पाकिस्तान हाफिज सईद को भारत के हवाले नहीं करेगा, तब तक जारी रहेगा ऑपरेशन सिंदूर

 येरूशलम  पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकियों के खात्में के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद सरकार और सेना कई बार साफ कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर जारी रहेगा। वहीं, अब इजराइल में भारत के राजदूत ने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर को कुछ समय के लिए रोका गया है, यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। इजराइल में भारतीय राजदूत जेपी सिंह का कहना है कि जब तक पाकिस्तान हाफिज सईद, साजिद मीर, जाकिउर्र रहमान लखवी समेत सभी खूंखार आतंकियों को भारत को नहीं सौंप देता, तब तक ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं होगा। आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मारी: जेपी सिंह इजराइली टीवी i24 को दिए एक साक्षात्कार में जेपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ चलाया गया था। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने लोगों को धर्म के आधार पर गोली मारी। उन्होंने गोली मारने से पहले पर्यटकों का धर्म पूछा और 26 मासूमों की जान ले ली। ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ: जेपी सिंह सीजफायर पर बात करते हुए जेपी सिंह ने कहा कि, "सीजफायर अभी भी लागू है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर पर हम पहले ही साफ कर चुके हैं कि इसे रोका गया है, खत्म नहीं किया गया है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हमने एक न्यू नॉर्मल सेट करते हुए आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। आतंकवादी चाहे जहां भी हों हम उन्हें मारेंगे और उनकी इमारतों को भी तबाह कर देंगे। तो अभी सब खत्म नहीं हुआ है। " "आतंकवाद रुकना चाहिए", भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की संधि लागू होनी चाहिए और पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद रोकना चाहिए. भारत में पाकिस्तान से शुरू हुए आतंकी हमलों की एक लंबी लिस्ट का हवाला देते हुए जेपी सिंह ने कहा कि "मूल कारण ये दो समूह हैं – जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा". उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के नेता खुलेआम घूम रहे हैं, जिसमें कई यहूदी भी मारे गए थे. राजदूत जेपी सिंह ने जोर देकर कहा, "उन्हें एक बहुत ही सरल चीज करने की जरूरत है – जब प्रस्तावना में सद्भावना और दोस्ती शामिल है, तो उन्हें बस इन आतंकवादियों को हमें सौंपने की जरूरत है." उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका ने मुंबई हमले में शामिल तहव्वुर हुसैन राणा को प्रत्यर्पित किया था. इसी से सीखकर इस्लामाबाद भी ऐसा कर सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा, "जब अमेरिका इन दोषियों को सौंप सकता है, तो पाकिस्तान क्यों नहीं सौंप सकता? उन्हें बस हफीज सईद, लखवी, साजिद मीर को सौंपना होगा और चीजें खत्म हो जाएंगी." यह तर्क देते हुए कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है, भारतीय दूत ने चुनौती का सामना कर रहे देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया. पाकिस्तान में मचा हड़कंप नूर खान एअरबेस की बात करते हुए जेपी सिंह ने कहा कि 10 मई की सुबह पाकिस्तान में हड़कंप मच गया था। उनके DGMO ने भारत में फोन करके सीजफायर करने की मांग रखी। पानी के बदले पाक ने आतंकवाद दिया: जेपी सिंह सिंधु जल समझौते पर बात करते हुए जेपी सिंह कहते हैं, "सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में साइन की गई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दोस्ती बरकरार रखा था। मगर पिछले कई सालों से देखा गया है कि हम पाकिस्तान को पानी देते हैं और बदले में पाकिस्तान हमारे देश में आतंकी हमले करवाता है। इसे लेकर लोगों में बेहद गुस्सा था। हमारे प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अब पानी और खून एकसाथ नहीं बहेगा।" आतंक के खिलाफ भारत का युद्ध है ऑपरेशन सिंदूर जेपी सिंह ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान चाहता है कि सिंधु जल समझौता कायम रहे तो उसे आतंकवाद खत्म करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर भारत का आतंकवाद के खिलाफ युद्ध है। पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए दो अहम संगठन जिम्मेदार हैं – जैश-ए-मोहम्म और लश्कर-ए-तैयबा। recent visitors 55

गुना जिले में एक सरपंच ने अपनी ग्राम पंचायत ही ठेके पर दे दी, इसके लिए 100 रुपये के स्टांप पर बाकायदा करार लिखा गया

गुना अभी तक आपने पंचायतों को निजी फर्मों को काम कराने का ठेका देते सुना होगा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना जिले में एक सरपंच ने अपनी ग्राम पंचायत ही ठेके पर दे दी। इसके लिए 100 रुपये के स्टांप पर बाकायदा करार लिखा गया। इसमें ठेका लेने वाले ने सरपंच का 20 लाख का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी ली, वहीं निर्माण कार्य की लागत का पांच प्रतिशत कमीशन सरपंच को देने की गारंटी दी। शिकायत पर जांच के बाद जिला पंचायत ने ठेका लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा दिया है। पंच और सरपंच ने मिलकर कर डाला सौदा     जनपद पंचायत गुना को शिकायत मिली थी कि करोद ग्राम पंचायत (Karod Gram Panchayat) की सरपंच ने पंचायत का संचालन ठेके पर दे दिया है। जनपद पंचायत ने जांच कराई तो सामने आया कि 28 नवंबर 2022 को सरपंच लक्ष्मी बाई ने पंच रणवीर सिंह कुशवाह के साथ एक करारनामे की नोटरी कराई है। 100 रुपये के स्टांप वाले शपथ पत्र पर इस करारनामे के अनुसार सरपंच ने पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी रणवीर सिंह कुशवाह को सौंप दिया था। गांव के किसी व्यक्ति ने अप्रैल में इसकी शिकायत जनपद पंचायत से की। जांच हुई, सरपंच के बयान हुए। जनपद पंचायत ने रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दी। नौ मई को जिला पंचायत सीईओ ने जनपद पंचायत को एफआईआर कराने के निर्देश दिए। जनपद पंचायत ने 13 मई को कैंट थाना प्रभारी को प्रकरण दर्ज करने पत्र लिखा। शुरुआती तथ्य लेने के बाद कैंट थाने में 17 मई को एफआईआर दर्ज कर ली गई। भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा में केस जनपद पंचायत गुना के समन्वयक सुनील खालको की शिकायत पर कैंट थाने में रणवीर सिंह कुशवाह के खिलाफ धारा 420, 419 और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा (8) के तहत मामला दर्ज किया गया है। – अनूप भार्गव, थाना प्रभारी कैंट recent visitors 48

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी करने वाले मंत्री शाह के खिलाफ जांच करेगी 3 सदस्यीय SIT टीम, जानें पूरा मामला

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ राज्य के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की जांच के लिए सोमवार देर रात तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया है. विशेष जांच दल (एसआईटी) में पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा, उप महानिरीक्षक कल्याण चक्रवर्ती और पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह शामिल हैं. सुप्रीम ने सोमवार को कर्नल कुरैशी पर की गई ‘‘अभद्र'' टिप्पणी के लिए विजय शाह को फटकार लगाई और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन करने का निर्देश दिया. कोर्ट के दखल के बाद पुलिस ने गठित की एसआईटी शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को मंगलवार सुबह 10 बजे तक आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने को कहा था, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल हो, जो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच करेगी.  मंत्री ने अपनी टिप्पणी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह एक सार्वजनिक व्यक्ति और अनुभवी राजनेता हैं और इसलिए उनके शब्दों में कुछ वजन होना चाहिए. इस मामले में CID ​​ने आदेश जारी कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2025 को कुंवर विजय शाह बनाम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं अन्य के मामले में यह आदेश जारी किया था, जो एफआईआर क्रमांक 188/2025 से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152, 196 (1) (बी) एवं 197 (1) (सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है. गठित एसआईटी में पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन प्रमोद वर्मा, उप पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल भोपाल कल्याण चक्रवर्ती, पुलिस अधीक्षक डिंडोरी वाहिनी सिंह जांच करेंगे. CID के आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः एवं निर्धारित समय सीमा में पालन किया जाए. क्या है पूरा मामला दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह के मामले में जांच करने के लिए एसआईटी गठन करने का आदेश दिया था. कुछ दिनों पहले मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की विवादित टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में आईपीएस अधिकारियों की विशेष जांच समिति (एसआईटी) बनाने का आदेश दिया था. साथ ही पीठ ने विजय शाह की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने मंत्री की लगाई फटकार पीठ ने कहा कि हमें ऐसी माफी नहीं चाहिए. आप पहले गलती करते हैं, फिर कोर्ट चले आते हैं. आप जिम्मेदार राजनेता हैं. आपको सोच-समझकर बोलना चाहिए, लेकिन आपने बहुत घटिया भाषा अपनाई है. इस पर विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि वह माफी मांग चुके हैं और माफी का वीडियो भी जारी कर चुके हैं. विजय शाह मेरी पार्टी में होते तो उन्हें निकाल देता: चिराग पासवान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि अगर भाजपा नेता उनकी पार्टी में होते तो उन्हें ‘‘जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.'' लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. वह अपने गृह राज्य बिहार के दौरे पर हैं. हाजीपुर से सांसद ने कहा, ‘‘हमें अपने सैन्यकर्मियों पर गर्व है, जो कोई भी उनकी तुलना आतंकवादियों से करता है, वह निंदा का पात्र है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति मेरी पार्टी में होता, तो उसे जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.'' चिराग की पार्टी भाजपा की सहयोगी है. शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘‘आतंकवादियों की बहन'' कहकर विवाद खड़ा कर दिया था. हालांकि, भाजपा ने अभी तक शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जो दावा कर रहे हैं कि यह ‘‘जुबान फिसलने'' के कारण हुआ. मध्यप्रदेश के मंत्री को राजग सहयोगियों के साथ-साथ विरोधियों की भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई. न्यायालय ने कहा कि शाह के बयानों से ‘‘पूरा देश शर्मसार हुआ है''. इसने साथ ही आदेश दिया कि इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी की जांच तीन सदस्यीय विशेष जांच दल द्वारा की जाए. 8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे. इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.'' हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा. विजय शाह मामले में कब क्या हुआ     11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम … Read more

महाराष्ट्र सरकार में फिर से मंत्री बने NCP नेता छगन भुजबल, सूबे में हैं OBC का बड़ा चेहरा

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पांच महीने पुराने राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. उन्होंने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार की उपस्थिति में शपथ ली. शपथ के दौरान मजेदार वाकया हुआ. शपथ से पहले सभी ने उनको गुलदस्ता दे कर अभिनंदन किया, मगर जैसे ही उनके पास अजित पवार पहुंचे तो सभी लोग हंसने लगे. बता दें कि सीएम फडणवीस ने अपने 5 महीने पुराने कैबिनेट का विस्तार किया है. पिछले साल दिसंबर में उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी. मगर, सोमवार को विस्तार के दौरान उनको शामिल किया गया. सोमवार रात को ही भुजबल ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार, 20 मई को फडणवीस सरकार की कैबिनेट की शपथ लेंगे. आज सुबह उन्होंने राजभवन में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली.     भुजबल ने पहले ही बता दिया था सोमवार को देर जानकारी देते हुए भुजबल ने कहा था, ‘उन्हें मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. मुझे सूचित किया गया है कि मुझे राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह 10 बजे होगा.’ भाजपा ने पुष्टि कर दी थी वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व कर रही भाजपा के सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी. राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरे भुजबल (77) को पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्री फडणवीस के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था. राकांपा के एक वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने मार्च में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद संभावित रूप से भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है. ताकतवर ओबीसी नेता छगन भुजबल का राजनीतिक कद महाराष्ट्र में किसी से छिपा नहीं है. वे न केवल येवला से विधायक हैं, बल्कि ओबीसी समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. उनके समर्थक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार ने उनकी नाराजगी को दूर करने और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है. निकाय चुनावों से पहले की चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भुजबल का मंत्रिमंडल में शामिल होना एनसीपी और गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है. खासकर, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है. भुजबल के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभाग मिलने की भी संभावना जताई जा रही है. काम आई भुजबल की पॉलिटिक्स? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शरद पवार को मेंटर मानने वाले छगन भुजबल समता परिषद के जरिए यह संदेश देने में सफल रहे कि उनकी नाराजगी से एनसीपी को नुकसान हो सकता है, अजित पवार के साथ उनके पिछले छह महीने में संबंध सामान्य ही रहे, हालांकि दूसरी ओर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ नजदीकी बढ़ाते रहे। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा था। इसी बीच जब बीड के सरंपच की हत्या में धनंजय मुंडे का इस्तीफा हुआ तो भुजबल के लिए मंत्रीमंडल में लौटने की उम्मीद बढ़ गई क्योंकि फडणवीस सरकार में एनसीपी के कोटे की एक बर्थ खाली हो गई। भुजबल की क्यों हुई वापसी? राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि स्थानीय निकाय चुनाव को देखते हुए अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने छगन भुजबल को मंत्री बनाकर खुश करने की कोशिश की है। छगन भुजबल की अगुवाई वाली समता परिषद की ओबीसी वर्ग में अच्छी पैठ है। भुजबल के मंत्री बनने से अच्छा संदेश जाएगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि अजित पवार ने भुजबल की वापसी कराकर जहां ओबीसी वर्ग को खुश करने की कोशिश की है तो वहीं उन्होंने भुजबल को भी यह संदेश दे दिया है कि वह चाहे तो किसी को भी बाहर बैठा सकते हैं। उन्होंने ऐसा करके अपनी पावर दिखा दी है। ऐसा कहा जा रहा है कि जब केंद्र सरकार देश में जाति जनगणना के लिए आगे बढ़ रह है तब अजित पवार पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे को और नाराज नहीं रख सकते थे। तब अजित के साथ ली थी शपथ भुजबल महाराष्ट्र के उन कुछ नेताओं में शामिल हैं जो 75 पार होने के बाद भी राजनीतिक में खुद को प्रासंगिक बनाए हुए हैं। पिछले साल दिसंबर में जब फडणवीस ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था तब भुजबल के साथ एनसीपी के ही दिलीप वाल्से पाटिल तथा बीजेपी के मुनगंटीवार और विजयकुमार गावित को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। इसके बाद सिर्फ भुजबल ही मंत्रिमंडल में लौटे हैं। भुजबल ने राजनीति की शुरुआत शिवसेना से की थी। 1991 से 1999 तक शिवसेना में रहने के बाद वह 1999 में एनसीपी में आए थे। इसके बाद से वह एनसीपी में हैं। अजित पवार ने जब चाचा शरद पवार का साथा छोड़ा था। तब भुजबल भी अजित के साथ चले गए थे और फिर शिंदे सरकार में मंत्री बने थे। भुजबल की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने अजित पवार के साथ शपथ ली थी। भुजबल दो बार राज्य के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। वह राज्य के गृह विभाग के साथ पीडब्ल्यूडी विभाग को संभाल चुके हैं। recent visitors 44

एनकाउंटर में खत्म हुआ खौफ का दौर, ढेर हुआ 1 लाख का इनामी बदमाश

गोंडा उत्तर प्रदेश की गोंडा पुलिस को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. एनकाउंटर में पुलिस ने 1 लाख के इनामी बदमाश सोनू उर्फ भुर्रे पासी को मार गिराया गया है. अधिकारी ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने बदमाश की घेराबंदी की. लेकिन खुद को घिरता देख बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी. इस दौरान एक गोली SHO की बुलेटप्रूफ जैकेट पर जा लगी. हालांकि, इस हमले में वह बाल-बाल बच गए. वहीं, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में सोनू उर्फ भुर्रे ढेर हो गया. आपको बता दें कि भुर्रे ने 24 अप्रैल को चोरी की एक घटना में एक शख्स की हत्या की थी. उसके खिलाफ 40 से अधिक केस दर्ज थे. इसमें हत्या, अपहरण और लूट जैसे मामले शामिल थे. भुर्रे एक शातिर किस्म का अपराधी था, जिसने कई वारदातों को अंजाम दिया था. पुलिस काफी टाइम से उसे तलाश रही थी. बीती रात पुलिस/एसओजी टीम से उसकी मुठभेड़ हो गई जिसमें वह मारा गया. जानकारी के मुताबिक, 24 अप्रैल को गोंडा के बेगमगंज में चोरी की वारदात के दौरान एक शख्स की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में पुलिस सोनू की सरगर्मी से तलाश कर रही थी. बीती रात सोनू से पुलिस की मुठभेड़ बेगमगंज थाना क्षेत्र में हुई. गोली लगते ही सोनू जमीन पर गिर गया, जिसपर पुलिस उसे अस्पताल ले गई, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने उसके पास से तमंचा और कारतूस बरामद किया है. एनकाउंटर के दौरान जिन SHO की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी है, उनका नाम है नरेंद्र राय है. बदमाश की गोली से नरेंद्र राय बाल-बाल बच गए. बाकी पुलिसकर्मी भी सुरक्षित हैं. फिलहाल, सोनू उर्फ भुर्रे के परिजनों को सूचित कर दिया गया है. अब पोस्टमार्टम की कार्यवाही की जाएगी, फिर शव परिजनों को सौंपा जाएगा.   recent visitors 55

छगन भुजबल ने महाराष्ट्र मंत्री पद की शपथ ली, सीएम फडणवीस, डिप्टी सीएम शिंदे और अजित पवार उपस्थित थे

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पांच महीने पुराने राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. उन्होंने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार की उपस्थिति में शपथ ली. शपथ के दौरान मजेदार वाकया हुआ. शपथ से पहले सभी ने उनको गुलदस्ता दे कर अभिनंदन किया, मगर जैसे ही उनके पास अजित पवार पहुंचे तो सभी लोग हंसने लगे. बता दें कि सीएम फडणवीस ने अपने 5 महीने पुराने कैबिनेट का विस्तार किया है. पिछले साल दिसंबर में उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी. मगर, सोमवार को विस्तार के दौरान उनको शामिल किया गया. सोमवार रात को ही भुजबल ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार, 20 मई को फडणवीस सरकार की कैबिनेट की शपथ लेंगे. आज सुबह उन्होंने राजभवन में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली.    भुजबल ने पहले ही बता दिया था सोमवार को देर जानकारी देते हुए भुजबल ने कहा था, ‘उन्हें मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. मुझे सूचित किया गया है कि मुझे राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह 10 बजे होगा.’ भाजपा ने पुष्टि कर दी थी वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व कर रही भाजपा के सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी. राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरे भुजबल (77) को पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्री फडणवीस के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था. राकांपा के एक वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने मार्च में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद संभावित रूप से भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है. ताकतवर ओबीसी नेता छगन भुजबल का राजनीतिक कद महाराष्ट्र में किसी से छिपा नहीं है. वे न केवल येवला से विधायक हैं, बल्कि ओबीसी समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. उनके समर्थक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार ने उनकी नाराजगी को दूर करने और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है. निकाय चुनावों से पहले की चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भुजबल का मंत्रिमंडल में शामिल होना एनसीपी और गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है. खासकर, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है. भुजबल के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभाग मिलने की भी संभावना जताई जा रही है. recent visitors 49

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा हडको की प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण के प्रयासों में यह सहभागिता महत्वपूर्ण सिद्ध होगी

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कटिबद्ध है। इसके लिए सभी आवश्यक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से मंत्रालय में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ ने सौजन्य भेंट की। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, वर्तमान में संचालित अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों की अधोसंरचना के उन्नयन और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। हडको चेयरमैन कुलश्रेष्ठ ने इन परियोजनाओं के लिए ऋण सहायता प्रदान करने एवं तकनीकी परामर्श देने की इच्छा व्यक्त की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हडको की प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण के प्रयासों में यह सहभागिता महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इस अवसर प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी सहित हडको के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 33