अस्पताल में लगी आग, चीख-पुकार मचाते हुए अस्पताल से बाहर निकले लोग

कोरबा कोरबा के मध्य कोतवाली के पास रानी धनराज कुंवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्तपाल में तड़के सुबह अचानक शॉर्ट सर्किट से आगजनी की घटना सामने आई। इस घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते मरीज और उसके परिजन चीख-पुकार मचाते हुए अस्पताल से बाहर निकले। कई मरीज अपने नवजात शिशु को हाथ में लेकर दौड़ते हुए बाहर निकले। वहीं, कई मरीज अपने परिजन को साथ में पकड़ कर बाहर निकले। स्टाफ नर्स सभी सभी को बारी-बारी से बाहर निकालने लगे। आगजनी के बाद मरीज और अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स में हड़कंप मच गया। प्रसूता समेत नवजात शिशु को लेकर अस्पताल के बाहर चौराहे पर बैठे रहे। बताया जा रहा है कि अस्पताल के तीसरी मंजिले में स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट से आगजनी की घटना सामने आई है। घगटना की सूचना मिलते ही ही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी और कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंचे। जिला प्रशासन की दमकल वाहन की मदद से भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। recent visitors 44

फायर इंजीनियरिंग में है शानदार करियर

हाल के दिनों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। चलती कारों में आग लग जाती है, तो बड़े-बड़े मॉल्स, काफी हद तक सुरक्षित मानी जानी वाली ऊंची-ऊंची इमारत भी पूरी तरप सुरक्षित नहीं है। यदि आग अनियंत्रित हो जाए, तो जान-माल का भी काफी नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में फायर इंजीनियरिंग से जुड़े लोगों की जरूरत होती है, जो आग पर काबू करना अच्छी तरह जानते हैं। क्या है फायर इंजीनियरिंग:- फायर इंजीनियरिंग में पब्लिक के बीच रहकर ही काम करना होता है। सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनवॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से तो इसका सीधा जुडाव होता ही है, आग लगने पर पब्लिक का कैसा व्यवहार हो, पब्लिक के साथ इन लाइफ गार्ड्स का क्या व्यवहार हो, इन सब पर भी जोर दिया जाता है। इसके अलावा ढेर सारी तकनीकी बातें होती हैं, जो इसे बाकी क्षेत्रों से अलग करती हैं, मसलन-आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सबसे सटीक इस्तेमाल और कम से कम समय और संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान और माल के बचाव के साइंटिफिक फॉर्मूले। सबसे बडी बात है क्राइसिस मैनेजमेंट। इस करियर में आप इसे भी सीखते हैं। बडे-बडे मॉल्स या मेले तो आग के मामले इतने खतरनाक होते हैं कि एक साथ सैकडों की जान जाती है। जैसा कि कुछ समय पहले मेरठ के मेले में हुआ था। इस वजह से आज फायर इंजीनियरों की मांग काफी बढ गई है। फायर इंजीनियरों की मांग को पूरा करने के लिए आज कई सरकारी व निजी संस्थान खुल गए हैं। साथ ही, देश के कई विश्वविद्यालयों ने इस कोर्स को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। चुनौतियों तमाम:- कार्य के दौरान फायर इंजीनियर का सामना कई तरह की चुनौतियों से भरा होता है। इसके लिए साहस के साथ-साथ समाज के प्रति प्रतिबद्धता होनी भी जरूरी है। फायर इंजीनियर का कार्य इंजीनियरिंग डिजाइन, ऑपरेशन व प्रबंधन से संबंधित होता है। फायर इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारी दुर्घटना के समय आग के प्रभाव को सीमित करना होता है। इसके लिए वे अग्निसुरक्षा के विभिन्न तरीकों को इस्तेमाल करते हैं। इसके अतिरिक्त अग्निशमन के आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल व उसके रख-रखाव की तकनीक में सुधार करना भी इनकी जिम्मेदारी होती है। कोर्स और पाठ्यक्रम:- कुशल फायर इंजीनियर बनने के लिए बेचलर इन फायर इंजीनियरिंग की डिग्री या उप-फायर-अधिकारी या सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी, डिप्लोमा इन फायर इंजीनियरिंग कोर्स के अलावा फायर इंजीनियरिंग में अन्य छोटे-छोटे कोर्स भी उपलब्ध हैं। योग्यता:- विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए योग्यताएं भी अलग-अलग होती हैं। फायर इंजीनियरिंग में अधिकांश कोर्स ग्रेजुएट स्तर पर उपलब्ध हैं, जिसके लिए साइंस विषयों में बारहवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा इन कोर्सो में प्रवेश के लिए कई संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार आदि भी आयोजित करते हैं। बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग के अलावा आप इस क्षेत्र में स्नातकोत्तर स्तर पर मास्टर और डॉक्टरेट की पढ़ाई भी कर सकते हैं। शारीरिक योग्यता:- इन पाठ्यक्रमों में फिजिकल फिटनेस के अंक भी जोड़े जाते हैं। पुरूष के लिए 50 किलो के वजन के साथ 165 सेमी लंबाई और आईसाइट 6/6, सीना सामान्य रूप से 81 सेमी और फुलाने के बाद 5 सेमी फैलाव होना जरूरी है। महिला का वजन 46 किलो और लंबाई 157 सेमी और आईसाइट 6/6 होनी चाहिए। प्रशिक्षण:- इस पाठ्यक्रम के तहत आग बुझाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी जाती है। इसमें बिल्डिंग निर्माण के बारे में भी जानकारी दी जाती है। ताकि, आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने में ज्यादा परेशानी न हो। उन्हें आग लगने के कारणों और उसे बुझाने के उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है। संभावनाएं:- इस संबंध में दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के चेयरमैन वीरेन्द्र गर्ग कहते हैं कि इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पहले जहां अवसर केवल सरकारी फायर बिग्रेड में ही होते थे, वहीं बदलते दौर के साथ फायर इंजीनियरिंग कोर्स करने वालों के लिए ढेरों नए विकल्प भी सामने आ गए हैं। इनमें प्रमुख इस प्रकार हैं… कंसल्टेंसी:- जब से हर बडी इमारत के साथ आग से जुडे खतरों के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है, इस फील्ड में कंसल्टेंट्स की मांग बढ गई है। कंसल्टेंसी की कंपनियां धीरे-धीरे बिल्डर्स का भरोसा जीत रही हैं और उनकी संख्या बढ रही है। रिसर्च:- फायर प्रोक्टेशन के फील्ड में रिसर्च पहले भारत में नहीं होता था, लेकिन अब यहां भी होने लगा है। हालांकि, ऐसा अभी बहुत कम कंपनियों ने किया है, लेकिन बडे कैंपस वाली कंपनियां अब फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग की स्थाई भर्ती करने लगी हैं। इंश्योरेंस:- जैसे-जैसे आग लगने के मामले बढ रहे हैं, वैसे-वैसे आग से जुडी बीमा पॉलिसियों की भी मांग बढ गई है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की जरूरत भी बढ गई है, जो आग से होने वाले नुकसान का ठीक-ठीक अनुमान लगा सकें। मैन्युफैक्चरिंग अब हर बडे निर्माण में आग बुझाने के उपकरणों को रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे उपकरणों का उत्पादन भी बढ गया है। उनके उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक के फील्ड में फायर इंजीनियर्स की मांग बढ गई है। अब सारे सिटी प्लानर भी फायर इंजीनियर्स को साथ रखकर ही टाउन प्लानिंग करते हैं। सैलरी पैकेज:- सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठनों में फायरकर्मियों के वेतन का आधार अलग-अलग होता है। दोनों में पर्याप्त भिन्नाता देखने को मिलती है। सरकारी संस्थानों में जहां एक फायरमैन की तनख्वाह दस हजार रुपये प्रतिमाह होती है। वहीं, फायर इंजीनियर को बीस हजार रुपये और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को इससे अधिक वेतन मिलता है। इसकी तुलना में प्राइवेट संस्थाएं अपने यहां कार्यरत फायरमैन को 12000 से 14000, फायर इंजीनियर को 20000 तथा अग्निशमन अधिकारी को 25000 से 30000 रुपये प्रतिमाह तक का सैलरी पैकेज देती हैं। प्राइवेट संस्थान अपने यहां कुछ वर्ष का अनुभव रखने वाले लोगों को ही वरीयता देते हैं। वैसे निजी संस्थाओं में वेतन का आधार स्वयं की काबिलियत और अनुभव रखता है। अलग-अलग कंपनियां अपनी क्षमता के अनुसार वेतन तय करती हैं। इंस्टीट्यूट वॉच… -दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, नई दिल्ली -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर -राष्ट्रीय … Read more

आज सरकार की पहली मासिक डेटा सीरीज ने अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत रहने का लगाया अनुमान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि अप्रैल के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.6 प्रतिशत थी। इसी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए एलएफपीआर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 58 प्रतिशत थी और शहरी क्षेत्रों में 50.7 प्रतिशत थी। एलएफपीआर एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो रोजगार की स्थिति को दर्शाता है। यह दर बताती है कि श्रम बल में कितने लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आंकड़ों पर आधारित नई सीरीज के अनुसार, डेटा में पहली बार ग्रामीण रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, जो कवरेज को व्यापक बनाते हैं। अप्रैल में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में बेरोजगारी दर (यूआर) 5.1 प्रतिशत थी, घरेलू स्तर पर पुरुष यूआर 5.2 प्रतिशत थी, जबकि महिला यूआर 5.0 प्रतिशत थी। तिमाही आधार पर संकलित पुरानी सीरीज के अक्टूबर-दिसंबर- 2024 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर (यूआर) 6.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर क्रमशः 79 प्रतिशत और 75.3 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के बीच एलएफपीआर अप्रैल के दौरान 38.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 55.4 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान समान आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 47.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर समग्र डब्ल्यूपीआर 52.8 प्रतिशत रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए डब्ल्यूपीआर महीने के दौरान क्रमशः 36.8 प्रतिशत और 23.5 प्रतिशत थी और देश के स्तर पर समान आयु वर्ग की समग्र महिला डब्ल्यूपीआर 32.5 प्रतिशत देखी गई। बढ़ी हुई कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति श्रम बल संकेतकों के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से नया रूप दिया गया है। पुनर्निर्मित पीएलएफएस डिजाइन की परिकल्पना अखिल भारतीय स्तर पर सीडब्ल्यूएस में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाने के लिए की गई है। मासिक परिणाम पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन के रूप में जारी करने की योजना है। वर्तमान मासिक बुलेटिन अप्रैल 2025 महीने के लिए सीरीज में पहला है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए पीएलएफएस में जनवरी 2025 से एक रोटेशनल पैनल सैंपलिंग डिजाइन अपनाया गया है। इस रोटेशनल पैनल योजना में, प्रत्येक चयनित घर का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है। recent visitors 64

DRDO की कानपुर स्थित लैब ने समंदर से मीठा पानी निकालने वाली देसी तकनीक तैयार, 8 महीने में कर दिया कमाल

नई दिल्ली ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए DRDO ने ऐसा कमाल कर दिखाया है जो देश के तटीय इलाकों और रक्षा क्षेत्र दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। DRDO की कानपुर स्थित लैब ने महज 8 महीने में एक नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमर मेम्ब्रेन तकनीक विकसित की है, जो खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदल सकती है। यह तकनीक खास तौर पर भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों के लिए तैयार की गई है। तटरक्षक जहाजों पर सफल ट्रायल इस स्वदेशी तकनीक को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल (OPV) पर ट्रायल के लिए लगाया गया है। शुरुआती सुरक्षा और परफॉर्मेंस टेस्ट में यह पूरी तरह सफल रही है। अब 500 घंटे की ऑपरेशनल टेस्टिंग के बाद इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। जल संकट दूर करने में भी कारगार दरअसल, समुद्री पानी में मौजूद क्लोराइड आयन सामान्य झिल्लियों को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन DRDO की यह नई तकनीक इस असर से पूरी तरह सुरक्षित है। यह तकनीक ना सिर्फ भारतीय तटरक्षक बल के लिए उपयोगी है, बल्कि यह भविष्य में भारत के उन इलाकों के लिए जल जीवन मिशन जैसा वरदान साबित हो सकती है, जहां पानी की भारी किल्लत है। आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम DRDO पहले ही तेजस लड़ाकू विमान, अग्नि-पृथ्वी मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और आकाश एयर डिफेंस जैसे स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के निर्माण में अग्रणी रहा है। अब यह नई मेम्ब्रेन तकनीक जल सुरक्षा में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नया आयाम जोड़ेगी। recent visitors 72

अपरा एकादशी के दिन घर पर कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा? जानें पूजा विधि और महत्व

अपरा एकादशी का महत्व हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और विशेष रूप से पापों के नाश, आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से ब्रह्म हत्या, गोत्र हत्या, गर्भस्थ शिशु की हत्या, परनिंदा और परस्त्रीगमन जैसे बड़े पापों से भी मुक्ति मिल जाती है. इस व्रत के पुण्य से अपार धन, समृद्धि और प्रसिद्धि मिलती है. इसे सहस्र गोदान के फल के समान माना गया है.यह व्रत जीवात्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति में सहायक माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. कब है अपरा एकादशी? वैदिक पंचांग के अनुसार, जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की शुरुआत 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट 12 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 23 मई को रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा. अपरा एकादशी के दिन घर पर कैसे करें पूजा? व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो स्नान के पानी में गंगाजल मिलाएं. फिर स्नान के बाद साफ और धुले हुए कपड़े पहनें. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. भगवान को चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, और दीप अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी पत्र डालकर भोग लगाएं. ध्यान रखें कि भोग में केवल सात्विक चीजें ही शामिल हों.भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”. आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं. अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें. आखिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें. पूजा समाप्त होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी में वितरित करें.अपनी क्षमतानुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें. अपरा एकादशी व्रत के नियम दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए. दिन में सोना नहीं चाहिए और बुरे विचारों से दूर रहना चाहिए. द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और फिर खुद भी भोजन करके व्रत खोलना चाहिए. अपरा एकादशी व्रत का महत्व अपरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य बड़े-बड़े पापों से मुक्त हो जाता है. कहा जाता है कि इस व्रत के पुण्य से मनुष्य को अपार धन, समृद्धि और प्रसिद्धि मिलती है. यह भी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल जाती है. इस दिन भगवान वामन की पूजा भी विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है. recent visitors 68

सीएम योगी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा- ‘सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर दिए गए विवादित बयान पर घेरते हुए कहा कि सेना की वर्दी 'जातिवादी चश्मे' से नहीं देखी जाती है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सेना की वर्दी 'जातिवादी चश्मे' से नहीं देखी जाती है। भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक 'राष्ट्रधर्म' निभाता है, न कि किसी जाति या मजहब का प्रतिनिधि होता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है।" उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "यह वही मानसिकता है, जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रभक्ति तक को बांटने का दुस्साहस करती है। इस विकृत जातिवादी सोच को जनता फिर जवाब देगी।" दूसरी तरफ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा महासचिव रामगोपाल पर वार करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ''जाति व धर्म से परे होती है सेना। सेना का एक ही धर्म होता है 'देश की रक्षा'। इसलिए सेना में जाति व धर्म देखना 'ओछी मानसिकता' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना में भी महिला सशक्तीकरण पर खासा जोर दिया है। सबको उन पर भरोसा करना चाहिए।" दरअसल, मुरादाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में नियमित रूप से ब्रीफिंग करने वाली वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को लेकर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने सेना के अन्य अधिकारियों की जातियां भी बताईं। रामगोपाल यादव ने अपनी टिप्पणी में व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी सहित अन्य सैन्य अधिकारियों की जाति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "युद्ध एक मुसलमान, एक जाटव और एक यादव ने लड़ा। ये तीनों पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग से आते हैं। ऐसे में भाजपा इस अभियान का श्रेय कैसे ले सकती है।" recent visitors 51

मेड इन इंडिया में दादासाहेब फाल्के की भूमिका निभायेंगे जूनियर एनटीआर

मुंबई, मैन ऑफ मासेस जूनियर एनटीआर आगामी फिल्म 'मेड इन इंडिया' में भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के की भूमिका निभाने जा रहे हैं। यह फिल्म एक पैन-इंडिया रिलीज़ के तौर पर तैयार की जा रही है और इसे भारतीय सिनेमा की शुरुआत और विकास पर आधारित बायोपिक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। वर्ष 2023 में एस.एस. राजामौली ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी, जिसे वरुण गुप्ता (मैक्स स्टूडियोज़) और एस.एस. कार्तिकेय (शोइंग बिज़नेस) द्वारा प्रोड्यूस किया जाएगा। तब से इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम चल रहा था और अब इसकी फाइनल ड्राफ्ट लॉक कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एस.एस. राजामौली, एस.एस. कार्तिकेय और वरुण गुप्ता ने यह स्क्रिप्ट जूनियर एनटीआर को सुनाई, जिन्होंने तुरंत ही फिल्म के लिए अपनी स्वीकृति दे दी। वह दादासाहेब फाल्के की अनजानी कहानियों से बेहद प्रभावित हुए। यह कहानी भारतीय सिनेमा के जन्म और विकास पर आधारित है, और इसकी बारीकियों ने जूनियर एनटीआर को चौंका दिया। स्क्रिप्ट सुनने के बाद, उन्होंने स्क्रीनप्ले और उसके ट्रीटमेंट पर विस्तार से चर्चा की। यह फिल्म उन्हें एक्शन से हटकर एक ऐसा किरदार निभाने का मौका देगी, जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया। 'मेड इन इंडिया' एस.एस. राजामौली, एस.एस. कार्तिकेय और वरुण गुप्ता की रचनात्मक दृष्टि के साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास में गहराई से उतरने का प्रयास करेगी। यह फिल्म दादासाहेब फाल्के की नज़र से भारतीय सिनेमा की शुरुआत को दिखाएगी और दर्शकों को एक ऐसा सिनेमाई अनुभव देगी जो पहले कभी नहीं देखा गया।   recent visitors 64