चाइनीज लहसुन पर सवाल बड़े, सरकार की निगरानी छोटी क्यों? आजादपुर मंडी से उठी कई गंभीर चिंताएं

Serious questions raised about Chinese garlic—why is government oversight so lax? Several grave concerns emerge from Azadpur Mandi.

  • भारतीय किसानों की मेहनत और उपभोक्ताओं की सेहत के बीच सरकार की जिम्मेदारी कहां है?

नई दिल्ली। देश की राजधानी की आजादपुर मंडी से सामने आई तस्वीरें लहसुन के कारोबार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बाजार में देशी और कथित चाइनीज लहसुन की मौजूदगी को लेकर चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकार की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

मामला सिर्फ लहसुन के बाजार तक सीमित नहीं है। इसके साथ सीधे तौर पर भारतीय किसानों की आय, उपभोक्ताओं के अधिकार, खाद्य सुरक्षा और सरकारी जांच व्यवस्था जुड़ी हुई है।

सरकार बताए—बाजार में बिक रहे लहसुन की जांच कौन कर रहा है?

यदि किसी विदेशी मूल के लहसुन के बाजार में पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे स्पष्ट करें कि बाजार में उपलब्ध उत्पाद कहां से आया, किस रास्ते से आया और क्या निर्धारित खाद्य एवं गुणवत्ता मानकों की जांच पूरी हुई?
सवाल यह भी है कि मंडियों में नियमित रूप से खाद्य उत्पादों के नमूने लिए जाते हैं या नहीं। अगर जांच होती है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
सरकार को सिर्फ यह कहने से आगे बढ़ना होगा कि व्यवस्था मौजूद है। जनता जानना चाहती है कि व्यवस्था जमीन पर काम भी कर रही है या नहीं।

किसान मेहनत करे और बाजार में मुकाबला किससे करे?

भारतीय किसान लहसुन की खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और भंडारण पर पैसा खर्च करता है। फसल तैयार होने के बाद उसे बाजार भाव का इंतजार रहता है।
ऐसे में यदि विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले और बाजार में प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष रहे।

यहां सवाल सीधा है—

क्या सरकार के पास ऐसा कोई प्रभावी तंत्र है जो किसानों को बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचा सके?

सेहत पर सवाल हैं तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?

चाइनीज लहसुन को लेकर सोशल मीडिया और बाजार में स्वास्थ्य संबंधी कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन किसी भी खाद्य उत्पाद को सिर्फ उसके देश के आधार पर खतरनाक घोषित नहीं किया जा सकता।
अगर सरकार के पास किसी उत्पाद की गुणवत्ता या सुरक्षा को लेकर कोई ठोस शिकायत है, तो सैंपल लिए जाएं, प्रयोगशाला में जांच हो और रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।

आखिर सवाल यह है कि—

क्या सरकार ने बाजार में बिक रहे ऐसे लहसुन के नमूनों की व्यापक जांच कराई है?
अगर कराई है तो रिपोर्ट क्या कहती है?
और अगर नहीं कराई है तो बिना जांच के उपभोक्ता की सुरक्षा सुनिश्चित कैसे होगी?

आजादपुर मंडी सिर्फ एक मंडी नहीं, सरकार के लिए परीक्षा है

आजादपुर मंडी जैसे बड़े बाजार में खाद्य उत्पादों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां आने वाले उत्पादों की गुणवत्ता, स्रोत और बिक्री व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी उपभोक्ताओं का अधिकार है।
सरकार से यह भी पूछा जाना चाहिए कि मंडियों में फूड सेफ्टी, सप्लाई चेन और उत्पादों की उत्पत्ति की निगरानी कितनी नियमित है।
कागजों में नियमों की लंबी सूची होना अलग बात है और उन नियमों का जमीन पर पालन होना अलग।

सवाल लहसुन से बड़ा है

मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि लहसुन भारतीय है या विदेशी। असली सवाल यह है कि क्या भारत का बाजार किसान और उपभोक्ता—दोनों के हितों की रक्षा करने में सक्षम है?
यदि उत्पाद सुरक्षित है तो सरकार जांच रिपोर्ट के साथ जनता को भरोसा दे। यदि कोई गड़बड़ी है तो दोषियों पर कार्रवाई करे।
क्योंकि किसान की फसल और आम आदमी की थाली—दोनों को सिर्फ दावों की नहीं, पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है।

अब सरकार को जवाब देना चाहिए—आखिर बाजार में कौन निगरानी कर रहा है और उसकी निगरानी की निगरानी कौन कर रहा है?

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