एनएचएआई की पहल से स्कूली बच्चों को राहत, 102 बच्चों को मिलेंगे मुफ्त चश्मे

रायपुर. एनएचएआई की पहल : 1500 स्कूली बच्चों की हुई नेत्र जांच, 102 को मिलेंगे मुफ्त चश्मे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नेशनल हाईवे इन्फ्रा ट्रस्ट (एनएचआईटी) की संयुक्त पहल से रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना मार्ग पर स्थित विद्यालयों में नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत कुल 1498 छात्र-छात्राओं की आंखों की जांच की गई। रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तरपोंगी, भोजपुरी एवं मुढ़ीपार टोल प्लाजा के समीप संचालित शासकीय विद्यालयों में ये शिविर लगाए गए थे, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने बच्चों की दृष्टि का बारीकी से परीक्षण किया। जांच के दौरान 102 विद्यार्थियों में दृष्टि दोष पाया गया, जिन्हें जल्दी ही निःशुल्क चश्मे प्रदान किए जाएंगे। रायपुर परियोजना निदेशक श्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि एनएचएआई राजमार्गों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास निवास करने वाले समुदायों के सामाजिक और स्वास्थ्य कल्याण के प्रति भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इन्हीं प्रतिबद्धताओं के चलते आज स्कूलों में नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया गया है। recent visitors 33

धामी के नेतृत्व में बड़ा कीर्तिमान: राज्य बनने के बाद पहली बार 6 करोड़ का वार्षिक आंकड़ा पार

देहरादून पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल रंग लाई है। प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने नया कीर्तिमान बनाया है। वर्ष 2025 में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक उत्तराखंड आए हैं, जो राज्य गठन के बाद से अब तक की सर्वाधिक संख्या है। हरिद्वार में सबसे अधिक तीन करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचे हैं, जबकि देहरादून में 67 लाख 35 हजार 71 और टिहरी जनपद में 53 लाख 29 हजार 759 सैलानी आए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिली है। पर्यटन विकास के लिए जहां कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, वहीं पर्यटन-तीर्थ स्थलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खास जोर दिया गया है। पर्यटकों-तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं। धामी सरकार के इन प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 6 करोड़ 3 लाख 21 हजार 194 पर्यटक उत्तराखंड आए हैं। इनमें एक लाख 92 हजार 533 विदेशी सैलानी शामिल हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों की संख्या छह करोड़ के पार पहुंची है। पूर्व के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में 2,00,18,115, 2022 में 5,39,81,338, 2023 में 5,96,36,601 और वर्ष 2024 में 5,95,50,277 पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों ने उत्तराखंड का रुख किया है। इसे से लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। हमारी सरकार राज्य में पूरे वर्ष पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, ताकि पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय निवासियों और युवाओं को सालभर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। शीतकालीन यात्रा इसी की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा जी के दर्शन को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा की यात्रा पर आने के बाद राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में यात्री उत्तराखंड पहुंचे हैं। हमने पर्यटक सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इन्हीं सब प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है। recent visitors 36

नेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 9 खिलाड़ियों ने लहराया परचम

बिलासपुर कलेक्टर-एसएसपी ने नेपाल में होने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए दी शुभकामनाएं राजस्थान के जयपुर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों ने जिले के साथ-साथ प्रदेश का भी नाम रौशन किया है। 30 जनवरी एवं 1 फरवरी की हुए इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ से खेलो ताइक्वांडो यूथ स्पोर्ट्स फेडरेशन के 11 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 खिलाड़ियों का नेपाल में होने वाले अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिमा के लिए चयन हुआ है। खिलाड़ियों ने कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह से मुलाकात की। कलेक्टर एवं एसएसपी ने खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि उन्होंने जिले सहित पूरे प्रदेश का नाम रौशन किया है। कलेक्टर एवं एसएसपी ने नेपाल में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कोच रिमझिम गुप्ता, मैनेजर चंद्र प्रकाश एवं अंतरराष्ट्रीय मास्टर गणेश सागर ने खिलाड़ियों का नेतृत्व किया। विजेता खिलाड़ी अमन गेंडारे, ऋषभ पटेल, कान्हा गुप्ता, संजनी, नीलिमा, विमल साहू, आर्यन सागर अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाएंगे। जयपुर राजस्थान से वापसी के दौरान रेलवे स्टेशन पर सभी चयनित खिलाड़ी, कोच एवं मैनेजर का फूल-मालाओं, के साथ भव्य स्वागत किया गया।  recent visitors 34

गांव-गांव तक सुविधा: मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने बदला सफर का अनुभव

रायपुर. मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सफर हुआ सफर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य सुदूर वनांचल, विशेषकर बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में, ग्रामीणों को सुलभ और सुरक्षित परिवहन प्रदान करना है। इस योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों को जिला मुख्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों से जोड़ा जा रहा है। दूरस्थ अंचलों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस की पहुंच से राह हुई आसान  मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना न केवल सड़कों पर दौड़ रही है, बल्कि यह ग्रामीणों के समय, सुविधा और सपनों को सहेजने का माध्यम बन गई है। सरगुजा जिले के बादा से बरियों, चारपारा, ककना, सिधमा, अखोराखुर्द, रूखपुर, चिखलाडीह, नर्मदापारा, सरगवां और अम्बिकापुर तक बस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों में भारी उत्साह है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की दूरगामी सोच और संवेदनशीलता का परिणाम है कि आज सरगुजा जिले के उन दूरस्थ अंचलों में भी विकास की गूंज सुनाई दे रही है, जहां कभी परिवहन एक बड़ी चुनौती थी।  मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सफर हुआ सुगम हुआ सफर, समय की हुई बचत  शहरी स्वास्थ्य अस्पताल में कार्यरत श्रीमती परमानिया पैकरा ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि इस मार्ग पर यह पहली बस सेवा है। उन्होंने कहा कि, पहले ड्यूटी पर समय से पहुंचना और फिर सुरक्षित घर वापस आना एक बड़ी चिंता होती थी। लेकिन जब से यह बस शुरू हुई है, हमें बहुत सुविधा मिल रही है। अब हम समय पर अस्पताल पहुंचते हैं और वक्त पर घर भी लौट आते हैं। इसी तरह स्वास्थ्य कर्मी चंदा टोप्पो ने बताया कि बांदा क्षेत्र से होने के कारण पहले आवागमन के साधन न के बराबर थे। बस सेवा शुरू होने से अब उनकी पेशेवर जिंदगी आसान हो गई है और इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का तहे दिल से आभार व्यक्त किया है। वरदान साबित हो रही बस सेवा विद्यार्थियों के लिए        विद्यार्थियों के जीवन में इस योजना से क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है। पुष्पेंद्र कॉलेज ऑफ नर्सिंग की फाइनल ईयर की छात्रा लक्ष्मी कहती हैं कि पहले मुझे बस पकड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब बस मेरे घर के सामने से ही गुजरती है। इससे मैं पढ़ाई के लिए बहुत सहज महसूस करती हूँ। वहीं पीजी कॉलेज की छात्रा निशा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले उसे बस पकड़ने के लिए 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। अब सिदमा गाँव से ही बस मिलने के कारण वह सीधे गाँधी चौक तक का सफर बिना किसी परेशानी के तय कर रही है। सरगुजा जिले के सिदमा गाँव के निवासी दिव्यांशु सिंह ने बताया कि बस सुविधा न होने के कारण उन्हें प्रतिदिन 5 किलोमीटर तक बाइक या पैदल सफर तय करना पड़ता था। दिव्यांशु कहते हैं कि अब गाँव से ही बस चलने लगी है, जिससे मैं अपने स्कूल समय पर पहुँच जाता हूँ। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को इस सराहनीय पहल के लिए आभार व्यक्त किया। विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे सुदूर वनांचल के गाँव       मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना एक वाहन नहीं, बल्कि सुशासन का वह भरोसा है जिसने सुदूर क्षेत्रों को शहर की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। नियमित बस के संचालन से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति सशक्त बन रहे हैं। आज सरगुजा के सुदूर वनांचल की सड़कों पर दौड़ती मुख्यमंत्री ग्रामीण बस प्रदेश की प्रगति की नई कहानी गढ रही हैं। recent visitors 28

सरदार सरोवर प्रभावितों के लिए राहत: आवासीय भूखंडों का पंजीकरण अब बिना शुल्क

सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय 6 विभागों की 10 योजनाओं की निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मैहर एवं कटनी जिले की 620 करोड़ रूपये से अधिक की 2 सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदा घाटी की सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित किये गए आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय लिया गया। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अनुसार देय पंजीयन शुल्क एवं स्टॉम्य ड्यूटी की प्रतिपूर्ति नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा की जायेगी। इससे 25,600 से अधिक परिवारों को लाभ होगा। इस निर्णय से राज्य शासन पर 600 करोड़ रूपये का वित्तीय भार आयेगा। मैहर एवं कटनी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मैहर एवं कटनी जिलें में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार मैहर एवं कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना लागत 53 करोड़ 73 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। इससे 3500 हेक्टयर में सिंचाई की सुविधा प्राप्त होंगी और मैहर एवं कटनी जिले के 9 ग्राम के 2810 कृषक लाभान्वित होंगे। कटनी जिलें की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना लागत 566 करोड 92 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे, कटनी जिले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के 27 ग्राम के 11,500 कृषक लाभान्वित होंगे और 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होंगी। 10 योजनाओं की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा 6 विभागों की 10 योजनाओं की वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार वित्त विभाग की लोक वित्त पोषित 500 करोड़ से कम की 8 योजनाओं के लिए 115 करोड़ 6 लाख रुपये, श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के लिए 5 हजार करोड़ रुपये, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की विधानसभा क्षेत्र निर्वाचन योजना और स्थापना एवं कार्यालयीन योजनाओं के लिए 3 हजार 376 करोड़ 66 लाख रूपये, पशु पालन एवं डेयरी विभाग की डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना, पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर ब्लॉकग्रांट योजना एवं पशुपालन, पशु विकास और गौ संवर्धन योजना के लिए 6 हजार 472 करोड़ 18 लाख रुपये, महिला एवं बाल विकास की किशोर कल्याण निधि योजना और घरेलू हिंसा पीड़िता के लिए सहायता योजना के लिए 24 करोड़ 70 लाख रूपये और पिछड़ा वर्ग एवं अन्य कल्याण की अल्पसंख्यक स्वरोजगार/उद्यम योजना के लिए 21 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर कर्मचारियों का संविलयन महिला बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति प्रदान की गई।   recent visitors 33

क्रिकेट का आर्थिक सच: IND vs PAK एक मैच ने ICC को किया भारी नुकसान, PCB की 7 साल की कमाई के बराबर

 नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान ने भारत के साथ खेलने से इनकार किया है. दोनों के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में ग्रुप स्टेज का मैच था. पाकिस्तान सरकार ने ये कदम वर्ल्ड कप शुरू होने के 5 दिन पहले उठाया है, जिसने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान के इस कदम से आईसीसी को भारी आर्थिक घाटा होगा. आईसीसी टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान मुकाबला करीब 250 मिलियन डॉलर (2200 करोड़ रुपये से अधिक) का राजस्व पैदा करता है. कई रिपोर्ट्स में इस रेवन्यू को 3 हजार करोड़ से ज्यादा का बताया गया है. ऐसे में अगर ये मैच नहीं होता है तो इसका खामियाजा सभी हितधारकों को भारी आर्थिक नुकसान के रूप में उठाना पड़ेगा. पाकिस्तान की सालाना कमाई से समझें नुकसान का गणित पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की साल भर की कमाई की बात करें तो वह 35-45 मिलियन डॉलर के बीच आती है. यानी 300 से 400 करोड़ रुपये की कमाई पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की सालाना है. इसमें आईसीसी से पाकिस्तान को मिलने वाले रेवन्यू, PSL की कमाई, सीरीज और टिकट की कीमत से लेकर स्पॉनसरशिप से मिलने वाली आमदनी का लेखा-जोखा है. हालांकि, पीसीबी की कमाई का मुख्य जरिया आईसीसी से मिलने वाला रेवन्यू शेयर है, जो उसकी कुल कमाई का 80 फीसदी से ज्यादा बताया जाता है. अब भारत-पाक मैच की कमाई जान लीजिए अब अगर भारत पाकिस्तान के एक आईसीसी मुकाबले की कमाई की बात करें तो ये 2200 करोड़ रुपये से ज्यादा की है. कई बार इसे 3 हजार करोड़ से ज्यादा भी आंका गया है. यानी साफ है कि पाकिस्तान 7 साल में जितना पैसा कमाता है उतना रेवन्यू भारत-पाक के एक मैच से ही पैदा होता है.  ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि आईसीसी की कमाई का सबसे बड़ा जरिया भारत-पाकिस्तान का मैच है. क्योंकि इसे पूरी दुनिया में लोग देखते हैं और कई करोड़ों का विज्ञापन भी मिलता है. यही कारण है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज न होने के बावजूद भी आईसीसी इन्हें मल्टी नेशनल्स टूर्नामेंट में एक ही ग्रुप में रखता है. ताकि दोनों के बीच टक्कर हो.   10 सेकेंड के स्लॉट की कीमत 40 लाख अगर वर्ल्ड कप में दोनों के बीच टक्कर नहीं हुई तो मेजबान ब्रॉडकास्टर को सिर्फ विज्ञापन से ही 200 से 250 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले में 10 सेकंड का विज्ञापन स्लॉट 40 लाख रुपये तक में बिकता है. ऐसे में ये तो साफ है कि अगर पाकिस्तान ने ये मैच बायकॉट करने की हिमाकत की तो आईसीसी को भारी नुकसान होगा. फिर आईसीसी इसकी भरपाई का आदेश पाकिस्तान को दे सकता है या उसपर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है. इससे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पूरी तरह से तबाह हो सकता है.  भारत को बिना खेले मिलेगा दो अंक अगर भारत-पाकिस्तान के बीच मैच नहीं होता है तो टीम इंडिया को बिना खेले ही वॉक ओवर मिल जाएगा. उसे फ्री में दो अंक मिल जाएंगे और पाकिस्तान को नेट रन रेट का भी भारी नुकसान होगा. जिससे वर्ल्ड कप में उसकी आगे की राह खतरे में पड़ सकती है. पाकिस्तान ने तोड़ा है समझौता पाकिस्तान की ड्रामेबाजी पिछले कई दिनों से जारी है. एशिया कप में भी टीम ने टूर्नामेंट बहिष्कार की धमकी दी थी. लेकिन फिर खुद ही खेलने आ गया था. इस बार भी बांग्लादेश और भारत के क्रिकेट बोर्ड में चल रही तनातनी में वह बीच में कूद गया.  पाकिस्तान ने ही बांग्लादेश को भड़काया और आखिरकार उसे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा. फिर उसके बाद पाकिस्तान ने भी बायकॉट की धमकी दी. और फिर खुद ही केवल भारत के साथ मैच को न खेलने की बात कहने लगा. पाकिस्तान ने ऐसा कदम उठाने की हिमाकत तब की है जब आईसीसी, पीसीबी और बीसीसीआई के बीच 2027 तक भारत-पाकिस्तान मैचों के लिए हाइब्रिड मॉडल पर सहमति बनी हुई है. ये साफतौर पर सहमति है कि दोनों देश आईसीसी टूर्नामेंट्स में न्यूट्रल वेन्यू पर खेलेंगे. ऐसे में पाकिस्तान बोर्ड के लिए इस तरह के चयनात्मक बहिष्कार को सही ठहराना आसान नहीं होगा. अब आईसीसी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर एक मीटिंग बुलाई है. कहा जा रहा है की पाकिस्तान पर कड़े  एक्शन को लेकर इसमें चर्चा हो सकती है.   संभावित आईसीसी प्रतिबंध क्या हो सकते हैं? * पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर रोक, साथ ही लीग से अंतरराष्ट्रीय मान्यता और व्यावसायिक समर्थन वापस लेना. * आईसीसी के राजस्व पूल से पाकिस्तान को मिलने वाली राशि में भारी कटौती, जिस पर पीसीबी की आर्थिक निर्भरता काफी हद तक है. * भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होने से हुए भारी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए ब्रॉडकास्टर को मुआवजा देने का निर्देश. * एशिया कप से बाहर किया जाना * पाकिस्तान से जुड़ी सभी द्विपक्षीय सीरीज़ पर रोक. recent visitors 32

आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा बयान, इन्सेंटिव वितरण को पारदर्शी बनाने के निर्देश

आयुष्मान भारत योजना की इन्सेंटिव वितरण प्रणाली को बनायें पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों एवं सहायक चिकित्सकीय स्टॉफ को आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत प्रदाय की जाने वाली इन्सेंटिव व्यवस्था की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि इंसेंटिव वितरण प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध बनाया जाए, ताकि पात्र चिकित्सकों एवं स्टॉफ को समय पर प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो सके। उन्होंने डेटा एंट्री प्रक्रिया को सरलीकृत एवं सुगम बनाने तथा समयबद्ध डेटा एंट्री सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मैन पॉवर की व्यवस्था किए जाने के निर्देश भी दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपलब्ध कुशल एवं दक्ष मैनपावर को प्रोत्साहन देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उनका मनोबल बना रहे और वे पूर्ण ऊर्जा, प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय कर सकें। इससे आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सकेगा। बैठक में आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजु एस एवं आयुष्मान भारत योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. योगेश भरसट उपस्थित रहे।   recent visitors 30