बाड़मेर के इस नेता को मिला MP का प्रभार, कांग्रेस ने संगठन में किया बड़ा बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश कांग्रेस में बदलाव का दौर जारी है. अब प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव हुआ है. भंवर जितेंद्र सिंह को प्रभारी पद से हटाया गया है. उनकी जगह हरीश चौधरी मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए हैं. भंवर जितेंद्र सिंह के पास दो राज्यों की जिम्मेदारी थी. जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के अलावा असम के प्रभारी थे. कांग्रेस ने 13 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रभारी नियुक्ति किए हैं. हरीश चौधरी राजस्थान में गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वर्तमान में बाड़मेर जिले की बायतु विधानसभा क्षेत्र से राजस्थान विधान सभा के MLA हैं. हरीश चौधरी को गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है. हरीश चौधरी मध्य प्रदेश में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के साथ मिलकर कांग्रेस संगठन का काम देखेंगे.   पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधा इधर, भोपाल में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भाजपा पर निशाना साधा. MP करप्शन के मामले में टॉप 3 में है. अधिकारियों के 300 से अधिक प्रकरण लंबित है. 21 साल पुराने मामले पर उनके और उनके परिवार पर FIR कर दी है. हेमंत कटारे हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे. मेरा सवाल मोहन यादव से है. क्या एक ही ऐसा केस है पूरे MP में ऐसा? ऐसे कितने ही एमपी में कैसे हैं और यह कैस तो सिविल का है. कांग्रेस के नेताओं पर दबाव बनाने के लिए FIR दर्ज कराई जा रही है. सौरभ शर्मा केस कैसे रफा दफा हो जाए सरकार उसमें जुटी है. कांग्रेस ने गिनाए घोटाले पटवारी ने कहा कि BJP के नेता की बैलेंस शीट बढ़ी है. चोरी कलंकित, करप्शन आप करो FIR कांग्रेस के नेता पर कर रहे हो. परिवहन घोटालों पर ध्यान दो और लोकायुक्त में जांच चल रही उसे पूरा करो. जांच की जाए तो मंत्रालय में बैठे सभी मंत्री जेल में चले जाएंगे. पटवारी ने नल जल योजना को लेकर कहा कि मैं पत्रकारों को चुनौती देता हूं जहां भी 100 प्रतिशत योजना पहुंची हो तो मैं उस पत्रकार ओर व्यक्ति का स्वागत करूंगा. मुख्यमंत्री के विधानसभा में, मंत्री संपत्तियां उईके के विधानसभा हो या किसी विधायक के विधानसभा का एक भी गांव ऐसा बता दो जहां नल-जल योजना से पानी मिल रहा हो. नल जल योजना में 65 प्रतिशत का घोटाला है.  recent visitors 67

महाराष्ट्र कांग्रेस का संगठन में किया बड़ा बदलाव, हर्षवर्धन सपकाल को बनाया नया प्रदेश अध्यक्ष

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस ने संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने नाना पटोले की जगह हर्षवर्धन सपकाल को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा विजय वडेट्टीवार को तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस ने संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने नाना पटोले की जगह हर्षवर्धन सपकाल को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा विजय वडेट्टीवार को तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। हर्षवर्धन पश्चिमी विदर्भ क्षेत्र से आते हैं। उन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। कौन हैं हर्षवर्धन सपकाल? हर्षवर्धन सपकाल का जमीनी स्तर से राजनीति से जुड़े हैं। उन्होंने राजनीतिक सफर में जिला परिषद सदस्य से लेकर विधायक तक की भूमिका संभाली है। वह 1999 से 2002 तक जिला परिषद के अध्यक्ष रहे। उस समय वे महाराष्ट्र के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में जाने जाते थे। वह 2014 से 2019 के बीच कांग्रेस से विधायक भी रहे। पार्टी ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की है। इसलिए नए अध्यक्ष के सामने इन चुनावों को जीतने की बड़ी चुनौती होगी। हर्षवर्धन सपकाल वर्तमान में कांग्रेस के राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने महात्मा गांधी और विनोबा भावे की विचारधाराओं पर आधारित ग्राम स्वराज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सपकाल को सर्वोदय विचारों पर आधारित राष्ट्र निर्माण युवा शिविरों के आयोजन, ग्राम स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी और आदर्श ग्राम आंदोलन का अनुभव है। पटोले ने चुनाव के बाद की थी इस्तीफे की पेशकश महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद नाना पटोले ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। पार्टी नेतृत्व ने उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया था। पिछले साल के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 16 विधानसभा सीटों पर ही जीत मिली थी। इसके बाद से ही उनके नेतृत्व पर सवाल उठना शुरू हो गए थे। recent visitors 68

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एक बार फिर सफाया, 67 उमीदवार नहीं बचपाये अपनी जमानत

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 70 में से 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. वह 70 सदस्यीय विधानसभा में लगातार तीसरी बार अपना खाता खोलने में नाकाम रही है. हालांकि, कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1% का मामूली सुधार हुआ है. जबकि उनके कई प्रमुख नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहीं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि वो लोगों का विश्वास फिर से जीतेंगे और 2030 में अपनी सरकार बनाएंगे. दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एक बार फिर सफाया गया. पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. कांग्रेस के सिर्फ तीन उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे. जिनमें कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त जो दूसरे स्थान पर रहने वाले एकमात्र कांग्रेसी नेता हैं. इस लिस्ट में नांगलोई जाट से रोहित चौधरी और बादली से देवेंद्र यादव शामिल हैं. ज्यादातर कांग्रेस उम्मीदवार बीजेपी या आप के बाद तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन कुछ सीटों में कांग्रेस के उम्मीदवार एआईएमआईएम के उम्मीदवारों से भी पीछे रहे. जिसमें मुस्लिम बहुल क्षेत्र शामिल हैं. ये उम्मीदवार रहे तीसरे नंबर पर दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव खुद बादली सीट पर तीसरे स्थान पर रहे, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा कालकाजी में तीसरे स्थान पर रहीं और पूर्व मंत्री हारून यूसुफ बल्लीमारान में तीसरे स्थान पर थे, जिसका उन्होंने 1993 से 2013 के बीच पांच बार प्रतिनिधित्व किया था. कांग्रेस ने बिगाड़ा आप का खेल कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली सुधार ने आप आदमी पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया है. कांग्रेस आप के लिए खेल बिगाड़ने में कामयाब रही, जिसे अनुसूचित जाति और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा, जहां कांग्रेस ने आप की कीमत पर मामूली बढ़त हासिल की और भाजपा को फायदा हुआ. चुनाव में आप के वोट शेयर में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. आम आदमी पार्टी को 43.19 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि 2020 के चुनाव में 53.6 प्रतिशत वोट शेयर मिला था. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1 प्रतिशत का सुधार हुआ है, लेकिन ये वोट शेयर सीट में तब्दील नहीं हो पाया. पार्टी को 2020 के विधानसभा चुनावों में 4.3 प्रतिशत के मुकाबले 2025 के चुनाव में 6.39 प्रतिशत वैध वोट मिले हैं. साल 2008 में कांग्रेस का वोट शेयर 40.31 प्रतिशत (पिछली बार जब कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाई थी) था. कांग्रेस का ये प्रतिशत साल 2013 में गिरकर 24.55 प्रतिशत पहुंच गया, 2015 में 9.7 प्रतिशत और 2020 में 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गया था.वहीं, AAP ने कांग्रेस के वोट शेयर में सेंध लगाकर 2013 में 29.6 प्रतिशत, 2015 में 54.6 प्रतिशत और 2020 में 53.6 प्रतिशत वोट हासिल किया था.   पार्टी के एक नेता ने कहा, 'हमने जो खोया था, उसका कुछ हिस्सा वापस पा लिया है. ये लड़ाई जारी रहेगी.' कांग्रेस नेताओं को लगता है कि अब ये एक लंबी और कठिन लड़ाई है, क्योंकि पार्टी लगभग 5.8 लाख वोट हासिल करने में सफल हो सकती है, जो 2020 में 3.95 वोट से थोड़ा अधिक है. लेकिन 2015 में 8.67 लाख वोट और 2013 में 1.93 करोड़ वोट से बहुत दूर है जब उसने 8 सीटें जीती थीं. 2008 में कांग्रेस को 2.49 करोड़ वोट मिले थे, जब उसने 43 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. इसके इतर कांग्रेस का पतन और उसकी बिगड़ती स्थिति का असर इंडिया ब्लॉक की एकता जुटता पर पड़ेगा, क्योंकि इंडिया ब्लॉक में पहले ही कांग्रेस बैकफुट पर है. कांग्रेस के साझेदार वैचारिक मुद्दों और चुनावी तालमेल को लेकर अलग-अलग राय रखते रहे हैं. बिहार में विधानसभा चुनावों में इंडिया ब्लॉक के साझेदारों के बीच तनातनी दिख सकती है. हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से विपक्षी गुट में उसकी प्रमुख स्थिति और भी कम हो जाएगी. इसलिए जबकि कांग्रेस और AAP ने दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन किया था, लेकिन उन्होंने दिल्ली में अकेले लड़ने का फैसला किया. recent visitors 53

देश की राजधानी दिल्ली पर जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया, आज उसे जनता ने किया पहचानने से इनकार!

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली पर जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया, आज उसे दिल्ली की जनता ने शायद पूरी तरह भुला दिया है। दिल्ली में 15 साल तक लगातार सरकार चलाने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से गायब हो गई है। पूरा मुकाबला आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच ही सिमट कर रह गया है। अभी तक के रुझानों में दिल्ली की 70 सीटों में से एक पर भी खाता खुलता नहीं दिख रहा है। वोट प्रतिशत की भी बात करें, तो कांग्रेस बहुत ही बुरी स्थिति में दिख रही है। सुबह 10.30 बजे तक के रुझानों में कांग्रेस को महज 6.86 फीसदी वोट ही मिले हैं। मौजूदा रुझानों में 69 में से बीजेपी 41 तो आम आदमी पार्टी 28 सीटों पर आगे चल रही है। अगर इस बार भी कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलती है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा, जब कांग्रेस को दिल्ली ने पूरी तरह से नकार दिया। 2020 में भी नहीं खुला था खाता दिल्ली में हुए पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में भी कांग्रेस का बुरा हाल था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। उसका वोट प्रतिशत भी महज 4.26 फीसदी ही रहा था। 2015 में भी कांग्रेस ने सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। वोट शेयर भी 9.7 फीसदी ही रहा था। आम आदमी पार्टी के उदय ने किया बंटाधार 2013 में आम आदमी पार्टी के उदय ने अगर किसी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो वो कांग्रेस ही है। इस चुनाव से पहले 1998 से लगातार कांग्रेस की सरकार दिल्ली में थी। मगर 2013 में जनता ने अपना नया नेता चुन लिया। एक नई पार्टी ने चमत्कार कर दिया। 2008 के चुनावों में 40 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर लेकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस 2013 में 25 फीसदी से भी कम वोट शेयर पर आ गिरी। पार्टी का वोट शेयर 24.25 फीसदी ही रहा और सीटें भी 43 से घटकर महज 8 ही रह गई। इसके बाद से तो पार्टी को एक सीट मिलना भी दूभर हो गया। लोकसभा चुनाव का नहीं मिला फायदा कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में देशभर में अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि दिल्ली की सातों सीटों पर उसे हार ही मिली थी। लेकिन 18 फीसदी जनता ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर भरोसा जताया था। मगर इसका फायदा कांग्रेस को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में नहीं मिला। recent visitors 75

कांग्रेस ने किया विभिन्न समस्याओं को लेकर विधानसभा का घेराव करने का ऐलान, एकजुटता दिखाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव में विजयपुर में मिली जीत के बाद से कांग्रेस उत्साहित है और उसने विभिन्न समस्याओं को लेकर विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। इस घेराव के जरिए पार्टी अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। राज्य का विधानसभा सत्र 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है और इस सत्र के गहमागहमी वाले रहने के आसार हैं। कांग्रेस जहां विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी में है तो वही सड़क पर भी उतरने का ऐलान किया जाता है। पार्टी 16 दिसंबर को विधानसभा का घेराव करने जा रही है। यह घेराव राज्य में बढ़ती मादक पदार्थ की तस्करी, जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग पर बढ़ते अत्याचार के अलावा महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाते हुए है। पार्टी के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद राज्य की सियासत में कांग्रेस की ओर से संभवत यह पहला अवसर है जब तमाम बड़े नेता कई दिनों से इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले बयान जारी करने के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित अन्य नेता वीडियो जारी कर कार्यकर्ताओं से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। नेताओं द्वारा जारी किए गए बयानों में कहा गया है कि राज्य में मादक तस्करी लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार और राज्य की सरकार को इन मामलों का पता ही नहीं होता जबकि गुजरात की पुलिस यहां आकर दबिश देकर तस्करी का खुलासा करती है। वही एक जनजाति वर्ग के विधायक को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता है क्योंकि वह चिकित्सक के खिलाफ आवाज उठाता है। इतना ही नहीं महिलाओं और बालिकाओं के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। ज्ञात हो कि अभी हाल ही में दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। विजयपुर में कांग्रेस जीती तो बुधनी में भाजपा को जीत मिली। बुधनी में पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा का अंतर कम हुआ। इन नतीजों से कांग्रेस खासी उत्साहित है। वैसे तो कांग्रेस में खुले तौर पर गुटबाजी नजर आती है और गुटबाजी किसी से छुपी भी नहीं है। इस बार पार्टी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि तमाम नेता इस घेराव प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील करने के साथ सरकार पर हमला बोल रहे हैं।   recent visitors 78

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में करेंगे 16 दिसंबर को विधानसभा का घेराव, कई मुद्दों को करेंगे उजागर

बुरहानपुर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ट्वीट के बाद कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुरहानपुर जिले में कांग्रेस जिला अध्यक्ष और पूर्व निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा ने पत्रकारवार्ता आयोजित कर 16 दिसंबर को होने वाले विधानसभा घेराव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, यह प्रदर्शन मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में किया जाएगा। पूर्व निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा ने बताया कि मोहन सरकार का एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन विकास के नाम पर सड़कों पर गड्ढे उड़ती धूल, शासकीय अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और शासकीय स्कूलों में शिक्षकों के अभाव के कारण प्रदेश की जनता परेशान है। एक कक्ष में चार-चार कक्षाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा, प्रदेशभर के युवा बेरोजगार हैं, महिलाएं सुरक्षित नहीं है, अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। दूसरी और भाजपा सरकार द्वारा प्रदेशभर में एक साल बेमिसाल बताया जा रहा है। 16 दिसंबर को विधानसभा घेराव के माध्यम से कांग्रेस इन मुद्दों को उजागर करेगी और आम जनता के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन करेगी। साथ ही जिला स्तर पर भी आंदोलन किए जाएंगे। recent visitors 46

भाजपा सरकार पर वादाखिलाफी की आरोप, छत्तीसगढ़-धमतरी में कांग्रेस नेताओं ने दिया कलेक्ट्रेट में धरना

धमतरी. छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार को एक साल पूरा हो गया है, जिसको लेकर धमतरी में कांग्रेस नेताओं के द्वारा धरना प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट में जमकर प्रदर्शन किया गया। साथ ही प्रदेश सरकार पर किसानों व आम जनता से वादा खिलाफी करने सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर जमकर नारेबाजी की गई। वहीं, पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेट्स को भी कांग्रेस के द्वारा तोड़ दिया गया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेसियों के बीच झूमाझटकी भी हुई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के शासनकाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बदहाल है। लगातार प्रदेश में हत्या, लूट, डकैती , चाकू बाजी जैसे कई गंभीर अपराध हो रहे हैं, जिसे रोकने में भाजपा की सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। इसके साथ ही समर्थन मूल्य में हो रही धान खरीदी में किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेसियों का कहना है कि भाजपा सरकार ने किसानों को 3100 रुपये देने का घोषणा किया था, लेकिन किसानों को सिर्फ समर्थन मूल्य की राशि 2300 रुपये ही मिल रही है। इसके साथ ही किसानों को टोकन, बारदाना जैसे कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कांग्रेसियों ने बताया कि धमतरी जिले के महानदी से रेत का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। कार्रवाई नहीं होने से रेतमाफिया के हौसले बुलंद है। इसके साथ ही धमतरी शहर व आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम अवैध प्लाटिंग हो रही है, जिस पर भी प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जा रहा है, जिसको लेकर कांग्रेसियों के द्वारा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। वहीं, कांग्रेसियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होगी तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा। recent visitors 84