हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है, इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है

चंडीगढ़ हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है। इस रेस मे अशोक अरोड़ा,चंद्र मोहन,गीता भुक्कल में से किसी की भी लॉटरी निकल सकती है। एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी का सपना टूट जाने के बाद कांग्रेस हाई कमान भी पार्टी की प्रदेश इकाई में जल्द ही बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में जुट गया है। जल्द होगा हरियाणा इकाई में फेरबदल ! कांग्रेस का 2005 का रिकॉर्ड तोड़ने का दवा करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान और भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में हुए इस चुनाव में कांग्रेस को केवल  37 सीट ही मिलल पाई है। पार्टी हाई कमान की ओर से भी इस बार एक दशक के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी की पूरी उम्मीद जताई जा रही थी। यहीं कारण है कि टिकट वितरण में भी हाई कमान ने भूपेंद्र हुड्डा और उदयभान की पसंद का अधिक ध्यान रखा था। अब हरियाणा की सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस में प्रदेश स्तर पर कईं प्रकार का बड़ा फेरबदल होने की अटकलें हैं। हुड्डा की बजाए किसी और को मिलेगा नेता प्रतिपक्ष का पद ! राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस से जुड़े सूत्रों की माने तो इस बार कांग्रेस पार्टी की ओर से नेता प्रतिपक्ष का पद भूपेंद्र हुड्डा की बजाए किसी अन्य नेता को दिया जा सकता है। ऐसे में राहुल और प्रियंका गांधी की ओर से कांग्रेस के चुने गए विधायकों में उस नेता की पड़ताल भी शुरू कर दी गई है। चर्चा है कि थानेसर सीट से विधानसभा चुनाव जीते अशोक अरोड़ा को कांग्रेस आने वाले दिनों में नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। अशोक अरोड़ा के नाम पर हुड्डा परिवार को भी आपत्ति नहीं होगी। बता दें कि अशोक अरोड़ा जब इनेलो छोड़कर कांग्रेस में आए तो उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नेतृत्व स्वीकार किया और आज तक वह कांग्रेस की गुटबाजी में हुड्डा के साथ हैं। पंजाबी चेहरा होने के कारण अशोक अरोड़ा को यह अहमियत दी जा सकती है। अशोक अरोड़ा अतीत में इनेलो के भी प्रदेशाध्यक्ष रहे है और पूरे हरियाणा मे इनकी पकड़ है। इसके अलावा हरियाणा में पूर्व मंत्री और विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। recent visitors 80

प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के 10 माह बाद भी जीतू पटवारी अपनी टीम बनाने में कामयाब नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में बड़ी हार मिलने के बाद कांग्रेस अंदरखाने चलने वाली खींचतान से अब तक नहीं उबर पाई है। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के 10 माह बाद भी जीतू पटवारी अपनी टीम बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। राज्य में वर्ष 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था और तत्कालीन अध्यक्ष कमलनाथ के स्थान पर प्रदेश अध्यक्ष की कमान जीतू पटवारी को सौंपी गई। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद से ही पार्टी में संभावित प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर सब की नजर है मगर वक्त गुजरता जा रहा है और नियुक्तियां नहीं हो पा रही है। राज्य में कुछ पदाधिकारी और मीडिया विभाग में नियुक्तियां जरूर हुई है मगर अधिकांश पद अब भी खाली हैं। राज्य की कांग्रेस की बात करें तो गुटबाजी और पार्टी एक दूसरे के लंबे अरसे तक पर्याय रहे हैं। एक बार फिर लगभग वही स्थिति बनती जा रही है क्योंकि वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा कमलनाथ की सक्रियता लगातार कम होती जा रही है तो वही नए लोगों को कोई मौका नहीं मिल पा रहा है। नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी प्रदेश की कार्यकारिणी के गठन के साथ जिम्मेदारी का इंतजार है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष पटवारी नई कार्यकारिणी का गठन करना चाहते हैं और इसके लिए वे दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से भी कई बार बात कर चुके हैं। वहीं राज्य के पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को पद दिलाना चाहते हैं जिसके चलते आम सहमति नहीं बन पा रही है। इतना ही नहीं पार्टी को जातीय समीकरण के आधार पर भी प्रतिनिधित्व देने की चुनौती बनी हुई है। पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है कि नियुक्तियां न होने का बड़ा असर संगठन की गतिविधियों पर पड़ रहा है और यही कारण है कि वर्तमान की राज्य सरकार के खिलाफ मुद्दे कई हैं उसके बावजूद पार्टी की ओर से कोई बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं किया जा पा रहा है। हर कार्यकर्ता और नेता ‘पद’ यानी जिम्मेदारी चाहता है, मगर ऐसा नहीं हो पा रहा है। जब नेता के पास पद ही नहीं है तो वह सक्रिय क्यों होगा यह बड़ा सवाल है।   recent visitors 98

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अब ईवीएम पर सवाल उठाने लगी, कहा- ’20 सीटों पर हुआ घपला’

नई दिल्ली हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अब ईवीएम पर सवाल उठाने लगी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जहां हाल ही में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतगणना के दौरान उम्मीदवारों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। ईवीएम की बैटरी पर सवाल एएनआई से बात करते हुए खेड़ा ने कहा, हमने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जिसके बारे में हमारे उम्मीदवारों ने 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज होने की लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। यह मुद्दा मतगणना के दिन उठाया गया था, यह एक अजीब संयोग है कि जिन मशीनों में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज दिखाई गई, वे वही मशीनें थीं, जिन पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। 60-70 प्रतिशत बैटरी चार्ज वाली मशीनें वे थीं, जिन पर कांग्रेस जीती। ऐसा क्यों हुआ? आयोग से कार्रवाई करने की मांग कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आयोग इस मुद्दे का संज्ञान लेगा और उचित निर्देश देगा। पार्टी महासचिव और संचार प्रभारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "9 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायतों से भरा ज्ञापन सौंपा था। इसे आगे बढ़ाते हुए आज हमने हरियाणा के 20 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर और स्पष्ट अनियमितताओं को उजागर करते हुए एक अद्यतन ज्ञापन दिया है। हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेगा और उचित निर्देश जारी करेगा।" इन 20 सीटों के नाम शामिल हरियाणा के जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों पर कांग्रेस ने अनियमितताओं का आरोप लगाया है, उनमें नारनौल, करनाल, डबवाली, रेवाड़ी, होडल, कालका, पानीपत सिटी, इंद्री, बड़खल, फरीदाबाद एनआईटी, नलवा, रानिया, पटौदी (एससी), पलवल, बल्लभगढ़, बरवाला, उचाना कलां, घरौंडा, कोसली और बादशाहपुर शामिल हैं। इससे पहले केसी वेणुगोपाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अशोक गहलोत, प्रताप सिंह बाजवा, जयराम रमेश, पवन खेड़ा, अजय माकन और उदय भान सहित कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए चुनाव आयोग से मिलने गया था। मशीनें सील करने की मांग कांग्रेस नेताओं की चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए खेड़ा ने कहा था कि मतगणना के दिन कुछ मशीनें 99 प्रतिशत और अन्य सामान्य मशीनें 60-70 प्रतिशत पर थीं। हमने मांग की कि जांच पूरी होने तक उन मशीनों को सील और सुरक्षित रखा जाना चाहिए। हमने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि अगले 48 घंटों में हम बाकी शिकायतें भी उनके सामने पेश करेंगे। recent visitors 92

उज्जैन: कांग्रेस के पूर्व पार्षद कलीम खान की गोली मारकर हत्या, घर वालों पर ही हत्या की आशंका

उज्जैन उज्जैन में शुक्रवार सुबह कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद हाजी कलीम खान उर्फ गुड्डू की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारे नीलगंगा थाना क्षेत्र की वजीर पार्क कॉलोनी में उनके घर में घुसकर गुड्डू को चार से अधिक गोलियां मारकर फरार हो गए। पत्नी व बेटों पर हत्या का आरोप परिजनों ने हत्या का आरोप गुड्डू की पत्नी और दो बेटों पर लगाया है, और प्रॉपर्टी विवाद को हत्या का मुख्य कारण बताया जा रहा है। नीलगंगा पुलिस के अनुसार, गुड्डू के मामा नसरुद्दीन ने पुलिस को इस वारदात की सूचना दी थी। पुलिस ने गुड्डू की पत्नी नीलोफर, बड़े बेटे दानिश और छोटे बेटे आसिफ को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि गुड्डू ने पिछले 12 सालों से तीनों को प्रॉपर्टी से बेदखल कर रखा था। पहले भी हो चुका था हमला 4 अक्टूबर को गुड्डू पर मॉर्निंग वॉक के दौरान भी हमला हुआ था, जब हमलावरों ने उन पर पिस्टल से फायर किया था। हालांकि, उन्होंने नाले में कूदकर अपनी जान बचाई थी। घटना के बाद गुड्डू ने थाने में आवेदन देकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी। वहीं घटना की जानकारी लगते ही मौके पर पहुंचे पुलिस ने हत्या की शंका में उनकी पत्नी और बड़े बेटे मिंटू को हिरासत में लिया है। परिवार के लोगों ने बेटे और पत्नी पर प्रॉपर्टी विवाद में हत्या का आरोप लगाया है क्योंकि उन्होंने बेटे को प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। हत्या की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। जाँच के लिए डॉग स्क्वाड भी आ गई थी। वजीर पार्क स्थित गुड्डू के घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। बता दें पूर्व पार्षद पर एक सप्ताह पूर्व 4 अक्टूबर की सुबह मॉर्निंग वाक के दौरान हमला हुआ था। कार से आए हमलावरों ने तीन फायर किए थे। तब गुड्डू ने नाले में कुदकर अपनी जान बचाई थी। इस वारदात से वे इतना भयभीत थे कि घटना के बाद कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले थे। घटना के छह दिन बाद सब सामान्य लग रहा था तो गुड्डू ने बुधवार शाम भतीजे आरिफ के साथ नीलगंगा थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत कर एफआई आर दर्ज कराई थी।   recent visitors 148

हरियाणा में कांग्रेस की हवा, प्रदीप गुप्ता समेत कई चुनावी पंडित इस बार गलत साबित हुए हैं और उनमें से एक योगेंद्र यादव भी हैं

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले योगेंद्र यादव ने राज्य में कांग्रेस के आने की भविष्यवाणी की थी। यही नहीं उन्होंने कांग्रेस की हवा, आंधी और सुनामी जैसा दावा भी कर दिया था। इसे लेकर अब वह ट्रोल हो रहे हैं। प्रदीप गुप्ता समेत कई चुनावी पंडित इस बार गलत साबित हुए हैं और उनमें से एक योगेंद्र यादव भी हैं। योगेंद्र यादव ने अब बताया है कि आखिर कहां उनसे हरियाणा के माहौल को समझने में चूक हुई और कैसे भाजपा की सत्ता में वापसी हो गई। योगेंद्र यादव कहते हैं कि यह चुनाव एक टी-20 मैच की तरह था, जो आखिरी गेंद तक खेला गया और अंत में जीत भाजपा को मिली। योगेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे लेख में कहा, 'भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर 1 फीसदी से भी कम का रहा है। क्रिकेट की भाषा में बात करें तो यह टी-20 मैच जैसा था, जो दो ओवर रहते हुए ही खत्म होना चाहिए था। लेकिन यह आखिरी गेंद तक खिंच गया। अब तीन सवाल पर मंथन करना चाहिए। हमने इसे इतना आसान चुनाव क्यों माना? यह इतनी टाइट फाइट वाला संघर्ष कैसे बन गया? आखिर हरियाणा के चुनाव में कैसे हार गए?' मुख्य तौर पर हरियाणा में कांग्रेस की नीति की भाजपा ने काट खोज ली और अपने समीकरणों के जरिए चुनाव जीत लिया। वह कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में 19 फीसदी का इजाफा हुआ था। राज्य में किसान, पहलवान और जवान का नैरेटिव बना था। योगेंद्र यादव लिखते हैं, 'मैं भी मान रहा था कि यह जो नैरेटिव बना है, उससे कांग्रेस को बढ़त मिलेगी। वह अब कमजोर नहीं होगी। ऐसा अनुमान इसलिए था क्योंकि किसान, पहलवान के नैरेटिव पर पड़ने वाला वोट जेजेपी और इनेलो को मिलता नहीं दिख रहा था। इसके अलावा राहुल गांधी के आक्रामक अभियान से ऐसा लग रहा था कि दलित वोट बड़ी संख्या में कांग्रेस को ही मिलेगा।' लोकसभा में अच्छी बढ़त, पर विधानसभा में कैसे हार गई कांग्रेस यह स्थिति लोकसभा चुनाव में दिखी भी थी और 19 फीसदी वोट शेयर बढ़ाते हुए कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले एक पर्सेंट की बढ़त पा ली थी। लेकिन ऐसा लगता है कि किसान, पहलवान, संविधान और जवान के नारे ने काम नहीं किया। यही नहीं ऐसा लगा कि कांग्रेस अति-आत्मविश्वास में आ गई है। 10 साल की सरकार के खिलाफ जमीन पर ऐंटी इनकम्बैंसी थी और ऐसा लग रहा था कि भाजपा की स्थिति 2014 और 2019 के मुकाबले कमजोर होगी। यह चुनाव दो तरफा था और कांग्रेस भाजपा को मिलाकर 79 फीसदी वोट पड़ा, जो 2014 में 55 पर्सेंट ही था। कांग्रेस जाट समुदाय के भरोसे रह गई, भाजपा ने बना ली रणनीति योगेंद्र यादव लिखते हैं, 'किसान जवान पहलवान और संविधान के नैरेटिव में यह गलती हुई। मैं भी उन विश्लेषकों में से एक था, जो मानते थे कि इसका तात्कालिक लाभ कांग्रेस को होगा। हालांकि मैंने लोकसभा चुनाव की तरह ही इस बार भी सीटों का अनुमान जाहिर नहीं किया था, लेकिन यह साफ कहा था कि कांग्रेस को फायदा मिलेगा।' योगेंद्र यादव ने कहा कि कांग्रेस शायद जाट समुदाय पर ज्यादा निर्भर हो गई, जबकि भाजपा अपनी रणनीति पर अमल करती रही। वहीं सब कोटा वाले विवाद से उसे दलित वोटों के बंटवारे का भी मौका मिला। इसके अलावा नायब सिंह सैनी को सीएम बनाने को भी वह भाजपा की कामयाब रणनीति मानते हैं। recent visitors 128

जम्मू कश्मीर में भी नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई : रविंद्र शर्मा

नई दिल्ली हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों में हर एग्जिट पोल को धता बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। साथ ही कांग्रेस पार्टी दोनों ही राज्यों में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई। जम्मू कश्मीर में भी नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। जम्मू कश्मीर की 90 सीटों में से कांग्रेस 6 सीटें ही जीत पाई, जबकि नेशनल कांफ्रेंस की 42 सीटों को मिलाकर गठबंधन ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की। राज्य में गठबंधन के मिली जीत के बाद कांग्रेस और एनसी सरकार बनाने की प्रक्रिया में हैं। राज्य में सरकार के गठन पर कांग्रेस प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने जानकारी दी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह तो स्पष्ट है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया चल रही है, और सरकार को शपथ दिलाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा द‍िलाने के ल‍िए प्रयास जारी रहेगा। हम प्रयास तब तक करते रहेंगे, जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल नहीं जाता।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा, “ यह जम्मू-कश्मीर की जनता का अधिकार है और वो राज्‍य व केंद्र सरकार से अपना अधिकार मांगें। कांग्रेस ने भी कहा है कि यहां सुरक्षा का होना जरूरी है। यह महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी जमीन और नौकरियों के अधिकार सुरक्षित रखें। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए एक संवैधानिक गारंटी होनी चाहिए। र‍व‍िंद्र शर्मा ने कहा क‍ि कांग्रेस ने कश्मीर में अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां हमने आठ में से पांच सीटें जीती हैं, लेक‍िन जम्मू में स्थिति थोड़ी अलग रही है। प्रशासन और भाजपा ने चुनाव में दुरुपयोग किया है, इसकी कई शिकायतें मिली हैं। हमें यह देखना होगा कि क्या हमारे भीतर भी कोई कमी थी।” उन्होंने कहा, “आपको लगता है कि भाजपा की इतनी बड़ी जीत जम्मू में हुई है, जबकि हमें तो ऐसा नहीं लग रहा था। चुनावी माहौल ऐसा था कि लोग बदलाव चाहते थे, लेकिन परिणाम कुछ और ही दिखा रहे हैं। हम इस पर चर्चा करेंगे और फीडबैक लेंगे। मेरा मानना है कि कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है। लोग कांग्रेस के साथ थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अवैध गतिविधियों को नहीं रोका गया। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या वजह थी और क्यों ऐसा हुआ। जनता की आवाज़ सुननी होगी और उन पर ध्यान देना होगा।” recent visitors 91

अफसरों को खून के आंसू रुलाऊंगा तब आका भी नहीं मिलेंगे, राजस्थान के पूर्व कांग्रेस मंत्री चांदना की धमकी

जयपुर. राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में खेल मंत्री रहे अशोक चांदना का एक बयान सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। एक सार्वजनिक सभा में उन्होंने कोटा-बूंदी में लगे पुलिस अफसरों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जान-बूझकर परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब हमारी पार्टी सत्ता में आएगी तो ऐसे अफसरों को खून के आंसू रुलाएंगे। चांदना बोले कि कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र में सांसद ओम बिरला के पाले हुए अधिकारी घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग पुलिस-प्रशासन के तंत्र को अपने हाथ में रखते हैं और लोगों की खिंचाई करवाते हैं। मैं पुलिस प्रशासन के उन अधिकारियों को कहना चाहता हूं कि किसी गलतफहमी में मत रहना। तीन साल बाद ये पर्ची सरकार चली जाएगी। तब आपके आका, आपको ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे। मैं सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सामने इस मंच से विश्वास दिला रहा हूं कि जो भी व्यक्ति उने पाले हुए अधिकारियों के इशारे पर किसी भी कांग्रेस कार्यकर्ता को परेशान करेगा, उनका तेल निकाल दिया जाएगा। ये रिकॉर्डिंग करके रखना — चांदना ने आगे कहा कि पूरे 5 साल रिकॉर्डिंग चालू है। आप भी ये रिकॉर्डिंग करके रखना। जो भी कांग्रेस कार्यकर्ता के ऊपर अत्याचार करता है, उसे अगर खून के आंसू नहीं रुलाया तो मेरा नाम अशोक चांदना नहीं। अधिकारियों को अपनी नौकरी करनी चाहिए। जनता को न्याय दें, लोगों की सेवा करें, सरकारी योजनाओं के माध्यम से कैसे हर वर्ग को फायदा मिल सकता है, उस दिशा में काम करें। ऐसा करके आप किसी के ऊपर एहसान नहीं करेंगे, आप लोगों का यही काम है लेकिन आप कुछ लोगों के इशारे पर जो कर्म कर रहे हैं, वो आपके ऊपर ही भारी पड़ने वाले हैं। recent visitors 73