उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एम्बुलेंस सेवा और जाँच सेवा प्रदाय की समीक्षा की

हाई रिस्क प्रेगनेंसी का पूर्व चिन्हांकन कर उचित चिकित्सकीय संस्थान भेजें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल रिस्पांस टाइम कम करने, उचित प्रबंधन और ट्रांसपैरेंसी के लिए आधुनिक तकनीकी का करें उपयोग : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एम्बुलेंस सेवा और जाँच सेवा प्रदाय की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिये हैं कि हाई रिस्क प्रैग्नेसी का पूर्व चिन्हांकन करें, इससे उचित चिकित्सकीय संस्थान एक बार में भेजा जाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हों और रेफरल लोड भी कम होगा। रिस्पांस टाइम को कम करने, संसाधनों के उचित प्रबंधन और ट्रांसपैरेंसी के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग करें जिससे एम्बुलेंस सेवा का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। चिकित्सकीय जांच सेवाएं सुविधाजनक रूप से नागरिकों को उपलब्ध हों इसके लिये वेट लीज मॉडल और हब एंड स्पोक मॉडल पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएँ उपलब्ध कराने के प्रयास किये गये हैं। सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सशक्त मॉनीटरिंग करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में एम्बुलेंस सेवा, जननी एक्सप्रेस सेवा और डायग्नोस्टिक सेवा प्रदाय की व्यवस्था की समीक्षा की। 6 माह में 16 लाख से अधिक लाभान्वित मिशन संचालक एनएचएम श्रीमती प्रियंका दास ने बताया कि प्रदेश में 1059 जननी एक्सप्रेस, 1002 संजीवनी ज़िनमें से 167 एडवांस लाइफ सपोर्ट और 835 बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस सेवा है। विगत 6 माह में जननी और संजीवनी एम्बुलेंस सेवा द्वारा 16 लाख 20 हज़ार 582 मरीजों/गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गयी है। अप्रैल-24 से सितंबर-24 की अवधि में संजीवनी एक्सप्रेस का लाभ 6 लाख 95 हज़ार 223 मरीजों ने लिया है। वहीं जननी एक्सप्रेस सेवा से 9 लाख 25 हज़ार 359 गर्भवती महिलायें/ माताएँ लाभान्वित हुई हैं। वेट लीज मॉडल से जून-2020 से अब तक 1 करोड़ 15 लाख से अधिक नागरिकों की 4 करोड़ 53 लाख 19 हज़ार 488 जाँच की गयी हैं। प्रतिदिन लगभग 28 हज़ार जाँचें की जाती हैं। इस मॉडल के तहत प्रदेश में 85 जाँच सेवा केंद्र क्रियाशील हैं। जिनमें 134 प्रकार की जाँच की जाती है। संचालक एनएचएम के.के. रावत सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 80

चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय पदों में भर्ती की प्रक्रिया प्राथमिकता से पूर्ण की जाये : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमन्त्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिये हैं कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय पदों में भर्ती की प्रक्रिया प्राथमिकता से पूर्ण की जाये। संबंधित विभागीय अधिकारी चयन संस्थानों से नियमित संपर्क में रहें। औपचारिकताओं की पूर्ति में किसी भी प्रकार का विलंब नहीं होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में लोक सेवा आयोग एवं कर्मचारी चयन मंडल द्वारा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में की जाने वाली चयन प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। आयुक्त लोक स्वास्थ्य तरुण राठी, सचिव चिकित्सा शिक्षा श्रीमती सुरभि गुप्ता और संचालक श्रीमती मल्लिका नागर उपस्थित रहीं। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 33 हज़ार 118 पदों में भर्ती प्रक्रियाधीन है। इनमें 3 हज़ार 341 विज्ञप्त श्रेणी, 3 हज़ार 620 नर्सिंग श्रेणी के और 5 हज़ार 732 अविज्ञप्त श्रेणी के पद हैं। इनमें आईपीएचएस मानक के लिये स्वीकृत 18 हज़ार 653 पद, 263 उन्नयन संस्थाओं के लिये 5 हज़ार 664 पद, कैलाशनाथ काटजू सिविल हॉस्पिटल के 195 पद, 454 उन्नयन संस्थाओं के लिये 7 हज़ार 977 पद, 9 शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय के लिए 414 पद सहित 10 अन्य संस्थानों के 215 पद शामिल है। विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन, प्रशासकीय अधिकारी, अस्पताल अधीक्षक, सहायक प्रबंधक, प्रबंधक, हॉस्पिटल असिस्टेंट, नर्सिंग ऑफिसर, मेट्रन, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट, लैब टेक्निशियन, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर सहित अन्य चिकित्सकीय सहायक चिकित्सकीय पदों पर चयन की कार्यवाही लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल द्वारा की जा रही है।   recent visitors 65

नियमित योग और प्राणायाम तनाव को कम करने, मानसिक शांति बनाए रखने और जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रभावी साधन है- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग, प्राणायाम और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना अत्यंत आवश्यक: उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारे दैनिक जीवन, विचारधारा और दिनचर्या से होता है नियमित योग और प्राणायाम तनाव को कम करने, मानसिक शांति बनाए रखने और जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रभावी साधन है- उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर प्रदेशवासियों को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारे दैनिक जीवन, विचारधारा और दिनचर्या से होता है। स्वस्थ मानसिक स्थिति के लिए योग, प्राणायाम, और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। नियमित योग और प्राणायाम तनाव को कम करने, मानसिक शांति बनाए रखने और जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रभावी साधन है। शुद्ध और पौष्टिक आहार रखता है मन को शांत और स्थिर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वैदिक जीवनशैली और आहार संबंधी आदतों पर जोर देते हुए कहा कि संतुलित आहार और सात्विक जीवन-शैली हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। शुद्ध और पौष्टिक आहार का सेवन हमारे मन को शांत और स्थिर रखता है। ताजा भोजन और नियमित दिनचर्या का पालन कर हम मानसिक तनाव और अवसाद से बच सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को समझें, सहायता लेने में न हिचकिचाएं उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य भावनात्मक समस्याएं किसी भी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। इन लक्षणों को पहचानना और सही समय पर डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेना बेहद जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर इलाज कराने में संकोच न करें। सही मार्गदर्शन और उपचार से आप स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। 30 अक्टूबर तक मनाया जाएगा मानसिक स्वास्थ्य माह शिविरों में की जाएगी स्क्रीनिंग , उपचार एवं परामर्श सेवाएं विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मानसिक विकारों से ग्रस्त लोगों को सहायता प्रदान करना है। इस वर्ष की थीम 'मानसिक स्वास्थ्य को कार्यस्थल पर बढ़ावा देने' से संबंधित है, जो कि कार्यस्थल में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर केंद्रित है। प्रदेश में 10 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य माह का आयोजन किया जाएगा। जिसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित होंगे। शिविरों में स्क्रीनिंग, उपचार एवं परामर्श सेवाएं दी जाएगी। मानसिक समस्या से ग्रस्त व्यक्तियों के देखभालकर्ताओं हेतु जागरूकता सेमिनार आयोजित उपलब्ध रहेंगी। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग शिविर आयोजित होंगे। कार्य स्थल पर मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के विषय पर उन्मुखीकरण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1 लाख 20 हज़ार से अधिक का उपचार विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व की लगभग 10% जनसंख्या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मध्यप्रदेश में विभिन्न स्तरों पर अंतःक्षेप किये जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 3,27,790 लोगों की स्क्रीनिंग और 2,17,559 मरीजों को निःशुल्क उपचार प्रदान किया गया। अप्रैल 2024 से सितंबर 2024 तक 1,82,898 लोगों की स्क्रीनिग एवं 1,23,226 मरीजों को निःशुल्क उपचार प्रदान किया गया। मानसिक समस्या ग्रस्त व्यक्तियों के लिये प्रत्येक जिला अस्पताल में "मनकक्ष" प्रत्येक जिला अस्पताल के "मनकक्ष" में मानसिक समस्या ग्रस्त व्यक्तियों की स्क्रीनिंग, उपचार और काउंसिलिंग की जाती है। गंभीर मानसिक रोगियों को इंदौर, ग्वालियर या मेडिकल कॉलेजों के मानसिक रोग विभाग में रेफर किया जाता है। टेली-मानस हेल्पलाइन (14416 अथवा 1800- 891-4416) पर 24X7 निःशुल्क परामर्श उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए स्कूल, कॉलेज, ओल्ड एज होम, जैसे विभिन्न संस्थानों में सेमिनार आयोजित किए गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष शिविरों में मानसिक रोगियों की स्क्रीनिंग और काउंसलिंग की जाती है। इंदौर और ग्वालियर में टेलीमानस केंद्र स्थापित किए गए हैं। टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर (14416 अथवा 1800- 891-4416) पर 24X7 कॉल कर निःशुल्क परामर्श प्राप्त कर सकते है। प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 42,012 कॉल के माध्यम से परामर्श सेवायें प्रदान की गई। अप्रैल 2024 से सितंबर 2024 तक 27,951 कॉल के माध्यम से परामर्श सेवायें प्रदान की गई। "मनहित" ऐप से मिल रही है मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर जागरूकता लाने के लिए "मनहित" ऐप लांच किया गया है। "मनहित" ऐप के तीन खंड़ मानसिक स्वास्थ्य स्व-मूल्यांकन, जागरूकता सामग्री, और संपर्क सुविधा है। 18 वर्ष से कम और अधिक आयु के व्यक्ति या उनके अभिभावक व्यवहार संबंधी समस्याओं की जांच कर सकते हैं। स्व-मूल्यांकन के आधार पर ऐप, तनाव, चिंता, अवसाद, मादक द्रव्यों के सेवन आदि के लिए मार्गदर्शन और जागरूकता सामग्री प्रदान करता है। यह उपयोगकर्ताओं को टेली-मानस, मनकक्ष, और अन्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ता है। recent visitors 111

जिला चिकित्सालय, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष शिविर होंगे आयोजित

आंखों की सुरक्षा के लिये स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना है ज़रूरी : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 10 अक्टूबर को "चिल्ड्रन लव योर आईज" थीम पर मनाया जाएगा विश्व दृष्टि दिवस जिला चिकित्सालय, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष शिविर होंगे आयोजित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विश्व दृष्टि दिवस पर कहा है कि आंखों की सुरक्षा केवल बाहरी कारकों से नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली से भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि हम सभी नेत्र स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और अपने बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन दें। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, खट्टे फल और विटामिन ए, सी, और ई से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए, जो नेत्र स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, नियमित रूप से आंखों का व्यायाम, पर्याप्त नींद और आंखों को आराम देना भी जरूरी है। स्क्रीन टाइम करें कम, बच्चों को बाहर खेलने के लिये करें प्रेरित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कई अनुसंधानों से यह तथ्य सामने आए हैं कि आज के समय में स्क्रीन टाइम के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चों को दिन में कुछ समय बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि प्राकृतिक रोशनी का आंखों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। डिजिटल उपकरणों का उपयोग सीमित करें और हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए आंखों को आराम देने की आदत डालें। सही समय पर बच्चों की आंखों की जांच कराई जाए ताकि गंभीर नेत्र रोगों से बचाव किया जा सके। नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। नेत्रदान को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि नेत्रदान महादान है। नेत्रदान से किसी व्यक्ति के जीवन का प्रकाशमय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक नेत्रदान के प्रति जागरूक हों और इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं। उल्लेखनीय है कि विश्व दृष्टि दिवस प्रतिवर्ष अक्टूबर माह के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस " चिल्ड्रन, लव योर आईज" की थीम पर मनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्रदान के लिए भी लोगों को जागरूक एवं प्रोत्साहित कर पंजीयन करवाया जा रहा है। नेत्रदान के इच्छुक लोग राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1800114770 से विस्तृत जानकारी लेकर स्वैच्छिक पंजीयन करवा सकते हैं। विश्व दृष्टि दिवस (10 अक्टूबर) में आंखों की देखभाल के प्रति जागरूकता, आंखों की सुरक्षा और दृष्टि संरक्षण के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियां एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिला चिकित्सालय, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष शिविर आयोजित होंगे, जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञों और नेत्र सहायकों द्वारा आंखों की जांच एवं नेत्र देखभाल की सलाह दी जाएगी। सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आंखों की देखभाल के लिए परामर्श कार्यक्रमों एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा । अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 7 लाख से अधिक नागरिक हो चुके हैं मोतियाबिंद मुक्त नेत्र रोगों के उपचार एवं देखभाल के लिए राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत विगत वर्षों में प्रदेश में मोतियाबिंद के कुल 7,70,866 ऑपरेशन कर नागरिकों को रोग मुक्त बनाया गया। 4 हजार अंधत्व से ग्रसित नागरिकों को कॉर्निया प्रत्यारोपण कर उन्हें रोशनी प्रदान की गई है। वर्ष 2023-24 में 10 जिलो में अत्याधुनिक फेको इमुल्सिफिकेशन मशीने प्रदाय की गयी, जिससे उच्च तकनीकी से मोतियाबिंद ऑपरेशन किये जायेंगे। वर्ष 2023-24 में कुल 15,98,081 विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण किया गया। 65,937 विद्यार्थियों एवं 1,23,013 वृद्धजनों को निःशुल्क चश्में वितरित किए गये। वर्तमान वित्त वर्ष में अब तक मोतियाबिंद के 1,63,600 ऑपरेशन, 2 हज़ार 232 नेत्र परीक्षण शिविर, 32,627 वृद्धजन एवं 5,313 विद्यार्थियों को निःशुल्क चश्मे का वितरण और 625 केराटोप्लास्टी की गयी हैं। वर्तमान वर्ष में 840 व्यक्तियों ने नेत्रदान किया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में चिकित्सकीय दल द्वारा आंखों की जांच की जाती है। कार्यक्रम के तहत जन्मजात दृष्टिदोष जैसे मोतियाबिंद , भेंगापन का उपचार निशुल्क किया जाता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत विगत वित्तीय वर्ष में 173 आनुवांशिक मोतियाबिंद, 24 रेटिनोपैथी और विज़न इम्पेयरमेंट के 7457 बालकों को लाभान्वित किया गया है।   recent visitors 80

उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देश पर आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी चिकित्सालयों की प्रदर्शित करने के आदेश जारी किए

सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं की जानकारी अस्पतालों के बोर्ड पर प्रदर्शित करना अनिवार्य: उप मुख्यमंत्री शुक्ल आयुष्मान योजना में निःशुल्क उपचार की जानकारी दिखेगी बोर्ड पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देश पर आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी चिकित्सालयों की प्रदर्शित करने के आदेश जारी किए भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के निर्देश पर आयुष्मान भारत “निरामयम्” योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी चिकित्सालयों में निःशुल्क उपचार की जानकारी प्रदर्शित करने के आदेश जारी किए गए हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के सभी नागरिकों को योजना का पूरा लाभ मिले, इसके लिए यह आवश्यक है कि सूचीबद्ध चिकित्सालयों में प्रवेश द्वार के समीप बड़े अक्षरों में यह जानकारी प्रदर्शित की जाये कि किन चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के लिए वह चिकित्सालय सूचीबद्ध है। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाये कि आयुष्मान योजना के तहत हितग्राहियों को निःशुल्क और कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल, डॉ. प्रभाकर तिवारी ने भोपाल जिले के सभी अस्पताल/ नर्सिंग होम संचालकों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना की जानकारी को नागरिकों के लिए सुलभ और सरल बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि हितग्राही बिना किसी कठिनाई के इस योजना का लाभ उठा सकें।   recent visitors 80

सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण के साथ ही रेलमार्ग तथा हवाईमार्ग से रीवा जिले को अन्य शहरों से जोड़ने के कार्य किये जा रहे – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रीवा जिले का चौतरफा विकास हमारी प्राथमिकता है। सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण के साथ ही रेलमार्ग तथा हवाईमार्ग से रीवा जिले को अन्य शहरों से जोड़ने के कार्य किये जा रहे हैं। रीवा-ब्यौहारी मार्ग में नहर में इस पुल के बनने से सड़क का घुमाव समाप्त हो जाएगा तथा होने वाली दुर्घटना की संभावनाएं भी पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 4 करोड़ रुपए की लागत से अमिलकी में नहर पर बनने वाले लघु पुल का भूमि-पूजन किया तथा शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। रीवा से शहडोल मार्ग के विकास कार्य में पुल का निर्माण शामिल नहीं था। इसकी अतिरिक्त स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ कराया गया है, जो दिसंबर माह तक पूरा किया जायेगा। ग्रामवासियों ने समवेत स्वर में पुल के निर्माण की जरूरत बताई तथा उप मुख्यमंत्री शुक्ल को इस कार्य के लिए साधुवाद दिया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रीवा-शहडोल मार्ग की छुहिया घाटी में सड़क मार्ग में सुरंग बनाने का डीपीआर तैयार किया जा रहा है। शीघ्र ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से स्वीकृति के लिए अनुरोध करेंगे। विधायक गुढ़ नागेंद्र सिंह ने कहा कि रीवा का कायाकल्प उप मुख्यमंत्री शुक्ल के मार्गदर्शन में हो रहा है। गत दिवस रीवा को अटल पार्क के तौर पर बड़ी सौगात मिली है, जिससे रीवावासियों का महानगर की तर्ज पर बड़े पार्क का सपना साकार हुआ है। स्थानीय जन-प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।   recent visitors 51

उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राज्यपाल से मिल कर सिकल सेल एनीमिया के नियंत्रण के प्रयासों और प्रगति से अवगत कराया

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल से उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राजभवन में सौजन्य भेंट कर सिकल सेल एनीमिया के नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों और प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने हीमोग्लोबिनोपैथी मिशन अन्तर्गत किए जा रहे कार्यों, सिकल सेल रोगियों एवं वल्नरेबल क्षेत्र के नागरिकों के बचाव एवं उपचार के प्रयासों और संचालित जागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी। उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र का हर नागरिक सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम के लिए सावधानियों को समझे और आत्मसात करे, इसके लिए जागरूकता और आउटकम की मॉनिटरिंग के प्रयास किए जा रहे हैं, इन प्रयासों से सिकल सेल एनीमिया को जड़ से समाप्त किया जायेगा। उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 33 ज़िलों में सिकल सेल मरीज़ों की स्क्रीनिंग का कार्य किया जा रहा है। अब तक 59 लाख से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें एक लाख 34 हज़ार नागरिक सिकल सेल वाहक और 20 हज़ार 526 सिकल सेल एनीमिया के मरीज़ पाये गये हैं। 32 लाख 37 हज़ार 842 व्यक्तियों को सिकल सेल कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। मरीजों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए चिन्हांकित जिलों में 6 से 10 बिस्तरीय एकीकृत उपचार केंद्र स्थापित कर उपचार के साथ हाइड्रॉक्सी-यूरिया, फोलिक एसिड दवाइयों का वितरण किया जा रहा है। एकीकृत उपचार केन्द्रों में रिप्लेसमेंट फ्री एवं सुरक्षित रक्त की निःशुल्क सुविधा है। वर्ष 2024-25 में सिकल सेल मरीजों को लगभग 9 लाख 22 हज़ार 500 हाइडॉक्सी-यूरिया का वितरण एवं 3 हज़ार 37 यूनिट निःशुल्क रक्ताधान किया गया है।   recent visitors 118