कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए: डीवाई चंद्रचूड़

नई दिल्ली देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शिवसेना (यूबीटी) की ओर से लगाए गए आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि कोई एक पार्टी यह नहीं तय कर सकती कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए। दरअसल, शिवसेना नेता संजय राउत ने बीते दिनों चंद्रचूड़ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने महाराष्ट्र में दल-बदल करने वाले नेताओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया था। राउत ने दावा किया कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं करके चंद्रचूड़ ने दलबदल के लिए दरवाजे और खिड़कियां खुली रखीं। एएनआई को दिए इंटरव्यू में पूर्व सीजेआई ने शिवसेना के आरोपों पर कहा, 'मेरा जवाब बहुत सरल है। पूरे साल हमने कई मौलिक संवैधानिक मामलों पर सुनवाई की। हम 9 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों, 7 न्यायाधीशों की पीठ के निर्णयों और 5 जजों की पीठ के फैसलों से निपटते रहे। ऐसे में क्या किसी एक पक्ष या व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट को किस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? माफ कीजिए, यह अधिकार मुख्य न्यायाधीश के पास होता है।' हमारे पास सीमित जनशक्ति, बोले चंद्रचूड़ डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 20 वर्षों से कई मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा, 'अगर आप कहते हैं कि हमें जो समय दिया गया उसमें हमने एक मिनट भी काम नहीं किया तो ऐसी आलोचना जायज है। आप देखिए कि कई अहम संवैधानिक मामले 20 बरसों से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। एससी इन 20 साल पुराने मामलों को क्यों नहीं ले रहा है और कुछ हालिया मुद्दों पर सुनवाई क्यों कर रहा है? इस बीच, अगर आप पुराने मामलों को लेते हैं तो आपको बताया जाएगा कि आपने इस विशेष केस को नहीं लिया। हमारे पास सीमित जनशक्ति है और न्यायाधीशों की निश्चित संख्या है। ऐसे में आपको संतुलन बनाना होता है।' 'हमने चुनावी बांड पर लिया फैसला' शिवसेना मामले में फैसला देर से लेने के आरोपों पर भी पूर्व सीजेआई ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'देखिए, यही समस्या है। असली दिक्कत यह है कि राजनीति का एक निश्चित वर्ग सोचता है कि अगर उनके एजेंडे का पालन करते हैं तो हम स्वतंत्र हैं। हमने चुनावी बांड पर फैसला लिया। क्या यह कोई कम महत्वपूर्ण मामला था? हमने हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामले में फैसला सुनाया, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के तहत मदरसों को बंद करने का मुद्दा शामिल रहा। हमने व्यक्तियों के विकलांगता अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई की। क्या ये कम जरूरी मामले थे?' शिवसेना यूबीटी का क्या है आरोप वर्ष 2022 में अविभाजित शिवसेना में विभाजन के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले पार्टी के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले पार्टी विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। शीर्ष अदालत ने अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का दायित्व विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ था। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को असली राजनीतिक दल घोषित किया था। राउत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के नतीजे पहले से तय थे। उन्होंने कहा कि अगर तत्कालीन पूर्व न्यायाधीश ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला किया होता, तो नतीजे अलग होते। recent visitors 67

डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया फैसले लेने में कैसा होता है प्रेशर- जजों पर केवल राजनीतिक दबाव नहीं

नई दिल्ली जजों के ऊपर केवल राजनीतिक दबाव ही नहीं होता है। उनके ऊपर निजी हित समूहों का भी दबाव होता है। यह बात रिटायर्ड सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कही। उन्होंने कहाकि यह सोशल मीडिया का सहारा लेकर माहौल बनाते हैं। वह ऐसा प्रचारित करते हैं जिससे जज के ऊपर किसी खास तरह का फैसला करने का दबाव बन जाए। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाकि यहां तक इस तरह से दबाव बनाने के लिए ट्रोलिंग की जाती है। सोशल मीडिया के जरिए हमले किए जाते हैं। डीवाई चंद्रचूड़ ने यह भी कहाकि न्याय व्यवस्था की आजादी को मापने का सिर्फ यह पैमाना नहीं होना चाहिए कि कितने फैसले सरकार के खिलाफ दिए गए। वह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने वाले पूर्व सीजेआई ने इस दौरान अपने फैसलों पर भी बात की। उन्होंने कहाकि मुझे लगता है कि मैंने एक बैलेंस बनाने की कोशिश की है। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाकि मैंने हमेशा फैसले किसी खास विचार से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि अपनी न्यायिक समझ के आधार पर ही दिया है। इस मौके पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहाकि हालांकि सीजेआई और सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को प्रशासनिक पक्ष में सरकार के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी फंड्स को लेकर किए गए अपने सुधारों को याद किया। इसके अलावा सरकारों से राय लेने में कोर्ट और एग्जीक्यूटिव्स के बीच मतभेदों को सुलझाने में अहम होता है। पूर्व सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और सरकार के बीच उपजे मतभेद का हवाला दिया जो कई बार सुर्खियों में रहा। हालांकि उन्होंने यह भी कहाकि सभी मतभेद सुलझाए भी नहीं जा सकते। उन्होंने कहाकि इसका सबसे अच्छा उदाहरण है कि सरकार अभी भी वकील सौरभ किरपाल को हाई कोर्ट का जज बनाने को राजी नहीं है। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाकि किसी जज की सेक्सुअलिटी या उसके पार्टनर का विदेशी नागरिक होना उसके फैसलों पर असर नहीं डाल सकता। इसके साथ ही उन्होंने फैसलों में स्पष्टता की भी बात की। पूर्व सीजेआई ने कहाकि खराब ढंग से लिखे गए फैसले न्याय की आस रखने वालों को निराश करते हैं। recent visitors 68

डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया चंद्रचूड़ ने कुछ खास लोगों की आवाज को याद किया, देवकीनंदन पांडेय के अंदाज से प्रभावित थे

नई दिल्ली चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपनी पर्सनल लाइफ का एक और राज खोला है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो की खूबसूरत यादें ताजा कीं। इस दौरान उन्होंने उस वक्त के कुछ मशहूर ब्रॉडकास्टर्स और उनकी शानदार आवाजों के बारे में बात की। आकाशवाणी के साथ चंद्रचूड़ की यात्रा उनके प्रारंभिक वर्षों में शुरू हुई। तब वह अपने माता-पिता के साथ हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में समाचार बुलेटिन सुनते थे। डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया कि वह आकाशवाणी के उस दौर के प्रजेंटर्स के हमेशा के लिए फैन हो गए। इंटरव्यू के दौरान डीवाई चंद्रचूड़ ने कुछ खास लोगों की आवाज को याद किया। उन्होंने बताया कि वह कैसे देवकीनंदन पांडेय के अंदाज से प्रभावित थे। सीजेआई ने बताया कि वह जिस तरह से बोलते थे, ‘ये आकाशवाणी है। अब आप समाचार सुनिए देवकीनंदन पांडेय से’, बहुत ही शानदार था। उन्होंने कहाकि इस अंदाज ने उनके बचपन पर काफी असर डाला। इसके अलावा उन्होंने कई मशहूर प्रजेंटर्स, पामेला सिंह और लोतिका रत्नम का भी नाम लिया, जो खास अंदाज में बोलती थीं, ‘दिस इज ऑल इंडिया रेडियो, द न्यूज रेड बाय लोतिका रत्नम।’ साल 1975 में दिल्ली आने के बाद सीजेआई ने आकाशवाणी में ऑडिशन दिया। यहां पर उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रोग्राम करने शुरू किए। सीजेआई के मुताबिक मुझे आज भी अपना प्रोग्राम याद आता है। उन्होंने बताया कि वह आकाशवाणी के लिए वेस्टर्न म्यूजिक पर प्रोग्राम करते थे। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया कि अपनी मां के चलते बचपन में ही उनका ऑल इंडिया रेडियो से जुड़ाव हो गया था। सीजेआई की मां एक क्लासिकल म्यूजिशियन थीं, जो रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेकर ऑल इंडिया रेडियो के विभिन्न स्टूडियोज में लेकर जाया करती थीं। तब उनकी स्कूली शिक्षा के शुरुआती दिन थे। इस तरह वह मुंबई के कई स्टूडियोज से परिचित हो चुके थे और ब्रॉडकास्टिंग में उनकी रुचि यहीं से पैदा हुई। recent visitors 54