रिपोर्ट: भारत से तुर्की और अजरबैजान के लिए वीजा आवेदनों में 42 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई

नई दिल्ली भारत से तुर्की और अजरबैजान के लिए वीजा आवेदनों में 42 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। हालिया भारत-पाक संघर्ष में दोनों ही देशों ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया, जिसके चलते भारतीयों की ओर से इस तरह की प्रतिक्रिया दी जा रही है। वीजा प्रॉसेसिंग प्लेटफॉर्म एटलिस से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, केवल 36 घंटों के भीतर, वीजा आवेदन प्रक्रिया को बीच में ही छोड़ने वाले यूजर्स की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एटलिस के संस्थापक और सीईओ मोहक नाहटा ने कहा, "प्रतिक्रिया तीव्र और व्यवहारिक थी। लोगों को कुछ गंतव्यों से बचने के लिए कहने की आवश्यकता नहीं थी। वे सहज ज्ञान, जानकारी और विकल्पों तक पहुंच के आधार पर आगे बढ़े। यह मॉडर्न ट्रैवल को दिखाता है।" उन्होंने आगे कहा, "इसी भावना में हमने भारत के साथ खड़े होकर और राष्ट्रीय भावना के साथ एकजुटता दिखाते हुए तुर्की और अजरबैजान के लिए सभी मार्केटिंग प्रयासों को भी रोक दिया।" दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से आने वाले यात्रियों ने तुर्की जाने के लिए आवेदनों में 53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज करवाई, जबकि इंदौर और जयपुर जैसे टियर 2 शहरों से आने वाले यात्रियों की रुचि अधिक मजबूत रही, जो केवल 20 प्रतिशत कम रही। अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करने वाले यात्रियों की प्रकृति में भी बदलाव आया। पारिवारिक यात्राओं सहित ग्रुप वीजा रिक्वेस्ट में लगभग 49 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोलो और कपल रिक्वेस्ट में 27 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे पता चलता है कि ग्रुप ट्रैवलर्स, जो अक्सर पहले से योजना बनाते हैं और राजनीतिक भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, व्यक्तिगत यात्रियों की तुलना में अधिक निर्णायक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं। एटलिस डेटा ने उम्र और इरादे के बारे में शुरुआती संकेत भी प्रकट किए। 25 से 34 वर्ष की आयु के यात्रियों के जल्दी से अपना रास्ता बदलने की संभावना सबसे अधिक थी, जिन्होंने तुर्की के लिए मिड-प्रोसेस एप्लिकेशन गिरावट में 70 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया। दिलचस्प बात यह है कि महिला यात्रियों के गंतव्य को पूरी तरह से बदलने की संभावना अधिक थी, जिसमें वियतनाम या थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए आवेदन फिर से शुरू करने की प्रवृत्ति 2.3 गुना अधिक थी। जब तुर्की और अजरबैजान का रुझान कम हुआ, तो वैकल्पिक गंतव्यों की लोकप्रियता में उछाल आया। आंकड़ों से पता चला कि इसके बाद के दिनों में वियतनाम, इंडोनेशिया और मिस्र के लिए आवेदनों में 31 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। recent visitors 72

मंत्री छगन भुजबल ने कहा- मुझे जो भी विभाग कार्य करने के लिए दिया जाएगा, मुझे वह स्वीकार होगा

मुंबई महाराष्ट्र सरकार में मंगलवार को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने कहा कि मंत्री पद की शपथ ली है। मुझे कौन सा विभाग मिलेगा, इसके बारे में मैं कैसे कह सकता हूं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तय करेंगे कि मुझे कौन सा विभाग मिलेगा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री की ओर से मुझे जो भी विभाग कार्य करने के लिए दिया जाएगा, मुझे वह स्वीकार होगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के लिए मैं बीते 25 वर्षों से कार्य कर रहा हूं। पूर्व में मैंने जातिगत जनगणना की मांग को लेकर कई रैलियां की। मुझे खुशी इस बात की है कि केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना के लिए स्वीकृति दे दी है। देवेंद्र फडणवीस के मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने के बाद भुजबल ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल का भी आभार व्यक्त करता हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी आभार व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के सभी लोगों, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों, समता परिषद के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का भी आभार व्यक्त करता हूं। मैं उन सभी का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने अब तक मुझे प्यार और स्नेह दिया है।" भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग मिलने की उम्मीद है, उन्होंने इससे पहले इस विभाग की जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे और फिर एकनाथ शिंदे (2019-24) के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों में संभाली थी। बता दें कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था, लेकिन भुजबल को मंत्री पद नहीं दिया था। इससे आहत भुजबल ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की थी और कहा था कि पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के ओबीसी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने के बावजूद उनके बारे में विचार नहीं किया गया। recent visitors 70

उत्तराखंड के मदरसों में गूंजेगा सेना का पराक्रम, ऑपरेशन सिंदूर की कहानी, मौलाना की जुबानी

देहरादून  पाकिस्तान की कायराना हरकत के जवाब में भारतीय सेना का पराक्रम 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए सबने देखा। अब उत्तराखंड की धामी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मदरसों में अब छात्र-छात्राओं को 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में पढ़ाया जाएगा। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने यह फैसला लिया है। बोर्ड चाहता है कि बच्चे सेना के पराक्रम की कहानियों से परिचित हों। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। उत्तराखंड में कुल 451 मदरसे हैं, जिनमें लगभग 50 हजार बच्चे पढ़ते हैं। मुफ्ती शमून कासमी ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उनके साथ कुछ शिक्षाविद और बुद्धिजीवी भी मौजूद थे। उन्होंने रक्षा मंत्री को 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता के लिए बधाई दी। कासमी ने बताया कि उत्तराखंड सैनिकों की भूमि है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारे सशस्त्र बलों ने बेजोड़ शौर्य का परिचय दिया। इसका मतलब है कि उत्तराखंड वीरों की धरती है और 'ऑपरेशन सिंदूर' में हमारी सेना ने अद्भुत बहादुरी दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता ने सेना के शौर्य को सराहा है। कासमी ने आगे कहा कि मदरसों के बच्चों को भी सैनिकों की बहादुरी के बारे में बताया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम में 'ऑपरेशन सिंदूर' का चैप्टर शामिल किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही पाठ्यक्रम समिति की बैठक बुलाई जाएगी। रक्षा मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कई लोग शामिल थे। इनमें रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा, इस्लामिक सेंटर के पूर्व अध्यक्ष सिराज कुरैशी और आईसीएफए के अध्यक्ष एमजे खान जैसे लोग मौजूद थे। 'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक महत्वपूर्ण अभियान था। इसकी सफलता की कहानी अब मदरसों के बच्चों को पढ़ाई जाएगी। इससे बच्चों को देश के सैनिकों के बलिदान और शौर्य के बारे में पता चलेगा। यह फैसला उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने लिया है। बोर्ड चाहता है कि बच्चे देश के इतिहास और सेना के पराक्रम से परिचित हों। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने तबाह किए आतंकी ठिकाने भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने स्पष्ट करते हुए 6 और 7 मई की दरमियानी रात को एक साहसिक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया. इस ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के कुल 9 ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए. ये सभी ठिकाने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे. इस सुनियोजित और रणनीतिक कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया. यह सभी आतंकी गुट भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे और इन्हीं ठिकानों से उन्हें प्रशिक्षण, हथियार और दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे. भारतीय खुफिया एजेंसियों से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर इन ठिकानों की पहचान की गई थी, जिसके बाद सेना ने सटीक लक्ष्य साधकर ऑपरेशन को अंजाम दिया. भारत के सैन्य इतिहास में गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा ऑपरेशन सिंदूर ऑपरेशन सिंदूर की सबसे खास बात यह रही कि इस पूरे अभियान में भारत ने सिर्फ और सिर्फ आतंकी अड्डों को ही निशाना बनाया. पाकिस्तान के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान या नागरिक ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया. यह ऑपरेशन न केवल भारतीय सेना की तकनीकी दक्षता और सटीकता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ 'नो टॉलरेंस' नीति पर पूरी मजबूती से कायम है. ऑपरेशन सिंदूर, भारत के सैन्य इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है. इस अध्याय के बारे में उत्तराखंड के मदरसों के छात्र विस्तार से पढ़ेंगे. उत्तराखंड में कितने मदरसे हैं? BBC की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 451 मदरसे मदरसा शिक्षा परिषद (मदरसा बोर्ड) से पंजीकृत हैं, लेकिन करीब 500 मदरसे बिना पंजीकरण के चल रहे हैं. recent visitors 74

विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस: अतुलनीय मध्यप्रदेश जहां हर रंग में बसी है एक पहचान

भोपाल   मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान यहां की परंपराओं, लोक कलाओं और विविध बोलियों में रची-बसी है। यहां संस्कृति केवल संग्रहालयों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है, जो हर उत्सव, हर गीत और हर रंग में झलकती है। मध्यप्रदेश की आत्मा उसके जनजातीय समुदायों, लोक कलाकारों और ग्रामीण कारीगरों में बसती है। संस्कृति के ये रंग केवल भारतीय पर्यटकों बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचते हैं। चूंकि “भारत गांवों में बसता है”, इसलिए विश्व के पर्यटकों को मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति से अवगत कराने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा होमस्टे की अवधारणा को साकार किया गया है। इसमें पर्यटक प्रकृति की गोद में शांति के अनुभव के साथ वहां की परंपराओं, रीति–रिवाजों, त्यौहारों, कलाओं और खान–पान का आनंद ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के छह अनूठे सांस्कृतिक क्षेत्रों–बुंदेलखंड, बघेलखंड, महाकौशल, निमाड़, मालवा और चंबल के 120 से अधिक गांवों में 200 से अधिक होम स्टे का निर्माण कराया गया है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ ग्रामीण परिवेश की सुखद अनुभूति पर्यटकों को हो रही है।   प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा, मध्यप्रदेश की संस्कृति केवल कलाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है, जो हर गांव, हर त्योहार और हर गीत में धड़कती है। विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसका सम्मान करने का अवसर देता है। मध्य प्रदेश की छह सांस्कृतिक क्षेत्रों की विविधता के बावजूद हम एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं। हम वैश्विक मंच पर समृद्ध संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।   उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों के अनुसार यहां बघेली, बुंदेली, मालवी, निमाड़ी, गोंडी लोक भाषाएं हैं। प्रसिद्ध भगोरिया के साथ–साथ सैलेया, करमा, तेरहवी जैसे नृत्य परंपराओं को प्रदर्शित करते हैं। विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव, विश्व रंग, लोकरंग जैसे सांस्कृतिक उत्सव कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं। वहीं गोंड चित्रकला और भील कला पीढ़ी दर पीढ़ी इन जनजातियों को विरासत में मिली है। ध्रुपद गायन और वीणा वादन शास्त्रीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन क्षेत्रों के गांवों में संचालित हैं होम स्टे मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्र चंबल में लगभग 7 गांवों, मालवा में 22, निमाड़ में 17, महाकौशल में 37, बुंदेलखंड में 19 और बघेलखंड के 19 और बघेलखंड के 19 गांवों में  होम स्टे का संचालन किया जा रहा है।    सांस्कृतिक क्षेत्र और उनकी विशेषताएं बुंदेलखंड : वीरता और कला का संगम बुंदेलखंड, अपनी वीर गाथाओं और ऐतिहासिक किलों के लिए प्रसिद्ध, बुंदेली भाषा और लोक कथाओं का केंद्र है। यहां का दीपावली उत्सव और बूंदी के लड्डुओं की मिठास पर्यटकों को आकर्षित करती है। विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव, सांस्कृतिक उत्सव का अनूठा प्रदर्शन है। वहीं भूरा रोटी, कोदो-कुटकी पुलाव, बैंगन का भरता, महुआ के लड्डू आदि बुंदेलखंड के पाककला कौशल का एक सच्चा प्रमाण है। बघेलखंड : प्रकृति और संस्कृति का मेल रीवा और सतना जैसे क्षेत्रों में बसे बघेलखंड में बघेली भाषा और आदिवासी परंपराएं जीवंत हैं। यहां का मडई उत्सव, जिसमें आदिवासी समुदाय अपनी कला और नृत्य का प्रदर्शन करते हैं और सामुदायिक एकता को प्रदर्शित करते हैं। बघेलखंड की गोंड और कोल जनजातियां अपनी अनूठी चित्रकला और लोक संगीत से सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देती हैं। डुबकी वाले आलू, कढ़ी-चावल,  सत्तू पराठा, तिलकुट, ठेकुआ आदि का स्वाद यहां की पाककला की परंपरा को दर्शाते हैं। महाकौशल : इतिहास और आध्यात्मिकता का केंद्र जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में फैला महाकौशल, अपनी हिंदी और छत्तीसगढ़ी प्रभाव वाली बोली के साथ जाना जाता है। त्रिपुरी नृत्य और दशहरा उत्सव यहां की सांस्कृतिक पहचान हैं। नर्मदा जयंती जैसे त्योहार इस क्षेत्र की आध्यात्मिकता और पर्यावरण के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं। यहां स्वीटकॉर्न वड़ा, पोहा जलेबी, कोदो कुटकी की खीर, सिक्या खीर आदि पारंपरिक व्यंजनों के रूप में परोसे जाते हैं।   निमाड़ : रंग-बिरंगे उत्सवों का गढ़ निमाड़, अपनी निमाड़ी बोली और जीवंत लोक संस्कृति के लिए जाना जाता है, भगोरिया हाट उत्सव का घर है। यह उत्सव, जिसमें युवा अपने जीवनसाथी चुनते हैं, संगीत, नृत्य और रंगों का अनूठा संगम है। भील और भिलाला जनजातियों की पारंपरिक कला और शिल्प इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध करते हैं।  बाफला रोटी और दाल, चक्‍की की शाक, भरता, मालपुआ, खोपरापाक, दाल पानीये यहां के प्रसद्ध व्यंजन व पकवान हैं। मालवा : साहित्य और संगीत का स्वर्ग उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों वाला मालवा, मालवी भाषा और साहित्यिक परंपराओं का केंद्र है। यहां का तानसेन संगीत समारोह और रंगपंचमी उत्सव सांस्कृतिक जीवंतता को दर्शाते हैं। मालवा की लोक कथाएं और भक्ति संगीत इस क्षेत्र को एक अनूठा सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान करते हैं। पोहा-जलेबी, भुट्टे का कीस, दाल बाफला, सेव टमाटर की सब्जी, इंदौरी चाट और नमकीन मध्य प्रदेश आने वाले हर पर्यटक की पहली पसंद होते हैं। चंबल : वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का क्षेत्र चंबल में कला, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा यहां देखने को मिलती है। चंबल में चंबली बोली और लोक नृत्य प्रसिद्ध हैं। बेड़ई आलू, बेसन की रोटी और लहसुन की चटनी, गोंद के लड्डू यहां के पांरपरिक पाककला को प्रदर्शित करते हैं। recent visitors 67

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर राहुल गांधी के सरकार से सवाल पूछने पर रामदास आठवले ने कहा- पाकिस्तान की भाषा बोल रहे

दमन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश दादर एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव के दौरे पर पहुंचे। 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सरकार से सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। आठवले ने कहा कि ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल करके राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी का नुकसान किया है। ऐसे समय में सबको पीएम मोदी के साथ खड़ा रहना चाहिए, चाहे पक्ष हो या विपक्ष। लेकिन विपक्षी दल कभी कहता है कि हम सब साथ हैं और अगले ही क्षण वह सबूत मांगने लगता है। अगर वह इसी तरह से पाकिस्तान के सपोर्ट में रहेंगे, तो पाकिस्तान उनको अवॉर्ड दे सकता है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता को लेकर विपक्ष संसद का विशेष सत्र बुलाने और इस ऑपरेशन के बारे में विस्तार से चर्चा की मांग कर रहा है। पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ जासूस मिले हैं जो पाकिस्तान के लिए काम कर रहे थे। हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा जैसे गद्दार हैं जो देशहित में काम नहीं करते। देश में रहकर भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हैं। ये सब आईएसआई के एजेंट हैं। उन पर सरकार को शिकंजा कसना जरूरी है। उन्होंने दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव को राज्य का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। यहां की जनसंख्या को देखते हुए राज्य बनाना कुछ कठिन जरूर होगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित राज्य में गुजरात के वलसाड जिले को भी शामिल किया जाना चाहिए। recent visitors 61

चिकित्सा अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में मंत्रिपरिषद का महत्वपूर्ण निर्णय: राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने एवं चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के नेतृत्व में आज मंत्रिपरिषद द्वारा दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन निर्णयों से न केवल चिकित्सा अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी, बल्कि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्राप्त होंगी। मंत्रिपरिषद ने जिला इंदौर स्थित गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय परिसर में कुल 773.07 करोड़ रुपए की लागत से 1450 बिस्तरीय नवीन शिक्षण चिकित्सालय भवन, 550 बिस्तरीय नर्सिंग हॉस्टल, 250 सीटर मिनी ऑडिटोरियम तथा बाह्य विकास कार्यों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना इंदौर एवं आसपास के क्षेत्रों के लाखों नागरिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगी एवं मेडिकल एजुकेशन की संरचना को आधुनिक बनाएगी। रीवा जिले में स्थित श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संजय गांधी चिकित्सालय के व्यापक उन्नयन के लिए 321.94 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इस योजना में नवीन ओ.पी.डी. भवन, मेटरनिटी ब्लॉक, नर्सिंग कॉलेज एवं हॉस्टल, मल्टी लेवल पार्किंग, 171 आवास, अत्याधुनिक किचन, डोरमेट्री, न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक तथा कैंसर इकाई के लिये बंकर जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य शामिल हैं। इससे विंध्य क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी एवं रीवा मेडिकल कॉलेज की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को जनकल्याण की सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सशक्त भारत – स्वस्थ भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है। यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।   recent visitors 50

अमानक स्‍तर का कार्य करने वाले ठेकेदारों को ब्‍लैक लिस्‍ट किया जाएगा

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अमानक स्तर का विद्युतीय निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने बताया कि कंपनी कार्य क्षेत्र में उपभोक्‍ता हित की योजनाओं के अंतर्गत विद्युतीय एवं निर्माण कार्यों में गुणवत्‍ता तथा नियम एवं शर्तों के अनुसार यदि कोई कमी पाई जाती है तो कार्य करने वाली एजेंसी और ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई करने हेतु कंपनी द्वारा वृत्‍त स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया है। यदि स्‍क्रीनिंग कमेटी ठेकेदार अथवा एजेंसी को दोषी मानती है तो कंपनी ऐसे ठेकेदारो/ एजेंसी को ब्‍लैक लिस्‍ट करेगी।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी  के महाप्रबंधक (संचा.-संधा./ शहर) द्वारा वृत्‍त स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन करके ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के संबंध में अनियमितता की जांच की जाएगी। जांच में किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर तुरंत 7 दिवस में गुणवत्ता सुधार का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद भी संबंधित ठेकेदार की कार्य प्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो वृत्‍त स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई कर क्षेत्र स्तरीय कमेटी द्वारा ब्लैक लिस्टिंग की कार्रवाई की जाएगी। महाप्रबंधक (संचा.-संधा./ शहर) द्वारा गठित स्क्रीनिंग कमेटी में 2 उप महाप्रबंधक स्‍तर के अधिकारी तथा एक प्रबंधक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रकरणों में प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना, पूर्ण जमा योजना, सुपरविजन चार्ज योजना, सामान्य विकास योजना, पीव्‍हीटीजी, डीएजेजीयूए व अन्य योजना के ठेकेदारों के कार्य कमेटी के जांच के दायरे में आएंगे।   recent visitors 45