विद्यार्थियों की सफलता लक्ष्य के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम और लगन का प्रतिफल है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बेटियाँ बढ़ा रही हैं प्रदेश का मान, सम्मान और गौरव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हाईस्कूल में 76.22 प्रतिशत और हायर सेकेण्डरी में 74.48 प्रतिशत रहा परीक्षा परिणाम विद्यार्थियों की सफलता लक्ष्य के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम और लगन का प्रतिफल है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षा वर्ष 2024-25 का परिणाम किया घोषित मुख्यमंत्री ने "परीक्षा संचालन मानक प्रक्रिया निर्देशिका" का किया विमोचन हाईस्कूल परीक्षा में सिंगरौली की कु. प्रज्ञा जायसवाल पूरे 500 अंक प्राप्त कर बनी टॉपर संभाग स्तर पर उज्जैन और जिला स्तर पर नरसिंहपुर रहा अव्वल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इस वर्ष हाईस्कूल परीक्षा में 76.22 प्रतिशत एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा में 74.48 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सफलता हासिल की है। यह सफलता लक्ष्य के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम और लगन का प्रतिफल है। प्रदेश की प्रतिभाशाली बेटियों ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर अपने अभिभावकों, शिक्षकों के साथ मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। बेटियाँ हमारा, मान, सम्मान और गौरव बढ़ा रही हैं। हाईस्कूल में सिंगरौली की बेटी प्रज्ञा जायसवाल ने शत प्रतिशत 500 अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान और हायर सेकेण्डरी में भी सतना अमरपाटन की बेटी प्रियल द्विवेदी ने 492/500 (विज्ञान गणित समूह) अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा संचालित हाईस्कूल 10वीं एवं हायर सेकेण्डरी 12वीं परीक्षा वर्ष 2024-25 के परिणामों को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से घोषित कर सफल विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अभिभावकगण एवं शिक्षकगणों को भी बधाई दी। बोर्ड परीक्षा में संभाग स्तर पर उज्जैन और जिला स्तर पर नरसिंहपुर अव्वल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा प्रकाशित "परीक्षा संचालन मानक प्रक्रिया निर्देशिका" का विमोचन किया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, माध्यमिक शिक्षा मण्डल की महानिदेशक श्रीमती स्मिता भारद्वाज उपस्थित रहीं। असफल विद्यार्थियों को मिलेगा एक और अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जो विद्यार्थी आज असफल रहे, उन्हें निराश नहीं होना है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत असफल विद्यार्थियों को एक बार फिर परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा और जो विद्यार्थी अपना स्कोर बढ़ाना चाहते हैं वह भी दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। यह नवाचार विद्यार्थियों के लिए इतिहास बदलने वाला सिद्ध होगा। मध्यप्रदेश इस प्रकार की परीक्षा कराने वाला देश का तीसरा राज्य होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सफल विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भारतीय मेधा सम्पूर्ण विश्व में अपनी श्रेष्ठता स्थापित कर रही है। विश्व में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकांश देशों की सफलता में भारतीय युवा शक्ति का योगदान उल्लेखनीय है। माध्यमिक शिक्षा मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती स्मिता भारद्वाज ने बताया कि परीक्षा पद्धति में सुधार और तकनीकी नवाचार के परिणाम स्वरूप इस वर्ष मण्डल द्वारा संचालित परीक्षा में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई और न ही किसी स्थान पर पेपर लीक होने जैसी घटना घटी। नकल के प्रकरण भी न्यूनतम रहे। मण्डल द्वारा विकसित परीक्षा संचालन मानक प्रक्रिया को निरंतर अद्यतन करते हुए क्रियान्वित किया जाता रहेगा। हाईस्कूल /हायर सेकेण्डरी परीक्षा-2025 संभागवार नियमित उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत   संभाग 10वीं 12वीं ग्वालियर 70.45 67.32 सागर 68.36 67.02 रीवा 74.89 75.07 उज्जैन 81.25 81.88 इन्दौर 77.83 75.23 भोपाल 77.63 75.21 जबलपुर 82.7 80.61   गत वर्ष की तुलना में 10वीं में 9.99 प्रतिशत और 12वीं में 18.12 प्रतिशत की वृद्धि माध्यमिक शिक्षा मण्डल की कक्षा-10 और कक्षा-12 के बोर्ड परीक्षा परिणाम में नियमित विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने के प्रतिशत में पिछले वर्ष 2024 के मुकाबले उल्लेखनीय उपलब्धि मिली है। कक्षा-12 में इस वर्ष 2025 में 74.48 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जबकि पिछले वर्ष 64.49 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे। इस प्रकार गत वर्ष के मुकाबले उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत 9.99 बढ़ा है। इसी तरह कक्षा-10 के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इस वर्ष 2025 में 76.22 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जबकि पिछले वर्ष 2024 में 58.10 प्रतिशत नियमित विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे। इसमें गत वर्ष 2024 के मुकाबले 18.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।   recent visitors 32

ऑपरेशन सिंदूर की आग में जला पाकिस्तान, शुभम की पत्नी बोलीं- पति की मौत का बदला लेने के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया

नई दिल्ली 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अपनी सैन्य रणनीति को और आक्रामक बनाया. भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए. इन हमलों की तुलना इजरायल की सैन्य रणनीति से की जा रही है, जिसमें पहले टारगेट को लॉक किया जाता है, फिर अचूक मिसाइलों से तबाही मचाई जाती है. पहलगाम हमले और भारत का जवाब पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत को कड़ा जवाब देने के लिए मजबूर किया. भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान के अंदर 9 ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. इन ठिकानों में बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, कोटली, मुजफ्फराबाद और अन्य शामिल थे. इन हमलों को "ऑपरेशन सिंदूर" नाम दिया गया. भारत की यह रणनीति इजरायल की "सर्जिकल स्ट्राइक" और "प्रीसिशन स्ट्राइक" शैली से प्रेरित मानी जा रही है. इजरायल अक्सर फिलिस्तीन, लेबनान या सीरिया में आतंकी ठिकानों पर बिना बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़े सटीक हमले करता है. भारत ने भी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक में इसी तरह की रणनीति अपनाई थी. सड़कों पर पुलिस और आर्मी यह हमला आतंकवादियों के ठिकानों को खत्म करने के लिए किया गया, जिनकी गतिविधियों का पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था. मुरीदके में अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस से जाहिर होता है कि हवाई हमले में आतंकी घायल भी हुए हैं. इसके अलावा सडकों पर पुलिस और आर्मी नजर आ रही है. जो वीडियो सामने आए हैं उसमें दिख रहा है कि आतंकवादियों के हेडक्वार्टर भारत की स्ट्राइक में बुरी तरह तबाह हुए हैं. मुजफ्फराबाद में भी बड़ा नुकसान मुजफ्फराबाद में भी भारतीय हमले के बाद बड़ी तबाही देखी गई, जहां आतंक की मस्जिद को नुकसान हुआ है. इस मस्जिद का उपयोग आतंकवादियों द्वारा बैठकें आयोजित करने के लिए किया जाता था. इसके बाद पाकिस्तान द्वारा एलओसी पर लगातार गोलीबारी की जा रही है जिसके बाद पुलिस ने सड़क पर गश्त बढ़ा दी है. भारत ने सिर्फ आतंकी कैंपों को तबाह किया है. आतंक के जिन नौ ठिकानों को वायु सेना ने निशाना बनाया उनमें शामिल हैं – बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, भिंबर, चाक अमरू, बाग, कोटली, सियालकोट और मुजफ्फराबाद शामिल है. बहावलपुर में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया. इजरायली स्टाइल में भारत का वार: समानताएं प्रीसिशन टारगेटिंग: इजरायल अपने खुफिया तंत्र (मोसाद) और ड्रोन-उपग्रह आधारित निगरानी से दुश्मन के ठिकानों को लॉक करता है. भारत ने भी इस हमले में सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन और रियल-टाइम इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया होगा. भारत का स्वदेशी नेट्रा AWACS (Airborne Warning and Control System) और इसरो के RISAT-2BR1 सैटेलाइट इस तरह के ऑपरेशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सुपरसोनिक मिसाइलें: इजरायल की डेलिलाह क्रूज मिसाइल (250 किमी रेंज), SCALP, Hammer और स्पाइक मिसाइलों की तरह, ब्रह्मोस भी कम समय में भारी तबाही मचाने में सक्षम है. सीमित लेकिन प्रभावी हमला: इजरायल अक्सर बड़े युद्ध से बचते हुए, आतंकी ठिकानों पर सीमित हमले करता है. भारत ने भी PoK और पाकिस्तान के अंदर 10-100 किमी तक घुसकर हमले किए, जैसा कि X पोस्ट्स में दावा किया गया. यह रणनीति बड़े पैमाने पर युद्ध को टालते हुए दुश्मन को कमजोर करती है.   पहलगाम में आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने भारत की सेना के एक्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मैं अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहती हूं।  हमारे पूरे परिवार को पीएम मोदी पर भरोसा उन्होंने कहा कि मैं बहुत छोटी हूं। मैं ज्यादा क्या कह सकती हूं। हमारे पूरे परिवार को पीएम मोदी पर भरोसा था। उन्होंने आज उसी तरह से जवाब देकर विश्वास को कायम रखा है। शुभम को असली श्रद्धांजलि है। वह जहां भी होंगे आज थोड़ी शांति में होंगे। मेरे पति की मौत का बदला लेने के लिए पीएम मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद।  शुभम की पत्नी ने भारतीय सेना का भी धन्यवाद अदा किया शुभम की पत्नी ने भारतीय सेना का भी धन्यवाद अदा किया। उन्होंने कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम सुनकर मैं बहुत ज्यादा भावुक थी। शुभम को शांति मिली होगी। शायद अब ऐसा कृत्य किसी के साथ न हो। यह वह बदला है जिसकी हम मांग रहे थे। हम लोगों ने आतंकवाद की एक-एक जगह को टारगेट किया है और उनकी जगह को नष्ट किया है। यह आतंकवाद पर बड़ा हमला है। सरकार ने जो कहा वह करके दिखाया है। हमें सरकार पर पूरा भरोसा था। देश की मांग को पूरा करने के लिए पीएम मोदी को सलाम  शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने कहा कि मैं लगातार न्यूज देख रहा हूं। मैं भारतीय सेना को सलाम करता हूं और पीएम मोदी को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने देश की जनता का दर्द सुना। जिस तरह से भारतीय सेना ने पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद को खत्म किया है, उसके लिए मैं भारतीय सेना को धन्यवाद देता हूं। जबसे हमने यह खबर सुनी है, मेरा पूरा परिवार हल्का महसूस कर रहा है। मैं पीएम मोदी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आकाओं के ठिकानों को नष्ट कर दिया है। हम लोगों को जब से खबर मिली, सारी रात टेलीविजन के सामने बैठे थे। देश को फक्र है। सारे देश की जो मांग थी, उसे पूरा किया गया है।  SEAD (Suppression of Enemy Air Defenses): भारत ने पाकिस्तान के चीनी निर्मित HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए SEAD रणनीति अपनाई. इसमें सुखोई-30 MKI विमानों से Kh-31P एंटी-रेडिएशन मिसाइल और स्वदेशी रुद्रम-1 मिसाइल का इस्तेमाल हुआ. इजरायल भी सीरिया के S-300 सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए ऐसी रणनीति का इस्तेमाल करता है. पाकिस्तान का एयर डिफेंस और उसकी विफलता पाकिस्तान ने अपनी हवाई रक्षा के लिए चीनी HQ-9 सिस्टम पर भरोसा किया, जिसकी रेंज 125-200 किमी है. यह सिस्टम 100 टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है. 6 मिसाइलों को एक साथ नष्ट करने की क्षमता रखता है. लेकिन भारत की ब्रह्मोस और रुद्रम मिसाइलों ने इस सिस्टम को ध्वस्त कर दिया. कुछ प्रमुख कारण… तकनीकी अंतर: HQ-9 का रडार भारत के S-400 सिस्टम (400 किमी … Read more

MP में गेहूं खरीद को लेकर बड़ा अपडेट, इन किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका, अब तक 76 लाख मीट्रिक टन गेहूं

भोपाल  मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद का आंकड़ा 85 लाख मीट्रिक टन (एमटी) रहने का अनुमान है। यह सरकार की ओर से निर्धारित किए गए खरीद के लक्ष्य 80 लाख एमटी से अधिक है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि करीब 8.76 लाख पंजीकृत किसानों से 76 लाख एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीद प्रक्रिया जिसमें केवल पंजीकृत किसानों से ही तौल करना शामिल है, अतिरिक्त पांच दिनों तक जारी रहेगी। राज्य ने 15 मार्च को गेहूं खरीद अभियान शुरू किया था और अपने 4,000 निर्धारित खरीद केंद्रों पर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत की पेशकश की थी। पिछले साल मध्य प्रदेश में 5.85 लाख किसानों से 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। जल्द ही अपडेटेड आंकड़े आने की उम्मीद है, मंगलवार तक खरीद 81 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। सरकार को अब इस सीजन में कुल 85 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद होने की उम्मीद है। घर बैठे करा सकते हैं नामांकन इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि अब तक किसानों को उनकी उपज के भुगतान के लिए 16,472 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने एसएमएस के माध्यम से किसानों को पंजीकृत किया और एक समर्पित वेब या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर से नामांकन करने का विकल्प प्रदान किया। किसान ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और तहसील कार्यालयों में स्थित सुविधा केंद्रों पर भी पंजीकरण करा सकते हैं। 175 रुपए का मिलेगा बोनस केंद्र सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी संशोधित किया है, इसे 2025-26 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,425 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि, मध्य प्रदेश 2,600 रुपए प्रति क्विंटल का खरीद मूल्य प्रदान करेगा, जिसमें 175 रुपए प्रति क्विंटल की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी शामिल है। मध्य प्रदेश में सीहोर, उज्जैन, नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और देवास जिलों में मालवा पठार के कम वर्षा वाले क्षेत्र में शरबती और डरम जैसी कुछ कम सिंचित उच्च उपज वाली किस्में उगाई जाती हैं। इन सभी किस्मों में से शरबती सबसे पसंदीदा किस्म है क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन होता है।  किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका मध्‍य प्रदेश में गेहूं की एमएसपी पर सरकारी खरीद की प्रक्रिया 5 मई को खत्‍म हो गई, लेकिन सरकार ने अभी भी कई किसानों को 9 मई तक गेहूं बेचने का मौका दिया है. ऐसे में जानिए आखिर पूरा मामला क्‍या है और कौन-से किसान फसल बेचने के लिए पात्र हैं… दरअसल, ऐसे किसान जिन्‍होंने स्‍लॉट तो बुक किए थे, लेकिन उनकी वैलिड‍िटी खत्‍म हो गई है, उन्‍हें 9 मई तक अपनी फसल बेचने का मौका दिया गया है. इसके लिए अफसरों को डीएसओ लॉगिन के जरिए स्‍लॉट की अवधि‍ बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसे लेकर खाद्य विभाग ने अफसरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. गेहूं की सबसे ज्‍यादा सरकारी कीमत MP में वहीं, सरकार ने 5 मई तक खरीद के लिए 30 अप्रैल तक स्‍लॉट बुक करने की मोहलत दी थी, लेकिन खरीद के अंतिम दिन भी किसानों को ऑफलाइन स्‍लॉट बुक करने का ऑप्‍शन दिया गया और वे फसल बेच सके. मालूम हो कि प्रदेश में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 15 मार्च से 5 मई तक चली. इस दौरान किसानों को 2425 रुपये प्रत‍ि क्विंटल एमएसपी और 175 रुपये प्रत‍ि क्विंटल बोनस का भुगतान किया गया यानी 2600 रुपये प्रति क्विंटल. हालांकि, उपज में नमी और क्‍वालिटी के चलते कीमत में अंतर आना सामान्‍य है. प्रदेश में हुआ गेहूं का बंपर उत्‍पादन मध्‍य प्रदेश में इस साल ग‍ेहूं की अच्‍छी फसल हुई है, जिसके चलते मंडियों में नई फसल की बंपर आवक दर्ज की गई. राज्‍य के सीएम मोहन यादव ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों को गेहूं की जितनी कीमत मिल रही है, वह सभी राज्‍यों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा है. व्‍यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि एमएसपी और बोनस मिलने के कारण किसानों ने निजी व्‍यापारियों की जगह सरकारी एजेंसियाे को गेहूं बेचना पसंद किया. बीते हफ्ते ही केंद्र ने मध्‍य प्रदेश का गेहूं खरीद लक्ष्‍य मिल‍ियन टन बढ़ा दिया था. 312 LMT है खरीद का अनुमानित लक्ष्‍य वहीं, देश के अन्‍य राज्‍यों में भी केंद्रीय पूल के तहत गेहूं की खरीद चल रही है. पिछले महीने केंद्र सरकार ने सभी प्रमुख राज्‍यों में गेहूं खरीद को लेकर आंकड़े जारी किए थे. इसमें 30 अप्रैल 2025 तक रबी मार्केटिंग सीजन यानी आरएमएस 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद के लिए तय 312 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य की तुलना में केंद्रीय पूल में 256.31 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. इस साल 30 अप्रैल तक खरीदे गए गेहूं की मात्रा पिछले साल की इसी तारीख को हुई कुल खरीद 205.41 लाख मीट्रिक टन से 24.78 प्र‍तिशत ज्‍यादा है. प्रमुख गेहूं उत्‍पादक राज्‍यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्‍यादा खरीद हुई है. recent visitors 35

‘ब्लैकआउट’ एक ऐसा कदम, जो दुश्मन की आंखों पर परदा डालता है …….

भोपाल / रायपुर पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव और जंग के हालात के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर के 244 जिलों में आज 7 मई को राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल करने के निर्देश राज्यों को दिए हैं। इसके तहत सिविल डिफेंस के लोग आमजन को यह जानकारी और ट्रेनिंग देंगे कि युद्ध की स्थिति में किस तरह से बचाव करना है और क्या-क्या तैयारी करनी है। 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के बाद पहली बार इस तरह की मॉक ड्रिल होने जा रही है। इस बीच, सूत्रों के मुताबिक, भाजपा संसदीय दल कार्यालय ने सभी भाजपा सांसदों से इस ड्रिल में आम नागरिकों की तरह भाग लेने और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करने को कहा है। प्रदेश अध्यक्षों से भी अनुरोध किया गया है कि वे वरिष्ठ पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के साथ मिलकर इस ड्रिल को सुचारू रूप से क्रियान्वित करें। केंद्रीय गृह सचिव आज करेंगे समीक्षा दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन (मंगलवार को) नागरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की तैयारियों की समीक्षा करेंगे जिसमें हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाने संबंधित ‘मॉक ड्रिल’ आयोजित करना, लोगों को ‘शत्रु के हमले’ की स्थिति में खुद को बचाने के लिए प्रशिक्षित करना और बंकरों की सफाई करना शामिल है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उभरे ‘नए और जटिल खतरों’ को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से बुधवार को मॉक ड्रिल करने को कहा है। 244 जिलों में मॉक ड्रिल की तैयारी एक सूत्र ने कहा, ‘‘गृह सचिव 244 जिलों में की जा रही नागरिक सुरक्षा की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। सभी राज्यों के मुख्य सचिव और नागरिक सुरक्षा प्रमुख वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में हिस्सा लेंगे।’’ गृह मंत्रालय के अनुसार मॉक ड्रिल के दौरान किए जाने वाले उपायों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन का संचालन, लोगों को ‘‘शत्रु के हमले’’ की स्थिति में खुद को बचाने के लिए सुरक्षा पहलुओं पर प्रशिक्षण देना और बंकरों की सफाई करना शामिल है। दुर्घटना की स्थिति में ‘ब्लैकआउट’ के उपाय अन्य कदमों में दुर्घटना की स्थिति में ‘ब्लैकआउट’ के उपाय, महत्वपूर्ण संयंत्रों और प्रतिष्ठानों की रक्षा तथा निकासी योजनाओं को अद्यतन करना एवं उनका पूर्वाभ्यास करना शामिल है। ‘मॉक ड्रिल’ में वायुसेना के साथ हॉटलाइन और रेडियो-संचार लिंक का संचालन, नियंत्रण कक्षों और छाया नियंत्रण कक्षों की कार्यक्षमता का परीक्षण भी शामिल है। अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, ‘‘मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में नये और जटिल खतरे/चुनौतियां उभरी हैं, इसलिए यह समझदारी होगी कि राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में हर समय इष्टतम नागरिक सुरक्षा तैयारियां रखी जाएं।’’ इसमें कहा गया है कि सरकार ने सात मई को देश के 244 वर्गीकृत नागरिक सुरक्षा जिलों में नागरिक सुरक्षा अभ्यास और रिहर्सल आयोजित करने का निर्णय लिया है। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा अपने विकल्पों पर विचार करने के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई उच्चस्तरीय बैठकें कर रहे हैं। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। मोदी ने हमले को अंजाम देने वालों और इसकी साजिश रचने वालों का ‘‘पृथ्वी के आखिरी छोर तक पीछा करने’’ और उन्हें ‘‘उनकी कल्पना से भी बड़ी’’ सजा देने का संकल्प जताया है। मप्र में मॉक ड्रिल की व्यापक तैयारी पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच टेंशन बढ़ गई है। आतंकवाद को खत्म करने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने साफ संकेत दे दिए हैं और पाकिस्तान के साथ कई समझौतों को रद्द कर दिया है। हालात काफी नाजुक बने हुए हैं और युद्ध की संभावना बढ़ती जा रही है इसी बीच कल यानी 7 मई को देश के 244 सिविल डिफेंस जिलों में मॉक ड्रिल की जाएगी। इन 244 जिलों में मध्यप्रदेश के भी 5 जिले शामिल हैं। हवाई हमले के अलर्ट में बजेंगे सायरन.. भारत सरकार व केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 7 मई को देश के 244 सिविल डिफेंस जिलों में मॉक ड्रिल किए जाने के आदेश जारी किए हैं। इनमें जो भी शहर शामिल हैं उनमें हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन बजेगें और पूरे शहर में एक साथ ब्लैकआउट कर दिया जाएगा। मॉकड्रिल का मकसद लोगों को युद्ध जैसे हालात के लिए तैयार करना है। साथ ही जंग जैसे हालात में वे खुद को कैसे सुरक्षित रखें ये बताना भी है। एमपी के इन 5 जिलों में बजेंगे सायरन जो आदेश जारी हुआ है उसके मुताबिक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के साथ ही कटनी जिले में 7 मई को मॉकड्रिल का आयोजन किया जाएगा। बता दें कि देश में पिछली बार ऐसी मॉक ड्रिल 1971 में हुई थी। तब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था और तभी ऐसी मॉक ड्रिल युद्ध के बीच हुई थी। मप्र और छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों मॉक ड्रिल की व्यापक तैयारी  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी राज्यों को सिविल डिफेंस के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्देश के तहत MP, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। विशेष रूप से महाराष्ट्र में 16 स्थानों पर मॉक ड्रिल की योजना बनाई गई है, जिसमें मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, रायगढ़, उरण, तारापुर और कोंकण तट शामिल हैं। वहीं, नागपुर, जोधपुर और अन्य शहरों में भी आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने पहलगाम घटना के बाद उत्पन्न संभावित खतरों को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित किया है। प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को चौकस रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य के पालक मंत्रियों और अन्य मंत्रियों को प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में रहने को कहा गया है। मॉक ड्रिल के लिए 16 प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है। खासकर कोंकण तट पर मॉक ड्रिल को विशेष रूप से आयोजित करने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है। महाराष्ट्र सरकार ने आंतरिक गतिविधियों में … Read more

विष्णुदेव साय का दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स, मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था

रायपुर  दस साल की उम्र में पिता को खोने के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय के पास खेल-कूद और मौज-मस्ती के लिए समय ही नहीं था। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने तुरंत परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। सीएम साय ने बताया कि शायद इसीलिए वह कभी व्यक्तिगत रूचियों पर ध्यान नहीं दे पाए और अब उन्हें केवल सामाजिक कार्यों में ही सुकून मिलता है। 26 साल की उम्र में बने सरपंच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने परिवार और अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि युवावस्था में ही वह गांव के पंच चुन लिए गए थे और पांच साल बाद वह 1990 में 26 साल की उम्र में सरपंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं सरपंच बनूंगा।’’ हालांकि, इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ता रहा। साय तीन बार विधायक और चार बार सांसद चुने गए। साल 2023 में वह सत्ता के शिखर पर पहुंचे, जब उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी आदिवासी मुख्यमंत्री कहा जाता है लेकिन उनके निधन तक उनका आदिवासी दर्जा विवाद में रहा।’’ 10 साल की उम्र में हो गया था निधन सीएम साय ने बताया कि ‘‘बचपन में मुझे खेल-कूद का मौका नहीं मिला क्योंकि 10 साल की उम्र में मेरे पिता का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई क्योंकि मैं चार भाइयों में सबसे बड़ा था। मेरा सबसे छोटा भाई तब दो महीने का था। मेरे पिता के तीन भाई थे और वे सभी अलग-अलग गांवों में रहते थे। मुझे अपने छोटे भाइयों और मां की देखभाल के साथ-साथ हमारे गांव बगिया में खेती-किसानी का काम भी करना था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘तब मैंने खेती-किसानी करके अपने भाइयों को शिक्षित करने का फैसला किया ताकि वे जीवन में सफल हो सकें। मैंने कभी सरपंच बनने के बारे में नहीं सोचा था।’’ साय ने कहा कि उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और स्थानीय ग्रामीणों के कहने पर अपने गांव के पंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘गांव के कुछ लोगों ने मुझे पंच बनने के लिए कहा और मैंने यह जिम्मेदारी संभाल ली। पांच साल तक मेरा काम देखने के बाद उन्होंने 1990 में मुझे निर्विरोध सरपंच चुन लिया।’’ बीजेपी ने दिया टिकट उन्होंने कहा कि सरपंच बनने के छह महीने के भीतर ही राज्य में विधानसभा चुनाव हुआ और भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतारा गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब 25-26 साल का था और सीख रहा था। मैंने पार्टी से कहा कि ‘मैं विधायक बनने के लायक नहीं हूं।’ मैंने 1990 में तत्कालीन मध्य प्रदेश के जशपुर जिले की तपकारा सीट से चुनाव लड़ा और जीता। यह विधायक के रूप में मेरी यात्रा की शुरुआत थी।’’ साय 1993 में लगातार दूसरी बार तपकारा से चुने गए। 1998 में, उन्होंने पड़ोस के पत्थलगांव सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वह लगातार चार बार – 1999, 2004, 2009 और 2014 में रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2014 में केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद, उन्हें केंद्रीय इस्पात और खान राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। मौजूदा विधानसभा में वह कुनकुरी सीट से विधायक हैं। कैसा रहा राजनीति सफर उन्होंने 2006 से 2010 तक और फिर जनवरी 2014 से उसी वर्ष अगस्त तक छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। राज्य में 2018 में भाजपा की सत्ता जाने के बाद, उन्हें 2020 में फिर से प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राजनीति में ‘जनसेवा’ के लिए प्रवेश किया। लोगों की बात सुनना और उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करना अच्छा लगता है। जब मैं बीमार लोगों की मदद करता हूं तब मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता बनूंगा। मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी गईं, मैंने उन्हें पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।’’ दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स सांसद रहते हुए दिल्ली में अपने आवास को ‘‘मिनी एम्स’’ कहे जाने को याद करते हुए, साय ने कहा, ‘‘दिवंगत भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव दिल्ली में मेरे फ्लैट पर आते थे और वहां एम्स दिल्ली में भर्ती लोगों के रिश्तेदारों को ठहरा हुआ देखकर कहते थे कि आपने अपना घर ‘मिनी एम्स’ बना लिया है।’’ मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं केंद्र में राज्य मंत्री था, तब मैं रोजाना 70-80 लोगों के भोजन की व्यवस्था करता था, जिनके परिजन अस्पताल में भर्ती होते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी मैंने यहां कुनकुरी सदन की स्थापना की है, जहां राज्य भर से इलाज के लिए रायपुर आने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।’’ परिवार के कई सदस्य राजनीति में साय राजनीतिक परिवार से आते हैं। उन्होंने बताया, ‘‘मेरा परिवार शुरू से ही राजनीति में रहा है। आजादी के बाद, मेरे दादा दिवंगत बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक थे। मेरे चाचा (दादा के छोटे भाई के बेटे) दिवंगत नरहरि प्रसाद साय ने तीन बार विधायक के रूप में कार्य किया और सांसद (1977-79) भी चुने गए। उन्होंने जनता पार्टी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में मेरे चचेरे भाई रोहित साय भी विधायक चुने गए।’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता के बड़े भाई दिवंगत केदारनाथ साय भी जनसंघ सदस्य के रूप में तपकारा से विधायक चुने गए थे। recent visitors 39

वुलर झील के किनारे शिकारा मालिक और पर्यटन पर निर्भर परिवार अब आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले का सबसे बुरा असर कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर हुआ है. शिकारा मालिकों और अन्य पर्यटन व्यवसायियों की आजीविका संकट में आ गई है. कश्मीर के सोपोर में स्थित एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटन के लिहाज से सूनी पड़ी है. 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने कश्मीर घाटी के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका दिया है. वुलर झील के किनारे शिकारा मालिक और पर्यटन पर निर्भर परिवार अब आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि पर्यटकों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है. पर्यटकों से अपील घाटी आएं आजीविका के लिए पर्यटकों पर निर्भर रहने वाले शिकारा मालिक हसन ने कहा, "हम पूरे दिन इंतजार करते हैं, लेकिन कोई नहीं आता. कश्मीर अपने आतिथ्य के लिए जाना जाता है. हम शांति और पर्यटन की बहाली की मांग करते हैं. पहलगाम हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं, यह मानवता पर हमला है." वहीं स्थानीय निवासी मंजूर अहमद, जो पहले प्रतिदिन 1500 रुपये तक कमा लेते थे, अब मुश्किल से 100 रुपये कमा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम पर्यटकों से अपील करते हैं कि वे घाटी में फिर से आएं और वुलर झील सहित कश्मीर की छिपी प्राकृतिक सुंदरता को देखें. पहलगाम हमले के बाद बर्बाद हुए लोकल? पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर में पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा है. अप्रैल-मई में वुलर झील और अन्य पर्यटन स्थलों पर रोजाना हजारों पर्यटक आते थे, लेकिन हमले के बाद पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. जिससे शिकारा मालिकों, टैक्सी चालकों और होटल मालिकों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं होटल, रेस्तरां और स्थानीय हस्तशिल्प व्यवसायों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. सुरक्षा व्यवस्‍था कड़क, मॉक ड्रिल के निर्देश इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने श्रीनगर की डल झील में मॉक ड्रिल का आयोजन किया, ताकि आपातकालीन तैयारियों को परखा जा सके.केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का निर्देश दिया है. दूसरी ओर, नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना द्वारा 12 दिनों तक संघर्ष विराम उल्लंघन के बाद, पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ा दी है. पुलिस, सीआरपीएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने नाकेबंदी, वाहन जांच और गश्त तेज कर दी है, ताकि सीमा पार से संभावित आतंकी घुसपैठ को रोका जा सके. recent visitors 51

कोरोना महामारी में पैरोल पर छूटे 70 कैदी वापस नहीं लौटे, हाईकोर्ट ने दिए यह निर्देश

रायपुर  रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। भी तक 70 कैदी वापस नहीं लौटे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती दिखाने के बाद जेल डीजी ने शपथपत्र में यह जानकारी दी है।हालांकि, जेल प्रबंधन ने ऐसे फरार कैदियों के खिलाफ थानों में केस भी दर्ज कराया है। जिनकी तलाश की जा रही है। 10 को गिरफ्तार किया गया, 3 की मौत दरअसल, हाईकोर्ट ने पैरोल पर छोड़े गए कैदियों को लेकर हाईकोर्ट ने जेल डीजी से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था। जिसके बाद जेल डीजी की तरफ से हाईकोर्ट को जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक प्रदेश की पांच सेंट्रल जेलों के 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, 3 की मृत्यु हो गई है। अभी भी प्रदेशभर की जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल प्रशासन का दावा- फरार कैदियों की तलाश जारी जेल प्रशासन का दावा है कि पुलिस के साथ मिलकर उन्होंने फरार कैदियों की तलाश की। लेकिन, अब तक उनका कोई पता नहीं चला है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने 7 बंदियों के पैरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। जेल प्रबंधन ने दर्ज कराया है केस बिलासपुर जेल में इस तरह 22 बंदी नहीं लौटे हैं। उनके परिजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने उनके खिलाफ संबंधित थानों में केस दर्ज कराया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे आचरण वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उपजेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। कई बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है। recent visitors 35