पुलिस ने ब्राउन शुगर और अफीम के साथ चार तस्करों को घेराबंदी कर दबोचा

मुंगेली  नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए मुंगेली पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन बाज’ चलाया जा रहा है. अभियान के तहत नशा तस्करों पर लगातार कार्रवाई जारी है. इसी कड़ी में आज पुलिस ने ब्राउन शुगर और अफीम के साथ चार तस्करों को घेराबंदी कर दबोचा है. इनके पास से 3, 63, 225 रुपए की जब्ती की गई है. दो बाइक से बिलासपुर से मुंगेली तस्करी पुलिस से मिली जानकारी अनुसार, चार युवक दो अलग-अलग मोटरसायकलों पर सवार होकर बिलासपुर से मुंगेली की ओर नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहे थे. चारों तस्कर ब्राउन शुगर और अफीम लेकर किसी बड़े ग्राहक तक नशीले पदार्थ को पहुंचाने की फिराक में थे. मुखबिर की सूचना पर थाना जरहागांव और साइबर सेल की संयुक्त टीम को अलर्ट कर दिया गया. पुलिस की अलग-अलग टीमों को ग्राम छतौना थाना के सामने मेन रोड पर अलग-अलग बिंदुओं पर तैनात किया गया. शाम के अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी तस्करी को अंजाम देना चाहते थे. लेकिन पुलिस ने ग्लैमर और हीरो स्प्लेंडर प्लस को घेराबंदी कर रोक लिया गया, दोनों बाइक पर चार युवक सवार थे. आरोपियों की तलाशी करने पर 51.87 ग्राम ब्राउन शुगर और 26.42 ग्राम अफीम बरामद किया गया. नशा तस्करी में शामिल चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. तलाशी के दौरान क्या मिला? चारों आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ और अन्य सामान बरामद हुआ: ब्राउन शुगर : 51.87 ग्राम (कीमत – 77,805 रुपए ) अफीम : 26.42 ग्राम (कीमत – 26,420 रुपए ) मोबाइल फोन : 03 नग (कीमत – 1,04,000 रुपए ) मोटरसायकल : 02 नग (कीमत – 1,40,000 रुपए ) कुल जप्ती मूल्य – 3,63,225 रुपए गिरफ्तार आरोपी 1. अभिषेक देवांगन (20 वर्ष) – बशीर खान वार्ड, मुंगेली 2. मयंक साहू (19 वर्ष) – बशीर खान वार्ड, मुंगेली 3. राजकुमार देवांगन (24 वर्ष) – विनोबा नगर, मुंगेली 4. साहिल ठाकुर (21 वर्ष) – शक्ति माई मंदिर चौक, मुंगेली चारों आरोपियों के खिलाफ थाना जरहागांव में अपराध क्रमांक 61/25 धारा 21, 22, 18 एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. recent visitors 61

स्व-सहायता समूह से जुड़कर सेल बाई दीदी ने बनाई अपनी पहचान, परिवार की आजीविका का बनी संबल

भोपाल अलीराजपुर के ग्राम जाम्बू खेड़ा निवासी श्रीमती सेल बाई दीदी की जिंदगी कभी गरीबी और संघर्ष की कहानी थी। वर्षा आधारित खेती और मजदूरी के भरोसे चलने वाला उनका परिवार मुश्किल से 3 से 4 हजार रुपये मासिक कमाता था। पति और चार बच्चों के साथ जीवन बेहद कठिन था। ज़रूरतों के लिए कभी रिश्तेदारों से मदद मांगनी पड़ती, तो कभी साहूकारों के ऋण लेकर सालों तक चुकाना पड़ता था। वर्ष 2017 में जब राज्य आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह गठन के विषय में उनके फलिया में एक बैठक हुई। बैठक में उन्हें जानकारी मिली कि कैसे स्व-सहायता समूह बनते हैं, कौन जुड़ सकता है और क्या लाभ होते हैं। उन्होंने यह सब परिवार को बताया और सभी की सहमति से 'बाबा देब आजीविका समूह' से जुड़ गईं। यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। स्व-सहायता समूह में जुड़ने के बाद उन्हें कृषि कार्यों का प्रशिक्षण मिला, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीक सीखी। सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली, बैंक से जुड़ाव बढ़ा और धीरे-धीरे आत्म-निर्भरता की ओर कदम बढ़ने लगे। समूह से मिले ऋण की मदद से उन्होंने पहले खाद-बीज खरीदे, फिर बैल, सिंचाई पंप, पाइप और सिंचाई के अन्य साधन जुटाए। खेती में सुधार हुआ और दो फसलें उगाने लगीं। धीरे-धीरे उन्होंने भूमिगत पाइप लाइन लगवाई, जिससे सिंचाई क्षेत्र बढ़ा और आमदनी में उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ। फिर पति के लिए फर्नीचर निर्माण कार्य के लिए मशीन खरीदी, जिससे घर पर ही फर्नीचर का काम शुरू हुआ। आज उनका परिवार सब्जी की खेती, फर्नीचर निर्माण और खेती के माध्यम से हर महीने 20 से 22 हजार रुपये कमाता है। बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो रही है। एक बेटा तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर गया है। कच्चे घर से अब चार कमरों का पक्का मकान बना है – प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से गैस कनेक्शन भी मिला। अब सेल बाई दीदी सिर्फ एक गृहणी नहीं हैं, बल्कि अपने परिवार की मजबूत आधारशिला हैं। गांव में पहचान बनी है, निर्णयों में उनकी भागीदारी है, बैंक और बाजार तक उनकी सीधी पहुंच है। भविष्य में वे ट्यूबवेल लगाकर तीन फसलें लेना चाहती हैं और एक बड़ी फर्नीचर दुकान खोलकर स्थायी रोजगार का साधन बनाना चाहती हैं। सेल बाई दीदी गर्व से कहती हैं — "अगर आजीविका मिशन न होता, तो मैं आज भी मजदूरी कर रही होती, साहूकारों के कर्ज में डूबी होती और मेरे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते। आजीविका मिशन हमारे जीवन में बदलाव लाने वाला वरदान साबित हुआ है।"   recent visitors 70

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विविध जागरूकता गतिविधियाँ

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर वन विभाग द्वारा वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में पश्चिम मण्डला सामान्य वन क्षेत्र में जैव विविधता पर आधारित स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता, वृत्त चित्र स्क्रीनिंग, गाँव की सफाई और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की बैठकों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया। recent visitors 60

सुसाइड नोट लिखकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे अतिथि शिक्षक ने लगाई फांसी, पेड़ में लटका शव मिलने से सनसनी फैली

डिंडौरी, शहपुरा जिले की तहसील मुख्यालय शहपुरा निवासी अतिथि का शुक्रवार की सुबह तहसील कार्यालय के पीछे चमरकुंडी में आम के पेड़ में लटका शव मिलने से सनसनी फैल गई। जानकारी में बताया गया कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे अतिथि शिक्षक ने यह कदम उठाया है। उसके पास से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने उल्लेख किया है कि मैं बहुत तनाव में हूं। मेरे कारण किसी को परेशानी न हो। मेरी बॉडी का पोस्टमार्टम न कराया जाए। थाना प्रभारी ने बताया गया कि गुरुवार की रात शहपुरा के वार्ड क्रमांक एक निवासी सियोल राय पिता डीके राय 38 वर्ष घर से निकला था। रात भर वापस नहीं आया। सुबह उसका शव फांसी पर लटका मिला। बताया गया कि 5 साल पहले उसके पिता भी घर छोड़कर दूसरे जगह चले गए हैं, जबकि मां घर में गंभीर बीमारी से जूझ रही है। ऐसे में इकलौते बेटे के फांसी लगाने से पूरा परिवार प्रभावित हुआ है। बताया गया कि गर्मी में अवकाश के चलते सरकारी स्कूल की छुट्टी है। ऐसे में मृतक आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था। पुलिस की मानें तो वह नशा करने का भी आदी था। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने मामला कायम कर जांच शुरू कर दी है। recent visitors 76

उप राष्ट्रपति धनखड़ के 26 मई को नरसिंहपुर प्रस्तावित भ्रमण की तैयारियों का मंत्री पटेल ने लिया जायजा

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को नरसिंहपुर कृषि उपज मंडी के पास होने वाले कृषि उद्योग समागम के कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों का जायजा लिया। उल्लेखनीय है कि उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ 26 मई को कृषि उद्योग समागम में शामिल होंगे। इस दौरान उन्होंने हेलीपैड स्थल, पौधरोपण स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, ग्रीन रूम, मंच, इन्वेस्टर्स मीट, बैठक व्यवस्था आदि का मुआयना किया। उन्होंने आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये। नरसिंहपुर में 26 मई को उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में कृषि उद्योग समागम का आयोजन होगा। निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि एशिया महाद्वीप की सबसे ज्यादा उपजाऊ जमीन नरसिंहपुर जिले में है और यहां खेती भी अच्छी होती है। उन्होंने कहा कि हमारा अगला कदम प्रोसेसिंग की तरफ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन दिवसीय कृषि उद्योग समागम के आयोजन के लिए नरसिंहपुर जिले को चुना, मैं उनका आभारी हूं। इस मेले में किसान भाईयों को उन्नत खेती करने के तरीके, नई तकनीक एवं मार्गदर्शन दिया जायेगा। 26 से 28 मई तक समागम के तीन दिवसों में इन्वेस्टर्स और जो अतिथि होंगे और आपस में बातचीत करेंगे। इस अवसर पर विधायक श्री महेन्द्र नागेश, पूर्व राज्यमंत्री श्री जालम सिंह पटेल, सहित अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 75

3 म्यूल खाता धारक गिरफ्तार, करोड़ों के ट्रांजेक्शन का हुआ खुलासा

महासमुंद सायबर ठगी में मदद करने वाले म्यूल अकाउंट से जुड़े तीन खाताधारकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4), 318(4), 61(2), 111 के तहत मामला दर्ज किया गया है. समन्वय पोर्टल से मिली थी सूचना मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को समन्वय पोर्टल के माध्यम से सूचना मिली थी कि जिले में 6 संदिग्ध बैंक खातों में बेहद कम समय में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है. इन छह खातों में से पांच खाते केनरा बैंक और एक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं. हैरानी की बात यह है कि सभी खाताधारक महासमुंद जिले के निवासी हैं, लेकिन इन खातों का संचालन दिल्ली से कोई अज्ञात व्यक्ति कर रहा था. 3 खाता धारक चढ़े पुलिस के हत्थे पुलिस ने जांच के दौरान जिन तीन खातों पर सबसे पहले कार्रवाई की, उनके नाम हैं:     रविंदर चावला (54 वर्ष), निवासी पंजाबी पारा     दीपक तिलवानी (35 वर्ष)     महेश (60 वर्ष), निवासी गुरुद्वारा रोड जांच में इन खातों में लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन का पता चला. पूछताछ में सभी खाताधारकों ने खुद को इससे अनभिज्ञ बताया और कहा कि उन्हें इस लेन-देन की कोई जानकारी नहीं है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं बाकी तीन खातों की जांच अभी जारी है, और पुलिस का कहना है कि दोषी पाए जाने पर अन्य खाताधारकों पर भी जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. क्या है म्यूल अकाउंट घोटाला? “म्यूल अकाउंट” वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी दूसरों के नाम पर अवैध लेन-देन के लिए करते हैं. कई बार खाताधारक पैसे के लालच में अपनी जानकारी या खाता दूसरों को दे देते हैं, जो बाद में साइबर फ्रॉड का जरिया बनता है. पुलिस ने लोगों से अपील की गई है कि वे अपने बैंक खाते या दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें. ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है. recent visitors 85

उत्तर प्रदेश में कैच द रेन कार्यक्रम के तहत अमृत वर्षा की बूंद बूंद को सहेज कर भूजल स्तर में सुधार की

लखनऊ भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस साल मानसून औसत से अधिक रहने के आसार जताए हैं। इसे देखते हुये घनी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में कैच द रेन कार्यक्रम के तहत अमृत वर्षा की बूंद बूंद को सहेज कर भूजल स्तर में सुधार की तैयारी कर ली गयी है। केरल और पश्चिमी बंगाल में हो रही मानसून की सक्रियता से यह भी पूर्वानुमान है कि इस बार यह समय से पहले या समय से आकर पूरे देश को तर करेगा। उल्लेखनीय है कि जुलाई से लेकर सितंबर तक के मानसून के सीजन में कुल बारिश के औसत का 70 से 80 फीसदी प्राप्त होता है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्ययालय गोरखपुर के पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, बारिश लिहाज से भारत इंद्र देव से मिलने वाले इस प्रसाद के लिहाज से दुनियां के कई देशों से संपन्न है। यहां चार महीने के दौरान करीब 870 मिलीमीटर बारिश होती है। उत्तर प्रदेश खासकर तराई के एक बड़े इलाके में तो इससे भी अधिक। मसलन अपने देश में पानी की नहीं इसके प्रबंधन की कमी है। हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पूरी ने भी इस बात को स्वीकार किया। उनके मुताबिक भारत में जल संकट जल संसाधनों की कमी के नहीं उपलब्ध पानी के कुप्रबंधन के कारण है। डबल इंजन की सरकार (मोदी और योगी) का फोकस इसीलिए बारिश के हर बूंद को सहेजने का है। 2019 अटल भूजल योजना के तहत 'कैच द रेन' का कार्यक्रम इसके लिए ही चलाया गया था। फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निजी रुचि के कारण उत्तर प्रदेश जल संरक्षण के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। खेत, तालाब, अमृत सरोवर, लुप्त प्राय हो रही नदियों का पुरुद्धार, नदियों के किनारे बहुउद्देशीय तालाब खासकर गंगा नदी के किनारों पर और केन बेतवा लिंक जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं इसका जरिया बन रही हैं। सरकार ने हाल ही में शहरों में बनने वाले आवासीय इकाइयों के लिए जल संरक्षण अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार शहरी स्थानीय निकायों से यह सुनश्चिति करने के लिए कहती है कि सभी भवन नर्मिाण अनुमतियों में वर्षा जल संचयन संरचनाएं शामिल हों। बता दें कि तृतीय राष्ट्रीय जल पुरस्कार में उत्तर प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसी क्रम में खेत तालाब योजना की सफलता को देखते हुए योगी सरकार ने इस योजना के तहत 8500 तालाब के निर्माण का लक्ष्य रखा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे अधिकतम समय तक पानी की उपलब्धता के नाते कुल उत्पादन में लगभग 12 फीसद से अधिक की वृद्धि होगी। विशेषकर धान और मक्का के क्षेत्रफल और उपज में। इसी मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 2023 में अमृत सरोवर योजना शुरू गई थी। योगी सरकार ने इस योजना के तहत हर जिले में 75 तालाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा था। फिलहाल इस योजना में उत्तर प्रदेश नंबर एक है। ग्लोबल वार्मिंग से परेशानी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम की अप्रत्याशिता बढ़ी है। कम दिन में अधिक बारिश, उसके बाद सूखे का लंबा दौर हाल के कुछ दशकों में आम बात हो गई है। इससे एक साथ बारी बारी से बाढ़ और सूखे दोनों का सामना करना होता है। एक साथ दोनों संकटों के कारण सरकार द्वारा अधिक संसाधन खर्च करने बाद भी फसलों की पैदावार अच्छी न होने से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। प्रोफेसर डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, पानी की कमी के कारण जिन आठ देशों के फसल उत्पादन में सर्वाधिक गिरावट (28.8 प्रतिशत) संभव है, उसमें भारत सर्वाधिक है। स्वाभाविक है कि उत्तर प्रदेश इससे सर्वाधिक प्रभावित होगा। बाकी देश जिनके उत्पादन में गिरावट संभव है वे हैं मेक्सिको 25.7, ऑस्ट्रेलिया 15.6 संयुक्त राज्य अमेरिका आठ, रूस 6.2,अर्जेंटीना 2.2,दक्षिण पूर्वी एशियाई देश में 18 प्रतिशत हैं। बारिश की ये टेंडेंसी भी बदल रही है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में करीब 77 वर्षों के दौरान औसत बारिश में 320 मिलीमीटर की कमी आई है। मसलन सालाना 4.2 मिलीमीटर की कमी। यह पहले के सालाना औसत 1068.4 मिलीमीटर से घटकर 800 से 900 मिलीमीटर तक आ गई है। शायद यही वजह है कि हर संभव तरीके से बुंदेलखंड में जल संरक्षण पर योगी सरकार का सर्वाधिक फोकस भी है। खेत तालाब योजना की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। सिंचाई और जलसंरक्षण की छोटी बड़ी कई परियोजनाओं से बुंदेलखंड को आच्छादित किया जा रहा है। सिंचाई के दौरान अपेक्षाकृत दक्ष विधाओं ड्रिप एवं स्प्रिंकलर के उपयोग के लिए भी यहां के किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। केन बेतवा लिंक के पूरा होने पर यह इस लिहाज से मील का पत्थर साबित होगी।   recent visitors 70