ATM से पैसे निकालने वालों को बड़ा झटका! HDFC, PNB और IndusInd Bank ने जारी किए नए चार्ज

नई दिल्ली अगर आपकी एटीएम से बार-बार पैसे निकालने की आदत है तो इसे तुरंत बदल दें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो एक मई से आपको बड़ा नुकसान होने लगेगा। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एटीएम से पैसे निकालने के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। ये नए नियम पूरे देश में 1 मई 2025 से लागू होंगे। रिजर्व बैंक का कहना है कि इन बदलावों का मकसद एटीएम इस्तेमाल करने पर लगने वाले चार्ज को लेकर पारदर्शिता लाना है। इससे बैंकों को भी एटीएम नेटवर्क चलाने में आसानी होगी। दरअसल, हर बैंक अपने हर ग्राहक को एटीएम से पैसे निकालने की एक लिमिट तक फ्री सुविधा देता है। इसमें अपने बैंक के एटीएम और दूसरे बैंकों के एटीएम दोनों शामिल हैं। फ्री लिमिट के बाद बैंक चार्ज लेना शुरू करता है। एक मई से इस चार्ज में बढ़ोतरी हो रही है। फ्री लिमिट के बाद एटीएम ट्रांजैक्शन पर हर बार 1 मई के बाद प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 23 रुपये का शुल्क देना होगा। इस पर टैक्स अलग से लगेगा। अभी तक यह शुल्क 21 रुपये तक था। फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट क्या होगी? आरबीआई ने साफ कर दिया है कि अब भी मेट्रो शहरों में हर महीने 3 फ्री ट्रांजेक्शन मिलेंगे और नॉन-मेट्रो शहरों में 5 फ्री ट्रांजेक्शन की सुविधा रहेगी। यह लिमिट फाइनेंशियल जैसे कैश निकालने और नॉन-फाइनेंशियल जैसे बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट, पिन चेंज आदि दोनों ट्रांजेक्शन पर लागू होगी। फ्री लिमिट के बाद कितना चार्ज लगेगा? अगर आप फ्री लिमिट से ज्यादा ट्रांजेक्शन करते हैं तो अब हर अतिरिक्त ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये (प्लस टैक्स) देने होंगे। ये नियम सभी एटीएम पर लागू होगा। बैंक क्या कह रहे हैं? HDFC Bank ने बताया है कि 1 मई से अपने एटीएम से कैश निकालने पर फ्री लिमिट से ज्यादा ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये + टैक्स लगेगा। वहीं बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट और पिन चेंज जैसे नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन फ्री रहेंगे। PNB ने कहा है कि अन्य बैंकों के एटीएम पर फ्री लिमिट के बाद फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 11 रुपये (जीएसटी अलग) का चार्ज लगेगा। ये बदलाव 9 मई 2025 से लागू होगा। IndusInd Bank ने भी जानकारी दी है कि उनके सेविंग्स, सैलरी, एनआर और करंट अकाउंट होल्डर्स को 1 मई 2025 से फ्री लिमिट के बाद गैर-IndusInd एटीएम से निकासी पर 23 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन देना होगा। ग्राहकों के लिए सलाह ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने एटीएम ट्रांजेक्शन पर नजर रखें, खासकर जब दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हों। ज्यादा शुल्क से बचने के लिए कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा अपने बैंक के एटीएम का ही इस्तेमाल करें या डिजिटल पेमेंट का सहारा लें। कितनी बार है फ्री सुविधा     मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई आदि में ग्राहक महीने में तीन बार मुफ्त में एटीएम इस्तेमाल कर सकते हैं।     नॉन-मेट्रो शहरों में यह लिमिट पांच बार है। गैर-मेट्रो शहर वे होते हैं जो मेट्रो शहरों जितने बड़े नहीं होते।     यह लिमिट पैसे निकालने और दूसरी तरह के ट्रांजैक्शन, दोनों के लिए है। इसका मतलब है कि आप महीने में तीन या पांच बार ही मुफ्त में पैसे निकाल सकते हैं या बैलेंस चेक कर सकते हैं। कुछ बैंक के अलग हैं नियम कुछ बैंकों ने अधिकतम ट्रांजैक्शन में छूट दी है। इसमें एचडीएफसी बैंक भी शामिल है। एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों पर एचडीएफसी के एटीएम से पैसे निकालने पर ही चार्ज लगेगा। बैलेंस चेक करना, मिनी स्टेटमेंट निकालना और पिन बदलना मुफ्त होगा। अगर आप किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं तो पैसे निकालने के साथ-साथ बैलेंस चेक करने, मिनी स्टेटमेंट निकालने और पिन बदलने पर भी चार्ज लगेगा। होम नेटवर्क के बाहर का ATM पड़ेगा महंगा हर महीने की पहली तारीख को देश में कई नियमों में बदलाव होता है और अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 मई से भी कई बदलाव (Rule Change From 1st May) लागू होने जा रहे हैं. इसमें एटीएम से पैसे निकालने पर लगे वाले चार्ज से जुड़ा नियम भी शामिल हैं. जी हां, होम बैंक नेटवर्क के बाहर अगर किसी एटीएम मशीन से कोई भी ट्रांजैक्शन किया जाता है, या फिर बैलेंस चेक किया जाता है, तो यूजर को अब पहले से ज्यादा चार्ज देना पड़ेगा. अभी भी ऐसे एटीएम का उपयोग करने वाले चार्ज अप्लाई है और 1 मई से ये और भी बढ़ने वाला है. अब इतना बढ़ने वाला है खर्च केंद्रीय बैंक (RBI) ने बीते दिनों भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के प्रस्ताव के आधार पर फीस बढ़ाने की अनुमति दी थी. रिपोर्ट की मानें तो अब तक अगर ग्राहक अपने होम बैंक के ATM के बजाय किसी दूसरे नेटवर्क के बैंक एटीएम से पैसे निकालते थे, तो उन्हें हर ट्रांजैक्शन पर 17 रुपये चार्ज देना होता था, जो 1 मई से बढ़कर 19 रुपये हो जाएगा. इसके अलावा अगर किसी दूसरे बैंक के ATM से बैलेंस चेक करते थे, तो इस पर 6 रुपये का शुल्क लगता था, जिसे अब बढ़ाकर 7 रुपये कर दिया जाएगा. व्हाइट लेवल ATM ऑपरेटर्स की थी मांग ATM Transaction Fee Hike की मांग लगातार व्हाइट-लेबल एटीएम ऑपरेटर्स के द्वारा की जा रही थी. उनका तर्क था कि बढ़ती परिचालन लागतों को देखते हुए पुरानी फीस कम है. NPCI के प्रस्ताव को आरबीआी की मंजूरी के बाद अब छोटे बैंकों पर दबाव ज्यादा बढ़ने की आशंका है. दरअसल, वे अपने सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण दूसरे बैंकों के एटीएम नेटवर्क पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. ये जान लेना जरूरी है कि बढ़ी हुई इंटरचेंज फीस, वह राशि होती है जो एक बैंक दूसरे बैंक को तब देता है, जब उसका कोई ग्राहक दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल पैसों की निकासी के लिए करता है. गौरतलब है कि 'व्हाइट लेबल एटीएम' सरकारी और प्राइवेट बैंकों के एटीएम की तरह काम करते हैं. इसे बैंक की बजाय निजी या गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) लगाती हैं. इनसे आप डेबिट (Debit Card) और क्रेडिट कार्ट (Credit Card) के जरिए कैश विद्ड्ऱॉल, बैलेंस चेक या उन सभी सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं, जो अन्य एटीएम में मिलती हैं. क्या है बैंकों की … Read more

रेलवे की नई सुविधा, जल्द ही रेलगाड़ी में मिलेगी ATM की facility

नई दिल्ली आरामदायक कुर्सियों से लेकर अब ट्रेन में मोबाइल फोन चार्जिंग और लैंप जैसी कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। हालांकि, रेल के विकसित होने का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। खबर है कि रेलवे ने ट्रेनों में ATM यानी ऑटोमैटेड टैलर मशीन का परीक्षण शुरू कर दिया है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि व्यापक स्तर पर इसे कब लागू किया जाएगा। सेंट्रल रेलवे (CR) ने मुंबई-मनमाड पंचवटी एक्सप्रेस में प्रायोगिक आधार पर एटीएम लगाया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह एटीएम एक निजी बैंक द्वारा प्रदान किया गया है और इसे इस दैनिक एक्सप्रेस सेवा की वातानुकूलित चेयर कार कोच में स्थापित किया गया है। उनके अनुसार, इसे जल्द ही यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने कहा, 'पंचवटी एक्सप्रेस में प्रायोगिक आधार पर एटीएम स्थापित किया गया है।' रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह एटीएम कोच के पिछले हिस्से में एक क्यूबिकल में लगाया गया है, जहां पहले अस्थायी पेंट्री थी। ट्रेन के चलने के दौरान सुरक्षा और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक शटर दरवाजा भी लगाया गया है। अधिकारी ने बताया कि इस कोच में आवश्यक परिवर्तन मनमाड रेलवे कार्यशाला में किए गए। पंचवटी एक्सप्रेस मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और पड़ोसी नासिक जिले के मनमाड जंक्शन के बीच प्रतिदिन चलती है। यह ट्रेन लगभग 4 घंटे 35 मिनट में एक तरफ की यात्रा पूरी करती है। इस ATM को मनमाड़ रेलवे वर्कशॉप में विशेष तकनीकी और स्ट्रक्चरल बदलावों के साथ स्थापित किया गया है। कोच में अतिरिक्त इलेक्ट्रिकल सपोर्ट और आवश्यक संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं, ताकि मशीन ट्रेन की गति और झटकों के बावजूद सुचारू रूप से काम कर सके। इस प्रकार की सुविधा देने की शुरुआत भुसावल मंडल द्वारा आयोजित एक अभिनव गैर-किराया राजस्व ग्राहक संवाद बैठक में की गई थी। इस दूरदर्शी प्रस्ताव के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए, प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक (बैंक ऑफ महाराष्ट्र) ने नई नवाचारी गैर-किराया राजस्व विचार योजना (NINFRIS) के अंतर्गत औपचारिक योजना प्रस्तुत की। यह सुविधा खासकर उन यात्रियों के लिए बहुत फायदेमंद होगी, जो अचानक कैश की जरूरत में स्टेशन पर नहीं उतर सकते या फिर रिमोट इलाकों की यात्रा कर रहे हों। recent visitors 51

UPI के बढ़ते चलन ने घटाई ATM की मांग, ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा असर

मुंबई डिजिटल युग के इस दौर में, एक तरफ जहां कैशलेस ट्रांजेक्शन अपना तेजी से स्थान बना रही है और लोगों की रोमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग अब कैश के साथ ही साथ एटीएम का प्रयोग कम कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे प्रमुख कारण UPI पेमेंट्स का उभार है। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के माध्यम से लेन-देन आसान और तेज हो गया है, जिससे कैश निकासी की आवश्यकता में कमी आई है। देश में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते एटीएम के इस्तेमाल में गिरावट आई है। इससे जुड़ी हुई आरबीआई ने रिपोर्ट भी पब्लिश की है। भारत में ATM की संख्या में लगातार हो रही गिरावट RBI के ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार,देश में एटीएम की संख्या में भारी कमी आई है। भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 219,000 से घटकर सितंबर 2024 में 215,000 हो गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ऑफ-साइट ATM में कमी के कारण हुई है। ये ATM सितंबर 2022 में 97,072 से गिरकर सितंबर 2024 में 87,638 तक पहुंच गए। ATM की संख्या में कमी के कारण वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकारी बैंकों ने एटीएम बंद करने के लिए कई कारण बताए हैं। इनमें बैंकों का एकीकरण, एटीएम का कम इस्तेमाल, व्यावसायिक लाभ की कमी और एटीएम का स्थानांतरण शामिल हैं। बैंकर्स का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और यूपीआई के उभरने से नकदी का उपयोग कम हुआ है, जिससे एटीएम का संचालन अव्यावहारिक हो गया है। UPI का बढ़ता दबदबा पिछले नौ वर्षों में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जन धन योजना, मोबाइल इंटरनेट और यूपीआई के प्रसार ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में जहां 535 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 13,113 करोड़ हो गए। इस वित्त वर्ष (सितंबर तक) यूपीआई के जरिए 122 लाख करोड़ रुपए के 8,566 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं। डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता कदम उपभोक्ता अब सब्जियों से लेकर ऑटो सवारी और महंगी खरीदारी तक के लिए यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने भारत को नकदी से डिजिटल भुगतान की ओर तेजी से बढ़ाया है। क्यों कम हो रहे ATM मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में पिछले काफी समय से डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट करना लोगों को काफी आसान भी लगता है, इसलिए कम समय में ही यह पूरे देश में काफी लोकप्रिय हो गया है। बैंकों के घटती एटीएम की संख्या में काफी बड़ा रोल यूपीआई का भी है। पिछले कुछ समय से एटीएम के पॉपुलैरिटी में काफी कमी आई है। लोगों तक एटीएम की पहुंच अभी भी कम है, रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में प्रति 100,000 लोगों पर केवल 15 एटीएम हैं। RBI के नियमों का असर देश में नकदी अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्त वर्ष 22 में 89% लेन-देन और सकल घरेलू उत्पाद का 12% हिस्सा नगद लेन देन का ही था। लेकिन एटीएम लेन-देन और इंटरचेंज शुल्क पर RBI के नियमों ने ATM पर अपना गहरा असर डाला है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव डिजिटल भुगतान विशेष रूप से यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल परिवर्तन पर रणनीतिक ध्यान केंद्रित करने से प्रेरित है। आइए सबसे पहले (Automated Teller Machine- ATM) के इतिहास पर एक नजर डालते हैं: भारत में पहला एटीएम साल 1987 में HSBC ने मुंबई में लगाया था. उसके अगले 10 वर्षों में यानी 1997 तक देश में करीब 1500 एटीएम खुले. अगर दुनिया में पहला ATM की बात करें तो 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में एक कैश मशीन का उपयोग किया गया था, जिसे दुनिया की पहली एटीएम के रूप में मान्यता प्राप्त है. इस ATM को बार्कलेज बैंक ने शुरू किया था. 80 के दशक के दौरान दुनिया के कई बड़े देशों में ATM मुख्यधारा में शामिल हो गए थे. इसके बाद साल 1997 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने 'स्वधन' नामक से पहला ज्वाइंट ATM नेटवर्क शुरू किया, जिसे इंडिया स्विच कंपनी (ISC) ने संचालित किया. हालांकि, यह 2003 में बंद हो गया. उसके बाद 2004 में नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS) की स्थापना हुई, जो आज भारत का सबसे बड़ा ATM नेटवर्क है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है. आज भारत में कुल इतने ATM जनवरी 2022 तक, NFS नेटवर्क के तहत भारत में 2,55,000 से अधिक ATM थे, जिसमें नकदी जमा मशीनें और रिसाइक्लर शामिल थे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और NPCI के आंकड़ों के आधार पर 2023 तक भारत में लगभग 2,60,000 से 2,70,000 ATM होने का अनुमान था. फिलहाल भारत में लगभग 2.8 से 3 लाख ATM होने की संभावना है. फिलहाल देश में एक लाख लोगों पर 15 ATM हैं.  ATM की संख्या और प्रभाव के आधार पर SBI सबसे बड़ा ऑपरेटर है, लेकिन कैश मैनेजमेंट में CMS का दबदबा है. भारत में अब तक कितने ATM बंद हो चुके हैं… RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 2,19,000 थी, जो सितंबर 2024 में घटकर 2,15,000 हो गई.  इसका मतलब ये है कि इस अवधि में करीब 4 हजार ATM बंद हुए. यही नहीं, साल 2017 के बाद से ही ATM की संख्या में बढ़ोतरी धीमी हो गई, और साल-दर-साल इसका दायरा बढ़ता गया है. खासकर 2022 के बाद से ऑफ-साइट ATM (बैंक परिसर से बाहर स्थित) की संख्या में लगातार गिरावट आई है. यह डिजिटल भुगतान (जैसे UPI) के बढ़ते उपयोग, ATM संचालन की उच्च लागत, और बैंक शाखाओं के विलय के कारण हो रहा है. क्यों बंद हो रहे हैं ATM? यानी सबकुछ ग्राहकों पर निर्भर करता है, अगर ATM का खूब उपयोग होगा तो फिर कारोबार घाटे में नहीं चलेगा, वहीं अगर एक ATM महीने में 300-500 लेनदेन करता है, तो यह घाटे में भी जा सकता है. ये कड़वा सच है, देश में ATM का उपयोग तेजी … Read more

1 अप्रैल से बदलेंगे बैंकिंग और टैक्स नियम, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

नई दिल्ली  1 अप्रैल 2025 से कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब और बैंकिंग से जुड़े हैं. इनमें ATM ट्रांजैक्शन शुल्क, मिनिमम बैलेंस, TDS कटौती, डेबिट कार्ड सुविधाओं और अन्य कई महत्वपूर्ण नियम शामिल हैं. इनमें से कुछ नियम ऐसे भी हैं, जिनका ऐलान बजट 2025 के दौरान किया गया था. आइए जानते हैं इन बदलावों के बारे में विस्तार से. LPG, CNG-PNG और ATF की कीमतें     हर महीने की पहली तारीख को ऑयल कंपनियां LPG, CNG-PNG और ATF की कीमतों की समीक्षा करती हैं.     1 अप्रैल से इनके दाम बढ़ सकते हैं या घट सकते हैं.     सरकार और ऑयल कंपनियों के निर्णय के अनुसार कीमतों में परिवर्तन होगा. पॉजिटिव पे सिस्टम होगा लागू     बैंकिंग फ्रॉड रोकने के लिए कई बैंक पॉजिटिव पे सिस्टम लागू कर रहे हैं.     5,000 रुपये से अधिक के चेक पेमेंट के लिए ग्राहक को चेक नंबर, डेट, पेयी का नाम और अमाउंट वेरिफाई कराना होगा.     इससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है. RuPay डेबिट कार्ड में होंगे बड़े बदलाव     नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) अपने RuPay डेबिट सेलेक्ट कार्ड में नए फीचर्स जोड़ने जा रहा है.     इसमें एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, इंश्योरेंस कवर, ट्रेवल, फिटनेस और वेलनेस जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.     ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होंगे. मिनिमम बैलेंस नियमों में बदलाव     SBI, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंक अपने सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस नियमों को संशोधित कर रहे हैं.     अकाउंट होल्डर को अब मिनिमम बैलेंस रखने के लिए क्षेत्र (गांव, टियर वाइज शहर) के आधार पर नई सीमा तय होगी.     मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना लग सकता है. ATM से पैसे निकासी का नियम     कई बैंक 1 अप्रैल से अपनी ATM निकासी नीति में बदलाव करने जा रहे हैं.     दूसरे बैंकों के ATM से पैसे निकालने की सीमा घटा दी गई है.     नए नियम के तहत ग्राहक हर माह केवल 3 बार ही दूसरे बैंक के ATM से निशुल्क निकासी कर पाएंगे.     वहीं 1 मई से फाइनेंशियल ट्रांजैक्‍शंस के लिए अतिरिक्‍त 2 रुपये लगेंगे.     कैश विड्रॉल के लिए भी फ्री लिमिट के बाद 17 रुपये की बजाय 19 रुपया लगेगा. सीनियर सिटीजन को राहत     सीनियर सिटीजन की TDS कटौती सीमा बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है.     TDS कटौती की सीमा पहले ₹50,000 थी मकान मालिकों को भी राहत     मकान मालिकों के लिए रेंट पर TDS कटौती की सीमा बढ़ाकर ₹6 लाख/वर्ष कर दी गई है.     पहले ये सीमा ₹2.4 लाख/वर्ष थी. विदेशी ट्रांजैक्शन पर TCS सीमा बढ़ी     पहले ₹7 लाख से अधिक के विदेशी ट्रांजैक्शन पर TCS कटता था.     अब ये सीमा बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है. एजुकेशन लोन पर TCS हटा     स्पेसिफिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से लिए गए एजुकेशन लोन पर अब TCS नहीं कटेगा.     पहले ₹7 लाख से अधिक के एजुकेशन ट्रांजैक्शन पर 5% TCS लागू था. डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से कमाई पर TDS में राहत     डिविडेंड इनकम पर TDS की सीमा ₹5000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति वित्त वर्ष कर दी गई है.     म्यूचुअल फंड यूनिट से कमाई पर भी यही नियम लागू होगा. इन नियमों में बदलाव का सीधा असर आप पर पड़ेगा. बैंकिंग नियमों से लेकर टैक्स और वित्तीय योजनाओं तक, ये नए नियम आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को प्रभावित कर सकते हैं. ये UPI अकाउंट्स होंगे बंद  1 अप्रैल से अगला बदलाव UPI से जुड़ा हुआ है और जिन मोबाइल नंबरों से जुड़े यूपीआई अकाउंट्स लंबे समय से एक्टिव नहीं हैं, बैंक रिकॉर्ड से हटाया जाएगा. अगर आपका फोन नंबर यूपीआई ऐप से जुड़ा है और आपने लंबे समय से इसका इस्तेमाल नहीं किया है तो इसकी सेवाएं बंद की जा सकती हैं.  Tax से जुड़े बदलाव बजट 2025 में मिडिल क्‍लास को राहत देते सरकार ने कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिसमें टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव से लेकर टीडीस, टैक्‍स रिबेट और अन्य चीजें शामिल थीं. वहीं पुराने इनकम टैक्‍स एक्‍ट 1961 की जगह पर नए इनकम टैक्‍स बिल का प्रस्‍ताव रखा था. यह सभी बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभाव में आने वाले हैं. नए टैक्‍स स्‍लैब के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यक्तियों को टैक्‍स का भुगतान करने से छूट दी जाएगी. इसके अलावा, वेतनभोगी कर्मचारी 75,000 रुपये की स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन के लिए पात्र होंगे. इसका मतलब है कि 12.75 लाख रुपये तक की वेतन आय अब टैक्‍स से मुक्त हो सकती है. हालांकि, यह छूट केवल उन लोगों पर लागू होती है जो नया टैक्‍स विकल्‍प चुनते हैं.  इसके अलावा सोर्स पर टैक्‍स कटौती (TDS)सोर्स पर टैक्‍स कटौती (TDS) विनियमों को भी अपडेट किया गया है, जिसमें अनावश्यक कटौती को कम करने और टैक्‍सपेयर्स के लिए कैश फ्लो में सुधार करने के लिए विभिन्न वर्गों में सीमा बढ़ाई गई है. उदाहरण के लिए, वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा दोगुनी करके 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे बुजुर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा बढ़ गई है.इसी तरह, किराये की आय पर छूट की सीमा बढ़ाकर 6 लाख रुपये सालाना कर दी गई है, जिससे मकान मालिकों के लिए बोझ कम हो गया है और शहरी क्षेत्रों में किराये के बाजार को बढ़ावा मिल सकता है. recent visitors 43

PF के पैसे निकलेंगे यूपीआई और एटीएम से, सब्सक्राइबर्स को तुरंत ही अपनी राशि मिल जाएगी

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सात करोड़ से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स या लाभार्थी को बड़ी आसानी होने जा रही है। सरकार अब इस तरह की व्यवस्था कर रही है कि लाभार्थी घर बैठे यूपीआई के जरिए अपना पैसा निकाल सकते हैं। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि कई बार कर्मचारियों को PF की राश निकालने में दिक्कत आती है। उनके दावे रद्द हो जाते हैं। तीन में से एक क्लेम नहीं मिलते साल 2024 में EPFO ने EPF final settlement claims रिपोर्ट जारी की थी। यह साल 2023 के लिए थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ईपीएफओ में दावा किया गए हर तीन फाइनल सेटलमेंट क्लेम में से एक पास नहीं हुए बल्कि डिनाई (Denied) कर दिए गए। इसलिए सरकार UPI के ज़रिए EPF निकासी शुरू करने की योजना बना रही है। इससे प्रक्रिया आसान और तेज़ हो जाएगी। तुरंत पैसे आएंगे अकाउंट में इस नए तरीके से, EPF मेंबर GPay, PhonePe और Paytm जैसे UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके तुरंत पैसा निकाल पाएंगे। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस सुविधा को शुरू करने के लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ बातचीत कर रहा है। यह योजना मई या जून 2025 तक शुरू हो सकती है। कई सुविधाएं शुरू हो रही हैं केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसी साल जनवरी में बताया था कि EPFO 3.0 पहल, जिसमें ATM से निकासी भी शामिल है, इस साल जून तक लागू हो जाएगी। EPFO 3.0 के ज़रिए और भी कई सुविधाएं मिलेंगी। देखा जाए तो UPI से EPF निकासी के कई फायदे होंगे। इससे पैसे तक तुरंत पहुंच मिलेगी। अभी EPF निकासी में 23 दिन लगते हैं, लेकिन UPI से यह कुछ ही मिनटों में हो जाएगा। यह नई प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी होगी। और निकासी प्रक्रिया को बेहद आसान बना देगी। जरूरतमंद को आसानी यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जिन्हें पैसे की तत्काल ज़रूरत होती है। मान लीजिये किसी मेडिकल इमरजेंसी में आपको पैसे की ज़रूरत है, तो आप तुरंत अपने EPF से पैसे निकाल सकेंगे। इससे आपको किसी से उधार मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। या फिर अगर आपको कोई बड़ी खरीदारी करनी है, तो आप आसानी से अपने EPF से पैसे निकाल सकते हैं। यह सुविधा आपके लिए एक वरदान साबित होगी। recent visitors 55

देश में तेजी से बंद कर रहे हैं ATM? अब UPI बन गई ऑलटाइम टेलर मशीन

मुंबई देश में पिछलेबैंकरों ने कहा कि पेमेंट टूल के रूप में यूपीआई और कार्ड के उभरने से नकदी का यूज कम हो गया है। इस कारण एटीएम अव्यावहारिक हो गए हैं। पांच साल में पहली बार एटीएम की संख्या में गिरावट आई है। बैंकों में नकदी निकालने के लिए लगने वाली लंबी कतार से मुक्ति दिलाने वाली ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) अब कम होती जा रही है। 2020 में बैंकों के विलय होने से जहां एटीएम की संख्या घट गई। वहीं, 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद लोगों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) को हाथों-हाथ लिया।  इसकी बढ़ती लोकप्रियता से भी एटीएम तक लोगों की पहुंच घटने लगी। आलम यह है कि महज 9 साल में प्रदेश में 274 एटीएम कम हो गए। सब्जी, फल, किराना, बिजली व गैस बिल समेत बड़े-छोटे शोरूम में भी यूपीआइ से पेमेंट करने की सुविधा मिली तो लोग ने एटीएम से दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे एटीएम पर ट्रांजेक्शन घटे तो बैंकों का मुनाफा कम हुआ और मशीन के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया। बैंकों ने बंद करना शुरू किए ATM नतीजा, बैंकों ने एटीएम बंद करना शुरू कर दिया। यूपीआइ के बढ़ते चलन से जहां नकदी की सुरक्षा संबंधी चिंता बैंकों की कम हो गई, वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नकदी लेन-देन के दौरान करेंसी के खराब होने पर दोबारा छापने का खर्च भी कम हो गया। हालांकि कोरोनाकाल में एटीएम की संख्या जरूर बढ़ी, लेकिन 2019 से इसके कम होने का दौर जारी है। बैंकों का कहना है, एटीएम बंद नहीं कर रहे, नई तकनीक आने पर इसकी शिफ्टिंग कर रहे हैं। हर एटीएम पर इतना खर्च एक एटीएम लगाने में करीब 6-9 लाख रुपए का खर्च आता है। एक मशीन की कीमत 4-8 लाख रुपए और कुछ आंतरिक सज्जा पर खर्च होते हैं। साथ ही हर एटीएम के मेंटेनेंस पर हर माह बैंक को 50 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसमें साफ-सफाई, बिजली, एसी और सुरक्षा गार्ड का खर्च शामिल है। बताते हैं, एक लेनदेन पर करीब 18 से 20 रुपए खर्च होता है। इसलिए घटे एटीएम बैंकों के विलय होने के कारण उनके एटीएम एक हो गए। कम्प्यूटरीकृत सिस्टम में किसी भी बैंक के एटीएम से रुपए निकालने की सुविधा। जिन मशीनों से ट्रांजेक्शन घटे, उन्हें बंद या शिफ्ट कर दिया। यूपीआइ के इस्तेमाल से लोगों की पहुंच एटीएम तक कम हो गई। देश में इस तरह बढ़ रहे यूपीआइ ट्रांजेक्शन 2022-23 में 83,453.79 मिलियन ट्रांजेक्शन 2023-24 में 130831.45 मिलियन ट्रांजेक्शन 2024-25 में 117507.31 मिलियन ट्रांजेक्शन (नवंबर तक) यूपीआई का जलवा चौधरी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में भारत ने फाइनेंशियल इनक्लूजन और डिजिटल भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। जन धन योजना, यूपीआई के प्रसार और मोबाइल इंटरनेट को व्यापक रूप से अपनाने से ऐसा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 535 करोड़ था जो वित्त वर्ष 2023-24 में 13,113 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 (सितंबर तक) में 122 लाख करोड़ रुपये के 8,566 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन रजिस्टर्ड किए गए हैं। इतिहास के झरोखे से पहले रुपए निकालने वालों की बैंकों में लंबी कतार लगती थी। इससे छुटकारा दिलाने के लिए एचएसबीसी बैंक ने 1987 में पहली बार मुंबई में एटीएम लगाई तो बैंकिंग में बड़ी क्रांति आई। महज 10 साल में देश में 1500 एटीएम हो गए। अभी देश में 2.50 लाख एटीएम हैं। राजधानी का दायरा बढ़ा, बढ़े एटीएम मध्यप्रदेश में इकलौते भोपाल जिले में एटीएम की संख्या बढ़ी है। राजधानी का दायरा बढऩे से ग्रामीण क्षेत्र जुड़े और एटीएम की संख्या बढ़ गई। अभी भोपाल जिले में 1079 एटीएम हैं। इनमें 42 ग्रामीण, 15 कस्बों और 1022 एटीएम शहरों में हैं। प्रदेश में एटीएम साल – संख्या 2016 – 9266 2017 – 9263 2018- 9579 2019 – 9345 2020 – 9201 2021 – 9322 2022 – 8812 2023 – 9328 2024 – 8992 (सितंबर तक) recent visitors 61

राजधानी में एटीएम हैकिंग का अनोखा मामला, जालसाज ने डिवाइस के माध्यम से मशीन में एटीएम कार्ड होल्ड किए, 150000 की गई ठगी

 भोपाल  राजधानी में एटीएम मशीन हैकिंग का एक अनोखा मामला सामने आया है। हैकरों ने एटीएम मशीन में ऐसी डिवाइस लगाई, जिससे कार्ड मशीन में ही होल्ड हो गया। इसके बाद ठगी को अंजाम देने के लिए उन्होंने एटीएम में एक फर्जी हेल्पलाइन नंबर का स्टिकर चिपका दिया। कार्ड मशीन से बाहर नहीं आने पर जब उपभोक्ताओं ने उस नंबर पर फोन किया तो उनसे कुछ बेसिक जानकारी ली गई और फिर एटीएम पिन मशीन में डालने के निर्देश दिए गए। यहां गौर करने वाली बात यह है कि उपभोक्ताओं से सिर्फ पिन मशीन में डालने को कहा गया था, उनसे पिन पूछा नहीं गया था। सही पिन डालने के बाद एटीएम मशीन से कार्ड तो बाहर आ गया, लेकिन बाद में उपभोक्ताओं के खाते से रुपये कट गए। गुरुवार देर रात शाहपुरा के मनीषा मार्केट में आईसीआईसीआई बैंक की एटीएम मशीन का मेंटनेंस करने के लिए कर्मचारी पहुंचे तो उन्हें मशीन के भीतर एक डिवाइस मिली, साथ ही चार एटीएम कार्ड भी उसमें ही पड़े थे। उन्होंने इसकी सूचना चूनाभट्टी थाना पुलिस को दी। वहीं इस एटीएम का उपयोग करने वाले ठगी के दो शिकार उपभोक्ताओं ने शुक्रवार को पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। दो एटीएम बूथ में हुई छेड़छाड़ चूनाभट्टी थाना प्रभारी भूपेंद्र कौर ने बताया कि गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे मनीषा मार्केट की दो एटीएम मशीनों में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। पुलिस मौके पर पहुंची तो एसबीआई मशीन में कार्ड इन्सर्ट करने वाले स्थान पर कागज फंसा हुआ था, जबकि उसके साइड में आईसीआईसीआई बैंक की एटीएम मशीन में चार कार्ड मिले थे। साथ ही चार सेल लगी एक डिवाइस भी मिली। दो बुजुर्ग हुए ठगी का शिकार यहां एटीएम बूथ में उपभोक्ताओं की सहायता के लिए एक फर्जी हेल्पलाइन नंबर का स्टिकर भी चिपकाया गया था। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर जांच में जुट गई। शुक्रवार शाम को दो उपभोक्ता भी शिकायत लेकर थाने पहुंचे। 81 वर्षीय दिनेश दवे के साथ 45 हजार और 76 वर्षीय सीएस दवे से एक लाख रुपये की ठगी की गई थी। दोनों ने बताया कि पहले मशीन में उनका एटीएम अटक गया था, वहीं जब मदद के लिए दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया तो नाम बताया साथ ही मशीन में पिन डाला, जिससे एटीएम बाहर आ गया। उस दिन हमारे पास ट्रांजेक्शन का कोई मैसेज नहीं आया था। शुक्रवार शाम करीब चार बजे रुपये कटने का मैसेज आया तो हमने शिकायत की। बैंक का कहना है कि हर दिन यहां से पांच लाख से ज्यादा की निकासी होती है। ऐसे में ठगी की राशि और भी बढ़ सकती है।   recent visitors 85