जल्द ही 20 रुपये के नए नोट जारी करेगा आरबीआई, इन नोटों पर नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम घोषणा की है। आरबीआई जल्द ही 20 रुपये के नए नोट जारी करेगा। खास बात यह है कि इन नोटों पर नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे। हालांकि आम जनता को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि पहले से प्रचलन में मौजूद 20 रुपये के सभी नोट पहले की तरह चलन में बने रहेंगे। कैसा होगा नया नोट? आरबीआई ने साफ किया है कि नए 20 रुपये के नोट महात्मा गांधी (नई) सीरीज के ही होंगे। इनका डिजाइन भी मौजूदा 20 रुपये के नोट जैसा ही रहेगा। केवल एक बदलाव होगा — नोटों पर अब गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे। पुराने नोटों का क्या होगा? कई लोगों को यह चिंता हो सकती है कि क्या पुराने 20 रुपये के नोट चलन से बाहर हो जाएंगे? इस पर आरबीआई ने स्थिति साफ कर दी है। आरबीआई ने कहा है कि पहले जारी किए गए 20 रुपये के सभी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे। इसका मतलब है कि आप पुराने नोटों से पहले की तरह खरीदारी कर सकते हैं और उन्हें कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गवर्नर के बदलाव पर होती है यह प्रक्रिया नए गवर्नर के कार्यभार संभालने के बाद नए हस्ताक्षरों के साथ नोट जारी करना एक सामान्य प्रक्रिया है। इससे बाजार में मौजूद पुराने नोटों पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही यह किसी नोट को अमान्य बनाता है। recent visitors 49

जूनियर एनटीआर के जन्मदिन पर नहीं जारी होगा एनटीआर-नील से जुड़ा अपडेट

मुंबई, मैन ऑफ मासेस जूनियर एनटीआर के जन्मदिन 20 मई को उनकी आने वाली फिल्म एनटीआर-नील से जुड़ा अपडेट नहीं जारी होगा। जूनियर एनटीआर के जन्मदिन 20 मई के अवसर पर उनके प्रशंसकों को फिल्म ‘वॉर 2’ को लेकर एक बड़ा तोहफा मिलने वाला है। ऐसी उम्मीद है कि मेकर्स इस फिल्म का टीजर जूनियर एनटीआर के जन्मदिन पर जारी कर सकते हैं। जिसको लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। ऋतिक रोशन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर खुलासा किया था कि वह एनटीआर जूनियर के जन्मदिन 20 मई के मौके पर ‘वॉर 2’ के जरिए एक धमाकेदार सरप्राइज़ देने वाले हैं।ऋतिक ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था, हे एनटीआर, लगता है तुम्हें पता है 20 मई को क्या होने वाला है? यकीन मानो, तुम्हें बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं है कि क्या आने वाला है। तैयार हो। एनटीआर के फैंस ‘वॉर 2’ के साथ-साथ उनकी एक और अनटाइटल्ड फिल्म के अपडेट का भी इंतजार कर रहे थे। इस फिल्म को अभी एनटीआर-नील के नाम से जाना जा रहा है। एनटीआर-नील की टीम ने ‘वॉर 2’ को देखते हुए फैसला किया है कि वो फिल्म को लेकर कोई नई अपडेट साझा नहीं करेंगे। एनटीआर-नील के निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर फैंस के लिए एक पोस्ट साझा किया है। इस पोस्ट में मेकर्स ने लिखा, “फैंस हम जानते हैं कि आप उस व्यक्ति का जश्न मनाने के लिए कितने उत्सुक हैं जिसने हमें खुश होने के अनगिनत कारण दिए हैं। ‘वॉर 2’ के कंटेंट के रिलीज होने के साथ, हमने महसूस किया कि इसे पूरा मौका देना चाहिए। इसलिए एनटीआर-नील मास फिल्म की झलक को बाद के लिए बचाकर रखना सबसे अच्छा है। हम इस साल के जन्मदिन का जश्न पूरी तरह से ‘वॉर 2’ के साथ मना रहे हैं।”   recent visitors 63

सेरामिक इंजीनियरिंग में बनाएं करियर

साधारण-सी मिट्टी से अत्याधुनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने की तकनीक ही सेरामिक इंजीनियरिंग के नाम से जानी जाती है। पुरानी दुनिया के कच्ची मिट्टी के बर्तनों की अगली पीढ़ी के रूप में आए थे सेरामिक वेयर। चिकनी मिट्टी के बर्तनों परग्लेजिंग की परत चढ़ाने से शुरू हुई परंपरा सिलिका और जिरकोनिया जैसी अधातुओं के अत्याधुनिक उपयोग तक आ पहुंची है। सुबह की चाय की प्याली के साथ शुरू होता है सेरामिक के साथ हमारा सफर। आज सेरामिक वस्तुएं हमारी चाय-कॉफी की प्याली से आगे बढ़कर ऑटोमोबाइल और स्पेस से लेकर मेडिकल इप्लाइंट तक में छा गई हैं। सेरामिक इंजीनियरिंग के तहत औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नए-नए सेरामिक मेटीरियल्स का विकास किया जाता है। किचन वेयर, कंक्रीट तथा टाइल्स जैसे ट्रेडिशनल सेरामिक उपयोग अब पुराने पड़ चुके हैं। सूचना क्रांति के इस दौर में गोल्फ के मैदान से लेकर अंतरिक्ष तक सेरामिक वस्तुओं का उपयोग हो रहा है। फाइबर ऑप्टिस, बायोसेरामिस, तापरोधी टाइल्स और इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक्स आज के दौर में सेरामिक इंडस्ट्री का नया चेहरा हैं। वर्तमान में सेरामिक इंजीनियर का काम उन्नत प्रोसेसिंग तकनीक की सहायता से असाधारण मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक और ऑप्टिकल क्षमताओं से भरपूर मेटीरियल्स डेवलप करना है। सेरामिक इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स:- साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करने के बाद इस कोर्स को किया जा सकता है। सेरामिक की पढ़ाई में दिलचस्पी रखने वाले स्टूरडेंट 4 वर्षीय बीटेक यी बीई कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। आईआईटी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों में भी एंट्रेंस एग्जाम के मदद से इस कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। इस क्षेत्र में एमटेक की भी डिग्री हासिल की जा सकती है। इसमें डिप्लोमा कोर्स भी चलाए जाते हैं। कहां मिलेगी नौकरी:- सेरामिक इंजीनियरिंग में कोर्स करने के बाद इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग और सेरामिक पदार्थों का उत्पामदन करने वाली कंपनियों में जॉब मिल सकती है। क्या बनेंगे आप… -प्रोजेक्ट सुपरवाइजर -टेक्निकल कंसल्टेंट -सेल्स और मार्केटिंग इंजीनयर -सेरामिक एक्सपर्ट -सेरामिक शिक्षक कहां से करें पढ़ाई… -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरामिक्स, कोलकाता -नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राउरकेला -बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी -गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड सेरामिक टेक्नोलॉजी, कोलकाता     recent visitors 65

किसी को भी हो सकती है आंखों की बीमारी काला मोतिया

चालीस वर्षीय संतोष पिछले कुछ दिनों से इस बात से परेशान हैं कि बार-बार उनके चश्मे का नंबर बदल रहा है। साथ ही उन्हें अंधेरे में बहुत कम दिखाई देता है। उन्होंने तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क किया। विभिन्न परीक्षणों से इस बात की पुष्टि हुई कि उन्हें ग्लूकोमा है। डॉक्टर ने बताया चूंकि उनका रोग अभी पहले चरण में ही है इसलिए दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।   ग्लूकोमा या काला मोतिया आंखों की एक ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी के विषय में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इससे ग्रस्त ज्यादातर लोग इस बात को नहीं जानते कि उन्हें ग्लूकोमा है क्योंकि इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते इसलिए मरीज को तभी चल पाता है जबकि उसकी आंखों की दृष्टि क्षमता का ह्रास शुरू हो चुका होता है। इलाज शुरू होने के बाद भी नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती। सही इलाज के द्वारा केवल आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।   आक्वेयस हयमर एक तरल पदार्थ है जो हर वक्त हमारी आंखों में बहता रहता है। यह तरल पदार्थ हमारी आंखों के लैंस, आयरिस तथा कार्निया को पोषण देता है। इस तरल पदार्थ को प्रवाहित करने वाले नाजुक जाल में यदि कोई रुकावट आ जाती है या उसे सही जगह तक ले जाने वाली नस में कोई रुकावट उत्पन्न हो जाती है तो आईओपी अर्थात इंट्रा आक्सुलर प्रेशर (आंखों में दबाव) इतना बढ़ जाता है कि आप्टिक नर्व को रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिनी को नुकसान पहुंचने लगता है। यदि इसका जल्द से जल्द इलाज न किया जाए तो आइओपी के कारण आप्टिक नर्व को बहुत नुकसान पहुंचता है जिस कारण दिमाग से आंखों का सम्पर्क खत्म हो जाता है और व्यक्ति पूरी तरह अंधा हो जाता है। आप्टिक नर्व में हुए नुकसान की पुनः भरपाई संभव नहीं होती।   ग्लूकोमा बहुत हद तक अनुवांशिक भी होता है। लघु दृष्टि दोष अर्थात् मायोपिया एवं मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को भी ग्लूकोमा होने की आशंका ज्यादा होती है। वे लोग जिनकी आंखों में आंतरिक दबाव असामान्य रूप से बहुत अधिक हों उन्हें भी यह बीमारी होने की पूरी-पूरी संभावना होती है। वे लोग जो लंबे समय से स्टीरायड या कोर्टिजोन का उपयोग कर रहे हों उन्हें भी ग्लूकोमा होने की संभावना होती है। आंखों में किसी प्रकार की चोट लगने के कारण भी यह रोग हो सकता है।   समय रहते ग्लूकोमा को पकड़ने के लिए जरूरी है कि साल में कम से कम एक बार आंख की जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। इसके कई ऐसे अप्रत्यक्ष लक्षण होते हैं जिन पर ध्यान दिया जाए तो ग्लूकोमा पर जल्दी नियंत्रण किया जा सकता है जैसे अंधेरे में कम दिखना, चश्मे का नबंर बार-बार बदलना या प्रकाश के चारों ओर इन्द्रधनुषी मंडल दिखना।   मरीज को ग्लूकोमा है यह जानने के बाद डॉक्टर कई प्रकार की जांचों के द्वारा ग्लूकोमा के प्रकार तथा उससे हुई दृष्टि क्षमता की क्षति का पता लगाते हैं। टोनोमेट्री टैस्ट आंखों में इंट्रा आक्युलर प्रेशर जांचने के लिए किया जाता है। आप्थल्मोस्कोपी टैस्ट आप्टिक नर्व में होने वाली हानि को जांचने के लिए किया जाता है। प्रत्येक आंख की दृष्टि क्षेत्र का परीक्षण करने के लिए पेरिमेट्री टैस्ट किया जाता है। एक अन्य टैस्ट गोनियोस्कोपी के द्वारा आंखों के ड्रेनेज एंगल का निरीक्षण किया जाता है।   ग्लूकोमा के इलाज के लिए दवाई, लेजर तथा सर्जरी का सहारा लिया जाता है। यदि प्रारंभिक अवस्था में ही इसका पता लग जाए तो दवाई द्वारा इसका उपचार किया जाता है। बाद में डॉक्टर ग्लूकोमा के प्रकार तथा उसके कारण हुई दृष्टिक्षमता की हानि को ध्यान में रखकर लेजर या सर्जरी की सलाह देते हैं।   ग्लूकोमा के सही इलाज के लिए जरूरी है कि किसी विशेषज्ञ से इसका इलाज करवाएं। सबसे जरूरी है कि दवा से संबंधित डॉक्टरी निर्देशों का ध्यानपूर्वक पालन करें। दवा की मात्रा को कभी खुद ही कम या ज्यादा नहीं करें। चूंकि इस रोग से पूर्ण मुक्ति संभव नहीं है इसलिए आंखों की नियमित जांच कराना बहुत जरूरी है इसमें लापरवाही आंखों के लिए घातक हो सकती है।   recent visitors 64

जी सिने अवॉर्ड्स 2025 में शर्वरी को मिला ‘आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस’ अवॉर्ड

  मुंबई, अभिनेत्री शर्वरी को जी सिने अवॉर्ड्स 2025 में 'आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस' अवॉर्ड दिया गया है। शर्वरी ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वर्ष 2024 में जहां उन्होंने मुंजा जैसी 100 करोड़ की ब्लॉकबस्टर फिल्म दी, वहीं वेदा और 'महाराज' जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीता। अब जी सिने अवॉर्ड्स 2025 में उन्हें मुंजा और वेदा में शानदार अभिनय के लिए 'आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस बाय अ यंग टैलेंट' के अवॉर्ड से नवाज़ा गया है। शर्वरी ने अवॉर्ड जीतने के बाद कहा, वर्ष 2024 मेरे करियर का सबसे खास साल रहा है। इस साल मुझे जितनी भी शानदार फिल्में और किरदार मिले, वो मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है। दर्शकों से मिले प्यार ने मुझे इस इंडस्ट्री में पहचान दिलाई है और ये अवॉर्ड भी उन्हीं को समर्पित है। शर्वरी ने अपनी फिल्मों के निर्माता और निर्देशक का भी आभार जताया। उन्होंने कहा, “मैं दिनेश विजन, आदित्य सर्पोतदार, निखिल आडवाणी, मोनीषा, मधु, आदित्य चोपड़ा और सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा सर की बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास जताया और मुझे ये मौके दिए।” शर्वरी फिलहाल यशराज फिल्मस की स्पाई यूनिवर्स की अगली फिल्म 'अल्फा' की शूटिंग में व्यस्त हैं, जिसमें वह सुपरस्टार आलिया भट्ट के साथ नज़र आएंगी। इस फिल्म का निर्देशन ‘द रेलवे मेन’ फेम शिव रवैल कर रहे हैं। यह फिल्म 25 दिसंबर 2025 को रिलीज़ होगी।   recent visitors 59

हैदराबाद अग्निकांड पर मुख्यमंत्री साय ने व्यक्त किया गहरा दुख

रायपुर हैदराबाद के चारमीनार के पास स्थित गुलजार हौज इलाके में रविवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मृतकों के प्रति संवेदना और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, हैदराबाद के चारमीनार के निकट हुए भीषण अग्निकांड में 17 लोगों की असमायिक मृत्यु और कई लोगों के घायल होने का हृदयविदारक समाचार प्राप्त हुआ है। मैं उन सभी दिवंगत आत्माओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। साथ ही इस हादसे में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। बता दें कि यह हादसा गुलजार हौज इलाके में एक रिहायशी और व्यावसायिक उपयोग वाली इमारत में हुआ, जहां आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में आठ बच्चे और पांच महिलाएं भी शामिल हैं। यह हादसा हाल के वर्षों में हैदराबाद की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जा रहा है। recent visitors 41

मिशन इम्पॉसिबल द फाइनल रेकनिंग 8 के फैन हुए राम गोपाल वर्मा, बॉलीवुड निर्माताओं को दिखाया आईना!

नई दिल्ली हॉलीवुड एक्टर टॉम क्रूज की फ्रेंचाइजी फिल्म मिशन इम्पॉसिबल द फाइनल रेकनिंग ने 17 मई को भारत के सिनेमाघरों में दस्तक दी। ओपनिंग डे कलेक्शन से साफ हो गया कि 62 वर्ष के सुपरस्टार की फिल्मों को दुनियाभर में पसंद किया जाता है। क्रिटिक्स से बेहतर प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब पॉपुलर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने फिल्म को लेकर अपनी राय दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने बता दिया कि भारत और विदेश के निर्माताओं के बीच क्या अंतर होता है। मिशन इम्पॉसिबल द फाइनल रेकनिंग में टॉम क्रूज एजेंट इथेन हंट के किरदार में नजर आए। एक्शन से भरपूर इस फ्रेंचाइजी की यह आखिरी फिल्म है। इस वजह से दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर ज्यादा क्रेज देखने को मिल रहा है। भारत में मिशन इम्पॉसिबल 8 (Mission Impossible 8) ने 18.50 करोड़ की ग्रॉस कमाई की। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के हिसाब से किसी भी फिल्म की सफलता का अंदाजा लगाया जाता है। यही कारण है कि फिल्म भारत में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली हॉलीवुड मूवीज की लिस्ट में आठवें स्थान पर आई है। मिशन इम्पॉसिबल पर क्या बोल गए राम गोपाल वर्मा? मशहूर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने टॉम क्रूज की हालिया रिलीज फिल्म की तारीफ की है। इस मूवी को देखने के बाद उन्होंने एक्स हैंडल पर एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, उनके और हमारे बीच में इसी चीज का अंतर है। वे दर्शकों को समझदार और बुद्धिमान मानते हैं और मिशन इम्पॉसिबल द फाइनल रेकनिंग फिल्मों को बनाकर उनकी समझ का स्टैंडर्ड बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन हम ऑडियंस को बेवकूफ समझते हैं और उनको ऐसी फिल्में बनाकर देते हैं। डायरेक्टर ने किसी फिल्म का नाम नहीं लिया और लोगों को खुद सोचने का मौका दिया कि वह किनकी मूवीज की बात कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स भी राम गोपाल वर्मा की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। कुछ लोगों ने तो राम गोपाल की फिल्मों का नाम ही लेना शुरू कर दिया। वहीं, कुछ लोग राम गोपाल वर्मा की बात से असहमत भी थे। recent visitors 49