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Monday, June 22, 2026 1:42 pm

उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस दोनों जातिगत समीकरण साधने लगा रहे ताकत, आदिवासी वोटर होंगे निर्णायक

By-election: Both BJP and Congress are trying to balance caste equations, tribal voters will be decisive

  • भाजपा और कांग्रेस में कड़ी टक्कर।

मध्य प्रदेश में दो सीटों बुधनी और विजयपुर सीट पर 13 नवंबर को उपचुनाव के लिए मतदान होना है। इन दोनों ही सीटों पर प्रमुख राजनीतिक दल जातीय समीकरण साधने पर जोर लगा रहे हैं। विजयपुर में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में है। 

भोपाल। प्रदेश की उपचुनाव वाली बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीट पर सियासी पारा तेज हो गया है। दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस ने जातिगत समीकरण साधने के लिए नेताओं की पूरी फौज उतार दी है। विजयपुर सीट पर अनुसूचित जनजाति वोटर निर्णायक भूमिका में है। यह सीट कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। कांग्रेस इस सीट पर अभी तक ओबीसी प्रत्याशी उतारती आई थी। इस बार कांग्रेस ने आदिवासी कार्ड खेला है। कांग्रेस ने इस सीट पर मुकेश मल्होत्रा को प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने पिछली बार निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 44 हजार वोट प्राप्त किए थे। 

विजयपुर में आदिवासी वोट 60 हजार से ज्यादा हैं। यहां पर सहरिया जनजाति के अलावा कुशवाह, धाकड़ व गुर्जर वोटर बड़ी संख्या में हैं। भाजपा ने सहरिया वोट साधने के लिए पूर्व भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी को सहरिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया है। भील भिलाला वोटर्स को साधने के लिए मंत्री निर्मला भूरिया को जिम्मेदारी दी है। वहीं, कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के लोगों को साधने के लिए आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष रामू टेकाम और विधायक हीरालाल अलावा समेत अन्य नेताओं को जिम्मेदारी दी है। विजयपुर में अब तक 15 चुनाव हुए हैं। इसमें नौ बार कांग्रेस और छह बार भाजपा चुनाव जीती है। भाजपा काम तो कांग्रेस ने कुपोषण-गरीबी के साथ ही बिकाऊ और टिकाऊ का नाराज दिया है

बुधनी सीट दिग्गजों ने झोंकी ताकत

बुधनी विधानसभा सीट केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा है। यहां पर किरार, पवार, ब्राह्मण, यादव ओर राजपूत के साथ ही आदिवासी वोटर्स भी है। इस सीट पर 2003 से लगातार भाजपा चुनाव जीतते आ रही है। इस सीट पर भाजपा ने रमाकांत भार्गव और कांग्रेस ने राजकुमार पटेल को प्रत्याशी बनाया है। पटेल किरार समाज से आते हैं, जो बुधनी में निर्णायक वोट बैंक माना जाता है। इसलिए यहां पर चुनाव कांटे की टक्कर वाला है। वह 1993 में इस सीट पर चुनाव जीत चुके हैं। बुधनी में 1957 से अब तक 17 बार चुनाव हुए हैं। इसमें 11 बार भाजपा और 5 बार कांग्रेस चुनाव जीती है। एक बार 1962 में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। यहां पर भाजपा विकास तो कांग्रेस सरकार को जगाने जनता से वोट मांग रही है। इस सीट पर भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत कई दिग्गज चुनाव मैंदान में जुटे हुए हैं।

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1 thought on “उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस दोनों जातिगत समीकरण साधने लगा रहे ताकत, आदिवासी वोटर होंगे निर्णायक”

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