पेशेंट ने क्लीनिक में घुसकर डॉक्टर की पत्नी को उतारा था मौत के घाट, आरोपी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई

इंदौर क्लीनिक में घुसकर डॉक्टर की पत्नी की हत्या करने वाले आरोपी को विशेष न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही अर्थदंड भी लगाया है। घटना पांच साल पहले 6 जून 2019 की, रेसकोर्स रोड पर स्थित डॉ. रामकृष्ण वर्मा का नर्सिंग होम की है। आरोपी ने डॉक्टर के बेटे को भी चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। डॉक्टर की अनुपस्थिति में घटना आरोपित ने 6 जून 2019 को रेसकोर्स रोड स्थित ग्रेटर मालवा नर्सिंग होम में वारदात को अंजमा दिया था। यह क्लीनिक डा. रामकृष्ण वर्मा का था। घटना वाले दिन डॉ. वर्मा किसी काम से दिल्ली गए थे। उनकी गैर मौजूदगी में हत्यारा रफीक खान वहां पहुंचा और उसने डॉ. वर्मा की पत्नी लता वर्मा से अपनी पत्नी का उपचार करवाने की बात कही। आरोपी ने डॉक्टर की पत्नी को मारा चाकू लता वर्मा ने डॉक्टर के दिल्ली जाने की बात कही, इस पर रफीक वहां से चला गया। कुछ देर बाद रफीक दोबारा क्लीनिक पर आया और बहस करने लगा। इस दौरान उसने चाकू निकाला और लता पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। उसने महिला के पेट, सीने पर चाकू से कई वार किए। पास ही मोबाइल चला रहे लता के नातिन ने तुरंत इसकी जानकारी अपने मामा अभिषेक को दी। अभिषेक मां लता को बचाने पहुंचा तो हत्यारे ने उस पर भी चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल ले जहां डॉक्टरों ने लता को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के पास इलाज करा रहा था आरोपी पुलिस ने हत्यारे रफीक के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार रफीक डॉ. वर्मा से त्वचा से संबंधित किसी बीमारी का लंबे समय से उपचार करा रहा था। जिला लोक अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि विशेष न्यायाधीश डीपी मिश्रा ने प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए हत्यारे रफीक खान को आजीवन कारावास और 6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। recent visitors 107

केशव मौर्य पार्टी के सदस्य भी हैं, डिप्टी सीएम होने से पार्टी से सम्बन्ध खत्म नहीं हो जाता, याचिका हुई खारिज: कोर्ट

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सरकार से बड़ा संगठन वाले बयान को लेकर दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में कोई तत्व ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट कैपिसिटी में पार्टी फोरम में दिए गए बयान का कोई मायने नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह बयान पार्टी फोरम पर है, संवैधानिक पद पर रहते हुए सरकार के फोरम पर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केशव मौर्य डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ पार्टी के सदस्य भी हैं। डिप्टी सीएम होने से पार्टी से सम्बन्ध खत्म नहीं हो जाता। इस कारण पार्टी स्तर पर दिए गए बयान को लेकर अखबार में छपी खबरों के आधार पर याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कोई बल नहीं है। इस कारण खारिज की जाती है। याचिका में क्या कहा गया था याचिका को अधिवक्ता मंजेश कुमार यादव ने दाखिल किया था। उन्होंने याचिका में कहा था कि डिप्टी सीएम ने संगठन को सरकार से बड़ा बताया है। केशव मौर्य का सरकार से बड़ा संगठन कहना उनके पद की गरिमा को कम करता है। सरकार की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करता है। यह भी कहा कि भाजपा, राज्यपाल और चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया या खंडन न करना इस मुद्दे को और जटिल बनाता है। याचिका में कहा गया कि उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से पहले उन पर सात आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। इसलिए ऐसे आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त करना गलत है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में दिया था बयान लोकसभा चुनाव में भाजपा के यूपी में खराब प्रदर्शन के बाद हो रही भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने यह बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि संगठन सरकार से बड़ा था, है और रहेगा। लखनऊ में कार्य समिति की बैठक के बाद डिप्टी सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी अपनी बात को दोहराते हुए लिखा था कि संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा था कि मैं उपमुख्यमंत्री बाद में हूं, पहले कार्यकर्ता हूं। recent visitors 83