मंत्री श्रीमती उईके ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाले समय में जल की उपलब्धता तभी संभव

सिंगरौली लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्राम पंचायत खिरवा में 24 लाख रु. की लागत से निर्मित होने वाले अमृत सरोवर का भूमि-पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। उन्होंने जल संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह ने की, सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। जल से ही जीवन है, जल की रक्षा हम सबका दायित्व मंत्री श्रीमती उईके ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाले समय में जल की उपलब्धता तभी संभव है जब समाज इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि जल स्तर में लगातार गिरावट चिंताजनक है और इसके समाधान के लिए समुदाय को अपने-अपने क्षेत्र के पारंपरिक जल स्रोतों की पहचान कर उनके संरक्षण, साफ-सफाई और जीर्णोद्धार की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मंत्री श्रीमती उईके ने स्पष्ट किया कि जल गंगा संवर्धन अभियान में बनाए जा रहे अमृत सरोवर जैसे प्रयास न केवल जल संचय को बढ़ावा देंगे, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जल-आधारित कृषि के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। स्थानीय जल स्रोतों के पुनर्जीवन का हो रहा कार्य – राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह ने कहा कि सिंगरौली जिले में तालाबों, नदियों, कुओं और बावड़ियों जैसे परंपरागत जल स्त्रोतों की पहचान कर उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। साथ ही खेत-तालाब और अमृत सरोवर जैसी योजनाओं के माध्यम से जल संचयन की दीर्घकालिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संरक्षण के लिये सोक-पिट और बोरी-बंधन जैसे उपायों को अपनाना आवश्यक है, जिसके लिए जन-जागरूकता अनिवार्य है। विधायक शाह ने जल संरक्षण को भावी पीढ़ियों के हित में सर्वोपरि बताया और नागरिकों से अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।   recent visitors 31

सिंगरौली एनटीपीसी के मुख्य कैनाल मे मिली युवक की तैरती हुई लाश

सिंगरौली सिंगरौली एनटीपीसी के मुख्य नहर कैनाल मे मिली 29 वर्षीय युवक की नहर में तैरती हुई लाश,घटना स्थल पर पहुंची स्थानीय पुलिस,नहर से शव को निकलवाकर पुलिस शुरू की जांच,विवेक कुमार उपाध्याय निवासी धतुरा बरवा टोला के रूप में मृतक की हुई पहचान, मृतक के परिजनों को पुलिस ने दी सूचना,शव को जिला अस्पताल के मर्चुरी में रखवाया,मौत का कारण है अज्ञात,मौत के हर पहलु पर जांच कर रही है पुलिस, विन्धनगर थाना क्षेत्र के एनटीपीसी के मुख्य नहर कैनाल में तैरता हुआ मिला है शव recent visitors 29

स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं के सशक्तीकरण, चिकित्सकीय मैनपॉवर और अत्याधुनिक उपकरण की उपलब्धता के किए गए सुगठित प्रयास

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत के संकल्प को साकार करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार निरन्तर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार "स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत" के संकल्प को साकार करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि “राइट टू हेल्थ” के साथ “राइट टू स्क्रीनिंग” भी आवश्यक है। राज्य ने सिकल सेल, टीबी और अन्य बीमारियों की समय पर पहचान और इलाज को प्राथमिकता दी है। राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन, टीबी मुक्त भारत अभियान, निरोगी काया अभियान में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन, मध्यप्रदेश की प्रतिबद्धता स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के समर्पण का परिणाम है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा है कि यह परिणाम हमें आश्वस्त करते हैं कि स्वस्थ सशक्त मध्यप्रदेश के निर्माण में हम शीघ्र सफल होंगे। प्रदेश में निक्षय भारत अभियन के अंतर्गत 23 जिलों में 78.14 लाख नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई, 21,992 टीबी मरीज चिन्हित हुए, 28,664 निक्षय मित्र बनाए गए और 23,818 फूड-बास्केट वितरित किये गये। अभियान में उत्कृष्ट परिणामों के लिए प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। प्रदेश में नए बने जिलों के अतिरिक्त सभी जिलों में क्षय रोग की जांच के लिए हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं। सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में 1.05 करोड़ स्क्रीनिंग हुई, 28,297 मरीजों का इलाज हुआ और 75.36 लाख कार्ड वितरित किये गये। इसके उपचार के लिए बीएमएचआरसी भोपाल और एमजीएम इंदौर में 2 सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस उपलब्ध हैं। साथ ही, संजय गांधी चिकित्सालय रीवा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया गया है। उच्च रक्तचाप के 77.73 लाख, मधुमेह के 76.07 लाख, एनएएफएलडी के 33.94 लाख, ओरल कैंसर के 11.90 लाख, सर्वाइकल कैंसर के 3.38 लाख और स्तन कैंसर के 5.59 लाख नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई। प्रदेश के 52 डे-केयर में 42 प्रकार की कैंसर रोधी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दिसंबर-2024 के पल्स पोलियो अभियान में 36 लाख बच्चों को 99% लक्ष्य के साथ पोलियो खुराक दी गई। 6 जनवरी 2025 से शुरू 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स ने अब तक 21 जिलों के 87 विकासखंडों के 1268 ग्रामों में 2.08 लाख रोगियों को सेवा दी है। अब प्रदेश में इमरेजेंसी पेसेंट्र से लिए एयर एम्बुलेंस भी उपलब्ध है। इस सेवा से अब तक 61 नागरिक लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा में सतत विस्तार और उन्नतिकरण हुआ है। प्रदेश में 30 मेडिकल कॉलेज है। सत्र 2024-25 में 400 नई एमबीबीएस की सीटें उपलब्ध हुई हैं। आगामी वर्ष में 6 मेडिकल कॉलेज स्थापित होंगे। साथ ही पीपीपी मोड में 12 शासकीय कॉलेज भी स्थापित किये जायेंगे। 2300 और सीटों की वृद्धि संभावित है। सुपर स्पेशियलिटी सीटें 47 से बढ़कर 64 हुईं हैं, जबकि नॉन-क्लिनिकल विषयों में 291 सीनियर रेजिडेंट पद सृजित हुए हैं। भोपाल और इंदौर मेडिकल कॉलेज एम्स की तर्ज पर उन्नत किए जा रहे हैं। प्रदेश में 13 नए नर्सिंग कॉलेज निर्माणाधीन है, शेष 27 जिलों में भी इनकी स्थापना प्रस्तावित है। जबलपुर में बोन मेरो ट्रांसप्लांट, इंदौर में सीएआर-टी सेल थेरेपी और रक्त विकिरणक मशीन की सेवा शुरू की गई। 15वें वित्त आयोग और पीएम अभीम के तहत 271 उप स्वास्थ्य केंद्र, 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 79 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 15 आईपीएचएल, 1 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 5 ब्लड बैंक और 2 मैटरनिटी वार्ड सहित 37 निर्माण कार्य पूर्ण किए गए। एनक्यूएएस के तहत 1977 संस्थाएँ अभिप्रमाणित, 176 लेबर रूम, 53 मेटरनिटी ओटी, 22 एसएनसीयू मुस्कान अभिप्रमाणित, 30 पैथोलॉजी लैब एनएबीएल प्रमाणित और 24 ब्लड बैंक ऑटोमेटेड हैं। प्रदेश में 10 हज़ार करोड़ के स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्य प्रगतिरत हैं। ‘हेल्थ केयर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2025’ लॉन्च की जा चुकी है। नीति 2020 के अंतर्गत 120 करोड़ रूपए के 84 प्रस्ताव और नई नीति में 200 से अधिक ‘इंटेंशन टू इन्वेस्ट’ प्राप्त हो चुके हैं। आयुष्मान भारत में अग्रणी अब तक 4.29 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। योजना में 58 लाख लाभार्थियों को 8,757 करोड़ रूपए की सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। योजना में शामिल किए जाने के बाद से 40 लाख वरिष्ठ नागरिकों के वय वंदना कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य "मातृ शिशु संजीवन मिशन" और "अनमोल 2.0" प्रारंभ किये गए हैं। प्रदेश में MMR 173 से घटकर 80, NMR को 31 से 10 और IMR को 43 से 20 तक लाने का लक्ष्य तय किया गया हैं। अनमोल 2.0 के माध्यम से शत-प्रतिशत ट्रैकिंग, गर्भवती महिलाओं को जाँच और पोषण आहार के लिए प्रेरित करना, मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना और जननी सुरक्षा योजना के भुगतान को सुगम बनाया जाएगा। प्रदेश में SNCU, HDU, ICU और स्तनपान सहायता इकाइयों की स्थापना की गई है। हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष पैकेज निजी अस्पतालों तक विस्तारित हुए हैं। मध्यप्रदेश में 30 से 65 वर्ष की 39.5 लाख महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की गई, 12,251 को उपचार उपलब्ध कराया गया। प्रदेश में 111 लाख महिलाओं की स्तन कैंसर जाँच की जा कर अब तक 8000 मरीजों की कीमोथेरेपी कारई जा चुका है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश के डे-केयर सेंटर मॉडल को अपनाकर पूरे देश में लागू करने का प्रावधान किया है। ब्लड बैंक और डायलिसिस सेवा प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में ब्लड बैंक; 278 ब्लॉक्स में से 118 में यूनिट संचालित। साथ ही 67 ब्लॉकों में PPP मॉडल पर डायलिसिस यूनिट्स का संचालन किया जा रहा है। शेष में 2028 तक ब्लड बैंक और डायलिसिस सेवा विस्तार की योजना है। निःशुल्क दवाएँ और जाँच सेवाएँ प्रदेश के जिला अस्पतालों में 295 से बढ़ाकर 530 दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल कॉलेजों में 267, सामुदायिक केंद्रों पर 80 तरह की जाँच सेवाएँ उपलब्ध हैं। 14 जिलों में आईपीएचएल कार्यरत है। आईपीएचएल सेवा का विस्तार भी योजनाबद्ध तरीके से किया जा जा रहा है।उज्जैन में ₹592.30 करोड़ से अटल मेडिसिटी का निर्माण कराया जा रहा है। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण वर्ष 2024-25 में 1768 रिक्त पदों (40 पीजीएमओ, 420 एमओ, 980 सीएचओ, 7 जिला कार्यक्रम प्रबंधक, 7 जिला लेख प्रबंधक, 10 जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर, आदि) पर भर्ती की गई। 3850 नए पदों (1388 विशेषज्ञ, 1832 एमओ, 469 दंत चिकित्सक) के लिए मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से और 454 लैब … Read more

पोर्टल मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह एवं भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग संस्थान के महा निदेशक टी.पी. सिंह के बीच सोमवार को मंत्री निवास कार्यालय पर नई तकनीकों के उपयोग को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सिबी चक्रवर्ती, लोक निर्माण के प्रमुख अभियंता केपीएस राणा एवं एस. आर. बघेल उपस्थित थे। बैठक में प्रधानमंत्री गति शक्ति प्लेटफार्म के अंतर्गत विकसित किए जा रहे विशेष जीआईएस पोर्टल और सर्वेक्षण मोबाइल ऐप की विस्तार से जानकारी दी गई। यह पोर्टल मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जो निर्माण कार्यों की निगरानी से लेकर परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने तक की सुविधाएं प्रदान करता है। बैठक में रोड ऐसेट मैनेजमेंट सिस्टम, ग्रीनफील्ड सड़कों की योजना, राज्य का रोड नेटवर्क मास्टर प्लान, रोड सेक्टर पॉलिसी और इंजीनियरों के प्रशिक्षण जैसे अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सिंह ने प्रदेश के इंजीनियरों को जीआईएस पोर्टल पर प्रशिक्षण देने की सहमति दी और आईटी संबंधी तकनीकी जरूरतों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। लोक निर्माण विभाग के लोकपथ मोबाइल ऐप एवं लोक कल्याण सरोवर योजना की प्रशंसा करते हुए टीपी सिंह ने सुझाव दिया कि विभाग के सभी नवाचारों के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिये एक विस्तृत सॉफ्टवेयर सिस्टम निर्मित किया जाना चाहिए। “लोक कल्याण सरोवर” के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल का चयन गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इससे अधिकतम भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक माह 5 और 20 तारीख को किए जाने वाले औचक निरीक्षणों के लिए निर्माण कार्यों के रेंडम चयन व्यवस्था को जीआईएस पोर्टल के सहयोग से और भी बेहतर बनाया जा सकता है। मंत्री सिंह ने आवश्यक समन्वय एवं तकनीकी सहयोग के लिए उप सचिव, लोक निर्माण विभाग की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए। इस समिति में प्रमुख अभियंता कार्यालयों, सड़क विकास निगम एवं भवन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति भास्कराचार्य संस्थान के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित कर सभी नवाचारों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी और गति शक्ति प्लेटफार्म के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समय सीमा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी उन्नयन को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। लोक निर्माण विभाग ने तकनीक के बेहतर उपयोग के माध्यम से अधोसंरचना विकास में सशक्त और आधुनिक पहल की है।   recent visitors 30

अतिथि शिक्षक एजुकेशन पोर्टल 3.0 के अंतर्गत जीएफएमएस पर नियत समय अवधि पर कार्यवाही करेंगे

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अतिथि शिक्षक पोर्टल (जीएफएमएस) पर आवेदकों को नवीन पंजीयन एवं पूर्व से पंजीकृत आवेदकों को अपनी शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताओं की प्रविष्टि और संशोधन के निर्देश दिए थे। इस संदर्भ में लोक शिक्षण संचालनालय ने समय-सारणी जारी की है। अतिथि शिक्षक एजुकेशन पोर्टल 3.0 के अंतर्गत जीएफएमएस पर नियत समय अवधि पर कार्यवाही करेंगे। अतिथि शिक्षक आवेदकों द्वारा अपनी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता और मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा से संबंधित दस्तावेज 23 मई तक अपलोड कर सकेंगे। इसके साथ ही 23 मई तक ही आवेदक की जानकारी में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर ई-केवाईसी अनलॉक कर अपडेट कर सकेंगे। आवेदकों के पंजीयन में दर्ज जानकारी कर संकुल प्राचार्य द्वारा सत्यापन का कार्य 24 मई को किया जाएगा। पूर्व में पंजीकृत आवेदन में दर्ज मोबाईल नम्बर बंद हो जाने की स्थिति में मोबाईल नम्बर परिवर्तित करने का कार्य बीईओ और डीईओ के माध्यम से 23 मई को ही किया जाएगा। अतिथि शिक्षकों के संबंध में सामान्य निर्देश भी दिये गये है। जिन आवेदकों द्वारा मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 एवं उसके उपरांत उत्तीर्ण की है। ऐसे आवेदकों द्वारा दिव्यांग केटैगिरी का चयन (विकल्प) को दर्ज किया गया है। उनके जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी स्थायी प्रमाण-पत्र जिसमें दिव्यांगता का प्रतिशत 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना अनिवार्य है। आवेदक म.प्र. के किसी भी जिले के संकुल में उपस्थित होकर दस्तावेज सत्यापन की कार्यवाही करा सकेंगे। आवेदकों को सत्र 2025-26 के लिये नवीन पंजीयन एवं पूर्व से पंजीकृत आवेदकों के लिये दस्तावेज अपलोड एवं आवश्यक संशोधन के लिये अंतिम अवसर दिया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गये है कि उनके जिले के अंतर्गत समस्त संकुल प्राचार्य आवेदकों के दस्तावेज सत्यापन की कार्यवाही नियत समय पर करें। संकुल प्राचार्य के समक्ष प्रस्तुत होने वाले समस्त आवेदकों का संकुल प्राचार्य द्वारा नवीन एजुकेशन पोर्टल पर 3.0 के अंतर्गत अतिथि शिक्षक जीएफएमएस पोर्टल पर आवेदकों की मूल दस्तावेजों के परीक्षण के बाद तत्काल सत्यापन की कार्यवाही की जाएं।   recent visitors 31

प्रशिक्षुओं में तकनीकी समझ, जिज्ञासा और आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा

भोपाल भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की अपर सचिव सुश्री सोनल मिश्रा (भा.प्र.से.) ने  शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (ITI) इंदौर का दौरा किया। उन्होंने संस्थान में संचालित विभिन्न ट्रेडस का निरीक्षण किया और प्रशिक्षुओं से संवाद कर उनके प्रशिक्षण अनुभवों को जाना। केन्द्रीय अपर सचिव सुश्री मिश्रा ने ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नवाचार से जुड़े ट्रेड्स को विशेष रुचि से देखा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता की सराहना की और इस प्रशिक्षण सुविधा को अत्याधुनिक बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ कदमताल करते हुए आईटीआई इंदौर जिस तरह युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है, वह राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल है। प्रशिक्षुओं में तकनीकी समझ, जिज्ञासा और आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। केन्द्रीय अपर सचिव सुश्री मिश्रा ने शासकीय ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थान, इंदौर का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने ट्रैफिक सिमुलेशन, ड्राइविंग टेस्ट एवं प्रशिक्षण की संरचना को देखा और प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण पद्धति पर संवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध संसाधनों और अधोसंरचना को अत्यंत सराहनीय बताया। केन्द्रीय अपर सचिव ने उपस्थित अधिकारियों से संस्थान की कार्य-प्रणाली, इंडस्ट्री लिंकज, प्लेसमेंट रिकॉर्ड और अपस्किलिंग की दिशा में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी ली और सुझाव दिए कि युवाओं को उद्यमिता के लिए भी प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘कौशल से समृद्धि’ के विजन और कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल के नेतृत्व में चल रहे उन प्रयासों को सशक्त करता है, जिनका उद्देश्य युवाओं को वैश्विक मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना है। संचालनालय कौशल विकास द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण को नई दिशा देने और आधुनिक ट्रेड्स से जोड़ने का कार्य लगातार जारी है, जिससे मध्यप्रदेश देश के कौशल मानचित्र पर अग्रणी राज्य बन सके। भ्रमण में संचालनालय कौशल विकास, मध्यप्रदेश के वरिष्ठ अधिकारीगण, संस्थान के प्राचार्य, प्रशिक्षण अधिकारी, औद्योगिक प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे। recent visitors 34

तकनीक से आत्मबल की ओर:केवल तकनीकी शिक्षा नहीं, जीवन निर्माण का मंच

भोपाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में सत्र 2025–26 का शुभारंभ विशेषज्ञों द्वारा दिए गए ओरिएंटेशन के साथ हुआ। इस सत्र में  देश के विभिन्न राज्यों से आए 350 से अधिक युवा छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। यह आयोजन महज एक औपचारिक सत्र न होकर, युवाओं के जीवन में आत्मबल, तकनीकी दक्षता और नवाचार की दिशा में प्रथम निर्णायक कदम बनेगा। मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आए विद्यार्थियों ने ग्लोबल स्किल पार्क को गुणवत्ता आधारित करियर निर्माण का केंद्र मानते हुए प्रवेश लिया है। कार्यक्रम में छात्रों को संस्थान की उन्नत अधोसंरचना, इंडस्ट्री इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों, आधुनिक प्रयोगशालाओं और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास की संपूर्ण प्रक्रिया से परिचित कराया गया। केवल तकनीकी शिक्षा नहीं, जीवन निर्माण का मंच ग्लोबल स्किल पार्क की शिक्षण व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल जॉब ओरिएंटेड नहीं, बल्कि समस्या समाधानकर्ता और नवाचार आधारित उद्यमशील नागरिक के रूप में तैयार करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों द्वारा आयोजित सत्र में विद्यार्थियों को बताया गया कि यहाँ दी जाने वाली शिक्षा “ट्रेनिंग फॉर एम्प्लॉयमेंट टू ट्रेनिंग फॉर एम्पावरमेंट” की सोच पर आधारित है। छात्रों को प्रोफेशनल एटिकेट, संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता और डिजिटलीकरण के साथ जॉब रेडी स्किल्स का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह दृष्टिकोण ग्लोबल स्किल पार्क को पारंपरिक आईटीआई और पॉलिटेक्निक मॉडल से अलग करता है। राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय मानकों से जुड़ती तकनीकी शिक्षा ग्लोबल स्किल पार्क ने हाल ही में आईआईटी दिल्ली , आईआईटी रोपड़ और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से साझेदारी कर, कौशल विकास को अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में नवाचारी कदम बढ़ाया है। आगामी सत्र में एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, गेम डिज़ाइनिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी जैसे कोर्सेज सेंटर ऑफ स्किल एडवांसमेंट के अंतर्गत आरंभ किए जा रहे हैं, जिससे यहां अध्ययनरत युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। बदलते समाज की नई तस्वीर: बेटियों की बढ़ती भागीदारी इस सत्र में ग्लोबल स्किल पार्क में छात्राओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीकी प्रयोगशालाओं और वर्कशॉप में छत्तीसगढ़ की अंजलि, राजस्थान की पायल और झारखंड की काजल जैसी छात्राएं अब उसी आत्म विश्वास से काम कर रही हैं, जैसी अपेक्षा अब तक केवल छात्रों से की जाती रही है। यह प्रवृत्ति न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि तकनीकी शिक्षा में लैंगिक संतुलन की ओर एक प्रभावी संकेत भी है। विजनरी नेतृत्व की देन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल की दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता है, जिनके मार्गदर्शन में ग्लोबल स्किल पार्क को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। सचिव रघुराज राजेन्द्रन एवं संस्थान के सीईओ गिरीश शर्मा के नेतृत्व में ग्लोबल स्किल पार्क सतत नवाचार और गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ग्लोबल स्किल पार्क : स्किल इंडिया का मध्यप्रदेश मॉडल आज ग्लोबल स्किल पार्क केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि “स्किल्ड  इंडिया एंपावर्ड यूथ” की सोच पर आधारित एक जीवंत प्रयोग है, जहां तकनीकी ज्ञान, व्यक्तित्व निर्माण और रोजगार परकता—तीनों को समान महत्व देते हुए युवाओं को आत्म निर्भरता की राह दिखाई जा रही है।।   recent visitors 36