21 मई को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मिली ऐतिहासिक कामयाबी पर मुख्यमंत्री ने जवानों को दी बधाई

रायपुर : जवानों के बुलंद हौसलों से मिटेगा नक्सलवाद का कलंक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने बासिंग स्थित बीएसएफ कैम्प पहुंचकर की जवानों की हौसला अफजाई कहा- फोर्स के अदम्य साहस और शौर्य को नमन 21 मई को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मिली ऐतिहासिक कामयाबी पर मुख्यमंत्री ने जवानों को दी बधाई रायपुर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि हमारे जवानों का हौसला दुर्गम पहाड़ों से भी ऊंचा है। नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक लड़ाई में हमारे जवानों ने अदभुत, साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है। जवानों के बुलंद हौसलों से अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर से नक्सलवाद का नामोनिशान मिट जाएगा। मुख्यमंत्री साय आज ओरछा ब्लॉक के ग्राम बासिंग स्थित बीएसएफ कैम्प पहुंचे, जहां पर उन्होंने 21 मई को डीआरजी-बीएसएफ और जिला बल के द्वारा माओवादियों के विरूद्ध नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर की सरहदी पहाड़ियों में चलाए गए नक्सल विरोधी ऑपरेशन में 27 नक्सलियों को मार गिराने वाले जवानों की हौसला-अफजाई की। उन्होंने बासिंग कैम्प में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह माओवाद के विरूद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है जिसमें सुरक्षा बलों ने हार्डकोर माओवादी बसवा राजू सहित 27 नक्सलियों को मार गिराया है। मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह भी बासिंग पहुंचे। मुख्यमंत्री ने जवानों की हौसला अफ़ज़ाई करते हुए तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने जवानों से कहा कि बस्तर में अमन और शांति लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बल के जवानों को 50 मोटर बाइक पर हरी झंडी दिखाकर गस्त करने के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री साय ने जवानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने जिस तरह उच्च स्तरीय रणनीति बनाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया और कामयाबी हासिल की वह काबिले-तारीफ है। फोर्स के इस अदम्य साहस और शौर्य को नमन है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर के माथे से माओवाद का कलंक पूरी तरह से मिट जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सल समस्या को समूल समाप्त करने का संकल्प लिया है, वह पूरा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि वह दिन दूर नहीं जब बस्तर अंचल छत्तीसगढ़ के विकास से पूरी तरह जुड़ जाएगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि बस्तर के अंदरूनी इलाके, जहां कुछ साल पहले तक जाना भी संभव नहीं था, वहां अब शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में अब गति आएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों को शासन की योजनाओं से जोड़ने नियद नेल्लानार, पीएम जनमन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक बदलाव अब बस्तर में दिखने लगा है। माओवाद की समाप्ति के साथ ही बस्तर विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनकी बहादुरी के लिए बधाई दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस ऑपरेशन और जवानों की बड़ी और ऐतिहासिक सफलता की सराहना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन होने जा रहा है जो विकास और प्रगति की राह पर बस्तर को ले जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को एलईडी सेट और गिफ्ट हैम्पर भेंट किए। इस अवसर पर ऑपरेशन में शामिल जवानों ने की गई तैयारियों और रणनीति की जानकारी मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री को दी। इसके पहले, जवानों ने मुठभेड़ के बाद माओवादियों से रिकवर किए गए हथियारों का प्रदर्शन किया, जिसमें बीजीएल लॉन्चर, 12 बोर बंदूक, .303 बंदूक, 7.62 रायफल, 5.56 एमएम इंसास, एके-47, 9 एमएम कार्बाइन सहित विभिन्न प्रकार के हथियार सम्मिलित थे। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, डीआईजी अमित तुकाराम कामले, कलेक्टर नारायणपुर श्रीमती प्रतिष्ठा ममगाईं, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे। recent visitors 45

यंगेस्ट एथिकल हैकर शुभांक सिंगहाई के विशेष सत्र का आयोजन

भोपाल मध्यप्रदेश कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (एमपी-सर्ट) द्वारा साइबर सुरक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधकों (डीईजीएम) के लिये एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होटल पलाश रेसिडेंसी भोपाल में शुक्रवार को किया गया। यह कार्यशाला विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे एवं एमपी-सर्ट के निदेशक गुरु प्रसाद के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यशाला में राज्य के सभी 55 जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधकों ने भाग लिया, जिन्हें अपने-अपने जिलों के लिए मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। कार्यशाला डीईजीएम को नवीनतम साइबर रणनीतियों, उपकरणों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से सुसज्जित करने के उद्देश्य से आयोजित हुई। जिससे साइबर सुरक्षा की जड़ें जिला स्तर तक मजबूत हो सके। विशेष सत्र में भोपाल के 11वीं के छात्र शुभांक सिंगहाई, यंगेस्ट एथिकल हैकर ने सहभागिता की जिसमें उन्होंने रियल-टाइम हैकिंग का डेमो प्रस्तुत करके यह स्पष्ट किया कि साइबर सुरक्षा आज के समय में कितनी आवश्यक है। उनका व्यावहारिक प्रदर्शन उपस्थित डीजीईएम के लिए अत्यंत प्रभावशाली एवं शिक्षाप्रद रहा। कार्यशाला में संयुक्त निदेशक, एमपी-सर्ट एवं पुलिस अधीक्षक एटीएस वैभव श्रीवास्तव ने सत्र को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार साइबर अपराधी मानवीय कमजोरियों जैसे लालच, आलस्य और डर का फायदा उठाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी करते हैं। श्रीवास्तव ने फिशिंग ईमेल, फर्जी सिम कार्ड ऑफर, आधार आधारित पहचान की चोरी और ओटीपी धोखाधड़ी जैसे मामलों के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड इस्तेमाल करने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय करने, संदिग्ध लिंक या कॉल से बचने और ओटीपी या कार्ड विवरण कभी भी साझा न करने की सलाह दी। यह कार्यशाला राज्य सरकार की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें जिला स्तरीय अधिकारियों को संभावित खतरों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।   recent visitors 51

योगी सरकार ने साढ़े चार लाख प्राइमरी टीचरों को दिया बड़ा तोहफा, नौ साल बाद हो सकेंगे तबादले, आदेश जारी

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने पारस्परिक स्थानांतरण के बाद अब प्रदेश के लाखों शिक्षकों को सामान्य ट्रांसफर का भी बड़ा तोहफा दिया है। अब जिले के भीतर और जिले के बाहर शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण के आदेश भी जारी कर दिए हैं। सरकार ने सामान्य तबादले के आदेश जारी कर दिए। इससे पूर्व आठ वर्ष पहले शिक्षकों के वर्ष 2016 में जिले के अन्दर सामान्य तबादले किए गए थे जबकि दो साल पूर्व वर्ष 2023 में जिले के बाहर सामान्य स्थानांतरण के आदेश हुए थे। बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्वेच्छा से अन्तः जनपदीय एवं अन्तर्जनपदीय सामान्य स्थानान्तरण के लिए आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति के अनुमोदन के बाद की जाएगी। कमेटी में डीएम के अलावा मुख्य विकास अधिकारी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य तथा जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। बीएसए को कमेटी का सचिव भी नामित किया गया है। शिक्षकों का स्थानांतरण यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध छात्र संख्या के आधार पर किया जाएगा। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के मानकों के आधार पर छात्र-शिक्षक अनुपात की गणना करते हुए शिक्षकों की आवश्यकता वाले एवं जरुरत से अधिक शिक्षक वाले जिलों को चिन्हित कर आनलाइन तबादले किए जाएंगे। ऑनलाइन विकल्प वरीयता के क्रम में होगा अन्तर्जनपदीय में आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले चिन्हित जिलों में से तैनात शिक्षकों द्वारा स्वेच्छा से अध्यापक की आवश्यकता वाले जिलों का ऑनलाइन विकल्प वरीयता क्रम में लिया जा सकेगा। साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात पूर्ण करने के उद्देश्य से आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले जिलों से अध्यापक की आवश्यकता वाले जिलों में किया जाएगा। स्थानान्तरण के लिए जनपद में कार्यरत नियमित शिक्षक एवं शिक्षिका अर्ह होंगे। अन्तर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए सेवावधि की बाध्यता नहीं होगी। शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन पत्र सबमिट करने के बाद ही पूर्ण माना जायेगा अन्यथा की स्थिति में आवेदन पत्र निरस्त माना जाएगा। आवेदप पत्र की स्वप्रमाणित छायाप्रति बीएसए ऑफिस में जमा करनी होगी संबंधित शिक्षकों द्वारा भरे गए आवेदन पत्र एवं उससे सम्बन्धित अभिलेखों की छायाप्रतियों को स्व-प्रमाणित कर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करना अनिवार्य होगा। शिक्षकों द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के सत्यापन में अभिलेख फर्जी/कूटरचित पाये जाने पर ‌उस अध्यापक के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण एवं समायोजन प्रक्रिया की कार्यवाही उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली-1981 (अद्यतन संशोधित) एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना 2010 एवं 2014 में निहित प्राविधानों के अधीन की जाएगी। शिक्षकों द्वारा स्वेच्छा से अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण एवं समायोजन के बाद संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा मानव सम्पदा पोर्टल पर शिक्षकों के विवरण को अपडेट किया जाएगा। शिक्षक संगठनों ने किया स्वागत जिले के अन्दर एवं जिले के बाहर सामान्य रूप से ट्रांसफर के आदेश जारू होने पर शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों शिक्षकों को सामान्य तबादले के आदेश शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात है। 2016 के बाद जिले अंदर सामान्य रूप से तबादले के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ जिले बाहर भी आदेश आने से शिक्षकों में ख़ुशी की लहर है।   recent visitors 61

मध्य प्रदेश में ठंडी होगी नौतपा की शुरुआत, प्रदेश में कई क्षेत्रों में मानसून पूर्व की अच्छी वर्षा होने के भी आसार

भोपाल अरब सागर में गहरा कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। शनिवार को इसके अवदाब के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। उधर, अलग-अलग स्थानों पर अन्य मौसम प्रणालियां भी बनी हैं। इस वजह से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा हो रही है। शुक्रवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक गुना एवं उमरिया में तीन, रतलाम में 0.1 मिलीमीटर वर्षा हुई। सबसे अधिक 41.6 डिग्री सेल्सियस तापमान खजुराहो में दर्ज किया गया। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अधिकतम तापमान में भी गिरावट हो गई है। जिसके चलते नौतपा (25 मई से दो जून तक का समय) की शुरुआत ठंडी होने की संभावना है। 27 मई को बंगाल की खाड़ी में भी कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में कई क्षेत्रों में मानसून पूर्व की अच्छी वर्षा होने के भी आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके रायकवार ने बताया कि वर्तमान में अरब सागर के दक्षिणी कोंकण तट के पास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यहां से एक द्रोणिका दक्षिण-मध्य महाराष्ट्र, दक्षिण मराठवाड़ा, उत्तरी तेलंगाना से दक्षिणी छत्तीसगढ़ तक बनी हुई है।   इन जिलों में होगी जमकर बारिश दक्षिणी हरियाणा और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। मध्य पाकिस्तान और उसके आसपास भी हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर उत्तरी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश से उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश तक एक द्रोणिका मौजूद है। इन मौसम प्रणालियों के असर से शनिवार को भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, शहडोल, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा होने की संभावना है। विशेषकर जबलपुर एवं शहडोल संभाग में कहीं-कहीं भारी वर्षा भी हो सकती है। नौतपा में तपिश बढ़ने की संभावना कम मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आ रही है। इस वजह से अभी चार-पांच दिन तक रुक-रुककर वर्षा का सिलसिला बना रह सकता है। इस वजह से नौतपा में तपिश बढ़ने की संभावना कम ही है। recent visitors 61

मध्‍य प्रदेश में सहकारी समितियों के चुनाव की मई से शुरू होनी थी प्रक्रिया, अब आगे बढ़ाए गए

भोपाल प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव सरकार ने एक बार फिर टाल दिए। अब समितियों के पुनर्गठन का हवाला देकर चुनाव आगे बढ़ाए गए हैं। दरअसल, सहकारिता मंत्रालय ने प्रत्येक पंचायत स्तर पर एक साख सहकारी समिति गठित करने के लिए कहा है। प्रदेश में परीक्षण करने के बाद लगभग साढ़े छह सौ समितियां बनाने का निर्णय हुआ है। इनमें से अभी मात्र 189 समितियां गठित करने की प्रक्रिया पूरी हुई है। इसे देखते हुए चुनाव टाल दिए गए। उधर, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार समितियों की कमान किसानों के हाथों में सौंपना ही नहीं चाहती है, इसलिए किसी न किसी बहाने से बार-बार चुनाव टाले जा रहे हैं। प्रदेश की साढ़े चार हजार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव आखिरी बार 2013 में हुए थे, जिनका कार्यकाल 2018 में समाप्त हुआ। नियमानुसार छह माह पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन विधानसभा चुनाव, किसान कर्ज माफी और अन्य कारणों से चुनाव प्रक्रिया लगातार टलती रही। चुनाव नहीं होने के कारण हाई कोर्ट की जबलपुर व ग्वालियर खंडपीठ में कई याचिकाएं दायर हुईं। recent visitors 44

अंकिता लोखंडे ने कास्टिंग काउच का दर्दनाक अनुभव साझा किया, कहा गया प्रोड्यूसर संग सोना होगा

मुंबई  फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक के पीछे अक्सर एक स्याह सच्चाई छुपी होती है. कई एक्ट्रेस ने समय समय पर इस तरह की सच्चाई पर अपनी बात खुलकर रखी है. खुद जानी मानी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे ने भी अपने साथ हुआ एक दर्दनाक अनुभव साझा किया था, जो न सिर्फ चौंकाने वाले थे बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के एक काले सच पर भी रोशनी डालता है. अंकिता भले ही फिल्मी दुनिया में कदम रख चुकी हैं, लेकिन अभी भी वह अपनी जड़े नहीं जमा पाई हैं. कास्टिंग काउच को लेकर अपना एक्सपीरियंस शेयर करने वाली एक्ट्रेस ने कहना है कि एक बार एक प्रोड्यूसर ने उन्हें काम देने के बदले में उनका जिस्म मांगा था. जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कर रही महज 19-20 साल की थीं. एक्ट्रेस ने कहा कि उनका सामना एक ऐसे प्रोड्यूसर से हुआ था जो उनके साथ सोना चाहता था. 19 की उम्र में हुई थी कास्टिंग काउच का शिकार अकिंता लोखंडे जब अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं, उस वक्त महज 19-20 साल की थीं. अपने एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने अपने साथ हुए एक बुरे एक्सापीरियंस का खुलासा करते हुए कहा था, ‘मैं बहुत स्मार्ट थी. मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया और मैं उस वक्त कमरे में अकेली थी. उम्र मेरी जब 19-20 साल रही होगी. उस दौरान मुझसे पूछा कि आपका प्रोड्यूसर किस तरह का कॉम्प्रोमाइज करवाना चाहता है. क्या मुझे किसी पार्टी या फिर डिनर में साथ जाना होगा.’ काम के बदले की गई साथ सोने की डिमांड अंकिता लोखंडे ने अपनी बात रखते हुए आगे बताया, ‘मैंने कहा कि मुझे लगता है कि आपका प्रोड्यूसर किसी लड़की के साथ सोना चाहता है. क्योंकि वह डायरेक्ट मुझे बोल नहीं पा रहे थे. लेकिन मैं समझ गई. मैंने कहा कि वो किसी टैलेंटेड लड़की के साथ काम नहीं करना चाहता. फिर वो मुझसे माफी मांगने लगे और कहा कि मैं कोशिश करूंगा कि आपको इस फिल्म में मौका मिले. मैंने उसी वक्त उन्हीं क्लीयर किया कि जो आप चाहते हैं मैं उसमें इंटरेस्टेड नहीं हूं और ये कहकर मैं वहां से चली आई.’ पहचान बनाने के बाद भी हुईं शिकार इसी इंटरव्यू में अंकिता ने इस बात का खुलास किया कि जब वह फिल्मों में काम करने के ट्राई कर रही थीं. उस वक्त वह टेलीविजन में अपनी पहचाना बना चुकी थीं. लेकिन तब भी उन्हें इस तरह की कास्टिंग काउच का शिकार होना पड़ा था. उन्होंने कहा कि मैं किसी का नाम तो नहीं लेना चाहती. लेकिन कोई छोटे स्टार नहीं बल्कि बड़े एक्टर हैं. मुझे अजीब सी लगा सुनकर और मैं वापस आ गई.वहां गिन एंड टेक वाली चीज थी, मुझे लगा कि अब मेरा यहां काम नहीं बनेगा. बता दें कि अंकिता ने कंगना की फिल्म मणिकर्णिका में भी सपोर्टिंग रोल प्ले किया था. इसके अलावा वह रणदीप हुड्डा के साथ फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ में भी नजर आई थीं. लेकिन उनकी ये फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी.   recent visitors 54

अबूझमाड़ की एक ही दिन में बदल गई तस्वीर, जगह-जगह लाल रंग के नक्सली स्मारक दिखाई देते अब वहा जवानों की है धाक

जगदलपुर अबूझमाड़ इलाके में हाल ही में हुई मुठभेड़ के बाद वहां की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. माओवादियों की मांद कहे जाने वाले अबूझमाड़ में प्रवेश करते ही जगह-जगह लाल रंग के नक्सली स्मारक दिखाई देते हैं. लेकिन एक ही दिन में यह सारी चीजें बदल गई, अब यहां सुरक्षाबलों के जवानों की धाक है. अबूझमाड़ के पथरीले रास्तों और उफनते नदी-नालों के बीच से होते हुए बोटेर गांव तक पहुंचा जा सकता है. सबसे पहला नक्सली स्मारक आदेड चौक में देखने को मिलता है. इस चौक की हालत भी बयां करती है कि यह इलाका कितना उपेक्षित और असुरक्षित रहा है. सड़क किनारे गिरे हुए बिजली के खंभे, टूटे रास्ते और वीरानी बोटेर गांव तक पहुँचने से पहले तोंदेबेड़ा, डोंडरबेड़ा और कूड़मेल जैसे गांवों को पार करना होता है. ये गांव भी उसी सन्नाटे और भय की चादर में लिपटे हुए हैं. बोटेर पहुँचते ही नज़ारा अलग था बड़ी संख्या में ग्रामीण यहाँ एकत्रित थे. बातचीत में पता चला कि ये लोग कुंडेकोट गांव के निवासी हैं, जो 21 मई से बोटेर में शरण लिए हुए हैं. दरअसल, कुंडेकोट में ही पुलिस और नक्सलियों के बीच ऐतिहासिक मुठभेड़ हुई थी. इस ऑपरेशन में नक्सलियों के जनरल सेक्रेटरी नंबाला केशव को मार गिराया गया, जिस पर डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम था. उसके साथ 26 अन्य नक्सली भी मारे गए. इस बड़ी कार्रवाई के बाद कुंडेकोट के ग्रामीण डर के साए में आ गए और जान बचाने के लिए अपना गांव छोड़कर बोटेर आ पहुंचे. नक्सलियों के इस मांद की सफाई (ऑपरेशन) डीआरजी के जवानों ने पूरी कुशलता के साथ किया. अब न तो नक्सली हैं, और न ही उनकी धमक. अब केवल डीआरजी के जवानों की धमक सुनाई पड़ती है. बसवराजु की मौत से पूरी तस्वीर बदल गई है, अब सुरक्षाबल के जवान इसे वापस नक्सलगढ़ नहीं बनने देने के लिए प्रतिबद्ध नजर आते हैं. अबूझमाड़ की यह जंग सिर्फ हथियारों की नहीं, हौसले, रणनीति और बलिदान की भी गवाही देती है. recent visitors 50