मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी 2.लाख पद कर्मचारियों के प्रमोशन से होंगे खाली, तीन सालों में लोक सेवा आयोग और ईएसबी से होगी भर्ती

भोपाल. मध्यप्रदेश के उन युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है जो सरकारी नौकरी करना चाहते हैं या तो उसकी तैयारी कर रहे हैं. एमपी की मोहन सरकार ने इसके लिए बड़ा कदम उठाया है. मध्यप्रदेश में पिछले 8 साल से सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के रुके हुए प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है. एमपी में आने वाले कुछ महीनों में शासकीय सेवाओं में कर्माचारियों का प्रमोशन होगा. जिसके बाद लगभग 2.03 लाख पद कर्मचारियों के प्रमोशन के चलते खाली होंगे. जिसपर प्रदेश सरकार अगले तीन सालों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और ईएसबी से भर्ती कराएगी. मध्यप्रदेश में एसटी, एससी, ओबीसी और जनरल के लगभग 4 लाख सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन पिछले 8 साल से रुका था, जिसका रास्ता प्रदेश की मोहन सरकार ने हाई लेवल बैठक में साफ कर दिया है. इस प्रमोशन में लगभग 4 लाख शासकीय कर्मचारी प्रमोट होंगे. इसको लेकर सरकार का प्लान है कि, जिस वर्ग में भर्ती होगी उसी में प्रमोशन दिया जायेगा. 3 साल में एमपी में होंगी 2 लाख भर्ती एमपी में सरकारी कर्मचारियों के 8 साल से अटके प्रमोशन की घोषणा होने के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 में एक-एक लाख पदों पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती प्रक्रिया निकालेगी. इसको लेकर राज्य सरकार का पूरा एक्शन प्लान भी तैयार है. मुख्य सचिव देखेंगे भर्ती प्रक्रिया एमपी में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन के बाद कई विभागों में नीचे के पद खाली होंगे. जिसपर प्रदेश सरकार भर्ती करेगी. एमपी में अगले तीन साल में 2 लाख पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया की तैयारी सीधे मुख्य सचिव अनुराग जैन और अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय दुबे के अंडर होगी. इसको लेकर सरकार का एक्शन प्लान भी रेडी है और रिक्त पदों पर डिटेल्ड रिपोर्ट भी एमपी सरकार ने तैयार करवा ली है.   recent visitors 59

Ladli Behna Yojana 23th Installment की तारीख हुई कन्फर्म, इस दिन 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में आएंगे 1250 रुपये

भोपाल मध्य प्रदेश में लाडली बहनों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि मोहन सरकार ने 23वीं किस्त का ऐलान कर दिया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव रविवार, 16 अप्रैल को सिंगल क्लिक से प्रदेश की 1.26 करोड़ लाडली बहनों के खाते में 1250 रुपये ट्रांसफर करेंगे. सीएम मोहन यादव 23वीं किस्त मण्डला जिले के ग्राम टिकरवारा से जारी करेंगे. 16 अप्रैल को CM सिंगल क्लिक से ट्रांसफर करेंगे 23वीं किस्त मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इसकी जानकारी दी है. उन्होंने लिखा, 'खुशहाल बहनें, समृद्ध मध्य प्रदेश… नारी सशक्तीकरण का पर्याय बनी लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त ग्राम टिकरवारा, जिला मण्डला से बहनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी. प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों को अग्रिम शुभकामनाएं.' इन महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे 1250 रुपये इस बार मध्य प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक लाडली बहना योजना से 3 लाख 19 हजार 991 लाभार्थियों के नाम काट दिए गए हैं, क्योंकि इन लाभार्थी महिलाओं की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो गई है. यह जानकारी विधानसभा में महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने दी है. 1.26 करोड़ लाडली बहनाओं के खातों में आएंगे 1250 रुपये बुधवार, 16 अप्रैल को सीएम मोहन यादव मंडला जिले के टिकरवारा गांव पहुंचेंगे और सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल होंगे, जहां 1100 लड़कियों की शादियां होगी. CM मोहन यादव मंडला जिले के टिकरवारा गांव से लाडली बहना योजना के तहत सिंगल क्लिक के जरिए प्रदेशभर की लगभग 1.26 करोड़ लाडली बहनाओं के बैंक खातों में 1250 रुपये की राशि जारी करेंगे. बता दें कि मध्य प्रदेश में लाडली बहनों को 23वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि हर महीने 10 तारीख को किस्त जारी हो जाती है. हालांकि इस बार किस्त आने में थोड़ी देरी हो गई. इस योजना का लाभ मध्य प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिलता है, जहां सभी के खाते में 1250 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है. मध्य प्रदेश में कब शुरू हुई लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जनवरी, 2023 को लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की शुरुआत की थी. हालांकि शुरुआती महीनों में लाडली बहनों के खातें में सिर्फ 1000 रुपये ही ट्रांसफर किए जाते थे, लेकिन बाद में योजना की राशि बढ़ाकर 1250 रुपये कर दी गई. recent visitors 68

बस्तर अब विकास और पर्यटन की नई राह पर बढ़ चला, जम्मू-कश्मीर मॉडल पर होम स्टे पॉलिसी लागू करने की तैयारी

रायपुर कभी माओवादियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहा बस्तर अब विकास और पर्यटन की नई राह पर बढ़ चला है। राज्य सरकार यहां जम्मू-कश्मीर मॉडल पर होम स्टे पॉलिसी लागू करने की तैयारी में है। सरकार का उद्देश्य बस्तर को पर्यटन का केंद्र बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है, ताकि आर्थिक मदद प्राप्त हो सके। पॉलिसी के तहत आदिवासी गांवों में छोटे-छोटे पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ग्रामीणों को उनके घर के अतिरिक्त एक और घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। पर्यटक इन घरों में ठहरेंगे, स्थानीय व्यंजन खाएंगे और गांव की संस्कृति को करीब से जानेंगे। इससे ग्रामीणों की आय में इजाफा होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा। बताते चलें कि एक होम स्टे विकसित करने में औसतन एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल इसकी डिजाइन खुद तैयार करेगा। इससे ग्रामीणों के रोजगार का नया रास्ता मिलेगा और प्रदेश के पर्यटन को पंख लगेंगे। बस्तर, सरगुजा के बाद अन्य जिलों में विस्तार पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने बताया कि केंद्र से प्रस्ताव स्वीकृत होते ही योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा। ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाएगी और इच्छुक लोगों का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद उन्हें होम स्टे निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। चित्रकोट और धुड़मारास जैसे गांवों होंगे विकसित बस्तर जिले के चित्रकोट और धुड़मारास गांवों को हाल ही में ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज 2024’ प्रतियोगिता में विशेष सम्मान मिला है। यह सम्मान केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदान किया। धुड़मारास गांव अपनी एडवेंचर गतिविधियों के लिए लोकप्रिय है। वहीं, चित्रकोट जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सरकार अब ऐसे अन्य गांवों की पहचान कर रही है जो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। छोटेबोडाल : बस्तर का पहला मिलिस्टिक विलेज होम स्टे बस्तर जिले में होम स्टे की शुरुआत सबसे पहले छोटेबोडाल गांव से हुई। यह गांव नांगूर के पास स्थित है और बस्तर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। यहां 2007 में शकील रिजवी ने जिले का पहला होम स्टे शुरू किया, जो तीन कमरों वाला एक पारंपरिक मिट्टी का घर है। इस घर में 12 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल ग्रामीण परिवेश का आनंद लेते हैं, बल्कि आदिवासी जीवनशैली, परंपराएं, और स्थानीय वनस्पतियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं। पर्यटन मंडल कर रहा विस्तार की तैयारी बस्तर में वर्तमान में 27 होम स्टे चल रहे हैं। चित्रकोट के आस-पास के गांवों में भी जिला प्रशासन की मदद से होम स्टे विकसित किए गए हैं। यह ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत बन रहा है। माओवाद सिमटा, सुरक्षित हुए पर्यटन क्षेत्र बस्तर के कोंडागांव और बस्तर जिले माओवादी प्रभाव से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे जिलों में अब भी कुछ हद तक नक्सली गतिविधियां हैं। मगर, राज्य सरकार की रणनीति और सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से हालात तेजी से बदल रहे हैं। अब पर्यटन विभाग का फोकस उन क्षेत्रों पर है जो अब सुरक्षित हो चुके हैं। recent visitors 60

मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क के बाद अब 3 कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने की तैयारी की जा रही

भोपाल  मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क के बाद अब 3 कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने की तैयारी की जा रही है. इन कंजर्वेशन रिजर्व के बाद वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का रास्ता भी खुल जाएगा. कंजर्वेशन रिजर्व के लिए वन विभाग राज्य शासन को प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए भेज चुका है. कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. रिजर्व क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों को विस्थापित नहीं किया जाएगा, बल्कि इनकी मदद से ही कंजर्वेशन रिजर्व में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम होगा. मध्य प्रदेश में तीन कंजर्वेशन रिजर्व बनेंगे मध्य प्रदेश में 3 कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने की तैयारी चल रही है. यह कंजर्वेशन रिजर्व प्रदेश के बैतूल, राघोगढ़ और बालाघाट में बनाया जाएगा. बैतूल में कंजर्वेशन रिजर्व बनने से वाइल्डलाइफ कॉरिडोर तैयार हो जाएगा. क्योंकि बैतूल जिले के एक तरफ नर्मदापुरम जिले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व है, जबकि दूसरी तरह महाराष्ट्र के अमरावती जिले में मलेघाट टाइगर रिजर्व. इसी तरह बालाघाट में एक कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने की तैयारी है. इसके बनने से डूंगरगढ़ रिजर्व फॉरेस्ट और कान्हा नेशनल पार्क के बीच कॉरिडोर तैयार हो जाएगा. इसी तरह राघोगढ़ के पास भी कंजर्वेशन रिवर्ज बनाया जाएगा. प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन के मुताबिक "कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है. इसकी मंजूरी के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी." अभ्यारण्य से कैसे अलग होता है कंजर्वेशन रिजर्व जब किसी वनक्षेत्र को अभ्यारण्य घोषित किया जाता है तो उसमें किसी भी तरह की मानव गतिविधियों की अनुमति नहीं होती. ऐसे में इन क्षेत्रों के गांवों को भी विस्थापित किया जाता है. इसमें में स्थानीय समुदायों की नाराजगी भी सामने आती है, क्योंकि ये लोग जंगल में रहकर खेती करते हैं और जंगल पर ही निर्भर रहते हैं. वहीं, कंजर्वेशन रिजर्व ऐसा किसी 2 टाइगर रिजर्व या अभ्यारण्य के बीच का हिस्सा होता है, जिसमें गांव के लोग रहते हैं. इसके आसपास के वन क्षेत्र में कंजर्वेशन रिजर्व बनाया जाता है. इसका संचालन स्थानीय लोगों की समिति और वन विभाग द्वारा किया जाता है. इसमें स्थानीय लोगों को कई तरह के छूट के प्रावधान भी होते हैं. तमिलनाडु में बना पहला कंजर्वेशन रिजर्व वन्यजीवन संरक्षण संशोधन अधिनियम 2002 में कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जाने का प्रावधान किया गया और कंजर्वेशन रिजर्व को कानूनी मान्यता दी गई. इसके बाद देश में पहला कंजर्वेशन रिजर्व 14 फरवरी 2005 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थिति तिरुप्पदईमारथुर संरक्षण रिजर्व बनाया गया. इस 7 एकड़ क्षेत्र में कई संरक्षित पक्षियों की प्रजातियां हैं. जिसकी स्थानीय रहवासी और वन विभाग मिलकर देखरेख करते हैं. इसके बाद वर्ष 2012 में राजस्थान में जवाई बांध वनों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया. recent visitors 53

देशभर में युवाओं को रोजगार देने में एमपी व यूपी आगे गेट की जारी स्किल्स रिपोर्ट में हुआ खुलासा

भोपाल देशभर में महिलाओं के लिए रोजगार संसाधन उपलब्ध कराने के मामले में राजस्थान सबसे आगे है। राज्य में महिलाओं के लिए 89.38 फीसदी रोजगार संसाधन उपलब्ध हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर गुजरात (71.43 फीसदी), तीसरे पर दिल्ली (51.85 फीसदी) और चौथे पर केरल (51.25 फीसदी) है। इसके साथ ही क्रिटिकल थिंकिंग के मामले में राजस्थान 43 फीसदी के साथ दूसरे और मध्य प्रदेश 42 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है। इस मामले में उत्तर प्रदेश (45 फीसदी) सबसे आगे हैं। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट-2025 में राज्यों की यह तस्वीर निकलकर सामने आई। गेट की जारी स्किल्स रिपोर्ट में हुआ खुलासा ईटीएस व्हीबॉक्स वैश्विक रोजगार योग्यता परीक्षण (गेट) द्वारा जारी स्किल्स रिपोर्ट में पहली बार राज्यों की कौशल क्षमता की जानकारी सामने आई है। गेट यानी ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट एक प्रतिष्ठित मूल्यांकन है, जिसे भारत और विश्वभर के छात्रों और पेशेवरों के रोजगार कौशल का मूल्यांकन करने और उसे बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। गणितीय कौशल : यूपी सबसे आगे, मध्य प्रदेश नंबर-2 पर गणितीय कौशल के मामले में देशभर में उत्तर प्रदेश के युवा सबसे आगे हैं। यूपी के 80.12 फीसदी और मध्य प्रदेश के 74.26 फीसदी युवा गणित में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इसके बाद पंजाब (73.80 फीसदी) और आंध्र प्रदेश (71.98 फीसदी) का नंबर है। रोजगार उपलब्ध कराने में महाराष्ट्र नंबर-1 रोजगार की कसौटी पर महाराष्ट्र नंबर वन है। प्रदेश की रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता 84 फीसदी है। दूसरे नंबर पर 78 फीसदी के साथ दिल्ली और तीसरे नंबर पर कर्नाटक (75 फीसदी) है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (72 फीसदी), केरल (71 फीसदी) और उत्तर प्रदेश (70 फीसदी) का नंबर आता है। युवाओं को रोजगार – यूपी व एमपी आगे 18 से 21 साल के युवाओं को रोजगार देने के मामले में 92.20 फीसदी के के साथ यूपी नंबर एक पर है। वहीं 91.15 फीसदी के साथ मध्य प्रदेश नंबर दो पर है। इसके बाद कर्नाटक (81.89 फीसदी) का नंबर है। इन शहरों में सर्वाधिक रोजगार सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया कराने वाले प्रमुख शहरों में पुणे, बेंगलूरु, मुंबई, दिल्ली, त्रिशूर, हैदराबाद, गुंटूर और लखनऊ शामिल है। रोजगार : किस क्षेत्र में कितनी संभावना एमबीए – 78 फीसदी बीई/बीटेक – 71.50 फीसदी एमसीए – 71 फीसदी बीएससी – 58 फीसदी बी.फॉर्मा – 56 फीसदी बीकॉम – 55 फीसदी बीए – 54 फीसदी आइटीआइ – 41 फीसदी पॉलिटेक्निक – 29 फीसदी। देश में सबसे ज्यादा जीएसडीपी विकास दर मुख्यमंत्री ने 1412 दिव्यांगजनों और 1040 वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ वितरित किया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश का जीएसडीपी विकास दर देश में सबसे ज्यादा 13% है। जानें जीएसडीपी क्या है GSDP का मतलब है ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट। यह राज्य की अर्थव्यवस्था की सेहत बताता है। जैसे किसी व्यक्ति की सेहत अच्छी होने पर वो तेजी से बढ़ता है, वैसे ही अच्छी GSDP दर राज्य के विकास को दर्शाती है। खेलकूद को बढ़ावा देने बड़ी सौगात खेलों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बालाघाट में एक नए एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान का उद्घाटन किया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। हाल ही में उत्तराखंड में हुए राष्ट्रीय खेलों में मध्य प्रदेश को तीसरा स्थान मिला, जिसकी उन्होंने सराहना की। इन योजनाओं को मिला लाभ प्रदेश में अधिक औद्योगिक निवेश लाकर नियोजन के अवसरों में वृद्धि की जा रही है। आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से स्व रोजगार हेतु विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत ऋण एवं अन्य सुविधाएं मिल रही है। नए क्षेत्रों जैसे-वन, पर्यटन, श्रम, खनिज, सहकारिता आदि में रोजग़ार के अवसर सृजित हो रहे हैं। रोजगार के लिए हमारी 8 सूत्रीय रणनीति है। नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन कर कक्षा 6वीं से ही रोजगार मूलक शिक्षा प्रदान की जाए। शिक्षा और उद्योग जगत की मांग में गैप को भरने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कौशल प्रशिक्षण दिया जाए। रोजगार चाहने वालों को नियोक्ताओं से जोडऩे के लिए ऑनलाईन प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर रोजगार मेलों का नियमित आयोजन होगा। सरकारी भर्तियों के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। नहीं हुआ था आर्थिक मंदी का असर कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी देशव्यापी आर्थिक मंदी से मप्र की अर्थव्यवस्था अछूती रही। तब भी मप्र में बेरोजगारी दर पूरी तरह नियंत्रित रही। नए आंकड़ों के मुताबिक मप्र 1.4 प्रतिशत के साथ सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में दूसरेे स्थान पर है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर 7.5 प्रतिशत है। शहरी बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत और ग्रामीण बेरोजगारी 7.1 प्रतिशत है।  यूपी के युवा गणित में देश भर में सबसे तेज यूपी के 80 फीसदी युवा गणितीय कौशल और कम्यूटर दक्षता में देश भर में नंबर वन हैं। लेकिन, अंग्रेजी में तीसरे नंबर पर हैं। इसमें महाराष्ट्र शीर्ष स्थान पर है। रोजगार संसाधन के मामले में यूपी 18 से 25 वर्ष के युवाओं की फेहरिस्त में शीर्ष स्थान पर है। 26 से 29 वर्ष की श्रेणी में तीसरे स्थान पर है। इंटर्नशिप करने के इच्छुक युवाओं ने तमिलनाडु के बाद यूपी को चुना है। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट-2025 में राज्यों की यह तस्वीर निकलकर सामने आई। अंग्रेजी के मामले में महाराष्ट्र शीर्ष स्थान पर ईटीएस व्हीबॉक्स वैश्विक रोजगार योग्यता परीक्षण (गेट) द्वारा जारी स्किल्स रिपोर्ट में पहली बार राज्यों की कौशल क्षमता की जानकारी सामने आई है। गेट यानी ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट एक प्रतिष्ठित मूल्यांकन है जिसे भारत और विश्व बाहर छात्रों और पेशेवरों के रोजगार कौशल का मूल्यांकन करने और उसे बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। कौशल परीक्षण श्रेणी में अंग्रेजी के मामले में महाराष्ट्र शीर्ष स्थान पर है। दूसरे स्थान पर कर्नाटक और तीसरे पर उत्तर प्रदेश है। वहीं गणितीय कौशल में यूपी ने आंध्र प्रदेश को पीछे कर पहला स्थान पर प्राप्त किया है। तीसरे पर मध्य प्रदेश, चौथे पर पंजाब, पांचवें पर तेलंगाना काबिज हैं। आलोचनात्मक सोच कौशल (क्रिटिकल थिंकिंग) में भी यूपी के युवा शीर्ष पर हैं। दूसरे नंबर पर राजस्थान और तीसरे पर मध्य प्रदेश है। वहीं यूपी के युवाओं ने कम्प्यूटर स्किल में भी देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। रोजगार उपलब्ध कराने में यूपी छठे … Read more

शिवराज सिंह चौहान ने कहा “देश में किसानों की मेहनत को सम्मान देने केंद्र सरकार ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत

विदिशा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  विदिशा जिले के बेस नगर स्थित अपने फार्म हाउस में जाकर अपनी किसान आईडी (Farmer ID) बनवाई. उन्होंने इसे किसानों की "डिजिटल पहचान" बताते हुए सभी किसानों से अपील की कि वे भी जल्द से जल्द अपनी किसान आईडी बनवाएं और डिजिटल कृषि मिशन का लाभ उठाएं. डिजिटल क्रांति की ओर कृषि क्षेत्र का कदम शिवराज सिंह चौहान ने कहा "देश में किसानों की मेहनत को सम्मान देने और उन्हें समुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत की है. इसके तहत एग्री स्टैक (Agri Stack) प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसके अंतर्गत किसानों की एक समेकित रजिस्ट्री बनाई जा रही है." क्या है किसान ID? किसान ID एक डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान के व्यक्तिगत विवरण, ज़मीन से संबंधित जानकारी, बोई गई फसलें, मृदा स्वास्थ्य, पशुधन, मत्स्य पालन आदि की विस्तृत जानकारी शामिल होगी. अब तक जुड़ चुके हैं साढ़े पांच करोड़ से ज्यादा किसान देश भर में अब तक 5.5 करोड़ से अधिक किसानों की ID बन चुकी है. वहीं मध्य प्रदेश में अब तक 78 लाख किसानों की ID तैयार की जा चुकी है. राज्य सरकार इसे जल्द ही 100% तक पहुंचाने के प्रयास में जुटी है. किसानों का डेटा सुरक्षित केंद्रीय कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसान रजिस्ट्री में दर्ज जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी. किसान की अनुमति के बिना कोई भी डेटा साझा नहीं किया जाएगा. साथ ही किसान जब चाहें इसे अपनी सहमति वापस भी ले सकते हैं. डिजिटल सेवा सभी किसानों के लिए हालांकि स्मार्टफोन और इंटरनेट अब गांवों तक पहुंच चुके हैं, फिर भी जिन किसानों के पास यह सुविधा नहीं है, उनके लिए भी सरकार ने कदम उठाए हैं. किसान उत्पादक संगठन (FPO), कृषि सखियों और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद से किसान ID बनाई जा सकती है. इसके अलावा, राज्य सरकार विशेष शिविरों का भी आयोजन कर रही है. केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, "मैं सभी किसानों से अनुरोध करता हूं कि वे समय रहते अपनी किसान ID बनवाएं और सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं. यह डिजिटल परिवर्तन किसानों के लिए एक नए युग की शुरुआत है." recent visitors 64

MP Board की 10वीं व 12वीं परीक्षा का रिजल्ट आएगा मई के पहले सप्ताह

भोपाल. मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं परीक्षा का परिणाम मई के प्रथम सप्ताह में जारी कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को परीक्षा परिणाम मई के पहले सप्ताह में जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) परिणाम तैयार करने में जोर-शोर से लगा हुआ है। अभी बोर्ड परीक्षा की 80 प्रतिशत उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने बदला था परीक्षा के परिणामों का समय मंडल ने मई के दूसरे सप्ताह में परिणाम घोषित करने की तैयारी की थी, लेकिन हाल में मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में 10वीं व 12वी का परिणाम मई के पहले सप्ताह में जारी करने के आदेश दिए। परिणाम बनाने में लगेगा 10 दिन का समय बता दें, इस वर्ष मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं दोनों कक्षाओं के 17 लाख विद्यार्थियों की करीब 90 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य चल रहा है। मंडल ने मूल्यांकन कार्य खत्म करने का लक्ष्य 25 अप्रैल तय किया है। उसके बाद मंडल को परिणाम बनाने में करीब 10 दिन का समय लगेगा। कुछ जिले उमरिया, सिंगरौली, आगर-मालवा, शहडोल, देवास, डिंडौरी, श्योपुर में 10वीं की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 60 फीसद तक भी नहीं हो पाया है। इसी तरह 12वीं में डिंडौरी, उमरिया व मंडला, भोपाल में 70 प्रतिशत मूल्यांकन हुआ है। वहीं छिंदवाड़ा, धार, रीवा, सिवनी, आलीराजपुर में मूल्यांकन कार्य अंतिम चरण में है। 80 प्रतिशत तक पूरा हुआ मूल्यांकन का काम केडी त्रिपाठी, सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल ने कहा कि कक्षा 10वीं व 12वीं की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। जिन जिलों में मूल्यांकन की रफ्तार धीमी है, उन्हें कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं, जिससे मई के प्रथम सप्ताह में परिणाम घोषित किया जा सकें। recent visitors 93