CG हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, संविदा कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता

बिलासपुर  संविदा कर्मियों के लिए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर मातृत्व अवकाश (Maternity leave) का वेतन देने से इनकार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने स्टाफ नर्स को अवकाश अवधि का वेतन देने के निर्देश दिए हैं. न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने राज्य प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता द्वारा दायर मातृत्व अवकाश के वेतन संबंधी दावा पर तीन माह के भीतर नियमानुसार निर्णय लें. न्यायालय ने कहा कि मातृत्व और शिशु की गरिमा के अधिकार को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है. इसे प्रशासनिक अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर नहीं किया जा जा सकता. कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा मातृत्व अवकाश वेतन की मांग पर नियमानुसार तीन माह के माह के भीतर निर्णय लिया जाए. याचिकाकर्ता राखी वर्मा, जिला अस्पताल कबीरधाम में स्टाफ नर्स के रूप में संविदा पर कार्यरत हैं. उन्होंने 16 जनवरी 2024 से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था. इसे स्वीकृत कर लिया गया. उन्होंने 21 जनवरी 2024 को एक कन्या को जन्म दिया और 14 जुलाई 2024 को पुनः ड्यूटी ज्वाइन की. इसके बावजूद, उन्हें मातृत्व अवधि का वेतन नहीं दिया गया. इससे उन्हें और उनके नवजात को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ा. उन्होंने 25 फरवरी 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को वेतन की मांग का आवेदन प्रस्तुत किया. कार्रवाई न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 38 के अंतर्गत मातृत्व अवकाश एक विधिक अधिकार है, जो संविदा कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होता है. याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व में दिए गए कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें संविदा कर्मचारियों को मातृत्व लाभ दिये जाने की पुष्टि की गई थी. उन्होंने यह भी तर्क रखा कि वेतन न देना अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि यह स्थायी व अस्थायी कर्मचारियों के मध्य अनुचित भेदभाव को जन्म देता है. राज्य की ओर से महाधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता संविदा पर नियुक्त थीं और उन्हें स्थायी कर्मचारियों की भांति लाभ प्राप्त करने का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य मातृत्व की गरिमा की रक्षा करना है, ताकि महिला व उसके बच्चे का पूर्ण व स्वस्थ विकास हो हो सके. संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में मातृत्व का अधिकार और प्रत्येक बच्चे के पूर्ण विकास का अधिकार भी सम्मिलित है.सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है. और इसे केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता. कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा अवकाश नियम, 2010 के नियम 38 एवं अन्य लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार शासन को विचार करने और आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से तीन माह के भीतर इस संबन्ध में उपयुक्त निर्णय पारित करने के निर्देश दिए. recent visitors 43

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर साधा निशाना, बोले – कांग्रेस का मॉडल फेल साबित हो रहा

हरियाणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुनानगर में 800 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट की यूनिट और कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शिलान्यास किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाने साधे। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस का मॉडल है जो पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है, दूसरी तरफ भाजपा का मॉडल है, जो सत्य पर चल रहा है। सपना है देश को विकसित भारत बनाने का। यमुनानगर भी इसी तर्ज पर आगे बढ़ रहा है। नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि हरियाणा के मेरे भाई-बहनों को मोदी की राम-राम साथियों, आज मैं उस धरती को प्रणाम करता हूं, जहां मां सरस्वती का उद्गम हुआ। जहां मंत्रा देवी विराजती हैं। जहां पंचमुखी हनुमान जी हैं। जहां कपाल मोचन साहिब का आशीर्वाद है। जहां संस्कृति, श्रद्धा, समर्पण की त्रिवेणी बहती है। आज बाबा साहब आंबेडकर जी की 135वीं जयंती भी है। मैं सभी देशवासियों को आंबेडकर जयंती की शुभकामनाएं देता हूं। बाबा साहब का विजन, उनकी प्रेरणा, निरंतर विकसित भारत की यात्रा में हमें दिशा दिखा रही है। कहा कि यमुनानगर सिर्फ एक शहर नहीं है, यह भारत के औद्योगिक नक्शे का अहम हिस्सा है। प्लाईवुड से लेकर पीतल और स्टील का यह पूरा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। कपाल मोचन मेला, वेद व्यास की तपोभूमि और गुरु गोविंद सिंह की एक प्रकार से शस्त्र भूमि है। साथियों, यह अपने आप में एक गरिमा बढ़ाने वाली बात है। यमुनानगर के साथ तो मेरी कई पुरानी यादें जुड़ी हुई हैं। जब मैं हरियाणा का प्रभारी था, तो पंचकूला से यहां आना-जाना लगा रहता था। यहां काफी पुराने कार्यकर्ताओं के साथ काम किया। बाबा साहब ने भारत में छोटी जोतों की समस्या को पहचाना था- पीएम मोदी ने कहा कि हमारी यह परंपरा आज भी चल रही है। हरियाणा लगातार तीसरी बार डबल इंजन की सरकार की रफ्तार देख रहा है। अब तो सैनी जी कह रहे हैं कि अब यहां ट्रिपल इंजन की सरकार है। हरियाणा के लोगों की सेवा के लिए, यहां के युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए हम ज्यादा गति से, ज्यादा बड़े स्केल पर काम करते रहते हैं। आज यहां शुरू हुई विकास परियोजनाएं भी इसी का उदाहरण हैं। मैं हरियाणा के लोगों को इन विकास परियोजनाओं के लिए बधाई देता हूं। साथियों, मुझे गर्व है कि हमारी सरकार बाबा साहब के विचारों को आगे बढ़ाते हुए चल रही है। बाबा साहेब ने उद्योगों के विकास को सामाजिक न्याय का मार्ग बताया था। बाबा साहेब ने भारत में छोटी जोतों की समस्या को पहचाना था। वे कहते थे कि दलितों के पास खेती के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इसलिए दलितों को उद्योगों से फायदा होगा। भाजपा सरकार भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर दे रही बल- पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर इतना बल दे रही है, इस साल के बजट में इसको लेकर हमने घोषणा भी की है। इसका मतलब है कि देश के पिछड़े लोगों और युवाओं को अधिक से अधिक फायदा मिले। एमएसएमई सेक्टर में भी इस पर काम होगा। हमारे उत्पाद दुनिया में सबसे बेहतरीन हों, इस पर हम काम कर रहे हैं। इसके लिए ऊर्जा बहुत जरूरी है, हमें बिजली पर भी आत्मनिर्भर होना ही होगा। इसके लिए यहां तीसरी इकाई का शुभारंभ हुआ है। इसका फायदा यहां के लोगों को होगा। भारत में जितना औद्योगिक विकास, जैसे प्लाईवुड बनता है, उसका आधा तो हरियाणा में ही बनता है। यहीं से पेट्रोकेमिकल प्लांट के उपकरण दुनिया के कई देशों में भेजे जाते हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ावा होने से उद्योगों को खूब फायदा होगा। घरों में सोलर पैनल लगाकर बिजली का बिल शून्य कर सकते- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार बिजली को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। 2014 से पहले जब कांग्रेस की सरकार थी, वे दिन भी देखे हैं, जब पूरे देश में ब्लैकआउट होते थे। कांग्रेस की सरकार यदि रहती तो देश को आज भी ऐसे ही ब्लैकआउट से गुजरना पड़ता। न कारखाने चल पाते, न रेल चल पाती, न खेतों में पानी पहुंचता। यानी कांग्रेस की सरकार रहती तो ऐसे ही संकट बना रहता। आज हालात बदल रहे हैं, बीते 10 सालों में भारत ने बिजली उत्पादन की क्षमता को करीब दो गुना किया है। आज भारत अपनी जरूरत को पूरा करने के साथ-साथ पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात भी करता है। आज हरियाणा में 16 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। आने वाले समय में 24 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं। हम थर्मल के साथ ही देश के लोगों को पावर जनरेशन का विकल्प दे रहे हैं। हमने पीएम सूर्य घर बिजली योजना शुरू की है। आप अपने घरों में सोलर पैनल लगाकर बिजली का बिल शून्य कर सकते हैं, जो अतिरिक्त बिजली होगी उसे बेचकर कमाई भी कर सकते हैं। मुझे खुशी है कि हरियाणा के लाखों लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है। जैसे-जैसे इस योजना का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे इको-फ्रेंडली विकास भी हो रहा है। हरियाणा के किसानों की मेहनत हर भारतीय की थाली में नजर आती- पीएम पीएम ने कहा कि मुद्रा योजना में पिछले दस साल में देश के सामान्य लोग, जो पहली बार उद्योग के क्षेत्र में आ रहे हैं, उनको बिना गारंटी 33 लाख करोड़ रुपए लोन के रूप में दिए जा चुके हैं। इस योजना के 50% से भी ज्यादा लाभार्थी एसएसी, एसटी, ओबीसी के हैं। ये छोटे उद्योग हमारे नौजवानों के बड़े सपनों को पूरा करें। हमारे हरियाणा के किसानों की मेहनत हर भारतीय की थाली में नजर आती है। हमारा प्रयास है कि हरियाणा के किसानों का समर्थन बढ़े। हरियाणा की सरकार राज्य की 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदती है। हरियाणा के लाखों किसानों को पीएम फसल बीमा योजना का लाभ भी मिला है। करीब 9,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के क्लेम भी किसानों को दिए गए हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 6,500 करोड़ रुपए किसानों को दिए गए हैं। हरियाणा सरकार ने अंग्रेजों के जमाने का आबियाना कानून भी खत्म कर दिया है। अब किसानों को नहर के पानी पर टैक्स नहीं देना … Read more

प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. अम्बेडकर से जुड़े सभी स्थानों को पंचतीर्थ के रूप में मान्यता दी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समाज के बंधुत्व और उत्थान के लिए बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के कार्य भूतो न भविष्यति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. अम्बेडकर के योगदान से ही भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बना प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. अम्बेडकर से जुड़े सभी स्थानों को पंचतीर्थ के रूप में मान्यता दी सर्वहारा वर्ग का सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है डॉ. अम्बेडकर कामधेनु योजना सर्वहारा वर्ग और किसानों की समृद्धि को समर्पित भीम जन्मस्थली से आरंभ नई ट्रेन से महू, सीधा देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ा भीम जन्मस्थली महू में धर्मशाला निर्माण के लिए सरकार देगी 3.5 तीन एकड़ जमीन महू आने-जाने वालों की संपूर्ण सुविधा का प्रबंध सरकार की ओर से किया जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवैधानिक सामाजिक न्याय : एक चिंतन पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री ने डॉ. अंबेडकर जयंती पर बाबा साहेब को अर्पित की श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भीम जन्मस्थली (महू) डॉ. अम्बेडकर नगर में कार्यक्रम को किया संबोधित महू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 20वीं शताब्दी में ऐसे अनेकों उल्लेखनीय कार्य किए, जिनसे 1000 वर्ष की गुलामी की विसंगतियां दूर हुईं। इन्हीं के आधार पर आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बना है। डॉ. अम्बेडकर के जीवन के योगदान बहुआयामी हैं, उन्हें भारत में भविष्य की चुनौतियों का आभास हो चुका था, यद्यपि उनका जीवन बहुत कठिनाई के साथ बीता, लेकिन वे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने स्वयं के संघर्ष से सीख ली और अपने जैसे दूसरे लोगों की मदद की। बाबा साहेब ने स्वयं की शिक्षा में कोई कसर नहीं रहने दी, इससे यह प्रेरणा मिलती है कि व्यक्ति के जीवन में शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर द्वारा समाज के बंधुत्व और उत्थान के लिए किए गए कार्य भूतो न भविष्यति हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा साहेब ने समूचे समाज को आरक्षण जैसी व्यवस्था प्रदान की। आज अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सहित हर वर्ग को साक्षरता का लाभ मिल रहा है। अनुसूचित जाति वर्ग की साक्षरता जो कभी मात्र 1.5 प्रतिशत थी, आज 59 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भविष्य में जब-जब कठिनाई आएगी, हम सर्वहारा वर्ग के सशक्तिकरण का ध्यान रखेंगे। डॉ. अम्बेडकर ने सामाजिक सशक्तिकरण के लिए मजबूत संविधान बनाया और देश को लोकतंत्र दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. अम्बेडकर से जुड़े सभी स्थानों को पंचतीर्थ के रूप में मान्यता दी। महू स्थित भीम जन्मभूमि को तीर्थ के रूप में विकसित करने में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा और शिवराज सिंह चौहान का योगदान महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा भीम जन्मस्थली महू में धर्मशाला निर्माण के लिए 3.5 तीन एकड़ जमीन दी जा रही है। इससे यहां आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी, सभी आगंतुकों की संपूर्ण सुविधा का प्रबंध राज्य सरकार की ओर से किया जाएगा। राज्य सरकार ने सर्वहारा वर्ग और प्रदेश के किसानों को समृद्ध बनाने के लिए डॉ. अम्बेडकर कामधेनु योजना शुरू की है। अगर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई व्यक्ति दूध डेयरी खोलेगा, तो उसे हमारी सरकार द्वारा 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से एक दिन पहले ही भीम जन्मस्थली महू को नई ट्रेन की सौगात मिली है। अब महू शहर सीधा देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ गया है। इस रेलगाड़ी की शुरुआत का लाभ कोटा के साथ-साथ मालवा क्षेत्र के इंदौर, उज्जैन और देवास को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लंदन में भी डॉ. अम्बेडकर का भव्य स्मारक बना है, इसी स्थान पर उन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी। यह एक आवासीय क्षेत्र है। अंग्रेजों ने स्मारक बनाने का काफी विरोध किया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से वहां भी तीर्थ का निर्माण हो चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने धारा 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को उसका अधिकार वापस दिया है। बाबा साहेब डॉ.अम्बेडकर ने भी धारा 370 को स्वीकार नहीं किया था। विचारक मुकुल कानिटकर ने कहा कि 1891में आज के दिन महू से एक सकारात्मक क्रांति की शुरुआत हुई थी, एक क्रांति सूर्य का उदय हुआ था। डॉ. अम्बेडकर ने वर्ष 1916 में मात्र 27 वर्ष में अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स की डिग्री प्राप्त की थी। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में सिर्फ एक ही स्टैच्यू लगा है, वो बाबा साहेब अम्बेडकर का है। उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी और समाजशास्त्र व मानवशास्त्र में एमए किया। उस समय वे विश्व में सर्वाधिक डिग्री हासिल करने वाले व्यक्ति थे। वे किसी एक जाति-धर्म के नेता नहीं सर्वसमाज के नेता हैं। उन्होंने स्वयं शिक्षित होकर समाज को शिक्षित किया और समाज को रूढ़ीवाद से दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। प्रत्येक व्यक्ति के लिए बाबा साहेब के विचारों का अध्ययन आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंचासीन अतिथियों ने 'संवैधानिक सामाजिक न्याय : एक चिंतन' पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, सांसद श्रीमती कविता पाटीदार, पूर्व मंत्री और विधायक सुऊषा ठाकुर सहित वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 34

डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना में हितग्राहियों को मिलेगी 33% तक सब्सिडी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की सौगात दी है। देश में दूध, दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग, उनकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमिता विकास कार्यक्रम की स्थापना होनी है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं की इकाईयां स्थापित की जाएंगी। एक इकाई में सारे गौवंश या सारे भैंसवंश होंगे। एक इकाई की सारी गाय-भैंस एक ही प्रजाति की होंगी। सरकार ने एक इकाई की अधिकतम सीमा राशि 42 लाख रुपये निर्धारित की है।  इस योजना में भाग लेने वालों के लिए मध्यप्रदेश का निवासी होना जरूरी है। योजना सभी वर्गों के पशुपालकों के लिए होगी। इसमें पशुपालक की उम्र 21 साल से ऊपर होना जरूरी है। उन्हें अनुभव के लिए सरकारी या सरकार नामित संस्था से डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण भी लेना होगा। इस प्रशिक्षण के लिए सरकार अलग से निर्देश जारी करेगी। इस योजना के हितग्राहियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। हितग्राही के पास हर ईकाई के लिए कम के सम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होनी जरूरी है। इस भूमि में परिवार की सामूहिक जमीन का भी उपयोग किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए अन्य सदस्यों की सहमति आवश्यक होगी। इनको मिलेगी प्राथमिकता इस योजना में वर्तमान में दुग्ध संघों में पहले से ही दूध सप्लाई कर रहे पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। दुग्ध संघ प्रोड्युसर कंपनी के प्रचलित मिल्क रूट या नए मिल्क रूट पर आने वाले हितग्राहियों को प्रथामिकता देंगे। एक हितग्राही को एक या एक से अधिक (अधिकतम आठ इकाईयों, 200 दुधारू पशु) लेने की पात्रता होगी। एक से अधिक इकाईयां लेने की स्थिति में उन्नत गाय/संकर गाय या भैंस की ईकाई अपनी सुविधा अनुसार चयन कर सकेगा। यानी, अगर हितग्राही तीन ईकाईयां लेता है तो वह अपनी इच्छा अनुसार एक भैस की ईकाई, एक संकर गाय की इकाई तथा एक उन्नत देशी गौवंश की ईकाई भी ले सकेगा। अगर हितग्राही द्वारा एक बार योजना का लाभ लेकर समस्त ऋण चुका दिया जाता है तो वह अगली बार योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होगा। यह सुविधा अधिकतम आठ ईकाईयों तक दी जा सकेगी। एक ऋण व दूसरे ऋण के बीच में कम से कम 2 वर्ष का अंतर जरूरी है। हितग्राहियों को मिलेगी सब्सिडी इस योजना से लाभान्वित होने वाले लाभार्थी को डेयरी इकाई को सतत रूप से अधिकतम 7 वर्षों तक या ऋण की समाप्ति तक संचालित करना होगा। लाभार्थियों का चयन "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से होगा। दूसरा ऋण केवल पिछले ऋण चक्र के संतोषजनक पुनर्भुगतान पर ही दिया जाएगा। ऋण चार चरणों में वितरित किया जाएगा। पूंजी सब्सिडी और ब्याज अनुदान, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी के हितग्राहियों के लिए परियोजना लागत का 33 प्रतिशत तथा अन्य समस्त वर्गों के हितग्राहियों के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत सब्सिडी होगी। सब्सिडी वितरण की पहली तारीख से 3 वर्ष की लॉक इन अवधि के अंतर्गत एकमुश्त प्रदाय होगी। इस पर हितग्राही को कोई ब्याज नहीं देना होगा। हितग्राही अपने ऋण का भुगतान निर्धारित ऋण अवधि से पूर्व कभी भी कर सकता है।   recent visitors 34

माता टेकरी मंदिर के पुजारी से मारपीट और अभद्रता : वीडी शर्मा ने कहा है कि किसी का भी बेटा हो मामले की जांच होगी और कार्रवाई की जाएगी

इंदौर इंदौर से बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला के बेटे रुद्राक्ष शुक्ला के विवादास्पद मामले में मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है. शर्मा ने कहा, “कोई भी हो, चाहे किसी का बेटा हो, उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है. प्रशासन मामले की जाँच कर रहा है, और जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी.” यह घटना चार दिन पहले की है, जब रुद्राक्ष शुक्ला अपने समर्थकों और दोस्तों के साथ देर रात करीब 12:45 बजे देवास की चामुंडा माता टेकरी पर स्थित मंदिर पहुंचा. उसने पुजारी उपदेश नाथ से रात में मंदिर के कपाट खोलने की मांग की. पुजारी ने मंदिर के नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया, जिसके बाद रुद्राक्ष के साथी जितेंद्र रघुवंशी ने कथित तौर पर पुजारी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की. पुजारी के बेटे की शिकायत पर देवास पुलिस ने जितेंद्र रघुवंशी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस बीच, पुजारी उपदेश नाथ ने एक वीडियो बयान में दावा किया कि शिकायत दर्ज करने के बाद उन्हें इसे वापस लेने के लिए धमकी भरे फोन आए, लेकिन उन्होंने समझौता करने से इनकार कर दिया. घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें कुछ एसयूवी गाड़ियां, जिनमें से कुछ पर लाल बत्ती लगी थी, मंदिर परिसर में प्रवेश करती दिख रही हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया, ''बीजेपी नेताओं के परिवारों में सत्ता का अहंकार पनप गया है. इंदौर विधायक गोलू शुक्ला के बेटे ने लाल बत्ती वाली गाड़ियों के काफिले के साथ मंदिर पहुंचकर पुजारी की पिटाई की, क्योंकि वह बंद मंदिर का दरवाजा नहीं खोल रहा था.'' प्रदेश कांग्रेस मीडिया सेल प्रमुख मुकेश नायक ने कहा, ''खुद को धर्म और संस्कृति का ठेकेदार बताने वाली बीजेपी इस घटना में पूरी तरह बेनकाब हो गई है. गोलू शुक्ला के बेटे ने शनिवार रात 12:40 बजे माँ चामुंडा मंदिर में गुंडागर्दी की, पुजारी की पिटाई की, और बीजेपी चुप रही. यह सत्ता के अहंकार और बीजेपी की धर्म के प्रति झूठी भक्ति का घिनौना चेहरा है.'' कांग्रेस के आरोपों पर प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने जवाब दिया, “इस घटना में विधायक गोलू शुक्ला या उनके बेटे की कोई संलिप्तता नहीं है. पुलिस ने दोषियों के खिलाफ पहले ही मामला दर्ज कर लिया है. सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी.” इससे पहले, देवास एसपी दिनेश अग्रवाल ने बताया कि समूह के सदस्यों ने पुजारी से गेट खोलने को कहा, और इनकार करने पर उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की. उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज की गई है और लगभग 50 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है. यह पूछे जाने पर कि क्या बीजेपी विधायक के बेटे ने समूह का नेतृत्व किया था, अग्रवाल ने कहा कि मामले की जांच जारी है.   recent visitors 49

US – चीन के ट्रेड वार और मंदी के डर से सोने का भाव 2025 के अंत में 1,36,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता

मुंबई  बीते दिनों सोशल मीडिया पर इस बात की खूब चर्चा हो रही थी कि सोने का रेट 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। लेकिन इसके उलट पिछले हफ्ते गोल्ड की कीमतों में तूफानी तेजी देखने को मिली। अब इंवेस्टमेंट बैंकर Goldman Sachs की एक रिपोर्ट आई है। जिसमें कहा गया है कि सोने का भाव 4500 डॉलर प्रति आउंस (1,36,000 प्रतिशत 10 ग्राम) तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और चीन में चल रहे ट्रेड वार और मंदी के डर की वजह से सोने का भाव 2025 के अंत में 4500 डॉलर प्रति आउंस तक जा सकता है। तीसरी बार गोल्ड के टारगेट प्राइस में किया इजाफा Goldman Sachs ने एक बार फिर से गोल्ड के टारगेट प्राइस में इजाफा किया है। इंवेस्टमेंट बैंकर की रिपोर्ट के अनुसार गोल्ड का टारगेट प्राइस इस साल का 3700 डॉलर प्रति आउंस है। यह तीसरी बार है जब Goldman Sachs ने गोल्ड के टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी की है। इससे मार्च की शुरुआत में गोल्ड के टारगेट प्राइस 3300 डॉलर प्रति आउंस सेट किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति चीन को लेकर काफी आक्रमक नजर आ रहे हैं। जिसकी वजह से दोनों देशों में ट्रेड वार शुरू हो गया है। यही कारण है कि निवेशकों को गोल्ड अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। Gold ETF का क्या है रेट? बीते सप्ताह गोल्ड ईटीएफ पहली बार 3200 डॉलर प्रति आउंस के स्तर को क्रॉस किया था। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव की वजह से गोल्ड ईटीएफ का रेट 3245.69 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गया था। सोने की मांग फिजिकल और एक्सचेंज ट्रेड पर काफी बढ़ी है। आज किस रेट पर बिक रहा है सोना? आज स्पॉट गोल्ड 0.4 प्रतिशत की गिरावट के बाद 3223.67 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूएस गोल्ड फ्यूचर 0.1 प्रतिशत की गिरावट के बाद 3240.90 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा था। (यह निवेश की सलाह नहीं है। गोल्ड की कीमतों में उतार और चढ़ाव देखने को मिलता-रहता है। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी है।  हम इस आधार पर सोना खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है। recent visitors 39

सांची और एनडीडीबी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर, नेशनल डेयरी बोर्ड संभालेगा मार्केटिंग-मैनेजमेंट; घी, पनीर, श्रीखंड जैसे प्रोडक्ट होंगे एक्सपोर्ट

 भोपाल  मध्यप्रदेश के दुग्ध उत्पादों का स्थानीय ब्रांड सांची अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखने जा रहा है। उसने सबसे पहले नेपाल और भूटान के बाजार में अपने दुग्ध उत्पाद बेचने की तैयारी की है। विदेश में सहकारी संघों के उत्पाद निर्यात करने वाली एजेंसी से स्वीकृति मिलते ही सांची के उत्पाद विदेशी धरती पर भी बिकने लगेंगे। मिठाइयां और घी बेचने की तैयारी नेपाल व भूटान में सफलता के बाद श्रीलंका और बांग्लादेश में उत्पाद उतारे जाएंगे। विदेश में पहले सांची की मिठाइयां और घी बेचने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में ऐसे प्रोडक्ट भेजे जाएंगे, जिन्हें स्टोर करने की समस्या न हो। सांची का घी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले उत्पादों में शामिल है। पेड़े भी बेहद पसंद किए जाते हैं। इन उत्पादों को विदेश के सुपर मार्केट और माल में उतारा जाएगा, ताकि सीधे लोगों तक पहुंचें। फीडबैक और मांग के आधार पर निर्यात पर विचार बाजार में इनके फीडबैक और मांग के आधार पर सांची के अन्य उत्पादों के निर्यात पर विचार किया जाएगा। सांची ने निर्यात के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल भारतीय निर्यात निरीक्षण परीक्षा से अनुमति का इंतजार है। इसके बाद सहकारी निर्यातों का समन्वय करने वाली संस्था नेशनल कोआपरेटिव फार एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) की अनुमति लेनी होगी। इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही सांची के उत्पाद विदेश में जा सकेंगे। हालांकि इससे पहले कमोडिटी मार्केट में सांची का पाउडर और बटर बेचा जा रहा है, लेकिन इन उत्पादों पर सांची की ब्रांडिंग नहीं होती है। बता दें कि प्रदेश में सांची के चार प्लांटों में दुग्ध उत्पाद बनाए जाते हैं। सांची को वैश्विक ब्रांड के रूप में करेंगे स्थापित सांची के उत्पादों को विदेश के बाजारों तक पहुंचाकर इसे वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करेंगे। फिलहाल हम निर्यात करने के शुरुआती चरण में हैं और निर्यात करने वाली संस्थाओं से स्वीकृति मिलने के कुछ समय बाद हम नेपाल और भूटान में अपने उत्पाद भेजेंगे। -सतीश कुमार एस, महाप्रबंधक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी संघ। सांची के बाय प्रोडक्ट देश-विदेश में एक्सपोर्ट होंगे खंडेलवाल बताते हैं कि मध्यप्रदेश में अभी सांची का ज्यादातर काम मिल्क प्रोसेसिंग का है। अब एनडीडीबी मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने से लेकर कलेक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर फोकस करेगा। बोर्ड सांची दूध से बने उत्पादों में अमूल की तरह आइसक्रीम, चॉकलेट, घी, पनीर, श्री खंड जैसे बाय प्रोडक्ट बनाकर देश-विदेश में एक्सपोर्ट करेगा। सांची के प्लांट्स में लगभग 40 साल पुरानी मशीनरी से काम हो रहा है। एनडीडीबी अब मशीनों के मॉडर्नाइजेशन पर काम करेगा। यानी जरूरत के हिसाब से आधुनिक मशीनें लगाएगा ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ सके। दुग्ध संघों में होगा समन्वय मध्यप्रदेश में अभी 6 दुग्ध संघ हैं, जो अपने-अपने क्षेत्रों में सीमित दायरे में काम कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि भोपाल में पेड़ा का उत्पादन अधिक है और जबलपुर में कम, तो वहां स्थानीय स्तर पर शॉर्टेज की स्थिति बन जाती है। अब राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) पूरे प्रदेश में उत्पादन से संबंधित कार्यों की निगरानी मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ के माध्यम से करेगा। यह तय करेगा कि किस प्रोडक्ट का कहां कितना उत्पादन है और कहां किस प्रोडक्ट की कितनी खपत है। यदि अन्य राज्यों की बात करें तो जैसे दिल्ली में दूध की खपत तो अधिक है, लेकिन वहां पर्याप्त उत्पादन नहीं होता। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश से दिल्ली तक दूध की आपूर्ति की जाएगी। recent visitors 30