सुंदरजा आम की विशेषता है कि इसे मधुमेह के मरीज भी खा सकते, मौसम के फेर में लेकिन इस बार नहीं मिल रहे खरीदार

रीवा देश-विदेश में अपनी महक और स्वाद से लोगों को दीवाना बनाने वाला सुंदरजा आम इस बार खुद मौसम के फेर में उलझ गया है। कम उत्पादन और थोड़े-थोड़े अंतराल में वर्षा के क्रम ने आम के बगीचे वालों को चिंता में डाल दिया है। बीते वर्ष तक जनवरी या फरवरी के बीच आम के बगीचे व्यापारी बोली लगाकर खरीद लेते थे। इस बार अप्रैल के पांच दिन निकल जाने के बावजूद बगीचों के संचालक व्यापारियों की राह तक रहे हैं। यही कारण है कुठलिया आम बगीचे की नीलामी महज 12 लाख 12 हजार रुपये तक होने की उम्मीद है। गोविंदगढ़ बगीचे की नीलामी तकरीबन 32 लाख रुपये में की जा चुकी है। किसान रामबहोर तिवारी ने बताया कि इस बार उनके बगीचे के आम के खरीदार नहीं आए हैं। पिछले वर्षों तक फरवरी माह में ही व्यापारी आकर उन्हें रुपये दे देते थे और पूरा बगीचा ले लेते थे। इस बार वर्षा अंतराल होने के कारण वैसे ही बौर आमों पर कम आए हैं। उस पर भी मौसम खराब होने से स्थिति बिगड़ गई है। बिना रेशे वाला आम मधुमेह रोगी को भी प्रिय सुंदरजा आम की विशेषता है कि यह बिना रेशों वाला होता है और इसे मधुमेह के मरीज भी खा सकते हैं। यह आम पकने के बाद भी 15 दिन तक रखा जा सकता है। दुनिया में रीवा सफेद बाघ के साथ ही फलों के राजा आम 'सुंदरजा' के लिए भी विख्यात है। इस आम की देश-विदेश में खासी मांग है। बीते वर्ष सुंदरजा आम की करीब 19 टन पैदावार हुई थी, लेकिन इस साल 12 टन तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। गोविंदगढ़ में होता है उत्पादन पहले सुंदरजा आम केवल गोविंदगढ़ किले के बगीचों में होता था, लेकिन अब कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में भी इसकी खेती की जा रही है। इस आम को जीआइ टैग भी प्राप्त है। गोविंदगढ़ का सुंदरजा आम हल्का सफेद रंग का होता है, जबकि कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में हल्का हरा होता है। सुंदरजा आम ऐसे बना खास गोविंदगढ़ की मिट्टी में उगने वाले पेड़ों के आम का स्वाद लाजवाब है। महक इतनी जबरदस्त है कि आंख बंद करके भी पहचान सकते हैं। 1968 में सुंदरजा आम के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया था। दिल्ली, मुंबई, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित कई शहर व राज्यों के लोग एडवांस ऑर्डर देकर मंगवाते हैं। फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, कनाडा व अरब देशों में इसकी काफी मांग है। सुंदरजा आम को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। महाराजा गुलाब सिंह ने लगवाया था बगीचा फल एवं अनुसंधान केंद्र कुठुलिया का आम का बगीचा रीवा राज्य के तत्कालीन महाराजा गुलाब सिंह जूदेव के समय में लगवाया गया था। रियासत काल में यह राजे-राजवाड़ों की पसंद हुआ करता था। इसे बाद में कृषि विभाग को सौंप दिया गया। बगीचे में देवी-देवताओं के नाम से विष्णु भोग, हनुमान भोग, कृष्ण भोग, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के नाम से आम के पेड़ लगे हैं। कृषि वैज्ञानिक आरपी जोशी ने बताया कि 132 एकड़ में फैले फल अनुसंधान केंद्र कुठुलिया में लगभग ढाई हजार आम के पेड़ों का बगीचा है। यहां सुंदरजा, मलिका, आम्रपाली, महमूद बहार, चौसा, स्वर्ण रेखा, प्रभा शंकर विष्णु भोग, कृष्ण भोग, गोपाल भोग, फजली, दशहरी व लंगड़ा आम के पेड़ हैं। आम की कीमत प्रति किलो रुपये में मध्य प्रदेश – 160 से 190, महाराष्ट्र – 200 से 250,  दिल्ली – 160 से 220   recent visitors 31

मुस्लिम युवक सोहेल खान ने अपना धर्म छुपाकर हिंदू युवती से इंस्टाग्राम पर की दोस्ती, शादी के बाद निकला सच

भोपाल कटारा हिल्स थाने में एक मुस्लिम युवक पर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। मुस्लिम युवक सोहेल खान ने अपना धर्म छुपाकर हिंदू युवती से सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर दोस्ती की थी।  आरोपित ने दोस्ती के समय खुद को राहुल शर्मा बताया था। कुछ समय बाद दोनों के बीच प्रेम संबंध बना और गुरुवार को कटराहिल्स के एक मंदिर में उन्होंने शादी की। बाद में युवती के स्वजनों ने आरोपित से उसके दस्तावेज मांगे तब लव जिहाद की साजिश का खुलासा हो सका।   बस्ती में अकेली रहती थी युवती शिकायत पर पुलिस ने आरोपित पर प्रकरण दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। मामले की जांच कर रहे एसआई कौशलेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि 19 वर्षीय युवती झागरिया बस्ती में अकेली रहती है। उसके माता-पिता का निधन हो चुका है। पड़ोस में रहने वाले मामा उसकी देखरेख करते हैं। करीब तीन माह पहले युवती की इंस्टाग्राम पर राहुल शर्मा नाम के व्यक्ति से दोस्ती हुई थी। धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला प्रेम-प्रसंग में बदल गया। खुद को राहुल शर्मा बताने वाला युवक विदिशा से भोपाल में रहने आ गया। पुताई का काम करता था वह नादरा बस स्टैण्ड के पास किराए के कमरे में रहता था और पुताई का काम करता था। हाल ही में उसने युवती पर शादी का दबाव बनाया। युवती ने शादी से मना किया तो आरोपित ने उसकी चैटिंग वायरल करने की धमकी दी। इससे डरी युवती उसकी बातों में आ गई। पुजारी नहीं होने से खुद ही कर ली शादी गुरुवार को युवक उसे इलाके के एक मंदिर में लेकर पहुंचा। पुजारी नहीं होने से दोनों ने खुद ही पाणिग्रहण संस्कार की औपचारिकता पूरी कर ली। इसके बाद आरोपित उसके घर में रहने लगा। इस बीच युवती के मामा ने उसकी पहचान के दस्तावेज मांगे तो वह आनाकानी करने लगा। सख्ती से पूछताछ की तो बोला- मेरा नाम सोहेल खान शक गहराने पर स्वजनों ने सख्ती से पूछताछ की तब उसने बताया कि वह विदिशा का रहने वाला सोहेल खान है। इसके बाद युवती के स्वजनों ने बजरंग दल के पदाधिकारियों को सूचना दी। वे युवक को पकड़कर थाने लेकर पहुंचे। पुलिस ने युवती के बयान दर्ज किए। आरोपित पर प्रकरण दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। recent visitors 36

आज सनराइजर्स हैदराबाद वर्सेस गुजरात टाइटंस भिड़ेगी, राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा मैच

नई दिल्ली सनराइजर्स हैदराबाद वर्सेस गुजरात टाइटंस आईपीएल 2025 का 19वां मैच आज यानी रविवार, 6 अप्रैल को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाना है। एसआरएच वर्सेस जीटी मैच भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान, पैट कमिंस और शुभमन गिल, आधा घंटा पहले यानी 7 बजे मैदान पर उतरेंगे। दोनों ही टीमों के लिए यह मैच अहम रहने वाला है। एक तरफ गुजरात टाइटंस की नजरें जीत की हैट्रिक लगाकर पॉइंट्स टेबल में पहला पायदान हासिल करने पर होगी। वहीं दूसरी तरफ हार की हैट्रिक लगा चुकी सनराइजर्स हैदराबाद जीत के ट्रैक पर लौटना चाहेगी। बल्लेबाजों के लिए जन्नत माने जाने वाली इस पिच पर आज भी रनों की बरसात देखने को मिल सकती है। अभी तक इस सीजन में यहां दो मैच खेले गए हैं और दोनों ही हाईस्कोरिंग रहे। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने 286 रन बनाए थे, जिसके जवाब में आरआर 242 रन बोर्ड पर लगाने में कामयाब रही थी। वहीं लखनऊ के खिलाफ मैच में हैदराबाद को भले ही हार मिली हो, मगर दोनों टीमों ने 190 रनों का आंकड़ा छुआ था। आज भी फैंस को एक हाईस्कोरिंग मैच देखने को मिल सकता है। सनराइजर्स हैदराबाद टीम: ट्रैविस हेड, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, नितीश कुमार रेड्डी, कामिंडु मेंडिस, हेनरिक क्लासेन (डब्ल्यू), अनिकेत वर्मा, पैट कमिंस (सी), हर्षल पटेल, सिमरजीत सिंह, मोहम्मद शमी, जीशान अंसारी, अभिनव मनोहर, वियान मुल्डर, जयदेव उनादकट, राहुल चाहर, एडम ज़म्पा, अथर्व तायदे, ईशान मलिंगा, सचिन बेबी गुजरात टाइटंस टीम: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), शेरफेन रदरफोर्ड, शाहरुख खान, राहुल तेवतिया, अरशद खान, राशिद खान, रविश्रीनिवासन साई किशोर, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, ईशांत शर्मा, ग्लेन फिलिप्स, अनुज रावत, महिपाल लोमरोर, वाशिंगटन सुंदर, जयंत यादव, करीम जानत, कुलवंत खेजरोलिया, गेराल्ड कोएत्ज़ी, मानव सुथार, कुमार कुशाग्र, गुरनूर बरार, निशांत सिंधु recent visitors 31

प्रदेश में ऐसी 14,986 भू-संपत्तियों की जांच होनी है, भोपाल के 81 गांवों में ऐसी 777 संपत्तियों का सत्यापन पूरा

भोपाल केंद्र सरकार के संशोधित वक्फ कानून के लागू होने से पहले ही मध्य प्रदेश में वक्फ की संपत्तियों की जांच शुरू हो गई है। भोपाल के 81 गांवों में ऐसी 777 संपत्तियों का सत्यापन पूरा करा लिया गया है। प्रदेश में ऐसी 14,986 भू-संपत्तियों की जांच होनी है। संशोधित वक्फ कानून में वक्फ संपत्तियों का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। वहीं वक्फ बोर्ड के अधिकारों को सीमित किया गया है। बताया जा रहा है कि मप्र में इस बदलाव से अरबों रुपये की संपत्ति भी प्रभावित होगी। प्रदेश की 14,986 संपत्तियां वक्फ के नाम हैं। वे इसकी जद में आ रही हैं।   रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा सत्यापन अब उनका सत्यापन कर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। यह काम राजस्व विभाग की मदद से किया जाना है। राजधानी भोपाल में इसकी शुरुआत हो चुकी है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि जिले में वक्फ संपत्ति का सर्वे कराया जा रहा है, जिसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। भोपाल जिले के 81 गांवों में स्थित हैं वक्फ की संपत्तियां अकेले भोपाल जिले में ही प्लाट, मकान, जमीन व अन्य तरह की 777 वक्फ संपत्तियां हैं। हुजूर, बैरसिया और कोलार तहसील क्षेत्र के 81 गांवों में वक्फ संपत्ति का सत्यापन किया गया है। यह सर्वे क्षेत्र के पटवारियों से कराया गया है, जिसमें किरायेदारी और कब्जे का रिकार्ड दर्ज किया गया है। संशोधित कानून के तहत किए गए बदलाव को लेकर जांच की जा रही है। मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की संख्या 23,118 मप्र वक्फ बोर्ड का रिकॉर्ड बताता है कि प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की संख्या 23 हजार 118 है। इसमें मकान, दुकान और दूसरी सार्वजनिक व कारोबारी इमारतें शामिल हैं। कायदे से इनका प्रबंधन वक्फ बोर्ड करता है और इससे मिली आय को जमा करने की जिम्मेदारी भी उसी की है।   विवादित संपत्ति का सत्यापन वक्फ कानून में बदलाव के साथ ही बोर्ड अगर किसी संपत्ति पर दावा करता है तो उसका सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। वहीं, जिन संपत्तियों पर बोर्ड और किसी आम व्यक्ति के बीच विवाद चल रहा है तो उसमें भी सत्यापन को अनिवार्य किया जाएगा। recent visitors 26

राम मंदिर में सूर्य की किरणों से रामलला का हुआ अभिषेक, अयोध्या में रामनवमी पर जश्न का माहौल

अयोध्या अयोध्या में आज रामनवमी पर जश्न का माहौल है। श्रीराम के जन्मोत्सव के उल्लास में रामनगरी डूबी है। राम मंदिर में भोर में मंगला आरती हुई। इसके बाद सुबह 9.30 बजे से जन्मोत्सव के कार्यक्रम शुरू हुआ। सबसे पहले रामलला का अभिषेक हुआ। इसके बाद एक घंटे तक भगवान राम का श्रृंगार हुआ। ठीक 12 बजे घंटा-घड़ियाल व नगाड़े की थापों के मध्य रामलला का प्राकट्य हुआ। सोने के धागे से पिरोए पीत वस्त्र-प्राण प्रतिष्ठा के आभूषण को पहनाया गया। इस अलौकिक क्षण में भगवान के प्राकट्य की आरती हुई। भगवान को 56 प्रकार के भोग लगाए गए। राम मंदिर में महाआरती के साथ-साथ सूर्य किरणों से रामलला का अभिषेक किया गया। मुख्य पर्व पर इस सूर्याभिषेक का सजीव प्रसारण दूरदर्शन व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किया गया। प्रसारण के लिए जगह-जगह एलईडी टीवी व स्क्रीन लगाई गई है। सरयू में डुबकी के बाद दर्शन-पूजन कर रहे राम भक्त जन्मोत्सव के एक दिन पहले यानी शनिवार को ही लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंच चुके हैं । सरयू में डुबकी लगाकर मठ- मंदिरों में दर्शन- पूजन कर धार्मिक अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। श्रीराम के जन्म की महिमा का बखान करते हुए प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार यतींद्र मोहन मिश्र कहते हैं कि भगवान श्रीराम का जन्म मानवता की प्रतिष्ठा शक्ति के अनुसंधान विश्व कल्याण के लोकमंगल के लिए हुआ है। कहते हैं प्रतिवर्ष रामनवमी इसीलिए मनाते हैं कि समाज में एक ऐसे नायक की प्रतिष्ठा हमेशा होती रहे जिसने संयम ,त्याग ,बलिदान ,वीरता और अनुशासन के साथ मानवता के कल्याण के लिए कार्य किया। प्रसिद्ध कथावाचक प्रभंजनानंद शरण कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्री राम की महिमा को समझाते हुए कहते हैं कि राम नाम भगवत एक ऐसा साधन है जो मानव समाज को इस भवसागर से पार उतार देता है। राम नाम की महिमा गाकर भक्त प्रहलाद ,बालक ध्रुव, भक्त मीराबाई, संत रविदास और संत रहीम जैसे अनेक भक्त नाम का स्मरण कर साक्षात देवलोक पहुंच गए। हजारों मठ-मंदिरों में उत्सव का माहौल रामलला के जन्मोत्सव पर अयोध्या में मठ- मंदिरों में बधाई गाए जा रहें है। सूरदास द्वारा प्रचलित भजन ‘खेलत खात फिरै अंगना ,पगु पैजनिया अरु पीली कछोटी।काग के भाग कहा कहिए ,हरि हाथ से ले गयो माखन रोटी’ को गाकर श्रद्धालु आनंदित हो चरम की पराकाष्ठा पार कर रहे हैं। अयोध्या श्रद्धालुओं से खचाखच भर गई है। कथा प्रवचन व धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज से माहौल भक्ति रस में डूबा हुआ है। श्री राम जन्मभूमि के साथ ही हजारों मठ मंदिरों में उत्सव का माहौल चरम पर है। recent visitors 38

अमेरिका में जगुआर लैंड रोवर का एक्‍सपोर्ट रोक टाटा ने दिए संकेत?

नई दिल्‍ली. ब्रिटेन की जानी-मानी कार कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने अमेरिका को अपनी लग्जरी कारों का एक्‍सपोर्ट रोक दिया है। जेएलआर टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के नए टैरिफ के कारण लिया गया है। 7 अप्रैल से यह फैसला लागू होगा। ट्रंप सरकार ने कारों पर 25% का इम्पोर्ट टैक्स लगाया है। इससे जेएलआर को बड़ा झटका लगा है। कंपनी को अपनी योजना बदलनी पड़ रही है। भारत की टाटा मोटर्स के लिए जेएलआर बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले साल मार्च में जेएलआर ने दुनियाभर में लगभग 4,30,000 गाड़ियां बेचीं। इनमें से लगभग 1,07,500 गाड़ियां उत्तरी अमेरिका में बेची गईं। टाटा मोटर्स ने वर्ष 2008 में फोर्ड मोटर्स से जेएलआर का अधिग्रहण किया था। जेएलआर ने अमेरिका को गाड़ियां भेजना इसलिए रोका है क्योंकि अमेरिका ने इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। इससे कंपनी को नुकसान हो रहा है। कंपनी को पहले से ही वित्तीय समस्याएं हो रही हैं। जनवरी में कंपनी का मुनाफा 17% गिर गया था। इसकी वजह मांग में कमी और खर्चों में बढ़ोतरी है। अमेरिका में कारों पर 25% इम्पोर्ट ड्यूटी अमेरिका में कारों पर 25% इम्पोर्ट ड्यूटी 3 अप्रैल से लागू हो गई है। जेएलआर अब खर्चों को कम करने के तरीके खोज रही है। ब्रिटेन में कंपनी के 38,000 कर्मचारी हैं। कंपनी ट्रंप के ट्रेड वॉर से होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर रही है। 2 अप्रैल को जेएलआर ने एक बयान में कहा, 'हमारे लग्जरी ब्रांड पूरी दुनिया में पसंद किए जाते हैं और हमारा कारोबार मजबूत है। हम बाजार की बदलती स्थितियों के अनुसार काम करने के आदी हैं। हमारी प्राथमिकता अब दुनिया भर में अपने ग्राहकों को सेवाएं देना और अमेरिका के साथ नए व्यापार नियमों का पालन करना है।' ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत जेएलआर का यह फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत है। ट्रंप की रेसिप्रोकल ट्रेड पॉलिसी के कारण ऑटो कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन बदलनी पड़ रही है। टाटा मोटर्स की जेएलआर अब मुश्किल दौर से गुजर रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय कार बिक्री की रणनीतियां बदल सकती हैं। जेएलआर के सामने कई चुनौतियां हैं। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से गाड़ियों की कीमत बढ़ जाएगी। इससे अमेरिका में जेएलआर की गाड़ियों की मांग कम हो सकती है। कंपनी को अब नए बाजार खोजने होंगे और खर्चों को कम करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि जेएलआर इस मुश्किल परिस्थिति से कैसे निपटती है। कंपनी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा ताकि वह बाजार में बनी रहे। ट्रंप के फैसले से न केवल जेएलआर, बल्कि अन्य ऑटो कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है। जेएलआर के फैसले से यह पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कितना जटिल है। एक देश की पॉलिसी दूसरे देशों पर भी असर डालती है। कंपनियों को हमेशा बदलती हुई परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए। मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार जेएलआर का कहना है कि वह मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार है। कंपनी अपने ग्राहकों को अच्छी सेवाएं देना जारी रखेगी। जेएलआर को उम्मीद है कि वह जल्द ही इस मुश्किल दौर से बाहर निकल जाएगी। कंपनी प्रवक्ता ने कहा, 'अमेरिका जेएलआर के लक्जरी ब्रांडों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। हम अपने व्यापारिक भागीदारों के साथ नई व्यापारिक शर्तों की दिशा में काम कर रहे हैं। हम अपनी अल्पकालिक कार्रवाइयों को लागू कर रहे हैं। इसमें अप्रैल में निर्यात खेप रोकना भी शामिल है। हम अपनी मध्यावधि से लेकर दीर्घावधि तक की योजनाएं बना रहे हैं।' प्रवक्ता ने कहा, 'हमारी प्राथमिकताएं अब दुनिया भर में अपने ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने और अमेरिका की नई व्यापारिक शर्तों को संबोधित करने की हैं।' recent visitors 33

मुख्यमंत्री यादव ने दिल्ली में ‘विक्रमादित्य महानाट्य’ के संबंध में पत्रकारों को संबोधित किया, 12 से 14 अप्रैल को होगा मंचन

नई दिल्ली/ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सुशासन को ध्यान में रखते हुए विभागवार अपने कार्यों को जारी रखे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्येय वाक्य 'विरासत से विकास की ओर' हमारे लिए एक पाथेय की तरह सिद्ध हो रहा है। हम विकास कार्यों में विरासत को महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। मध्यप्रदेश में विरासत की बात करें तो 2000 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का शासन काल सुशासन व्यवस्था के एक आदर्श उदाहरण के रूप में परिलक्षित होता है। विक्रमादित्य की जीवन के विविध पक्षों को देखें तो उनकी एक अलग प्रतिमा बनती है। वे एकमात्र ऐसे शासक थे, जिनके जीवन के विविध प्रसंगों से आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। विक्रमादित्य के शासन काल की तुलना सुशासन से करना सर्वश्रेष्ठ तुलना है। उनके द्वारा किए गए कार्य और प्रयोग आज भी प्रासंगिक हैं।     आज हमारे पास हिजरी और विक्रम संवत हैं। इसमें विक्रम संवत उदार परंपरा को लेकर चलने वाला संवत है, अर्थात संवत चलाने वाले के लिए शर्त है कि जिसके पास पूरी प्रजा का कर्ज चुकाने का सामर्थ्य है, वो संवत प्रारंभ कर सकता है। यानी कि शासक के पास इतना धन हो कि वह प्रजा को कर्ज मुक्त कर दे और उद्योग-व्यापार के लिए भी इतना धन उपलब्ध कराए कि उद्योगपति इसे चलाने के लिए भविष्य में कर्ज न लें। यह बात दुनिया के लिए अविश्वसनीय हो सकती है। लेकिन सम्राट विक्रमादित्य के कार्यकाल में यह हुआ।     1 अप्रैल से विक्रम संवत 2082 का शुभारंभ हुआ है। हमारे यहां संवत के भी 60 अलग-अलग प्रकार के नाम हैं। इस तरह से 2082 को धार्मिक अनुष्ठानों के संकल्प में सिद्धार्थ नाम दिया गया है। अगर अंग्रेजी के 2025 को कुछ और बोला जाए तो यह संभव नहीं है, लेकिन विक्रम संवत में वर्ष के नाम के भाव अलग-अलग होते हैं। इन 60 नामों का चक्रीकरण बदलता रहता है।     पहली बार सम्राट विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था में ही नवरत्नों का समूह देखने को मिलता है। उन्होंने नवरत्नों के समूह में प्रत्येक को 5 से 7 मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी थी। विक्रमादित्य ने अपने देश को गुलामी की दास्तां से मुक्त कराया। जब उन्होंने अपने पिता के बाद शासन संभाला तो उनके नवरत्नों में सभी अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ थे।     उन्होंने सुशासन की व्यवस्था स्थापित की। उनके मंत्रि-परिषद में शामिल नवरत्न इनते सक्षम थे कि किसी कारण से विक्रमादित्य उपस्थित न हो तब भी शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती थी। 300 साल पहले शिवाजी महाराज के अष्ट प्रधान की पद्धति में यही व्यवस्था नजर आती है। उनके राज्य में नहीं होने पर भी शासन व्यवस्था चलती रही।     सम्राट विक्रमादित्य दानशीलता, वीरता, प्रजा का ध्यान रखने में अग्रणी थे। विक्रम-बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां हम सभी ने सुनी हैं। विक्रमादित्य ने शासन की इनती अच्छी व्यवस्था स्थापित कर ली थी कि हर राजा उनके जैसा शासन करना चाहता था।     विक्रमादित्य का मूल नाम सहशांक था, लेकिन जो उल्टे क्रम को सूत्र में बदल दे, वो विक्रम और जो सूर्य के समान प्रकाशमान रहे वो आदित्य। विक्रमादित्य एक उपाधि है, जो उन्हें मिली थी। कई राजाओं ने स्वयं को विक्रमादित्य से जोड़ा है, लेकिन आदि विक्रमादित्य एक ही हैं और उनकी राजधानी उज्जैन थी।     विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था सुशासन का आधार है। वे एक आदर्श, वीर, जनकल्याणकारी, जनहितैषी सम्राट थे। जिन्होंने कभी खुद को राजा कहलाना पसंद नहीं किया। उन्होंने अपने राज्य में 2000 साल पहले गणतंत्र की स्थापना की थी।     विक्रमादित्य के विराट व्यक्तित्व को सबके सामने लाने के लिए महानाट्य की कल्पना की गई है। जब इसका मंचन दिल्ली में 12, 13 और 14 अप्रैल को लालकिले पर होगा तो इसमें हाथी, घोड़ा, पालकी के साथ 250 से ज्यादा कलाकार अभिनय करते नजर आएंगे।     महानाट्य में शामिल कलाकार निजी जीवन में अलग-अलग क्षेत्र के प्रोफेशनल्स हैं। महानाट्य में वीर सर समेत सभी रस देखने को मिलेंगे। यह गौरवशाली इतिहास को विश्व के सामने लाने का मध्यप्रदेश सरकार का एक प्रयास है। इस कालजयी रचना को सबसे सामने रखने में दिल्ली सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। इससे पूर्व हैदराबाद में विक्रमादित्य महानाट्य का आयोजन हो चुका है।     विक्रमादित्य ने अपने जीवनकाल में मथुरा और अयोध्या जैसे 300 से अधिक स्थानों पर मंदिरों का निर्माण उन्होंने कराया था। विक्रमादित्य काल के जैसे प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में गरीबों को मकान बनाने में मदद की जा रही है। देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सक्षम और सशक्त बन रहा है। यही तो रामराज्य है, जो विक्रमादित्य काल में था। recent visitors 28