वैशाली नदी के जीर्णोद्धार को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिया नोटिस

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने वैशाली नदी मुरार को लेकर दायर जनहित याचिका में सुनवाई की है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर निगम को नोटिस जारी कर नदी जीर्णोद्धार से जुड़ी जानकारी मांगी है. याचिकाकर्ता ने इस जनहित याचिका के जरिए मांग की है कि नदी के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है जिसके लिए अब नगर निगम की सहायता की आवश्यकता है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से भी कहा है कि नगर निगम इस मामले में सहयोग करेगी. जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं. वहीं इस काम को याचिकाकर्ता भी गंभीरता से करते रहे, जैसे अभी कर रहे हैं. अब इस मामले की सुनवाई 5 मई को होगी. recent visitors 24

जापान की बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की जापान की 2011 की सुनामी से तीन गुना ज्यादा तबाही जुलाई में

टोक्यो  जापान की पूर्व आर्टिस्ट और भविष्यवक्ता रयो तत्सुकी इन दिनों चर्चा में है। रयो को उनकी सटीक भविष्यवाणियां करने के लिए पहले ही पहचान मिल चुकी है। रयो की हालिया चर्चा की वजह ये है कि उन्होंने इस साल एक बड़ी तबाही की भविष्यवाणी की है। जापान की बाब वेंगा कही जाने वाली रयो के बारे में दावा है कि 1980 के दशक से उन्हें दुनिया में होने वाली आपदाओं के सपने आ रहे थे। इनको उन्होंने एक डायरी में दर्ज कर दिया। साल 1999 में 'द फ्यूचर आई सॉ' नाम से इसे प्रकाशित किया गया। इसे उनकी भविष्यवाणियों की किताब कहा सकता है। इस किताब मेंदर्ज उनकी कई भविष्यवाणियां सच होने का दावा किया जाता है। रयो ने 'द फ्यूचर आई सॉ' में इस साल जुलाई में जापान और आसपास के देशों में एक बड़ी सुनामी आने और इससे भारी तबाही होने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जापान के दक्षिण में समुद्र उबल रहा है और वहां बड़े बुलबुले उठ रहे हैं। यह पानी के नीचे ज्वालामुखी फटने का संकेत हो सकता है। रयो की मानें तो इस साल आने वाली ये सुनामी बेहद भयावह होगी। ये 13 साल पहले 2011 मेंआई सुनामी से तीन गुना बड़ी सुनामी होगी। कैसे मिली रयो को पहचान रयो तत्सुकी पहले कॉमिक्स बनाती थीं लेकिन बाद में अपनी भविष्यवाणियों के लिए उनको दुनियाभर में पहचान मिली। उनकी भविष्यवाणियां लोगों को हैरान भी करती हैं और डराती भी हैं। पहले भी तत्सुकी के कई सपने सच हो चुके हैं। इसलिए लोग उनकी नई चेतावनी को गंभीरता से ले रहे हैं। नोस्ट्रैडमस और बाबा वेंगा जैसे कई भविष्यवक्ताओं की लिस्ट में अब रयो तातसुकी का नाम जुड़ गया है। साल 1991 में रयो ने क्वीन के गायक फ्रेडी मर्करी के बारे में बुरा सपना देखा था। कुछ महीनों बाद उनकी बीमार होकर मौत हो गई। 1995 में उन्होंने कोबे, जापान में एक बड़े भूकंप की भविष्यवाणी की थी। ये भी सच साबित हुया और 6,000 से अधिक लोग मारे गए। उनकी सबसे प्रसिद्ध भविष्यवाणी 2011 में आई थी। उन्होंने कहा था कि मार्च 2011 में एक बड़ी आपदा आएगी। ये सही साबित हुआ, जब जापान ने तोहोकू भूकंप और सुनामी का सामना किया । भविष्यवाणी पर क्यो बोले एक्सपर्ट तत्सुकी की नई भविष्यवाणी यह है कि जुलाई 2025 में सुनामी बड़ी तबाही मचाएगी। यह सुनामी जापान और आसपास के देशों को प्रभावित कर सकती है। फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया और जापान के कुछ तटीय इलाके इससे प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस साल ऐसी सुनामी आने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ऐसे में जुलाई में क्या होगा, ये आने वाला वक्त ही तय करेगा। recent visitors 24

तमिलनाडु को रामनवमी पर मिलेगी बड़ी सौगात! PM Modi करेंगे नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन

 रामेश्वरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 अप्रैल, रामनवमी को तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं. रामनवमी के अवसर पर दोपहर करीब 12 बजे वे भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल – नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और सड़क पुल से एक ट्रेन और एक जहाज को रवाना करेंगे तथा पुल के संचालन को देखेंगे. इसके बाद दोपहर करीब 12:45 बजे वे रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे. रामेश्वरम में दोपहर करीब 1:30 बजे वे तमिलनाडु में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और रामेश्वरम-तांबरम (चेन्नई) नई ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे. रामायण में वर्णित अख्यान के अनुसार रामेश्वरम के पास राम सेतु का निर्माण धनुषकोडी से शुरू हुआ था. वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल का पीएम करेंगे उद्घाटन रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला यह पुल वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में खड़ा है. इसे 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया है. इसकी लंबाई 2.08 किमी है, इसमें 99 स्पैन और 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है जो 17 मीटर की ऊंचाई तक उठता है. स्टेनलेस स्टील सुदृढीकरण, उच्च श्रेणी के सुरक्षात्मक पेंट और पूरी तरह से वेल्डेड जोड़ों के साथ निर्मित, पुल में अधिक स्थायित्व और कम रखरखाव की आवश्यकता है. भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए इसे दोहरी रेल पटरियों के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक विशेष पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग इसे जंग से बचाती है, जिससे कठोर समुद्री वातावरण में दीर्घायु सुनिश्चित होती है. 8300 करोड़ की परियोजना की देंगे सौगात प्रधानमंत्री तमिलनाडु दौरे के दौरान राज्य में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न सड़क और रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखेंग. इन परियोजनाओं में एनएच-332 के 29 किलोमीटर लंबे विलुप्पुरम-पुडुचेरी खंड को चार लेन का बनाने का काम, एनएच-40 के 28 किलोमीटर लंबे वालाजापेट-रानीपेट खंड को चार लेन का बनाने का शिलान्यास और एनएच-32 के 57 किलोमीटर लंबे पूंडियनकुप्पम-सत्तनाथपुरम खंड और एनएच-36 के 48 किलोमीटर लंबे चोलापुरम-तंजावुर खंड को राष्ट्र को समर्पित करना शामिल है. ये राजमार्ग कई तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों को जोड़ेंगे, शहरों के बीच की दूरी कम करेंगे और मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बंदरगाहों तक तेजी से पहुंच को सक्षम करेंगे, इसके अलावा स्थानीय किसानों को कृषि उत्पादों को नजदीकी बाजारों तक पहुंचाने और स्थानीय चमड़ा और लघु उद्योगों की आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने में सशक्त बनाएंगे. पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है पंबन यह नया पुल 2,078 मीटर लंबा और पुराने पुल की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और मजबूत बनाया गया है. यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है, जो समुद्री यातायात को सुगम बनाने के लिए ऊपर उठ सकता है. इसका निर्माण बेहतर सुरक्षा और अधिक भार सहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे यह भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में सक्षम होगा. 1914 में बना था पुराना पंबन पुल इससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, "1914 में निर्मित पुराने पंबन रेल पुल ने 105 वर्षों तक मुख्य भूमि को रामेश्वरम से जोड़ा. दिसंबर 2022 में जंग लगने के कारण इसे बंद कर दिया गया, जिसने आधुनिक नए पंबन पुल के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत करेगा!" इस पुल के चालू होने से रामेश्वरम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी. साथ ही, यह पुल दक्षिण भारत के रेलवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत करेगा. इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन राम नवमी जैसे शुभ दिन पर किया जाना इसे और भी खास बना देता है. recent visitors 54

पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के छह शहरों में 582 ई-बसों(E-Bus) का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इन बसों का संचालन नगरीय निकायों को महंगा पड़ सकता है क्योंकि इनके संचालन के लिए जीसीसी यानी ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रेक्ट मॉडल अपनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बस, ड्राइवर, कंडक्टर और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही रहेगी। सरकार केवल प्रति किलोमीटर के हिसाब से उसे भुगतान करेगी। प्रतिदिन न्यूनतम 180 किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा। इंदौर में अभी एक एजेंसी 65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से ई-बसें संचालित कर रही है।  भोपाल की सड़कों पर अगले छह महीनों में दो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। पहला बदलाव जुलाई तक भोपाल मेट्रो की शुरुआत है। दूसरा बदलाव शहर की बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का जुड़ना है। पीएम ई-बस योजना के तहत राज्य के 6 शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर) में पीपीपी मॉडल पर 552 शहरी ई-बसें चलाई जाएंगी। इसे पिछले फरवरी में मंजूरी मिली थी। शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. परीक्षित जाडे ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि हम उम्मीद करते हैं कि पीएम ई-बस योजना के तहत ये इंट्रासिटी बसें 2025 के मध्य या अंत तक शुरू हो जाएंगी। इस बदलाव का उद्देश्य हजारों छात्रों और अन्य सार्वजनिक परिवहन उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन के वित्तीय बोझ को कम करना है। महामारी की समाप्ति के बाद से ये लोग सब्सिडी वाले बस पास का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।  यदि नई ई-बसों का कॉन्ट्रेक्ट 60 रुपए प्रति किलोमीटर में होता है तो एक बस को 180 किमी का प्रतिदिन 10800 रुपए का भुगतान होगा, चाहे उसमें सवारियां बैठे या नहीं। इस प्रकार बसों का संचालन करने वाली एजेंसी को 582 बसों का प्रतिदिन 62 लाख 85 हजार 600 रुपए मिलेगा। एक महीने में यह राशि 18 करोड़ 85 लाख 68 हजार रुपए होगी। टेंडर जारी पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी। इसके लिए कंपनी की तलाश शुरू हो गई है। रेट तय करने के लिए सरकार ने टेंडर जारी किया है। जो कंपनी सबसे कम रेट देगी उसे संचालन का काम मिलेगा। यह सुविधा तीन माह के अंदर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कुल 582 ई-बसें चलेंगी। इनमें से 472 बसें नौ मीटर वाली होंगी जिनमें लगभग 32 सीट होंगी। जबकि 110 बसें सात मीटर वाली होंगी जो 21 सीटर होंगी। कहां कितनी ई-बसें चलेंगी     भोपाल – 100     इंदौर – 150     जबलपुर – 100     उज्जैन – 100     ग्वालियर – 100     सागर – 32 टिकट एजेंसी का जिम्मा निकाय का इन बसों के चार्जिंग की व्यवस्था भी मिलजुलकर की जा रही है। चार्जिंग स्टेशन और डिपो राज्य सरकार बनवाएगी। इसकी 60 फीसदी राशि केन्द्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य को देना होगी। सरकार सिर्फ जमीन और इंफ्रा विकसित करेगी। चार्जिंग गन बसों का संचालन करने वाली कंपनी ही लगाएगी और बिजली का बिल भी कंपनी ही चुकाएगी। ऐसे 11 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जबकि टिकटिंग एजेंसी संबंधित निकाय द्वारा तय की जाएगी। टिकट का पैसा निकाय के पास जाएगा, इसी से बसों का भुगतान होगा। केंद्र 12 साल तक राशि देगी बसों के संचालन के लिए प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान होगा। इसके लिए केंद्र सरकार प्रति किलोमीटर के अनुसार 22 रुपए देगी। केंद्र यह राशि 2037 तक यानी 12 साल तक देगी। जो राशि बचेगी वह किराए से कवर होगी। जहां किराए से कवर नहीं हो पाएगी उसका भुगतान संबंधित नगरीय निकाय को करना होगा। तीन महीने का अग्रिम भुगतान केंद्र ने इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की है कि ई-बसों को नियमित भुगतान होता रहे। इसके लिए बैंक में एक एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा। इसमें राज्य सरकार को कम से कम तीन माह का एडवांस पेमेंट जमा कराना होगा। यदि निकाय भुगतान करने में विफल रहते हैं तो इस अकाउंट में से संचालनकर्ता कंपनी को भुगतान हो जाएगा। बीसीएलएल को मिलेंगी 100 ई-बसें सूत्रों के अनुसार एमपी यूएडीडी यात्रियों की यात्रा लागत को सब्सिडी देने के लिए एक स्थिरता मॉडल पर काम कर रहा है। इसके साथ ही बेड़े की व्यवहार्यता को भी बनाए रखा जाएगा। भोपाल नगर निगम की सहायक कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही है। यह राज्य सरकार के समर्थन और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर निर्भर है। बीसीएलएल को इस योजना के तहत 100 ई-बसें मिलेंगी। एमपी नगर में 5000 से ज्यादा छात्रों का आना जाना महामारी से पहले भोपाल में 35,000 से अधिक बस यात्री मेयर के बस पास से असीमित यात्रा का लाभ उठाते थे। मिसरोद से एमपी नगर आने-जाने वाले जेईई कोचिंग के छात्र सार्थक और हर्षित ने इस लाभ का अनुभव कभी नहीं किया। एमपी नगर में लगभग 5,000 छात्र 5 किमी के दायरे में कोचिंग क्लासेस आते-जाते हैं। ये छात्र प्रति माह यात्रा पर अनुमानित 35 लाख रुपए खर्च करते हैं। प्रति छात्र औसतन 25 रुपये प्रतिदिन खर्च होता है। महामारी से पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मेयर पास के समान एक स्टूडेंट बस पास इन यात्रा लागतों को आधे से भी कम कर सकता है। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी सौगात हर्षित ने कहा कि अगर स्टूडेंट पास लागू होता है, तो केवल कोचिंग क्लासेस के लिए छात्रों की बचत 50% से अधिक हो जाएगी। जिन छात्राओं की कोचिंग क्लासेस देर शाम को खत्म होती हैं, उन्हें परिवहन पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जल्दी आने-जाने के लिए ई-रिक्शा लेने से खर्च तीन गुना बढ़ जाता है। इससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है। भोपाल की मेयर मालती राय से संपर्क करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। recent visitors 48

इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर IMR तैयार किया जा रहा, पर्यावरण और कनेक्टिवटी पर रहेगा जोर

इंदौर  इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) तैयार किया जा रहा है। कंसल्टेंट कंपनी ने प्राथमिक रिपोर्ट पेश कर दी है, जिसमें क्षेत्र के इकट्ठा हुए डाटा के आधार पर खाका खींचा गया है। अब उसमें मंत्री व कलेक्टर के सुझाव को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद कंपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करेगी। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुस के हजारों गांव जुड़ेंगे इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर की 29 तहसीलों के 1756 गांवों को मिलाकर 2051 के हिसाब से इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्लान तैयार किया जा रहा है। 9336 वर्ग किमी एरिया में कनेक्टिविटी, उद्योग और पर्यावरण का संतुलन बनाया जाएगा ताकि बेतरतीब विकास पर नियंत्रण किया जा सके। इसको तैयार करने का काम इंदौर की मेहता एंड एसोसिएट कंपनी को दिया गया है, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर दी है। दूसरी रिपोर्ट के लिए तैयारी शुरू प्लान तैयार करने के काम में कंपनी के डेढ़ दर्जन से अधिक विशेषज्ञ पिछले दो माह से जुटे हुए हैं जिन्होंने सभी जिलों से 26 बिंदुओं पर डाटा इकट्ठा किया। बिखरी हुई जानकारी होने की वजह से टीम को पसीने छूट गए। फिर भी बाद में शामिल हुए शाजापुर की जानकारी पूरी नहीं आई है। हालांकि मोटी मोटी जानकारी के आधार पर पूरे क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है जिसे कलेक्टर आशीष सिंह को सौंप दी गई। अब कम्पनी ने दूसरे चरण का काम शुरू कर दिया है जिसमें भौगोलिक स्थिति के साथ क्षेत्र की विशेषता और सामने आए डाटा के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है तो साथ में मैपिंग भी हो रही है। दूसरी रिपोर्ट में रीजन की पिक्चर सामने आ जाएगी। 1. इंदौर जिला क्षेत्रफल – 3901.6 वर्ग किमी प्रतिशत – 100 तहसील – बिचौली हप्सी, देपालपुर, महू, हातोद, इंदौर, कनाड़िया, खुड़ैल, मल्हारगंज, राऊ और सांवेर गांव – 690 2. उज्जैन जिला क्षेत्रफल – 2740.5 वर्ग किमी प्रतिशत – 44.99 तहसील – बड़नगर, घटिया, खाचरौद, कोठीमहल, नागदा, तराना, उज्जैन, उज्जैन नगर और उन्हेल गांव – 512 3. देवास जिला क्षेत्रफल – 2086.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 29.72 तहसील – बागली, देवास, देवास नगर, हाटपिपल्या, सोनकच्छ और टोक खुर्द, गांव – 444 4. धार जिला क्षेत्रफल – 574.4 वर्ग किमी प्रतिशत – 7.04 तहसील – बदनावर, धार और पीथमपुर, गांव – 107 5. शाजापुर जिला क्षेत्रफल – 33.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 0.54 तहसील – शाजापुर, गांव – 03 मंत्री और कलेक्टर ने दिए सुझाव पिछले माह इंदौर कलेक्टोरेट में आइएमआर में शामिल जिलों के संभागायुक्त, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। प्रेजेंटेशन देकर उन्हें जानकारी दी गई तो उस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों ने मौके पर ही सुझाव दिए थे तो बाकी से लिखित में सुझाव अपेक्षित किए गए थे। उसमें मंत्री तुलसीराम सिलावट व देवास कलेक्टर ने सुझाव दिए हैं। अब उन पर विचार किया जाएगा।     recent visitors 33

उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा, सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली

उज्जैन  मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा। वैसे इसके लिए अभी तीन वर्ष का समय है, लेकिन सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली है। इसी के चलते उज्जैन के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव जैसे बड़े अधिकारियों ने समीक्षा बैठक की है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा। recent visitors 28

गोवा घूमने जानें वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर से दूसरी सीधी फ्लाइट,15 अप्रैल से होगी शुरू, 4 हजार 376 रुपए है बेसिक किराया

इंदौर 15 अप्रैल से इंदौर और गोवा के बीच नई फ्लाइट चलाई जाएगी। फ्लाइट का संचालन एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा किया जाएगा। फ्लाइट के शुरू हो जाने से इंदौर से गोवा जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा हो जाएगी। न सिर्फ गोवा, बल्कि गोवा के आसपास पहुंचने के लिए यात्रियों को इंदौर से अब ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, इंडिगो एयरलाइंस द्वारा पहले ही गोवा के लिए फ्लाइट संचालित की जा रही है। मौजूदा फ्लाइट का समय इंदौर से प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे है, जबकि नई फ्लाइट का समय गोवा से इंदौर आकर दोपहर 12:20 से इंदौर से गोवा के लिए रवाना रखा गया है। हालांकि, गोवा जाने वाली फ्लाइट में सिर्फ 10 मिनट का अंतराल ही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई फ्लाइट सुबह गोवा से इंदौर आकर दोपहर 12:20 इंदौर से गोवा के लिए रवाना होगी। ऐसे में 10 मिनट के अंतराल में इंदौर एयरपोर्ट से दो फ्लाइट गोवा के लिए उड़ान भरेंगी। वहीं, इंदौर से अब हर दिन आने-जाने में 90 से ज्यादा फ्लाइट हो गई हैं। ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश (टाफी) अध्यक्ष टीके जोस ने बताया कि इंदौर से गोवा के लिए 12 महीने यात्री जाते हैं। पहले मानसून सीजन में लोग गोवा जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। सीजन के समय तो कई बार एक ओर का किराया 20 हजार तक पहुंच जाता है। कोविड के पहले एयर एशिया भी इंदौर से गोवा के लिए फ्लाइट का संचालन करती थी, लेकिन बाद में यह उड़ान बंद हो गई और एयर एशिया ने इंदौर से संचालन ही बंद कर दिया। बता दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस गोवा के लिए जो उड़ान शुरू करेगी, उसका संचालन नार्थ गोवा के मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होगा। अभी इंडिगो इंदौर से गोवा के बीच में एक डेली उड़ान का संचालन करती है। यह उड़ान साउथ गोवा के डेंबोलिंब एयरपोर्ट के लिए संचालित होती है। कंपनी ने तीन कैटेगरी में बुकिंग शुरू की इंदौर-गोवा फ्लाइट की बुकिंग कंपनी ने तीन कैटेगरी में शुरू की है। पहली कैटेगरी एक्सप्रेस लाइट है, जिसका किराया 4 हजार 376 रुपए है। वहीं दूसरी कैटेगरी एक्सप्रेस वैल्यू है जिसका किराया 4 हजार 902 रुपए है। वहीं तीसरी कैटेगरी एक्सप्रेस फ्लेक्स है जिसका किराया 5 हजार 636 रुपए है। यह रहेगा शेड्यूल – गोवा-इंदौर : सुबह 10:05 बजे गोवा से रवाना होगी। फ्लाइट 11:40 बजे इंदौर पहुंचेगी। – इंदौर-गोवा : दोपहर 12:20 बजे रवाना होगी। दोपहर 3:45 बजे गोवा पहुंचेगी। इंदौर एयरपोर्ट पर चलने वाली फ्लाइट्स की संख्या 90 से ज्यादा इंदौर एयरपोर्ट से अब गोवा के लिए दो फ्लाइट्स उड़ान भरेंगी। वहीं, अब इस नई फ्लाइट के चलने से इंदौर एयरपोर्ट पर चलने वाली फ्लाइट्स की संख्या 90 से ज्यादा हो गई है। इसे लेकर ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष टीके जोशी ने जानकारी दी कि इंदौर से गोवा जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है, और 12 महीने यात्री आते-जाते रहते हैं। हालांकि पहले मानसून सीजन में लोग गोवा जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब लोग मानसून सीजन में भी गोवा के लिए जाते हैं। सीजन के समय तो कई बार एक ओर का किराया ही बढ़कर ₹20,000 तक पहुंच जाता है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट दरअसल, कोविड से पहले एयर एशिया की भी एक फ्लाइट इंदौर से गोवा के लिए चलाई जाती थी, लेकिन इस फ्लाइट को बाद में बंद कर दिया गया और एयर एशिया की कोई भी फ्लाइट इंदौर से नहीं चलाने का निर्णय लिया गया। जानकारी दे दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस गोवा के लिए जो उड़ान शुरू करने जा रही है, इस फ्लाइट का संचालन नॉर्थ गोवा के मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से किया जाएगा। हालांकि, अभी इंडिगो की एक फ्लाइट इंदौर से गोवा के बीच उड़ान भरती है, जो कि साउथ गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट के लिए संचालित की जाती है। recent visitors 42