भजनलाल सरकार बड़ा फैसला, 11वीं से लेकर पीएचडी करने तक देगी प्रोत्साहन राशि

जयपुर राजस्थान में ग्रामीण और शहरी अंचल की आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की ऐसी छात्राएं जो दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ग्यारहवीं कक्षा में कृषि विषय लेना चाहती हैं और कृषि विषय में ही उच्च अध्ययन करना चाहती हैं उन्हें यह प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 तक होगी। कितनी होगी प्रोत्साहन राशि? कृषि विषय लेकर सीनियर सैकंडरी में अध्ययनरत छात्राओं को 15 हजार रुपये प्रतिवर्ष 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए दी जाएगी। इसके तहत  उद्यानिकी, डेयरी, कृषि अभियांत्रिकी, खाद्य प्रसंस्करण में कृषि स्नातक में अध्ययनरत छात्राओं को 25 हजार रुपये प्रतिवर्ष 4 वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए एवं श्री कर्ण नरेन्द्र व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय, जोबनेर में बीएससी कृषि एवं एग्री बिजनेस में अध्ययनरत् छात्राओं को 25 हजार प्रति वर्ष या 5 वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए,  एमएससी कृषि में अध्ययनरत छात्राओं को 25 हजार प्रतिवर्ष 2 साल के लिए और कृषि विषय में पीएचडी में अध्ययनरत छात्राओं को 40 हजार रूपए प्रति वर्ष अधिकतम 3 वर्ष के लिए प्रदान किए जाएंगे। क्या होगी पात्रता?    राजस्थान की मूल निवासी ऐसी छात्राएं जो राजकीय एवं राज्य सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं। आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में मूल निवास प्रमाण पत्र, गत वर्ष की अंकतालिका प्रस्तुत करनी होगी। कैसे करें आवेदन? योजनान्तर्गत प्रोत्साहन राशि के लिए पात्र छात्राओं को ई-मित्र के माध्यम से या स्वयं की एसएसओ आईडी से राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन स्वयं या नजदीकी ई-मित्र केन्द्र पर जाकर आवेदन करना होगा। संबंधित कृषि अधिकारी  की ओर से ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की जांच कर ई-साइन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए संबंधित स्कूल, कॉलेज अथवा यूनिवर्सिटी के संस्था प्रधान को अग्रेषित किया जाएगा। संस्था प्रधान जारी करेंगे ई-साइन सर्टिफिकेट? राज किसान साथी पोर्टल पर पंजीकरण के बाद संबंधित संस्था प्रधान की ओर से आवेदनों की जांच कर ई-साइन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा । इसमें बताया जाएगा कि छात्रा किस कक्षा में अध्ययनरत् है। साथ ही, संस्था प्रधान की ओर से यह भी सर्टिफाई किया जाएगा कि छात्रा ने पुनः उसी कक्षा में प्रवेश नहीं लिया है और वह अनुत्तीर्ण नहीं हुई है। छात्राओं के गलत आवेदनों पर ई-साइन सर्टिफिकेट जारी होने पर जिम्मेदारी संस्था प्रधान की होगी। संस्था प्रधान की ओर से जारी ई-साइन सर्टिफिकेट की जांच के बाद वित्तीय स्वीकृति संयुक्त निदेशक (कृषि विस्तार) जिला परिषद देंगे। छात्राओं की ओर से जिस वित्तीय वर्ष प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन किया गया है, संस्था प्रधान की ओर से उसी वित्तीय वर्ष में ई-साइन सर्टिफिकेट जारी नहीं होने पर प्रोत्साहन राशि देय नहीं होगी। इन्हें नहीं मिलेगा लाभ? गत वर्ष में अनुत्तीर्ण छात्राएं जिन्होंने पुनः उसी कक्षा में प्रवेश लिया हो, श्रेणी सुधार के लिए उसी कक्षा में पुनः प्रवेश लेने वाली छात्राएं, सत्र के मध्य विद्यालय, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय छोड़कर जाने वाली छात्राएं प्रोत्साहन राशि का लाभ नहीं उठा सकेंगी। recent visitors 45

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के साथ चर्चा करने की अपनी इच्छा जताई

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित कर दिया था. इसके कुछ सप्ताह बाद पाकिस्तान ने संधि को लेकर भारत के साथ चर्चा करने की अपनी इच्छा जताई है. सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी. सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने संधि के निलंबन पर भारत सरकार की औपचारिक अधिसूचना पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भारतीय जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी को लिखे पत्र में नई दिल्ली द्वारा उठाई गई स्पेसिफिक आपत्तियों पर चर्चा करने के लिए अपनी सरकार की तत्परता व्यक्त की. भारत अपने फैसले पर अडिग उन्होंने भारत के इस कदम के कानूनी पहलुओं पर भी सवाल उठाया और कहा कि संधि में कोई एग्जिट क्लॉज नहीं है. हालांकि, भारत सरकार अपने फैसले पर अभी भी अडिग है.संपर्क किए जाने पर जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने इस घटनाक्रम पर आधिकारिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की स्थिति में बदलाव की संभावना नहीं है. सूत्रों ने दोहराया कि संधि को निलंबित करने का निर्णय जम्मू कश्मीर को निशाना बनाकर जारी सीमा पार आतंकवाद के कारण लिया गया था. इससे पहले 24 अप्रैल को लिखे पत्र में मुखर्जी ने मुर्तजा को सूचित किया था कि संधि के तहत परिकल्पित वार्ता में शामिल होने से पाकिस्तान का इनकार और आतंकवाद को लगातार स्पोंसर करना संधि का उल्लंघन है." पुनर्विचार करने का आह्वान गौरतलब है कि पाकिस्तान की लेटेस्ट अपील – जिसे पत्र में रेगुलेटेड वॉटर पर लाखों लोगों की निर्भरता के कारण निर्णय पर पुनर्विचार करने के आह्वान के रूप में वर्णित किया गया है – तब की गई जब भारत ने चेनाब नदी पर बगलिहार और सलाल जलविद्युत परियोजनाओं में फ्लशिंग और डिसिल्टिंग ऑपरेशन किए. मुर्तजा के पत्र से पता चलता है कि पाकिस्तान ने अपना रुख नरम कर लिया है. सूत्रों ने कहा कि हालांकि, संचार का लहजा आक्रामक बना हुआ है और इस्लामाबाद ने भारत के कदम को एकतरफा और अवैध करार दिया है, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने कहा कि परिस्थितियों में बदलाव का सिद्धांत संधि की समीक्षा के लिए आधार प्रदान करता है. 1960 में हुई थी सिंधु जल संधि इससे पहले, भारत ने जनवरी 2023 और सितंबर 2024 में पाकिस्तान को नोटिस जारी किए थे. विश्व बैंक द्वारा मध्यस्थता की गई सिंधु जल संधि ने 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के वितरण और उपयोग को नियंत्रित किया है. सिंधु नदी प्रणाली में मुख्य नदी, सिंधु और उसकी सहायक नदियां शामिल हैं. रावी, ब्यास और सतलुज को सामूहिक रूप से पूर्वी नदियाँ कहा जाता है, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां कहा जाता है. इस रिवर सिस्टम का पानी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. recent visitors 48

डीजी दलजीत सिंह चौधरी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बीएसएफ कर्मियों के अमूल्य योगदान को लेकर उनकी सराहना की

जम्मू  आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की फायरिंग के दौरान शहीद हुए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज़ और कांस्टेबल दीपक चिंगखम की शहादत को अमर करने के लिए अब उन पोस्टों के नाम इन्हीं जवानों के नाम पर रखे जाएंगे. इस बात की घोषणा बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) दलजीत सिंह चौधरी ने जम्मू दौरे के दौरान की. बीएसएफ के डीजी दलजीत सिंह चौधरी ने  जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बीएसएफ कर्मियों के अमूल्य योगदान को लेकर उनकी सराहना की. वीरगति को प्राप्त जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए महानिदेशक ने पलौरा स्थित बीएसएफ मुख्यालय में अमर प्रहरी स्मारक पर शहीद उपनिरीक्षक मोहम्मद इम्तियाज और आरक्षी दीपक चिंगाखम की स्मृति में पुष्पचक्र अर्पित किया. दोनों जवानों ने इस ‘ऑपरेशन’ के दौरान अपनी सीमा चौकी की रक्षा में दुश्मन की भीषण गोलीबारी और गोलाबारी का सामना करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. बीएसएफ ने ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्र की सेवा में उनके सर्वोच्च बलिदान को शत-शत नमन.” बीएसएफ जम्मू के जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक ने सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा में बल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर सात मई को शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बीएसएफ जवानों के अटूट साहस, बहादुरी, दृढ़ समर्पण और अमूल्य योगदान की सराहना की.   recent visitors 51

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के जजों के कामकाज का ऑडिट करने की बात कही

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के जजों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि कुछ जज जरूरत से ज्यादा ब्रेक लेते हैं। कोर्ट ने हाई कोर्ट के जजों के कामकाज का ऑडिट करने की बात कही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ कई शिकायतें मिल रही हैं। अब यह देखने का समय है कि उन पर कितना खर्च हो रहा है और वे कितना काम कर रहे हैं। 'हाई कोर्ट के जज ले रहे बहुत ब्रेक' सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने हाई कोर्ट के जजों के कामकाज पर टिप्पणी की। जस्टिस कांत ने कहा कि यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'कुछ जज बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ जज बेवजह कॉफी ब्रेक लेते हैं, कभी यह ब्रेक तो कभी वह ब्रेक। हम हाई कोर्ट के जजों के बारे में बहुत सारी शिकायतें सुन रहे हैं। यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। हाई कोर्ट के जजों का प्रदर्शन कैसा है? हम कितना खर्च कर रहे हैं और आउटपुट क्या है? यह उच्च समय है कि हम एक प्रदर्शन ऑडिट करें।' झारखंड हाई कोर्ट से जुड़ा है मामला यह टिप्पणी चार लोगों की याचिका पर आई। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि झारखंड हाई कोर्ट ने 2022 में एक आपराधिक अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह अपील सजा और आजीवन कारावास के खिलाफ थी, लेकिन फैसला नहीं सुनाया गया। उनके वकील फौजिया शकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कहने के बाद हाई कोर्ट ने 5 और 6 मई को फैसला सुनाया। फैसले में चार में से तीन लोगों को बरी कर दिया गया। आखिरी मामले में अलग-अलग फैसला आया और इसे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दिया गया। याचिकाकर्ता को जमानत मिल गई। शकील ने कहा कि फैसले के बाद भी बरी किए गए लोगों को जेल से रिहा नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने फैसले में यह नहीं बताया कि आदेश कब सुरक्षित रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और झारखंड सरकार के वकील को दोपहर के भोजन के ब्रेक से पहले उन्हें तुरंत रिहा करने के लिए कहा। कोर्ट ने मामले को दोपहर 2 बजे के बाद पोस्ट कर दिया। वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोषियों को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट से रिहाई के आदेश नहीं मिलने के कारण देरी हुई। 'फैसले सुनाने की समयसीमा का पालन करना होगा' बेंच ने कहा कि इस अदालत द्वारा पहले निर्धारित फैसले सुनाने की समयसीमा का पालन करना होगा। इसके साथ ही, इस अदालत द्वारा प्रस्तावित तंत्र का भी पालन करना होगा। बेंच ने रजिस्ट्री को हाई कोर्ट से डेटा एकत्र करने और मामले को जुलाई में पोस्ट करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले जो समय तय किया गया था, फैसले सुनाने के लिए, उसका पालन करना होगा। कोर्ट एक तरीका भी बताएगा जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके। कोर्ट ने रजिस्ट्री को कहा कि वह सभी हाई कोर्ट से जानकारी जुटाए और मामले को जुलाई में फिर से सुनेगा।   recent visitors 46

हमें अपने सारे काम विवेक के साथ करना है, परंतु उसके साथ आनंद का समावेश होना भी बहुत जरूरी-आर्य

सिंहस्थ 2028 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सिंहस्थ-2028 के अवसर पर माँ क्षिप्रा के पावन स्नान के लिये उज्जैन पधारने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के आनंदमयी महाकुंभ स्नान के लिये अधिकारियों का त्रि-दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का समापन हुआ। इस अवसर पर राज्य आनंद संस्थान भोपाल निदेशक सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि आप अपने काम पर गर्व करें और जिंदगी को गरिमामयी बनाकर जीवन को आनंद के साथ जिये। उन्होंने नैतिक मुल्यों पर आधरित जीवन यापन में और प्रशासनिक क्षेत्र में बेहतर माहौल और समन्वय बनाय रखने की बात कहीं। निदेशक आर्य प्रशासन अकादमी में आयोजित त्रि-दिवसीय प्रशिक्षिण सत्र में उज्जैन संभाग के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राज्य आनंद सास्थान के निदेशक आर्य ने कहा कि हमें अपने सारे काम विवेक के साथ करना है, परंतु उसके साथ आनंद का समावेश होना भी बहुत जरूरी है। ऐसे कार्य जिसमें आनंद न हो, उसे आनंद मूल्य की परिधी में नहीं रखा जा सकता। काम ऐसा करें दूसरों के लिये प्रेरणादायी हो। मौन से बड़ा कौन प्रशिक्षण सत्र में मौन के महत्व के महत्व पर विचार रखते हुए वक्ताओं ने आत्म शांति के लिये मौन के महत्व को बताया। प्रात: 7 बजे से योगाभ्यास से प्रारंभ प्रशिक्षण में सत्र के अंतिम दिन 7:30 बजे से 11 बजे तक मौन रखा गया। 3:30 घंटे मौन रखकर "मौन से बड़ा कौन6 वाक्य के महत्व को प्रैक्टिकली समझाया गया। शाम को छोटे-छोट ग्रुप बनाकर स्वयं को समझने, आत्मचिन्तन की कला के साथ जीवन मुल्यों को कैसे जिया जाये आदि प्रशिक्षण सत्र के प्रमुख भाग रहे। वीडियो फिल्म के माध्यम से मन की स्वच्छता को बढ़ाने का संदेश दिया गया। उज्जैन से आए मास्टर ट्रेनर डॉ. प्रवीण जोशी ने कहा कि, सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर इस प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के शासकीय सेवकों को अल्पविराम का विस्तृत परिचय, लाइफ बैलेंस शीट, मेरे रिश्ते, चिंता का दायरा प्रभाव का दायरा, फ्रीडम ग्लास जैसे टूल्स से प्रतिभागियों को परिचय कराया गया है। कार्यशाला में उज्जैन संभाग के प्रमुख और जिले प्रमुख लगभग 40 प्रतिभागी उपस्थित हुए। विभिन्न सत्रों में संस्थान के मास्टर ट्रेनर डॉ. समीरा नईम देवास से, डॉ. प्रवीण जोशी उज्जैन से, संजय पांडेय उमरिया से, शिरीष सुमन शर्मा शाजापुर से, डॉ. अमित मुखर्जी पंचगनी से, अजीत महतों भोपाल से विशेष उपस्थित रहे।   recent visitors 36

वंदे भारत ट्रेन में कंपन मापने के लिए डिवाइस का किया गया सफल परीक्षण, सफर और भी आरामदायक हुआ

 जबलपुर  वंदे भारत एक्सप्रेस की यात्रा को और आरामदायक बनाने के लिए जबलपुर रेल मंडल ने एक डिवाइस (एक्स्लेरोमीटर) तैयार की है। इस डिवाइस की सहायता से वंदे भारत ट्रेन के पटरियों पर फर्राटा भरने के दौरान कंपन मापा जा रहा है। यात्रियों को झटका महसूस हो उसके पूर्व ही यह डिवाइस समस्या का पता लगा रही है। अपनी तरह की यह अलग डिवाइस भारतीय रेल में जबलपुर ने पहली बार तैयार की गई है। प्रारंभिक रूप से डिवाइस का उपयोग रीवा-रानी कमलापति और रानी कमलापति-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस में किया जा रहा है। ट्रेन की सवारी के दौरान ज्यादा झटके महसूस नहीं होते इससे यात्रियों का सफर आरामदायक हुआ है। रेलवे के पास अभी तक चलती ट्रेन में कंपन मापने के लिए कोई उपकरण नहीं था। इस उपकरण के बनने से वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच के पहियों और संस्पेंशन सिस्टम की स्थिति का पता लगाने में सहायता मिल रही है। ट्रेन कोच में व्हील शेलिंग जैसी समस्या का आरंभिक चरण में पता चलने से उसमें सुधार कर लिया जाता है। यात्रियों को ट्रेन की सवारी के दौरान ज्यादा झटके महसूस नहीं होते हैं। इसे कोच के फ्लोर पर रखते हैं यह एक पोर्टेबल/स्थांतरित किए जा सकने वाली डिवाइस है, इसे वंदे भारत ट्रेन के कोच के फ्लोर एरिया पर किसी भी स्थान पर रखा जाता है, ताकि इसमे लगे दो एक्स्लेरोमीटर की मदद से कंपन स्तर को मापा जा सके। फिर ग्राफ प्लाट करके कंपन मूल्य/डेटा का विश्लेषण कर, सुधार कर उपाय निकाला जा सके। इस डिवाइस के उपयोग के दौरान एक टेक्नीशियन रहता है, वह इसके संचालन पर नजर रखता है। एक महीने में तैयार की गई डिवाइस जबलपुर रेल मंडल के मैकेनिकल विभाग के अधिकारी चाहते थे कि वंदे भारत में यात्री झटके महसूस करें, उससे पूर्व ही उन्हें पता चल जाए। ताकि उसमें सुधार कर आरामदाय यात्रा का अनुभव दिया जा सके। इसमें सबसे बड़ी बाधा कंपन मापने के लिए कोई यंत्र का न होना था। तब मैकेनिकल इंजीनियरों की टीम ने यंत्र बनाने पर काम शुरू किया। तत्कालीन सीआरएसई समीर लोहानी और डीएमई स्वप्निल पाटिल की टीम ने एक माह में ही कंपन मापने के यंत्र का अविष्कार कर लिया। दूसरी ट्रेनों में भी उपयोग होगा मंडल रेल प्रबंधक कमल कुमार तलरेजा के निर्देश पर इस डिवाइस की छह माह तक दोनों वंदे भारत ट्रेनों में ट्रायल चली। परिणाम बेहतर मिलने के बाद इस डिवाइस का विवरण रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। डिवाइस की संख्या बढ़ाकर इसका उपयोग अन्य ट्रेनों के कंपन मापने के लिए भी किए जाने की योजना है। यात्री गाड़ी की समस्या को शुरुआत में ही करते हैं दूर     मंडल के यांत्रिक विभाग द्वारा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवाचार किया गया है। इसके माध्यम से यात्री गाड़ियों में आने वाली समस्याओं को शुरुआती चरण में डिटेच कर व दूर कर गाड़ियों का समयपालन सुनिश्चित किया जाता है। – डॉ. मधुर वर्मा, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक   recent visitors 41

भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन व राजगढ़ शामिल, बनेगी ग्रेटर केपिटल सिटी

भोपाल  भोपाल को ग्रेटर केपिटल की तर्ज पर विकसित करने के लिए भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region)का नोडल एजेंसी बनाया है। इंदौर में भी आइडीए का यह जिमा सौंपा गया है। भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन व राजगढ़ शामिल हैं। प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं विकास संजय शुक्ला के अनुसार बीडीए कंसलटेंट तय कर आगामी प्लानिंग बनाएगा। यह उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी।भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ को मिलाकर मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत अगले 14 महीने में पांचों जिलों का सर्वे करने के साथ रीजनल डेवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। इस प्लान के आधार पर भोपाल को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाया जाना है। बुधवार को संभागायुक्त संजीव सिंह के कार्यालय में पांचों जिलों के कलेक्टर्स की मौजूदगी में बीडीए के सीईओ श्यामवीर सिंह ने प्रजेंटेशन दिया। इसमें डीपीआर को लेकर बात रखी गई। आठ हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कवर होगा संभागायुक्त ने बताया कि पांच जिलों के आठ हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा और इसमें पांच जिले शामिल होंगे, जिसमें भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ शामिल किया गया है। इन जिलों को जोड़ने से महानगर की आबादी 35 लाख हो जाएगी। चार स्टेज में काम किया जाएगा। पहले चरण में टीम का गठन, सर्वे, बैठकें आयोजित कर अमलीजामा पहनाना, वर्कप्लान फाइनल करना, सभी विभागों का सर्वे अपने अपने एरिया में करना और विधानसभावार 18 विभागों का डेटा जुटाने का काम किया जाएगा, जबकि आखिरी स्टेज में इंजीनियरिंग, लागत अनुमान और वर्कप्लान की डीपीआर तैयार की जाएगी। दो जून को डीपीआर बनाने के लिए टेंडर निकाला जाएगा। इसके आधार पर टैंडर लेने वाली कंपनी को डीपीआर बनाने का काम सौंपा जाएगा। इस डीपीआर के लिए 18 विभागों से डेटा मांगा गया है। ये तहसील होंगी शामिल     भोपाल जिला : हुजूर, बैरसिया, कोलार     विदिशा जिला : विदिशा शहर, ग्यारसपुर, गुलाबगंज     रायसेन जिला : रायसेन, औबेदुल्लागंज, गौहरगंज     सीहोर जिला : सीहोर शहर, आष्टा, इच्छावर, श्यामपुर, जावर     राजगढ़ जिला : राजगढ़, नरसिंहगढ़, पचोर ये भी होंगे काम     पांचों जिलों के गांव और शहरों को एक दूसरे से जोड़ा जाएगा     सड़कों को एक दूसरे से जोड़कर आवागमन आसान किया जाएगा     इन शहरों शुरू होगा उद्योगों का विकास     इन जिलों के पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा     सैटेलाइट से गांवों को चिह्नित किया जाएगा     कचरा डिस्पोजल और सीवेज सिस्टम भी डेवलप किया जाएगा ऐसे होगा काम ● सीहोर- भोपाल की प्लानिंग कर तालाब व कैचमेंट संरक्षण का काम होगा। ● मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र को भोपाल से जोडकऱ काम किया जाएगा। ● अन्य जिलों में स्थित भोपाल के पास की वैश्विक धरोहरें सांची, भीमबैठका और अन्य पर भोपाल से काम तय हो जाएगा। ● मेट्रो का नेटवर्क भी पास के क्षेत्रों तक बढ़ाने की राह खुलेगी। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। इतना ही नहीं, रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इस तरह होगा विकास का खाका क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजना ग्रोथ सेंटर को चिन्हित करना सेटेलाइट टाउन के लिए क्षेत्र चिन्हित करना टूरिस्ट सेंटर व सर्किट भी तय होगा पर्यावरणीय विकास के लिए पूरा मैनेजमेंट तय करना बेहतर कृषि भूमि का संरक्षण प्लान कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्राथमिक मैप तैयार है। बेहतर प्लान के साथ रीजन तय करेंगे। भोपाल का स्वरूप बदलेगा, विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व प्रशासक बीडीए एमपी में 9 शहरों को मिलाकर बनेंगे 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, 6 संभागों का होगा डेवलपमेंट  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहला मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर-उज्जैन-देवास और धार को मिलाकर और दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भोपाल-सीहोर, रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर विकसित किया जाएगा।  केंद्र के विजन के मुताबिक राज्य के प्रमुख संभाग मुख्यालय ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम और शहडोल को रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार का यह प्रयास अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार और निवेश के नये अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। सुविधाओं में होगा सुधार जानकारी के तहत इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर का 100 प्रतिशत क्षेत्र शामिल किया जाएगा, जबकि उज्जैन का 44 प्रतिशत धार और नागदा का भी कुछ हिस्सा इसमें जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक और शहरी विकास को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार हो और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। 5 जिलों की बदल जाएगी सूरत, जानिए कैसे मेगा रोड प्रोजेक्ट से 80 लाख को होगा फायदा  मध्य प्रदेश के पांच जिलों – भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम की सूरत अब जल्द ही बदलने वाली है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में मेगा रोड प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य इन जिलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। इस परियोजना के तहत, आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लोग 80 लाख की आबादी तक को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इन जिलों को भोपाल से बेहतर कनेक्ट करने के लिए सड़क नेटवर्क पर काम तेज कर दिया गया है और कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अगले एक महीने में इन पांच जिलों से जुड़े रोड नेटवर्क का सर्वे भी पूरा कर लिया जाएगा। सीएम का ग्रेटर राजधानी की बात करना हाल ही में भोपाल में आयोजित आंबेडकर ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वृहद राजधानी के निर्माण की बात की थी। इस घोषणा के बाद से ही इस दिशा में कार्य शुरू हो गया था और अब वृहद राजधानी के रूप में भोपाल और आसपास के इलाकों … Read more