एक दशक की तैयारी, दिख रहा है परिणाम, 10 नई परियोजनाओं पर विचार

नई दिल्ली  केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पनबिजली परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की तैयारी में है। पहलगाम हमले को देखते हुए सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को फिलहाल स्थगित किया गया है। इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया है। पिछले हफ्ते हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को समय सीमा कम करने के लिए कहा गया है। सरकार इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। लगभग 10 नई परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है। पांच को मंजूरी मिल चुकी है। 240 मेगावाट की उरी-1 स्टेज-II पनबिजली परियोजना के लिए टेंडर इस हफ्ते जारी होने की उम्मीद है। समय से पहले प्रोजेक्ट पूरा करने की तैयारी ET की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार उन पनबिजली परियोजनाओं के काम में तेजी लाने और उन्हें प्रोत्साहित करने पर भी विचार कर रही है जो अभी शुरू नहीं हुई हैं। सरकार चाहती है कि ये परियोजनाएं आर्थिक रूप से फायदेमंद हों और इनकी कीमतें भी प्रतिस्पर्धी हों। अधिकारियों का कहना है कि निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा करने के समय में 3-4 महीने कम किए जाएंगे। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) और अन्य एजेंसियां मिलकर उन पनबिजली परियोजनाओं की सूची बना रही हैं, जिन्हें जल्द पूरा किया जा सकता है। उरी-1 स्टेज II झेलम नदी पर बन रही मौजूदा परियोजना का विस्तार है। इसका उद्देश्य किशनगंगा नदी से आने वाले पानी का इस्तेमाल करना है। इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से दो महीने पहले मंजूरी मिल गई थी। अब इसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। किन प्रोजेक्ट को मिल चुकी CEA से मंजूरी CEA से मंजूरी पाने वाली अन्य परियोजनाएं हैं: सिंध नाला पर न्यू गांदरबल परियोजना, चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में किर्थई-II, रामबन और उधमपुर जिलों में सावलकोट। अधिकारियों का कहना है कि उरी-1, स्टेज II के साथ ये चारों परियोजनाएं मिलकर 3,100 मेगावाट बिजली पैदा करेंगी। हालांकि, इन परियोजनाओं को अभी केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश की सरकार से कई तरह की मंजूरी लेनी बाकी है। इसलिए, सभी मंत्रालयों और जम्मू-कश्मीर के विभागों को इन मंजूरियों को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। 10 नई परियोजनाओं पर विचार बैठक में परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी विचार किया गया। मुश्किल इलाके और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कुछ परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। सरकार नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन और जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन जैसी एजेंसियों को धन देने, आसान ऋण देने, जल कर माफ करने और निर्माण के दौरान मुफ्त बिजली देने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। CEA को नई परियोजनाओं की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भी कहा गया है। CEA की शॉर्टलिस्ट में लगभग 10 ऐसी परियोजनाएं हैं। इनमें डोडा में बिचलारी और बारिनियम/शौस, अनंतनाग में चंदनवारी लारीपुरा, किश्तवाड़ में लोअर कलनई और वार्डवान बर्सर, रियासी में अंस-1, गांदरबल में गंगबल और बांदीपोरा में किशनगंगा-II शामिल हैं। इनसे लगभग 1,000 मेगावाट बिजली पैदा हो सकती है। जम्मू-कश्मीर,लद्दाख में बिजली आपूर्ति बढ़ाने पर जोर केंद्र सरकार ने एजेंसियों से चिनाब नदी से रावी नदी में पानी मोड़ने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए भी कहा है। इसके लिए एक स्टडी शुरू की जाएगी। उम्मीद है कि पाकल दुल, किरू, परनई और क्वार परियोजनाओं में 3-4 महीने की कमी की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि सरकार इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बिजली की आपूर्ति बढ़ाई जाए। एक दशक की तैयारी, दिख रहा है परिणाम कई एक्सपर्ट पहले बता चुके हैं कि सिंधु जल समझौता अगर पूरी तरह से रद्द हो जाता है और भारत इसके पानी को अपनी जरूरतों के इस्तेमाल करने के लिए जमा रखने लायक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लेता है, तो केंद्र शासित प्रदेश में बिजली की कमी तो नहीं ही रहेगी, देश के कई राज्यों में पानी की कोई कमी नहीं रह जाएगी। दरअसल भारत, सिंधु जल संधि पर जितनी जल्दी पाकिस्तान की नकेल कसने में कामयाब होता दिख रहा है, वह इसलिए संभव हो रहा है, क्योंकि इसकी तैयारी वर्षों से चल रही है। recent visitors 52

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- भारतवर्ष के गौरवशाली अतीत से परिचय तथा प्रेरणा वर्तमान की अनिवार्य आवश्यकता है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष के गौरवशाली अतीत से परिचय तथा प्रेरणा वर्तमान की अनिवार्य आवश्यकता है। इसीलिये उद्देश्य से ही राज्य सरकार उज्जैन में वीर भारत संग्रहालय विकसित कर रही है। भारत भूमि सदियों की संस्कृति और सर्वश्रेष्ठ ज्ञान को समेटे है। देश और उसकी संस्कृति पर हुए अनेक आक्रमणों के बाद भी वीर सपूतों ने अपने शौर्य और बलिदान से संस्कृति और संस्कारों की रक्षा करते हुए भारतीय जीवन मूल्यों को संजोए रखा है। वीर भारत संग्रहालय में भारत के सभी कालखंडों के तेजस्वी व्यक्तित्व और घटनाओं को रेखांकित किया जाएगा। देश के शूरवीरों, विचारकों, दार्शनिकों, ऋषियों, लेखकों, कलाकारों, वैज्ञानिकों के योगदान का भी यहां उल्लेख होगा। भारत उत्कर्ष पर केन्द्रित शोध, अनुसंधान, फैलोशिप और अध्ययन की गतिविधियां वीर भारत न्यास के अंतर्गत संचालित होंगी। प्रथम चरण में उज्जैन के कोठी महल में वीर भारत संग्रहालय की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास, वीर भारत संग्रहालय और महादेव मूर्ति कला कार्यशाला की गतिविधियों की मंत्रालय में समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में लोकमाता देवी अहिल्या बाई के त्रिशताब्दी समारोह के संबंध में भी चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन, सृष्टि के आरंभ से ही महत्वपूर्ण रहा है। ऐतिहासिक रूप से अलग-अलग युगों में उज्जैन के महत्व पर केंद्रित गैलरी, वीर भारत संग्रहालय में विकसित की जाए। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों पर भी गैलरी हो। देश की धरोहर के रूप में विकसित हो रहे संग्रहालय के विकास से संस्कृति, कला और स्थापत्य के विशेषज्ञों को जोड़ने के साथ-साथ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से भी सहयोग लिया जाए। उज्जैन को मूर्ति कला परम्परा के संरक्षण और विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, यहां से प्रदेश में आवश्यकता अनुसार मूर्तियां उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन बड़ी मूर्तियों को पत्थर से बनाना कठिन है, उन्हें धातुशिल्प से बनाया जाए। वीर भारत संग्रहालय से विश्वविद्यालय, अकादमिक संस्थाओं और विज्ञान के शिक्षण, प्रशिक्षण व शोध से जुड़ी संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकाल महालोक में विद्यमान रंगमंडप में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा और श्रद्धालुओं के लिए भी यह रूचिकर होगा। महाकाल मंदिर सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों की ओर से समाज सेवा के विभिन्न कार्य आरंभ करने पर भी विचार किया जाए। प्रदेश में विद्यमान धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं का अन्य राज्यों में प्रचार-प्रसार भी किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई का त्रिशताब्दी समारोह 20 से 31 मई तक मनाया जाएगा। इस उपलक्ष में 20 मई को मंत्रि-परिषद की बैठक राजवाड़ा इंदौर में होगी। इसके साथ ही महेश्वर, इंदौर, भोपाल और उज्जैन में अन्य आयोजन भी होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवी अहिल्या बाई महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन और सुशासन की प्रतीक थीं। त्रिशताब्दी समारोह के अंतर्गत मालवा-निमाड़ क्षेत्र के महिला स्व-सहायता समूहों का विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाए। बैठक में बताया गया कि समारोह में लोकमाता देवी अहिल्या बाई के व्यक्तित्व और जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर प्रदर्शनी, व्याख्यान माला, महेश्वरी साड़ी सहित अन्य क्षेत्रीय सामग्री की प्रदर्शनी, पारम्परिक लोक कला, नाट्य, गायन-वादन और नृत्य पर केन्द्रित कार्यक्रम होंगे। समारोह में मालवा और निमाड़ क्षेत्र के क्षेत्रीय व्यंजनों को स्टॉल भी लगाए जाएंगे। बैठक में कोठी महल और परिसर के उन्नयन के लिए जारी गतिविधियां, वीर भारत न्यास के कार्यों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में वीर भारत संग्रहालय के अंतर्गत विकसित होने वाली गैलरियों की विषय-वस्तु का प्रस्तुतिकरण किया गया। उज्जैन में पत्थर, संगमरमर, ग्रेनाइट और धातु आदि के मूर्तिशिल्प को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित महादेव मूर्ति कला कार्यशाला के अंतर्गत जारी गतिविधियों की भी समीक्षा हुई। बैठक में प्रमुख सचिव संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव नगरीय विकास श्री संजय शुक्ला, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी, उज्जैन के कमिश्नर-कलेक्टर तथा विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।   recent visitors 46

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं कर रहे फील्ड विजिट

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य में आम जनता की शिकायतों एवं मांगों के त्वरित समाधान के लिए ‘सुशासन तिहार’ का आयोजन पूरे उत्साह के साथ जारी है। तीसरे चरण में प्रदेशभर के गांवों और कस्बों में शासन-प्रशासन पूरी तत्परता और तन्मयता के साथ आमजन की बाते सुन रहा है और उनका का समाधान कर रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। वे हेलीकाप्टर से गांवों के आकस्मिक दौरे कर रहे हैं। शासकीय योजनाओं की जमीनी हकीकत का मूल्यांकन कर रहे हैं। जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं और समाधान शिविरों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं को सुनकर उसका मौके पर निराकरण करवा रहे हैं। यह जनता-जनार्दन के प्रति छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। राज्य में अब तक 40 लाख 95 हजार आवेदन सुशासन तिहार के तहत अब तक 40 लाख 95 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश का निराकरण कर लिया गया है। इसमें धमतरी जिला ने लगभग 2 लाख 28 हजार आवेदनों में से 99.38 प्रतिशत का निराकरण कर राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के 14 जिले क्रमशः धमतरी, महासमुंद, सक्ति, बालोद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मुंगेली, रायपुर, सरगुजा, दक्षिण बस्तर दंतेवाडा, दुर्ग, जांजगीर-चाम्पा, नारायणपुर, बीजापुर ने 90 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निराकरण कर लिया है, जबकि गरियाबंद, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बिलासपुर, राजनांदगाँव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदा बाज़ार-भाटापारा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कबीरधाम, बेमेतरा, जशपुर, कोरिया, उत्तर बस्तर कांकेर, सूरजपुर जिले ने 80 से 90 प्रतिशत आवेदनों का समाधान किया है। बस्तर जिले में 78.48 प्रतिशत, कोण्डागांव में 70.97 प्रतिशत, बलरामपुर-रामानुजगंज जिलें में 60.59 प्रतिशत, मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर ने 59.09. प्रतिशत, कोरबा जिले ने 41.61 प्रतिशत तथा सुकमा जिले ने 30 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि राज्यभर में त्वरित एवं प्रभावी समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास जारी हैं। रायपुर को मिले सर्वाधिक आवेदन रायपुर जिले को 3 लाख 764 आवेदन प्राप्त हुए, जो राज्य में सर्वाधिक है। इसके बाद दूसरे क्रम पर बलौदाबाजार-भाटापारा जिला है। धमतरी, बिलासपुर और बस्तर क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवे स्थान पर हैं। निराकरण के मामले में धमतरी पहले, महासमुंद दूसरे और सक्ति जिला तीसरे स्थान पर हैं। बालोद और रायगढ़ चौथे और पांचवें क्रम पर हैं। सुशासन तिहार के दौरान सर्वाधिक 10 लाख से अधिक आवेदन प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित प्राप्त हुए, जिनमें से 94.70 प्रतिशत का निराकरण हो चुका है। उज्ज्वला योजना से जुड़े 1.47 लाख और राशन कार्ड हेतु 1.12 लाख आवेदनों में से अधिकांश का समाधान कर दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता से संबंधित मांगें भी प्रमुख रहीं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को 25 लाख 77 हजार 747 आवेदन प्राप्त हुए। राजस्व विभाग को 3 लाख 74 हजार 429, खाद्य विभाग को 2 लाख 18 हजार 113, महिला एवं बाल विकास विभाग को 1 लाख 57 हजार और नगरीय प्रशासन विभाग को 1 लाख 42 हजार 475 आवेदन प्राप्त हुए। निराकरण में महिला एवं बाल विकास विभाग प्रथम, श्रम विभाग दूसरे, तथा उद्योग, पशुपालन और खाद्य विभाग क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य को, जनभागीदारी पर आधारित सुशासन की दिशा में आगे बढ़ा रही है। गांवों में शिविरों में पहुँचकर आम लोगों से संवाद करना, शिकायतों की तत्काल सुनवाई करना और शासकीय तंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाना, यही सुशासन तिहार की मूल भावना है। ‘सुशासन तिहार’ छत्तीसगढ़ शासन की एक अभिनव पहल है, जिसने प्रशासन को जनता के और निकट लाकर विश्वास, समाधान और सेवा की एक मजबूत परंपरा को जन्म दिया है। यह अभियान मुख्यमंत्री की सोच को साकार करता है, जहाँ सरकार सिर्फ कार्यालयों में नहीं, बल्कि गांव-गांव जाकर आमजन की आवाज सुनती है और हर समस्या का समाधान करती है। recent visitors 43

मुख्यमंत्री ने सिचुएशन रूम से 5 जिलों में सिविल डिफेंस मॉकड्रिल की समीक्षा की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। राष्ट्र के समक्ष उत्पन्न विशेष परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। नागरिकों को किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के लिए सिविल डिफेंस प्रोटोकॉल्स के बारे में बताया जाए और सभी को सिविल डिफेंस नियमों का सक्रियता से पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए। सभी कलेक्टर्स सजग रहें, सतर्क रहें और सावधान रहकर ताजा हालातों पर पैनी नजर रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को वल्लभ भवन स्थित सिचुएशन रूम से प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और कटनी जिले के कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन जिलों में सिविल डिफेंस के तहत आज हुई मॉकड्रिल और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की रिहर्सल की समीक्षा की। साथ ही सभी कलेक्टर्स को नागरिकों के हित में सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स से कहा है कि वे भी अपने-अपने जिले में सिविल डिफेंस की सारी तैयारियां पुख्ता कर लें। समीक्षा में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह श्री जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव लोक निर्माण श्री नीरज मंडलोई सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। राज्य आपदा प्रबंधन कक्ष से वर्चुअली जुड़े पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार पांचों जिलों में सिविल डिफेंस मॉकड्रिल करा ली गई है। ब्लैक आउट के लिए भी ताकीद करा दिया गया है। लोगों को विधिवत् अभ्यास कराया गया है। पुलिस महानिदेशक होमगार्ड श्री अरविंद कुमार ने बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा प्रदेश के चिन्हित 5 जिलों में एक रेड सिग्नल दिया गया। इसके बाद सिविल डिफेंस के लिए नागरिकों को बचाव के तरीके बताकर उन्हें इनका पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद ग्रीन सिग्नल दिया गया। इस दौरान सभी को किसी भी विषम हालात में सुरक्षा के लिए इसी तरह एक्टिव रहने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार 7 मई की शाम 7.30 से ब्लैक आउट की तैयारी भी की गई है। उन्होंने कहा कि ब्लैक आउट का डॉक्युमेंटेशन भी किया जाएगा, भविष्य के लिए यह एक रैफरेंस के तौर पर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 5 जिलों के कलेक्टर्स से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चर्चा कर मॉकड्रिल की जानकारी ली। सभी कलेक्टर्स ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपने-अपने जिलों में आग लगने पर बचाव, मलबा गिरने पर बचाव और आपदा नियंत्रण दल द्वारा की गई कार्रवाई की सिलसिलेवार जानकारी ली। कलेक्टर भोपाल ने बताया कि शहर के 5 स्थानों में मॉकड्रिल पूरी कराई गई। देर शाम को होने वाले ब्लैक आउट की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। कलेक्टर इंदौर ने बतायाकि मॉकड्रिल हो चुकी है और सभी को किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए नागरिकों को किस तरह व्यवहार करना है, इस बारे में बताया गया। ब्लैक आउट के लिए भी तैयारी की जा चुकी है। कलेक्टर जबलपुर ने बताया कि शहर के चिन्हित स्थलों में मॉकड्रिल कराई गई और नागरिकों को सिविल डिफेंस प्रोटोकॉल के बारे में बताया गया। कलेक्टर ग्वालियर ने बताया कि शहर में मॉकड्रिल कराई गई और रेस्क्यू टीम को मोबलाइज कर दिया गया है। नागरिकों को सर्च एंड रेस्क्यू का अभ्यास कराया गया है। ब्लैक आउट की तैयारी भी कर ली है और मॉकड्रिल में नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों सभी को जोड़ा गया। कलेक्टर कटनी ने बताया कि शहर में नागरिकों को हर तरह के हालात से निपटने के लिए सिविल डिफेंस नियमों के बारे में बताया गया। आग लगने और मलबा हटाने का मॉकड्रिल भी कराया गया। एक मॉक सायरन बजाया गया, जिसके बजते ही नागरिकों को बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।   recent visitors 41

प्रधानमंत्री के साथ मध्यप्रदेश चट्टान की तरह खड़ा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी को पहलगाम आंतकी हमले के मुंहतोड़ जवाब पर बधाई: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारतीय सेना का शौर्य गर्व का आधार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री के साथ मध्यप्रदेश चट्टान की तरह खड़ा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने "ऑपरेशन सिंदूर" को बताया अद्वितीय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो कहते हैं वह होता है। हमारी सेना भी जगत जननी मां जगदंबा नवदुर्गा के समान शक्ति संपन्न है, जो दुश्मनों का समूल नाश करने में सक्षम है। पाकिस्तान के 9 आतंकवादी ठिकानों पर भारतीय सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया है। इससेपूरा देश गौरवान्वित है। ऑपरेशन सिंदूर नाम से ही स्पष्ट है, सिंदूर पर हाथ लगाने और गलत निगाह दौड़ने वाले को भारतीय सेना ने जवाब दिया है। वह दृश्य अपने सामने दिखाई दे रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हर वह स्थान और हर वह व्यक्ति जो भारत की तरफ गलत निगाह से देखेगा उसे मिट्टी में मिला देंगे। यह परिणाम सबने देखा है। प्रधानमंत्री मोदी को आतंकी खातमे के इस जबर्दस्त प्रहार की कोटिशः बधाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय रक्षा मंत्री, गृहमंत्री, सरकार और पूरे भारतवासी जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में एकजुटता दिखाई, वह सबके लिए गौरव का विषय है। हम सब प्रधानमंत्री मोदी के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के हर कदम के साथ है। हमारे देश के दुश्मनों को सबक सिखाते हुए भारतीय वीरता का जो परचम फहराया गया है, यह हम सब भारतवासियों के लिए गर्व का आधार है। इस ऑपरेशन में किसी को भी व्यक्तिगत हानि ना होते हुए आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास से मीडिया के लिए जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किये।   recent visitors 44

मुख्यमंत्री ने बैठक में जिला खनिज प्रतिष्ठान के भाग-ख में विकास कार्यों को दी मंजूरी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिला खनिज प्रतिष्ठान के तहत अर्जित फंड एक रिजर्व फंड है। इस फंड से जिलों के खनन प्रभावित क्षेत्रों में सार्वजनिक हित और सबके उपयोग के लिए स्थायी प्रकृति के ठोस काम ही कराए जाएं। काम ऐसे हों, जिसका लाभ अधिकतम लोगों को मिले। इस (डीएमएफ) मद से स्कूल भवन, अस्पताल, सामुदायिक भवन, औषधालय भवन, पशु चिकित्सालय/औषधालय, खेल मैदान सहित विशेष पिछड़े एवं कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की बसाहट क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार स्थायी श्रेणी के काम कराए जाएं। उन्होंने कहा कि अस्थायी प्रकृति के एवं मरम्मत आदि के काम संबंधित विभागों के विभागीय बजट से कराए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में जिला खनिज प्रतिष्ठान के भाग-ख के तहत हो सकने वाले विकास कार्यों की मंजूरी के लिए आयोजित बैठक में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के खनन क्षेत्रों वाले जिलों में जिला खनिज प्रतिष्ठान से प्राप्त राशि में से 502 करोड़ रूपए की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों को सैद्धांतिक स्वीकृति दी। इस निर्णय से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के विकास एवं उन्नयन कार्य किए जा सकेंगें। सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद अब जिला खनिज प्रतिष्ठान से प्रदेश के डिण्डौरी, शहडोल, अनूपपुर, बड़वानी, दमोह, छिंदवाड़ा, सिवनी, अलीराजपुर, शिवपुरी, सागर, रीवा, बैतूल आदि जिलों में विभिन्न श्रेणी के विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें डिण्डौरी जिले में आयुर्वेदिक महाविद्यालय का निर्माण, शहडोल जिले की सोन नदी पर बैराज/एनिकट का निर्माण, अनूपपुर जिले के कोतमा के चिकित्सालय में 100 बिस्तरीय अधोसंरचना का निर्माण प्रमुख रूप से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बड़वानी जिले में भीलटदेव मंदिर नागलवाड़ी के तलहटी से मंदिर तक पहुंच मार्ग का निर्माण भी डीएमएफ मद से किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन कामों को जल्द से जल्द पूरा कराया जा सकता हो, वे काम पहले कराए जाएं। स्कूलों में आवश्यकतानुसार पेयजल व्यवस्था के लिए टंकी निर्माण, बाउंड्री वॉल निर्माण जैसे काम तत्काल कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को इनका शीघ्र लाभ मिले। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव खनिज साधन श्री उमाकांत उमराव तथा संचालक प्रशासन एवं खनिकर्म श्री फ्रेंक नोबल.ए. सहित अन्य विभागीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। प्रमुख सचिव खनिज साधन श्री उमराव ने बैठक में बताया कि जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (भाग-ख) में वर्तमान में 1681 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं। इस राशि से छोटे बड़े सभी श्रेणी के काम कराए जा सकते हैं। इस राशि से उच्च प्राथमिकता क्षेत्र (60 प्रतिशत) के तहत 1008.6 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि शासन द्वारा खर्च की जा सकती है। उच्च प्राथमिकता क्षेत्र में शिक्षा, पेयजल प्रदाय, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण उपाय, स्वास्थ्य की देखभाल, स्वच्छता सुधार, कौशल विकास, वृद्धजन एवं नि:शक्तजन कल्याण तथा महिला एवं बाल कल्याण संबंधी कार्य विशेष रूप से चिन्हित किए गए हैं। अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र (40 प्रतिशत) में सिंचाई सुविधा, भौतिक अवसंरचना तथा ऊर्जा एवं वॉटरशेड विकास जैसे काम कराए जाते हैं। इस क्षेत्र के लिए भी डीएमएफ (संचित निधि) से करीब 672.4 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की जा सकती है।  नोडल विभाग द्वारा कुल 1015 कार्य अनुमोदित किए गए हैं, इनमें से 317 कार्य उच्च प्राथमिकता वाले हैं। इन कार्यों को पहले पूरा कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनुमोदन उपरांत डीएमएफ फंड से सभी विकास कार्य जल्द ही प्रारंभ करा दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रमुख सचिव श्री उमराव ने बैठक में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) की नवीन गाइडलाइन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा यह प्रावधान किया गया है कि मुख्य खनिज की खदान अथवा खदानों के समूह से 15 किलोमीटर परिधि क्षेत्र प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र होगा तथा जहां स्थानीय जनसंख्या खनन संबंधी प्रक्रिया के कारण आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिणामों के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित है, वहां जिले में स्थित मुख्य खदान अथवा खदानों से 25 किलोमीटर का क्षेत्र अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र होगा। इसके अलावा डीएमएफ (संचित निधि) की 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में व्यय करने का प्रावधान किया गया है। इस क्षेत्र में केंद्र सरकार ने आवास, कृषि एवं पशुपालन को भी जोड़ दिया है। इसी तरह डीएमएफ (संचित निधि) की 30 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में व्यय करने को कहा गया है। इस क्षेत्र में खनन जिलों में पर्यावरण की गुणवत्ता में अभिवृद्धि करने के अन्य उपाय भी इसमें जोड़े गए हैं।  recent visitors 39

रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट का किया ऐलान, टीम इंडिया को भंवर में छोड़ा

नई दिल्ली रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है. भारतीय टीम को अगले महीने इंग्लैंड का दौरा करना है. जहां टीम इंडिया मेजबानों से 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में दो दो  हाथ करेगी.  इस अहम सीरीज से पहले रोहित का संन्यास का ऐलान करना टीम इंडिया के लिए बड़ा झटका है.  भारत को जून में इंग्लैंड दौरे पर जाना है. हिटमैन ने टेस्ट से रिटायरमेंट की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी.  उन्होंने बताया कि वह वनडे क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे. रोहित शर्मा ने इंस्टा स्टोरी पर पोस्ट किए गए फोटो पर लिखा सभी को हेलो. मैं ये शेयर करना चाहता हूं कि मैं टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले रहा हूं. ये मेरे लिए गर्व की बात है कि मैंने टेस्ट में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया. आप सभी के प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया. मैं वनडे में खेलता रहूंगा.’   रोहित ने टेस्ट में ओपनर के तौर पर बनाए 9 शतक टेस्ट में बतौर ओपनर रोहित शर्मा ने 66 पारियों में 9 शतक जड़े हैं. उन्होंने इस दौरान 8 अर्धशतक लगाए हैं जबकि 42.81 की औसत से 2697 रन बनाए हैं. रोहित ने साल 2024 में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा जबकि साल 2025 में टेस्ट क्रिकेट को छोड़ा. रोहित वनडे में खेलना जारी रखेंगे और 2027 वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम करना चाहेंगे. रोहित का टेस्ट करियर 38 वर्षीय रोहित शर्मा अपने करियर के दूसरे भाग में भारत के सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाज थे. जिन्होंने 67 टेस्ट में 12 शतकों और 18 अर्धशतकों की मदद से 40.57 की औसत से 4301 रन बनाए. रोहित ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में भारत की कप्तानी की और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज़ और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ में पिछली दो सीरीज़ को बचाया. इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारत को नया टेस्ट कप्तान मिलेगा. जिसके संभावित उम्मीदवार केएल राहुल, शुभमन गिल और ऋषभ पंत हैं. बयान में क्या कहा रोहित ने अपने बयान में कहा है कि आप सभी को सूचित कर रहा हूं कि मैं टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हो रहा है। सफेद गेंद के प्रारूप में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में बेहद सम्मान की बात रही है। इस दौरन आप सभी से जो प्यार और समर्थन मिला, उसके लिए आप सभी का धन्यवाद। रोहित ने आगे लिखा है कि वह वनडे फॉर्मेट में भारत के लिए खेलते रहेंगे। बता दें कि हाल ही में भारत ने रोहित की कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी जीती है। इससे पहले भारत ने साल 2024 उन्हीं की कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप भी जीता था। साल 2023 में भारत रोहित शर्मा की कप्तानी में वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा था। कुछ समय से कर रहे थे संघर्ष रोहित शर्मा पिछले कुछ अरसे से टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष कर रहे थे। बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखलाओं में भी उनके बल्ले से रन नहीं निकले। इसके बाद दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके लिए भूलने लायक ही रहा। इस पूरे दौर में आठ टेस्ट मैचों में रोहित की औसत 10.93 रहा और वह मात्र एक बार 50 का स्कोर पार कर पाए। भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ दोनों टेस्ट जीते थे, लेकिन न्यूजीलैंड ने भारत को 3-0 से हराया था। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी भारत 3-1 से हार गया था। टेस्ट डेब्यू से ऐन पहले लगी थी चोट रोहित शर्मा के डेब्यू को लेकर एक दिलचस्प कहानी है। उन्हें साल 2010 में नागपुर टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डेब्यू करना था। लेकिन टॉस से ऐन पहले रोहित को चोट लग गई। इसके चलते वहां पर उनका डेब्यू टल गया। फिर रोहित शर्मा ने तीन साल बाद साल 2013 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में डेब्यू किया था। रोहित ने शतक के साथ टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने इस मैच में 177 रन बनाए थे। कौन बनेगा नया कप्तान? इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैच की श्रृंखला के लिए भारत के पास एक नया टेस्ट कप्तान होगा। इसके संभावित उम्मीदवार जसप्रीत बुमराह, लोकेश राहुल, शुभमन गिल और ऋषभ पंत हो सकते हैं। फिलहाल बुमराह टेस्ट में उपकप्तानी कर रहे थे। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रोहित की अनुपस्थिति में बुमराह ने ही वहां पर कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली थी।   recent visitors 46