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Saturday, June 20, 2026 7:32 pm

औरंगजेब और गाजी विवाद के बीच बहराइच में खूब बरसे CM योगी, आक्रांता का महिमामंडन मतलब देशद्रोह

बहराइच
औरंगजेब और सलार गाजी विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के बहराइच में खूब बरसे। उन्होंने कहा कि आक्रांता का महिमामंडन मतलब देशद्रोह है। बहराइच ऋषि परम्परा से जुड़ा जनपद है। बहराइच की पहचान व नाम बालार्क ऋषि के नाम पर आगे चला था। यहां उनका आश्रम भी था। यह ऐसी ऐतिहासिक जगह है जहां पर एक विदेशी आकांता को धूल धूससरित करते हुए महाराज सुहलदेव ने भारत की विजय पताका को फहराया। महाराज सुहलदेव का शौर्य परामक्रम का इस स्तर का था उन्होंने विदेशी आकाताआं के साथ शौर्य का जो परिचय दिया था उसी की परिणित हुई कि 150 वर्ष तक कोई विदेशी आक्रांता भारत पर हमला करने का दुस्साहस नहीं कर पाया।

योगी आदित्यनाथ मिहींपुरवा तहसील के नए भवन का शुभारम्भ करने आए थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना साकार हो रही है। भारत की संस्कृति का गुणगान दुनिया कर रही है। पूरा देश एकजुट होकर कार्य कर रहा है। मैं सभी उत्तर प्रदेश वासियों से कहना चाहूंगा कि जब पूरी दुनिया में भारत की सनातन संस्क़ति व परम्परा का गुणगान हो रहा है। तो भारत के महापुरुषों के सम्मान का भाव हर नागरिक का दायित्व होना चाहिए। उन स्थितियों में किसी आक्रांता को महिमामंडन नहीं करना चाहिए। आक्रांता का महिमामंडन करना देशद्रोह की नींव को पुख्ता करना है। और स्वतंत्र भारत ऐसे किसी देशद्रोही को स्वीकार नहीं कर सकता है। जो भारत के महापुरुषों को अपमानित करता हो। उन आक्रांताओं को महिमामंडन करता हो जिन आक्रांताओं ने भारत की सनातन संस्कृति को रौंदने का काम किया था, बहन बेटियों की इज्जत पर हाथ डालने का काम कया था। आस्था पर प्रहार किया था। उसे आज का नया भारत कतई स्वीकार नहीं कर सकता है। और इसीलिए कहने आया हूं विकास की गाथा तभी आगे बढ़ सकती है जब हम विरासत को पूरे गौरव के साथ बढ़ाने का काम करते हैं। हमारी गौरव गाथा विरासत के साथ जुड़ी है। विरासत विकास से जुड़ा है।

प्रधानमंत्री ने की महाकुंभ की भूरि भूरि प्रशंसा
महाकुम्भ के बाद पूरी दुनिया भारत की संस्कृति व परम्परा को लेकर उत्तर प्रदेश की ओर देख रही है। प्रधानमंत्री ने महाकुंभ की भूरि भूरि प्रशंसा की है। मानवता का इतना बड़ा आयोजन सिर्फ उत्तर प्रदेश में संभव है। मां गंगा, यमुना, सरस्वती के त्रिवेणी पर 66 करोड़ लोगों ने स्नान किया है।

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