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जयपुर
राजस्थान के किसानों के लिये बड़ी खबर है। अप्रैल 2025 में सीएम ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुये कहा है कि बैंक द्वारा नीलाम हुई जमीन को सरकार उन्हें वापस दिलायेगी। इस खबर के बाद राज्य में हर्ष का माहौल है।

राजस्थान के किसानों के लिये बड़ी खबर है। अप्रैल 2025 में सीएम ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुये कहा है कि बैंक द्वारा नीलाम हुई जमीन को सरकार उन्हें वापस दिलायेगी। इस खबर के बाद राज्य में हर्ष का माहौल है। बता दें राज्य के जिन किसानों की जमीन बैंकों ने नीलाम कर अपने नाम कर ली थी, वे जमीनें अब राज्य सरकार वापस किसानों को सौंपेगी। मृतक ऋणियों के वारिसों को भी इस योजना का फायदा मिलेगा । इस योजना से न केवल किसानों और बल्कि छोटे उद्यमियों को राहत मिलेगी बल्कि बैंकों की वसूली और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

इन किसानों को मिलेगा योजना लाभ
राज्स्थान में मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत योजना सरकार ने लागू की है। इससे राज्य के कई हजार किसानों के लिए एक बड़ी राहत मिलेगी। अब वे किसान जिनकी जमीनें ऋण न चुका पाने के कारण नीलामी में बैंकों के नाम हो चुकी थीं, अब उन्हें अपनी जमीनें वापस पाने का अवसर मिलेगा। बता दें कि सरकार ने यह योजना राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

ब्याज में 100 प्रतिशत की छूट
इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को जमीन मिले और वे उन पर खेती उन किसानों को राहत प्रदान करना है जो सहकारी भूमि विकास बैंकों से लिए गए ऋण को समय पर चुकता नहीं कर पाए और जिनकी जमीनें नीलामी के माध्यम से बैंकों के नाम हो गई थीं। अब ऐसे किसान, यदि वे मूलधन और बीमा प्रीमियम की संपूर्ण राशि जमा कराते हैं, तो उन्हें ब्याज में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी और उनकी जमीनें वापस की जाएंगी।

योजना की पात्रता
वे सभी ऋणदाता जिनके ऋण 1 जुलाई, 2024 तक अवधिपार हो चुके हैं, इस योजना के तहत पात्र होंगे।मृतक ऋणियों के उत्तराधिकारी भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते वे आवश्यक राशि का भुगतान करें। जिन किसानों की जमीनें पहले ही नीलामी में बैंकों के नाम हो चुकी हैं, उन्हें भी यह योजना राहत प्रदान करेगी।

ब्याज राहत योजना 2025-26 को लागू
राजस्थान की सरकार ने मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत योजना 2025-26 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इस योजना की जानकारी सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने दी। मंत्री दक ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य डिफॉल्टर ऋणी सदस्यों को आर्थिक रूप से पुनः मुख्यधारा में लाकर उन्हें सशक्त बनाना है। इसके लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा पात्र लाभार्थियों को योजना का सीधा फायदा मिल सके ।  वहीं सहकारी ऋण व्यवस्था को भी मजबूती दी जा सके। यह योजना प्रदेश में सहकारी भूमि विकास बैंकों के तहत काम कर रहे किसानों और अन्य ऋणी सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है।

योजना का लाभ उठाने की अपील
सीएम ने कहा है कि जो भी किसान इस योजना का पात्र है और वे योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो वे ब्याज के अलावा मूलधन जमा करें और अपनी जमीन वापस लें।  बता दें कि इस योजना को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है और अब यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अधिकतम पात्र लाभार्थियों तक इसका लाभ पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से किया जाए, ताकि इसकी जानकारी हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे और वे इसका लाभ उठा सकें।

रणनीति बनाकर कार्य किया जाएं
 योजना के तहत शत-प्रतिशत वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जिन जिलों में सहकारी भूमि विकास बैंकों के ऋण बकाया की राशि अधिक है, वहां अलग से रणनीति बनाकर कार्य किया जाए, ताकि अपेक्षित परिणाम हासिल किए जा सकें। इसके अलावा, योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए तैयार किए जा रहे ऑनलाइन पोर्टल को पारदर्शी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाए जाने पर भी बल दिया गया।

सरकार की पहल
सहकारिता मंत्री की मानें तो यह योजना किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वे अपनी जमीनें पुनः प्राप्त कर सकेंगे और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगे। सरकार का उद्देश्य किसानों को वित्तीय संकट से उबारना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के माध्यम से राजस्थान सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे वे अपनी जमीनें पुनः प्राप्त कर सकेंगे और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगे।

 

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