सियासत से सीधे अदालत तक: ममता बनर्जी अब सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की पैरवी को तैयार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।   recent visitors 43

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक में हुए शामिल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स सहित कई अनेक खनिजों के प्रचुर भंडार उपलब्ध हैं। राज्य में चल रही सभी खनन परियोजनाओं का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप क्रियान्वयन किया जाए।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खनिजों के अवैध परिवहन एवं उत्खनन पर विशेष टॉस्क फोर्स के माध्यम से की जा रही निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए आईटी एवं ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाये। तकनीक के द्वारा अवैध गतिविधियों पर बेहतर एवं सतत निगरानी की जा सकेगी।  मुख्यमंत्री साय ने पीएमकेकेकेवाई के अंतर्गत खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से व्यय एवं कार्यो के प्रगति की निगरानी के विषय में जानकारी ली। उन्होंने कार्यो के गुणवत्ता एवं परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के लिए जिला खनिज न्यास अधिनियम के अंतर्गत राज्य स्तरीय केन्द्रीय कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई की स्थापना के माध्यम से डीएमएफ कार्यों की बेहतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये। बैठक में परिवहन नेटवर्क (रेलमार्ग) के अंतर्गत चिरमिरी-नागपुर रेल्वे लाईन हेतु कुल 328 करोड़ एवं छत्तीसगढ़ रेल्वे कॉरीडोर निर्माण हेतु, 1-ईस्ट कॉरीडोर एवं 3-ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के लिए राशि रूपये 60.10 करोड़ एवं क्वासी इक्विटी के रूप में 24.10 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया । बैठक में खनिज विकास निगम लिमिटेड (सीएमडीसी) को एनएमडीसी-सीएमडीसी कंपनी लिमिटेड (एनसीएल) संयुक्त उपक्रम में सीएमडीसी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में विभिन्न परियोजनाओं के विकास हेतु 112.70 करोड़ एवं सीएमडीसी को विभागीय कार्य हेतु अतिरिक्त राशि रूपये 10 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया । बैठक में संचालनालय, भौमिकी तथा खनिकर्म के अंतर्गत खनिज ब्लॉकों की नीलामी, खनिज ऑनलाईन 2.0 के भुगतान, भौमिकी के अंतर्गत सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण एवं विभिन्न परियोजनाओं के भुगतान एवं बाह्य स्त्रोतों से विभिन्न तकनीकी कार्यों के संपादन, मुख्य एवं गौण खनिजों के अवैध परिवहन निगरानी हेतु आईटी एवं ड्रोन तकनीक से नियंत्रण, जिला खनिज न्यास अधिनियम के अंतर्गत डीएमएफ से संबंधित कार्यों की निगरानी हेतु केन्द्रीय कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई (सीपीएमयू) सहित विभागीय कार्य हेतु 138.17 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया । बैठक में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 20वीं बैठक में संपन्न कार्यों के क्रियान्वयन के विषय में जानकारी दी गई। बैठक में वित्त मंत्री ओ पी चौधरी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सह सचिव वित्त मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव सह सचिव खनिज साधन विभाग पी दयानंद, संचालक खनिज रजत बंसल सहित अधिकारीगण मौजूद रहे। recent visitors 34

राजा रघुवंशी केस अपडेट: गार्ड व बिल्डिंग मालिक निर्दोष, पुलिस की थ्योरी साबित नहीं हो पाई

इंदौर  इंदौर के बहुचर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस केस में आरोपी बनाए गए गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। सबूतों की कमी के कारण इन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया है। पुलिस ने पहले इन्हें साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन मामले की गहन जांच में हत्याकांड से इनका कोई सीधा संबंध साबित नहीं हो पाया।  चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में कोर्ट ने गार्ड और बिल्डिंग मालिक को दोषमुक्त कर दिया है। शिलॉन्ग पुलिस द्वारा सबूत छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बलवीर सिंह अहिरवार और लोकेंद्र सिंह तोमर को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर राहत दी गई है। कोर्ट के इस फैसले से जांच एजेंसियों की शुरुआती थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरी किए गए आरोपियों में लसूड़िया क्षेत्र की एक बिल्डिंग का गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और भवन मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर शामिल हैं। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने कॉन्ट्रैक्टर शिलॉम के साथ मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या के बाद सोनम रघुवंशी का बैग और अन्य सबूत ठिकाने लगाने में मदद की। इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के शामिल होने को लेकर ठोस सबूत नहीं बिजली बिल और अन्य तकनीकी तथ्यों की जांच के बाद पुलिस को आरोपियों की संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं मिले। शिलॉन्ग की ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिगम ने बताया कि शुरुआती परिस्थितियों और मिली जानकारियों के आधार पर गिरफ्तारी की गई थी। बाद में जांच और वेरिफिकेशन में उनकी भूमिका साबित नहीं हो सकी। इसी कारण दोनों को दोषमुक्त कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी और राज कुशवाह सहित अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में क्यों कमजोर पड़ी पुलिस की दलील? विस्तृत जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की संलिप्तता से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले। बिजली बिल, किराया एग्रीमेंट और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि गार्ड या बिल्डिंग मालिक ने जानबूझकर किसी साक्ष्य को नष्ट किया हो। शिलॉन्ग के ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिगम ने अदालत में बताया कि शुरुआती परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद की जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। शिलॉन्ग में खाई में मिला था राजा का शव इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की 11 मई को सोनम के साथ शादी हुई थी। 20 मई को राजा और सोनम हनीमून के लिए इंदौर से मेघालय रवाना हुए थे। 22 मई को दोनों सोहरा की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने एक एक्टिवा भी किराए पर ली थी। पेड़ काटने वाले हथियार से की गई राजा की हत्या 24 जून को राजा-सोनम से परिवार का संपर्क टूट गया था। 27 मई से दोनों की सर्चिंग शुरू की गई। 29 मई को तेज बारिश के कारण सर्चिंग रोकनी पड़ी थी। इसके बाद 30 मई को दोबारा सर्चिंग शुरू की गई। 2 जून को खाई में राजा का शव मिला। 3 जून को राजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसकी हत्या पेड़ काटने वाले हथियार से की गई थी। सोनम यूपी के गाजीपुर स्थित एक ढाबे पर मिली इसके बाद पुलिस सोनम की तलाश में जुट गई। 9 जून को सोनम यूपी के गाजीपुर स्थित एक ढाबे पर मिली थी। इसके बाद परत-दर-परत मामले में कई खुलासे हुए। इन खुलासों ने रघुवंशी परिवार सहित सभी को चौंका दिया था। इसमें मामले में पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कहां रुके थे सोनम और विशाल? पुलिस जांच में सामने आया था कि राजा की हत्या के बाद सोनम रघुवंशी और विशाल चौहान कुछ समय के लिए इंदौर के लसूड़िया क्षेत्र स्थित एक बिल्डिंग में ठहरे थे। यह बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर शिलॉम जेम्स के किराए की बताई गई थी, जिसे ब्रोकर के माध्यम से लिया गया था। कमरे का एग्रीमेंट विशाल चौहान के नाम पर हुआ था। इसी कड़ी में गार्ड और बिल्डिंग मालिक की भूमिका की जांच की गई, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की 11 मई को सोनम से शादी हुई थी। 20 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय रवाना हुए। 22 मई को वे सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र घूमने निकले, जहां 2 जून को राजा का शव एक खाई में मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसकी हत्या पेड़ काटने वाले धारदार हथियार से की गई थी। मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी, राज कुशवाह और अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। recent visitors 34

टाइगर रिज़र्व में शिकार की कोशिश नाकाम, 3 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर छत्तीसगढ के गरियाबंद और धमतरी जिलें में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व  के कोर क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। यहाँ मुख्य रूप से संकटग्रस्त एशियाई जंगली भैंसों और बाघों के संरक्षण के लिए विशेष प्रजनन केंद्र, गश्ती, और सामुदायिक भागीदारी जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। हाल ही में पेरेग्रीन फाल्कन जैसे दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी भी यहाँ के बेहतर पारिस्थितिक तंत्र का संकेत देती है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए वन विभाग एवं एंटी पोचिंग टीम ने अवैध शिकार में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के मद्देनज़र क्षेत्र में बढ़ाई गई विशेष निगरानी के दौरान की गई।  वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के नागेश बीट में नियमित गश्त के दौरान छह संदिग्ध सशस्त्र व्यक्तियों की गतिविधि देखी गई। तत्काल कार्रवाई करते हुए एंटी पोचिंग टीम ने घेराबंदी कर राजमन यादव को मौके से हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों गुप्ताराम, भादुराम तथा ओडिशा के कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में अवैध रूप से डेरा डालने की बात स्वीकार की। जांच में सामने आया कि 16 जनवरी 2026 को गोमारझरी नाले के पास पानी पीने आए जंगली सुअरों का शिकार किया गया। इसके बाद मांस को टांगापानी गांव ले जाकर आपस में बांटा गया।  टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक श्री वरुण जैन के मार्गदर्शन में तथा गरियाबंद पुलिस के सहयोग से 20 जनवरी 2026 को मुख्य आरोपी गुप्ताराम को भूतबेड़ा बाजार से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के घर से एक भरमार बंदूक, 3.100 किलोग्राम जंगली सुअर का मांस, भालू का पंजा तथा शिकार में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए। वहीं अन्य आरोपी भादुराम के घर से वन्यजीवों को फंसाने के लिए उपयोग किए जाने वाले फंदे और क्लच वायर जब्त किए गए। रिकॉर्ड जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी पेशेवर शिकारी हैं तथा मुख्य आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी वन्यजीव अपराध का प्रकरण दर्ज है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को 22 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 13 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।  उल्लेखनीय है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उनके मार्गदर्शन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में नियमित रूप से एंटी स्नेर वॉक अभियान, सतत गश्त और निगरानी को सुदृढ़ किया गया है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप वन विभाग अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। recent visitors 41

राजस्थान में 2497 गांव-ढाणियों की बुझेगी प्यास, 4 जिलों को 3645 करोड़ आवंटित

जयपुर. मेवाड़ और वागड़ के सीमावर्ती जिलों में गहराते जल संकट को खत्म करने के लिए सरकार ने 'जाखम बांध पेयजल परियोजना' को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के जरिए चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पाइप लाइन से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया जाएगा। इसके प्रथम चरण में 1692.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसकी टेक्निकल बिड जल्द खोली जाएगी। दूसरे चरण में उदयपुर और राजसमंद के गांव-ढाणी में पानी पहुंचाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 3645.56 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जल जीवन मिशन के तहत होंगे काम जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना के तहत पानी पहुंचाया जाएगा। पेयजल किल्लत से जूझते चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर और राजसमंद जिले के गांव-ढाणियों तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 3 वर्ष पहले जाखम बांध पेयजल परियोजना की घोषणा की थी। उक्त योजना को अब धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। योजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिले के करीब 800 गांवों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसकी टेक्निकल बिड को 16 फरवरी को खोली जाएगी। इसकी जांच में सब कुछ सही पाए जाने पर सरकार के पास फाइनेंशल स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने पर ही संबंधित फर्म को टेण्डर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के जल्द ही धरातल पर उतरने की उम्मीद जगी है। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रोजेक्ट की करीब तीन साल पहले घोषणा की गई थी। इसके बाद इसकी डीपीआर तैयार कराई गई है। अब टेण्डर प्रक्रिया चल रही है। दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ होंगे खर्च जाखम बांध पेयजल परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। दूसरे चरण में राजसमंद और उदयपुर जिले के 1697 गांव और ढाणी में पानी पहुंचाने की योजना है। इसमें राजसमंद जिले के 790 गांव-ढाणी और उदयपुर जिले के 907 गांव-ढाणी को शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1692.30 करोड़ एवं दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह होगा प्रोजेक्ट का फायदा – घरों तक शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी – लगातार गहराते पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा – गांव-ढाणी तक पानी पहुंचने से श्रम और समय की बचत होगी – इसके निर्माण कार्य आदि होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे यह ब्लॉक अतिदोहित की श्रेणी में चित्तौड़गढ़ जिले का अधिकांश भाग भू-जल उपयोग के मामले में अतिदोहित श्रेणी में है। इसमें भैंसरोडगढ़, गंगरार, बेगूं, डूंगला, बड़ी सादड़ी, भदेसर, चित्तौड़गढ़, राशमी भोपालसागर, कपासन और निम्बाहेड़ा ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में है। इन ब्लॉक का भूमिगत जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है। जाखम प्रोजेक्ट की जल्द खुलेगी टेक्निकल बिड जाखम बांध पेयजल परियोजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिला शामिल है। इसके लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं, इसकी टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जाएगी। इसके बाद ही कुछ बता पाएंगे। – सुनीत कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्री विभाग चित्तौड़गढ़ recent visitors 35

रेल नेटवर्क विस्तार के लिए हिमाचल को केंद्रीय बजट में 2,911 करोड़ रुपये आवंटित

शिमला  केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश को 2 हजार 911 करोड़ रूपए दिए गए हैं। यह राशि पूर्व में केंद्र में रही कांग्रेस सरकार द्वारा दी गई राशि से 27 गुना अधिक है। यह जानकारी आज केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल में 17 हजार 711 करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जिससे राज्य में न केवल रेल नेटवर्क बेहतर होगा बल्कि आम लोगों को भी सफर में आसानी रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य में नई रेल लाइनों, रेलवे स्टेशनों को बेहतर बनाने और सुरक्षा पर बड़ी मात्रा में निवेश किया जा रहा है।  अमृत स्टेशन योजना का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के चार स्टेशनों को अमृत स्टेशन योजना में शामिल किया गया है। इस पर 46 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं जबकि बैजनाथ-पपरोला तथा अंब अंदौरा रेलवे स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए राज्य में एक जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस भी चलाई जा रही है। रेल नेटवर्क के विस्तार और विद्युतीकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। वहीं 2014 से अब तक करीब 16 किमी. की रेल लाइनों का निर्माण भी हुआ है। इसके अलावा 26 फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनाए गए हैं। वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से रेल नेटवर्क के विस्तार में पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे परियोजनाओं को जल्द पूरा करवाने में रेल मंत्रालय का सहयोग करें।  recent visitors 43

कल्याण सिंह कैंसर संस्थान लखनऊ और वाराणसी में टाटा मेमोरियल की तर्ज पर बने केंद्र

लखनऊ कैंसर के इलाज के लिए अब उत्तर प्रदेश के मरीजों को दिल्ली या मुंबई की ओर रुख करने की मजबूरी नहीं रही। लखनऊ से वाराणसी तक स्थापित कैंसर ट्रीटमेंट नेटवर्क प्रदेश को देश में सबसे बड़ी व सुलभ कैंसर उपचार व्यवस्था के रूप में स्थापित कर रहा है। लखनऊ में कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान और वाराणसी में टाटा मेमोरियल की तर्ज पर बने केंद्रों की सफलता ने यूपी में स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर ही बदल दी है। स्थिति ये है कि अब बिहार व नेपाल तक के मरीज इलाज के लिए यूपी आ रहे हैं। योगी सरकार के बहुस्तरीय प्रयासों का परिणाम है कि कैंसर की स्क्रीनिंग से लेकर सुपर स्पेशियलिटी इलाज और आर्थिक सहायता तक, हर स्तर पर सुविधाएं मजबूत हुई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत स्वास्थ्य ढांचे का व्यापक विस्तार किया गया है। कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में 220 बेड, एक छत के नीचे समग्र इलाज लखनऊ के चक गजरिया में स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान आज अत्याधुनिक कैंसर उपचार का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। 220 बेड, आधुनिक रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और सर्जरी की सुविधाओं के साथ यह संस्थान एक ही छत के नीचे समग्र इलाज उपलब्ध करा रहा है। वाराणसी में त्वरित और प्रभावी इलाज वाराणसी में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल पूर्वांचल के लिए जीवनरेखा साबित हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष प्रयासों से शुरू हुए ये संस्थान टाटा मेमोरियल मॉडल पर कार्य कर रहे हैं। लखनऊ और वाराणसी के बीच विकसित यह सुविधा रेफरल सिस्टम, विशेषज्ञ परामर्श और तकनीकी सहयोग के जरिए मरीजों को त्वरित और प्रभावी इलाज दे रही है। स्क्रीनिंग से लेकर सर्जरी तक मजबूत व्यवस्था पिछले तीन वर्षों में सरकारी अस्पतालों में कैंसर ओपीडी, सफल सर्जरी और उपचार में बड़ी सफलता मिली है। जिला गैर-संचारी रोग (एनसीडी) क्लिनिक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच सुविधा उपलब्ध कराई गई है। विशेष रूप से महिलाओं में स्तन व सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही चल सके और मृत्यु दर घटाई जा सके। सीएम योगी का निर्देश, धन के अभाव में न रुके इलाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकना चाहिए। इसके तहत आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी संख्या में कैंसर मरीजों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। आयुष्मान कार्ड जारी करने में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए अंतिम सुरक्षा कवच बना है। बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को सीधे अस्पतालों के माध्यम से आर्थिक सहायता दी गई है, जिससे धन के अभाव में इलाज न रुकने पाए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक की दिशा में बढ़े कदम किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों में बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग को सशक्त किया गया है, ताकि बच्चों में कैंसर का इलाज प्राथमिकता पर हो। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को कैंसर जांच और उपचार में शामिल करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। recent visitors 43