पापा की दारुबाज परियां : इंदौर में नशे में धुत लड़के-लड़कियों के बीच चले लात-घूंसे

इंदौर नाइट क्लब, नशा और फिर जरा सी बात पर WWE जैसी फाइट। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बार फिर नशे की हालत में लड़कियों ने जमकर हंगामा किया। गंदी गालियां देते हुए मारपीट का यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। घटना रविवार देर रात करीब 12 बजे की है। विजयनगर थाना क्षेत्र स्थित मल्हार मेगा मॉल के बाहर लाइट हाउस पब में रोज की तरह लड़के-लड़कियां शराब और नाच-गाने की मस्ती में झूम रहे थे। नाचने के दौरान धक्का लगने से कुछ लड़के-लड़कियों की दूसरे गुट से भिडंत हो गई। मामूली बात ने देखते ही देखते बड़ा विवाद का रूप ले लिया। पब से लड़ते हुए सभी बाहर आ गए और फुटपाथ पर एक दूसरे को गिराकर पीटने लगे। नशे में चूर लड़कियां भी एक दूसरे को पीटने लगीं। एक-दूसरे के बाल खींचकर गिराती और लात-घूसे बरसाती दिखीं। ऊपर से गंदी गालियां भीं। इस हाईवॉल्टेज ड्रॉमा को देखने के लिए भीड़ इकट्ठा हो गई। कुछ लोग बीच-बचाव की कोशिश करते रहे तो बाकी मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्ष पूरी तरह से शराब के नशे में डूबे थे और किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। इस दौरान मौके पर बीट जवान पहुंचे। काफी देर बाद हंगामा शांत हो पाया। विजयनगर थान के टीआई चंद्रकांत पटेल ने बताया कि एक लड़की की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। 20 साल की नेहा अजनार ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह अपनी दोस्त के साथ मल्हार मेगा मॉल के क्लब में गई थी। क्लब से बाहर निकलते समय काली शर्ट पहने एक लड़के ने पीछे से कॉमेंट किया। बाहर निकलने के बाद उन लड़के लड़कियों ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर हमला कर दिया। recent visitors 46

मुख्यमंत्री ने मुंगेली जिला ग्रंथालय में किया अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि “शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी है। इसके बिना जीवन अधूरा है। यह न केवल रोजगार का माध्यम है, बल्कि समग्र विकास का आधार भी है।” वे आज सवेरे मुंगेली जिला मुख्यालय में जिला ग्रंथालय में 29.90 लाख रुपये की लागत से निर्मित अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, मुंगेली विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले तथा पूर्व सांसद श्री लखन साहू भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए आदर्श विद्यार्थी के पाँच गुण “काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च। अल्पाहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को अनुशासित, मेहनती और लक्ष्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा दी। एक छात्र द्वारा सोशल मीडिया के प्रभाव पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, डिजिटल युग में अच्छाई को अपनाएं और बुराई से दूर रहें। श्री साय ने अपने छात्र जीवन के संघर्ष साझा करते हुए बताया कि अविभाजित रायगढ़ जिले में शिक्षा के अवसर सीमित थे। नटवर स्कूल ही एकमात्र विकल्प था। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने, कभी निराश न होने और परिश्रम को अपना मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया।         मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ और ‘नालंदा परिसर’ जैसे शैक्षणिक नवाचारों की सराहना की और कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में आधुनिक ग्रंथालय स्थापित किए जाएं। उन्होंने मुंगेली जिला ग्रंथालय की सराहना करते हुए बताया कि यह ग्रंथालय अब तक सैकड़ों युवाओं की सफलता की नींव बन चुका है। उन्होंने इसे केवल अध्ययन का स्थल न मानकर एक सफलता केंद्र बताया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री को तोप सिंह कुंभकार द्वारा उनके चित्र का हस्तनिर्मित छायाचित्र तथा भगवद् गीता और अन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। गौरतलब है कि जिला ग्रंथालय में वर्तमान में यहाँ 4780 से अधिक पुस्तकों का संग्रह, 893 पंजीकृत सदस्य, 32 टेबल, 11 सीसीटीवी कैमरे हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। recent visitors 50

रायपुर : राज्यपाल डेका ने बिलासपुर, कोरिया और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के 30 टी.बी मरीजों के लिए दी 1.80 लाख की सहायता

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने राज्य के बिलासपुर, कोरिया और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के 30 टी.बी. मरीजों की मदद के लिए निःक्षय मित्र बनते हुए 1 लाख 80 हजार रूपये की राशि अपने स्वेच्छानुदान मद से प्रदान की है। इस सहायता से मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जायेगा जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिलेगी। राज्यपाल डेका ने बिलासपुर जिले के 10 टी.बी. मरीजों को एक वर्ष के लिए 60 हजार रूपये की आर्थिक सहायता की स्वीकृति दी है। इसी तरह सारंगढ़-बिलाईगढ़ और कोरिया जिलों के 10-10 टी.बी. मरीजों को भीे प्रति माह पांच सौ रूपये के मान से एक वर्ष के लिए 60-60 हजार रूपये आर्थिक सहायता राशि दी गई है।   उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की फ्लैगशीप योजना प्रधानमंत्री टी.बी मुक्त भारत अभियान के तहत देश एवं प्रदेश को वर्ष 2025 तक टी.बी मुक्त बनाना लक्ष्य है। डेका ने राज्य को टी.बी. मुक्त बनाने के लिए समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए जन सहयोग पर बल दिया है। जिलों के दौरों के दौरान वे स्वयं मरीजों की जानकारी लेते हैं और उनके लिए हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाती है। recent visitors 36

नैंसी त्यागी ने Cannes में पहनी ड्रेस पर विवाद, नेहा भसीन ने खोली पोल

मुंबई कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर नैंसी त्यागी ने दूसरी बार अपने फैशन का जलवा दिखाया. पिछले साल कान्स पहुंचकर उन्होंने देश का नाम गर्व से ऊंचा किया था. यूपी के बागपत की रहने वाली नैंसी अपनी ड्रेसेस खुद बनाकर सोशल मीडिया पर फ्लॉन्ट करती हैं. इस हुनर ने उन्हें कान्स तक पहुंचाया. सक्सेस एंजॉय कर रही नैंसी ने दूसरी बार भी कान्स में डंका बजाया. लेकिन इस बीच अपनी एक ड्रेस को लेकर वो विवादों में आ गई हैं. नैंसी की ड्रेस पर विवाद दरअसल, नैंसी ने कान्स में दूसरे दिन रेड कारपेट पर सिल्वर बेज कलर टोन की क्रिस्टल पर्ल कॉर्सेट मिनी ड्रेस पहनी थी. इस आउटफिट को उन्होंने ड्रामेटिक लॉन्ग ट्रेल संग अटैच किया. नैंसी ने दावा किया था कि ये ड्रेस उन्होंने खुद डिजाइन की है. पोस्ट में उन्होंने लिखा था- ये कलर मेरी मम्मी का फेवरेट है. इसलिए इस बार फैसला किया कि इसी कलर में ड्रेस डिजाइन करूं. इसे बनाने में पूरा 1 महीना लगा. आखिर पल तक मैं तैयारी में लगी रही. क्योंकि ड्रेस काफी हैवी थी. उन सभी का दिल से शुक्रिया जो इस जर्नी का हिस्सा रहे. नैंसी की खुली पोल लेकिन सामने आया है नैंसी ने झूठ बोला है. सिंगर नेहा भसीन ने इंस्टा पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें उन्होंने सेम कॉर्सेट ड्रेस पहनी है. नेहा ने इस ड्रेस को दिसंबर 2024 में अपने एक कॉन्सर्ट में पहना था. नेहा ने इंस्टा पर अपनी फोटोज शेयर कर लिखा- ये कॉर्सेट काफी जाना पहचाना सा लग रहा है. बस हैरानी हो रही है. नैंसी और अपनी कॉर्सेट ड्रेस का कोलाज शेयर कर नेहा ने लिखा- सेम सेम. सिंगर ने ये भी बताया कि उनकी ये कॉर्सेट ड्रेस मुंबई के एक फैशन स्टोर 'द सोर्स बॉम्बे' से ली गई थी. वो लिखती हैं- I rest my case. फैशन स्टोर का दावा द फ्री प्रेस जर्नल संग बातचीत में फैशन स्टोर की फाउंडर और स्टाइलिस्ट सुरभि गुप्ता ने कंफर्म किया कि नैंसी ने ये ड्रेस उनके स्टोर से खरीदी थी. उन्होंने कहा- नैंसी ने दावा किया कि उन्होंने ये ड्रेस खुद सिली थी. लेकिन ये उन्होंने हमसे खरीदी थी. ये उन्होंने हमारे मुंबई के स्टोर से ली थी. वो जो कहना चाहती हैं कह सकती हैं. लेकिन वो हमारा डिजाइन है. हम बार्टर और कोलेबोरेट नहीं करते. उन्होंने वो ड्रेस नहीं बनाई थी. हां, जो कैप उन्होंने बनाई थी वो हमारी नहीं है. वो शायद उन्होंने खुद बनाई थी. सुरभि ने बताया कि नैंसी ने ये आउटफिट कान्स में जाने से पहले उनके स्टोर से 25 हजार रुपये में खरीदी थी. नेहा भसीन की पोस्ट नैंसी पर अपना खुलासा करने के बाद नेहा ने पोस्ट कर बताया कि सच सामने लाने का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं था. बल्कि किसी की मेहनत और काम को अपना कहने के वो खिलाफ हैं. हर कोई इंडस्ट्री में सेल्फ मेड है. किसी के काम को अपना बताना गलत है. नैंसी की तरफ से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई रिएक्शन नहीं आया है. फैंस इस खुलासे के बारे में जानकर हैरान जरूर हैं. नैंसी के कान्स लुक की तारीफ करने वाले यूजर्स अब उन्हें ट्रोल करते दिख रहे हैं. recent visitors 56

मंत्री विजय शाह केस में SIT का गठन, टीम में इकलौती महिला IPS अधिकारी वाहिनी सिंह को शामिल किया

भोपाल  मध्य प्रदेश डीजीपी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मंत्री विजय शाह मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी एसआईटी में इकलौती महिला IPS अधिकारी वाहिनी सिंह को शामिल किया गया है। वाहिनी सिंह की गिनती मध्य प्रदेश में तेजतर्रार अधिकारी के रूप में होती है। अभी वह डिंडोरी जिले में एसपी हैं। कौन हैं आईपीएस अफसर वाहिनी सिंह वाहिनी सिंह 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। 2013 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। पहले ही अटेम्पट में वाहिनी सिंह को 173वीं रैंक आई थी। एक इंटरव्यू के दौरान वाहिनी सिंह ने कहा था कि इसकी उम्मीद मुझे नहीं थी। वाहिनी ने ग्रेजुएशन बॉयोटेक में किया है। इसके बाद फायनेंस में एमबीए किया है। उनका जन्म 19 मार्च 1988 में हुआ था। बचपन में बनना चाहता था डॉक्टर आईपीएस वाहिनी सिंह ने कहा था कि ऐसा नहीं था कि मैं शुरू से ही आईएएस या आईपीएस बनना चाहती थी। बचपन में मैं डॉक्टर बनना चाहती थी, फिर पायलट बनने की भी चाहत हुई। साथ ही लगता था कि मैं अच्छे से पढ़ाई कर विदेश में जाकर नौकरी करूं। मेरे पिता राजस्थान स्टेट सर्विस के अधिकारी हैं। उनका सम्मान मैंने लोगों में देखा है। इसके बाद मेरे मन में यह जरूर था कि मैं एक दिन परीक्षा दूंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद ही मैंने यूपीएससी देने का मन बनाया। इसके बाद दिल्ली जाकर तैयारी शुरू कर दी। चयन के बाद मिला पंजाब कैडर वहीं, आईपीएस बनने के बाद वाहिनी सिंह को पंजाब कैडर मिला था। उन्होंने कुछ दिनों तक पंजाब में काम भी किया। दिसंबर 2015 में शादी के नाम पर वाहिनी सिंह का कैडर ट्रांसफर हो गया। इसके बाद वह एमपी कैडर की आईपीएस अधिकारी बन गईं। वाहिनी सिंह ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि यह जॉब नाइन टू फाइव की नहीं है। हमेशा चुनौती भरा काम रहता है। पति भी हैं आईपीएस अफसर डिंडोरी एसपी वाहिनी सिंह की शादी मध्य प्रदेश में हुई है। उनके पति आईपीएस नागेंद्र सिंह हैं। नागेंद्र सिंह 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। अभी वह बालाघाट के एसपी हैं। डिंडोरी और बालाघाट आसपास ही हैं। पति के कारण पड़ चुकी है डांट वहीं, आईपीएस वाहिनी सिंह को कुछ साल पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान से पति के कारण डांट पड़ चुकी है। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान सभी कलेक्टर्स और एसपी की मीटिंग ले रहे थे। उस समय वाहिनी सिंह निवाड़ी की एसपी थीं और उनके पति नागेंद्र सिंह भिंड एसपी थे। तब शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि आपके लाइफ पार्टनर आपके सरकारी काम में इंटरफियर करते हैं। नागेंद्र सिंह पर रेत माफिया से सांठगांठ के आरोप लगे थे। हालांकि फटकार की बात पर वाहिनी सिंह ने चुप्पी साथ ली थी। वाहिनी सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुझे हसबैंड से बहुत सपोर्ट मिलता है। डिंडोरी में एसपी रहते हुए उन्होंने एक अलग मिसाल पेश की है। वाहिनी सिंह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जागरूक भी करती हैं। साथ ही उन्हें मोटिवेट करती हैं। 8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे. इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.'' हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा. विजय शाह मामले में कब क्या हुआ     11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया. बयान में मंत्री ने कर्नल सोफिया को अतंकियों की बहन बता दिया.     13 मई को मंत्री का विवादित बयान वाला वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमाता देख मंत्री विजय शाह ने बयान को लेकर माफी मांगी.     13 मई को वायरल वीडियो बीजेपी नेताओं तक पहुंचा. इसको लेकर पार्टी संगठन ने मंत्री विजय शाह को कड़ी फटकार लगाई. शाम 7 बजे मंत्री विजय शाह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे.     14 मई को कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर विरोध जताया. कांग्रेस ने बीजेपी से मंत्री पर मामला दर्ज कराने और बर्खास्त करने की मांग की.     14 मई को मंत्री विजय शाह के विवादित बयान को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 4 घंटे में FIR दर्ज करने के आदेश दिए.     14 मई की रात करीबन सवा 11 बजे इंदौर के मानपुर थाने में विजय शाह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया.     15 मई को मंत्री की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें फटकार मिली. उधर जबलपुर हाईकोर्ट ने दर्ज की गई एफआईआर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे कमजोर और असंतोषजनक बताया. कोर्ट ने अपने आदेश को … Read more

सिविल जज जूनियर डिविजन के पद के लिए उम्मीदवार को तीन साल कम से कम बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि सिविल जज जूनियर डिविजन के पद के लिए उम्मीदवार को तीन साल कम से कम बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस की अवधि प्रोविजनल नामांकन की तारीख से मानी जा सकती है, सर्वोच्च अदालत ने साफ किया कि यह शर्त आज से पहले उच्च न्यायालयों द्वारा शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया पर लागू नहीं होगी, यह शर्त केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि देखा गया है कि जो नए लॉ ग्रेजुएट न्यायपालिका में नियुक्त होते हैं, उनके कारण कई समस्याएं हुई हैं। ऐसे में सभी उम्मीदवारों को न्यायपालिका में दाखिल होने के लिए कम से कम तीन साल बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी होगा। दिखाना होगा ऐसा सर्टिफिकेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा शर्त पूरी करने के लिए उम्मीदवार को 10 साल तक प्रैक्टिस कर चुके वरिष्ठ वकील या तय न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट को दिखाना होगा। कोर्ट ने ये भी कहा कि यदि  कोई वकील सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहा है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में 10 साल तक प्रैक्टिस कर चुके वकील या तय न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट दिखाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस की अवधि नामांकन की तारीख से मानी जा सकती है। अदालत ने साफ किया कि यह आदेश उच्च न्यायालयों में हो चुकी नियुक्तियों पर लागू नहीं होगा यह शर्त केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगी। और क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? CJI ने कहा कि सभी राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए नियमों में संशोधन करेंगी कि सिविल जज जूनियर डिवीजन के लिए उपस्थित होने वाले किसी भी उम्मीदवार के पास न्यूनतम 3 साल का अभ्यास होना चाहिए, इसे बार में 10 वर्ष का अनुभव वाले वकील द्वारा प्रमाणित और समर्थित किया जाना चाहिए, कोर्ट ने एक सुविधा देते हुए कहा कि जजों के विधि लिपिक के रूप में अनुभव को भी इस संबंध में गिना जाएगा। recent visitors 70

प्रोफेसर जयंत नार्लीकर नहीं रहें, पूरे वैज्ञानिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति

रायपुर आज की सुबह एक दुखद खबर लेकर आई है। प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक पदम् विभूषण जयंत विष्णु नार्लीकर हमारे बीच नहीं रहे। आज भोर में उनका सोते सोते निधन का दुःख भरा समाचार प्राप्त हुआ है।ज्ञात हो कि प्रोफेसर जयंत नार्लीकर कई बार छत्तीसगढ़ आए हैं और यहां के विद्यार्थियों और शिक्षकों के अलावा आम लोगों से भी सीधे संवाद किया है। उनकी गणितज्ञ पत्नी मंगला नार्लीकर के साथ उन्होंने रायपुर से लेकर धमतरी, कांकेर जगदलपुर बस्तर से दूरदराज स्थित दरभा घाटी के स्कूल तक में बच्चों से वैज्ञानिक सोच और खगोल विज्ञान पढ़ने की जरूरत पर बातचीत की थी। रायपुर और भिलाई में जब उनका लेक्चर हुआ था तो हाल में खड़े होने के लिए भी जगह नहीं थी और लोग खिड़कियों से सटकर उनका व्याख्यान सुन रहे थे। उनसे प्रश्न पूछने के लिए होड़ लगी हुई थी।  छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के सम्माननीय सदस्यों को उनके इन सात दिवसीय दौरे में उनका अच्छा सानिध्य मिला था। उन्होंने आम जनमानस से अंधश्रद्धा मिटाने के लिए अपनी आवाज उठाई, विश्वविद्यालयों में ज्योतिष पढ़ाए जाने का खुलकर विरोध किया और महाराष्ट में काला जादू विरोधी कानून बनाने के लिए संघर्षों की अगुवाई की। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा उनके दुःखद निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देती है। आज  20 मई 2025 की शाम सात बजे प्रोफेसर जयंत नार्लीकर को श्रद्धांजलि देने के लिए छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा  एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की जा रही है जिसमें  पीआरएसयू के पूर्व कुलपति और खगोलभौतिकविद प्रोफेसर एस के पाण्डेय,  प्रसिद्ध टेक्सोनॉमिस्ट प्रो एम एल नायक, आल इंडिया पीपुल साइंस मूवमेंट के कोषाध्यक्ष डॉ एस आर आजाद  सहित कई शिक्षाविदों और वैज्ञानिक सोच के लिए काम करने वाले साथियों द्वारा अपने विचार व्यक्त किए जाएंगे। recent visitors 39