सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री के दौरे का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 9 मई को सुशासन तिहार के दौरान ग्राम बल्दाकछार में की गई घोषणाएं अब धरातल पर उतरने लगी हैं। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जिला प्रशासन ने तीव्रता से कार्यवाही करते हुए संबंधित विभागों को तत्काल सर्वे एवं योजना निर्माण के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देशन में आज जल संसाधन विभाग और क्रेड़ा (CREDA) विभाग के अभियंताओं की टीम बल्दाकछार पहुंची। टीम ने दो अहम कार्योंकृमहानदी तट पर तटबंध निर्माण और ग्राम में हाई मास्ट लाइट की स्थापना के लिए सर्वे की प्रक्रिया प्रारंभ की। बाढ़ से सुरक्षा के लिए पक्का तटबंध हर वर्ष महानदी की बाढ़ से कटाव झेल रहे बल्दाकछार गांव के लिए राहत भरी खबर है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, ग्राम को कटाव से सुरक्षित रखने के लिए महानदी के दाएं तट पर पक्के तटबंध का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार, लगभग डेढ़ किलोमीटर लम्बाई में 5 मीटर स्लांट हाइट के साथ सीमेंट-कांक्रीट संरचना बनाई जाएगी, जिससे कटाव को रोका जा सकेगा। इस कार्य की अनुमानित लागत 888 लाख रुपये है। गांव में रोशन होगा अंधेरा: हाई मास्ट लाइट योजना मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल करते हुए क्रेड़ा विभाग ने भी ग्राम में हाई मास्ट लाइट लगाने हेतु स्थल का चयन कर लिया है। इंजीनियरों ने सरपंच व ग्रामीणों के साथ मिलकर गुड़ी चौक और कमारपारा को उपयुक्त स्थल माना है। संबंधित प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है। जनता की आवाज पर संवेदनशील निर्णय उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के दौरान बल्दाकछार में आकस्मिक निरीक्षण करते हुए ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं। जनता की प्राथमिकताओं को समझते हुए उन्होंने त्वरित घोषणाएं कीं और अधिकारियों को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए थे। अब प्रशासन द्वारा किए जा रहे तत्पर प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाएं महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि कार्य रूप में परिणित हो रही हैं। बल्दाकछार में शुरू हुई ये पहल न केवल गांव की सुरक्षा और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही का भी प्रमाण है। जनता से किये वादों को त्वरित अमल में लाकर शासन ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ में सुशासन अब केवल शब्द नहीं, एक साकार होती प्रक्रिया है। recent visitors 40

भारत ने अमेरिका पर जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा, बादाम, सेब, अखरोट, नाशपाती और…रसायन?

नई दिल्ली भारत में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह शुल्क एल्यूमिनियम और स्टील पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में होगा। भारत का यह फैसला व्यापार हित की रक्षा और वैश्विक व्यापार नियमों के अंतर्गत अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाएगा भारत विश्व व्यापार संगठन को भेजे गए प्रस्ताव में भारत का कहना है कि अमेरिका के टैरिफ के कारण भारत के 7.6 अरब डॉलर के सामान का आयात प्रभावित हुआ , इसीलिए भारत भी अमेरिका से आने वाले कुछ चीज जरूरी सामानों पर इतना ही टैरिफ लगाने की मांग कर रहा है। अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने के ये हैं कारण साल 2018 में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए भारतीय स्टील पर 25% और एल्यूमीनियम पर 10% का टैरिफ लगाया था। इसके बाद इस टैरिफ की दर को साल 2020 में बढ़ाया गया। 12 मार्च 2025 को यह टैरिफ 25% संशोधित कर दिया गया। विश्व व्यापार संगठन को दिए गए प्रस्ताव में भारत ने यह दावा किया है कि अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के सामान्य व्यापार और टैरिफ समझौते (GATT) 1994 और सुरक्षा उपाय पर समझौते का उल्लंघन किया है। अमेरिकी टैरिफ़ के कारण भारत को 7.6 अरब डॉलर के स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात प्रभावित हुए हैं। लेकिन अमेरिका को इस ड्यूटी से 1.91 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं। भारत में यह भी कहा कि उन्होंने अप्रैल 2025 में अमेरिका से विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत परामर्श मांगा था, लेकिन अमेरिका ने इन टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा का उपाय बताकर परामर्श से इनकार कर दिया था। भारत कर रहा जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी भारत सरकार के द्वारा 9 मई 2025 को वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाईजेशन के काउंसिल फॉर ट्रेड इन गुड्स को यह सूचना दी गई है कि वह अमेरिकी उत्पादों पर 1.91 अरब डॉलर के बराबर का टैरिफ लगाएगा। इसके लिए भारत ने 29 अमेरिकी उत्पादों का चयन किया है। जिनमें सेब, बादाम, अखरोट, नाशपाती, रसायन आदि शामिल हैं। हालांकि भारत ऐसा प्रस्ताव 2019 में भी ला चुका है। ये उत्पाद भारत के लिए आयात में महत्वपूर्ण हैं, जैसे अमेरिकी बादाम (543 मिलियन डॉलर) और सेब (156 मिलियन डॉलर)। कितना जवाबी शुल्क लगाएगी भारत सरकार भारत सरकार के द्वारा रखे गए प्रस्ताव के अनुसार टैरिफ की दरें उत्पादों के आधार पर 5% से 100% के बीच हो सकती है। इसके साथ भारत का यह भी कहना है कि उसके द्वारा उठाए जा रहे हैं यह कदम विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप है। भारत जवाबी टैरिफ इसलिए लगाना चाहता है ताकि अमेरिकी टैरिफ के व्यापारिक प्रभाव को संतुलित किया जा सके। भारतीय स्टील एसोसिएशन ने किया स्वागत भारत सरकार के इस फैसले का भारतीय स्टील एसोसिएशन ने स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाया है। यदि भारत सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया आदि को राहत मिल सकती है। अमेरिकी उत्पादों पर असर भारत द्वारा यह जवाबी टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे सेब, बादाम और रसायन उद्योग ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि भारत इनका बड़ा आयातक देश है। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका द्वारा भी जवाबी उपाय किए जा सकते हैं जिससे द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता और जटिल हो सकती है। recent visitors 71

ग्वालियर में डॉक्टर्स की हाजिरी अब सेल्फी और लोकेशन से! नई व्यवस्था में जानिए …

ग्वालियर एमपी के ग्वालियर शहर में जीआरएमसी और जेएएच के डॉक्टर अब हाइटेक हो रहे हैं। इन डॉक्टरों की हाजिरी अभी तक जीआरएमसी और जेएएच में लगी बायोमेट्रिक मशीन से भरी जाती थी, लेकिन अब यह डॉक्टर मोबाइल एप पर फेस आईडी से अपनी हाजिरी लगाएंगे। इसके लिए डॉक्टर ऐप डाउन लोड करके अपनी रिपोर्ट दे रहे हैं। पूरी तरह शुरु होगी व्यवस्था यह डॉक्टर अपनी- अपनी लोकेशन के 100 मीटर के दायरे में हाजिरी लगा सकेंगे। जैसे जीआरएमसी में डीन कार्यालय के पास लगी बायोमेट्रिक मशीन के 100 मीटर पहले से भी डॉक्टर अपनी हाजिरी मोबाइल के माध्यम से लगा सकते हैं। इसके लिए कुछ डॉक्टरों ने तो अपनी हाजिरी इस ऐप से लगाना शुरू कर दी है। वहीं पूरी तरह से यह व्यवस्था बहुत जल्द ही शुरू हो जाएगी। अभी तीन स्थानों पर लगाई जाती है हाजिरी डॉक्टरों द्वारा अपनी- अपनी हाजिरी तीन स्थानों पर लगाई जाती है, जिसमें मेडिकल कॉलेज, हजार बिस्तर और पुराने जेएएच में इसकी व्यवस्था है। पुराने जेएएच में कमलाराजा, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, कैंसर यूनिट के सभी डॉक्टर यहीं पर हाजिरी लगाते हैं।   recent visitors 51

मां नर्मदा के दर्शन भी होंगे आसान, अब जल्द तैयार होंगे रोप वे, मंत्री गडकरी ने दी सैद्धांतिक स्वीकृति

जबलपुर एम्पायर टॉकीज से गौरीघाट तक 760 करोड़ रुपए की लागत से रोप-वे का निर्माण किया जाएगा। रोपवे के निर्माण को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। मां नर्मदा के दर्शन करने लोग केवल सड़क मार्ग से ही ना जाएं, उन्हें विकल्प उपलब्ध हो इसके लिए रोप-वे के निर्माण का निर्णय लिया गया है। ये बात लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विकास कार्यों के भूमिपूजन के दौरान कही। यहां बनेगा पहला रोप वे पहला रोपवे एम्पायर टॉकीज से सदर, गोरखपुर, गौरीघाट में नर्मदा के उस पार जाने के लिए तैयार होगा। इस रोप-वे की डीपीआर को अनुमति मिल गई है। दूसरा रोप वे भी होगा तैयार मंत्री सिंह ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसके लिए सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी है। इसी प्रकार दूसरा रोप-वे सिविक सेंटर से बल्देवबाग दमोहनाका होते हुए अधारताल तक बनाया जाएगा। दोनों रोप-वे में जगह-जगह स्टेशन भी बनाए जाएंगे। नागरिकों को जिस स्टेशन तक यात्रा करनी हो उस स्टेशन तक इन रोप-वे के माध्यम से पहुंच सकेंगे। दो-तीन साल में बदला नजर आएगा जबलपुर बता दें कि पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सवा पांच करोड़ की लागत से बनाने वानी सीसी सड़कों का मंत्री सिंह ने भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आने वाले दो-तीन वर्षों में जबलपुर का स्वरूप बदला दिखाई देगा। recent visitors 42

इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 14 मई को बेंगलुरु में इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में निवेशकों से होंगे रूबरू  इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में बीईएमएल के साथ औद्योगिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल भोपाल मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 मई को बेंगलुरु में सीइन्वेस्ट इन एमपीसी सत्र में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीईएमएल (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) परिसर का भ्रमण करेंगे, साथ ही 2100वें मेट्रो कोच के लोकार्पण समारोह में सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज़ इन मध्यप्रदेश’ विषय पर आयोजित इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं और नीतिगत प्रतिबद्धताओं को देश के अग्रणी निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। बीईएमएल परिसर में रहेगा कार्यक्रमों का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु पहुंचने के बाद बीईएमएल परिसर जाएंगे, जहां उनका स्वागत बीईएमएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और बोर्ड के सदस्यों द्वारा किया जाएगा। बीईएमएल शॉप विज़िट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेट्रो कोच लोकार्पण और टेस्ट राइड में सम्मिलित होंगे। इसके उपरांत वे इंटीग्रेटेड डिज़ाइन सेंटर का भ्रमण करेंगे और बीईएमएल के भोपाल संयंत्र पर प्रस्तुति देखेंगे। बीईएमएल द्वारा मध्यप्रदेश में स्थापित की जा रही इकाई के लिए ज़मीन आवंटन पत्र सौंपे जाने की औपचारिकता भी इस अवसर पर होगी। बेंगलुरु में ‘इन्वेस्ट इन एमपी’ सत्र में होगा राज्य की औद्योगिक ताकत का प्रदर्शन 'द लीला पैलेस' में आयोजित इन्टरैक्टिव सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योग समूहों, निवेशकों और टेक्नोलॉजी कंपनियों से संवाद करेंगे। इस सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, अधोसंरचना और क्षेत्रवार निवेश अवसरों पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग श्री संजय दुबे तथा प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला शामिल मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर निवेशकों जानकारी देंगे । निवेशकों के साथ होंगे वन-टू-वन मीटिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों के माध्यम से सीधे संवाद करेंगे। इन संवादों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, ऑटोमोबाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी सेक्टर के प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। मध्यप्रदेश बन रहा है ‘मेक इन इंडिया’ का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार एक मजबूत औद्योगिक आधार तैयार कर रहा है। देश के बड़े औद्योगिक समूहों के साथ संवाद की यह श्रृंखला राज्य को निवेश के नए क्षितिज की ओर ले जा रही है, जहां नीति, संसाधन और नेतृत्व तीनों ही स्तर पर उद्योगों को सुरक्षित और गतिशील मंच प्राप्त हो रहा है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो मेट्रो रेल कोच, रक्षा उपकरण, खनन एवं निर्माण मशीनरी के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बेंगलुरु स्थित इसका विनिर्माण परिसर आधुनिक इंजीनियरिंग और स्वदेशी तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है, और यह आत्मनिर्भर भारत के विजन में महत्त्वपूर्ण भागीदार है।   recent visitors 35

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए

 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने उज्जैन को एक बार बड़ी सौगात दी है। उन्होंने दो एलिवेटेड कॉरिडोर(Elevated Corridors) बनाने की सैद्धांतिक सहमति दी है। यह कॉरिडोर मकोड़िया आम चौराहे से चामुंडा चौराहे, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज और निकास चौराहे से दौलतगंज होते हुए इंदौरगेट बनेंगे। सिंहस्थ में यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों के बीच समानांतर फोरलेन योजना बनाने को कहा। मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने के निर्देश सीएम ने  सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर समीक्षा की। अधिकारियों से कहा कि सभी कार्य समय सीमा में गुणवत्ता और मापदंड के अनुसार हों। एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करे। उन्होंने सिंहस्थ निर्माण कार्यों में शहर के आसपास सड़कों का जाल बिछाकर यातायात सुगम करने और संपूर्ण मेला क्षेत्र की कनेक्टिविटी 4 और 6 लेन करने की जानकारी दी। सीएम ने कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने को कहा। सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालु आने का अनुमान सीएम बोले- हमने अधिकारियों को ये भी कहा कि इसके ऊपर पिलर और जोड़ दें, ताकि भविष्य में मेट्रो निकल सके। सिंहस्थ में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती रहने वाली है। इसके लिए उज्जैन की चारों दिशाओं के मार्गों का विस्तार हो रहा है। आंतरिक मार्ग भी चौड़े हो रहे हैं। एलिवेटेड ब्रिज बनाकर भी भीड़ प्रबंधन की प्लानिंग की गई है। नागपुर में ऐसे एलिवेटेड ब्रिज हैं, जिनमें नीचे ट्रक-बस गुजरते हैं और ऊपर मेट्रो ट्रेन चलती है। लोनिवि की सेतु शाखा सर्वे कर सौपेंगी रिपोर्ट सीएम द्वारा एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी के बाद अब लोनिवि की सेतु शाखा का अमला जल्द ही शहर के कुछ मार्ग पर इनके निर्माण की संभावनाओं को तलाशेगा। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य रूप से बुधवारिया से इंदौर गेट तक और मकोड़ियाआम नाका-इंदिरा नगर से रेलवे स्टेशन-हरिफाटक तक एलिवेटेड ब्रिज के लिए सर्वे किया जाएगा। इधर इसके अलावा इन ब्रिज से नीलगंगा-पेशवाई स्थल, मंछामन गणेश मंदिर क्षेत्र को भी जोड़ने के लिए सर्वे होगा। इसके बाद ही फाइनल हो पाएगा कि वास्तव में किस मार्ग पर ये एलिवेटेड ब्रिज बनेंगे, क्योंकि समय सीमा की भी चुनौती रहने वाली है। कलेक्टर ने यह भी बताया कि हवाई पट्टी का भी विस्तार किया जाना है। इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी सर्वे कर चुकी है। बुधवारिया से इंदौर गेट तक के मार्ग को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की टीम ने सर्वे कर लिया था। इसमें बड़ी संख्या में मार्ग के दोनों तरफ के व्यापारी प्रभावित हो रहे थे। चूंकि, अब इस मार्ग के ऊपर एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी सीएम ने दे दी है तो चौड़ीकरण नहीं होगा। कोई टूट-फूट नहीं होगी। बोले कि जब हमारे प्रधानमंत्री एक भी सैनिक को पार कराए बगैर रावलपिंडी में अटैक कर सकते हैं तो हमने भी सोचा कि निकास चौराहा (बुधवारिया) से इंदौर गेट तक बगैर किसी मकान को हाथ लगाए ऊपर रोड-ब्रिज बना दिए जाएं, ताकि नीचे कारोबार होता रहे और ऊपर से बस-ट्रक गुजरते रहे। इससे अच्छा क्या प्लान हो सकता हैं। ये हमारे शहर का सर्वाधिक व्यस्ततम मार्ग भी है। नीचे महाकाल की सवारी, जलसे-जुलूस निकलेंगे और ऊपर से वाहन गुजरते रहेंगे। तैयारी के निर्देश     सभी मुख्य देवस्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाएं।     न्यायिक संस्था शुरू की जाएगी। कार्ययोजना पाइपलाइन में रखें।     इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी की कार्ययोजना में उज्जैन में विकास कार्य का ब्लूप्रिंट तैयार करें। recent visitors 47

सरकार ने ग्रीन सिटी पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया, जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में दो वर्ष के अंदर 10 शहरों को ग्रीन सिटी(Green Cities) के तौर पर विकसित करने की कोशिश है। इसके लिए मुख्यत: हेरिटेज टाउन, पर्यटन स्थल और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के नगरों को चुना जाएगा। इन नगरों में 75% नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया है। जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा। ग्रीन सिटी के तौर पर विकास के लिए नगरों के चयन की प्रक्रिया जारी है। इसमें महेश्वर, चंदेरी, मांडू, ओरछा, अमरकंटक, भीमबेटका, ओंकारेश्वर, चित्रकूट जैसे नगरों के चयन पर विचार चल रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 की गाइडलाइन में इस संबंध में प्रावधान किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के एसीएस मनु श्रीवास्तव के अनुसार चयनित नगरों में सालभर घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ता जितनी बिजली का उपयोग करते हैं उसका 75त्न हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से सप्लाई करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। धार्मिक, सांस्कृतिक महत्त्व के भवनों में शत प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग होगा। 6 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ता आरई पर होंगे शिफ्ट अधिकारियों के अनुसार ग्रीन सिटीज में 6 किलोवाट से अधिक लोड के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को नवीकरणीय ऊर्जा पर शिफ्ट किया जाएगा। उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति के तहत सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के लिए १००त्न नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग अनिवार्य होगा। स्कूल, राशन दुकान, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र आदि में जहां सुबह 6 से रात 8 बजे तक काम होता है, वहां भी नवीकरणीय ऊर्जा की सप्लाई होगी। इस तरह बदलेंगे ग्रीन सिटी में     इन नगरों में अलग ग्रीन सबस्टेशन बनाए जाएंगे।     हॉकर्स और वेंडर्स भी सोलर लैंटर्न का उपयोग करेंगे, इसके लिए सहायता भी मिलेगी।     सभी स्ट्रीट लाइट्स सोलर से संचालित होंगी। इन्हें ग्रीन स्ट्रीट्समें बदला जाएगा।     रहवासी समितियां और बहुमंजिला भवनों में कॉमन एरिया में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।     6 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी छत पर उपयोग किए जा रहे लोड के 50 फीसदी क्षमता का सोलर रूफ टॉप लगानाअनिवार्य होगा।     ग्रीन सिटीज में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दिया जाएगा। चार्जिंग स्टेशनों को भी 50 फीसदी बिजली नवकरणीय स्रोतों से लेना होगी।     ग्रीन सिटीज में कम्युनिटी बेस्ड रीन्यूवेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर वहां आरई पावर प्लांट लगाया जाएगा। इसे पॉलिसी के तहतइंसेंटिव और सब्सिडी मिलेगी।     इसी प्रकार कम्युनिटी बेस्ड बायोगैस प्लांट भी विकसितकिए जाएंगे। इसे भी सरकारइंसेंटिव देगी। recent visitors 39