन में बहुत धुंधली है.नियमों को और अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है ताकि यह देखा जा सके कि ये ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन तो नहीं कर रहे. कोर्ट ने कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं आता, 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही प्रभावी रहेंगे. recent visitors 43

राज्यपाल पटेल ने नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का लोकार्पण किया

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भक्तिभाव और विधि-विधान के साथ नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का शुभ लोकार्पण किया। यह पावन समारोह रविवार को श्रद्धा, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच संपन्न हुआ। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ हुए समारोह में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह भी मौजूद थे। राज्यपाल श्री  पटेल का मंदिर परिसर आगमन पर पारंपरिक सनातन रीति से स्वागत किया गया। उन्होंने कलश के साथ मंदिर में मंगल प्रवेश कर विधि-विधान से कलश एवं ध्वज का पूजन किया। उन्होंने भगवान के श्री चरणों में पूजा-अर्चना कर प्रदेश के विकास के लिए प्रार्थना की। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के मध्य माँ सरस्वती की पावन प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा और भक्तिभाव से दीप प्रज्ज्वलित किया और प्रदेशवासियों के मंगल की कामना की। उन्होंने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राज्यपाल ने मंदिर में हुए नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों का अवलोकन किया। इसे आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि समग्र विकास कार्य मंदिर परिसर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लक्ष्य के साथ किया गया है। नवीनीकरण की संपूर्ण परियोजना 84 लाख 13 हजार 100 रुपये की लागत से संपन्न हुई है। इस कार्य में करीब 76 लाख 96 हजार रुपये के सिविल निर्माण तथा लगभग 7 लाख 16 हजार रुपये के विद्युत संबंधी कार्य कराए गए है। मंदिर परिसर में लगभग 2,700 वर्गफुट क्षेत्रफल का विशाल हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 1,120 वर्गफुट क्षेत्र में भोजनशाला एवं भंडारा कक्ष और 560 वर्गफुट क्षेत्र में सुसज्जित रसोईघर भी तैयार किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव, मुख्य अभियंता लोक निर्माण श्री संजय मस्के, अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण श्री हरी शंकर जयसवाल, नियंत्रक हाऊसहोल्ड लोकभवन श्रीमती शिल्पी दिवाकर, लोक निर्माण विभाग की सिविल, इलेक्ट्रिकल शाखा और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि सहित लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।   recent visitors 38

प्रो रेसलिंग लीग 2026: विदेशी रेसलर्स से मुकाबला खेल की समझ करता है मजबूत, मनीषा भानवाला ने बताए फायदे

नोएडा महाराष्ट्र केसरी की मनीषा भानवाला को दिल्ली दंगल वॉरियर्स के खिलाफ प्रो रेसलिंग लीग 2026 सेमीफाइनल के दौरान 57 किग्रा महिला कैटेगरी में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए फाइटर ऑफ द मैच चुना गया। अपनी टीम की हार के बावजूद, 28 साल की मनीषा ने कहा कि लीग बहुत कीमती है। यह एक्सपोजर और सीखने के मौके देती है। इससे भारतीय पहलवानों को एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े वैश्विक टूर्नामेंट की तैयारी करने में मदद मिलेगी। मनीषा ने एशियन गेम्स और ओलंपिक्स जैसे ग्लोबल इवेंट्स की तैयारी में प्रो रेसलिंग लीग की अहमियत पर आईएएनएस से कहा, "जब भी इंडिया में कोई मुकाबला होता है, तो हम सबके खिलाफ खेलते हैं, और इससे बहुत अच्छा अनुभव मिलता है। हम विदेशी खिलाड़ियों से भी बहुत कुछ सीखते हैं क्योंकि जब हम विदेश जाते हैं, तो वे ही हमारे सामने विपक्षी होते हैं। उनके साथ अभ्यास करने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि क्या करना है और कैसे करना है।" उन्होंने कहा, "इस लीग में खेलने से हमें अपनी गलतियां पहचानने में मदद मिलती है और हमें यह आइडिया मिलता है कि हमें किन चीजों पर काम करने की जरूरत है। यह लीग बहुत फायदेमंद है।" अनुभवी और शीर्ष विदेशी पहलवानों के साथ रहने और उनसे सीखने के सवाल पर भानवाला ने कहा, "ऐसी कई चीजें हैं जो हम नहीं जानते, और हम उनसे सीखते हैं। हम समझते हैं कि किसके लिए क्या सबसे अच्छा काम करता है, इसलिए उनके साथ रहना बहुत फायदेमंद है। सब लोग साथ रहते हैं और साथ में खाना भी खाते हैं, जो अच्छा लगता है।" मैच के परिणाम के बारे में उन्होंने कहा कि शायद हम अनलकी थे। दिल्ली दंगल वॉरियर्स नोएडा इंडोर स्टेडियम में एक करीबी मुकाबले वाले सेमीफाइनल में महाराष्ट्र केसरी को 5-4 से हराकर फाइनल में पहुंच गई। अंजलि ने 62 किग्रा महिलाओं के मुकाबले में 12-4 से जीत हासिल करके दिल्ली को शुरुआती बढ़त दिलाई, लेकिन महाराष्ट्र ने जल्दी ही वापसी की और मनीषा भानवाला ने 57 किग्रा कैटेगरी में 15-0 की टेक्निकल सुपीरियोरिटी से शानदार जीत हासिल करके शनिवार को मुकाबला बराबर कर दिया। recent visitors 37

क्रिकेट के रंग में रंगा रायपुर प्रेस क्लब, इंटर प्रेस प्रतियोगिता में संपादकों–पूर्व पदाधिकारियों का रोमांचक मैच, डिप्टी सीएम साव भी मैदान में

रायपुर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के नेताजी सुभाष स्टेडियम में रायपुर प्रेस क्लब द्वारा स्वर्गीय कुलदीप निगम की स्मृति में आयोजित खेल मड़ई के अंतर्गत इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन किया। रायपुर प्रेस क्लब के इस आयोजन का उद्देश्य पत्रकार साथियों को व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर खेलों से जोड़ना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। प्रतियोगिता में पत्रकार जगत की विभिन्न टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले खेले जाएंगे। उद्घाटन अवसर पर पहला मैच संपादकों और प्रेस क्लब के पूर्व पदाधिकारियों की टीमों के बीच खेला गया, जिसमें दोनों ही टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। उद्घाटन के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव स्वयं मैदान में उतरे और बल्ला थामकर क्रिकेट खेलते नजर आए। डिप्टी सीएम का यह अंदाज देखकर आयोजन का उत्साह और भी बढ़ गया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब द्वारा खेल मड़ई का आयोजन एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल है। खेलों का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है और अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से खेलना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार साथियों की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद खेलों के प्रति उनका उत्साह काबिले-तारीफ है। उपमुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब के सभी पदाधिकारियों, आयोजकों और प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी टीमों को शुभकामनाएं दीं। recent visitors 45

कल से शुरू हो रहा है साल का अंतिम महीना: सुख-समृद्धि चाहते हैं तो इन भूलों से बचें

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 2 फरवरी 2026 से साल के अंतिम महीने यानी फाल्गुन माह की शुरुआत हो रही है. यह महीना न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वसंत के आगमन के लिए जाना जाता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है. फाल्गुन का समापन 3 मार्च 2026 को होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में भगवान विष्णु, शिव जी और श्री कृष्ण की उपासना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. फाल्गुन के महीने में भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत ही कल्याणकारी होता है, क्योंकि इसी माह में शिव-शक्ति के मिलन का उत्सव महाशिवरात्रि मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस माह का महत्व, पूजा विधि और वे गलतियां जिनसे आपको बचना चाहिए. फाल्गुन माह का विशेष महत्व फाल्गुन माह को आनंद और उल्लास का महीना कहा जाता है. इसी महीने में महाशिवरात्रि और होली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. चंद्रमा का जन्म भी इसी माह में माना जाता है, इसलिए मानसिक शांति के लिए इस महीने में चंद्र देव की पूजा फलदायी होती है. भूलकर भी न करें ये गलतियां! फाल्गुन के महीने में कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है, ताकि घर की सुख-शांति बनी रहे. देर तक न सोएं: इस महीने से मौसम बदलने लगता है. सुबह देर तक सोना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए हानिकारक माना जाता है. नशीले पदार्थों से परहेज: फाल्गुन में तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. यह भक्ति का महीना है. साफ-सफाई का अभाव: इस महीने में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. गंदे कपड़े पहनना या घर में गंदगी रखना दरिद्रता को आमंत्रण देता है. क्रोध और वाद-विवाद: यह प्रेम का महीना है. किसी का अपमान न करें और न ही घर में झगड़ा होने दें, वरना लक्ष्मी जी रुष्ट हो सकती हैं. शीतल जल का त्याग न करें: स्वास्थ्य की दृष्टि से इस महीने से ठंडे पानी से स्नान करना और अधिक पानी पीना शुरू कर देना चाहिए. फाल्गुन माह की पूजा विधि इस पवित्र माह में अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आप इस विधि से पूजा कर सकते हैं. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें. सूर्य को अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, रोली और फूल डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें. श्री कृष्ण की उपासना: फाल्गुन में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप या राधा-कृष्ण की पूजा करें. उन्हें अबीर-गुलाल और पीले फूल अर्पित करें. दान पुण्य: इस महीने में अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, कपड़े या शुद्ध घी का दान जरूरतमंदों को करें. फाल्गुन में क्या करें?     रंगों का प्रयोग: भगवान को प्रतिदिन गुलाल चढ़ाएं और स्वयं भी तिलक लगाएं.     मंत्र जाप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का नियमित जाप करें.   recent visitors 43

आस्था का महासंगम: राजिम कुंभ कल्प 2026 में महाआरती, साधु-संतों और श्रद्धालुओं का उमड़ेगा सैलाब

रायपुर छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के नाम से विख्यात राजिम एक बार फिर धर्म, आस्था और सनातन संस्कृति के त्रिवेणी संगम का साक्षी बनने जा रहा है. माघ पूर्णिमा 1 फरवरी से महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 तक राजिम कुंभ कल्प 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा. इस वर्ष भी कुंभ कल्प का आयोजन नए मेला स्थल चौबेबांधा, राजिम में होगा. त्रिवेणी संगम पर इसका शुभारंभ रविवार की शाम 6.30 बजे महाआरती से होगा. यहां अलग-अलग अस्थाई कुंड तैयार किए गए हैं. साथ ही, साधु-संतों के स्नान की भी व्यवस्था है. शाही स्नान घाट को 50 से 100 मीटर और आरती घाट को लगभग 120 मीटर लंबा बनाया गया है. वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक भव्य मंच बनाया गया है. महानदी में लक्ष्मण झूला के ठीक नीचे प्रशासन द्वारा अस्थाई सड़क बनाई गई है, जहां कई दुकानें लगाई जाएंगी. राजिम कुंभ मेला जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है. रेलवे श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 1 फरवरी से 15 फरवरी तक दो स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. इससे यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी. कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन मंदिर हसौद, सीबीडी, केंद्री, अभनपुर मानिकचौरी और राजिम में रूकेगी. वर्तमान में इस रूट पर तीन ट्रेनों का संचालन हो रहा है. रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार गाड़ी संख्या 08755 रायपुर-राजिम मेमू पैसेंजर रायपुर स्टेशन से 11.55 बजे रवाना होकर 12.15 बजे मंदिर हसौद, 12.24 बजे सीबीडी, 12.34 बजे केंद्री, 12.49 बजे अभनपुर, 12.57 बजे मानिकचौरी और 13.20 बजे राजिम पहुंचेगी. ठीक इसी तरह गाड़ी संख्या 08756 राजिम-रायपुर मेमू कुंभ मेला स्पेशल राजिम रेलवे स्टेशन से 2 बजे रवाना होकर, 2.07 बजे मानिकचौरी, 2.14 बजे अभनपुर, 2.22 बजे केंद्री, 2.31 बजे सीबीडी, 2.43 बजे मंदिर मानिकचौरी और 3:30 बजे रायपुर पहुंचेगी. इसी तरह दूसरी गाड़ी संख्या 08757 रायपुर- राजिम मेमू पैसेंजर रायपुर स्टेशन से 2.30 बजे रवाना हो कर 2.48 बजे मंदिर हसौद, 2.49 बजे सीबीडी, 3.9 बजे केंद्री, 3.23 बजे अभनपुर, 3.31 बजे मानिकचौरी और 4 बजे राजिम पहुंचेगी. राज्यपाल करेंगे उद्घाटन राजिम कुंभ कल्प 2026 का शुभारंभ माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से होगा. उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे. इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, कुरूद विधायक अजय चन्द्राकर, राजिम विधायक रोहित साहू, बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, अभनपुर विधायक इन्द्रकुमार साहू सहित जिले एवं आसपास के अनेक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी. देशभर के संत-महात्माओं का होगा दिव्य समागम राजिम कुंभ कल्प के शुभारंभ अवसर पर देशभर से प्रतिष्ठित संत-महात्माओं का दिव्य समागम होगा. प्रमुख संतों में दंडी स्वामी डॉ. इन्दुभवानन्द तीर्थ, दंडी स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ, महंत रामसुंदर दास, महंत नरेन्द्र दास, स्वामी राजीव लोचन दास, स्वामी विराम देवाचार्य, आचार्य स्वामी राकेश, साध्वी महंत प्रज्ञा भारती, संत कौशलेन्द्र राम, बालयोगेश्वर रामबालक दास, महंत सर्वेश्वर दास, स्वामी डॉ. राजेश्वरानन्द, संत परमात्मानन्द, संत युधिष्ठिर लाल, संत गोकुल गिरि, प्रजापिता ब्रह्मकुमार नारायण भाई, ब्रह्मकुमारी पुष्पा बहन, हेमा बहन सहित अनेक संत शामिल होंगे. महानदी आरती, सांस्कृतिक संध्या और सत्संग होंगे मुख्य आकर्षण कुंभ कल्प के दौरान प्रतिदिन शाम 6:30 बजे महानदी आरती का आयोजन किया जाएगा. वहीं शाम 4 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम और शाम 7 बजे से मुख्य मंच पर विविध आयोजन होंगे. विशेष आकर्षण के रूप में 9 से 11 फरवरी तक पंडोखर सरकार संत गुरूशरण जी महाराज का सत्संग दरबार त्रिवेणी संगम राजिम में आयोजित होगा, जो प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा. recent visitors 35

जब जीवन दे इम्तिहान—ऋण, रोग और शत्रु से बचने के चाणक्य नीति के 10 अमोघ उपाय

लाइफ में सक्सेज के साथ जीना बहुत ही मुश्किल होता है। कई बार हमें असफलता, निराशा और लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। कुछ मौके ऐसे आते हैं जब लोग बिना अपने विवेक का इस्तेमाल किए बड़ी मुसीबत में फंस जाते हैं। उन सारी समस्याओं से निकलने के लिए बड़ों की बातों पर अमल करना जरूरी है। जैसे चाणक्य नीति में कही गई ये 10 बातें, जो आपको लाइफ में केवल सक्सेज नहीं देंगी बल्कि दुश्मनों से बचने और सही-गलत के पहचान का फर्क भी सिखाएगी। चाणक्य नीति की ये बात बहुत ही काम की है। अगर जीवन में सफलता और सुकून चाहिए तो कर्ज नहीं रखना चाहिए। शरीर के रोग को जड़ से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। नहीं तो ये बड़े दुख देते हैं। वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है इसका मतलब है कि अगर आप गलत और नीच प्रवृत्ति का इंसान किसी का भी बुरा कर सकता है। जैसे जंगल की आग चंदन की लकड़ी को भी नहीं छोड़ती। आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है मुसीबत के समय जो आपके साथ बना रहे वहीं सच्चा दोस्त होता है। ऐसे इंसान की परख जरूर करनी चाहिए। जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य इंसान को धैर्य रखना जरूर आना चाहिए। तभी आप लाइफ में सक्सेजफुल बनेंगे। एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है। कहने का मतलब है कि सौ चापलूसी करने वाले लोगों से भला एक विपरीत स्वभाव का हितैषी है। कल के मोर से आज का कबूतर भला चाणक्य की नीति उन लोगों के लिए है जो कल के बेहतर में अपने आज को गंवा देते हैं। मतलब संतोष सबसे बड़ा धन है। आज जो भी है उसमे संतोष करना सीखें। कल क्या होगा इसके चक्कर में आज के पल को खराब ना करें। आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है चाणक्य की ये नीति सिखाती है कि आप दुष्ट इंसान को कितना भी सम्मान देंगे वो आपका अहित ही करेगा। जैसे आग को सिर पर रखने पर भी वो जलाने का काम ही करेगी। भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है चाणक्य नीति की इस लाइन का मतलब है कि भूख से बेबस होकर इंसान बड़े से बड़ा पाप कर सकता है। भूखा इंसान खुद का और दूसरों का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। विद्या ही निर्धन का धन है अगर आप गरीब हैं और पैसे कमाना चाहते हैं तो आपकी जानकारी और ज्ञान ही इस काम में सबसे ज्यादा मदद करेगी। इसलिए खुद को काबिल बनाने के लिए पढ़ना जरूरी है। संकट में बुद्धि ही काम आती है चाणक्य नीति में लिखी ये बात सिखाती है कि मुसीबत के समय सबसे पहले अपनी बुद्धि और विवेक पर भरोसा करें। बुद्धि की मदद से ही आप मुसीबत से बाहर निकल सकते हैं।   recent visitors 43