चीतों के लिए नया घर तैयार:गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के लिए बड़े बाड़े तैयार, जन्मे दो नर चीतों को 20 अप्रैल को किया जाएगा रिलीज

भोपाल  मध्य प्रदेश में चीतों का दूसरा घर यानी गांधी सागर अभयारण्य जल्द ही चीतों से आबाद होने जा रहा है। यहां चीतों को बसाने की तारीख तय हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि 20 अप्रैल को गांधी सागर अभ्यारण्य में 2 चीतों को कूनो से यहां शिफ्ट किया जाएगा।  कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा रहवास स्थल हो जाएगा। बताया जा रहा है कि चीतों की शिफ्टिंग के लिए चीता स्टीयरिंग कमेटी ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच आज गुरुवार को होने वाली बैठक के बाद शिफ्टिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। मध्यप्रदेश के कूनो में इस समय कुल 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक शामिल हैं। इनमें से 6 वयस्क और 11 शावक, यानी कुल 17 चीते, कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने शुरू कर दी तैयारी अफ्रीका, केन्या के प्रतिनिधिमंडलों और केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी के निरीक्षण के बाद आखिरकार तय हो गया कि भारत की धरती पर जन्म लेने वाले चीतों से ही गांधीसागर आबाद होना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हां होते ही वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दो नर चीतों को लाया जा रहा है फिलहाल यहां कूनो नेशनल पार्क में जन्मे लेने वाले दो नर चीतों को लाया जा रहा है। उन्हें 20 अप्रैल को यहां छोड़ा जाएगा। इसकी तैयारी गांधीसागर अभयारण्य में काफी समय पहले से चल रही थी। मंदसौर के डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि 6400 हेक्टेयर में चीतों के लिए बड़े बाड़े बनकर तैयार हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी हैं। शुरुआत में चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। गांधीसागर अभयारण्य को अनुकूल बताया था बता दें कि केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी ने निरीक्षण के बाद दिल्ली में वन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में गांधीसागर अभयारण्य को चीतों के लिए पूरी तरह से अनुकूल बताया था, तो केंद्र सरकार ने यहां कूनो से ही चीते भेजने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों ने बाड़े, क्वारंटाइन बाड़ों, हाइमास्ट कैमरा, जलस्रोत मानीटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारी देखी हैं। बड़े जानवरों का शिकार नहीं कर सकता चीता चीता बड़े जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर सकता है। ऐसे में गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र में 1250 चीतल और हिरणों को चीतों के भोजन के लिए छोड़ने का लक्ष्य है। अभी तक करीब 472 हिरण-चीतल छोड़े गए हैं। भोपाल के वन विहार, नरसिंहगढ़ सेंचुरी और कान्हा टाइगर सफारी आदि स्थानों से हिरण व चीतल को पकड़कर यहां छोड़े जा रहे हैं।   recent visitors 36

मुख्यमंत्री ने जताई प्रवासी पक्षियों पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और रैप्टाईल्स व जल जीवों के संरक्षण के लिए कार्य योजना की आवश्यकता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन, आजीविका से सम्बद्ध विषय है। जनजातीय क्षेत्र में अपार वन संपदा उपलब्ध है। इसके प्रबंधन में ध्यान रखना होगा कि विकास से जनजातीय वर्ग के हित प्रभावित न हो। भारतीय जीवन पद्धति वनों पर आधारित रही है। वनों के प्रबंधन में औपनिवेशिक सोच से मुक्त होने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विरासत से विकास और प्रकृति को जोड़ते हुए प्रगति और प्रकृति में सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। पेसा एक्ट इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जीवन का आनंद समग्रता में है, और प्रकृति आधारित जीवन जीने से कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापना, जलवायु परिवर्तन और समुदाय आधारित आजीविका पर प्रशासन अकादमी में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भगवान बिरसा मुंडा और वीरांगना रानी दुर्गावती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। प्रदेश के महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में वनों की स्थिति में सुधार और वन प्रबंधन में नवाचार के लिए के लिए वन विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के संरक्षण से इको सिस्टम बेहतर हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर चीतों का पुनर्स्थापना हो पाया है। उन्होंने किंग कोबरा सहित रैप्टाइल्स की प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इससे सर्पदंश की घटनाओं में कमी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में विद्यमान जनजातीय समुदाय के पूजा और आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता होने पर केंद्र शासन से भी सहयोग प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश वन की दृष्टि से बहुत संपन्न है। प्रदेश में यद्यपि कोई ग्लेशियर नहीं है, किन्तु प्राकृतिक रूप से वनों से निकलने वाली जल राशि से ही प्रदेश से निकलने वाली बड़ी नदियां आकार लेती हैं। मध्यप्रदेश से निकली सोन, केन, बेतवा, नर्मदा नदियां देश के कई राज्यों में जल से जीवन पहुंचा रही हैं। बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश की प्रगति में प्रदेश के वनों से निकले इस जल का महत्वपूर्ण योगदान है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश के वन, पूरे देश के वन हैं। इन नदियों के संरक्षण और उनके निर्मल अविरल प्रवाह को बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश के वनों का संरक्षण और संवर्धन महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा समग्र के माध्यम से नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। अन्य नदियों पर भी कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार माना। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के बड़े क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता और सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल जीवों के संरक्षण पर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य प्राणियों के संरक्षण में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने प्रवासी पक्षियों पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को सरल और सुलभ बनाने के लिए आयोजित कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के साथ-साथ वन-पर्यावरण के संरक्षण में भी यह कार्यशाला उपयोगी सिद्ध होगी। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री यादव ने कहा कि हमें प्रकृति के संरक्षण के लिए समुदाय आधारित योजनाएं तैयार करने की जरूरत है। केन्द्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रकृति के संरक्षण के लिए एनवायरमेंट फ्रेंडली लाइफ पर ध्यान देने के लिए जनता को निरंतर प्रेरित कर रहे हैं। पृथ्वी पर निवासरत प्रत्येक व्यक्ति को ऊर्जा, अन्न और जल को सुरक्षित रखना होगा। पर्यावरण संरक्षण में सॉलिड वेस्ट और ई-वेस्ट मैनेजमेंट बड़ी चुनौती हैं। प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और स्वस्थ जीवन शैली अपनाना आवश्यक है।   recent visitors 45

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- इको सिस्टम के प्रॉपर डेवलपमेंट के लिए मध्यप्रदेश में वृहद स्तर पर काम हो रहा है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इको सिस्टम के प्रॉपर डेवलपमेंट के लिए मध्यप्रदेश में वृहद स्तर पर काम हो रहा है। वन्य पर्यटन हमारी अर्थव्यवस्था को गति देता है और अब यही हमारी समृद्धि का प्रवेश द्वार बन रहा है। हमारी सरकार कूनो राष्ट्रीय उद्यान को एक आदर्श वन्य प्राणी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी। प्रदेश में सिर्फ कूनो ही नहीं, अब मंदसौर जिले का गांधीसागर अभयारण्य भी चीतों से गुलजार होगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के सहयोग से आगामी 20 अप्रैल को गांधी सागर अभयारण्य में चीते छोड़े जाएंगे। कड़ी सुरक्षा में कूनो नेशनल पार्क से 2 चीते शिफ्ट कर गांधीसागर अभयारण्य में ले जाये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में पर्यटन तेजी से बढ़े, इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ग्वालियर से कूनो के लिए डायरेक्ट रोड और एयर कनेक्टिविटी भी विकसित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के साथ मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन संबंधी समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। भारत में जन्में चीता शावकों की सर्वाइवल रेट विश्व में है अधिकतम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दिए जाने पर हर्ष व्यक्त किया कि भारत (मध्यप्रदेश) में जन्में चीता शावकों की जीवन प्रत्याशा (सर्वाइवल रेट) पूरे विश्व में सर्वाधिक है। दूसरे देशों में चीता शावक जलवायु से अनुकूलन के अभाव में सर्वाइव नहीं कर पाते हैं। चीतों के लिए जरूरी जलवायु और वातावरण की दृष्टि से गांधीसागर अभयारण्य बेहद अनुकूल है, इसलिए सरकार यहां चीते छोड़कर इस अभयारण्य को भी चीतों से गुलजार करेगी। कूनो जुड़ेगा रोड टू एयर कनेक्टिविटी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के साथ मिलकर सबके सहयोग से हम चीतों का पुनर्वास करेंगे। ग्वालियर से कूनो नेशनल पार्क तक पक्की बारहमासी रोड बनाई जाएगी। कूनो में टेंट सिटी तैयार कर यहां आने वाले पर्यटकों को जंगल में प्रकृति के पास समय बिताने का सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वन मंत्री श्री यादव की मंशा के अनुरूप हम कूनो प्रक्षेत्र में इंटरनेशनल लेवल का एक पशु चिकित्सालय और रेस्क्यू सेंटर भी खोलेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार से भी मदद लेंगे। पशु चिकित्सालय के संचालन से कूनों के चीतों के इलाज के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र में गौवंश के उपचार में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के नेचर टूरिज्म सेक्टर में निहित असीम संभावनाओं को एक्सप्लोर करेगी। राज्य के अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को वन्य पर्यटन से जोड़ेंगे। चीता मित्र और महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को टूरिस्ट गाईड भी बनाएंगे, कूनो परिक्षेत्र में राज्य आजीविका विकास मिशन से दीदी कैफे संचालित किए जाएंगे, जिससे चीता मित्रों और महिलाओं को स्थानीय रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार किंग कोबरा और दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का भी करेगी संरक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की धरती पर चीतों के पुनर्वास से एक सदी का इंतजार खत्म हुआ है। राज्य सरकार किंग कोबरा, घड़ियाल और दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के संरक्षण के लिए भी प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार किंग कोबरा संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेश के जंगलों में जहरीले सांपों की संख्या नियंत्रित करने के लिए किंग कोबरा को बसाना आवश्यक है। पहले चरण में 10 किंग कोबरा मध्यप्रदेश लाने पर विचार हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन अधिकारियों को चंबल नदी से घड़ियाल और कछुओं को प्रदेश की 4 बड़ी नदियों और जलाशयों में पुर्नवासित करने के निर्देश दिए। चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने के लिए आईआईएफएम की लें सेवाएं : केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में बड़ी क्षमताएं विद्यमान हैं। उन्होंने कूनो में चीतों के पुनर्वास और वन टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की प्रशंसा की। केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने वन्य प्राणियों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में चल रहे वन्य प्राणियों की पुनर्वास परियोजनाओं की देखरेख के लिए वन, पर्यटन, पशु चिकित्सा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य एवं परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक टास्क फोर्स बनाया जाए। यह टास्क फोर्स नियमित रूप से सभी प्रोजेक्ट्स की निगरानी करें। उन्होंने कहा कि श्योपुर जिले के 80 गांवों के 400 चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल के साथ अनुबंध कर सकते हैं। चीता मित्रों को होम स्टे के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें नेचर टूरिज्म के लिए तैयार करने की दिशा में भी कार्य किए जाएं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कूनो के आसपास स्थित ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटकों के लिए विकसित किया जाए। कूनो में मौजूद एक पुराने किले को हेरिटेज वॉक के रूप में विकसित किया जा सकता है। मगरमच्छ और घड़ियाल के दीदार के लिए व्यू प्वाइंट्स बने, वन्य प्राणियों के रेस्क्यू के लिए सेंटर और पर्यटकों के लिए आयुर्वेदिक सेंटर तैयार किए जाएं। केन्द्रीय वन मंत्री श्री यादव ने कहा कि पर्यटन से रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कूनो समेत प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को सुविधाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को जोड़ा जाए। देश-विदेश से कूनो आने वाले पर्यटकों को आवास, भोजन, स्वच्छता से जुड़ी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अगर सुविधाएं विश्वस्तरीय होंगी, तो निश्चित रूप से दुनिया से टूरिस्ट चीता देखने के लिए पर्यटक कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर अभयारण्य आएंगे। बोत्सवाना से दो चरण में लाए जाएंगे 8 चीते बैठक में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से बताया गया कि देश में चीता प्रोजेक्ट पर अब तक 112 करोड़ रुपए से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है। इसमें से 67 प्रतिशत राशि मध्यप्रदेश में हुए चीता पुनर्वास पर व्यय हुई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत ही अब गांधीसागर अभयारण्य में भी चीते चरणबद्ध रूप से विस्थापित किए जाएंगे। गांधीसागर अभयारण्य राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए अंतर्राज्यीय चीता संरक्षण परिसर की स्थापना के लिए … Read more

एनएचएआई द्वारा सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम एक मई से लागू करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया: केंद्र सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें एक मई से राष्ट्रीय स्तर पर सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम लागू करने की बात कही गई थी। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि कुछ मीडिया हाउस की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एक मई से राष्ट्रीय स्तर पर सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम लागू हो जाएगा और यह मौजूदा फास्टैग आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम को रिप्लेस करेगा। मंत्रालय ने आगे कहा, "हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम एक मई से लागू करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है।" टोल प्लाजा पर वाहनों की निर्बाध, बिना किसी परेशानी के आवाजाही को सक्षम करने और यात्रा के समय को कम करने के लिए चुनिंदा टोल प्लाजा पर 'एएनपीआर-फास्टैग बेस्ट बैरियर-लैस टोलिंग सिस्टम' लागू किया जाएगा। मंत्रालय ने बताया कि यह एडवांस टोलिंग सिस्टम 'ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन' (एएनपीआर) टेक्नोलॉजी, जिसमें नंबर प्लेट से वाहनों की पहचान की जाती है और 'फास्टैग सिस्टम', जो कि रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) पर काम करता है, दोनों का मिश्रण होगा। इस सिस्टम के तहत वाहनों से टोल हाई परफॉर्मेंस वाले एएनपीआर कैमरा और फास्टैग रीडर्स के माध्यम से लिया जाएगा, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। मंत्रालय के मुताबिक, अगर वाहन चालक टोल पर भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें ई-नोटिस दिया जाएगा और उनका फास्टैग भी रद्द किया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर करीब 855 प्लाजा हैं, जिनमें से 675 सरकारी हैं, जबकि 180 या उससे अधिक निजी ऑपरेटरों द्वारा मैनेज किए जाते हैं। इस महीने की शुरुआत में, एनएचएआई ने बढ़ती लागतों के कारण देश भर में राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के टोल शुल्क में औसतन 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि की थी। recent visitors 43

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि टेली-मेडिसिन सेवा दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं के प्रदाय का सशक्त माध्यम है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में टेली-मेडिसिन सेवा का शुभारंभ किया। इस सेवा से रीवा और सीधी जिलों के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों का परामर्श प्राप्त होगा। इस सेवा के तहत अब संजय गांधी अस्पताल, रीवा के मेडिसिन, शिशु रोग (पेडियाट्रिक्स) तथा स्त्री रोग (गायनी) विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को फोन या अन्य संचार माध्यमों से जरूरी परामर्श देंगे। इससे उन मरीजों को तुरंत लाभ मिलेगा जिन्हें विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता होती है। अब ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए ज़िला मुख्यालय आने की आवश्यकता विशेष परिस्थितियों में ही पड़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह सेवा न सिर्फ मरीजों की यात्रा की आवश्यकता को कम करेगी, बल्कि समय, धन और संसाधनों की भी बचत करेगी। साथ ही, इससे प्राथमिक स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों को विशेषज्ञों की मदद से त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने में सुविधा होगी। इससे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान व इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टेली-मेडीसिन सेवा का प्रभावी उपयोग "सशक्त व स्वस्थ मध्यप्रदेश" के विजन को धरातल पर उतारने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेली-मेडिसिन कक्ष की व्यस्थाओं का अवलोकन किया एवं विधिवत संचालन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वे अगले सप्ताह प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे। डीन मेडिकल कॉलेज रीवा डॉ. सुनील अग्रवाल सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित थे।   recent visitors 35

मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने सीजीएमएससी सप्लाई चैन मैनेजमेंट एसओपी का विमोचन किया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) के नव नियुक्त अध्यक्ष दीपक म्हस्के के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए और मुख्य अतिथि की आसंदी से उन्हें शुभकामनाएं दी। इस दौरान मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने सीजीएमएससी सप्लाई चैन मैनेजमेंट एसओपी का विमोचन किया।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) की स्थापना वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में हुई थी। इस संस्था की भूमिका राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और आवश्यक दवाओं व उपकरणों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। आज यह कॉरपोरेशन केवल आपूर्ति एजेंसी नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।              मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि दीपक म्हस्के  पूर्व में केमिस्ट्री विषय के शिक्षक रहे हैं। यह अनुभव अब उनके नेतृत्व में सीजीएमएससी के कार्यों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बल देगा, जिससे प्रदेश की जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी राज्य स्थापना का रजत जयंती मना रहा है। वर्ष 2000 में जब राज्य का गठन हुआ, तब से लेकर अभी तक प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बेहतर हुई हैं। प्रदेश में एम्स जैसे संस्थान कार्यरत है और 13 मेडिकल कॉलेजों की भी स्थापना हो चुकी है, जो राज्य सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रतिबद्धता का प्रमाण है।          मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य किसी भी नागरिक की सबसे बड़ी पूंजी होती है और इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों गरीब परिवारों को निःशुल्क इलाज की सुविधा दी है। छत्तीसगढ़ में भी लाखों परिवार इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री स्वयं ऊर्जावान और सक्रिय हैं और अब कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी दीपक महस्के जैसे कर्मठ और योग्य व्यक्ति को मिली है, तो निश्चित रूप से सीजीएमएससी प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने संबोधन के अंत में महस्के को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनका कार्यकाल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाएगा।                      विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जेनेरिक दवाइयां, सर्जिकल सामग्री, मेडिकल उपकरणों की समय से उपलब्धता और आधारभूत स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती के उद्देश्य के साथ वर्ष 2010 में इस कॉर्पोरेशन का गठन हुआ था। डॉ. सिंह ने कहा कि म्हस्के  जैसे योग्य, ईमानदार, दूरदर्शी और काबिल हाथों में इस कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई और वे अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में सफल होंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ सिंह ने म्हस्के को नए दायित्व मिलने पर अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने संबोधित कर सीजीएमएससी के कार्य, स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।          इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, विधायक किरण देव, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, विधायक रोहित साहू, विधायक इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे,  मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित निगम मंडलों के अध्यक्ष गण, जनप्रतिनिधिगण और अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। recent visitors 41

श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल, PM मोदी ने दी शुभकामनाये

नई दिल्ली  श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (Memory of the World Register) में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। यूनेस्को ने गुरुवार को जिन 74 नई प्रविष्टियों को इस रजिस्टर में जोड़ा है, उनमें ये दोनों महत्वपूर्ण ग्रंथ भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस रजिस्टर में कुल 570 संग्रह हो गए हैं। पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, श्रीमद्भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र का यूनेस्को में शामिल होना हमारी शाश्वत परंपरा, गहन ज्ञान और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे कहा कि गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से मानव सभ्यता, चेतना और सांस्कृतिक विकास को दिशा दी है। इनकी शिक्षाएं आज भी दुनियाभर के लोगों को प्रेरणा देती हैं। गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, भारत की सांस्कृतिक धरोहर को यह वैश्विक सम्मान मिलना अत्यंत गौरवपूर्ण है। अब यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में भारत के 14 अभिलेख दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गीता और नाट्यशास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, कलात्मकता और सभ्यता के स्तंभ हैं।  यूनेस्को की इस सूची में जिन अन्य 74 संग्रहों को स्थान मिला है, उनमें दासता, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक महिलाओं से जुड़ी सामग्री, जिनेवा कन्वेंशन (1864–1949), और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज भी शामिल हैं। इनमें से 14 संग्रहों को वैज्ञानिक दस्तावेजी धरोहर के रूप में मान्यता दी गई है। यह फैसला न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा।   recent visitors 40