कैलाश विजयवर्गीय और सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली

इंदौर बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 23 साल पुराने मामले में दर्ज निजी परिवाद को खारिज कर दिया है। मामला इंदौर के पीपल्याहाना तालाब को विकसित करने से जुड़ा था, जिसमें इन नेताओं पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। यह था मामला यह मामला 2001-2002 का है, जब कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के महापौर थे, और शंकर लालवानी, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा और उमाशशि शर्मा महापौर परिषद के सदस्य थे। आरोप था कि होलकर घराने की कुछ जमीन का अधिग्रहण कर नवरतनबाग में कीमती जमीन दी गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। मामले में निजी परिवाद दर्ज करने वाले अधिवक्ता आनंद अग्रवाल ने इन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आरोप लगाए थे। मामला पहले जिला न्यायालय में चला और फिर हाईकोर्ट पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने पूर्व महापौर उमाशशि शर्मा के खिलाफ आदेश को बरकरार रखा। मामले में अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं इसके बाद परिवादी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले में किसी भी गलती को नहीं पाया और परिवाद को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से कैलाश विजयवर्गीय, शंकर लालवानी, रमेश मेंदोला और अन्य जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत मिली है। 23 साल पुराने इस मामले में अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकेगी। recent visitors 63

सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने एयरस्ट्राइक की सराहना की और सरकार के हर निर्णय, सेना की हर कार्रवाई में साथ देने की बात कही

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च कर पाकिस्तान में आतंकियों के नौ ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था. सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में सभी दलों के नेताओं ने एयरस्ट्राइक की सराहना की और सरकार के हर निर्णय, सेना की हर कार्रवाई में साथ देने की बात कही. ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई इस बैठक में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बैठक में शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाया. खड़गे ने बैठक में यह भी कहा कि जो काम कर रहे हैं, करते रहिए. हम आपके साथ हैं. उन्होंने बैठक में राफेल मार गिराने के पाकिस्तानी दावे का भी जिक्र किया, लेकिन किसी ने भी इस विषय पर सरकार से जवाब देने को नहीं कहा. सर्वदलीय बैठक के बाद बाहर आए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हमें जो बताया गया, हमने वह सुन लिया. हमने सरकार को समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि हम इस घड़ी में सरकार के साथ खड़े हैं. पीएम को शायद लगता है कि वह संसद से ऊपर हैं. जब वक्त आएगा, तब बात करेंगे लेकिन अभी इस घड़ी में हम किसी की आलोचना नहीं करेंगे. यह समय एकजुटता का- राहुल गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा कि हमने कहा है कि देशहित में सरकार के साथ रहेंगे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि हम एकजुट हैं और शुरुआत से ही सरकार के साथ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि हां, कुछ चिंताएं हैं लेकिन ठीक है. यह समय एकजुटता का है. बैठक के बाद राहुल गांधी ने बाहर आकर कहा कि हम सभी ने सरकार को समर्थन दिया है. सभी दलों के नेताओं को बोलने के लिए 4 से 5 मिनट का समय दिया गया. कांग्रेस के साथ ही समाजवादी पार्टी ने भी सर्वदलीय बैठक से प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी का मुद्दा उठाया. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने बठिंडा में फाइटर जेट मार गिराए जाने वाले दावे से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट का मुद्दा उठाया. बैठक की शुरुआत में सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में जानकारी दी. हालांकि, रक्षा मंत्री ने इस बैठक में ऑपरेशनल डिटेल नहीं दी. सभी पार्टियों के नेताओं ने सरकार के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि हम साथ हैं. बैठक के बाद बाहर आए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे अच्छा बताया. किरेन रिजिजू ने कहा कि यह ऑपरेशन अभी जारी है, इसलिए इस पर अलग से ब्रीफिंग नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि यह बहुत संवेदनशील विषय है और सभी ने पूरी गंभीरता से अपनी बातों को रखा है. किरेन रिजिजू ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों के एक लाइन पर बयान आ रहे हैं. यह भी बहुत अच्छी बात है. उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने परिपक्वता दिखाई है. हमारे देश के राजनीतिक दलों ने दिखाया है कि भारत एक परिपक्व लोकतंत्र है. किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि जब हम ऐसे विषयों पर बात करते हैं, तब इसमें राजनीति का महत्व नहीं है. उन्होंने सभी विपक्षी पार्टियों को धन्यवाद दिया और यह भी कहा कि फेक न्यूज से एकता प्रभावित होती है. PAK पर कार्रवाई दुरुस्त, चीन-तुर्की को भी नसीहत… ओवैसी  इस बैठक के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पूरी जानकारी दी.ओवैसी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में मैंने हमारी सेना की तारीफ की. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया. मैंने बैठक में कहा कि हमें टीआरएफ के खिलाफ इंटरनेशनल कैंपेन चलाना चाहिए, खासतौर से सिक्योरिटी काउंसिल इसका ऐलान करें. ओवैसी ने कहा कि हमें अमेरिका को बताना है कि वो अपने ही मुल्क में टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करें.  उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में हाफिज सईद के बेटे ने एक स्पीच में कहा था कि हम 2025 में जिहाद करेंगे. ये जिहाद का नाम लेकर भारत में कत्ल करना चाहते हैं. आतंक फैलाना चाहते हैं. हम संयुक्त राष्ट्र से आग्रह करते हैं कि टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करे. पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में रखा जाए. ओवैसी ने कहा कि हमने ब्रिटेन के साथ ट्रेड डील भी की है. ऐसे में हम उनसे भी कहेंगे कि टीआरएफ को बैन करे. ब्रिटेन का वित्त मंत्रालय पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाए. हमारी अमेरिका से ट्रेड डील होने जा रही है तो ऐसे में अमेरिका से भी कहेंगे कि पाकिस्तान को आतंकी सूची में डाले.   recent visitors 61

बीजेपी के जाति जनगणना कराने का ऐलान, जिसका लक्ष्य सामाजिक समीकरणों को साधना और चुनावी रणनीति को मजबूत करना

नई दिल्ली  बीजेपी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने की घोषणा की है। यह फैसला सिर्फ आंकड़ें जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक इंजीनियरिंग, चुनावी रणनीति और वैचारिक संतुलन का भी समीकरण बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश की राजनीति में 'मंडल-कमंडल' की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में यह समझना चुनावी और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने यह कदम अचानक किन 5 प्रमुख वजहों से लिया है और कैसे यह उसके लिए एक 'गेमचेंजर' साबित हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक उनके कार्यकाल के दूसरे चुनाव तक बीजेपी ने ओबीसी (OBC),अति-पिछड़ी जातियों (EBC) और अनूसूचित जातियों (SC) को जोड़कर एक मजबूत सामाजिक समीकरण खड़ा किया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का यह वोट बैंक बिखर गया और इन वर्गों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की ओर झुक गया, जिससे बीजेपी के 400 पार वाला सपना चकनाचूर हो गया। बीजेपी और एनडीए को इसके चलते खासकर यूपी,राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में तगड़ा झटका लगा। ऐसे में जाति जनगणना वाला दांव इन जातियों की उन उपेक्षित भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास है। ओबीसी को सीधा संदेश देने का प्रयास बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने वाले तथ्य को अबतक विपक्ष के पिछड़े वाले दांव को कुंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही है। जब बिहार में जातिगत सर्वे करवाया गया था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी जेडीयू एनडीए में नहीं थे। अलबत्ता तब भी बीजेपी ने आधिकारिक रूप से उस जातिगत सर्वे का समर्थन किया था। अब मोदी सरकार देशभर में जाति जनगणना का दांव चलकर प्रधानमंत्री और बिहार के सीएम नीतीश के पिछड़ा पृष्टभूमि को और मजबूती से भुनाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के अपने फैसले का हमेशा जिक्र करती रही है। अब इस फैसले से उसका काम और आसान हो सकता है कि असल में पीएम मोदी खुद पिछड़े समाज से तो हैं ही, वह ओबीसी समाज के मसीहा के तौर पर भी काम कर रहे हैं। राज्यों की राजनीति पर भारी पड़ने की कोशिश बीजेपी को मालूम पड़ चुका था कि अगर केंद्र जाति जनगणना को लेकर सुस्त रहा, तो विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसे अपने-अपने ढंग से लागू करके सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश सकती हैं। तेलंगाना पहले ही इस दिशा में सक्रिय हो चुका है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भी अपने दांव लगाने की कोशिशों में जुटी है और झारखंड में भी ‘सरना कोड’ की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से इसे राष्ट्रीय स्तर पर करवाने का एलान करके, बीजेपी सरकार ने विपक्ष की राजनीति पर बढ़त बनाने वाली चाल चल दी है। नया प्रयोग करने की कोशिश 2014 में जब से मोदी सरकार आई है, उसकी अनेकों कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। ईडब्ल्यूएस कोटा और विश्वकर्मा योजना इसका सबसे बेहतरी उदाहरण है। इसी तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिनके माध्यम से इन वर्गों के उत्थान का भी काम हो रहा है, वहीं इसके माध्यम से सरकार इन वर्गों के बीच पहुंच भी पहुंची है। लेकिन, जाति जनगणना के माध्यम से पार्टी जातियों में बंटे भारतीय समाज को सीधे तौर पर साधने की कोशिश कर रही है, जिसे अब सहेज कर रखना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी थी। क्योंकि, उज्जवला योजना, जनधन योजना जैसी अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से भाजपा सरकार ने खुद को समाज के विशेष वर्गों के नजदीक पहुंचाया है, लेकिन अब उसमें भी जातियों के आधार पर दिक्कतें बढ़ने लगी थीं, जिसके लिए नया कार्ड चलना जरूरी लग रहा था। हिंदुत्व की सियासत पर जाति की चाशनी बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण अब पार्टी के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब पार्टी हिंदुत्व पर भी सामाजिक न्याय और पिछड़ों की चुनावी चाशनी लगाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद एक ऐसे व्यापक सामाजिक समीकरण को तैयार करना है, जिसमें धार्मिक और जातिगत दोनों स्तरों पर समर्थन हासिल हो सके। हालांकि, बीजेपी की यह सोच समझी रणनीति चुनावी फ्रंट पर कितना काम करती है, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है। recent visitors 50

इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में, बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर

इंदौर  एमपी के इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में आ गए हैं। उनके प्रदर्शन के दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगे। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सख्त आपत्ति जताई है। बीजेपी विधायक ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। पार्षद अनवर कादरी ने पहलगाम हमले के विरोध में यह प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में आतंकवाद का पुतला जलाया गया और नारे लगाए गए। इसी दौरान 'पाक जिंदाबाद' किया गया। दरअसल, कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में बड़वाली चौकी पर प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता और उनके समर्थक भारी संख्या में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान आतंकवाद का पुतला जलाया गया। आरोप है कि इसी दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन में कई महिलाएं भी मौजूद थीं। बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर विवाद तब और बढ़ गया जब इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुए। इस पर एक्शन लेते हुए इंदौर के तीन नंबर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने पाक के पक्ष में नारे लगाने को देशद्रोह बताया। कांग्रेस में वरिष्ठ पार्षद है कादरी वहीं पार्षद अनवर कादरी का कहना है कि उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अनवर कादरी कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद हैं। इस घटना से इंदौर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी इस मामले को लेकर कांग्रेस को घेरती हुई नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस अपने बचाव में सफाई दे रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। recent visitors 61

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुने जाने का फैसला टलने का फायदा एमपी को भी

भोपाल भारतीय जनता पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में काफी वक्त लगा रही है। इसके साथ ही कई राज्यों के अध्यक्षों के निर्वाचन भी अटक गए हैं। इस बीच देश में जो दुखद घटना हुई है। ऐसे हालातों में पार्टी ने चुनाव टालने का फैसला लिया है। इस खबर के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। बता दें कि बीजेपी ने फिलहाल अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को टाल दिया है। पहलगाम में हुए हमले के बाद देश में मौजूदा हालात को देखते हुए भाजपा ने यह निर्णय लिया है। अब साफ हो गया है कि अध्यक्ष जगत प्रकाश (जेपी) नड्डा फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे। पार्टी के इस निर्णय का असर एमपी बीजेपी पर भी पड़ेगा। पद पर बने रहेंगे वीडी शर्मा अध्यक्ष पद का चुनाव टलने के फैसला टलने के बाद अब राजनीतिक विश्लेषक यह कयास लगा रहे हैं कि एमपी बीजेपी के अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अपने पद पर बने रहेंगे। जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक राज्यों को लेकर निर्णय होना आसान नहीं है। इस फैसले के बाद बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार और लंबा हो जाएगा। मौजूदा हालात में लिया फैसला गौरतलब है कि जेपी नड्डा वर्ष 2019 से अध्यक्ष पद पर काबिज हैं और उनका कार्यकाल पहले भी बढ़ाया गया था। भाजपा का मानना है कि इस समय संगठन की स्थिरता और सरकार की नीति को मजबूती से आगे बढ़ाना जरूरी है। ऐसे में पार्टी के आंतरिक चुनाव को फिलहाल प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। जेपी नड्डा के चुनाव टलने का फायदा एमपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी मिल सकता है। शर्मा के पास 2019 से है कमान वीडी भी वर्ष 2019 से प्रदेश अध्यक्ष हैं। अब संभव है कि चुनाव टलने के बाद मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष एमपी बीजेपी के मुखिया बने रहेंगे। हालांकि अब चुनाव टलने के बाद नए नेतृत्व को लेकर सस्पेंस और गहरा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के इतिहास को देखें तो अब तक सभी अध्यक्ष आपसी सहमति से ही चुने गए हैं। फिलहाल बीजेपी ने नए अध्यक्ष की घोषणा को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है।   recent visitors 94

दो साल बेमिसाल-आशीष ऊषा अग्रवाल

दो साल बेमिसाल-आशीष ऊषा अग्रवाल सत्येंद्र जैन,स्तंभकार भाजपा के प्रदेश नेतृत्व द्वारा दो साल पूर्व अप्रैल 2023 में प्रदेश मीडिया प्रभारी के पद पर आशीष ऊषा अग्रवाल को नियुक्त किया गया ।इन दो सालों के कार्यकाल में आशीष अग्रवाल ने अपना सर्वस्व अर्पण करते हुए पार्टी के मीडिया विभाग का कुशल नेतृत्व किया है,संचालन किया है।मीडिया विभाग को समुन्नत किया है।भाजपा की प्रवक्ता टीम,मीडिया प्रबंधन टीम की धार को तेज किया है।विधानसभा चुनाव,लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव में भी मध्य प्रदेश भाजपा ने एतिहासिक स्वर्णिम प्रदर्शन किया है।भाजपा मीडिया  विभाग ने भी इन महानतम उपलब्धियों को अर्जित करने हेतु अविस्मरणीय योगदान दिया है।देश के सभी राजनीतिक दलों में भाजपा संगठन की ही विशेषता है कि कार्यकर्ता की आरती,भारतीय जनता पार्टी ही उतारती है।आशीष अग्रवाल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,प्रदेश संगठन टीम ने इन दो सालों में आशीष अग्रवाल को कसौटी पर कसा है।परखा है। उनकी संगठन कुशलता को देखकर प्रदेश नेतृत्व ने एक देश एक चुनाव की प्रदेश स्तरीय टोली में भी सम्मिलित किया है।उन्होंने संगठन पर्व, सदस्यता अभियान में देवास जिले के बूथ कमेटियों, मंडलों के अध्यक्ष का चुनाव, जिला अध्यक्ष पद के  चुनाव का उत्तरदायित्व, कुशलतापूर्वक संपन्न किया।यह उनकी कुशल संगठन क्षमता का परिचायक है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 29 की 29 सीट्स पर विजय प्राप्त कर स्वर्णिम कीर्तिमान स्थापित किया है।विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार पांचवीं बार मध्य प्रदेश में 163 सीट जीत कर सरकार बनाई है।एंटी इनकंबेंसी टर्मिनोलॉजी को प्रो इनकंबेंसी में रूपांतरण किया है।अमरवाड़ा,बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भी पार्टी को विजय श्री प्राप्त हुई है। भाजपा की इस अनवरत महाविजय की यात्रा में प्रदेश मीडिया विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राजनीतिक दल के लिए मीडिया विभाग माउथ पीस होता हैं। मुकुट होता है ।भाजपा मीडिया विभाग के सदस्य पार्टी की रीति-नीति, कार्यक्रमों योजनाओं,भाजपा शासन की उपलब्धियां को मीडिया के माध्यम से जनता के समक्ष विभिन्न चैनल्स पर होने वाली परिचर्चा में रखते हैं।मीडिया का समाचार विभाग प्रतिदिन अनेक प्रेस नोट,फोटो, वीडियो तैयार कर,समय पूर्व मीडिया संस्थानों को प्रकाशन हेतु प्रेषित करता है। मीडिया विभाग के प्रमुख को सतत रूप से पार्टी की वैचारिक शक्ति का परिशोधन,संशोधन,संवर्धन एवं प्रदेश के सभी सदस्यों को समयबद्ध अथवा समय पूर्व वितरण नितप्रति करना रहता है।मीडिया संस्थानों से सतत सम्पर्क रखना एवं पत्रकारिता जगत से संबध्द स्वामियों,संपादकों,संवाददाताओं,कैमरामैन के सुख-दुख में सम्मिलित होना भी आवश्यक रहता है। यह सभी अत्यंत ही जटिल कार्य को सम्पन्न करने हेतु भागीरथी परिश्रम करना होता है।यह अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ भूख-प्यास,निद्रा,दिन,रात आदि से परे होता है।इस दुष्कर कार्य को संचालित करने का उत्तरदायित्व उनको दिया गया।मध्य प्रदेश के इतिहास में आशीष अग्रवाल ने सबसे कम आयु में मीडिया प्रभारी के रूप में कीर्तिमान स्थापित किया है।वह अपने नाम के साथ अपनी माँ का नाम ऊषा जोड़कर नवाचार करते हुए समाज में प्रेरणादायक संदेश दे रहे हैं।आशीष अग्रवाल प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं।दूरस्थ शिक्षा एवं सामाजिक कार्य में भी स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। जन आशीर्वाद यात्रा का कुशल मीडिया प्रबंधन भाजपा की 11000 किलोमीटर की जन आशीर्वाद यात्रा में 24 दिन में लगभग 700 रथ सभाओं का आयोजन हुआ।200 से अधिक बड़ी सभाएँ हुईं।215 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा पहुँची।इस बृहद यात्रा को  आशीष ऊषा अग्रवाल के कुशल  नेतृत्व में मीडिया विभाग द्वारा कुशलता पूर्वक,निर्विघ्न,निर्विवाद संपन्न किया। उत्कृष्ट चुनाव प्रबंधन भाजपा मीडिया विभाग में आशीष अग्रवाल एक पालक के रूप में सुयोग्य मीडिया प्रभारी सिद्ध हुए हैं।लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव हेतु मीडिया सेंटर संचालित किया गया।आशीष अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन, प्रबंधन में प्रदेश कार्यालय, जिला कार्यालयों से लगभग 2000 प्रेस वार्ताएं सम्पन्न हुईं हैं। आशीष अग्रवाल की टीम भावना नेतृत्व क्षमता प्रशंसनीय है। सभी प्रवक्ता गणों से उनकी सर्वोच्च क्षमताओं को भाजपा के हित में उपयोग करने की कला भी उनके अंदर कूट-कूट कर समाहित है।मीडिया विभाग के लिए समय-समय पर विभिन्न विषयों पर आवश्यक जानकारी और तथ्यों को उपलब्ध कराने हेतु भारत के विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के नेताओं,मंत्रियों से संपर्क स्थापित कर मीडिया टीम को त्वरित रूप से उपलब्ध कराने का कार्य भी उनके द्वारा कुशलता पूर्वक किया जाता है। आशीष ऊषा अग्रवाल संगठन की कसौटी पर खरे उतरे हैं।संगठन के निखरते युवा रत्न हैं।उनको सफलतम दो वर्ष पूर्ण करने हेतु बधाईयाँ।यही कामना है कि वह निकट भविष्य में कीर्तिमान रचते जाएं। इति श्री। recent visitors 74

भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया

रायपुर  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर देश में सियासत गरमाई हुई है. एक तरफ जहां कांग्रेस सुरक्षा में चूंक और आतंकियों की पहचान को लेकर लगातार केंद्र सरकार को घेरने में लगी है. वहीं भाजपा नेता भी कांग्रेस पर जमकर पलटवार कर रहे हैं. आज भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया है. भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस नेता बेफिजूल का बयान दे रहे हैं. खरगे, सिद्धरमैया, वाड्रा, भूपेश का बयान देख लीजिए, कांग्रेस नेताओं के बयान को ही पाकिस्तान दोहराता है. भूपेश बघेल के बयान को उठाकर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बयान देते हैं. पाकिस्तानी मंत्री ने छत्तीसगढ़ में आंतरिक आतंकवाद की बात कही है. भूपेश बघेल झीरम और पहलगाम में समानता बताते हैं. आखिर कांग्रेस के नेता बताना क्या चाह रहे हैं ? बता दें, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में प्रेस वार्ता में कहा था कि इस हमले ने न सिर्फ 26 परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो दिया है. बघेल ने इस आतंकी घटना को ‘झीरम घाटी की घटना’ से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए. भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम में भी नाम पूछ-पूछ कर मारा गया था. वहां भी 33 लोग मारे गए थे और पहलगाम में भी 26 लोगों की जान गई. पहलगाम में भी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल मदद के लिए सामने नहीं आया. इस घटना ने झीरम घाटी की घटना की याद ताज़ा कर दी. हमारे सभी नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की, शोक व्यक्त किया और केंद्र सरकार को समर्थन देने की बात कही. लेकिन भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने सिर्फ ‘धर्म पूछ-पूछ कर मारा’ को ही मुख्य मुद्दा बना दिया. पूर्व सीएम ने सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सहायता क्यों नहीं पहुंची? इसका जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर का जिम्मेदार कौन है? recent visitors 59