मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला, 71 करोड़ होंगे खर्च !

रीवा  मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला है. गौधाम का क्षेत्रफल तकरीबन 1303 एकड़ का होगा. जिसकी लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से भी अधिक है. वर्तमान में इस गौधाम में 30 हजार गौवंशो की देखरेख और भरण पोषण की व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा गौधाम के विस्तार होने के बाद यहां 50 हजार से भी ज्यादा गौवंशों को आश्रय मिल जाएगा. गौधाम में 100 से अधिक गौ सेवकों को रोजगार तो मिलेगा ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. बेसहारा गौवंशों को मिलेगा सहारा मध्य प्रदेश में बेसहारा गौवंश आम आदमी के साथ ही सड़क में चलने वाले बड़े और छोटे वाहनों के आलावा किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है. सड़कों में घूम रहे गौवंश अक्सर सड़क हादसे का शिकार होकर घायल हो जाते हैं और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है. इसके अलावा सड़क पर घूम रहे बेसहारा गौवंशो से टकराकर अक्सर वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. जिसमें सवार यात्रियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ जाती है. प्रदेश की सड़कों पर हैं 10 लाख से अधिक गौवंश गौवंश की सड़क पर होने की समस्या से निजात पाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में गौशाला खोलने की योजना तैयार की है. कई गौशाला भी बनाई गई हैं. जहां पर लाखों गौवंशो को रखा भी जा रहा है. यहांं पर उनके भरण पोषण की व्यवस्था भी बनाई गई. लेकिन प्रदेश मे बेसहारा गौवंशो की संख्या 10 लाख से भी अधिक है. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने गौशालाओं के बाद गौधाम बनाने का निर्णय लिया गया. ये गौधाम गौशालाओं से काफी विशाल होंगे. जिसमें अधिक संख्या में बेसहारा गौवंशो को रखकर उनकी देखभाल की जाएगी. रीवा में होगा प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा गौधाम ग्वालियर लाल टिपारा गौधाम है लेकिन अब रीवा के मनगवां विधानसभा में स्थित हिनौती ग्राम पंचायत में जिस गौधाम का निर्माण हो रहा है वह प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम होगा. इस गौधाम की लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से अधिक होगी. जबकी इसका क्षेत्रफल 1303 एकड़ का होगा. वर्तमान में यहां पर 30 हजार से ज्यादा गौवंशो को रखा गया है. जिनके भरण पोषण के साथ ही देखरेख की जा रही है. जल्द ही यहां पर गौवंशो की संख्या बढ़ाकर 50 हजार से अधिक कर दी जाएगी. वर्तमान में हैं 30 हजार गौवंश प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों से मनगवां विधानसभा के हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम बनाए जाने की सौगात मिली. जिसके बाद बीते कुछ माह पूर्व ही उप मुख्यमंत्री के द्वारा हिंनौती मे भूमि पूजन किया गया था. वर्तमान में इस गौशाला का निर्माण कार्य चल रहा है. अभी इस गौधाम में 30 हजार से अधिक गौवंशो को रखा गया गया है, जिनकी देख रेख की जा रही है. जल्द ही गौधाम विस्तार करते हुए अधिक क्षमता वाला गौधाम बनाया जाएगा, जहां पर 50 हजार से भी अधिक गौवंशो को रखा जाएगा. 'एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बनाने का होगा प्रयास' मनगवां विधायक नरेन्द्र प्रजापति ने बताया कि "हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम का निर्माण कार्य चल रहा है. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के दिशा निर्देशन मे गौधाम बनाया जा रहा है. वर्तमान में 30 हजार गौवंश वहां पर रखे गए हैं. गौधाम में जल्द ही एक रेस्ट हाउस का भी निर्माण होगा. यहां से एक प्रतिनिधि मंडल राजस्थान के पथमेड़ा गया था और वहां के गौधाम को देखकर उसी के आधार पर मनगवां में गौधाम का निर्माण कार्य किया जा रहा है. प्रयास किया जाएगा की यह गौधाम एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बने." recent visitors 54

वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी, कब्रिस्तानों पर बने सरकारी दफ्तरों पर चलेंगे बुलडोजर

भोपाल नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें। वक्फ रेकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कब्जे कब्रिस्तानों पर हैं। करीब 100 कब्रिस्तान खत्म हो चुके हैं। इनमें कहीं बस्तियां हैं तो कहीं काम्पलेक्स तो सरकारी दफ्तर भी काबिज हैं।  बोर्ड के रेकॉर्ड में राजधानी में 7700 वक्फ सम्पत्तियां हैं इसमें 135 कब्रिस्तान हैं। लेकिन इनमें से 30 ही बचे हैं। कब्रिस्तानों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जमीयत के सचिव इमरान हारून के मुताबिक वर्तमान में भोपाल टॉकीज चौराहा, पुराना आरटीओ ऑफिस, नरेला संकरी, कोलार, जहांगीराबाद सहित कई इलाकों में कब्रिस्तानों के नामोनिशान भी नहीं बचा। पीएचक्यू के पास सरकारी दफ्तर के पीछे कब्रों के निशान अब भी हैं। वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी है। राजस्व रेकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। इसके आधार पर बोर्ड का रिकॉर्ड भी अपडेट होगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के मुताबिक प्रशासन को सभी की जानकारी दी चुकी है। इमरान हारून ने बताया कि शहर में करीब 70 प्रतिशत कब्रिस्तान खत्म हो गए हैं। कब्रिस्तान पर बस्तियां बस गई हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। नए बिल से निजी कब्जों पर तो कार्रवाई संभव है सरकारी के लिए क्या होगा कुछ पता नहीं। उसके बदले बोर्ड क्या सरकार से जमीन लेेगी। मुस्लिम महासभा के मुन्नवर अली ने बताया कि ये भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। बीते साल ही शहर के कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी की बात सामने आई। निजी कब्जेधारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जिन जमीनों पर सरकार का कब्जा है उनके बदले क्या होगा। कब्रिस्तान के बदले जमीन मिलनी चाहिए। जानें वक्फ के नए कानून में क्या है वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर… सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी? सच्चाई : वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं। सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा? सच्चाई : एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।   सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी? सच्चाई : कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं। सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे? सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है। सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी? सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है। क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है? सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा। धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी? सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो। सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी? सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है। recent visitors 53

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए 120 बीघा जमीन की सहमति मिल चुकी

इंदौर  एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के किसान जमीन देने पर सहमत होते जा रहे हैं। बीते दिन दो विधायकों और जमीन मालिकों के साथ एमपीआइडीसी की बैठक हुई। मौके पर ही कुछ जमीन मालिकों ने करीब 40 बीघा जमीन देने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। अब तक 120 बीघा जमीन देने पर सहमति बन गई है।  एमपीआइडीसी के ऑफिस में हुई बैठक में विधायक उषा ठाकुर, मधु वर्मा और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 50 से अधिक जमीन मालिक व किसान मौजूद थे। प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देकर कई लोगों की शंका का समाधान किया गया। सवाल किया गया कि यह कब पूरा होगा तो एमपीआइडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बताया कि जमीन मिलने के बाद दो साल में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। पहली बार सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड किसी योजना में दे रही है। कॉरिडोर के तैयार होने से क्षेत्र और इंदौर के विकास को नई उड़ान मिलेगी। बच्चों को रोजगार मिलेगा। समय पर पूरी होने की उम्मीद एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों के हर सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, उन्हें मिलने वाले विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत शुरू कर सकेंगे। जमीन मालिकों ने भी इस बात पर संतोष जताया कि परियोजना समय पर पूरी होने की उम्मीद है। मिलेंगे रोजगार के अवसर उनका कहना था कि इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों का कहना है पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है, और अब जब हमें 60त्न विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दी जा रही है, तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। समय पर दर्ज कराएं सहमति राजेश राठौड़ ने कहा हमारा लक्ष्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप देना है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें किसान न केवल अपनी जमीन का उचित प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास के साझेदार भी बनेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सहमति दर्ज कराएं और इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।  जिला प्रशासन द्वारा भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। ग्राम रिजलाय में एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने एक अलग बैठक ली, जिसमें कई जमीन मालिक शामिल हुए। इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और किसानों ने परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया। प्रशासन का यह प्रयास है कि हर किसान की सहमति बिना किसी दबाव के, उनकी मर्जी से ली जाए। सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन बैठक में महू विधायक उषा ठाकुर ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की हर मांग को पूरा किया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जमीन देने वाले किसानों को 60 फीसदी विकसित प्लॉट मिलेगा। यह योजना स्वर्णिम भारत के निर्माण का एक कदम है। उद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की छोटी-छोटी शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रशासन और एमपीआईडीसी के अधिकारी हर कदम पर उनके साथ हैं। राऊ विधायक मधु वर्मा भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने परियोजना को क्षेत्र के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि किसानों के लिए भी आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। जिस गांव में जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सडक़ के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी। इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे विकास कार्य में कोई बाधा न आए। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि उन्हें अपनी जमीन के बदले 60त्न विकसित भूखंड मिलेंगे। ये भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानी किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। इससे किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका मिलेगा और वे इन भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे। सहमति देने की प्रक्रिया जमीन मालिक अपनी सहमति एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर में जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसकी पावती उन्हें दी जाएगी। सहमति मिलने के बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और इसके आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी। रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋ ण नहीं है। यदि जमीन पर ऋण है, तो संबंधित बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देना होगा। रजिस्ट्री के बाद किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार भूखंड आरक्षित कर सूचित किया जाएगा और परियोजना पूरी होने पर इनका कब्जा और रजिस्ट्री उनके नाम होगी। समस्या आई तो हम रहेंगे साथ विधायक ठाकुर ने किसानों से कहा कि औद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा। किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा खड़ी हूं। वर्मा ने योजना को क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी। दावे-आपत्तियों का अंतिम निराकरण कॉरिडोर को लेकर एमपीआइडीसी ने दावे-आपत्ति बुलाए थे, जिसमें 700 लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। पहले चरण में सभी दावे-आपत्तियों को सुना गया था। अब सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड देकर जमीन ले रही है तो बड़ी संख्या में किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं। मंगलवार को आपत्तिकर्ताओं की आखिरी सुनवाई होगी। बताया गया है कि कुछ कॉलोनाइजरों की भी जमीन है और वे अड़े हुए हैं। recent visitors 50

एनफ्जूएंजा वायरस मिलने के बाद प्रदेशभर में अलर्ट जारी, अंतरराज्यकीय सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ाई, मचा हड़कंप

उत्तराखंड उत्तराखंड चारधाम यात्रा के शुरू होने से पहले एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। केदारनाथ धाम रूट पर एक्वाईन एनफ्जूएंजा वायरस मिलने के बाद से हड़कंप मच गया है। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के बाद अब कुमाऊं मंडल में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। एनफ्जूएंजा वायरस मिलने के बाद प्रदेशभर में अलर्ट जारी करने के साथ ही प्रदेश के अंतरराज्यकीय सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। वायरस की जांच से लेकर रोकथाम के लिए कड़े इंतजाम भी किए जा चुके हैं। क्वारंटीन सेंटर बनाने से लेकर पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की जा चुकी है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अश्ववंशीय पशुओं में एक्वाईन एनफ्जूएंजा नामक संक्रामक बीमारी फैलने की आहट के बीच पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। आपको बता दें कि यह वायरस मुख्यत: घोड़े, खच्चरों में फैलता वाला है। जो कि रोग, वायरल जुकाम की तरह लक्षण सामने आते हैं। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ.रमेश नितवाल ने बताया कि एक्वाईन एनफ्जूएंजा को लेकर उत्तराखंड के गढ़वाल में अलर्ट पहले ही जारी हो चुका है। राहत भरी खबर यह है कि कुमाऊं मंडल में फिलहाल किसी भी अश्ववंशीय पशुओं वायरस का कोई केस सामने नहीं आया है। लेकिन, एहतियातन विभाग ने सावधानी बरतने को कहा है। पशुपालन के डॉ राजीव सिंह कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से संदिग्धों अश्ववंशीय जानवरों के ब्लड सेंपल भी जरुरत पड़ने पर पशुपालन विभाग लेगा। कहा कि इस रोग से ग्रसित घोड़ों और खच्चरों के मांसपेशियों में दर्द, थकान व कमजोरी महसूस होती है। संक्रामक रोग की तरह यह बीमारी फैलती है। बताया कि अभी रूद्रप्रयाग में इसके एक दो केस सामने आए हैं। लंपी को समय पर हराने के बाद विभाग के लिए अब यह दूसरी मुसीबत आ खड़ी हुई है। हालांकि विभाग ने इसके लिए तैयारी कर रखी है। यात्रा रूट पर 12 अश्ववंशीय पशुओं में मिला था वायरस उत्तराखंड चारधाम यात्रा रूट पर रुद्रप्रयाग जिले में 12 अश्ववंशीय पशुओं में एनफ्जूएंजा वायरस मिला था। पशुओं में वायरस मिलने के बाद धामी सरकार अलर्ट मोड पर आ गई थी। वायरस मिलने के बाद पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने आला-अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए थे। वायरस की स्क्रीनिंग करने पर विशेषतौर से फोकस करने को कहा गया है। सरकार की ओर से सख्त निर्देश दिए हैं कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी रोगग्रस्त घोड़े-खच्चर को ले जाने की अनुमति नहीं होगी। रुद्रप्रयाग में बनेंगे दो क्वारंटीन सेंटर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में दो क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। वायरस की चपेट में आने वाले अश्ववंशीय पशुओं को क्वारंटीन किया जाएगा। आपको बता दें कि यह वायरस पशुओं में एक से दूसरे में बहुत ही तेजी के साथ फैलता है। उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों को भी अलर्ट रुद्रप्रयाग जिले में अश्ववंशीय पशुओं में वायरस की पुष्टि होने के बाद उत्तराखंड के बॉर्डर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। विभाग की ओर से टीमें गठित कर अंतरराज्यकीय बॉर्डरों पर तैनात किया गया है। आपको बता दें कि चारधाम यात्रा के दौरान देश-विदेश से भारी संख्या में तीर्थ यात्री दर्शन करने को उत्तराखंड आते हैं। केदारनाथ और उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धामों में घोड़े-खच्चरों से यात्रा करते हैं। मुक्तेश्वर में होगी सैंपलों की जांच उत्तराखंड के पांच जिलों के सभी घोड़े-खच्चरों के सीरोलोजिकल सैंपल लिए जाएंगे, जिनकी जांच इंडियन वेटरी रिसर्च इंस्टीट्यूट मुक्तेश्वर में कराई जाएगी। यदि कोई अश्ववंशीय पशु पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे क्वारंटीन किया जाएगा। फिर 12 दिन बाद उसका सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही यात्रा में तैनाती की अनुमति दी जाएगी। केदारनाथ-यमुनोत्री चारों धामों के कपाट खुलने की यह डेट उत्तराखंड में केदारनाथ, यमुनोत्री समेत चारों धामों के कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान हो चुका है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खोले जाएंगे, जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे। चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई, जबकि गंगोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे। recent visitors 52

पश्चिमी रिंग रोड में नई गाइडलाइन के दोगुना मुआवजा दिए जाने पर किसानों और प्रशासन के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी

इंदौर बहुप्रतीक्षित पश्चिमी आउटर रिंगरोड परियोजना को लेकर एक बड़ी बाधा अब दूर हो गई है। जमीन अधिग्रहण को लेकर असहमति जता रहे किसान अब सर्वे के लिए तैयार हो गए हैं। नई गाइडलाइन के दोगुना मुआवजा दिए जाने पर किसानों और प्रशासन के बीच सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसके साथ ही परियोजना को लेकर लंबे समय से रुकी प्रक्रिया अब फिर से गति पकड़ने जा रही है। सहमति बनने के बाद मंगलवार से दो टीमें सर्वे का काम शुरू करेगी। पश्चिम रिंग रोड को लेकर रेसीडेंसी कोठी में जिला प्रशासन, एनएचआई और किसान नेताओं के बीच बैठक हुई। बैठक में नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा देने पर सहमति बन गई। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि किसानों को पुरानी गाइडलाइन पर अवार्ड पारित होगा, लेकिन आर्बिटेशन के माध्यम से नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। 15 दिन में किसानों को अवार्ड पारित होगा। वहीं आरबीडेशन की प्रक्रिया डेढ माह में पूरी करेंगे। इस पर किसानों के साथ सहमति बन गई है। मंगलवार से टीमें सर्वे का काम शुरू करेगी। वर्षाकाल से पहले निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा, ताकि वर्षाकाल से पहले काफी काम पूरे किए जा सके।   विरोध के कारण अटका था काम करीब आठ माह पूर्व इस परियोजना का टेंडर किया गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण में किसानों की असहमति के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। किसानों की मांग थी कि उन्हें उचित दर पर मुआवजा दिया जाए। किसान बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा मांग रहे थे। किसानों के विरोध के कारण प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया रोक दी थी। अब ग्रामीण क्षेत्रो में कृषि भूमि की गाइडलाइन सर्वाधिक बड़ी है। ऐसे में किसान बड़ी गाइडलाइन के दो गुना मुआवजे पर सहमत हो गए। recent visitors 52

मध्‍य प्रदेश में गर्मी का कहर जारी, 7 जिलों में टूटा रिकॉर्ड, नर्मदापुरम में 44 के पार पहुंचा पारा

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई शहरों में गर्मी का कहर जारी है। प्रदेश में दो दशक बाद अप्रैल महीने में ही जून जैसा तापमान देखने को मिल रहा है। गुजरात-राजस्थान से आ रहीं गर्म हवाओं के कारण भीषण गर्मी पड़ रही है। जिसकी वजह से तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। सोमवार को नर्मदापुरम और रतलाम सबसे गर्म रहे, जबकि प्रदेश के 5 बड़े शहर- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में सीजन की सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी। ऐसी ही गर्मी मंगलवार को भी पड़ेगी। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रतलाम और नीमच समेत 8 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इंदौर, उज्जैन और धार में रातें गर्म रहेंगी जबकि श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, गुना, नीमच, मंदसौर और रतलाम में लू का अलर्ट है। 9 और 10 अप्रैल को भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में भी हीट वेव चलने की संभावना है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से 11 अप्रैल को प्रदेश के कई शहरों में हल्की बारिश हो सकती है। इससे पहले तेज गर्मी का असर बना रहेगा। सभी शहरों में सीजन का सबसे गर्म दिन सोमवार को मध्यप्रदेश के सभी शहरों में सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। मौसम विभाग के अनुसार, नर्मदापुरम में 44.3 डिग्री और रतलाम में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। सीजन में पहली बार भोपाल-इंदौर समेत सभी पांच बड़े शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री के पार रहा। भोपाल में 41.6 डिग्री, इंदौर में 40.6 डिग्री, ग्वालियर में 41.7 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और जबलपुर में 40.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। ऐसा रहेगा अप्रैल में मौसम     पहला सप्ताह ऐसा रहा: रात का तापमान सभी संभागों में सामान्य से 2-3 डिग्री ज्यादा 21-24 डिग्री सेल्सियस बना रहा। वहीं, दिन में पश्चिमी गर्म हवाओं के कारण अधिकतम तापमान इंदौर, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से ज्यादा 39 से 44 डिग्री तक पहुंच गया। उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर समेत बाकी संभागों में यह 41 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। पहले सप्ताह रतलाम में लू चल चुकी है। वहीं, बाकी शहरों में गर्म हवाओं से गर्मी बढ़ी रही।     दूसरा सप्ताह: इंदौर, उज्जैन और चंबल संभाग में रात का तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री ज्यादा यानी 23 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। पूर्वी नम हवाओं के कारण थोड़ी राहत के साथ भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में तापमान सामान्य यानी 22-24 डिग्री बना रहेगा। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में तापमान सामान्य से बढ़कर 41 से 43 डिग्री सेल्सियस रहेगा। 2 से 3 दिन लू भी चल सकती है। इस दौरान बारिश होने की संभावना नहीं है, लेकिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से दक्षिणी हिस्से में बादल जरूर छा सकते हैं।     तीसरा सप्ताह: उत्तर-पश्चिमी हवाओं के जोर पकड़ने के साथ इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, नर्मदापुरम संभागों में न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। पूरे प्रदेश में दिन में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। 2 से 3 दिन लू चल सकती है। हल्की बारिश होने की संभावना है।     चौथा सप्ताह: उत्तर-पश्चिमी हवाओं के लगातार जोर पकड़ने के साथ न्यूनतम तापमान पूरे प्रदेश में सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक यानि 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। दिन के साथ रातें भी गर्म हो जाएंगी। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में पारा 43-45 डिग्री जबकि इंदौर, उज्जैन-भोपाल सहित बाकी प्रदेश में 41 से 44 डिग्री सेल्सियस तापमान रह सकता है। बंगाल क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से अप्रैल के आखिरी में 3 से 4 दिन तक लू का असर रह सकता है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा मध्यप्रदेश में मार्च से गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। इसी ट्रेंड के अनुसार अगले 3 महीने तेज गर्मी पड़ेगी। मौसम विभाग ने मई तक 15 से 20 दिन हीट वेव चलने का अनुमान जताया है। अप्रैल-मई में 30 से 35 दिन तक गर्म हवा चल सकती है। अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मार्च महीने के आखिरी में ही टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट हुई। अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा। recent visitors 39

26 लाख के इनामी 22 नक्सलियों ने आज डीआईजी के समक्ष किया आत्मसमर्पण

बीजापुर शासन की पुनर्वास एवं आत्मसर्पण नीति के साथ ही चलाये जा रहे नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित होकर पीएलजीए बटालियन नम्बर एक सदस्य, टीएससी (तेलंगाना स्टेट कमेटी) अंतर्गत सीआरसी कंपनी नम्बर 2 का सदस्य, एसीएम, मिलिशिया डिप्टी कमांडर, मिलिशिया सदस्य, केएमएस उपाध्यक्ष, मिलिशिया प्लाटून डिप्टी कमांडर, मिलिशिया प्लाटून सदस्य, पदेड़ा, गलगम, कोत्तागुड़ा, कमलापुर, डुमरीपालनार, कोरसागुड़ा आरपीसी के अन्य सदस्य कुल 22 नक्सलियों ने आठ अप्रैल को डीआईजी सीआरपीएफ बीजापुर देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर जितेन्द्र कुमार यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया। नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण के पीछे जिले में हो रहे विकास कार्य सबसे अहम वजह है। तेजी से बनती सड़कें, गावों तक पहुंचती विभिन्न सुविधाओं ने इन्हें प्रभावित किया है। संगठन के विचारों से स्थानीय युवाओं में संगठन से मोहभंग हो रहा है। संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद इनके आत्मसमर्पण का बहुत बड़ा कारण है। छत्तीसगढ़ शासन की नवीन पुनर्वास नीति ने कई नक्सलियों को नई उम्मीद दी है और उन्हें संगठन के भीतर शोषण और क्रूर व्यवहार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है। यह नीति उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की आशा देती है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के लगातार अंदरूनी क्षेत्रों में कैम्प स्थापित करने और क्षेत्र में चलाए जा रहे आक्रामक अभियानों ने भी नक्सलियों को संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के नाम कमली हेमला उर्फ सोमे पद पीएलजीए बटालियन नम्बर 1 में सदस्य, इनाम 08.00 लाख रूपये, मुया माड़वी उर्फ राजेश टीएससी (तेलंगाना स्टेट कमेटी) अन्तर्गत सीआरसी कंपनी न. 2 में (पार्टी सदस्य), इनाम 8.00 लाख रूपये, सोनू ताती पश्चिम बस्तर डिवीजन प्रेस टीम कमाण्डर (एसीएम) , घोषित ईनाम 5.00 लाख रूपये,महेश पुनेम प्लाटून नबंर 13 में (पीएलजीए सदस्य) घोषित इनाम 05.00 लाख, बुधराम ताती उर्फ सुद्दू उर्फ गट्टा मिलिशिया कंपनी डिप्टी कमाण्डर, सन्नू हेमला मिलिशिया कंपनी सदस्य, सोमलू मड़कम उर्फ पटेल सदस्य/कृषि शाखा अध्यक्ष, हुंगा कुहराम उर्फ वड्डे उर्फ ओयाम सदस्य/जन सम्पर्क शाखा अध्यक्ष, देवा माड़वी उर्फ बुड़ता कृषि शाखा अध्यक्ष, हुंगा कट्टम उर्फ बैदी आरपीसी मिलिशिया प्लाटून बी सेक्शन कमाण्डर, पोज्जा बाड़से उर्फ जोगा आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, नंंदा मड़कम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, हुंगी कुंजाम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्या, हड़मा पोड़ियम उर्फ उरपा आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, विज्जो कुंजाम आरपीसी केएएमएस सदस्या,नरसी कट्टम आरपीसी केएएमएस उपाध्यक्ष, मोती सोढ़ी आरपीसी केएएमएस सदस्या, विज्जा उईका आरपीसी सीएनएम सदस्य कोसा पोड़ियम उर्फ लमडी कोसा आरपीसी केएएमएस सदस्या,विजय मड़कम ऊर्फ विज्जा सेल सदस्य/संस्कृति शाखा सदस्य, बोदी कारम उर्फ करवे RPC केएएमएस सदस्या, कोसा मड़कम सेल सदस्य/संस्कृति शाखा सदस्य। recent visitors 39