आम आदमी पार्टी को दिल्ली में बड़ा झटका लगा, पार्टी के 13 निगम पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी को दिल्ली में बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 13 निगम पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। इन सभी ने नई पार्टी बनाने की घोषणा भी की है। पार्षदों ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर नगर निगम को ठीक से ना चला पाने का आरोप लगाया है। इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा है क जनता से किए गए वादे को पूरा न कर पाने के कारण हम पार्टी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। नई पार्टी का ऐलान पार्षदों ने नई पार्टी का ऐलान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का नाम इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी होगा और मुकेश गोयल को पार्टी का मुखिया चुना गया है। पार्षदों ने बताया कि हम सभी निगम पार्षद दिल्ली नगर निगम में वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी की टिकिट से चुने गए थे लेकिन 2022 में दिल्ली नगर निगम में सत्ता में आने के बावजूद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली नगर निगम को सुचारू रूप से चलाने में असमर्थ रहा। शीर्ष नेतृत्व का निगम पार्षदों से आपस में समन्वय न के बराबर रहा जिसके कारण पार्टी विपक्ष में आ गई। जनता से किए गए वादे को पूरा न कर पाने के कारण हम निम्नलिखित पार्षद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, हम निगम पार्षद आज दिनांक 17-5-2025 को अपनी एक पार्टी बना रहे हैं जिसका नाम इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी होगा और उसके द्वारा लिए गए फैसलों पर पूर्ण सहमत्ति व्यक्त करते हैं। हम सभी मुकेश गोयल जी को अपने दल का नेता स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि आज हेमवंद गोयल जी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें 13 निगम पार्षदों ने मुकेश गोयल जी को इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का नेता चुना गया। इन 13 पार्षदों ने छोड़ी पार्टी जिन 13 पार्षदों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया उनमें मुकेश गोयल, हिमानी जैन, देवेंद्र कुमार, राजेश कुमार लाडी, सुमन अनिल राणा और दिनेश भारद्वाज शामिल हैं। recent visitors 57

शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर साधा निशाना, कहा- हिंदुत्व छोडकर नरक में गिरे

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत की लिखी पुस्तक के विमोचन से पहले पार्टी पर निशाना साधते हुए सत्ता के लिए दिवंगत बाल ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को त्यागने का आरोप लगाया है। राउत की किताब “नरकतला स्वर्ग” (नरक में स्वर्ग) का शनिवार शाम को मुंबई में विमोचन किया जाएगा। शिंदे ने रात ठाणे में संवाददाताओं से कहा, “अगर वे बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों के प्रति वफादार रहे होते, तो वे नरक में नहीं गिरते और आज ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचते जहां वे अब स्वर्ग की तलाश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे हिंदुत्व की विचारधारा में पूरी तरह से निहित थे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेताओं के प्रति उनके मन में अपार सम्मान था। उन्होंने कहा, “बालासाहेब ने गुजरात और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता और काम को पहचाना था। ठाकरे की दूरदर्शिता ने मोदी-शाह को हिंदुत्व के सही पथप्रदर्शक के रूप में पहचाना।” उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि जो लोग अब कांग्रेस के साथ जुड़ गए हैं और बालासाहेब के आदर्शों को त्याग दिया है, वे उनके फैसलों के पीछे के कारणों को कभी नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने कहा, "वे उनकी विरासत से बहुत दूर चले गए हैं।" साल 2022 में शिंदे के विद्रोह से शिवसेना विभाजित हो गई थी, जिसके बाद ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।   recent visitors 53

TASS की रिपोर्ट: शांति वार्ता के बाद रूस ने तेज कर दिए हमले, यात्रियों पर गिरा दिया बम, 9 की मौत

रूस तुर्किए में शांति वार्ता के एक दिन बाद ही रूस ने यूक्रेन में कई जगहों पर हमला कर दिया। TASS की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सेना ने यूक्रेन की सैन्य छावनी को निशाना बनाया। यहां यूक्रेन की सेना हथियार रखती थी। इस हमले में कितना नुकसान हुआ इसकी खबर नहीं मिली है। वहीं एक यात्री बस पर रूस ने ड्रोन अटैक कर दिया। बस में हुए धमाके में कम से कम 9 लोगों के मारे जाने की खबर है। यूक्रेन की पुलिस ने कहा कि इस तरह से मासूम लोगों की जान लेना वॉर क्राइम है। बता दें कि शुक्रवार को तुर्किए में यूक्रेन और रूस का प्रतिनिधिमंडल मिला था। दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर कोई बात नहीं बन पाई। यूक्रेन और रूस के बीच 1000 बंदियों की रिहाई पर सहमित जरूर बनी है। पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर पुतिन तुर्किए में मुलाकात करने वाले थे। हालांकि ऐन समय से पहले पुतिन ने प्लान बदल दिया। यूक्रेन में सूमी सैन्य छावनी के चीफ ने कहा कि रूसी हमले के बाद राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है। यूक्रेन पुलिस ने क्षतिग्रस्त हुई बस की तस्वीर भी शेयर की। इसमें देखा गया कि बस का ऊपरी हिस्सा उड़ गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ही देश एक दूसरे के आम नागरिकों को निशाना बनाने से चूकते नहीं हैं। वहीं शांति वार्ता के दौरान यूक्रेन चाहता था कि रूस युद्धविराम पर राजी हो। रूस युद्धविराम को लेकर शर्त रख रहा था कि अगर यूक्रेन विवादित इलाकों से अपनी सेना को हटा ले तो युद्धविराम को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है। माना जा रहा था कि डोनाल्ड ट्रंप भी पुतिन और जेलेंस्की के साथ बैठकर शांति वार्ता को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि एक-एक करके सबने अपने हाथ पीछे खींच लिए। अंत में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ही वार्ता हो सकी जो कि बेनतीजा रही। recent visitors 49

व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने 11 लोगों को पाया दोषी, आरोपियों को सुनाई 3-3 साल की सजा, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शुक्रवार को भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एमपी पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से सिलेक्ट होने वाले 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत ने सभी को तीन-तीन साल जेल और 16-16 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।    फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। फैसला सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी।  फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई अधिकारी और नेताओं पर इसकी आंच आई थी। कोर्ट का फैसला मामले का खुलासा होने पर राजधानी के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसपर अब सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की कि, शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी। याद हो कि, व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद कई अधिकारियों के साथ-साथ नेताओं तक पर इसकी जांच की आंच आई थी।   recent visitors 37

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर दी हार्दिक बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर, रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, विद्वता और करुणा का अनुपम संगम है। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद ज्ञान, संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संवर्धन हेतु जो कार्य किया है, वह समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सम्मान वास्तव में उस सनातन चेतना का सम्मान है, जो भारत की आत्मा में प्रवाहित होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जगद्गुरु जी ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है। वे तुलसीपीठ, चित्रकूट के अधिष्ठाता हैं और शिक्षा, दिव्यांगजन सेवा व धर्म के क्षेत्र में अनेक संस्थाओं के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।   recent visitors 37

बच्चा होने के 7 महीने बाद विधवा महिला ने लिखाई दुष्कर्म की रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने किया खारिज

जबलपुर  बच्चा पैदा होने के सात महीने बाद विधवा महिला द्वारा युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया. इस मामले को हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने खारिज कर दिया. मामले में जो तथ्य सामने आए उन्हें ध्यान में रखते हुए एफआईआर को निरस्त करने के आदेश दिए गए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भौतिक परिस्थितियों पर विचार करते हुए ऐसा नहीं माना जा सकता है कि दोनों के बीच विवाह के झूठे वादे के आधार पर संबंध बने थे. दोनों पति-पत्नी की रहते थे और एक बच्चे को जन्म दिया है. भरण-पोषण व अन्य राहत का दावा करने के लिए महिला उचित कार्यवाही कर सकती है. पति की मौत के बाद बने संबंध दरअसल, जबलपुर निवासी आवेदक की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि महिला की शिकायत पर अधारताल थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता महिला की आयु 32 साल है और उसके पति की मृत्यु साल 2021 में हो गई थी. पति का दोस्त होने के कारण आवेदक का महिला के घर में आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत होने लगी. पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद मई 2021 में दोनों ने शादी करने का फैसला किया और इस तरह दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे. शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि इस संबंध से वह गर्भवती हो गई और उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन आवेदक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर आवेदक पिछले तीन वर्षों से उसका शारीरिक शोषण कर रहा है. लंबे समय तक सहमति से बने संबंध, ये दुष्कर्म नहीं महिला की शिकायत पर आवेदक युवक की ओर से तर्क दिया गया कि उसने कभी शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया. उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे. कोर्ट में तर्क दिया गया कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों. दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे. इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है. हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीमकोर्ट का हवाला एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है. ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. ऐसे आरोप पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण हो सकते हैं. इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है. एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को आगे स्वतंत्रता प्रदान की है, कि वह जीवन यापन भत्ते आदि के लिए अपना पक्ष रख सकती है. क्या है मामला जबलपुर निवासी वीरेंद्र वर्मा ने उसके ऊपर दर्ज हुए केस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। उसने बताया कि अधारताल थाने में उसके खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज की गई है। याचिका में कहा गया था कि एफआईआर के अनुसार शिकायत करने वाली महिला की आयु 32 साल है। उसके पति की साल 2021 में मृत्यु हो गयी थी। पति का दोस्त होने के कारण आवेदन का महिला के घर आना जाना था और मोबाइल पर बातचीत प्रारंभ हो गयी। सहमति से साथ रहने का लिया फैसला पति की मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद आवेदन के उसके समक्ष शादी का प्रस्ताव भी रखा। दोनों ने सहमति से मई 2021 में शादी करने का निर्णय लिया था। इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए। दोनों पति-पत्नी की तरह लंबे समय तक साथ रहे और इस दौरान एक बच्चे का जन्म हुआ, जो लगभग सात माह का है। लेकिन आवेदक ने शादी करने से इनकार कर दिया। महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झूठा आश्वासन देकर कई सालों से उसका शारीरिक शोषण करता रहा। महिला ने दर्ज कराई एफआईआर शिकायतकर्ता महिला ने शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ जनवरी 2025 में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने शादी का कोई झूठा वादा नहीं किया। उसने बताया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से वर्षों तक संबंध स्थापित रहे। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट है कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक या दो बार शारीरिक संबंध विकसित हुए हों। दोनों के बीच संबंध कई वर्षों तक जारी रहे। इतने लंबे समय के बाद अगर ऐसी शिकायत दर्ज की जाती है, तो वह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने इस तर्क से खारिज की याचिका एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा तथ्यात्मक परिस्थितियों के आधार पर संबंध को विवाह के झूठे वादे पर विकसित होना नहीं माना जा सकता है। ऐसे आरोपों को कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है। पक्षों के बीच संबंधों में कड़वाहट के कारण ऐसा हो सकते हैं। इस तरह बिना किसी ठोस सबूत के आपराधिक अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने एफआईआर को निरस्त करते हुए महिला को उक्त स्वतंत्रता प्रदान की है। recent visitors 58

मर चुकी मां के गर्भ में पल रहा भ्रूण, उसका भ्रूण 21 सप्ताह का है, 3 महीने बाद लेगा जन्म!

वाशिंगटन एक 30 वर्षीय महिला, जिसे फरवरी में मस्तिष्क मृत (ब्रेन-डेड) घोषित कर दिया गया था, को  अमेरिकी राज्य जॉर्जिया के कड़े गर्भपात विरोधी कानूनों के चलते अब भी जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। उसका भ्रूण 21 सप्ताह का है, और डॉक्टर चाहते हैं कि वह गर्भावस्था की पूरी अवधि (कम से कम 3 महीने और) पूरी करे, ताकि शिशु का जन्म संभव हो सके। एड्रियाना स्मिथ नाम की इस महिला के परिवार का कहना है कि अस्पताल ने उन्हें बताया कि जब तक भ्रूण के दिल की धड़कन चालू है, तब तक जॉर्जिया कानून के तहत गर्भपात या जीवन रक्षक प्रणाली को बंद करना गैरकानूनी है। स्मिथ की मां एप्रिल न्यूकिर्क ने बताया कि उनकी बेटी को फरवरी में सिरदर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां जांच में मस्तिष्क में खून के थक्के पाए गए। बाद में डॉक्टरों ने उसे 'ब्रेन-डेड' घोषित कर दिया।  एप्रिल न्यूकिर्क ने मीडिया से कहा, "मेरी बेटी अब कानूनी रूप से जीवित नहीं है, लेकिन मशीनें उसे जीवित दिखा रही हैं ताकि भ्रूण विकसित हो सके।" उन्होंने चिंता जताई कि डॉक्टरों के अनुसार भ्रूण के मस्तिष्क में तरल पदार्थ है और वह जन्म के बाद जीवित नहीं भी रह सकता। फिलाडेल्फिया के थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी में मातृ-भ्रूण चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. विन्सेन्ज़ो बर्घेला ने कहा, “यह मामला नैतिक और चिकित्सकीय रूप से बेहद जटिल है।” यह उन चुनौतियों को उजागर करता है जो कड़े गर्भपात कानूनों और परिवार की इच्छा के बीच टकराव में उत्पन्न होती हैं।   एमोरी यूनिवर्सिटी अस्पताल ने इस पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी देने से इनकार करते हुए कहा कि वह हमेशा राज्य कानूनों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर कार्य करता है। “हमारी प्राथमिकता मरीजों की सुरक्षा और भलाई है,” अस्पताल ने एक बयान में कहा।परिवार को इस बात की चिंता है कि बच्चा जन्म के बाद जीवित रह पाएगा या नहीं। न्यूकिर्क ने कहा, "वह अंधा हो सकता है, विकलांग हो सकता है या जन्म के बाद मर सकता है।" हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या परिवार एड्रियाना को जीवन रक्षक प्रणाली से हटाना चाहता है। recent visitors 50