आज जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन जिले में सैन्य वाहन गहरी खाई में गिरा, 3 सैन्यकर्मियों की मौत

जम्मू जम्मू एवं कश्मीर के रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार को एक सड़क दुर्घटना में तीन जवानों की मौत हो गई। सैन्य वाहन गहरी खाई में गिर गया। एक अधिकारी ने बताया, "आज जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन जिले में बैटरी चश्मा के पास चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया और वाहन खाई में गिर गया। तीन सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई। बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया।" पुलिस ने घटना की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पिछले पखवाड़े से जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग रामसू-रामबन खंड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के कारण बंद रहा है। कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण सड़क बह गई है। राजमार्ग की मरम्मत कर यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी 40 किलोमीटर से अधिक लंबा रामबन-रामशू खंड लगभग 300 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण राजमार्ग की कमजोर कड़ी बना हुआ है। भूमि से घिरी घाटी के लिए सेना और सभी नागरिक आपूर्ति इसी राजमार्ग से होकर गुजरती है। इस रणनीतिक राजमार्ग के अस्थायी रूप से बंद होने से घाटी में पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्य पदार्थों आदि सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी हो जाती है। इस दुखद घटना ने दिसंबर 2024 के पुंछ हादसे की याद दिला दी है। जम्मू कश्मीर के पुंछ में दिसंबर 2024 में मेंढर सब डिविजन के बलनोई क्षेत्र में भारतीय सेना का वाहन गहरी खाई में गिर गया था। तब 5 जवानों की मौत हो गई थी और 5 गंभीर रूप से घायल हुए थे। सेना का वाहन तब 300 फीट की गहरी खाई में गिर गया था। recent visitors 43

कांग्रेस पार्टी से बहुत सी गलतियां तब हुईं जब मैं राजनीति में नहीं था, लेकिन मैं हर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं: राहुल गांधी

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों पर अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस की गलतियों को स्वीकारते हुए कहा कि वे पार्टी के इतिहास में हुई हर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं, भले ही यह घटना उनके राजनीति में आने से पहले की हो। यह बयान उन्होंने वॉटसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स में आयोजित एक सत्र के दौरान दिया, जब एक सिख युवक ने उनसे तीखे सवाल किए। सिख युवक ने राहुल गांधी से पूछा, "आपने कहा था कि बीजेपी राज में सिखों को कड़ा पहनने और पगड़ी बांधने से रोका जा सकता है, लेकिन कांग्रेस ने खुद भी सिखों को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं दी। क्या आप 1984 के दंगों सज्जन कुमार जैसे नेताओं को बचाने की पार्टी की भूमिका की जिम्मेदारी लेंगे?" राहुल गांधी का जवाब- गलतियां हुई हैं, जिम्मेदारी मेरी है राहुल गांधी ने सिख युवक के सवाल के जवाब में कहा, "बहुत सी गलतियां तब हुईं जब मैं राजनीति में नहीं था, लेकिन मैं कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई हर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं। मैंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1984 में जो हुआ वह गलत था। मैं कई बार स्वर्ण मंदिर जा चुका हूं और सिख समुदाय के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं।" उन्होंने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर जो डर है, वह वास्तविक है। बीजेपी का तीखा हमला राहुल गांधी के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “राहुल गांधी अब न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में मजाक का पात्र बन चुके हैं।” दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “यह सिखों के दर्द और गुस्से की अभिव्यक्ति थी। राहुल गांधी का बयान कोई माफी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक ड्रामा था।" बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, “अगर राहुल गांधी वाकई जिम्मेदारी लेना चाहते हैं, तो उन्हें तत्काल सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ को पार्टी से बाहर करना चाहिए।” आपको बता दें कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद पूरे देश, विशेषकर दिल्ली में सिख समुदाय के खिलाफ भीषण हिंसा हुई थी। हजारों सिखों की हत्या कर दी गई थी। 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में सिख समुदाय से माफी मांगी थी। इसके बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी खेद जताया था। recent visitors 55

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देर रात सुरक्षा बल और माओवादियों के बीच मुठभेड़ , आठ लाख का इनामी माओवादी ढेर

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देर रात सुरक्षा बल और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें एक माओवादी मारा गया। मृत माओवादी की पहचान साकेत उर्फ योगेश उर्फ आयतु के रूप में हुई है। ये डीबीसी (डिवीजन बॉडी काम्बैट) का सदस्य और शीर्ष माओवादी नेताओं का बॉडीगार्ड रह चुका था। उस पर आठ लाख रुपये का इनाम था। गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सीमा पर जिला बल सीआई-30 और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन के लिए भेजी गई थी। शाम करीब छह बजे मोतीपानी जंगल में घात लगाए माओवादियों ने सुरक्षाबल पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक माओवादी को मार गिराया। ऐसे तय होता है इनाम 50 लाख से एक करोड़ के इनामी : पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी 25 लाख के इनामी : स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य (एसजेडसीएम) 10 लाख के इनामी : कंपनी कमांडर 8 लाख के इनामी : डिविजनल कमेटी, बटालियन सदस्य, कंपनी सदस्य, डिप्टी व प्लाटून कमांडर 5 लाख के इनामी : प्लाटून सदस्य, एरिया कमेटी सदस्य, लोकल ऑपरेशनल स्क्वायड, कमांडर, लोकल गुरिल्ला स्क्वायड कमांडर 3 लाख के इनामी : सेक्शन कमांडर 1 लाख के इनामी : एलओएस सदस्य, एलजीएस सदस्य, जनमिलीशिया सदस्य पर यह इनाम घोषित किया जाता है। बस्तर के माओवाद मुक्त गांवों में बनेंगे बलिदानियों के स्मारक बस्तर में माओवादी आतंक के काले अध्याय को मिटाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने “हमर बलिदानी योजना” शुरू की है। इसके अंतर्गत उन गांवों में स्मारक बनाए जाएंगे जो माओवादी आतंक का केंद्र रहे अब शांति की राह पर लौट आए हैं। स्मारकों से स्थानीय बलिदानियों की वीरता और योगदान को सहेजा जाएगा। ऐसे 500 स्मारक बनाए जाएंगे। संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक स्मारक पर तीन लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पंचायत विभाग को इस योजना की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि माओवादी हिंसा के प्रतीक स्मारकों को सुरक्षा बल लगातार ढहा रहे हैं। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक बस्तर को माओवाद मुक्त कर लिया जाएगा। राजनीतिक एकजुटता का संदेश उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू से हुई बातचीत को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया। इस बातचीत में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष साहू ने सरकार की नक्सल विरोधी कार्रवाई की सराहना की ही और कहा कि जब कोई अच्छा काम हो रहा है, तो विपक्ष में रहकर भी उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। साहू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि झीरम घाटी जैसी घटनाएं किसी एक पार्टी की नहीं, पूरे राज्य की पीड़ा हैं और इस पर सभी दलों को एकजुट होना चाहिए। बता दें कि झीरम घाटी में हुई नक्सली वारदात में कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के नेताओं समेत 31 लोग मारे गए थे। राज्य के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर में माओवाद पीड़ित परिवारों के लिए विशेष सर्वे कराया गया है, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर दिए जा रहे हैं। साथ ही बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम ने युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।   recent visitors 35

मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय, खराब परफॉर्मेंस वाले पहले बदले जाएंगे

भोपाल 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति (Transfer Policy) को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों (Officers) और (&) कर्मचारियों (Employees) का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें – 0- विभाग अपने लिए अलग से तबादला नीति बना सकेंगे, लेकिन जीएडी के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। 0- जीएडी की नीति से हटकर किए जाने वाले तबादलों में मुख्यमंत्री के समन्वय में आदेश प्राप्त करने होंगे। 0- जिला संवर्ग के कर्मचारी का और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर तबादला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जाएगा। पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं 0- जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। 0- ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। 0- जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे 0- ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। 0- जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। 0- कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। 0- चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। 0- संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। 0- तबादला नीति-2025 को मंगलवार को डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने बैठक में मंजूरी दी थी। recent visitors 38

भोपाल के इश्तिहाक ने खुद को अमन सिंह बताकर महिला सब इंस्पेक्टर को प्रेमजाल में फंसाया और फिर शादी कर ली

रायसेन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े रायसेन जिले में एक महिला पुलिस एसआई लव जिहाद का शिकार हो गई। भोपाल के इश्तिहाक ने खुद को अमन सिंह बताकर उसे प्रेमजाल में फंसाया और फिर शादी कर ली। महिला को इस फरेब का पता लगा तब तक देर हो चुकी थी। उसने फरवरी 2025 में थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उसके ही साथी तीन महीनों तक इस मामले को दबाए रहे। भोपाल में हिंदू लड़कियों के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह की वारदातें सामने आने के बाद जब जनविरोध बढ़ा तो पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। महिला एसआई का आरोप है कि वर्ष 2019 में भोपाल में आरक्षक पद पर पदस्थ रहते हुए उसकी मुलाकात एक युवक से हुई थी।   मकान की रजिस्ट्री पर लिखा मिला इश्तिहाक अहमद युवक ने खुद को 'अमन' नामक हिंदू युवक के रूप में प्रस्तुत किया और दोस्ती बढ़ाकर विवाह का प्रस्ताव रखा। कुछ ही समय में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने विवाह कर लिया। एक वर्ष बाद 2020 में महिला को तब सच्चाई का पता चला जब एक मकान की रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों में युवक का असली नाम 'इश्तिहाक अहमद' दर्ज मिला। मानसिक रूप से प्रताड़‍ित करता रहा इस पर दोनों के बीच विवाद हुआ, लेकिन महिला ने वैवाहिक जीवन बचाने का प्रयास किया। बाद में इश्तिहाक का व्यवहार हिंसक होता गया। वह महिला एसआई के साथ आए दिन मारपीट करता और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। 19 फरवरी 2025 को महिला ने प्रताड़ना बढ़ने पर मंडीदीप थाने में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक तौर पर यह शिकायत केवल मारपीट और प्रताड़ना के रूप में दर्ज की गई थी, लेकिन हाल ही में इस मामले में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं।   भोपाल में कैफे चलाता है इश्तिहाक एसपी पंकज कुमार पांडे ने बताया कि आरोपी इश्तिहाक अहमद भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र में एक कैफे का संचालन करता है। पुलिस की टीम ने उसे शुक्रवार को भोपाल से गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके अलावा पुलिस सभी संभावित पहलुओं पर भी जांच कर रही है। बच्चे के कारण साथ रह रही थी महिला औबेदुल्लागंज एसडीओपी शीला सुराणा ने बताया कि आरोपित, महिला एसआई के साथ रह रहा था और घरेलू हिंसा करता था। नाम उजागर होने के बाद भी महिला अपने बेटे के कारण उसके साथ रह रही थी, लेकिन जब अत्याचार असहनीय हो गया तब उसने शिकायत दर्ज कराई। recent visitors 48

जम्मू-कश्मीर के रामबन में भारतीय सेना का वाहन गिरा खाई में, 2 सैनिकों की मौत

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में भारतीय सेना का एक वाहन खाई में गिर गया, जिसमें दो जवान शहीद हो गए। यह घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH44) पर बैटरी छस्मा के पास हुई। फिलहाल राहत और बचाव का कार्य जारी है। पुलिस, एसडीआरएफ, स्थानीय लोग और सेना की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। तस्वीरों में 700 फीट गहरी खाई में वाहन के क्षतिग्रस्त अवशेष दिखाई दे रहे हैं। घटनास्थल पर सैनिकों के शव, उनके सामान और कुछ कागजात बिखरे पड़े हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ट्रक जम्मू से श्रीनगर जा रहे काफिले का हिस्सा था। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर बैटरी चश्मा के पास 11.30 बजे के करीब यह दुर्घटना हुई। आपको बता दें कि सेना का काफिला उधमपुर से श्रीनगर जा रहा था। रामबन के पास काफिले की जो गाड़ी खाई में जा गिरी, उसमें दो कर्मी सवार थे। एक चालक और एक सैनिक गाड़ी में सवार थे। एक शव बरामद किया गया है और उसकी पहचान सुरजीत कुमार के रूप में हुई है। वहीं, दूसरे का पता लगाने के लिए खोज अभियान जारी है। recent visitors 43

मुख्यमंत्री साय बोले – औषधीय पौधों के संवर्धन से असीम संभावनाएं

  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष   विकास मरकाम के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  मरकाम को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी।         मुख्यमंत्री श्री साय ने पदभार ग्रहण समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से बस्तर एवं सरगुजा संभाग में औषधि पादप को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि औषधि पौधों में बहुत से गुण होते हैं, इनके साथ ही बेहतर आमदनी के लिए औषधि पादपों के रोपण को बढ़ावा देने की जरूरत है। बस्तर एवं सरगुजा में इसकी अपार संभावनाएं है। बोर्ड को इस दिशा में और अधिक कार्य करने की जरूरत है।       मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे बैगा-गुनिया और वैद्य  आदिम समय से  वन औषधि की पहचान कर लोगों का इलाज करते हैं। उन्होंने कहा डॉ रमन सिंह जी ने बैगा, वैद्य के बेहतरी एवं मानव स्वास्थ्य सेवा के लिए छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड गठन किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के ओरछा के परंपरागत वैद्य श्री हेमंचद मांझी को औषधि पादप के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ठ कार्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया है।        आदिम जाति विकास मंत्री  राम विचार नेताम ने कहा कि  जिन उद्देश्यों को लेकर छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड का गठन किया गया है, निश्चित ही  मरकाम के नेतृत्व में उन उद्देश्यों को पूरा कर पाएंगे।  वैद्यों के ज्ञान एवं वनौषधियों के अनुभव का संग्रहण कर एक डाटाबेस तैयार  करने बोर्ड  को कार्य करने की जरूरत है ताकि इस डाटा का उपयोग समाज एवं मानव स्वास्थ्य के बेहतरी के लिए किया जा सके।         वन एव जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि   छत्तीसगढ़ देश का आक्सीजन जोन है। वनौषधियों  के संरक्षण एवं संवर्धन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की है। हमारी सरकार वन में रहने वाली ग्रामीणों के लिए बेहतर कार्य कर रहे है। छत्तीसगढ़ में 5500 रूपये प्रति मानक बोरा के दर समर्थन मूल्य में वनोपज की खरीदी होती है जिसका फायदा तेंदूपता संग्राहकों को मिलता है। इसके साथ ही 67 प्रकार के वनोपज की भी खरीदी होती है। पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह को पूर्व राज्यसभा सांसद  समीर उरांव  और पादप बोर्ड के नवनिययुक्त अध्यक्ष   विकास मरकाम ने भी सम्बोधित किया।       इस अवसर पर रायपुर लोकसभा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद   देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक सर्वश्री राजेश मूणत, मोती लाल साहू, गजेंद्र यादव, नीलकंठ टेकाम, प्रणव मरपच्ची, सहित विभिन्न मंडल एवं आयोग के अध्यक्षों, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अधिकारी कर्मचारी गण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक सहित वैद्य एवं आर्युवेदाचार्य  उपस्थित थे। recent visitors 36