मंत्री कश्यप ने जामगांव (एम) में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कर अद्यतन कार्यों का जायजा लिया

 रायपुर प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड  अंतर्गत ग्राम जामगांव (एम) में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कर अद्यतन कार्यों का जायजा लिया। वनमंत्री ने यथाशीघ्र गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करने संबंधितों को निर्देशित किया। इस अवसर पर सांसद विजय बघेल व जिला एवं जनपद पंचायत के प्रतिनिधि भी साथ मौजूद थे। लघु वनोपजों के प्रसंस्करण हेतु लगभग 23 करोड़ की लागत से 110 एकड़  क्षेत्र में विभिन्न प्रसंस्करण इकाई स्थापित किया जा रहा है।  वन मंत्री कश्यप ने इन इकाई में प्रसंस्करण होने वाले उत्पाद तथा गोदामों में भंडारित वनोपज, मिलेट्स फसल, प्रसंस्करण पश्चात् वितरण आदि की भी जानकारी ली। वन मंत्री कश्यप ने सम्पूर्ण इकाई परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एक पेड़ माँ के नाम पर लोगों से पौध रोपण करने की अपील की। इस अवसर पर डीएफओ चंद्रशेखर परदेशी, एसडीएम लवकेश ध्रुव एवं अन्य विभाग के अधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। recent visitors 27

मोहन सरकार का बड़ा फैसला, अब शिक्षकों की लापरवाही सामने आने पर होगी वेतन में कटौती

 भोपाल  शिक्षा विभाग कार्यालय मे काम कर रहे शिक्षकों को अब स्कूल भेजे जाएंगे. इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. वहीं ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जांच के भी निर्देश दिए गए हैं. दरअसल,  स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की बैठक ली. उन्होंने कहा कि कई शिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, बोर्ड ऑफिस, जिला शिक्षा कार्यालय, बीआरसीसी और जनशिक्षक कार्यालयों में अटके हुए हैं. इन्हें कार्यमुक्त कर स्कूलों में भेजा जाएगा. इसके अलावा सभी शिक्षकों को अपने दैनिक कार्य समय और उपस्थिति को दर्ज करने के लिए शिक्षा पोर्टल 3.0 का उपयोग करना होगा. बिना पोर्टल पर उपस्थित के वेतन नहीं मिलेगा. जो शिक्षक निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करते हैं, उनके खिलाफ आवश्यक जांच और कार्रवाई की जाएगी. ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नहीं करने वालों की होगी जांच     बैठक में निर्देश दिए गए कि ऐसे शिक्षकों की सूची भी बनाई जाए, जिनका पहले ट्रांसफर हो चुका है या जो अतिशेष में थे, लेकिन उन्होंने स्कूल ज्वाइन नहीं किया। मंत्री ने साफ कहा कि इन मामलों में अब और लापरवाही नहीं चलेगी।     अब पोर्टल पर उपस्थिति, तभी वेतन : शिक्षकों के लिए यह भी अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपनी पूरी उपस्थिति शिक्षा पोर्टल 3.0 पर दर्ज करें। बिना उपस्थिति फीड किए वेतन नहीं मिलेगा। अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। स्वयं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश के कुछ जिलों में शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते, बल्कि उनकी जगह अन्य लोग पढ़ाने जाते हैं। इसके अलावा, कई शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है ऐसे करेंगे सख्ती     शिक्षकों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज की जाएगी।     ‘सार्थक’ ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी।     इस ऐप की मदद से न सिर्फ लोकेशन की निगरानी होगी, बल्कि अन्य जरूरी गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जाएगी।     निर्देशों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ वेतन में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। गैर हाजिरी पर लगेगी लगाम सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की गैरहाजिऱी पर लगाम लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने इस दिशा में एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत प्रदेश के लगभग चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके लिए विभाग "सार्थक एप" का उपयोग करेगा। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी जुलाई में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जैसे ही स्कूल दोबारा खुलेंगे, शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस बार उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन) का उपयोग होगा, जिससे उन शिक्षकों पर रोक लगेगी जो अपनी जगह किसी और को पढ़ाने भेजते हैं। उज्जैन और नरसिंहपुर जिलों में सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह प्रणाली सबसे पहले उज्जैन और नरसिंहपुर जिलों में लागू की जाएगी। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए हर जिले से दो-दो प्रोग्रामरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति प्रदेश के कुल 99,145 स्कूलों में से सिर्फ 8,051 स्कूलों में ही विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसका मतलब है कि 91,094 स्कूल अब भी इस अनिवार्य प्रणाली का पालन नहीं कर रहे हैं, जबकि यह व्यवस्था ऐच्छिक नहीं बल्कि आवश्यक रूप से लागू की गई थी। असफलता के पीछे का कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की यह व्यवस्था तीन बार यानि साल 2017, 2020 और 2022 में शिक्षा मित्र एप के माध्यम से लागू की गई, लेकिन हर बार असफल रही। शिक्षकों ने कभी स्मार्टफोन की कमी का हवाला दिया तो कभी नेटवर्क की समस्या का, जिससे यह प्रणाली कभी पूरी तरह से लागू नहीं हो सकी। अब नहीं होगी गड़बड़ी, उपस्थिति होगी सटीक ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पहले एम शिक्षा मित्र एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जाती थी। यह एप नेटवर्क न होने की स्थिति में भी उपस्थिति दर्ज कर लेता था और जैसे ही नेटवर्क मिलता, डेटा अपडेट हो जाता था। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई बार गड़बडय़िां सामने आईं। अब इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से दर्ज की जाएगी, जिसमें चेहरा पहचान कर उपस्थिति ली जाएगी। जुलाई से अनिवार्य होगी "सार्थक एप"   स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति "सार्थक एप" से सुनिश्चित की जाएगी। इसे इस बार बेहतर ढंग से लागू किया जाएगा और जुलाई से इसका उपयोग अनिवार्य कर दिया जाएगा। छुट्टी के लिए भी एप पर कर सकेंगे आवेदन सार्थक एप केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे शिक्षक अपनी लोकेशन की जानकारी के साथ-साथ अन्य ज़रूरी कार्य भी कर सकेंगे। अब कर्मचारी व शिक्षक अवकाश के लिए आवेदन भी इसी एप के माध्यम से कर सकेंगे और शासन से होने वाला पत्राचार भी यहीं से किया जा सकेगा। recent visitors 54

छत्तीसगढ़ का कोर नक्सली इलाका आतंक से मुक्त…आखिरी नक्सलियों ने किया सरेंडर

 सुकमा सरकार और जवानों को एक बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले का कोर नक्सली इलाका बड़ेसट्टी गांव अब नक्सल मुक्त हो गया है। आखिरी 11 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण कर लिया है। बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ से वादा किया था कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद खत्म कर देंगे। 11 नक्सलियों किया सरेंडर बड़ेसट्टी गांव के सक्रिय अंतिम 11 नक्सलियों ने सरकार के सामने हथियार डाल दिए हैं। वहीं इस जिले में 22 नक्सलियों ने भी सरेंडर किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बल के जवानों और छत्तीसगढ़ पुलिस को बधाई दी है। गृह मंत्री ने छिपे हुए नक्सलियों से अपील की कि वे मोदी सरकार की आत्मसमर्पण नीति को अपनाकर यथाशीघ्र हथियार डालें और मुख्यधारा में शामिल हों। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं। यथाशीघ्र हथियार डालें नक्सली – गृहमंत्री अमित शाह केन्द्रीय गृह मंत्री ने ‘X’ पर पोस्ट में कहा कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में विभिन्न ऑपरेशन्स में कोबरा कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने 22 कुख्यात नक्सलियों को आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों के साथ गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि सुकमा में 33 नक्सलियों ने सरेंडर कर मोदी सरकार की आत्मसमर्पण नीति पर विश्वास जताया है। ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025’ के अंतर्गत ‘नक्सली इलवद पंचायत योजना’ के तहत ग्राम पंचायत बड़ेसट्टी के कुल 11 सक्रिय माओवादियों ने शुक्रवार को सामूहिक सरेंडर किया, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। सरेंडर करने वालों में तीन पुरुष और एक महिला नक्सली पर दो-दो लाख रुपये तथा एक पुरुष नक्सली पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह इस गांव से कुल 8 लाख 50 हजार रुपये का इनामी नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। अमित शाह ने सभी छिपे हुए नक्सलियों से की सरेंडर की अपील भाषा के मुताबिक, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सभी अंडरग्राउंड नक्सलियों से जल्द सरेंडर करने और मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार 31 मार्च 2026 से पहले देश को नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमित शाह ने कहा कि कोबरा कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने राज्य के बीजापुर जिले में संचालित विभिन्न अभियानों में आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्री के साथ 22 कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि सुकमा के बड़ेसट्टी पंचायत में 11 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिससे यह पंचायत पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो गई है। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘छिपे हुए नक्सलियों से मेरी अपील है कि मोदी सरकार की सरेंडर नीति को अपनाकर यथाशीघ्र हथियार डालें और मुख्यधारा में शामिल हों। 31 मार्च 2026 से पहले हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं।’’ गृहमंत्री ने मध्य प्रदेश के नीमच में सीआरपीएफ के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद अब भारत के सिर्फ चार जिलों तक सीमित रह गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 31 मार्च 2026 तक देश से यह समस्या समाप्त हो जाएगी। सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) और सीआरपीएफ, विशेषकर इसकी कोबरा बटालियन देश से नक्सलवाद को खत्म करने में प्रमुख भूमिका निभा रही है। नक्सलियों ने भी जारी किया लेटर नक्सलियों के उत्तर पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश के नाम से ये पत्र जारी हुआ है। नक्सल नेता ने शांति वार्ता को लेकर कहा है कि, मेरे पहले बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का धन्यवाद। मेरी सुरक्षा गारंटी देते हुए मेरे इस कोशिश को आगे बढ़ाने की अनुमति देने के लिए भी धन्यवाद। आगे लिखा है कि, वार्ता के लिए हमारी तरफ़ से प्रतिनिधित्व के लिए नेतृत्वकारी कामरेडों से मिलना जरूरी है। इसलिए सरकार से मेरी अपील है कि, एक महीने तक सशस्त्र बलों के ऑपरेशन पर रोक लगाई जाए। नई ग्रुप सरेंडर पॉलिसी नई ग्रुप सरेंडर पॉलिसी के तहत नक्सली संगठन की किसी फॉर्मेशन इकाई के यदि 80 प्रतिशत या उससे अधिक सक्रिय सदस्य सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें बड़ा फायदा मिलेगा। सरकार ने कहा है कि उनपर जारी इनाम डबल करके उन्हें दिया जाएगा। सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर जैसे अति नक्सल प्रभावित जिलों में यदि किसी ग्राम पंचायत क्षेत्र में सक्रिय समस्त नक्सली व मिलिशिया सदस्य आत्मसमर्पण करते हैं, और ग्राम पंचायत को नक्सल मुक्त घोषित किया जाता है, तो वहां 1 करोड़ रूपए के विकासात्मक कार्य स्वीकृत किए जाएंगे। 120 दिन में बदलेगी नक्सलियों की लाइफ जंगलों में फोर्स से छुपकर उनपर हमला करने वाले या एनकाउंटर में मारे जाने वाले नक्सलियों का जीवन 120 दिन में सरकार बदलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई नक्सलवादी आत्मसमर्पण नीति 2025 में इसका बंदोबस्त किया है। नई नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को ट्रांजिट कैंप या पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। यहां उन्हें उनकी रुचि के अनुसार किसी न किसी हुनर में प्रशिक्षित किया जाएगा। पढ़ाया भी जाएगा। 3 साल तक हर महीने मानदेय इतना ही नहीं, तीन साल तक हर महीने 10,000 रुपए मानदेय भी दिया जाएगा। आवास के लिए शहरी इलाके में प्लाट, ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि, स्वरोजगार और व्यवसाय से जुड़ने की योजनाओं से जोड़ा जाएगा। नक्सलियों के पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी करने का नियम तय किया गया है, ताकि नक्सली जल्द से जल्द समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। recent visitors 44

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का बड़ा ऐलान- प्रदेश के हर जिले में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज, दो इसी साल

दतिया डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला अल्प प्रवास पर दतिया पहुंचे. उन्होंने पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगलामुखी के दर्शन किए. साथ ही पीठ परिसर में स्थित वनखंडेश्वर महादेव का अभिषेक किया. मीडिया से बातचीत करते हुए डिप्टी सीएम ने नेशनल हेराल्ड मामले में कहा, जब कोई गड़बड़ी घोटाला करता है और पकड़ा जाता है, तो वह ये स्वीकार नहीं करता कि उसने गलत किया है. कांग्रेस के नेता भी ऐसा कर रहे हैं. डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि जिला अस्पताल में आगजनी और अन्य घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी रखी जाएगी. दमोह अस्पताल जैसा मामला सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि कोई गलत काम करने का दुस्साहस न कर सके. सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रकिया चल रही है. इस साल दो जगह मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे. प्रदेश के लिए 12 जगह टेंडर हो चुके हैं, शेष बचे जिलों में भी भविष्य में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे. अस्पतालों में मरीजों को टेली मेडिसिन सुविधा मिले, इसके लिए भी शासन प्रयास कर रहा है. प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज- शुक्ल मीडिया से बातचीत में शुक्ल ने कहा कि जिला अस्पतालों में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। दमोह जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना है। इस वर्ष दो नए मेडिकल कॉलेज शुरू होंगे। 12 स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को टेलीमेडिसिन की सुविधा देने के लिए सरकार प्रयासरत है। राजेंद्र शुक्ल महाकौशल एक्सप्रेस से सुबह लगभग साढ़े 4 बजे दतिया पहुंचे। सुबह 6 बजे पीतांबरा पीठ में दर्शन के बाद वे ग्वालियर के लिए रवाना हो गए। ग्वालियर में उनके स्थानीय कार्यक्रम और मेडिकल कॉलेज में जिला प्रशासन के साथ बैठक का कार्यक्रम है। ‘प्रसाद योजना’ से संवरेगी मां पीतांबरा की नगरी गौरतलब है कि पीतांबरा पीठ अब आध्यात्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है. क्योंकि केंद्र सरकार ने इस दिशा में ‘प्रसाद योजना’ के तहत 44.24 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है. इस योजना से धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण होगा. योजना का उद्देश्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बनाना है. recent visitors 36

परिवहन चेक पॉइंट की नई गाइडलाइन जारी, वर्दी और बॉडी वॉर्न कैमरे के बिना वाहनों की नहीं होगी जांच, POS मशीन से बनेंगे चालान

भोपाल  मध्य प्रदेश की परिवहन चौकियों में मिल रहीं भ्रष्टाचार की शिकायतों पर रोक लगाने मोहन सरकार ने सख्त निर्णय लिया है। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने वाहन चेकिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। कहा, बिना वर्दी और बॉडी वॉर्न कैमरे के बिना वाहनों की जांच नहीं की जा सकेगी। पॉइंट ऑफ सेल से चालानी कार्रवाई की जाएगी। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा के मुताबिक, नई गाइडलाइन पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ जिलों में पहले से लागू की थी। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बनी रहती है, बल्कि वाहन चालकों को भी आसानी होती है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा। 15 मई से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। गाइडलाइन के अनुसार जांच के समय कम से कम एक सहायक परिवहन उप निरीक्षक का मौजूद होना जरूरी होगा। सभी स्टाफ को वर्दी पहनना अनिवार्य है और वर्दी पर नाम की प्लेट भी होनी चाहिए। जांच कार्यवाही में केवल विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ही शामिल रहेंगे, किसी भी निजी व्यक्ति की भागीदारी पूरी तरह वर्जित है। चालान की प्रक्रिया केवल POS मशीन के माध्यम से ही की जाएगी। जहां POS मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां इसके उपयोग की व्यवस्था प्राथमिकता से की जाएगी। एक बार में एक ही वाहन की जांच की जाएगी, और उसके बाद ही अगला वाहन रोका जाएगा। किसी भी वाहन को 15 मिनट से अधिक बिना कारण के नहीं रोका जा सकेगा। रात्रिकालीन जांच के लिए अच्छी रोशनी वाले सुरक्षित स्थान का चयन अनिवार्य होगा। स्टाफ को LED बैटन और रिफ्लेक्टिव जैकेट उपलब्ध कराई जाएंगी। बॉडी वॉर्न कैमरे जांच की पूरी अवधि के दौरान सक्रिय रहेंगे। कम से कम दो कैमरे चालू रहेंगे, जिनमें से एक लाइव मोड में होगा। कैमरे संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को ही आवंटित किए जाएंगे। कैमरों की रिकॉर्डिंग और स्टोरेज की निगरानी भी यूनिट प्रभारी की जिम्मेदारी होगी। यदि जांच के दौरान किसी वाहन चालक या अन्य व्यक्ति से विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित यूनिट प्रभारी की होगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह दिए दिशा निर्देश     कम से कम एक सहायक परिवहन उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी की मौजूदगी में ही चेकिंग की जाएगी।     चेकिंग के समय पूरा स्टाफ वर्दी में होना चाहिए। सभी की वर्दी पर नेम प्लेट भी लगी होनी चाहिए।     यूनिट के साथ अटैच ड्राइवर के अलावा कोई भी प्राइवेट व्यक्ति चेकिंग की कार्यवाही के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होना चाहिए।     बॉडी वॉर्न कैमरा उपलब्ध होते ही चेकिंग की पूरी अवधि के दौरान कम से कम दो बॉडी वॉर्न कैमरा चालू रहे।     कम से कम एक बॉडी वॉर्न कैमरा लाइव मोड में होना चाहिए। का उपयोग वही करेंगे।     चेकिंग के दौरान रिकॉर्डिंग मोड के दो कैमरों के अलावा बाकी दूसरे कैमरे स्टैंड बाय मोड में रहेंगे।     चालानी कार्यवाही केवल पॉइंट ऑफ सेल मशीन ही की जाएगी।     यूनिट द्वारा एक बार में एक ही वाहन को रोका जाए और उसकी चेकिंग, उसके खिलाफ कार्यवाही के बाद ही किसी दूसरे वाहन को रोका जाए।     किसी भी वाहन को बिना किसी विशेष कारणों के 15 मिनट से ज्यादा न रोका जाए। अन्यथा ये माना जाएगा कि वाहन को रोकने के संबंध में यूनिट की मंशा सही नहीं हैं।     रात के समय अगर चेकिंग जरूरी हो तो ऐसे स्थान को चेकिंग के लिए चुना जाए, जहां रोशनी के अभाव में कोई दुर्घटना न हो। अंधेरे के समय स्टाफ के पास एलईडी बैटन और रिफ्लेक्टिव जैकेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो। ये प्रभारी सुनिश्चित करेंगे। चौकियां बंद, 45 चेक प्वाइंट में वसूली मध्य प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर एक साल पहले परिवहन चौकियों को बंद कर दिया है। उनकी जगह पर अंतरराज्यीय सीमा पर 45 चेक प्वाइंट बनाए गए हैं, लेकिन ट्रकों और वाहनों से अवैध वसूली की लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। इसके बाद परिवहन आयुक्त ने नया आदेश जारी किया है। प्रभारी के खिलाफ होगी कार्रवाई परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि चेकिंग पाइंट पर पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इससे वाहन चालकों चेकिंग के दौरान होने वाली समस्या भी दूर हुई है। इन निर्देशों का पालन करने में चूक होने पर प्रभारी पर अनुशासनात्मक, दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।   recent visitors 34

गर्मी से लोगों का हाल बेहाल, खजुराहो का पारा 44° पार, अगले 5 दिन के लिए बड़ा अलर्ट

भोपाल प्रदेश में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है. शुक्रवार को कई जिलों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया. खजुराहो, गुना और नौगांव सबसे ज्यादा गर्म रहा. मौसम विभाग की मानें तो अगले दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा. मौसम विभाग के मुताबिक, शनिवार से अगले तीन दिन प्रदेश भर का मौसम शुष्क रहेगा. करीब 2 से 3 डिग्री तक पारा बढ़ने के आसार हैं. मौसम विभाग ने मई तक 15 से 20 दिन हीट वेव चलने का अनुमान जताया है. अप्रैल-मई में 30 से 35 दिन तक गर्म हवा चल सकती है. अगले तीन ऐसे रहेगा मौसम का हाल 19 अप्रैल से दिन के पारे में बढ़ोतरी जारी रहेगी. भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर में भी गर्मी का अहसास रहेगा. 20 अप्रैल को भोपाल, इंदौर, उज्जैन-ग्वालियर में दिन का तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक रह सकता है. रात में पारा 25 डिग्री के आसपास रहेगा. अन्य शहरों में भी गर्मी का असर देखने को मिल सकता है. 21 अप्रैल को दिन में गर्म हवाएं चल सकती है. जिसका असर राजस्थान से जुड़े जिलों में देखने को मिलेगा. भोपाल, इंदौर-उज्जैन में भी पारा बढ़ा हुआ रहेगा. 22 अप्रैल को तेज गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है. ठंडी हवा आने से पारे में 2 से 3 डिग्री की गिरावट होने की संभावना है. जानें शुक्रवार को कहां कितना डिग्री रहा तापमान शुक्रवार को छतरपुर के खजुराहो और नौगांव में पारा 44.6 डिग्री और 44 डिग्री दर्ज रहा. जबकि गुना में 44.3, रतलाम, सागर-सीधी में 43.8, दमोह में 43.6, सतना-शाजापुर में 43.1, नर्मदापुरम-रीवा में 42.6, टीकमगढ़ में 42.3 डिग्री, शिवपुरी-रायसेन में 42, मंडला में 42, धार में 41.9, उमरिया में 41.7, खरगोन में 41.4, सिवनी में 40.4, बैतूल में 40.2, खंडवा में 40.1 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. जानें अपने जिलों का तापमान राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां शुक्रवार दिन का तापमान बीते दिन के मुकाबले 42.2 डिग्री के करीब दर्ज किया गया. गुरुवार के मुकाबले इसमें 1.1 डिग्री की बढ़ोतरी हुई. वहीं, रात के तापमान में 3.8 डिग्री की गिरावट के साथ पारा 27.2 डिग्री दर्ज किया गया. मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह के अनुसार, पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर संभाग के जिलों में पारा सामान्य से 1.6-3 डिग्री अधिक रहा. साथ ही भोपाल और उज्जैन संभाग के जिलों में कहीं-कहीं पर हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई. हालांकि, अशोकनगर जिले के आंवरी में रात का न्यूनतम तापमान सबसे ज्यादा 28.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ. खजुराहो में पारा सबसे ज्यादा पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक तापमान खजुराहो (छतरपुर) में 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. इसके अलावा गुना में 44.3 डिग्री, नौगांव (छतरपुर) में 44 डिग्री, रतलाम/सागर/सीधी जिले में 43.8 डिग्री और दमोह में 43.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ. वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में पारा सबसे कम 20.2 डिग्री, कल्याणपुर (शहडोल)/नरसिंहपुर में 22.2 डिग्री, देवरा (सिंगरौली) में 22.3 डिग्री, छिंदवाड़ा में 22.6 डिग्री और मंडला में 22.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ. 5 बड़े शहरों का हाल प्रदेश के पांच बड़े शहरों के अधिकतम तापमान की बात करें तो बुधवार को ग्वालियर का अधिकतम तापमान सबसे ज्यादा दर्ज किया गया. यहां पारा 43 डिग्री दर्ज हुआ. इसके अलावा उज्जैन का अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री, भोपाल में 42.2 डिग्री, जबलपुर में 42.1 डिग्री और इंदौर में 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. प्रदेश में सबसे गर्म रहा छतरपुर शुक्रवार को छतरपुर जिला सबसे गर्म रहा। यहां के दो शहर खजुराहो और नौगांव में पारा क्रमश: 44.6 डिग्री और 44 डिग्री दर्ज किया गया। गुना में 44.3 डिग्री रहा। इसी तरह रतलाम, सागर-सीधी में 43.8 डिग्री, दमोह में 43.6 डिग्री, सतना-शाजापुर में 43.1 डिग्री, नर्मदापुरम-रीवा में 42.6 डिग्री, टीकमगढ़ में 42.3 डिग्री, शिवपुरी-रायसेन में 42 डिग्री, मंडला में 42 डिग्री, धार में 41.9 डिग्री, उमरिया में 41.7 डिग्री, खरगोन में 41.4 डिग्री, मलाजखंड में 41 डिग्री, सिवनी में 40.4 डिग्री, बैतूल में 40.2 डिग्री, खंडवा में 40.1 डिग्री और छिंदवाड़ा में पारा 40 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के बड़े शहर- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर भी सीजन के सबसे गर्म रहे। ग्वालियर में सबसे ज्यादा 43 डिग्री, उज्जैन में 42.8 डिग्री, भोपाल में 42.2 डिग्री, जबलपुर में 42.1 डिग्री और इंदौर में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, 28 शहरों में पारा 40 डिग्री या इससे अधिक रहा। ऐसा सीजन में पहली बार हुआ, जब इतने अधिक शहरों में भीषण गर्मी पड़ी हो। 3 दिन बाद पारे में गिरावट मौसम वैज्ञानिक अभिजीत चक्रवर्ती ने बताया कि तीन दिन के बाद पारे में हल्की गिरावट हो सकती है, लेकिन इससे पहले भीषण गर्मी रहेगी। recent visitors 41

कांगो में आग लगने के बाद पलटी नाव, दर्दनाक हादसे में कम से कम 150 लोगों की मौत; कई अब भी लापता

कांगो अफ्रीकी देश कांगो में ईंधन लेकर रही एक बड़ी नाव में विस्फोट की वजह से आग लगने और पलटने से कम से कम 143 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई दर्जन लोग लापता हो गए। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह घटना राजधानी मबंडाका के पास रूकी और कांगो नदी के संगम पर मंगलवार को हुई। इस जगह पर यह दुनिया की सबसे गहरी नदी है। नाव तय सीमा से ज्यादा लोगों को लेकर यात्रा कर रही थी, तभी अचानक हुए विस्फोट से उस पर आग लग गई, जिससे अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और नाव पलट गई। जांच के लिए पहुंचे प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख जोसेफिन लोकुम के मुताबिक इस घटना के बाद लोगों की तलाश जारी थी। हमने बुधवार को 131 शवों को बरामद किया, जबकि गुरुवार और शुक्रवार को हमें 12 शव और मिले हैं। इन शवों में से कई की हालत बहुत खराब है और कई बुरी तरह से जले हुए हैं। घटना की जानकारी देते हुए लोकुमु ने बताया कि शुरुआती जांच में अभी यह सामने आया है कि एक महिला ने नाव पर ही भोजन पकाने के लिए आग जलाई थी। वहां से थोड़ी ही दूरी पर बहुत ही ज्वलनशील ईंधन रखा हुआ था.. आग के संपर्क में आते ही ईंधन में तेज विस्फोट हो गया, जिससे तत्काल ही कई लोगों की मौत हो गई। विस्फोट की वजह से वहां पर भगदड़ मच गई और नाव पलट गई। स्थानीय नागरिक समाज के नेता जोसेफ लोकोंडो ने कहा कि हमारी टीम ने शवों को दफनाने में मदद की है। मरने वालों संख्या फिलहाल 145 है.. कई लोगों की मौत जलने की वजह से हुई है तो कई लोग डूबने की वजह से मारे गए। फिलहाल स्थानीय लोग और प्रशासन मदद के लिए अपना काम कर रहा है। हम शवों की तलाश कर रहे हैं। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद कई नावों ने लोगों को बचाने का प्रयास भी किया था। कई लोगों को वहां से बचाकर अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। नाव पर कितने लोग सवार थे इस सवाल का जवाब देते हुए लोकुम ने कहा कि हमें सही संख्या पता नहीं है.. लेकिन इतना तय है कि नाव पर क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। फिलहाल जितने शव हमें मिल चुके हैं लगभग उतने ही लोगों के और लापता होने का अनुमान है। आपको बता दें कि अफ्रीकी देश में सड़कों की अवसंरचना की भारी कमी है। इसीलिए यहां पर आम जनता एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पानी की बड़ी-बड़ी नावों का सहारा लेती है। इसलिए यहां की झीलों और कांगो नदी में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। recent visitors 22