बीजेपी के जाति जनगणना कराने का ऐलान, जिसका लक्ष्य सामाजिक समीकरणों को साधना और चुनावी रणनीति को मजबूत करना

नई दिल्ली  बीजेपी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने की घोषणा की है। यह फैसला सिर्फ आंकड़ें जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक इंजीनियरिंग, चुनावी रणनीति और वैचारिक संतुलन का भी समीकरण बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश की राजनीति में 'मंडल-कमंडल' की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में यह समझना चुनावी और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने यह कदम अचानक किन 5 प्रमुख वजहों से लिया है और कैसे यह उसके लिए एक 'गेमचेंजर' साबित हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक उनके कार्यकाल के दूसरे चुनाव तक बीजेपी ने ओबीसी (OBC),अति-पिछड़ी जातियों (EBC) और अनूसूचित जातियों (SC) को जोड़कर एक मजबूत सामाजिक समीकरण खड़ा किया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का यह वोट बैंक बिखर गया और इन वर्गों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की ओर झुक गया, जिससे बीजेपी के 400 पार वाला सपना चकनाचूर हो गया। बीजेपी और एनडीए को इसके चलते खासकर यूपी,राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में तगड़ा झटका लगा। ऐसे में जाति जनगणना वाला दांव इन जातियों की उन उपेक्षित भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास है। ओबीसी को सीधा संदेश देने का प्रयास बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने वाले तथ्य को अबतक विपक्ष के पिछड़े वाले दांव को कुंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही है। जब बिहार में जातिगत सर्वे करवाया गया था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी जेडीयू एनडीए में नहीं थे। अलबत्ता तब भी बीजेपी ने आधिकारिक रूप से उस जातिगत सर्वे का समर्थन किया था। अब मोदी सरकार देशभर में जाति जनगणना का दांव चलकर प्रधानमंत्री और बिहार के सीएम नीतीश के पिछड़ा पृष्टभूमि को और मजबूती से भुनाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के अपने फैसले का हमेशा जिक्र करती रही है। अब इस फैसले से उसका काम और आसान हो सकता है कि असल में पीएम मोदी खुद पिछड़े समाज से तो हैं ही, वह ओबीसी समाज के मसीहा के तौर पर भी काम कर रहे हैं। राज्यों की राजनीति पर भारी पड़ने की कोशिश बीजेपी को मालूम पड़ चुका था कि अगर केंद्र जाति जनगणना को लेकर सुस्त रहा, तो विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसे अपने-अपने ढंग से लागू करके सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश सकती हैं। तेलंगाना पहले ही इस दिशा में सक्रिय हो चुका है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भी अपने दांव लगाने की कोशिशों में जुटी है और झारखंड में भी ‘सरना कोड’ की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से इसे राष्ट्रीय स्तर पर करवाने का एलान करके, बीजेपी सरकार ने विपक्ष की राजनीति पर बढ़त बनाने वाली चाल चल दी है। नया प्रयोग करने की कोशिश 2014 में जब से मोदी सरकार आई है, उसकी अनेकों कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। ईडब्ल्यूएस कोटा और विश्वकर्मा योजना इसका सबसे बेहतरी उदाहरण है। इसी तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिनके माध्यम से इन वर्गों के उत्थान का भी काम हो रहा है, वहीं इसके माध्यम से सरकार इन वर्गों के बीच पहुंच भी पहुंची है। लेकिन, जाति जनगणना के माध्यम से पार्टी जातियों में बंटे भारतीय समाज को सीधे तौर पर साधने की कोशिश कर रही है, जिसे अब सहेज कर रखना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी थी। क्योंकि, उज्जवला योजना, जनधन योजना जैसी अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से भाजपा सरकार ने खुद को समाज के विशेष वर्गों के नजदीक पहुंचाया है, लेकिन अब उसमें भी जातियों के आधार पर दिक्कतें बढ़ने लगी थीं, जिसके लिए नया कार्ड चलना जरूरी लग रहा था। हिंदुत्व की सियासत पर जाति की चाशनी बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण अब पार्टी के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब पार्टी हिंदुत्व पर भी सामाजिक न्याय और पिछड़ों की चुनावी चाशनी लगाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद एक ऐसे व्यापक सामाजिक समीकरण को तैयार करना है, जिसमें धार्मिक और जातिगत दोनों स्तरों पर समर्थन हासिल हो सके। हालांकि, बीजेपी की यह सोच समझी रणनीति चुनावी फ्रंट पर कितना काम करती है, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है। recent visitors 34

इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में, बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर

इंदौर  एमपी के इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में आ गए हैं। उनके प्रदर्शन के दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगे। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सख्त आपत्ति जताई है। बीजेपी विधायक ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। पार्षद अनवर कादरी ने पहलगाम हमले के विरोध में यह प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में आतंकवाद का पुतला जलाया गया और नारे लगाए गए। इसी दौरान 'पाक जिंदाबाद' किया गया। दरअसल, कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में बड़वाली चौकी पर प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता और उनके समर्थक भारी संख्या में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान आतंकवाद का पुतला जलाया गया। आरोप है कि इसी दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन में कई महिलाएं भी मौजूद थीं। बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर विवाद तब और बढ़ गया जब इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुए। इस पर एक्शन लेते हुए इंदौर के तीन नंबर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने पाक के पक्ष में नारे लगाने को देशद्रोह बताया। कांग्रेस में वरिष्ठ पार्षद है कादरी वहीं पार्षद अनवर कादरी का कहना है कि उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अनवर कादरी कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद हैं। इस घटना से इंदौर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी इस मामले को लेकर कांग्रेस को घेरती हुई नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस अपने बचाव में सफाई दे रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। recent visitors 46

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुने जाने का फैसला टलने का फायदा एमपी को भी

भोपाल भारतीय जनता पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में काफी वक्त लगा रही है। इसके साथ ही कई राज्यों के अध्यक्षों के निर्वाचन भी अटक गए हैं। इस बीच देश में जो दुखद घटना हुई है। ऐसे हालातों में पार्टी ने चुनाव टालने का फैसला लिया है। इस खबर के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। बता दें कि बीजेपी ने फिलहाल अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को टाल दिया है। पहलगाम में हुए हमले के बाद देश में मौजूदा हालात को देखते हुए भाजपा ने यह निर्णय लिया है। अब साफ हो गया है कि अध्यक्ष जगत प्रकाश (जेपी) नड्डा फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे। पार्टी के इस निर्णय का असर एमपी बीजेपी पर भी पड़ेगा। पद पर बने रहेंगे वीडी शर्मा अध्यक्ष पद का चुनाव टलने के फैसला टलने के बाद अब राजनीतिक विश्लेषक यह कयास लगा रहे हैं कि एमपी बीजेपी के अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अपने पद पर बने रहेंगे। जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक राज्यों को लेकर निर्णय होना आसान नहीं है। इस फैसले के बाद बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार और लंबा हो जाएगा। मौजूदा हालात में लिया फैसला गौरतलब है कि जेपी नड्डा वर्ष 2019 से अध्यक्ष पद पर काबिज हैं और उनका कार्यकाल पहले भी बढ़ाया गया था। भाजपा का मानना है कि इस समय संगठन की स्थिरता और सरकार की नीति को मजबूती से आगे बढ़ाना जरूरी है। ऐसे में पार्टी के आंतरिक चुनाव को फिलहाल प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। जेपी नड्डा के चुनाव टलने का फायदा एमपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी मिल सकता है। शर्मा के पास 2019 से है कमान वीडी भी वर्ष 2019 से प्रदेश अध्यक्ष हैं। अब संभव है कि चुनाव टलने के बाद मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष एमपी बीजेपी के मुखिया बने रहेंगे। हालांकि अब चुनाव टलने के बाद नए नेतृत्व को लेकर सस्पेंस और गहरा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के इतिहास को देखें तो अब तक सभी अध्यक्ष आपसी सहमति से ही चुने गए हैं। फिलहाल बीजेपी ने नए अध्यक्ष की घोषणा को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है।   recent visitors 66

दो साल बेमिसाल-आशीष ऊषा अग्रवाल

दो साल बेमिसाल-आशीष ऊषा अग्रवाल सत्येंद्र जैन,स्तंभकार भाजपा के प्रदेश नेतृत्व द्वारा दो साल पूर्व अप्रैल 2023 में प्रदेश मीडिया प्रभारी के पद पर आशीष ऊषा अग्रवाल को नियुक्त किया गया ।इन दो सालों के कार्यकाल में आशीष अग्रवाल ने अपना सर्वस्व अर्पण करते हुए पार्टी के मीडिया विभाग का कुशल नेतृत्व किया है,संचालन किया है।मीडिया विभाग को समुन्नत किया है।भाजपा की प्रवक्ता टीम,मीडिया प्रबंधन टीम की धार को तेज किया है।विधानसभा चुनाव,लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव में भी मध्य प्रदेश भाजपा ने एतिहासिक स्वर्णिम प्रदर्शन किया है।भाजपा मीडिया  विभाग ने भी इन महानतम उपलब्धियों को अर्जित करने हेतु अविस्मरणीय योगदान दिया है।देश के सभी राजनीतिक दलों में भाजपा संगठन की ही विशेषता है कि कार्यकर्ता की आरती,भारतीय जनता पार्टी ही उतारती है।आशीष अग्रवाल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,प्रदेश संगठन टीम ने इन दो सालों में आशीष अग्रवाल को कसौटी पर कसा है।परखा है। उनकी संगठन कुशलता को देखकर प्रदेश नेतृत्व ने एक देश एक चुनाव की प्रदेश स्तरीय टोली में भी सम्मिलित किया है।उन्होंने संगठन पर्व, सदस्यता अभियान में देवास जिले के बूथ कमेटियों, मंडलों के अध्यक्ष का चुनाव, जिला अध्यक्ष पद के  चुनाव का उत्तरदायित्व, कुशलतापूर्वक संपन्न किया।यह उनकी कुशल संगठन क्षमता का परिचायक है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 29 की 29 सीट्स पर विजय प्राप्त कर स्वर्णिम कीर्तिमान स्थापित किया है।विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार पांचवीं बार मध्य प्रदेश में 163 सीट जीत कर सरकार बनाई है।एंटी इनकंबेंसी टर्मिनोलॉजी को प्रो इनकंबेंसी में रूपांतरण किया है।अमरवाड़ा,बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भी पार्टी को विजय श्री प्राप्त हुई है। भाजपा की इस अनवरत महाविजय की यात्रा में प्रदेश मीडिया विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राजनीतिक दल के लिए मीडिया विभाग माउथ पीस होता हैं। मुकुट होता है ।भाजपा मीडिया विभाग के सदस्य पार्टी की रीति-नीति, कार्यक्रमों योजनाओं,भाजपा शासन की उपलब्धियां को मीडिया के माध्यम से जनता के समक्ष विभिन्न चैनल्स पर होने वाली परिचर्चा में रखते हैं।मीडिया का समाचार विभाग प्रतिदिन अनेक प्रेस नोट,फोटो, वीडियो तैयार कर,समय पूर्व मीडिया संस्थानों को प्रकाशन हेतु प्रेषित करता है। मीडिया विभाग के प्रमुख को सतत रूप से पार्टी की वैचारिक शक्ति का परिशोधन,संशोधन,संवर्धन एवं प्रदेश के सभी सदस्यों को समयबद्ध अथवा समय पूर्व वितरण नितप्रति करना रहता है।मीडिया संस्थानों से सतत सम्पर्क रखना एवं पत्रकारिता जगत से संबध्द स्वामियों,संपादकों,संवाददाताओं,कैमरामैन के सुख-दुख में सम्मिलित होना भी आवश्यक रहता है। यह सभी अत्यंत ही जटिल कार्य को सम्पन्न करने हेतु भागीरथी परिश्रम करना होता है।यह अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ भूख-प्यास,निद्रा,दिन,रात आदि से परे होता है।इस दुष्कर कार्य को संचालित करने का उत्तरदायित्व उनको दिया गया।मध्य प्रदेश के इतिहास में आशीष अग्रवाल ने सबसे कम आयु में मीडिया प्रभारी के रूप में कीर्तिमान स्थापित किया है।वह अपने नाम के साथ अपनी माँ का नाम ऊषा जोड़कर नवाचार करते हुए समाज में प्रेरणादायक संदेश दे रहे हैं।आशीष अग्रवाल प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं।दूरस्थ शिक्षा एवं सामाजिक कार्य में भी स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। जन आशीर्वाद यात्रा का कुशल मीडिया प्रबंधन भाजपा की 11000 किलोमीटर की जन आशीर्वाद यात्रा में 24 दिन में लगभग 700 रथ सभाओं का आयोजन हुआ।200 से अधिक बड़ी सभाएँ हुईं।215 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा पहुँची।इस बृहद यात्रा को  आशीष ऊषा अग्रवाल के कुशल  नेतृत्व में मीडिया विभाग द्वारा कुशलता पूर्वक,निर्विघ्न,निर्विवाद संपन्न किया। उत्कृष्ट चुनाव प्रबंधन भाजपा मीडिया विभाग में आशीष अग्रवाल एक पालक के रूप में सुयोग्य मीडिया प्रभारी सिद्ध हुए हैं।लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव हेतु मीडिया सेंटर संचालित किया गया।आशीष अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन, प्रबंधन में प्रदेश कार्यालय, जिला कार्यालयों से लगभग 2000 प्रेस वार्ताएं सम्पन्न हुईं हैं। आशीष अग्रवाल की टीम भावना नेतृत्व क्षमता प्रशंसनीय है। सभी प्रवक्ता गणों से उनकी सर्वोच्च क्षमताओं को भाजपा के हित में उपयोग करने की कला भी उनके अंदर कूट-कूट कर समाहित है।मीडिया विभाग के लिए समय-समय पर विभिन्न विषयों पर आवश्यक जानकारी और तथ्यों को उपलब्ध कराने हेतु भारत के विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के नेताओं,मंत्रियों से संपर्क स्थापित कर मीडिया टीम को त्वरित रूप से उपलब्ध कराने का कार्य भी उनके द्वारा कुशलता पूर्वक किया जाता है। आशीष ऊषा अग्रवाल संगठन की कसौटी पर खरे उतरे हैं।संगठन के निखरते युवा रत्न हैं।उनको सफलतम दो वर्ष पूर्ण करने हेतु बधाईयाँ।यही कामना है कि वह निकट भविष्य में कीर्तिमान रचते जाएं। इति श्री। recent visitors 59

भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया

रायपुर  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर देश में सियासत गरमाई हुई है. एक तरफ जहां कांग्रेस सुरक्षा में चूंक और आतंकियों की पहचान को लेकर लगातार केंद्र सरकार को घेरने में लगी है. वहीं भाजपा नेता भी कांग्रेस पर जमकर पलटवार कर रहे हैं. आज भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया है. भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस नेता बेफिजूल का बयान दे रहे हैं. खरगे, सिद्धरमैया, वाड्रा, भूपेश का बयान देख लीजिए, कांग्रेस नेताओं के बयान को ही पाकिस्तान दोहराता है. भूपेश बघेल के बयान को उठाकर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बयान देते हैं. पाकिस्तानी मंत्री ने छत्तीसगढ़ में आंतरिक आतंकवाद की बात कही है. भूपेश बघेल झीरम और पहलगाम में समानता बताते हैं. आखिर कांग्रेस के नेता बताना क्या चाह रहे हैं ? बता दें, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में प्रेस वार्ता में कहा था कि इस हमले ने न सिर्फ 26 परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो दिया है. बघेल ने इस आतंकी घटना को ‘झीरम घाटी की घटना’ से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए. भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम में भी नाम पूछ-पूछ कर मारा गया था. वहां भी 33 लोग मारे गए थे और पहलगाम में भी 26 लोगों की जान गई. पहलगाम में भी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल मदद के लिए सामने नहीं आया. इस घटना ने झीरम घाटी की घटना की याद ताज़ा कर दी. हमारे सभी नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की, शोक व्यक्त किया और केंद्र सरकार को समर्थन देने की बात कही. लेकिन भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने सिर्फ ‘धर्म पूछ-पूछ कर मारा’ को ही मुख्य मुद्दा बना दिया. पूर्व सीएम ने सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सहायता क्यों नहीं पहुंची? इसका जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर का जिम्मेदार कौन है? recent visitors 44

मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण अध्यक्ष का मामला अटका हुआ

भोपाल मध्य प्रदेश में BJP के नए अध्यक्ष का नाम अभी तक तय नहीं हो पाया है। कई बड़े नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण यह मामला अटका हुआ है। जनवरी में चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा भी नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम भी घोषित किया जाएगा। बढ़ता जा रहा इंतजार दिग्गजों के बीच खींचतान और रायशुमारी न हो पाने के कारण यह मामला उलझा हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति भी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिलाध्यक्षों के नाम घोषित होने के बाद उम्मीद थी कि प्रदेश को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। लेकिन, यह इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। जाति, राजनीति और क्षेत्र जैसे कई समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। जो नाम सामने आए थे, उन पर भी अब चर्चा नहीं हो रही है। चुनाव अधिकारी बने पर दौरा नहीं कर पाए केंद्रीय मंत्री जनवरी में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव अधिकारी बनाया गया था लेकिन, उनका प्रदेश दौरा नहीं हो पाया। उन्होंने किसी नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की हो या रायशुमारी की हो, ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों के अध्यक्षों के नाम घोषित किए जाएंगे लेकिन, अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम भी तय नहीं हो पाया है। पहली बार हुआ ऐसा यह पहली बार है जब BJP के संगठन चुनाव में बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों के चुनाव के चार महीने बाद भी प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़े नेता कम हैं। इसलिए वहां हाईकमान ने फैसला कर लिया। लेकिन, मध्य प्रदेश में स्थिति अलग है। यहां कई बड़े नेता हैं जिनकी राय लेना जरूरी है। एमपी में बड़े नेताओं से सलाह-मशवरा जरूरी मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, जयभान सिंह पवैया, कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह जैसे नेताओं की राय को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। देरी की एक वजह इन बड़े नेताओं से रायशुमारी न होना भी है। सत्ता और संगठन में बदलाव के बाद पुराने नेता अपनी जगह बचाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, नए नेता अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हैं। सीएम और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के बीच बात पक्की मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति भी प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर बहुत मायने रखती है। पार्टी नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बातचीत हो चुकी है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।   recent visitors 61

एमपी में 2 नेताओं का अश्लील व्हाट्सएप चैट लीक,भाजपा नेता पार्टी से निष्कासित

सतना  सतना जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। महिला के साथ अश्लील चैट, छेड़खानी और जान से मारने की धमकी के गंभीर आरोप लगने के बाद हाईकमान ने सख्त कार्रवाई की है। यह कार्रवाई पार्टी के उच्च नेतृत्व के आदेश पर की गई है। शर्मा पर लगे आरोपों को लेकर पार्टी की छवि खराब हो रही थी, जिसको देखते हुए हाईकमान ने तत्काल सख्त कदम उठाया। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा में इस तरह के आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है। बताया जा रहा है कि एक महिला ने सतीश शर्मा के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला पार्टी के शीर्ष नेताओं तक पहुंचा। जांच के बाद हाईकमान ने निष्कासन का निर्णय लिया।  दरअसल, शहर कोलगवां थाने में शिकायत की गई थी कि भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा ने चाय पीने के बहाने घर पर आए थे और गलत काम की कोशिश करने लगे। महिला ने पुलिस को वाट्सएप के कुछ स्क्रीन शॉट्स भी सौंपे हैं। कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया कि महिला ने आवेदन दिया है, मामले की जांच की जा रही है। इधर, पूर्व जिलाध्यक्ष ने आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा था कि महिला ब्लैकमेल कर रही है। दो साल पहले पार्टी कार्यालय में पत्रकारवार्ता में मिली और सेल्फी खींच ली थी। इसके बाद उसने ऑपरेशन की बात कहकर 25 हजार उधार मांगे थे। मैंने दोस्त से दिलवा दिए। कई माह बाद मांगे तो फंसाने की धमकी देने लगी। भाजपा हाईकमान ने किया निष्कासित भाजपा प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी ने पत्र जारी करते हुए जानकारी दी कि सतना जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा द्वारा अशोभनीय कृत्य किया गया है। जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है। यह कृत्य असहनीय है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा द्वारा सतीश शर्मा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया जाता है। recent visitors 47