महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 48 उम्मीदवार किए घोषित

नई दिल्ली कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए 48 उम्मीदवारों की आज पहली सूची जारी की जिसमें नाना पटोले, पृथ्वीराज चव्हाण, बालासाहब थोराट, विजय वडेट्टीवार, विश्वजीत कदम सहित कई प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन उम्मीदवारों के नाम का चयन किया है। पार्टी ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले को फिर साकोली से टिकट दिया है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को कराड़ दक्षिण से उम्मीदवार बनाया गया है। प्रफुल्ल विनोदराव गुडाधे नागपुर दक्षिण पश्चिम, असलम आर. शेख मलाड पश्चिम, विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ब्रह्मपुरी उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे धीरज देशमुख को लातूर ग्रामीण से और अमित देशमुख को लातूर शहर से उम्मीदवार बनाया है। बाला साहेब थोराट के बेटे विजय थोराट को संगमनेर से तथा पूर्व मंत्री असलम शेख मलाड वेस्ट से उम्मीदवार बनाया है।   recent visitors 90

भाजपा के उम्मीदवार ने गड़बड़ाए समीकरण, राजस्थान-दौसा में प्रत्याशी पर उलझी कांग्रेस

दौसा. प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना हैं। इसी के चलते भाजपा ने दौसा सीट पर पूर्वी राजस्थान के कद्दावर नेता और भजनलाल सरकार में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा पर दांव खेलते हुए उन्हें टिकट दिया है। राजस्थान की इस चर्चित सीट पर प्रदेश भर निगाहें हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से जीतने के लिए ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगाया था लेकिन भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा था और कांग्रेस के मुरारीलाल मीणा यहां से सांसद निर्वाचित हुए थे। उसके बाद यह सीट खाली हुई अब इस दौसा सीट पर उपचुनाव होना हैं। इस सीट भाजपा द्वारा जगमोहन मीणा को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कांग्रेस के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा के करीबी हरिकेश मीणा, राजस्थान सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग में मुख्य अभियंता के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं लेकिन भाजपा के प्रत्याशी घोषित होने के बाद कांग्रेस की टेंशन बढ़ चुकी है। सूत्रों की मानें तो सांसद मुरारीलाल मीणा हरिकेश मीणा को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते हैं लेकिन इस सामान्य सीट पर भाजपा ने पहले ही एसटी कैंडिडेट का नाम घोषित कर दिया है, जिससे अब कांग्रेस के पास सामान्य उम्मीदवार और एससी के उम्मीदवार को टिकट देना मजबूरी बन गया है। उधर भीतर खाने चर्चा है कि कांग्रेस यदि ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट देती है तो महेश शर्मा और समृद्धि शर्मा का नाम आ सकता है और एससी पर दांव लगाती है तो मात्र डीसी बैरवा का नाम निकलकर सामने आता है। इसी ऊहापोह के चलते कांग्रेस की तरफ से टिकट डिक्लीअर होने में देरी होती नजर आ रही है। माना तो यह भी जा रहा है कि कांग्रेस कहीं ना कहीं नए प्रत्याशी का विकल्प ढूंढने में लगी है। इधर हरिकेश मीणा भी VRS लेकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। अब कांग्रेस यदि किसी और को प्रत्याशी बनाती है तो दौसा विधानसभा उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने संभावना जताई जा रही है । recent visitors 100

प्रदेश में फिर INDIA गठबंधन में दरार ! बुधनी में सपा ने उतारा प्रत्याशी, कांग्रेस के बागी नेता लड़ेंगे चुनाव

भोपाल मध्य प्रदेश में विजयपुर-बुधनी विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर दोनों ही प्रमुख दलों (बीजेपी और कांग्रेस) की ओर से तस्वीर साफ हो गई है. बुधनी विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जहां पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को प्रत्याशी बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है. कांग्रेस ने बुधनी से राजकुमार पटेल को टिकट दिया है. इधर विजयपुर विधानसभा सीट से बीजेपी ने वन मंत्री रामनिवास रावत को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा को प्रत्याशी बनाया है. इन दोनों ही सीटों पर रोचक मुकाबला होने के आसार हैं. समाजवादी पार्टी ने भी बुधनी से उतारा उम्मीदवार इधर बुधनी से युवा कांग्रेस के अर्जुन आर्य ने भी बगावती तेवर दिखा दिए हैं. अर्जुन आर्य क्षेत्र में कांग्रेस के लिए सक्रिय रहे. हालांकि, टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. अब उन्हें समाजवादी पार्टी ने बुधनी से उम्मीदवार बना दिया है. 13 नवंबर को वोटिंग, 23 को नतीजे मध्य प्रदेश की बुधनी और विजयपुर सीट पर उपचुनाव के लिए प्रक्रिया जारी है. 18 अक्टूबर से नामांकन भराने का सिलसिला जारी है. हालांकि, तीन दिन में दोनों ही सीटों पर एक भी नामांकन फॉर्म जमा नहीं हुआ है जबकि 25 अक्टूबर नामांकन फार्म जमा करने की आखिरी तारीख है. 30 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जाएंगे, तो 13 नवंबर को वोटिंग होगी और 23 नवंबर को परिणाम आ जाएंगे. इधर दोनों ही प्रमुख दल बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं. बुधनी में आसान नहीं दोनों दलों की राह भारत सरकार के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ है. यहां पांच बार से लगातार शिवराज सिंह चौहान विधायक बनते आ रहे थे. यहां बीजेपी मजबूत स्थिति में रही है. क्योंकि अब शिवराज सिंह चौहान प्रत्याशी नहीं हैं. ऐसे में यहां मुकाबला रोचक होने का अनुमान है. बीजेपी ने जहां पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस ने भी पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को प्रत्याशी बना दिया है. बागियों की भी सुगबुगाहट प्रत्याशियों के नाम का ऐलान होने के बाद दोनों ही दलों से बागियों की भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है. बीजेपी के कद्दावर नेता अपने समर्थकों के साथ मीटिंग कर रहे हैं. इस मीटिंग के बाद निर्णय अनुसार यह जनप्रतिनिति आगे की रणनीति बनाएंगे. इधर कांग्रेस से युवा नेता अर्जुन आर्य ने भी बगावत कर दी है. विजयपुर में भी रोचक मुकाबला विजयपुर विधानसभा सीट पर भी दोनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की राह आसान होती नजर आ नहीं आ रही है. विजयपुर विधानसभा सीट पर 67 साल में 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें 9 बार कांग्रेस जीती है, जबकि 6 बार बीजेपी के जनप्रतिनिधि विधायक चुने गए हैं. recent visitors 83

यूपी उपचुनाव सीट पर कांग्रेस -समाजवादी पार्टी में दरार, सपा के सामने जिद्द पर अड़ी कांग्रेस

लखनऊ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच एक तरफ महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे का पेंच फंसा हुआ है वहीं यूपी उपचुनाव में सपा की ओर से दो सीटों के ऑफर ने कांग्रेसी दावेदारों की बेचैनी बढ़ा दी है। पार्टी ने एक तरफ ज्‍यादा सीटों के लिए सपा पर दबाव बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अधिक सीटें नहीं मिलीं तो कांग्रेस यूपी उपचुनाव से किनारा भी कर सकती है। हालांकि अभी तक कांग्रेस नेताओं ने इस पर चुप्‍पी साध रखी है। प्रदेश अध्‍यक्ष अजय राय ने कहा है कि सीटों के बारे में राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व तय कर रहा है। हम लोग यूपी में संगठन की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर फंसे इस पेंच के बीच कांग्रेस यूपी में दो से ज्यादा सीटों के लिए अड़ी हुई है। अभी तक सपा की तरफ से उसके लिए केवल दो ही सीटें छोड़े जाने का स्पष्ट संकेत दिया गया है। यूपी में नौ विधानसभा सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी इंडिया गठबंधन के इन दोनों प्रमुख दलों के बीच सीटों के बंटवारे का विवाद हल नहीं हो पाया है। नामांकन की अंतिम तारीख 25 अक्तूबर नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस में टिकटों के दावेदारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। अभी तक के संकेतों के अनुसार कांग्रेस को गाजियाबाद के अलावा खैर की सीट मिलने वाली है। समाजवादी पार्टी ने इन दोनों सीटों से अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। इसके अलावा सपा ने कुंदरकी सीट पर भी अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। गाजियाबाद और खैर सीट से कांग्रेस के टिकट के दावेदार भी खासे परेशान हैं। पार्टी ने उन्हें अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी केवल दो ही सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में सपा पर हर हाल में दो से ज्यादा सीटें छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उपचुनाव में दोनों दलों के बीच गठबंधन कौन सा मोड़ लेता है? सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस महाराष्ट्र में सपा की 12 सीटों पर दावेदारी से बेचैन है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनावों के लिए सीटों का विभाजन एक गंभीर मुद्दा बन गया है. कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी पांच से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी, वहीं समाजवादी पार्टी सिर्फ दो गाजियाबाद और खैर सीटों की पेशकश कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस उन सीटों पर भी चुनाव लड़ना चाहती थी, जिनमें कुछ सीटों पर अखिलेश यादव ने अपनी ओर से उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस हालत में, कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर चुनाव लड़ने के बजाय चुनाव न लड़ने का विचार कर रही है. इस बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय, पार्टी प्रमुख अजय राय, और पार्टी नेता अराधना मिश्रा अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी ने ज्यादा सीटें देने की योजना नहीं बनाई है. कश्मीर-हरियाणा चुनाव के बाद दबाव में कांग्रेस सीट बंटवारे का यह मुद्दा तब सामने आया है जब हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजों में निराशाजनक प्रदर्शन और जम्मू क्षेत्र में सीट ना जीत पाने के बाद कांग्रेस अपने सहयोगियों से अपनी चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए दवाब में है. यह बताया जा रहा है कि गांधी परिवार ने अखिलेश यादव के साथ फूलपुर सीट पर चर्चा की थी, जहां समाजवादी पार्टी ने अपने हार चुके प्रत्याशी मुस्तफा सिद्दीकी को कैंडिडेट बनाया है. यूपी की 9 सीटों पर होना है उपचुनाव उत्तर प्रदेश में 9 सीटों के लिए उपचुनाव 13 नवंबर को आयोजित होंगे जिनमें करहल (मैनपुरी), मीरापुर (मुजफ्फरनगर), कटेहरी (अंबेडकर नगर), गाजियाबाद, सिसामऊ (कानपुर), मझावन (मिर्जापुर), फूलपुर (प्रयागराज), खैर (अलीगढ़), और कुंदरकी (मुरादाबाद) शामिल हैं. recent visitors 92

कांग्रेस के लिए बड़ा चैंलेंज है बुधनी उपचुनाव, बुधनी से बीजेपी के ये हैं तगड़े दावेदार

भोपाल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिह चौहान की बुधनी विधानसभा सीट पर कांग्रेस में भी चार दावेदार सामने आए है। जानकारी के अनुसार बुधनी सीट के लिए कांग्रेस से राजकुमार पटेल, विक्रम मस्ताल, अजय पटेल और महेश राजपूत के नामों का पैनल बना है। वहीं विजयपुर में मुकेश मल्होत्रा का सिंगल नाम है। विजयपुर सीट के लिए कांग्रेस ने नाम दिल्ली भेजा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने दो दिनों तक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ रायशुमारी की है। बीजेपी के ऐलान के बाद कांग्रेस अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। बता दें कि बुधनी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट है। उनके सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। इसी तरह विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के बाद सीट रिक्त हुई है। दोनों विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। राज्य की दोनों पार्टी बीजेपी और कांग्रेस चुनाव की तैयारी में जुट गई है। भोपाल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिह चौहान की बुधनी विधानसभा सीट पर कांग्रेस में भी चार दावेदार सामने आए है। जानकारी के अनुसार बुधनी सीट के लिए कांग्रेस से राजकुमार पटेल, विक्रम मस्ताल, अजय पटेल और महेश राजपूत के नामों का पैनल बना है। वहीं विजयपुर में मुकेश मल्होत्रा का सिंगल नाम है। विजयपुर सीट के लिए कांग्रेस ने नाम दिल्ली भेजा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने दो दिनों तक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ रायशुमारी की है। बीजेपी के ऐलान के बाद कांग्रेस अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। बता दें कि बुधनी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट है। उनके सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। इसी तरह विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के बाद सीट रिक्त हुई है। दोनों विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। राज्य की दोनों पार्टी बीजेपी और कांग्रेस चुनाव की तैयारी में जुट गई है। बुधनी सीट पर कांग्रेस से इन चार नामों का पैनल     राजकुमार पटेल     विक्रम मस्ताल     अजय पटेल     महेश राजपूत जानिए कांग्रेस के दावेदारों के बारे में     राजकुमार पटेल- 1993 से 1998 तक विधायक रहे उसी दौरान शिक्षा राज्यमंत्री रहे। 1998 में बडे़ भाई देवकुमार पटेल को टिकट मिला था।     विक्रम मस्ताल- टीवी सीरियल में भगवान हनुमान का रोल निभा चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में बुधनी से प्रत्याशी रह चुके हैं।     अजय पटेल- युवा कांग्रेस के बुधनी विधानसभा के 10 साल से अध्यक्ष हैं। पिता डॉक्टर हैं। किसान परिवार से आते हैं।     महेश राजपूत- बुधनी के दो बार जनपद अध्यक्ष रहे। 2008 में कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं। विजयपुर सीट पर ये सिंगल नाम श्योपुर जिले की विजयपुर सीट पर बीजेपी की तरह कांग्रेस के संभावित दावेदारों में सिंगल नाम है। कांग्रेस के पैनल में 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय लड़े मुकेश मल्होत्रा का सिंगल नाम है। मल्होत्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में 44 हजार से ज्यादा वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे थे। recent visitors 83

संभल में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रंगदारी मांगने के आरोप में अरेस्ट

 संभल यूपी के संभल जिले में पुलिस ने 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और धमकी देने के आरोप में कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जिसके बाद अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद उनको जेल भेज दिया. कांग्रेस जिलाध्यक्ष और उनके भाई सहित तीन लोगों पर उनके ही गांव के रहने वाले शख्स ने फैक्ट्री लगाने के नाम 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद से कोतवाली पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही थी. दरअसल, सदर कोतवाली इलाके के मोहम्मदपुर टांडा गांव के निवासी देशराज ने चार दिन पहले 11 अक्टूबर को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर गांव के ही रहने वाले कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय शर्मा, जिलाध्यक्ष के भाई सुभाष शर्मा और सुधीर शर्मा के द्वारा प्लॉट निर्माण करने के नाम पर 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप लगाते हुए बीएनएस की धारा 308(5) ,351(3) के तहत मुकदमा दर्ज कराया था.   मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने मुकदमे को फर्जी बताते हुए धरना देकर विरोध भी जताया था. उधर, मुकदमा दर्ज होने के बाद संभल कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और चौकी प्रभारी आशीष तोमर मामले की जांच पड़ताल में लगे हुए थे. जिसके बाद सदर कोतवाली प्रभारी और चौकी प्रभारी ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष आरोपी विजय शर्मा को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया, जहां दोनों पक्षों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं. जिसके बाद सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को जेल भेज दिया. मामले में एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि संभल कोतवाली पुलिस को 11 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि कोतवाली इलाके के मोहम्मदपुर टांडा गांव के निवासी देशराज नामक व्यक्ति के पास अपनी जमीन का बैनामा होने के बावजूद विजय शर्मा और उसके साथी देशराज को इंटरलॉकिंग की फैक्ट्री नहीं लगने दे रहे हैं. इस मामले की जांच पड़ताल की गई तो जानकारी मिली कि वास्तव में 5 लाख रुपए की डिमांड की गई थी. इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश करने पर एक आरोपी विजय शर्मा को गिरफ्तार किया गया है और उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है. इसके खिलाफ पहले से ही एससी एसटी एक्ट, धमकियां देने और मारपीट करने के पांच मुकदमे दर्ज है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष पर दर्ज हैं कई मुकदमे संभल कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष विजय शर्मा को 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने की आरोप में भले ही अब गिरफ्तार किया है लेकिन पुलिस अधिकारियों की माने तो कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय शर्मा के खिलाफ एससी एसटी एक्ट, धमकियां देने और मारपीट करने की पांच मुकदमे पहले से भी दर्ज हैं. जिसमें कई मुकदमों का ट्रायल अभी भी कोर्ट में चल रहा है. वहीं, जिला अध्यक्ष विजय शर्मा का कहना है कि मुकदमा दर्ज करा कर मेरे ऊपर रंगदारी मांगने के जो आरोप लगाए गए हैं वह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है. पुलिस प्रशासन केवल सरकार की दबाव में ही काम कर रहा है और वैसे भी बीजेपी सरकार में ब्राह्मण समाज की हमेशा से ही अनदेखी होती रही है.   recent visitors 113

शपथ से पहले कश्मीर में पलट गई बाजी ! सरकार के साथ नहीं कांग्रेस

श्रीनगर  विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत के बाद उमर अब्दुल्ला के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह 11:30 बजे पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ समारोह में शामिल होने के लिए I.N.D.I.A. गठबंधन को निमंत्रण भेजा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी श्रीनगर में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इधर शपथ ग्रहण समारोह से पहले जम्मू-कश्मीर के मनोनीत मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की मजार-ए-अनवर पर पुष्पांजलि अर्पित की। जिसमें 10 कैबिनेट मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है. इस आयोजन में कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के कई दिग्गज शामिल होने वाले हैं. लेकिन आयोजन से पहले ही इस समारोह के रंग में भंग पड़ता दिखाई दे रहा है. दरअसल, पहले कहा जा रहा था कि जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के चीफ तारिक हमीद कर्रा भी इस कैबिनेट में शामिल होकर मंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन अब कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि आज उनकी पार्टी का कोई भी विधायक मंत्री पद की शपथ नहीं लेगा और पार्टी बाहर से समर्थन करने पर भी विचार कर रही है. जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस प्रभारी भरत सिंह सोलंकी का कहना है कि फिलहाल नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही है. चर्चा पूरी होने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. बात पूरी न हो पाने के कारण आज कोई भी कांग्रेस विधायक शपथ नहीं लेगा. इस बात को लेकर भी चर्चा चल रही है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा रहेगी या फिर उसे बाहर से समर्थन करेगी. कांग्रेस के इस बयान से सियासी गलियारों में हलचल शुरू हो गई है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और माना जा रहा था कि कांग्रेस भी इस सरकार का हिस्सा रहेगी. लेकिन आज शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस के ऐलान ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक के शपथ न लेने का सीधा मतलब है कि फिलहाल कैबिनेट शेयरिंग को लेकर बात फाइनल नहीं हो सकी है और कांग्रेस के पास बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी है ताकि किसी तरह का दबाव भी न रहे. NC-कांग्रेस गठबंधन को 48 सीटें बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की. 90 सीटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 और कांग्रेस ने 6 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, बीजेपी 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही. महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी. ये है जम्मू-कश्मीर का नंबर गेम जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव हुए थे और उपराज्यपाल की ओर से पांच विधायकों के मनोनयन को भी जोड़ लें तो सदन की स्ट्रेंथ 95 पहुंचती है. 10 फीसदी वाली कैप भी है, ऐसे में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 9.5 यानि अधिकतम 10 ही हो सकती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के 42 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और चुनाव पूर्व गठबंधन में शामिल रही कांग्रेस के छह, सीपीएम के एक विधायक हैं. चुनाव पूर्व गठबंधन से ही 49 विधायक हैं और अब पांच निर्दलीय विधायकों ने भी उमर सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया है. आम आदमी पार्टी भी गिव एंड टेक के फॉर्मूले पर समर्थन ऑफर कर चुकी है. recent visitors 80