दिल्ली ने लखनऊ को दी शिकस्त, 8 विकेट से दर्ज की जीत

लखनऊ डियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 के मैच नंबर-40 में दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी. यह मुकाबला लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में हुआ. इस मैच में दिल्ली के कप्तान अक्षर पटेल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. ऋषभ पंत की लखनऊ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन बनाए थे. इसके जवाब में उतरी दिल्ली ने 18वें ओवर में ही इसे चेज कर लिया. केएल राहुल और अभिषेक पोरेल ने शानदार फिफ्टी जड़ी. ऐसी रही दिल्ली की बल्लेबाजी 160 रनों के जवाब में उतरी दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही. चौथे ओवर में ही करुण नायर अपना विकेट गंवा बैठे. मार्करम ने उनका विकेट झटका. इसके बाद केएल राहुल और अभिषेक पोरेल ने शानदार बल्लेबाजी की. दोनों अच्छी लय में दिखे. पोरेल ने 32 गेंद  में फिफ्टी जड़ी. लेकिन 12वें ओवर में उनका विकेट गिर गया. लेकिन एक छोर पर केएल राहुल टिके रहे. उन्होंने 40 गेंद में अर्धशतक जमाया. नाबाद भी रहे. वहीं, पोरेल का विकेट गिरने के बाद बल्लेबाजी के लिए पहुंचे अक्षर ने भी तूफानी बल्लेबाजी की. इसके दम पर दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ को 8 विकेट से हराया. ऐसी रही लखनऊ की पारी टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी मेजबान लखनऊ की शुरुआत बेहद शानदार रही. एडेन मार्करम और मिचेल मार्श ने तूफानी शुरुआत की. दोनों ने हर गेंदबाज को आंड़े हाथों लिया. एडेन मार्करम ने महज 30 गेंदों में ही फिफ्टी जड़ दी.  दोनों बल्लेबाजों ने 10 ओवर में 90 रन जोड़े, लेकिन मारक्रम अपना विकेट गंवा बैठे. मार्करम ने अपनी पारी में 2 चौके और 3 छक्के जड़े. लेकिन इसके बाद आईपीएल में अबतक धमाल मचाने वाले निकोलस पूरन मैदान में पहुंचे. उन्होंने कुलदीप को दो चौका भी जड़ा. लेकिन 12वें ओवर में स्टार्क ने उन्हें अपना निशाना बनाया. पूरन के बल्ले से केवल 9 रन ही निकले. इसके बाद अब्दुल समद भी 2 रन बनाकर आउट हो गए. वहीं, इसी ओवर में मुकेश कुमार ने मिचेल मार्श को भी चलता किया मार्श के बल्ले से 45 रन निकले. एक समय लखनऊ ने 10 ओवर में एक विकेट खोकर 90 रन बना लिए थे. लेकिन अगले 10 ओवर में लखनऊ की टीम केवल 70 रन ही जोड़ पाई. वहीं, 27 करोड़ी ऋषभ पंत बल्लेबाजी के लिए तब आए जब सिर्फ दो गेंद का खेल बचा था उसमें भी वो खाता नहीं खोल सके और आउट हो गए. जबकि लखनऊ को तेजी से रन बनाने की दरकार थी. हालांकि, आखिरी ओवर में आयुष बदोनी ने तीन लगातार चौके लगाकर आतिशी बल्लेबाजी की जिसके दम पर लखनऊ ने दिल्ली को 160 रनों का लक्ष्य दिया है. recent visitors 37

सीएम साय ने एआई और नवीन तकनीकों के उपयोग से खराब सड़कों के त्वरित चिन्हांकन व मरम्मत के दिए निर्देश

नए विधानसभा भवन में सिविल एवं विद्युत यांत्रिकी का 95% काम पूरा   रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को तेजी से कार्य करते हुए अच्छी गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में सड़कों, पुल-पुलियों एवं भवनों के काम पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर तेज और सुरक्षित यातायात पर जोर दिया। उन्होंने एआई और नवीन तकनीकों के उपयोग से खराब सड़कों के त्वरित चिन्हांकन व मरम्मत के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरूण साव और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में सड़कों और पुल-पुलियों के काम आगामी पांच साल की कार्ययोजना को ध्यान में रखते हुए त्वरित गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों और वृहद पुलों के कार्यों को भू-अर्जन के बाद डेढ़-दो वर्षों में अनिवार्यतः पूर्ण करने को कहा। उन्होंने शहरों के नजदीक बनने वाले बाइपास और रिंगरोड में पर्याप्त संख्या में ओव्हरब्रिजों और अण्डरब्रिजों का निर्माण करते हुए इन्हें एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर विकसित करने के निर्देश दिए। इससे यातायात तेज और सुरक्षित होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर को विशाखापट्नम से जोड़ने बन रहे एक्सप्रेस-वे से रायपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने अच्छी गुणवत्ता के कनेक्टिंग-रोड्स बनाने के निर्देश दिए, ताकि इस एक्सप्रेस-वे का अधिक से अधिक लाभ राज्य के लोगों को मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी बड़ी एवं महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए एक-एक डेडीकेटेड (Dedicated) वरिष्ठ अधिकारी नामांकित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने एनएचएआई (NHAI) के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करने को कहा। उन्होंने आगामी तीन वर्षों में 30 हजार करोड़ रूपए के सड़क विकास के कार्यों को पूर्ण करने के लक्ष्य के साथ काम करने को कहा। उन्होंने नए बजट में प्रावधानित कार्यों की प्राथमिकता तय करते हुए शीघ्र ही उनके इस्टीमेट (Estimate), डीपीआर और टेण्डर की कार्यवाही पूर्ण करते हुए कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। श्री साय ने पुल-पुलियों के रखरखाव एवं मरम्मत की प्रभावी व्यवस्था बनाने को भी कहा। उन्होंने इसके लिए आवश्यक प्रोटोकाल तैयार कर कड़ाई से अमल करने को कहा। उन्होंने एआई और नवीन तकनीकों के उपयोग से खराब सड़कों की तुरंत पहचान के लिए सिस्टम तैयार करने को कहा। इससे सड़कों के संधारण एवं त्वरित मरम्मत में मदद मिलेगी। उन्होंने खदान क्षेत्रों में सड़कों के मजबूतीकरण पर जोर दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने वहां निर्माणाधीन सड़कों और पुल-पुलियों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। नई सड़कों और पुलों के निर्माण से सुदूर वनांचलों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को वर्तमान समय की जरूरतों और लाइफस्टाइल के अनुरूप सर्किट हाउसों और विश्राम गृहों को अपग्रेड करने के निर्देश दिए। उन्होंने इनके अच्छे रखरखाव के साथ ही साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को सुधारने को कहा।   लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में बताया कि नया रायपुर में निर्माणाधीन विधानसभा के नए भवन का 95 प्रतिशत सिविल एवं विद्युत यांत्रिकी कार्य पूर्ण कर लिया गया है। नए राजभवन का भी 60 प्रतिशत काम पूर्ण हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में सड़क सुरक्षा के कार्यों के लिए 106 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। सड़क दुघर्टनाओं को रोकने आगामी पांच-छह महीनों में ब्लैक-स्पॉट और जंक्शन सुधार के कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत और श्री मुकेश बंसल, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी और संयुक्त सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव सहित सभी मुख्य अभियंता भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।   मुख्यमंत्री ने इन कार्यों की समीक्षा की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्गों, एनएचएआई द्वारा किए जा रहे कार्यों, निर्माणाधीन सड़कों, पुल-पुलियों एवं भवनों की प्रगति, खेल विभाग के अधोसंरचना निर्माण कार्यों तथा सीआरआईएफ, आरआरपी (एलडब्ल्यूई) तथा आरसीपीएलडब्लूईए योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। recent visitors 24

सिंहस्थ में रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी, पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे

उज्जैन  एमपी में सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन की तैयारियां चल रही हैं। इंदौर शहर में अलग-अलग जगह होल्डिंग जोन बनाने का प्रस्ताव है, ताकि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर बाहरी लोगों को यहां रोका जाए। जमीन हासिल करने के बाद सभी विभाग यहां हर तरह की सुविधा का इंतजाम करेंगे। पुलिस ने बल व अन्य संसाधनों के साथ हाई-वे चौकियां, सहायता केंद्र व इंट्रीग्रेटेड कमांड सेंटर स्थापित करने की अनुमति मांगी है। एक-दो दिन तक रोकने की रहेगी व्यवस्था होल्डिंग जोन बनाने के लिए कुछ जगह चिन्हित की है। यहां 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोकने के लिए विश्राम स्थल, कुर्सियां, सुविधागृह, पंखे, कूलर, पेयजल आदि की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन में भीड़ अधिक होने पर बाहरी लोगों को यहां ठहराया जाएगा। एक-दो दिन तक रोकने की व्यवस्था रहेगी। एडिशनल कमिश्नर मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, लवकुश चौराहे पर लेफ्ट साइड की खाली जमीन, रिंग रोड पर रोबोट चौराहे के पास आइडीए की जमीन, मांगलिया व तेजाजी नगर में भी होल्डिंग एरिया के लिए जमीन मांगी है। उज्जैन में हुई बैठकों में कई प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं। इतने इंतजाम की दरकार -सुपर कॉरिडोर, लवकुश चौराहे के पास करीब 7 एकड़ जमीन इंट्रीगेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए रहेगी, ताकि वहां से नजर रखी जा सके। पुलिस, प्रशासन व निगम के अफसर यहां से सभी गतिविधियां संचालित करेंगे। -पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे। -महालक्ष्मी नगर, सुपर कॉरिडोर व धार रोड को थाने के रूप में मंजूर करने की मांग है। -7 हाई-वे चौकियां चाहिए। देवगुराड़िया, नेमावर रोड, खंडवा रोड पर तेजाजी नगर, एबी रोड पर राऊ के पास व अन्य जगह लगेगी। -रिंग रोड, बायपास पर ट्रैफिक सहायता केंद्र स्थापना की अनुमति मांगी है। -करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त बल दो महीने पहले चाहिए। साथ ही 20 जीप, 20 बसें व ट्रक फोर्स व सामान के परिवहन के लिए चाहिए। -रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी। शिप्रा के जल से उगाए 50 हजार बांस उज्जैन में सिंहस्थ 2028 में इस बार बहुत कुछ अलग देखने को मिलेगा. इस बार धर्मध्वजाओं को लहराने के लिए पूरे उज्जैन में 50 हजार से ज्यादा बांस उगाए गए हैं, शिप्रा नदी के किनारे 10.72 हेक्टेयर में पूरा जंगल उगाया गया है, यहां शिप्रा नदी के पानी से बांस उगाए हैं, जहां 30 फीट ऊंचे बांस लगाए गए हैं, यह बांस उज्जैन वन मंडल की तरफ से निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन बांसों से सिंहस्थ में आने वाले सभी अखाड़े और साधु संतों को धर्मध्वजा लहराने के लिए दिया जाएगा. इन बांसों की बारीकी से वन विभाग की तरफ से देखरेख भी की जा रही है. उज्जैन में 7 साल पहले लगे थे यह बांस बताया जा रहा है कि उज्जैन में शिप्रा नदीं के किनारे यह बांस 7 साल पहले ही लगा दिए गए थे. जिन्हें 30 फीट की ऊंचाई तक जाने देना है, हालांकि अभी इनकी ऊंचाई 20 से 25 फीट ही हुई है. अभी अगले दो साल और यह बांस लगे रहेंगे, जिससे इनकी लंबाई 30 फीट से ज्यादा हो जाएगी. वन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक सिंहस्थ महाकुंभ शुरू होने से तीन महीने पहले ही इन बांसों की कटाई शुरू हो जाएगी और उन्हें व्यवस्थित कर वन विभाग की देखरेख में रखा जाएगा, जबकि बाद में कलेक्टर और मेला अधिकारी को यह बांस सौंप दिए जाएंगे, जहां सिंहस्थ मेला में 13 अखाड़ों समेत जितने भी साधु-संत आएंगे उन्हें यह बांस धर्म ध्वजा लहराने और अपने-अपने शिविरों में झंडा लगाने के लिए दिए जाएंगे. वन विभाग ने भैरवगढ़ मार्ग पर शिप्रा नदी के पास फिलहाल इन बांसों की पूरी देखरेख की जा रही है. बांस का धार्मिक महत्व बता दें कि बांस का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है, हिंदू धर्म में बांस पर ही ध्वजा लगाई जाती है. ऐसे में सिंहस्थ के दौरान धर्मध्वजाएं इन्हीं बांसों पर लगेगी, क्योंकि यह आस्था का भाव माना जाता है. 10.72 हेक्टेयर में बांस का यह पूरा जंगल फैला है, बताया जा रहा है कि यह बांस बेंबोसा बाल्कोअ प्रजाति, जिसका बीज 2018 में रीवा की फ्लोरीकल्चर लेब से लाया गया था, जहां उज्जैन में कुल 5600 बांस के पौधों का प्लाटेंशन किया गया था, बताया जा रहा है कि यहां वन मंडल की तरफ से धार्मिक महत्व का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है और बांस के सभी झुंडों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. क्योंकि एक बांस के पेड़ से 20 से 25 बांस निकलते हैं, लेकिन यह सब बिना कटे फटे होने चाहिए, इसलिए यहां पूरी देखरेख की जा रही है. क्योंकि 50 हजार से ज्यादा बांसों में केवल शिप्रा नदीं का ही जल सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया गया है.  recent visitors 45

500 करोड़ की लागत से भोपाल में बनेगा नया कलेक्ट्रेट भवन, 90 घरों को नोटिस दिए

भोपाल  भोपाल शहर की प्रोफेसर कॉलोनी में नए कलेक्ट्रेट भवन के लिए 90 घरों को नोटिस दिए गए। बीते दिन इस पर कलेक्टर ने पूछताछ की, जिसमें बताया गया कि जिन्हें नोटिस दिए वे खाली है। सरकारी मकान है जो बेहद जर्जर है। यहां कोई नहीं रहता, लेकिन ये आवंटित है। इन पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।  गौरतलब है कि जारी किए नोटिस पर सांसद आलोक शर्मा ने आपत्ति ली थी। टेंडर जारी होने से पहले ही मकान खाली कराने के नोटिस जारी होने पर रहवासियों में तो नाराजगी है ही, सांसद आलोक शर्मा ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से इन मकानों में रहने वालों को नोटिस जारी करने पर तीखी नाराजगी जताई है। मामले में प्रोफेसर कॉलोनी रहवासी संघ भी सक्रिय हुआ। संघ के त्रिभुवन मिश्रा ने बताया वे मामले में मंगलवार को हाउसिंग बोर्ड पहुंचकर उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देंगे। सांसद शर्मा ने मामले में संभवत: बुधवार या गुरुवार को संबंधित प्रशासनिक अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों की बैठक तय करने की बात कही। यहां कुल 149 घर है। इसके अलावा अन्य भवन है। शिफ्ट होने है कई ऑफिस रीडें​सीफिकेशन प्रोजेक्ट लगभग 500 करोड़ रुपए का है। इससे यहां संभागायुक्त, आईजी देहात, कलेक्टर, चार एडीएम कार्यालय, नाजिर शाखा, खनिज शाखा, आबकारी विभाग, खाद्य विभाग, निर्वाचन के लिए अलग से कार्यालय, खाद्य विभाग व इनसे संबंधित कार्यालय, बाबुओं के बैठने की व्यवस्था, कांफ्रेंस हाल, रिकॉर्ड रूम, लोकसेवा गारंटी केंद्र, एसएलआर, अधिवक्ता कक्ष, महिला बाल विकास, आदिम जाति कल्याण विभाग, सामाजिक न्याय विभाग सहित अन्य दफ्तर शिफ्ट होने हैं। इसके साथ ही मौजूदा ओल्ड सेक्रेटरिएट की खाली होने वाली जमीन पर हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट लाने की योजना है। शिफ्टिंग के साथ वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भी आदेश जारी हो गया है। सीबीआई व्यापम स्कैम b1, सीबीआई व्यापम स्कैम b8, 10 समेत साइन मंदिर और गीतांजलि होस्टल भी खाली होगा। सर्किट हाउस समेत क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं मेरेलिया नियंत्रक ऑफिस चंबल बेतवा विषय मुख्य अभियंता कार्यालय भी खाली होगा। 500 करोड़ की लागत से भोपाल का नया कलेक्ट्रेट कार्यालय भवन बनेगा। प्रोजेक्ट भी तालाब से 60 से 150 मीटर दूर बनाय जा रहा है। हाउसिंग बोर्ड के अधिवक्ता शांतनु सक्सेना ने बताया कि एनजीटी के जज एसके सिंह और एक्सपर्ट मैंबर अफरोज अहमद ने हाउसिंग बोर्ड के तर्कों को स्वीकार करते हुए सिटीजंस फोरम की याचिका को निरस्त कर दिया है। एनजीटी ने इसका ऑर्डर अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है। सोलर एनर्जी से लेकर प्राकृतिक प्रकाश की व्यवस्था कलेक्टोरेट की इमारत को पूरी तरह से जनता से जुड़ा हुआ बनाया जाएगा। उनके लिए यहां अलग से कक्ष भी बनाया जाएंगे। जनसुनवाई कक्ष अत्याधुनिक होगा, वहीं अलग-अलग इमारतों में अधिकारियों की बैठक के लिए भव्य कक्ष बनाए जाएंगे। भविष्य को देखकर इस बिल्डिंग में सोलर एनर्जी से लेकर प्राकृतिक प्रकाश तक की व्यवस्था की गई है। प्रोेफेसर कालोनी के साथ सर्किट हाउस व मंत्री बंगलों को तोड़कर नई कलेक्टोरेट व कुछ अन्य दफ्तरों को यहां शिफ्ट किया जाना है। ये काम रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत हो सकेगा। इसको लेकर पीएस रेवेन्यू के यहां तक बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। बदल जाएगी पुराने शहर की तस्वीर चार बंगला ऑफिस और मकान टूटकर कलेक्ट्रेट और अन्य ऑफिस ब्लॉक बनेंगे। पॉलिटेक्निक चौराहा .. .यहां अर्बन फॉरेस्ट और पोडियम पार्किंग बनाई जाएगी। किलोल पार्क मलेरिया ऑफिस को तोड़कर पार्क का विस्तार होगा और नई सड़कें बनेंगी। पुराने शहर में पहला बड़ा प्रोजेक्ट… यह प्रोजेक्ट सिर्फ नए कलेक्ट्रेट के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें प्रोफेसर कॉलोनी, कलेक्ट्रेट, चूना भट्टी और मेन रोड नंबर 2 के 58.94 एकड़ जमीन का रिडेंसिफिकेशन होगा। 42.63 एकड़ में सरकारी दफ्तर और अन्य सुविधाएं बनेंगी, जबकि 16.31 एकड़ पर प्राइवेट रेसीडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट होगा। शहर के बड़े डेवलपमेंट की रूपरेखा ऐसी होगी     बी टाइप अपार्टमेंट : 20 टॉवर (जी+11)     हॉस्टल ब्लॉक : जी+3 और जी+4 के ब्लॉक     रवींद्र भवन के सामने शॉपिंग : 3000 वर्ग मीटर     अरबन फॉरेस्ट : 7.3 एकड़     स्टेट गेस्ट हाउस : 68 कमरे और 5 सुइट्स बनेंगे। चूना भट्‌टी पर जी एफ सरकारी फ्लैट बनेंगे चूना भट्टी : जी+6 के 5 ब्लॉक। इसमें 3 जी टाइप (72 फ्लैट), 2 एफ टाइप (48 फ्लैट) यानी कुल-120 फ्लैट बनेंगे। कुल जमीन 15,000 वर्ग मीटर। ओल्ड सेक्रेटरिएट : यहां 2.24 हेक्टेयर पर ई टाइप जी+6 के 3 ब्लॉक, 72 फ्लैट व एफ। कलेक्ट्रेट के लिए 9 बार तलाशी जगह… 1972 से अब तक कलेक्ट्रेट के लिए 9 बार अलग-अलग जगहों पर विचार हुआ, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन आ गई। अब जाकर 2024 में इस नई साइट को मंजूरी मिली है। recent visitors 27

डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश, सहकारिता से सरल हुई सशक्तिकरण की राह

भोपाल विशेष लेख संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है "सहकारिता एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती है"। स्व से सब का भाव हो जाना ही सहकार है। भारतीय संस्कृति स्वयं से ऊपर उठकर हम की भावना रखना सिखाती है और इसी भावना से जन्म हुआ है सहकार का। सनातन संस्कृति में जब हम प्रार्थना करते हैं तो सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करते हैं। सबके सुख और मंगल की यही कामना सहकारिता का मूल भाव हैI हम लाभ से ज्यादा सेवा को महत्त्व देते हैं। एक से ज्यादा समूह को महत्त्व देते हैं। प्रतिस्पर्धा से ज्यादा परस्पर सहयोग को महत्व देते हैं और यही सहकारिता है। भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्य धारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा। सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा, कानूनी सुधार और रणनीतिक पहल शुरू की। सरकार ने सहकारी समितियों के लिए ‘व्यापार करने में आसानी’, डिजिटलीकरण के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वंचित ग्रामीण समुदायों के लिए समावेशिता को बढ़ावा देने की अपनी पहल पर काफी जोर दिया है। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत का सहकारिता आंदोलन एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। अपनी दूरदर्शी सोच को आधार बनाकर उन्होंने सहकारिता के लिए नई विचारधारा को जन्म दिया है। उनके नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय सहकारी आंदोलन में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का विस्तार, पैक्स के लिए बेहतर प्रशासन और व्यापक समावेशिता, पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने एवं पैक्स को नाबार्ड से जोड़ने का काम किया है । नई श्वेत क्रांति की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश प्रदेश में सहकार से समृद्धि की पहल के तहत केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और स्टेट डेयरी को-ऑपरेटिव फेडरेशन तथा फेडरेशन से संबद्ध दुग्ध संघों के बीच कोलेबोरेशन एग्रीमेंट हुआ। इस कोलेबोरेशन एग्रीमेंट के माध्यम से सहकारी डेयरी नेटवर्क को सशक्त बनाने का लक्ष्य है, जिससे दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि हो सके और सांची ब्रांड का उत्थान और विस्तार किया जा सके। यह नई श्वेत क्रांति की ओर प्रदेश का महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इसका लाभ दुग्ध उत्पादकों और दुग्ध उपभोक्ताओं दोनों को मिलेगा। दुग्ध उत्पादक राज्यों में मध्यप्रदेश टॉप-थ्री में है, हमारे यहां देश का करीब 9 प्रतिशत दुग्ध-उत्पादन होता है। प्रदेश में रोजाना करीब 551 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है, जिसमें से मध्यप्रदेश स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन और इससे जुड़े संघ करीब 10 लाख किलोग्राम दूध जमा करते हैं।  डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश देश का फ़ूड बास्केट तो है ही, हममें डेयरी कैपिटल बनने की क्षमता भी है। देश का डेयरी कैपिटल बनने के लिए हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं। प्रदेश में सहकारी डेयरी नेटवर्क को हाइटेक बनाने के लिए एक डेयरी डेवलपमेंट प्लान तैयार करने की योजना है, जिसमें लगभग 1450 करोड़ रुपए का निवेश होगा। प्रदेश में औसत दुग्ध संकलन को दोगुना किया जाएगा, दुग्ध संकलन को 10 लाख किलो से बढ़ाकर 20 लाख किलो प्रतिदिन करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार की जाएगी। प्रदेश भर के 18 हजार गांवों के दुग्ध-उत्पादन से जुड़े किसान भाइयों को सहकारी डेयरी नेटवर्क से जोड़ेंगे। ग्राम स्तर पर दुग्ध शीतलीकरण की क्षमता विकसित करेंगे, औसत पैकेट दुग्ध विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 15 लाख लीटर प्रतिदिन करेंगे। मिल्क प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए नए हाइटेक संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे दुग्ध संकलन और दुग्ध विक्रय में वृद्धि हो सके। सभी दुग्ध संघों का व्यवसाय 1944 करोड़ से बढ़ाकर 3500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जाएगा। एनडीडीबी द्वारा एमपीसीडीएफ एवं दुग्ध‍संघों के प्रबंधन, संचालन, तकनीकी सहयोग, नवीन प्रसंस्कररण एवं अन्य अधोसंरचनाएं विकसित करेंगे। एनडीडीबी द्वारा दुग्ध सहकारी समितियों के सभी सदस्यों, सचिवों, प्रबंधन समिति के सदस्यों और दुग्ध संघों के कर्मचारियों को स्वच्छ और गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहकारिता से सरल हुई सशक्तिकरण की राह प्रदेश में डेयरी गतिविधियों के लिए त्रि-स्तरीय सहकारी संस्थाओं का गठन कर, ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियां, सहकारी दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर एमपीसीडीएफ (मध्यप्रदेश स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड) की स्थापना की गई। ये दुग्ध सहकारी समितियां किसानों से दूध संग्रह, गोवंश के कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, तकनीकी पशु प्रबंधन, उन्नत चारा बीज, पशु उपचार और टीकाकरण जैसी सुविधाएं देने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। दुग्ध उत्पादक किसानों के साथ मध्यप्रदेश सरकार डेयरी क्षेत्र विकसित करने के संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रदेश में श्वेतक्रांति मिशन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य है। प्रदेश में निराश्रित गौवंश की समस्या के निराकरण के लिए स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति : 2025 की स्वीकृति दी है। गौ-शालाओं को पशु चारे और आहार के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को भी 20 रुपये प्रति गौवंश प्रति दिवस से बढ़ाकर 40 रूपये प्रति गौवंश प्रति दिवस करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना अब डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के नाम से जानी जाएगी। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना अंतर्गत 25 दुधारू गाय अथवा भैंस की इकाई स्थापित करने का प्रावधान किया गया। प्रदेश की गौ शालाओं को हाइटेक बनाया जा रहा है। ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना की गई है। भोपाल के बरखेड़ी-डोब में 10 हजार गौ-वंश क्षमता वाली हाइटेक गौ-शाला बनाई जा रही है। प्रदेश के सवा 2 लाख किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों को सहकारिता के माध्यम से जोड़ा गया है। सरकार द्वारा दुग्ध सहकारी … Read more

केबल स्टे ब्रिज के साथ ही भोपाल को विकास की रफ्तार देगा ये नया प्रोजेक्ट, मनीषा मार्केट से चूनाभट्टी चौराहा, इतना आ रहा खर्च

भोपाल भोपाल के मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से काली मंदिर तक एक और केबल स्टेब्रिज बनेगा। 15 मीटर चौड़े इस ब्रिज को बनाने में 60 करोड़ की लागत आएगी। यह ब्रिज मनीषा मार्केट से चूना भट्टी को जोड़ेगा। हालांकि, इसके लिए पीडब्ल्यूडी को केंद्रीय वेटलैंड अथॉरिटी से एनओसी लेनी होगी। मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा। डीपीआर बनकर तैयार है। अभी बड़ा तालाब पर एक ब्रिज शाहपुरा तालाब पर यह शहर का दूसरा केबल स्टेब्रिज होगा। ये मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से चूनाभट्टी में काली मंदिर पर उतरेगा। इसके बनने से मनीषा से सीधे चूनाभट्टी या कोलार की ओर पहुंचा जा सकेगा। यह करीब 1.20 किमी लंबा होगा। यह शाहपुरा से लेकर मनीषा मार्केट, अरेरा हिल्स का क्षेत्र चूनाभट्टी, कोलार, माता मंदिर, पीएंडटी, नेहरू नगर की ओर से सीधा जुड़ेगा। अभी बड़ा तालाब पर केबल स्टेब्रिज है। छोटा तालाब पर भी आर्च ब्रिज है। अब शाहपुरा पर भी ऐसा ही ब्रिज होगा। केबल स्टे ब्रिज का काम जल्द शुरू करेंगे। कुछ जरूरी अनुमतियां व एनओसी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।- संजय मस्के, सीई, पीडब्ल्यूडी 30 करोड़ की सीसी रोड, 5 करोड़ का पैविंग ब्लॉक लोक निर्माण विभाग देवी अहिल्या तिराहा से सीआइ तिराहा तक 30 करोड़ रुपए की लागत से सात किमी लंबी चार लेन सीसी रोड बना रहा है। अब इसके किनारे पैविंग ब्लॉक लगाने के लिए पांच करोड़ का अलग से ठेका दिया है। जबकि सीसी से ही किनारे पर रोड की पैकिंग होती है। मौजूदा ठेकेदार को पूरी चार लेन रोड, डक्ट के साथ ही रोड किनारे पर पैकिंग का काम दिया गया था। शाहपुरा बाबानगर से सीआइ तिराहा कोलार रोड तक काम 90 फीसदी हो चुका है। किनारे पर करीब दो-दो मीटर की पैकिंग की जगह बची, लेकिन इस कार्य को अन्य ठेकेदार को दिया गया है। 1.20 किलोमीटर होगी ब्रिज की लंबाई शाहपुर तालाब पर बनने वाला यह शहर का दूसरा केबल स्टे ब्रिज होगा. ये मनीषा मार्केट चौराहा से बंसल हॉस्पिटल के पास से चूनाभट्टी में काली मंदिर पर उतरेगा. इस ब्रिज का निर्माण होने से मनीषा से सीधे चूनाभट्टी या कोलार की ओर पहुंचा जा सकेगा.  यह करीब 1.20 किमी लंबा होगा. यह शाहपुरा से लेकर मनीषा मार्केट, अरेरा हिल्स का क्षेत्र चूनाभट्टी, कोलार, माता मंदिर, पीएंडटी, नेहरू नगर की ओर से सीधा जुड़ेगा. वर्तमान में बड़े तालाब पर केबल स्टेब्रिज है. छोटा तालाब पर भी आर्च ब्रिज है. अब शाहपुरा पर भी ऐसा ही ब्रिज होगा. 5 करोड़ का पैविंग ब्लॉक लोक निर्माण विभाग देवी अहिल्या तिराहा से सीआइ तिराहा तक 30 करोड़ रुपए की लागत से सात किमी लंबी चार लेन सीसी रोड बनाया जा रहा है. अब इसके किनारे पैविंग ब्लॉक लगाने के लिए पांच करोड़ का अलग से ठेका दिया है. जबकि सीसी से ही किनारे पर रोड की पैकिंग होती है. मौजूदा ठेकेदार को पूरी चार लेन रोड, डक्ट के साथ ही रोड किनारे पर पैकिंग का काम दिया गया था. शाहपुरा बाबानगर से सीआइ तिराहा कोलार रोड तक काम 90 प्रतिशत हो चुका है. किनारे पर करीब दो-दो मीटर की पैकिंग की जगह बची, लेकिन इस कार्य को अन्य ठेकेदार को दिया गया है. 60 करोड़ का आएगा खर्च लोक निर्माण अधिकारियों ने शहर के विकास के लिए इस प्रोजेक्ट के महत्व पर जोर दिया है। कुछ स्थानीय निवासियों को इससे अपने रूटीन पर पॉजीटिव इफेक्ट पड़ने की उम्मीद है। शाहपुरा झील को चूनाभट्टी से जोड़ने वाले पुल पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने कहा, यह मनीषा मार्केट को जोड़ेगा, सिंचाई विभाग की भूमि के किनारे से होकर, एक निजी अस्पताल के पीछे से गुजरेगा और चूनाभट्टी में चौराहे से जुड़ेगा। भोपाल में दो केबल पुल भोपाल में हाल ही में दो केबल वाले पुलों का निर्माण देखा गया है। एक ऊपरी झील तक फैला है, और दूसरा लोअर लेक पर ट्रैफिक को जोड़ता है। चूनाभट्टी को मनीषा मार्केट से जोड़ने वाली सड़क पर अक्सर ट्रैफिक जाम रहता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अधिकांश अव्यवस्था सड़क किनारे पार्किंग के कारण होती है। ट्रैफिक संबंधी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद इसका उद्देश्य ट्रैफिक में सुधार करना और शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को बढ़ाना है। मॉडर्न पुल डिजाइन को लागू करने से, शहरों को ट्रैफिक संबंधी समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। केबल स्टे ब्रिज कॉन्सेप्ट में ब्रिज डेक का सपोर्ट करने के लिए केबलों का उपयोग करना होता है, जिससे इसका ड्यूरेशन बढ़ जाता है। यह डिज़ाइन शहर में विशेष रूप से प्रभावी है जहां स्थान सीमित है और पारंपरिक पुल मॉडल संभव नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा, केबल स्टे ब्रिज से शहर का सौंदर्य भी बढ़ता है। योजनाकार मान रहे ट्रैफिक सुगम होगा शहर के योजनाकारों का मानना है कि केबल स्टे ब्रिज को ट्रैफिक सिस्टम में जोड़ने से आवागमन सुगम हो सकता है और भीड़भाड़ कम हो सकती है। सपोर्ट पियर्स की संख्या में कमी का मतलब है मौजूदा सड़कों पर कम रुकावट और लंबे समय के लिए कम मेंटिनेंस कॉस्ट। अपर लेक केबल स्टे ब्रिज ट्रैफिक को सुगम बनाने में प्रभावी रहा है। पुल के डिज़ाइन और निर्माण ने ट्रैफिक को सुविधाजनक बनाया है। गिन्नोरी ब्रिज पर हो रहीं समस्याएं दूसरी ओर गिन्नोरी केबल स्टे ब्रिज के ट्रैफिक डिजाइन में गलतियां हैं। इससे समस्याएं पैदा हो रही हैं। पॉलिटेक्निक से आने वाले वाहनों को पुल पर लेन बदलने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पुल एक तरफ़ा मार्ग बन गया है, जो अतिक्रमण से घिरा हुआ है। recent visitors 38

धूप की कमी आपकी सेक्स लाइफ बिगाड़ रही है? जानिए चौंकाने वाली स्टडी

लंदन  क्या आपको इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है? अगर हां, तो समय आ चुका है कि आप एक बार अपना विटामिन डी लेवल चेक करवा लें. शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर थकान, हड्डियों में दर्द, मसल्स में कमजोरी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि शरीर में इस पोषक तत्व की कमी से आपकी सेक्सुअल लाइफ पर भी काफी बुरा असर पड़ सकता है. ब्रिटिश जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में छपी एक स्टडी में  विटामिन डी की कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बीच में लिंक का खुलासा किया है. स्टडी में सुझाव दिया गया है कि विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियों की सेहत और इम्यून हेल्थ पर बुरा असर नहीं पड़ता बल्कि इससे पुरुषों की सेक्सुअल परफॉर्मेंस भी प्रभावित होती है. क्या होता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन? इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को नपुंसकता भी कहा जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुषों को यौन संबंध के दौरान उत्तेजना नहीं होती या फिर उसे बनाए रखने में परेशानी होती है. कभी कभार इस समस्या का सामना सभी पुरुषों को करना पड़ सकता है. लेकिन अगर आपको हर बार इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो जरूरी है कि आप इसकी जांच करवाएं. ब्लड फ्लो के रुकने, नर्व डैमेज, साइकोलॉजिकल स्ट्रेस या सेहत से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी के कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है. जीवन की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे से कहीं ज्यादा, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को खराब हार्ट हेल्थ के शुरुआती संकेत के रूप में पहचाना जाता है, जिसमें दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा भी शामिल है. अब विटामिन डी की कमी डायबिटीज, मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी कंडिशन के साथ-साथ एक अन्य खतरे के रूप में उभर रही है. क्या कहती है स्टडी ब्रिटिश जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में पब्लिश इस  स्टडी में शोधकर्ताओं ने पुरुषों और चूहों के प्राइवेट पार्ट्स के टिश्यूज की जांच की. उन्होंने पाया कि विटामिन डी की कमी से इरेक्शन में समस्या आती है. चूहों में देखा गया कि विटामिन डी की कमी के कारण लिंग के ऊतकों (Tissues) में 40% तक अधिक कोलेजन जमा हो गया, जिससे फाइब्रोसिस यानी ऊतक का कठोर होने की समस्या बढ़ी. मनुष्यों में भी यह पाया गया कि जिन लोगों में विटामिन डी कम था, उनके प्राइवेट पार्ट के ब्लड वेसेल्स में प्रोक्रेस्टिनेशन कम थी, और उनका शरीर नर्व स्टिमुलेटर पर सही रिएक्शन नहीं दे पा रहा था. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से ईडी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयां भी कम असरदार हो जाती हैं. भारत में विटामिन डी की कमी भारत में विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन गई है. ICRIER के एक एनालिसिस के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक व्यक्ति विटामिन डी की गंभीर कमी से पीड़ित है. खासकर पूर्वी भारत में विटामिन डी की कमी का स्तर 38.81% तक है. भारत में विटामिन डी का सही डोज खुराक 400-600 IU है. ज्यादा उम्रदराज को 800 IU तक की जररूत हो सकती है. कैसे बढ़ाएं विटामिन D का लेवल सुबह की धूप रोज 15-20 मिनट तक लें. विटामिन D से भरपूर डाइट जैसे अंडा, मछली, दूध, मशरूम खाएं. डॉक्टर से सलाह लेकर सप्लीमेंट लें. कभी-कभी डाइट से पूरा नहीं हो पाता, तो डॉक्टर विटामिन D की गोलियां या सिरप सजेस्ट कर सकते हैं.   स्टडी में क्या बताया गया है? स्टडी के लिए, शोधकर्ताओं ने इंसानों और लेबोरेर्टीरी में रखे गए जानवरों दोनों के प्राइवेट पार्ट के टिशू का विश्लेषण किया और पाया कि विटामिन डी की कमी से उत्तेजना (इरेक्शन) में कमी आती है. विटामिन डी की कमी वाले चूहों में, इरेक्शन टिशू में 40% तक ज्यादा कोलेजन जमा हुआ था जो फाइब्रोसिस का संकेत है, जो टिशू को कठोर बनाता है और इरेक्शन को ट्रिगर करने वाले संकेतों को कम प्रभावी बनाता है. इंसानों में, शोधकर्ताओं ने अलग-अलग विटामिन डी लेवल वाले लोगों पर शोध किया. शोध में जिन पुरुषों के शरीर में विटामिन डी के लेवल को कम पाया गया उन पुरुषों में प्राइवेट पार्ट तक ब्लड का फ्लो काफी कम पाया गया. हालांकि यह रिसर्च काफी कम लोगों पर की गई थी इसलिए स्टडी के परिणाम कितने सही इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती है. इसे लेवल और भी कई रिसर्च होने अभी जरूरी हैं.   recent visitors 49