न्यायाधीश अपने विदाई समारोह में ही नहीं गए बल्कि 11 फैसले सुनाए, शनिवार को लास्ट डे रहेगा, आज आखिरी कार्यदिवस था

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायरमेंट के दिन आमतौर पर कोई फैसला नहीं सुनाते, लेकिन जस्टिस एएस ओका ने इस पुरानी रवायत को बदल दिया है। उन्होंने शुक्रवार को अपने आखिरी कार्यदिवस पर कई बेंचों में हिस्सा लिया और 11 फैसले दिए। ऐसा उन्होंने तब किया है, जब उनकी मां का एक दिन पहले ही निधन हुआ था। वह गुरुवार को ही अपनी मां के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए मुंबई गए थे और फिर लास्ट वर्किंग डे पर काम करने के लिए दिल्ली लौट आए। शुक्रवार को शीर्ष अदालत में उनका आखिरी दिन था और इस मौके पर भी वह सिर्फ विदाई समारोह के आयोजनों में ही नहीं रहे बल्कि 11 फैसले सुनाए। उनका शनिवार को लास्ट डे रहेगा, लेकिन आज आखिरी कार्यदिवस था। उन्होंने पहले ही कहा था कि वह रिटायरमेंट शब्द से नफरत करते हैं। इसके अलावा उनका कहना था कि जजों को आखिरी दिन भी फैसले सुनाने चाहिए और बेंच का हिस्सा बनना सही रहता है। इसी के तहत उन्होंने कई सुनवाई में हिस्सा लिया और फिर अंत में प्रतीकात्मक बेंच का भी हिस्सा बने, जिसका नेतृत्व चीफ जस्टिस बीआर गवई कर रहे थे। किसी भी जज के रिटायरमेंट पर प्रतीकात्मक जज चीफ जस्टिस के नेतृत्व में बैठती है। ऐसा जस्टिस को सम्मानजनक विदाई के लिए किया जाता है और यह परंपरा शीर्ष अदालत में दशकों से चली आ रही है। जस्टिस ओका बोले- आखिरी दिन भी करना चाहिए पूरा काम बता दें कि 21 मई को जस्टिस ओका के लिए फेयरवेल समारोह आयोजित हुआ था। इसका आयोजन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की ओर से किया गया था। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि मैं इस परंपरा को सही नहीं मानता कि रिटायरमेंट के दिन जज काम ही न करें। मैं पसंद करूंगा कि आखिरी कार्यदिवस पर भी काम करूं और कुछ फैसलों का हिस्सा बनूं। इसके अलावा उनका कहना था कि रिटायर होने वाले जज के लिए गार्ड ऑफ ऑनर 1:30 बजे दिया जाता है, जिसमें थोड़ी देरी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिरी दिवस पर कम से कम शाम को 4 बजे तक तो काम करना ही चाहिए। जिला अदालत से की थी शुरुआत और SC तक आ पहुंचे उन्होंने कहा था कि मैं तो रिटायरमेंट शब्द से ही नफरत करता हूं। बता दें कि जस्टिस ओका ने यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे से लॉ की पढ़ाई करने के बाद जून 1983 से वकालत शुरू की थी। उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास ओका के ठाणे जिला अदालत स्थित चेंबर से वकालत शुरू की थी और वहां से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज तक का सफर तय किया। उनकी 29 अगस्त, 2003 को बॉम्बे हाई कोर्ट में एंट्री हुई थी। तब वह अस्थायी जज थे और फिर 2005 में परमानेंट हुए। वह कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस 10 मई, 2019 को बने थे। फिर वह 31 अगस्त, 2021 को सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर आए। उनका कार्य़काल शीर्ष अदालत में करीब 4 साल का रहा है। recent visitors 83

उपराष्ट्रपति धनखड़ नरसिंहपुर में 26 मई को करेंगे कृषि उद्योग समागम का शुभारंभ

 भोपाल  प्रदेश में वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इन्वेस्ट मध्यप्रदेश के अंतर्गत अनंत संभावनाओं के दृष्टिगत नरसिंहपुर में 26 मई को कृषि उद्योग समागम का आयोजन होगा। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 26 मई को  कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। तीन दिन के कृषि उद्योग समागम में कृषि अधारित उद्योग इकाइयों का शिलान्यास एवं लोकार्पण तथा उद्योगपतियों को भूमि आवंटन पत्र एवं आशय पत्रों का वितरण भी होगा। साथ कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 26 मई को नरसिंहपुर जिले में किसान उद्योग समागम मेले का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय इस मेले में अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। आने वाले समय में रीवा सतना और चंबल में भी ऐसे ही मेले आयोजित किये जाऐंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन ने हर खेत में सिंचाई के लिये पानी पहुचाने का संकल्प लिया है। पहले प्रदेश के 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी जिसे बढ़ाकर 55 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित कर ली गई है। आने वाले समय में 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य- "कृषि उद्योग समागम 2025" का आयोजन मध्यप्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, खाद्य प्रसंस्करण में निवेश आकर्षित करने, और किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ने के लिए किया जा रहा है। यह समागम उद्योगपतियों कृषक उत्पादक संगठनों एवं नीति निर्माताओं के बीच संवाद, नीति प्रस्तुति एवं सहयोग के अवसर प्रदान करेगा। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश का किसान सम्पन्न होगा तो प्रदेश और देश भी समृद्ध होगा। राज्य सरकार युवा, महिला और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि उद्योग समागम में आधुनिक कृषि तकनीकों व उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। समागम में कृषि के साथ खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित जानकारी मिलेगी।   recent visitors 58

गढ़चिरौली में हुआ बड़ा एनकाउंटर, पुलिस के साथ मुठभेड़ में चार हार्डकोर नक्सली ढेर

गढ़चिरौली गढ़चिरौली में महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ सीमा पर पुलिस ने मुठभेड़ में चार खतरनाक नक्सलियों को ढेर कर दिया. साथ ही पुलिस ने एक सेल्फ लोडिंग राइफल, दो 303 राइफल बरामद किया गया. इसके अलावा मौके से वॉकी-टॉकी, कैंपिंग का सामान भी जब्त किया गया है. दरअसल, महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर नक्सलियों के समूहों की मौजूदगी के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर, एडिशनल एसपी रमेश और 12 सी60 पार्टियों (300 कमांडो) और सीआरपीएफ के एक कंपोनेंट के नेतृत्व में गुरुवार (22 मई) को दोपहर को कवांडे और नेलगुंडा से इंद्रावती के तट की ओर भारी बारिश के बीच एक अभियान शुरू किया गया था. गढ़चिरौली पुलिस के मुताबिक शुक्रवार (23 मई) की सुबह, माओवादियों ने सी60 कमांडो पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके कारण फोर्स ने प्रभावी जवाबी कार्रवाई की. लगभग दो घंटे तक रुक-रुक कर गोलीबारी जारी रही. इस फायरिंग में चार माओवादी मारे गए. उन्होंने बताया कि करीब दो घंटे तक मुठभेड़ चली और बाद में सुरक्षा बलों ने इलाके की तलाशी ली, जिसमें चार माओवादियों के शव बरामद हुए। बयान के अनुसार, घटनास्थल से एक ऑटोमैटिक सेल्फ-लोडिंग राइफल, दो .303 राइफल, एक भारमार बंदूक, वॉकी-टॉकी, कैंप सामग्री और नक्सली साहित्य समेत अन्य सामान बरामद किया गया. महाराष्ट्र में यह मुठभेड़ ऐसे समय हुई है, जब दो दिन पहले ही सुरक्षा बलों ने पड़ोसी छत्तीसगढ़ में 27 नक्सलियों को मार गिराया था, जिनमें उनका शीर्ष नेता बसवराजू भी शामिल था. recent visitors 57

यूनुस के प्रोजेक्ट को आर्मी चीफ ने कह दिया ‘Bloody corridor’, ढाका के गलियारों में सत्ता के लिए जोर आजमाइश!

 ढाका बांग्लादेश की राजनीति में फिर एकबार तख्तापलट की आहट सुनाई देने लगी है। खबर है कि मुहम्मद यूनुस ने इस्तीफे का मन बना लिया है। इस बीच  ढाका में एक बड़ी घटना देखने को मिली। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने विदेश मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर बदलाव करते हुए विदेश सचिव जाशिम उद्दीन को अस्थायी रूप से कार्यमुक्त कर दिया। विदेश मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार, ‘‘यह निर्णय लिया गया है कि विदेश सचिव जाशिम उद्दीन को जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने की पृष्ठभूमि में अग्रिम आदेश तक एम रुहुल आलम सिद्दीक विदेश सचिव के नियमित कामकाज संभालेंगे।’’ विदेश मंत्रालय के एक महानिदेशक के हस्ताक्षर वाले संक्षिप्त आदेश में कहा गया कि यह 23 मई से प्रभावी होगा और इसे जनहित में जारी किया गया है। खबरों के मुताबिक, सरकार ने जाशिम उद्दीन को करीब दो सप्ताह पहले अज्ञात कारणों से हटाने का फैसला किया था। दो दिन पहले ‘द डेली स्टार’ अखबार ने लिखा कि विदेश मंत्रालय में इन खबरों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि जाशिम उद्दीन को हटाया जाएगा, वहीं जूनियर मंत्री के ओहदे के साथ विदेश मामलों के लिए मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक नियुक्त किए गए एक अन्य सेवानिवृत्त राजनयिक सूफीउर रहमान ने अभी तक कामकाज नहीं संभाला है। हालांकि विदेश मामलों के सलाहकार एम तौहीद हुसैन ने बुधवार को कहा कि हाशिम उद्दीन ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को छोड़ने की मंशा जताई है और यह उन्हें पद से हटाने जैसा नहीं है। आपको बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण उन्हें काम करना मुश्किल लग रहा है। बीबीसी बांग्ला सेवा ने देर रात नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख नाहिद इस्लाम के हवाले से यह खबर दी। इस्लाम ने बीबीसी बांग्ला से कहा, ‘‘हम आज सुबह से ही सर (यूनुस) के इस्तीफे की खबर सुन रहे हैं। इसलिए मैं इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सर से मिलने गया था। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में सोच रहे हैं। उन्हें लगता है कि स्थिति ऐसी है कि वह काम नहीं कर सकते।’’ छात्रों के नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक ने कहा कि मुख्य सलाहकार यूनुस ने आशंका जताई कि देश की मौजूदा स्थिति में वह काम नहीं कर पाएंगे। इस्लाम के मुताबिक यूनुस ने कहा, ‘‘जब तक राजनीतिक दल सहमति नहीं बना लेते, मैं काम नहीं कर पाऊंगा।’’ इस साल फरवरी में यूनुस के मार्गदर्शन में राजनीतिक पटल पर उभरे एनसीपी के नेता ने कहा कि उन्होंने यूनुस से कहा कि ‘‘देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए मजबूत बने रहें और जन-विद्रोह की उम्मीदों पर खरा उतरें।’’ इस्लाम के मुताबिक, उन्होंने मुख्य सलाहकार से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक दल एकजुट होकर उनके साथ सहयोग करेंगे और ‘‘मुझे उम्मीद है कि हर कोई उनके साथ सहयोग करेगा’’। आर्मी चीफ ने कह दिया 'Bloody corridor'   बांग्लादेश की राजनीति उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. आखिर क्या हुआ कि मोहम्मद यूनुस अपनी जिम्मेदारी छोड़ना चाह रहे हैं. बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख के पद से इस्तीफा देने की उनकी पेशकश बांग्लादेश में पावर स्ट्रगल की कहानी बता रही है. बांग्लादेश आर्मी इस सत्ता संघर्ष का एक प्रमुख घटक है. बांग्लादेश आर्मी के चीफ जनरल वकार उज जमा ने मोहम्मद यूनुस को तीन ऐसे संदेश दिए जिस राजनीतिक गलियारों में चेतावनी समझा गया. वकार उज जमान ने मोहम्मद यूनुस को कहा कि दिसंबर तक देश में चुनाव कराएं, सैन्य मामलों में दखल न दें और म्यांमार के साथ Bloody corridor को बंद करें. देश की अंतरिम सरकार के चीफ के फैसले के लिए Bloody corridor जैसे शब्दों का इस्तेमाल ने मोहम्मद यूनुस को अपनी कमजोरी का एहसास करा दिया. मोहम्मद यूनुस पर ये राजनीतिक हमला तो सेना की ओर से था दूसरी ओर छात्रों के नए नए बने राजनीतिक दल एनसीपी के लगातार प्रदर्शन ने मोहम्मद यूनुस को कुंठा में डाल दिया. अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस पिछले 9 महीने से राजनेता यूनुस बनने की अपनी कोशिशों में लगातार असफल हो रहे थे. 'Bloody corridor' की कहानी क्या है? मोहम्मद यूनुस की मुश्किलों में उस कॉरिडोर का अहम रोल था जो बांग्लादेश को म्यांमार से जोड़ रहा था. इस कॉरिडोर का नाम चटगांव-राखिन कॉरिडोर है. ये कॉरिडोर बांग्लादेश से म्यांमार में रोहिंग्याओं तक सामान की सप्लाई पहुंचाने के लिए बनाए जाने की योजना है मोहम्मद यूनुस के विदेशी मामलों सलाहकार तौहीद हुसैन ने सेना को विश्वास में लिए बिना एकतरफा घोषणा कर दी थी कि अंतरिम सरकार ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित राखिन गलियारे पर सहमति व्यक्त की है. तौहीद हुसैन का ये बयान बांग्लादेश की आर्मी को नकारने जैसा था. इससे बांग्लादेश में यह चिंता बढ़ गई कि यह गलियारा उसकी संप्रभुता पर असर डाल सकता है. बांग्लादेश में एक थ्योरी यह भी चल रही है कि अमेरिका अपने सामरिक और भू-रणनीतिक फायदे के लिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है. बांग्लादेश के सुरक्षा विशेषज्ञों ने राखिन गलियारे पर चिंता जताई है. सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता है कि राखिन क्षेत्र में अराकान आर्मी जैसे विद्रोही समूहों की बढ़ती गतिविधियां और म्यांमार की सीमा पर उनके नियंत्रण से बांग्लादेश में अस्थिरता फैल सकती है. उदाहरण के लिए, अराकान आर्मी ने हाल ही में बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है, जिससे सीमा पार से हथियारों, आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ का जोखिम बढ़ गया है. दूसरा डर रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर है. सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि राखिन गलियारा रोहिंग्या शरणार्थियों की स्थिति को और जटिल कर सकता है. बांग्लादेश पहले से ही 10 लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी मौजूद हैं, और गलियारे के खुलने से म्यांमार से और अधिक शरणार्थी बांग्लादेश में प्रवेश कर सकते हैं. इस गलियारे को लेकर बांग्लादेश की इस तरह की व्याख्या की जा रही है कि यूनुस और उनके वफादार चुनाव के बिना सत्ता में बने रहने की अमेरिकी मांग के आगे झुक रहे हैं. बांग्लादेश आर्मी का स्पष्ट और मुखर विरोध लेकिन बांग्लादेश की आर्मी ने इस कॉरिडोर को अंतरिम सरकार द्वारा रेड लाइन क्रॉस करना समझा और इसका … Read more

इंदौर में सिटी बस में सफर महंगा, आज से नई दरें लागू

इंदौर  इंदौर शहर में सिटी बस में सफर एक बार फिर महंगा हो गया है। एआइसीटीएस एल ने 10 माह में दूसरी बार किराया बढ़ाया है। हर कैटेगरी में 1 रुपए वृद्धि की है। शहर में 28 किमी सफर करने पर अब तक 40 रुपए चुकाने होते थे, अब 42 रुपए चुकाने होंगे।  एआइसीटीएसएल ने यह आदेश जारी कर सभी बस ऑपरेटर को बढ़ा किराया वसूलने के निर्देश दे दिए। जानकारी है कि पूर्व में हुई बोर्ड बैठक में निर्णय लिया था कि हर वित्तीय वर्ष में पांच फीसदी किराए में वृद्धि करेंगे। जानकारी अनुसार एआइसीटीएसएल घाटे में चल रहा है। करीब 60 करोड़ के घाटे में संचालन किया जा रहा है। इसके अलग-अलग कारण भी हैं। कई बार कर्मचारियों का भुगतान भी लंबित हो जाता है। कई रूट पर तो बस संचालन ही सुचारू नहीं हो रहा। जानिए कितना बढ़ा किराया दूरी (किमी में) दर पहले: 0 से 1.5 – 5 रुपए अब: 0 से 1.5 – 5 रुपए पहले: 1.5 से 3- 10 रुपए अब: 1.5 से 3- 11 रुपए पहले: 3.1 से 4.5- 15 रुपए अब: 3.1 से 4.5- 16 रुपए पहले: 4.5 से 7.5- 20 रुपए अब: 4.5 से 7.5- 21 रुपए पहले: 7.5 से 12- 25 रुपए अब: 7.5 से 12- 26 रुपए पहले: 12.1 से 18- 30 रुपए अब: 12.1 से 18- 32 रुपए पहले: 28.1 से अधिक- 42 रुपए अब: 18.1 से 28 – 37 रुपए recent visitors 51

प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन

प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कचरे के सभी भागों का पूर्ण प्रसंस्करण सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य भोपाल मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी) के अंतर्गत नगरों में गतिविधियां निरंतर जारी हैं। मिशन के तहत सभी गतिविधियां एक अक्टूबर 2026 तक संचालित होंगी। इसके लिये लक्ष्य भी तय कर लिये गये हैं। इन गतिविधियों में प्रमुख रूप से उपयोगी जल के प्रबंधन के साथ स्वच्छता व्यवहारों को संस्थागत स्वरूप प्रदान करते हुए उन्हें व्यवहारिक बनाना है। आगामी वर्षों में प्रदेश के शहरों को कचरा मुक्त बनाना, खुले में शौच से मुक्ति, मानदंडों ओडीएफ+, ओडीएफ++, वॉटर+ को स्थायी बनाये रखना, इसी के साथ स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिये नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी कार्यवाही नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत सुनिश्चित की जा रही हैं। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के लक्ष्य स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में स्त्रोत पृथक्कीकरण, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट सहित कचरे के सभी भागों का पूर्ण प्रसंस्करण, प्लास्टिक अपशिष्‍ट और सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध रूप से कम करना और संपूर्ण लीगेसी वेस्ट को उपचारित करते हुए सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि सीवर्स, सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव श्रम को सीधे रूप से रोका जाये और मशीनों के माध्यम से सफाई की व्यवस्था की जाये। शहरी क्षेत्रों में उपयोगी जल को जल संरचनाओं में जाने से पूर्व उपचार और पुर्न-उपयोग के लिये सीवेज ट्रीटमेंट इकाई, नालों में इंटरसेप्शन व डायवर्जन आदि सुविधाओं का विकास करना प्रमुख है। वित्तीय प्रावधान स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी) में मध्यप्रदेश में संचालित योजनाओं के लिये करीब 4 हजार 914 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें करीब 2200 करोड़ रूपये की राशि केन्द्र सरकार की ओर से और 1800 करोड़ रूपये राशि राज्य सरकार के अंशदान के रूप में होगी। धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पर सुलभ कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उन स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन स्थानों पर आवाजाही ज्यादा होती है। इनमें धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल के आस-पास सुलभ काम्प्लेक्स की सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिये नगरीय निकायों को कहा गया है।   recent visitors 45

आम के पेड़ जिनकी सुरक्षा 3 गार्ड और 9 कुत्ते करते हैं? विश्व के सबसे महंगे जापानी आम

जबलपुर संस्कारधानी जबलपुर में विदेशी आम के बागान एक बार फिर लद गए हैं। इनमें शामिल दुनिया के सबसे महंगे जापानी किस्म के आम मियाजाकी तइयो नो तमांगो(Miyazaki Mango) सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र है। जिसकी सुरक्षा भी खास है। सीसीटीवी के साथ ही एक दर्जन जर्मन शेफर्ड(German Shepherd) डॉग बाग की सुरक्षा में लगे हुए हैं। सशस्त्र गार्ड भी पहरा देते हैं। दरअसल, जबलपुर के एक युवक ने मियाजाकी तइयो नो तमांगो की किस्म को नर्मदा के तट से लगे चरगवां रोड पर स्थित बागान में तैयार कर सभी को हैरान कर दिया था। अब यह आम एक बार फिर पकने की प्रक्रिया में है। कई तरह की खासियत वाले इस आम की अंतरराष्ट्रीय बाजा में कीमत दो से ढाई लाख रुपए प्रति किलोग्राम है। बाग मालिक संकल्प सिंह परिहार ने बताया कि इस किस्म के आम की विदेश में अच्छी मांग है। जिसे पकने के बाद भेजा जाएगा। आस्ट्रेलिया व यूएसए की भी प्रजाति बगिया में आस्ट्रेलिया का आर2 ओ 2, यूएसए का सेंसेशन, जापानी जम्बोग्रीन, 2 किलोग्राम जापानी आम, जापानी हापुस व ऑल टाइम मैंगो तैयार हो रहे हैं। इसके साथ ही देसी किस्म के आम की भी बगिया में बहार आ गई है, इनमें मल्लिका, आम्रपाली, आरका अनमोल, आरका पुनीत, हापुस, केशर, चौंसा, लंगड़ा आम शामिल हैं। पेड़ के पके आम के लिए लोग एडवांस में बुकिंग करा रहे हैं। बागवान संकल्प के अनुसार इस बार 30 मई के बाद आम पकने की संभावना है। उद्यानिकी विशेषज्ञों के अनुसार आंधी-तूफान ने आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है पर उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है। अचार वाले आम का सबसे ज्यादा उत्पादन यहां देसी आम का उत्पादन सबसे ज्यादा है। अन्य सभी किस्मों के आम के उत्पादन के मुकाबले देसी आम का उत्पादन यहां चार गुना ज्यादा होता है। ये आम ज्यादाकर अचार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। अनुकूल जलवायु के कारण यहां अच्छी गुणवत्ता के आम का उत्पादन हो रहा है। जिनकी दूसरे राज्यों में भी मांग रहती है। सबसे ज्यादा मांग पेड के पके आम की रहती है जो जून के महीने से मिल पाते हैं। मगरमुहां, बिजना के आम उत्पादक किसानों के अनुसार यहां उत्पादित आम स्वाद और गुणवत्ता में अच्छे होते हैं। नर्मदा के कछार के आम में खास मिठास नर्मदा के कछार की वजह से जबलपुर व महाकोशल के अन्य जिलों में होने वाले आम में खास मिठास पाई जाती है। यहां अलग-अलग किस्म के आम का वृहद स्तर पर उत्पादन होता है। हापुस, राजापुरी, अमृतांग, अलफेंजो, नीलेश्वरी, सोनपरी, बॉम्बे ग्रीन, नीलम, आम्रपाली, मल्लिका, लंगड़ा, चोंसा, दशहरी, फजली, सुंदरजा, तोतापरी कई और किस्म के आम की बहार आ गई है। आंधी-तूफान से आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है, पर बगीचों में जो आम बचे हैं उनकी गुणवत्ता अच्छी है। संभवत: 30 मई तक पेड़ों के पके स्थानीय आम बाजार में आने लगेंगे। -एसके मिश्रा, उद्यानिकी विशेषज्ञ recent visitors 61